प्रश्न 1: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भक्ति आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत को सबसे बेहतर रूप में व्यक्त करता है?
-
A.
इसने भारत में केवल एक धार्मिक परंपरा स्थापित की
-
B.
इसने सभी सामाजिक असमानताओं को समाप्त कर दिया
-
C.
इसका प्रभाव केवल मध्यकाल तक सीमित रहा
-
D.
इसने भारतीय समाज में भक्ति, क्षेत्रीय संस्कृति और सामाजिक समावेशन की दीर्घकालिक परंपराओं को मजबूत किया
✓
सही उत्तर:
D
— इसने भारतीय समाज में भक्ति, क्षेत्रीय संस्कृति और सामाजिक समावेशन की दीर्घकालिक परंपराओं को मजबूत किया
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन की विरासत भारतीय समाज में आज भी दिखाई देती है—चाहे वह क्षेत्रीय साहित्य हो, लोकभक्ति परंपराएँ हों या सामाजिक समरसता की अवधारणा। इसका प्रभाव धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक सभी स्तरों पर दीर्घकालिक रहा।
प्रश्न 2: “भक्ति आंदोलन को मध्यकालीन भारत में सांस्कृतिक पुनर्संरचना (Cultural Reconfiguration) की प्रक्रिया के रूप में देखा जा सकता है” — इस कथन का सबसे उपयुक्त कारण क्या है?
-
A.
इसने केवल धार्मिक अनुष्ठानों को बढ़ावा दिया
-
B.
इसने भाषाई, सामाजिक और धार्मिक स्तरों पर नए सांस्कृतिक संबंध विकसित किए
✓
-
C.
इसने केवल राजकीय शक्ति को मजबूत किया
-
D.
इसने क्षेत्रीय विविधताओं को समाप्त कर दिया
सही उत्तर:
B
— इसने भाषाई, सामाजिक और धार्मिक स्तरों पर नए सांस्कृतिक संबंध विकसित किए
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने क्षेत्रीय भाषाओं, लोकसाहित्य, सामाजिक समावेशन और धार्मिक समन्वय को बढ़ावा दिया। इससे भारतीय संस्कृति में नए प्रकार के सामाजिक-सांस्कृतिक संबंध विकसित हुए।
प्रश्न 3: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) भक्ति आंदोलन ने महिलाओं को धार्मिक अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान किया। (2) मीराबाई का काव्य व्यक्तिगत भक्ति और सामाजिक बंधनों से मुक्ति दोनों को व्यक्त करता है।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
✓
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
C
— 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):मीराबाई भक्ति आंदोलन में महिला धार्मिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। उनके काव्य में कृष्णभक्ति के साथ-साथ सामाजिक बंधनों के प्रति प्रतिरोध भी दिखाई देता है।
प्रश्न 4: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
-
A.
कबीर — बीजक
-
B.
सूरदास — सूरसागर
-
C.
गुरु नानक — विनय पत्रिका
✓
-
D.
जयदेव — गीतगोविंद
सही उत्तर:
C
— गुरु नानक — विनय पत्रिका
व्याख्या (Explanation):“विनय पत्रिका” तुलसीदास की रचना है, न कि गुरु नानक की। अन्य सभी युग्म सही हैं।
प्रश्न 5: “भक्ति आंदोलन की सफलता का प्रमुख कारण उसकी भाषाई रणनीति थी” — इस कथन का सबसे उपयुक्त आधार क्या है?
-
A.
संतों ने केवल संस्कृत में रचनाएँ कीं
-
B.
संतों ने शासकीय अभिलेखों का प्रयोग किया
-
C.
संतों ने लोकभाषाओं के माध्यम से व्यापक जनसमूह तक पहुँच बनाई
✓
-
D.
संतों ने विदेशी भाषाओं को बढ़ावा दिया
सही उत्तर:
C
— संतों ने लोकभाषाओं के माध्यम से व्यापक जनसमूह तक पहुँच बनाई
व्याख्या (Explanation):भक्ति संतों ने अवधी, ब्रज, मराठी, पंजाबी और बंगाली जैसी लोकभाषाओं में रचनाएँ लिखीं, जिससे उनका संदेश जनसाधारण तक पहुँचा। यही इसकी व्यापक लोकप्रियता का प्रमुख कारण बना।
प्रश्न 6: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) भक्ति आंदोलन के कई संतों ने जाति-आधारित भेदभाव की आलोचना की। (2) भक्ति आंदोलन ने तत्कालीन सामाजिक संरचना को पूर्णतः समाप्त कर दिया।
-
A.
केवल 1
✓
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
A
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):कई भक्ति संतों ने जातिगत ऊँच-नीच का विरोध किया, परंतु आंदोलन तत्कालीन सामाजिक संरचना को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सका।
प्रश्न 7: भक्ति आंदोलन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सबसे अधिक उपयुक्त है?
-
A.
यह पूर्णतः राजनीतिक आंदोलन था
-
B.
इसने मध्यकालीन भारतीय समाज में वैकल्पिक नैतिक-सामाजिक विमर्श प्रस्तुत किया
✓
-
C.
इसका प्रभाव केवल धार्मिक दर्शन तक सीमित था
-
D.
यह केवल दक्षिण भारत की घटना थी
सही उत्तर:
B
— इसने मध्यकालीन भारतीय समाज में वैकल्पिक नैतिक-सामाजिक विमर्श प्रस्तुत किया
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने धार्मिक भक्ति के साथ-साथ सामाजिक समानता, नैतिकता और सांस्कृतिक समन्वय जैसे मुद्दों को भी उठाया। इसने वैकल्पिक सामाजिक विमर्श को जन्म दिया।
प्रश्न 8: इनमें से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? (1) रविदास — सामाजिक समता (2) तुलसीदास — रामभक्ति (3) चैतन्य महाप्रभु — गौड़ीय वैष्णव परंपरा
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):रविदास सामाजिक समानता के समर्थक थे। तुलसीदास रामभक्ति परंपरा के प्रमुख संत थे, जबकि चैतन्य महाप्रभु गौड़ीय वैष्णव परंपरा से जुड़े थे।
प्रश्न 9: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन “निर्गुण भक्ति” की वैचारिक विशेषता को सबसे बेहतर रूप में व्यक्त करता है?
-
A.
ईश्वर की प्राप्ति केवल वैदिक अनुष्ठानों से संभव है
-
B.
ईश्वर निराकार है और उसकी प्राप्ति आंतरिक भक्ति से संभव है
✓
-
C.
मूर्ति पूजा मोक्ष का अनिवार्य साधन है
-
D.
धार्मिक ज्ञान केवल संस्कृत ग्रंथों तक सीमित है
सही उत्तर:
B
— ईश्वर निराकार है और उसकी प्राप्ति आंतरिक भक्ति से संभव है
व्याख्या (Explanation):निर्गुण भक्ति परंपरा ईश्वर को निराकार और सर्वव्यापी मानती थी। कबीर और गुरु नानक जैसे संतों ने आंतरिक भक्ति, नाम-स्मरण और नैतिक जीवन पर बल दिया।
प्रश्न 10: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) भक्ति आंदोलन ने मध्यकालीन भारतीय समाज में सांस्कृतिक समन्वय की प्रक्रिया को प्रोत्साहित किया। (2) सभी भक्ति संतों ने संगठित धार्मिक संस्थाओं का पूर्णतः विरोध किया।
-
A.
केवल 1
✓
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
A
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने हिंदू, सूफी और स्थानीय सांस्कृतिक तत्वों के समन्वय को बढ़ावा दिया। हालांकि सभी संत संगठित धार्मिक संस्थाओं के विरोधी नहीं थे; कुछ ने नए संप्रदाय और संस्थागत परंपराएँ भी विकसित कीं।
प्रश्न 11: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भक्ति आंदोलन और सूफी आंदोलन के संबंध में सबसे उपयुक्त है?
-
A.
दोनों आंदोलनों ने केवल औपचारिक धर्मशास्त्र पर बल दिया
-
B.
दोनों आंदोलनों ने व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव को महत्व दिया
✓
-
C.
दोनों आंदोलनों ने स्थानीय भाषाओं का विरोध किया
-
D.
दोनों आंदोलनों का प्रभाव केवल अभिजात वर्ग तक सीमित रहा
सही उत्तर:
B
— दोनों आंदोलनों ने व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव को महत्व दिया
व्याख्या (Explanation):भक्ति और सूफी दोनों परंपराओं ने प्रेम, भक्ति और व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव को महत्त्व दिया। दोनों ने जनसाधारण तक पहुँचने के लिए स्थानीय भाषाओं और सरल अभिव्यक्ति का उपयोग किया।
प्रश्न 12: “भक्ति आंदोलन मध्यकालीन भारतीय समाज में वैकल्पिक सार्वजनिक क्षेत्र के निर्माण से जुड़ा था” — इस कथन का सबसे उपयुक्त आधार क्या है?
-
A.
इसने केवल राजकीय आदेशों का पालन किया
-
B.
संतों ने लोकभाषाओं और सामूहिक भक्ति परंपराओं के माध्यम से व्यापक सामाजिक संवाद स्थापित किया
✓
-
C.
इसने केवल संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा दिया
-
D.
यह केवल मठों तक सीमित धार्मिक प्रक्रिया थी
सही उत्तर:
B
— संतों ने लोकभाषाओं और सामूहिक भक्ति परंपराओं के माध्यम से व्यापक सामाजिक संवाद स्थापित किया
व्याख्या (Explanation):भक्ति संतों ने लोकभाषाओं, सत्संग, भजन और कीर्तन के माध्यम से ऐसे सार्वजनिक धार्मिक-सामाजिक मंच तैयार किए जहाँ विभिन्न वर्ग भाग ले सके। यह अवधारणा आधुनिक historiography में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रश्न 13: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) भक्ति आंदोलन ने क्षेत्रीय भाषाओं के विकास को प्रोत्साहित किया। (2) भक्ति साहित्य ने स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को आत्मसात किया। (3) भक्ति आंदोलन का प्रभाव केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित था।
-
A.
केवल 1 और 2
✓
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):भक्ति साहित्य ने स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को समृद्ध किया। इसका प्रभाव सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों तक भी फैला, इसलिए कथन 3 गलत है।
प्रश्न 14: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
-
A.
निम्बार्काचार्य — द्वैताद्वैत
-
B.
माध्वाचार्य — द्वैतवाद
-
C.
रामानुजाचार्य — शुद्धाद्वैतवाद
✓
-
D.
वल्लभाचार्य — शुद्धाद्वैतवाद
सही उत्तर:
C
— रामानुजाचार्य — शुद्धाद्वैतवाद
व्याख्या (Explanation):रामानुजाचार्य विशिष्टाद्वैतवाद से संबंधित थे, जबकि शुद्धाद्वैतवाद का संबंध वल्लभाचार्य से है। अन्य सभी युग्म सही हैं।
प्रश्न 15: “भक्ति आंदोलन ने धार्मिक अनुभव का लोकतंत्रीकरण किया” — इस कथन का सबसे उपयुक्त विश्लेषण क्या है?
-
A.
धार्मिक अधिकार केवल राजाओं को प्रदान करना
-
B.
धार्मिक ज्ञान को संस्कृत तक सीमित करना
-
C.
पुरोहित-निर्भरता को कम कर व्यक्तिगत भक्ति को बढ़ावा देना
✓
-
D.
केवल मंदिर आधारित उपासना को बढ़ावा देना
सही उत्तर:
C
— पुरोहित-निर्भरता को कम कर व्यक्तिगत भक्ति को बढ़ावा देना
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने व्यक्ति और ईश्वर के प्रत्यक्ष संबंध पर बल देकर धार्मिक अनुभव को अधिक समावेशी बनाया। इससे धर्म पर पारंपरिक अभिजात नियंत्रण कुछ हद तक कमजोर हुआ।
प्रश्न 16: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) गुरु ग्रंथ साहिब में भक्ति संतों की वाणी भी शामिल है। (2) सिख परंपरा और निर्गुण भक्ति परंपरा के बीच वैचारिक समानताएँ पाई जाती हैं।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
✓
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
C
— 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):गुरु ग्रंथ साहिब में कबीर, रविदास और नामदेव जैसे संतों की वाणी शामिल है। सिख परंपरा में निराकार ईश्वर, नाम-स्मरण और कर्मकांड-विरोध जैसे तत्व निर्गुण भक्ति से मेल खाते हैं।
प्रश्न 17: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भक्ति आंदोलन की सीमाओं को सबसे बेहतर रूप में व्यक्त करता है?
-
A.
यह केवल दक्षिण भारत तक सीमित रहा
-
B.
इसने राजनीतिक सत्ता संरचनाओं को पूर्णतः बदल दिया
-
C.
यह सामाजिक असमानताओं को चुनौती देने के बावजूद उन्हें पूरी तरह समाप्त नहीं कर सका
✓
-
D.
इसका कोई सांस्कृतिक प्रभाव नहीं पड़ा
सही उत्तर:
C
— यह सामाजिक असमानताओं को चुनौती देने के बावजूद उन्हें पूरी तरह समाप्त नहीं कर सका
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने जातिगत भेदभाव और सामाजिक विषमता की आलोचना की, परंतु मध्यकालीन सामाजिक संरचनाएँ पूरी तरह समाप्त नहीं हुईं।
प्रश्न 18: इनमें से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? (1) कबीर — धार्मिक समन्वयवाद (2) गुरु नानक — नाम जपना (3) बसवन्ना — सामाजिक समतावाद
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):कबीर की शिक्षाओं में हिंदू-सूफी समन्वय दिखाई देता है। गुरु नानक ने नाम-स्मरण पर बल दिया, जबकि बसवन्ना ने सामाजिक समानता और कर्मकांड-विरोध को बढ़ावा दिया।
प्रश्न 19: भक्ति आंदोलन के संदर्भ में “लोकधर्मी धार्मिकता” की अवधारणा का सबसे उपयुक्त अर्थ क्या है?
-
A.
धर्म को केवल मठों तक सीमित करना
-
B.
धार्मिक ज्ञान को केवल संस्कृत तक सीमित रखना
-
C.
धर्म को जनसामान्य के अनुभव और भाषा से जोड़ना
✓
-
D.
केवल राजकीय संरक्षण के माध्यम से धर्म का प्रसार करना
सही उत्तर:
C
— धर्म को जनसामान्य के अनुभव और भाषा से जोड़ना
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने धर्म को लोकभाषाओं, भजन, कीर्तन और व्यक्तिगत भक्ति से जोड़कर जनसाधारण तक पहुँचाया। इससे धार्मिक अनुभव अधिक सहभागी और जनोन्मुख बना।
प्रश्न 20: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) निर्गुण भक्ति परंपरा सामान्यतः शास्त्रीय ब्राह्मणवादी परंपराओं के प्रति आलोचनात्मक थी। (2) सगुण भक्ति परंपरा ने सदैव सामाजिक रूढ़ियों का समर्थन किया।
-
A.
केवल 1
✓
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
A
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):निर्गुण संतों ने कर्मकांड, जाति-आधारित भेदभाव और शास्त्रीय अधिकार की आलोचना की। जबकि सगुण परंपरा के सभी संत सामाजिक रूढ़ियों के समर्थक नहीं थे; कई संतों ने भक्ति को सामाजिक समरसता से भी जोड़ा।
प्रश्न 21: Assertion (A): भक्ति आंदोलन के सभी संत राजनीतिक सत्ता से पूर्णतः दूर रहे। Reason (R): कुछ भक्ति परंपराओं को क्षेत्रीय राजाओं और स्थानीय अभिजात वर्ग का संरक्षण प्राप्त था।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):सभी भक्ति संत राजनीतिक सत्ता से दूर नहीं रहे। कई भक्ति परंपराओं को शासकों और अभिजात वर्ग का संरक्षण प्राप्त था। इसलिए Assertion गलत तथा Reason सही है।
प्रश्न 22: Assertion (A): कुछ इतिहासकार भक्ति आंदोलन को मध्यकालीन सामाजिक तनावों की प्रतिक्रिया के रूप में देखते हैं। Reason (R): भक्ति संतों ने कई बार सामाजिक असमानताओं और धार्मिक रूढ़ियों की आलोचना की।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन को सामाजिक तनावों की प्रतिक्रिया मानना एक इतिहासलेखन दृष्टिकोण है। सामाजिक असमानताओं की आलोचना इस दृष्टिकोण का समर्थन अवश्य करती है, परंतु यह उसका प्रत्यक्ष कारणात्मक स्पष्टीकरण नहीं है।
प्रश्न 23: Assertion (A): चैतन्य महाप्रभु की वैष्णव परंपरा ने भावनात्मक भक्ति और सामूहिक कीर्तन पर विशेष बल दिया। Reason (R): चैतन्य महाप्रभु ने अद्वैत वेदांत की शंकर परंपरा को पूर्णतः अस्वीकार कर केवल तर्कप्रधान दर्शन को महत्व दिया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):चैतन्य महाप्रभु ने भावनात्मक कृष्णभक्ति और संकीर्तन पर बल दिया था। उन्होंने तर्कप्रधान दर्शन की अपेक्षा प्रेम और भक्ति को प्राथमिकता दी।
प्रश्न 24: Assertion (A): गुरु नानक की शिक्षाओं में धार्मिक अनुष्ठानों की अपेक्षा नैतिक आचरण और नाम-स्मरण को अधिक महत्व दिया गया। Reason (R): गुरु नानक ने मूर्ति-पूजा और बाह्य कर्मकांडों की आलोचना की।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):गुरु नानक ने आंतरिक भक्ति, सत्य आचरण और नाम-स्मरण पर बल दिया तथा बाह्य कर्मकांडों की आलोचना की। इसलिए Reason, Assertion की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है।
प्रश्न 25: Assertion (A): मध्यकालीन भक्ति आंदोलन का सभी क्षेत्रों में सामाजिक प्रभाव समान था। Reason (R): भक्ति आंदोलन विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों में विकसित हुआ।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन का प्रभाव क्षेत्रानुसार भिन्न था क्योंकि स्थानीय सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियाँ अलग थीं। इसलिए Assertion गलत है।
प्रश्न 26: Assertion (A): भक्ति आंदोलन ने संस्कृत की एकाधिकारवादी धार्मिक स्थिति को आंशिक चुनौती दी। Reason (R): भक्ति संतों ने अपनी शिक्षाओं के प्रसार हेतु लोकभाषाओं का उपयोग किया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):लोकभाषाओं में रचनाएँ होने से धार्मिक ज्ञान व्यापक समाज तक पहुँचा और संस्कृत की विशिष्ट धार्मिक स्थिति को चुनौती मिली।
प्रश्न 27: Assertion (A): सगुण और निर्गुण भक्ति धाराओं के बीच किसी प्रकार का वैचारिक अंतर नहीं था। Reason (R): निर्गुण परंपरा ईश्वर को निराकार मानती थी जबकि सगुण परंपरा ईश्वर के साकार रूप की उपासना पर बल देती थी।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):सगुण और निर्गुण धाराओं में ईश्वर की प्रकृति, उपासना पद्धति और धार्मिक दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण वैचारिक अंतर थे। इसलिए Assertion गलत है।
प्रश्न 28: Assertion (A): कबीर की वाणी में धार्मिक समन्वय की प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है। Reason (R): कबीर दिल्ली सल्तनत के आधिकारिक सूफी दरबार से संबद्ध थे।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):कबीर की वाणी में हिंदू और इस्लामी दोनों परंपराओं का प्रभाव दिखता है, परंतु वे किसी आधिकारिक सूफी दरबार से संबद्ध नहीं थे।
प्रश्न 29: Assertion (A): भक्ति आंदोलन के प्रसार ने क्षेत्रीय राज्य व्यवस्थाओं को सांस्कृतिक वैधता प्रदान करने में सहायता की। Reason (R): अनेक क्षेत्रीय शासकों ने स्थानीय भाषाओं और भक्ति परंपराओं को संरक्षण दिया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):क्षेत्रीय शासकों द्वारा स्थानीय भाषाओं और भक्ति परंपराओं के संरक्षण से क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचान मजबूत हुई, जिसने उनकी राजनीतिक वैधता को भी समर्थन दिया।
प्रश्न 30: Assertion (A): निर्गुण भक्ति परंपरा ने मध्यकालीन भारत में धार्मिक अधिकार के ब्राह्मणवादी ढाँचे को चुनौती दी। Reason (R): निर्गुण संतों ने ईश्वर तक पहुँच के लिए जाति और कर्मकांड को अनिवार्य नहीं माना।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):निर्गुण संतों ने प्रत्यक्ष भक्ति, समानता और निराकार ईश्वर पर बल देकर ब्राह्मणवादी धार्मिक नियंत्रण को चुनौती दी। इसलिए Reason, Assertion की सीधी व्याख्या करता है।
प्रश्न 31: भक्ति आंदोलन की व्यापक लोकप्रियता को समझने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारक सबसे महत्वपूर्ण माना जा सकता है?
-
A.
शासकों द्वारा अनिवार्य समर्थन
-
B.
जटिल दार्शनिक ग्रंथों का प्रसार
-
C.
धार्मिक अनुभव की सरलता और जनसुलभता
✓
-
D.
केवल मठ-आधारित संगठन
सही उत्तर:
C
— धार्मिक अनुभव की सरलता और जनसुलभता
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने धर्म को सरल, भावनात्मक और जनसुलभ बनाया। स्थानीय भाषाओं, भजन-कीर्तन और व्यक्तिगत भक्ति ने इसे व्यापक लोकप्रियता प्रदान की।
प्रश्न 32: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
-
A.
माध्वाचार्य — द्वैतवाद
-
B.
रामानुजाचार्य — विशिष्टाद्वैतवाद
-
C.
चैतन्य महाप्रभु — अद्वैतवाद
✓
-
D.
वल्लभाचार्य — शुद्धाद्वैतवाद
सही उत्तर:
C
— चैतन्य महाप्रभु — अद्वैतवाद
व्याख्या (Explanation):चैतन्य महाप्रभु “अचिन्त्य भेदाभेद” दर्शन से संबंधित थे, न कि अद्वैतवाद से। अन्य सभी युग्म सही हैं।
प्रश्न 33: निम्नलिखित में से कौन-सा संत उत्तर भारत की रामभक्ति परंपरा से सबसे अधिक संबंधित है?
-
A.
तुलसीदास
✓
-
B.
तुकाराम
-
C.
चैतन्य महाप्रभु
-
D.
नामदेव
सही उत्तर:
A
— तुलसीदास
व्याख्या (Explanation):तुलसीदास उत्तर भारत की रामभक्ति परंपरा के प्रमुख संत थे। उनकी “रामचरितमानस” ने रामभक्ति को व्यापक जनसमर्थन प्रदान किया।
प्रश्न 34: “भक्ति आंदोलन का सामाजिक प्रभाव उसके धार्मिक प्रभाव से अधिक व्यापक था” — इस कथन का सबसे उपयुक्त आधार क्या है?
-
A.
इसने भारत में एक समान धर्म स्थापित कर दिया
-
B.
इसने जातिगत एवं सामाजिक भेदभाव को चुनौती दी
✓
-
C.
इसने केवल मंदिर स्थापत्य को बढ़ावा दिया
-
D.
इसने केवल धार्मिक दर्शन को प्रभावित किया
सही उत्तर:
B
— इसने जातिगत एवं सामाजिक भेदभाव को चुनौती दी
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने निम्न वर्गों और महिलाओं को धार्मिक भागीदारी का अवसर दिया तथा जातिगत ऊँच-नीच को चुनौती दी। इसका प्रभाव केवल धर्म तक सीमित नहीं था।
प्रश्न 35: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) भक्ति आंदोलन ने क्षेत्रीय साहित्य को समृद्ध किया। (2) सभी भक्ति संतों ने संस्कृत का ही उपयोग किया।
-
A.
केवल 1
✓
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
A
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):भक्ति संतों ने क्षेत्रीय भाषाओं में रचनाएँ लिखीं, जिससे साहित्य समृद्ध हुआ। कबीर, तुलसीदास, तुकाराम और नामदेव ने लोकभाषाओं का प्रयोग किया। इसलिए कथन 2 गलत है।
प्रश्न 36: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन निर्गुण संतों के संबंध में सही नहीं है?
-
A.
वे सामान्यतः निराकार ईश्वर को मानते थे
-
B.
वे धार्मिक कर्मकांडों की आलोचना करते थे
-
C.
वे मूर्ति पूजा को मोक्ष का अनिवार्य साधन मानते थे
✓
-
D.
वे सामाजिक समानता पर बल देते थे
सही उत्तर:
C
— वे मूर्ति पूजा को मोक्ष का अनिवार्य साधन मानते थे
व्याख्या (Explanation):निर्गुण संत मूर्ति पूजा के विरोधी थे और ईश्वर को निराकार मानते थे। कबीर, दादू और गुरु नानक इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
प्रश्न 37: इनमें से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? (1) बसवन्ना — लिंगायत आंदोलन (2) चैतन्य महाप्रभु — संकीर्तन परंपरा (3) वल्लभाचार्य — पुष्टिमार्ग
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):तीनों युग्म सही हैं। बसवन्ना लिंगायत आंदोलन से, चैतन्य महाप्रभु संकीर्तन परंपरा से तथा वल्लभाचार्य पुष्टिमार्ग से संबंधित थे।
प्रश्न 38: भक्ति आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त है?
-
A.
इसने धार्मिक अनुभव को संस्थागत नियंत्रण से आंशिक रूप से मुक्त किया
✓
-
B.
इसने ब्राह्मणवादी व्यवस्था को पूर्णतः समाप्त कर दिया
-
C.
यह केवल शहरी व्यापारिक वर्ग तक सीमित था
-
D.
इसने सभी क्षेत्रों में समान सामाजिक प्रभाव डाला
सही उत्तर:
A
— इसने धार्मिक अनुभव को संस्थागत नियंत्रण से आंशिक रूप से मुक्त किया
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने व्यक्ति और ईश्वर के प्रत्यक्ष संबंध पर बल देकर धार्मिक अनुभव को पुरोहित-निर्भरता से आंशिक रूप से मुक्त किया। हालांकि इसने सभी सामाजिक संरचनाओं को समाप्त नहीं किया।
प्रश्न 39: निम्नलिखित में से किस संत का संबंध “दोहा” साहित्यिक शैली से सबसे अधिक है?
-
A.
सूरदास
-
B.
कबीर
✓
-
C.
जयदेव
-
D.
चैतन्य महाप्रभु
सही उत्तर:
B
— कबीर
व्याख्या (Explanation):कबीर की वाणी मुख्यतः दोहों, साखियों और सबदों के रूप में प्रसिद्ध है। उनकी भाषा सरल और जनसामान्य की थी।
प्रश्न 40: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) महाराष्ट्र की भक्ति परंपरा में विठोबा भक्ति का विशेष महत्व था। (2) वारकरी संप्रदाय पूर्णतः वैदिक कर्मकांडों पर आधारित था।
-
A.
केवल 1
✓
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
A
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):महाराष्ट्र की वारकरी परंपरा विठोबा (विठ्ठल) की भक्ति से जुड़ी थी। तुकाराम और नामदेव इसके प्रमुख संत थे। यह संप्रदाय जटिल कर्मकांडों की अपेक्षा सरल भक्ति और सामुदायिक भागीदारी पर बल देता था।
प्रश्न 41: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
-
A.
जयदेव — गीतगोविंद
-
B.
रविदास — बेगमपुरा
-
C.
कबीर — साखी
-
D.
तुलसीदास — सूरसागर
✓
सही उत्तर:
D
— तुलसीदास — सूरसागर
व्याख्या (Explanation):“सूरसागर” की रचना सूरदास ने की थी, न कि तुलसीदास ने। तुलसीदास की प्रमुख रचनाओं में रामचरितमानस और विनय पत्रिका शामिल हैं।
प्रश्न 42: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गुरु नानक की शिक्षाओं के संबंध में सही है?
-
A.
उन्होंने संन्यास को अनिवार्य माना
-
B.
उन्होंने मूर्ति पूजा और अंधविश्वास की आलोचना की
✓
-
C.
उन्होंने केवल संस्कृत में उपदेश दिए
-
D.
उन्होंने जाति व्यवस्था का समर्थन किया
सही उत्तर:
B
— उन्होंने मूर्ति पूजा और अंधविश्वास की आलोचना की
व्याख्या (Explanation):गुरु नानक ने एकेश्वरवाद, सत्य जीवन, सेवा और नाम-स्मरण पर बल दिया। उन्होंने मूर्ति पूजा, अंधविश्वास और सामाजिक भेदभाव की आलोचना की।
प्रश्न 43: “भक्ति आंदोलन ने धार्मिक समन्वय की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया” — इस कथन का सबसे उपयुक्त उदाहरण कौन-सा है?
-
A.
केवल संस्कृत ग्रंथों का प्रचार
-
B.
मंदिरों का राजनीतिक नियंत्रण
-
C.
कबीर की शिक्षाओं में हिंदू और सूफी तत्वों का मिश्रण
✓
-
D.
वैदिक यज्ञों की पुनर्स्थापना
सही उत्तर:
C
— कबीर की शिक्षाओं में हिंदू और सूफी तत्वों का मिश्रण
व्याख्या (Explanation):कबीर की वाणी में हिंदू भक्ति और इस्लामी सूफी विचारों का समन्वय स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने दोनों धर्मों के बाहरी आडंबरों की आलोचना की।
प्रश्न 44: निम्नलिखित में से किस संत का संबंध “शिवशरण” परंपरा से है?
-
A.
नामदेव
-
B.
बसवन्ना
✓
-
C.
चैतन्य महाप्रभु
-
D.
तुलसीदास
सही उत्तर:
B
— बसवन्ना
व्याख्या (Explanation):बसवन्ना और उनके अनुयायियों को “शिवशरण” कहा जाता था। वे वीरशैव/लिंगायत आंदोलन से जुड़े थे और सामाजिक समानता तथा कर्मकांड-विरोध पर बल देते थे।
प्रश्न 45: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) निर्गुण संत सामान्यतः वेदों और शास्त्रों की सर्वोच्चता को चुनौती देते थे। (2) सगुण संतों ने हमेशा जाति व्यवस्था का पूर्ण समर्थन किया।
-
A.
केवल 1
✓
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
A
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):निर्गुण संतों ने शास्त्रीय अधिकार और कर्मकांडों की आलोचना की। जबकि सगुण संतों का दृष्टिकोण विविध था; सभी ने जाति व्यवस्था का पूर्ण समर्थन नहीं किया।
प्रश्न 46: भक्ति आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
-
A.
इसने धार्मिक अनुभव को अधिक व्यक्तिगत बनाया
-
B.
इसने स्थानीय भाषाओं के विकास में योगदान दिया
-
C.
इसने सभी क्षेत्रों में समान रूप से एक ही स्वरूप ग्रहण किया
✓
-
D.
इसने सामाजिक स्तर पर वैकल्पिक विचार प्रस्तुत किए
सही उत्तर:
C
— इसने सभी क्षेत्रों में समान रूप से एक ही स्वरूप ग्रहण किया
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रूप ग्रहण किए। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र, बंगाल और उत्तर भारत की भक्ति परंपराओं में पर्याप्त भिन्नताएँ थीं।
प्रश्न 47: इनमें से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? (1) कबीर — निर्गुण भक्ति (2) सूरदास — पुष्टिमार्ग (3) तुकाराम — वारकरी संप्रदाय
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):कबीर निर्गुण भक्ति परंपरा से जुड़े थे। सूरदास का संबंध वल्लभाचार्य की पुष्टिमार्गीय कृष्णभक्ति से माना जाता है। तुकाराम महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के प्रमुख संत थे।
प्रश्न 48: निम्नलिखित में से कौन-सा संत “अचिन्त्य भेदाभेद” दर्शन से संबंधित है?
-
A.
रामानुजाचार्य
-
B.
चैतन्य महाप्रभु
✓
-
C.
माध्वाचार्य
-
D.
वल्लभाचार्य
सही उत्तर:
B
— चैतन्य महाप्रभु
व्याख्या (Explanation):चैतन्य महाप्रभु ने “अचिन्त्य भेदाभेद” की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया, जिसके अनुसार जीव और ईश्वर में भेद भी है और अभेद भी। यह गौड़ीय वैष्णव परंपरा का महत्वपूर्ण दार्शनिक आधार है।
प्रश्न 49: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) भक्ति आंदोलन ने धार्मिक अधिकार के केंद्रीकरण को चुनौती दी। (2) सभी भक्ति संत सामाजिक समानता के प्रश्न पर एक समान दृष्टिकोण रखते थे।
-
A.
केवल 1
✓
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
A
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने पुरोहितवाद और धार्मिक अधिकार के केंद्रीकरण को चुनौती दी। परंतु सभी संत सामाजिक समानता के प्रश्न पर समान रूप से क्रांतिकारी नहीं थे। कुछ संत अपेक्षाकृत उदार थे, जबकि कुछ परंपरागत सीमाओं के भीतर रहे।
प्रश्न 50: निम्नलिखित में से कौन-सा कारक भक्ति आंदोलन की अखिल भारतीय प्रकृति को सर्वाधिक स्पष्ट करता है?
-
A.
केवल राजकीय संरक्षण
-
B.
केवल संस्कृत ग्रंथों का उपयोग
-
C.
सभी संतों का एक ही दर्शन मानना
-
D.
विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय रूपों में भक्ति परंपराओं का विकास
✓
सही उत्तर:
D
— विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय रूपों में भक्ति परंपराओं का विकास
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रूप ग्रहण किए—जैसे महाराष्ट्र में वारकरी, बंगाल में गौड़ीय वैष्णव, पंजाब में सिख परंपरा। यही इसकी अखिल भारतीय प्रकृति को दर्शाता है।
प्रश्न 51: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
-
A.
तुकाराम — अभंग
-
B.
सूरदास — ब्रजभाषा
-
C.
गुरु नानक — सधुक्कड़ी
✓
-
D.
मीराबाई — कृष्णभक्ति
सही उत्तर:
C
— गुरु नानक — सधुक्कड़ी
व्याख्या (Explanation):सधुक्कड़ी भाषा का प्रमुख संबंध कबीर की रचनाओं से है। गुरु नानक की वाणी मुख्यतः पंजाबी और संबंधित बोलियों में थी। अन्य सभी युग्म सही हैं।
प्रश्न 52: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन कबीर और गुरु नानक दोनों पर समान रूप से लागू होता है?
-
A.
दोनों ने मूर्ति पूजा का समर्थन किया
-
B.
दोनों ने निराकार ईश्वर पर बल दिया
✓
-
C.
दोनों वैष्णव सगुण परंपरा से जुड़े थे
-
D.
दोनों ने केवल संस्कृत में रचनाएँ कीं
सही उत्तर:
B
— दोनों ने निराकार ईश्वर पर बल दिया
व्याख्या (Explanation):कबीर और गुरु नानक दोनों ने निराकार ईश्वर की अवधारणा को स्वीकार किया और धार्मिक कर्मकांडों की आलोचना की। दोनों ने लोकभाषाओं का उपयोग किया।
प्रश्न 53: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) भक्ति संतों ने सामान्यतः संस्कृत के स्थान पर लोकभाषाओं का उपयोग किया। (2) इससे धार्मिक ज्ञान का प्रसार व्यापक जनसमूह तक हुआ।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
✓
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
C
— 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):भक्ति संतों ने लोकभाषाओं में रचनाएँ करके धर्म को जनसामान्य तक पहुँचाया। इससे धार्मिक ज्ञान पर उच्च वर्गों का नियंत्रण कम हुआ। हिंदी, मराठी, बंगाली और पंजाबी साहित्य को इससे नई दिशा मिली।
प्रश्न 54: निम्नलिखित में से किस संत ने “नाम-स्मरण” को भक्ति का प्रमुख साधन माना?
-
A.
बसवन्ना
-
B.
चैतन्य महाप्रभु
-
C.
गुरु नानक
✓
-
D.
कबीर
सही उत्तर:
C
— गुरु नानक
व्याख्या (Explanation):गुरु नानक ने “नाम जपना” को आध्यात्मिक जीवन का प्रमुख आधार माना। सिख परंपरा में “नाम-स्मरण” ईश्वर से जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
प्रश्न 55: निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: (1) निम्बार्काचार्य — द्वैताद्वैत (2) वल्लभाचार्य — शुद्धाद्वैत (3) माध्वाचार्य — विशिष्टाद्वैत। उपरोक्त में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
-
A.
केवल 1 और 2
✓
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):निम्बार्काचार्य द्वैताद्वैत दर्शन से और वल्लभाचार्य शुद्धाद्वैत से संबंधित थे। जबकि विशिष्टाद्वैत का संबंध रामानुजाचार्य से है, न कि माध्वाचार्य से।
प्रश्न 56: भक्ति आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सबसे उपयुक्त है?
-
A.
इसने भारतीय समाज में केवल धार्मिक परिवर्तन किए
-
B.
यह पूरी तरह ग्रामीण समाज तक सीमित था
-
C.
इसने सामाजिक गतिशीलता के नए अवसर प्रदान किए
✓
-
D.
इसका प्रभाव केवल हिंदू समाज तक सीमित रहा
सही उत्तर:
C
— इसने सामाजिक गतिशीलता के नए अवसर प्रदान किए
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने निम्न वर्गों, महिलाओं और गैर-ब्राह्मण समुदायों को धार्मिक और सामाजिक अभिव्यक्ति का अवसर दिया। इससे सामाजिक गतिशीलता बढ़ी। इसका प्रभाव व्यापक सांस्कृतिक स्तर पर भी देखा गया।
प्रश्न 57: निम्नलिखित में से किस संत का संबंध “उडुपी” परंपरा से है?
-
A.
वल्लभाचार्य
-
B.
माध्वाचार्य
✓
-
C.
कबीर
-
D.
रामानंद
सही उत्तर:
B
— माध्वाचार्य
व्याख्या (Explanation):माध्वाचार्य का संबंध कर्नाटक के उडुपी क्षेत्र से था। उन्होंने कृष्णभक्ति और द्वैत दर्शन को लोकप्रिय बनाया। उडुपी मठ परंपरा आज भी उनके प्रभाव का महत्वपूर्ण केंद्र है।
प्रश्न 58: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) माध्वाचार्य ने द्वैतवाद का प्रतिपादन किया। (2) द्वैतवाद के अनुसार जीव और ब्रह्म पूर्णतः अभिन्न हैं।
-
A.
केवल 1
✓
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
A
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):माध्वाचार्य ने द्वैतवाद का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और ब्रह्म अलग-अलग सत्ता हैं। इसलिए कथन 2 गलत है। यह दर्शन शंकराचार्य के अद्वैतवाद के विपरीत था।
प्रश्न 59: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भक्ति आंदोलन के संबंध में सही नहीं है?
-
A.
इसने सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया
-
B.
इसने क्षेत्रीय साहित्य के विकास में योगदान दिया
-
C.
इसने सभी सामाजिक असमानताओं को समाप्त कर दिया
✓
-
D.
इसने धार्मिक कर्मकांडों की आलोचना की
सही उत्तर:
C
— इसने सभी सामाजिक असमानताओं को समाप्त कर दिया
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने सामाजिक असमानताओं को चुनौती दी, परंतु उन्हें पूरी तरह समाप्त नहीं कर सका। अन्य सभी कथन सही हैं।
प्रश्न 60: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) निर्गुण संत सामान्यतः मूर्ति पूजा का विरोध करते थे। (2) सगुण संत ईश्वर के साकार रूप की उपासना करते थे।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
✓
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
C
— 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):निर्गुण संत जैसे कबीर निराकार ईश्वर को मानते थे और मूर्ति पूजा का विरोध करते थे। सगुण संत जैसे तुलसीदास और सूरदास ईश्वर के साकार रूप की भक्ति करते थे।
प्रश्न 61: भक्ति आंदोलन की लोकप्रियता के पीछे निम्नलिखित में से कौन-सा कारण सबसे अधिक महत्वपूर्ण था?
-
A.
राजकीय संरक्षण की अनिवार्यता
-
B.
कठिन दार्शनिक भाषा का उपयोग
-
C.
धार्मिक अनुभव का जनसामान्य से जुड़ना
✓
-
D.
केवल मंदिर-आधारित उपासना
सही उत्तर:
C
— धार्मिक अनुभव का जनसामान्य से जुड़ना
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने धर्म को व्यक्तिगत और सरल बनाया, जिससे सामान्य जनता सीधे जुड़ सकी। स्थानीय भाषाओं और सरल भक्ति-पद्धति ने इसकी लोकप्रियता बढ़ाई।
प्रश्न 62: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
-
A.
बसवन्ना — कर्नाटक
-
B.
नामदेव — महाराष्ट्र
-
C.
चैतन्य महाप्रभु — गुजरात
✓
-
D.
गुरु नानक — पंजाब
सही उत्तर:
C
— चैतन्य महाप्रभु — गुजरात
व्याख्या (Explanation):चैतन्य महाप्रभु का संबंध मुख्यतः बंगाल और ओडिशा क्षेत्र से था, न कि गुजरात से। अन्य सभी युग्म सही हैं।
प्रश्न 63: निम्नलिखित में से किस संत की शिक्षाएँ “जाति से अधिक भक्ति” पर विशेष बल देती हैं?
-
A.
रविदास
✓
-
B.
माध्वाचार्य
-
C.
जयदेव
-
D.
निम्बार्काचार्य
सही उत्तर:
A
— रविदास
व्याख्या (Explanation):रविदास ने सामाजिक समानता और भक्ति को जन्म-आधारित ऊँच-नीच से ऊपर रखा। उनकी शिक्षाएँ निम्न वर्गों में विशेष रूप से लोकप्रिय थीं।
प्रश्न 64: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) गुरु ग्रंथ साहिब में केवल सिख गुरुओं की वाणी संकलित है। (2) गुरु अर्जुन देव ने गुरु ग्रंथ साहिब के प्रारंभिक संकलन में भूमिका निभाई।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2
✓
-
C.
1 और 2 दोनों
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
B
— केवल 2
व्याख्या (Explanation):गुरु ग्रंथ साहिब में सिख गुरुओं के अतिरिक्त कबीर, रविदास और नामदेव जैसे भक्ति संतों की वाणी भी शामिल है। गुरु अर्जुन देव ने आदि ग्रंथ के संकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 65: भक्ति आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त है?
-
A.
यह मुख्यतः राजदरबारों तक सीमित धार्मिक आंदोलन था
-
B.
इसने केवल हिंदू धर्म के भीतर सुधार का प्रयास किया
-
C.
इसने सामाजिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर परिवर्तन की प्रक्रिया को प्रभावित किया
✓
-
D.
इसका प्रभाव केवल दक्षिण भारत तक सीमित रहा
सही उत्तर:
C
— इसने सामाजिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर परिवर्तन की प्रक्रिया को प्रभावित किया
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने केवल धार्मिक विचारों को ही नहीं बदला, बल्कि सामाजिक समानता, क्षेत्रीय भाषाओं और सांस्कृतिक समन्वय को भी बढ़ावा दिया। इसका प्रभाव अखिल भारतीय स्तर पर देखा गया।
प्रश्न 66: निम्नलिखित में से कौन-सा संत-समूह कालक्रमानुसार सही क्रम में है?
-
A.
कबीर → रामानुजाचार्य → चैतन्य महाप्रभु → तुकाराम
-
B.
रामानुजाचार्य → कबीर → चैतन्य महाप्रभु → तुकाराम
✓
-
C.
रामानुजाचार्य → तुकाराम → कबीर → चैतन्य महाप्रभु
-
D.
कबीर → चैतन्य महाप्रभु → रामानुजाचार्य → तुकाराम
सही उत्तर:
B
— रामानुजाचार्य → कबीर → चैतन्य महाप्रभु → तुकाराम
व्याख्या (Explanation):रामानुजाचार्य 11वीं–12वीं शताब्दी, कबीर 15वीं शताब्दी, चैतन्य महाप्रभु 15वीं–16वीं शताब्दी तथा तुकाराम 17वीं शताब्दी से संबंधित थे।
प्रश्न 67: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) रामानुजाचार्य ने भक्ति को मोक्ष प्राप्ति का प्रमुख साधन माना। (2) रामानुजाचार्य का दर्शन शंकराचार्य के अद्वैतवाद का पूर्ण समर्थन करता था।
-
A.
केवल 1
✓
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
A
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):रामानुजाचार्य ने विशिष्टाद्वैतवाद का प्रतिपादन किया और भक्ति को मोक्ष का प्रमुख साधन माना। उन्होंने शंकराचार्य के अद्वैतवाद को पूर्णतः स्वीकार नहीं किया, क्योंकि उनके अनुसार जीव और ब्रह्म का संबंध विशिष्ट प्रकार का है।
प्रश्न 68: Assertion (A): भक्ति आंदोलन के सभी संत सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से एक समान विचारधारा का पालन करते थे। Reason (R): भक्ति आंदोलन में सगुण और निर्गुण दोनों धाराएँ विद्यमान थीं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन में विचारों की विविधता थी। सगुण और निर्गुण परंपराओं के कारण सभी संतों की विचारधारा समान नहीं थी।
प्रश्न 69: Assertion (A): तुलसीदास की रचनाओं ने उत्तर भारत में रामभक्ति परंपरा को व्यापक जनाधार प्रदान किया। Reason (R): तुलसीदास ने ‘रामचरितमानस’ को फारसी भाषा में लिखा था।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):तुलसीदास ने ‘रामचरितमानस’ अवधी भाषा में लिखी थी, फारसी में नहीं। लोकभाषा में रचना होने के कारण रामभक्ति का व्यापक प्रसार हुआ।
प्रश्न 70: Assertion (A): मध्यकालीन भक्ति आंदोलन का प्रभाव केवल धार्मिक सुधार तक सीमित नहीं था। Reason (R): भक्ति आंदोलन ने सामाजिक संबंधों, साहित्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को भी प्रभावित किया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने सामाजिक समानता, लोकभाषा साहित्य और सांस्कृतिक जीवन को प्रभावित किया। इसलिए इसका प्रभाव केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा।
प्रश्न 71: Assertion (A): सूफी और भक्ति आंदोलनों में सामाजिक समावेशन के तत्व पाए जाते हैं। Reason (R): दोनों परंपराओं ने धार्मिक अनुभव को केवल उच्च वर्गों तक सीमित रखा।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):सूफी और भक्ति दोनों आंदोलनों ने सामान्य जनता को भी आध्यात्मिक मार्ग से जोड़ने का प्रयास किया। इसलिए धार्मिक अनुभव केवल उच्च वर्गों तक सीमित नहीं था।
प्रश्न 72: Assertion (A): चैतन्य महाप्रभु ने बंगाल में वैष्णव भक्ति को लोकप्रिय बनाया। Reason (R): चैतन्य महाप्रभु ने ज्ञानमार्ग को भक्ति से श्रेष्ठ माना।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):चैतन्य महाप्रभु कृष्ण-भक्ति और प्रेममार्ग के प्रमुख प्रवर्तक थे। उन्होंने ज्ञानमार्ग की अपेक्षा भक्ति को अधिक महत्व दिया। इसलिए Reason गलत है।
प्रश्न 73: Assertion (A): कबीर की शिक्षाओं में हिंदू और इस्लामी परंपराओं के तत्वों का समन्वय दिखाई देता है। Reason (R): कबीर सूफी संतों तथा वैष्णव भक्ति परंपरा दोनों से प्रभावित थे।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):कबीर की शिक्षाओं में सूफी विचारों और वैष्णव भक्ति दोनों का प्रभाव दिखाई देता है, जिसके कारण उनकी वाणी में धार्मिक समन्वय का स्वर उभरता है।
प्रश्न 74: Assertion (A): भक्ति आंदोलन ने जाति-आधारित सामाजिक संरचना को पूर्णतः समाप्त कर दिया। Reason (R): कई भक्ति संतों ने जाति-भेद और ऊँच-नीच का विरोध किया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):भक्ति संतों ने जातिगत भेदभाव का विरोध अवश्य किया, परंतु भक्ति आंदोलन भारतीय समाज से जाति व्यवस्था को पूर्णतः समाप्त नहीं कर सका।
प्रश्न 75: Assertion (A): रामानंद की शिक्षाओं ने उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के प्रसार को प्रभावित किया। Reason (R): रामानंद ने केवल ब्राह्मणों को ही अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):रामानंद ने विभिन्न जातियों एवं सामाजिक समूहों के लोगों को शिष्य बनाया था। यही समावेशी दृष्टिकोण उनके प्रभाव के विस्तार का एक कारण बना। अतः Reason गलत है।
प्रश्न 76: Assertion (A): भक्ति आंदोलन ने मध्यकालीन भारतीय समाज में क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्यिक विकास को गति दी। Reason (R): अनेक भक्ति संतों ने अपनी रचनाएँ संस्कृत के स्थान पर लोकभाषाओं में प्रस्तुत कीं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):भक्ति संतों द्वारा लोकभाषाओं के प्रयोग ने क्षेत्रीय साहित्य को व्यापक आधार प्रदान किया। यह क्षेत्रीय साहित्यिक विकास का प्रत्यक्ष कारण बना।
प्रश्न 77: Assertion (A): निर्गुण भक्ति परंपरा के संतों ने धार्मिक संस्थागत संरचनाओं की अपेक्षा व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव को अधिक महत्व दिया। Reason (R): निर्गुण संत ईश्वर को निराकार मानते थे तथा मध्यस्थ पुरोहित वर्ग की आवश्यकता को अस्वीकार करते थे।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):निर्गुण संतों ने ईश्वर के साथ प्रत्यक्ष संबंध पर बल दिया और पुरोहितवादी मध्यस्थता का विरोध किया। इसलिए व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव को प्राथमिकता देना उनके निराकार ईश्वर संबंधी विचारों का प्रत्यक्ष परिणाम था।
प्रश्न 78: निम्नलिखित में से कौन-सा भक्ति आंदोलन का दीर्घकालिक प्रभाव माना जा सकता है?
-
A.
जाति व्यवस्था का पूर्ण अंत
-
B.
क्षेत्रीय साहित्यिक परंपराओं का विकास
✓
-
C.
संस्कृत का पूर्ण लोप
-
D.
भारत में केवल एक धर्म की स्थापना
सही उत्तर:
B
— क्षेत्रीय साहित्यिक परंपराओं का विकास
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने क्षेत्रीय भाषाओं और साहित्य के विकास में बड़ा योगदान दिया। हिंदी, मराठी, बंगाली और पंजाबी साहित्य को इससे नई दिशा मिली। जाति व्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं हुई, इसलिए विकल्प A गलत है।
प्रश्न 79: “निरंकारी ईश्वर” की अवधारणा निम्नलिखित में से किस परंपरा से सबसे अधिक संबंधित है?
-
A.
निर्गुण भक्ति
✓
-
B.
तांत्रिक परंपरा
-
C.
शाक्त परंपरा
-
D.
सगुण वैष्णव परंपरा
सही उत्तर:
A
— निर्गुण भक्ति
व्याख्या (Explanation):निर्गुण भक्ति परंपरा ईश्वर को निराकार और निरंकारी मानती थी। कबीर और गुरु नानक इसके प्रमुख संत थे। सगुण परंपरा इसके विपरीत ईश्वर के साकार रूप की उपासना करती थी।
प्रश्न 80: भक्ति आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
-
A.
इसने केवल धार्मिक परिवर्तन किए
-
B.
इसका प्रभाव केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित था
-
C.
यह पूरी तरह राजकीय संरक्षण पर आधारित था
-
D.
इसने सामाजिक समरसता की भावना को बढ़ावा दिया
✓
सही उत्तर:
D
— इसने सामाजिक समरसता की भावना को बढ़ावा दिया
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने धार्मिक के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन भी किए। इसने जातिगत भेदभाव को चुनौती दी और सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया। यह केवल राजकीय संरक्षण पर निर्भर नहीं था।
प्रश्न 81: निम्नलिखित में से किस संत की शिक्षाओं पर इस्लामी सूफी प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है?
-
A.
रामानुजाचार्य
-
B.
कबीर
✓
-
C.
शंकराचार्य
-
D.
माध्वाचार्य
सही उत्तर:
B
— कबीर
व्याख्या (Explanation):कबीर की शिक्षाओं में हिंदू और सूफी दोनों परंपराओं का प्रभाव दिखाई देता है। उन्होंने एक निराकार ईश्वर की बात की तथा बाहरी कर्मकांडों का विरोध किया।
प्रश्न 82: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) भक्ति आंदोलन ने महिलाओं की धार्मिक भागीदारी को बढ़ावा दिया। (2) मीराबाई भक्ति आंदोलन की प्रमुख महिला संत थीं।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
✓
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
C
— 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने महिलाओं सहित निम्न वर्गों को भी धार्मिक भागीदारी का अवसर दिया। मीराबाई इसका प्रमुख उदाहरण हैं। उन्होंने सामाजिक बंधनों से ऊपर उठकर कृष्णभक्ति को अपनाया।
प्रश्न 83: निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?
-
A.
सूरदास — सूरसागर
-
B.
तुलसीदास — विनय पत्रिका
-
C.
कबीर — बीजक
-
D.
गुरु नानक — गीतगोविंद
✓
सही उत्तर:
D
— गुरु नानक — गीतगोविंद
व्याख्या (Explanation):“गीतगोविंद” की रचना जयदेव ने की थी, न कि गुरु नानक ने। अन्य सभी युग्म सही हैं।
प्रश्न 84: भक्ति आंदोलन के प्रसार में निम्नलिखित में से किस कारक की भूमिका सबसे कम थी?
-
A.
स्थानीय भाषाओं का उपयोग
-
B.
सामाजिक असमानताओं के विरुद्ध प्रतिक्रिया
-
C.
कठोर संस्कृत-आधारित अनुष्ठान
✓
-
D.
संतों की जनसामान्य तक पहुँच
सही उत्तर:
C
— कठोर संस्कृत-आधारित अनुष्ठान
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने संस्कृत आधारित जटिल अनुष्ठानों और कर्मकांडों को चुनौती दी। इसके विपरीत स्थानीय भाषाएँ, सामाजिक समानता और संतों का जनसंपर्क इसके प्रसार के प्रमुख कारण थे।
प्रश्न 85: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन चैतन्य महाप्रभु के संबंध में सही नहीं है?
-
A.
वे गौड़ीय वैष्णव परंपरा से जुड़े थे
-
B.
उन्होंने संकीर्तन पर बल दिया
-
C.
वे निर्गुण भक्ति के प्रमुख प्रवर्तक थे
✓
-
D.
उनका संबंध बंगाल क्षेत्र से था
सही उत्तर:
C
— वे निर्गुण भक्ति के प्रमुख प्रवर्तक थे
व्याख्या (Explanation):चैतन्य महाप्रभु सगुण कृष्णभक्ति के प्रमुख संत थे। उन्होंने राधा-कृष्ण प्रेम और संकीर्तन आंदोलन को लोकप्रिय बनाया। निर्गुण भक्ति का संबंध कबीर और गुरु नानक जैसे संतों से था।
प्रश्न 86: निम्नलिखित में से किस संत ने “बेगमपुरा” नामक आदर्श समाज की कल्पना की?
-
A.
रविदास
✓
-
B.
कबीर
-
C.
नामदेव
-
D.
गुरु नानक
सही उत्तर:
A
— रविदास
व्याख्या (Explanation):रविदास ने “बेगमपुरा” की कल्पना ऐसे समाज के रूप में की जहाँ दुःख, कर और सामाजिक भेदभाव न हो। यह सामाजिक समानता और न्याय की अवधारणा को दर्शाता है।
प्रश्न 87: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) बसवन्ना ने वीरशैव अथवा लिंगायत आंदोलन का नेतृत्व किया। (2) लिंगायत आंदोलन ने जाति व्यवस्था और ब्राह्मणवादी कर्मकांडों का विरोध किया।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
✓
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
C
— 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):बसवन्ना 12वीं शताब्दी में कर्नाटक के वीरशैव/लिंगायत आंदोलन के प्रमुख नेता थे। इस आंदोलन ने जाति व्यवस्था, यज्ञ और कर्मकांडों का विरोध किया तथा व्यक्तिगत भक्ति और सामाजिक समानता पर बल दिया।
प्रश्न 88: भक्ति आंदोलन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि उसने:
-
A.
केवल संस्कृत साहित्य को बढ़ावा दिया
-
B.
मंदिरों की राजनीतिक शक्ति बढ़ाई
-
C.
धार्मिक कर्मकांड को अनिवार्य बनाया
-
D.
धार्मिक अनुभव को अधिक व्यक्तिगत बनाया
✓
सही उत्तर:
D
— धार्मिक अनुभव को अधिक व्यक्तिगत बनाया
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने धर्म को व्यक्तिगत अनुभव और ईश्वर के प्रति प्रेम से जोड़ा। इससे धार्मिक जीवन अधिक सरल और जनसुलभ बना। यह आंदोलन कर्मकांड और पुरोहितवाद के विरुद्ध था।
प्रश्न 89: निम्नलिखित में से किस ग्रंथ का संबंध गुरु नानक की वाणी से है?
-
A.
गुरु ग्रंथ साहिब
✓
-
B.
पद्मावत
-
C.
गीतगोविंद
-
D.
पृथ्वीराज रासो
सही उत्तर:
A
— गुरु ग्रंथ साहिब
व्याख्या (Explanation):गुरु ग्रंथ साहिब में गुरु नानक सहित कई सिख गुरुओं और भक्ति संतों की वाणी संकलित है। यह सिख धर्म का प्रमुख धार्मिक ग्रंथ है।
प्रश्न 90: निम्नलिखित में से किस संत ने “हरि को भजे सो हरि का होई” जैसी समन्वयवादी विचारधारा को बढ़ावा दिया?
-
A.
बसवन्ना
-
B.
रविदास
✓
-
C.
शंकराचार्य
-
D.
चैतन्य महाप्रभु
सही उत्तर:
B
— रविदास
व्याख्या (Explanation):रविदास ने जातिगत भेदभाव का विरोध किया और समानता पर आधारित समाज की कल्पना की। उनकी शिक्षाएँ समन्वयवादी और मानवतावादी थीं।
प्रश्न 91: भक्ति आंदोलन के संदर्भ में “सगुण भक्ति” का संबंध किससे है?
-
A.
निराकार ईश्वर की उपासना
-
B.
केवल ध्यान योग से मोक्ष
-
C.
ईश्वर के साकार रूप की उपासना
✓
-
D.
वेदों की अनिवार्यता
सही उत्तर:
C
— ईश्वर के साकार रूप की उपासना
व्याख्या (Explanation):सगुण भक्ति में ईश्वर को साकार रूप में पूजा जाता है, जैसे राम और कृष्ण। तुलसीदास, सूरदास और मीराबाई इसके प्रमुख संत थे। निर्गुण परंपरा इसके विपरीत ईश्वर को निराकार मानती थी।
प्रश्न 92: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) कबीर ने हिंदू और मुस्लिम दोनों धार्मिक आडंबरों की आलोचना की। (2) कबीर मूर्ति पूजा के समर्थक थे।
-
A.
केवल 1
✓
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
A
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):कबीर ने दोनों धर्मों के बाहरी कर्मकांडों की आलोचना की और निर्गुण ईश्वर की उपासना पर बल दिया। वे मूर्ति पूजा के विरोधी थे। इसलिए कथन 2 गलत है।
प्रश्न 93: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
-
A.
चैतन्य महाप्रभु — महाराष्ट्र
-
B.
तुकाराम — बंगाल
-
C.
नामदेव — महाराष्ट्र
✓
-
D.
बसवन्ना — पंजाब
सही उत्तर:
C
— नामदेव — महाराष्ट्र
व्याख्या (Explanation):नामदेव महाराष्ट्र के प्रसिद्ध भक्ति संत थे। चैतन्य महाप्रभु बंगाल से जुड़े थे, जबकि बसवन्ना कर्नाटक से संबंधित थे।
प्रश्न 94: निम्नलिखित में से किस संत का संबंध “पुष्टिमार्ग” से है?
-
A.
रामानंद
-
B.
वल्लभाचार्य
✓
-
C.
नामदेव
-
D.
बसवन्ना
सही उत्तर:
B
— वल्लभाचार्य
व्याख्या (Explanation):वल्लभाचार्य ने पुष्टिमार्ग की स्थापना की, जो कृष्णभक्ति पर आधारित था। इसमें ईश्वर की कृपा (Pushti) को मोक्ष का प्रमुख साधन माना गया। यह पश्चिम भारत में विशेष रूप से लोकप्रिय हुआ।
प्रश्न 95: इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) आलवार संत वैष्णव परंपरा से जुड़े थे। (2) नयनार संतों ने बौद्ध धर्म का समर्थन किया।
-
A.
केवल 1
✓
-
B.
केवल 2
-
C.
1 और 2 दोनों
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
A
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):आलवार संत विष्णु भक्त थे, इसलिए कथन 1 सही है। नयनार संत शैव परंपरा से जुड़े थे तथा उन्होंने बौद्ध और जैन प्रभाव का विरोध किया, इसलिए कथन 2 गलत है।
प्रश्न 96: निम्नलिखित संतों में से कौन “निर्गुण भक्ति” परंपरा से संबंधित नहीं था?
-
A.
कबीर
-
B.
दादूदयाल
-
C.
गुरु नानक
-
D.
सूरदास
✓
सही उत्तर:
D
— सूरदास
व्याख्या (Explanation):सूरदास सगुण कृष्णभक्ति परंपरा से संबंधित थे और उन्होंने “सूरसागर” की रचना की। जबकि कबीर, दादूदयाल और गुरु नानक निर्गुण भक्ति परंपरा के प्रमुख संत थे।
प्रश्न 97: Assertion (A): चिश्ती सूफी संतों ने कठोर शाही संरक्षण को स्वीकार करने पर बल दिया। Reason (R): अधिकांश चिश्ती संत शासकों से दूरी बनाए रखने के पक्षधर थे।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):चिश्ती सूफी संत सामान्यतः शासकों और राजकीय संरक्षण से दूरी बनाए रखते थे। इसलिए Assertion गलत तथा Reason सही है।
प्रश्न 98: Assertion (A): भक्ति आंदोलन के कुछ संतों ने जाति व्यवस्था का विरोध किया। Reason (R): इन संतों का मानना था कि ईश्वर की दृष्टि में सभी मनुष्य समान हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):भक्ति संतों ने सामाजिक भेदभाव का विरोध किया क्योंकि वे सभी मनुष्यों को ईश्वर की दृष्टि में समान मानते थे। इसलिए Reason, Assertion की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है।
प्रश्न 99: Assertion (A): तुलसीदास ने रामभक्ति को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। Reason (R): तुलसीदास ने संस्कृत भाषा में ‘रामचरितमानस’ की रचना की।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):तुलसीदास ने रामभक्ति को लोकप्रिय बनाया, यह सत्य है। लेकिन ‘रामचरितमानस’ की रचना संस्कृत में नहीं बल्कि अवधी भाषा में हुई थी।
प्रश्न 100: Assertion (A): कबीर और गुरु नानक दोनों ने धार्मिक सहिष्णुता पर बल दिया। Reason (R): दोनों संतों ने एकेश्वरवाद की अवधारणा को स्वीकार किया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):कबीर और गुरु नानक दोनों एक निराकार ईश्वर में विश्वास करते थे तथा धार्मिक विभाजनों को महत्व नहीं देते थे। यही कारण था कि उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता और समन्वय पर बल दिया।
प्रश्न 101: Assertion (A): भक्ति आंदोलन का प्रभाव केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित रहा। Reason (R): भक्ति आंदोलन ने क्षेत्रीय साहित्य और भाषाओं के विकास में योगदान दिया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन का प्रभाव सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्रों पर भी पड़ा। क्षेत्रीय भाषाओं और साहित्य के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
प्रश्न 102: Assertion (A): गुरु नानक ने धार्मिक आडंबरों की आलोचना की। Reason (R): गुरु नानक ने सिख धर्म में खालसा पंथ की स्थापना की।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):गुरु नानक ने धार्मिक आडंबरों एवं बाह्य कर्मकांडों की आलोचना की थी। लेकिन खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोबिंद सिंह ने की थी।
प्रश्न 103: Assertion (A): सूफी संतों और भक्ति संतों दोनों ने स्थानीय भाषाओं का उपयोग किया। Reason (R): स्थानीय भाषाओं के उपयोग से उनकी शिक्षाएँ व्यापक जनता तक पहुँचीं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):सूफी और भक्ति संतों ने स्थानीय भाषाओं का उपयोग इसलिए किया ताकि सामान्य जनता उनकी शिक्षाओं को समझ सके। इसलिए Reason, Assertion की सीधी व्याख्या करता है।
प्रश्न 104: Assertion (A): भक्ति आंदोलन ने सामाजिक समानता की भावना को प्रोत्साहित किया। Reason (R): अनेक भक्ति संत निम्न जातियों एवं साधारण परिवारों से आते थे।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने सामाजिक समानता को बढ़ावा दिया, यह सत्य है। अनेक संतों का निम्न सामाजिक वर्गों से आना भी सत्य है, परंतु यह Assertion की प्रत्यक्ष व्याख्या नहीं बल्कि एक संबंधित तथ्य है।
प्रश्न 105: Assertion (A): अलवार और नयनार संतों ने दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाया। Reason (R): अलवार संत मुख्यतः शिव भक्ति से जुड़े थे।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):अलवार और नयनार संतों ने दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाया। परंतु अलवार संत वैष्णव परंपरा से जुड़े थे, जबकि नयनार संत शैव परंपरा से जुड़े थे।
प्रश्न 106: Assertion (A): निर्गुण भक्ति परंपरा के संत मूर्ति-पूजा का विरोध करते थे। Reason (R): निर्गुण संत ईश्वर को निराकार और सर्वव्यापी मानते थे।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):निर्गुण संतों के अनुसार ईश्वर निराकार और सर्वव्यापी है, इसलिए वे मूर्ति-पूजा को आवश्यक नहीं मानते थे। अतः Reason, Assertion की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है।
प्रश्न 107: निम्नलिखित में से किस संत ने “सखी” और “सबद” शैली का व्यापक उपयोग किया?
-
A.
चैतन्य महाप्रभु
-
B.
सूरदास
-
C.
कबीर
✓
-
D.
नामदेव
सही उत्तर:
C
— कबीर
व्याख्या (Explanation):कबीर की रचनाओं में “साखी” और “सबद” प्रमुख साहित्यिक रूप थे। उनकी भाषा सरल और जनसाधारण की थी। वे निर्गुण भक्ति परंपरा के प्रमुख संत थे।
प्रश्न 108: “बीजक” नामक ग्रंथ किस संत से संबंधित है?
-
A.
सूरदास
-
B.
कबीर
✓
-
C.
तुलसीदास
-
D.
रविदास
सही उत्तर:
B
— कबीर
व्याख्या (Explanation):“बीजक” कबीर की वाणियों का प्रमुख संकलन है। इसमें साखी, सबद और रमैनी शामिल हैं। कबीर ने धार्मिक आडंबरों और सामाजिक भेदभाव की आलोचना की।
प्रश्न 109: वल्लभाचार्य द्वारा प्रतिपादित दर्शन को क्या कहा जाता है?
-
A.
द्वैतवाद
-
B.
शुद्धाद्वैतवाद
✓
-
C.
अद्वैतवाद
-
D.
विशिष्टाद्वैतवाद
सही उत्तर:
B
— शुद्धाद्वैतवाद
व्याख्या (Explanation):वल्लभाचार्य ने शुद्धाद्वैतवाद का प्रतिपादन किया तथा पुष्टिमार्ग की स्थापना की। वे कृष्णभक्ति के समर्थक थे। उनके अनुसार भक्ति ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का माध्यम है।
प्रश्न 110: रामानंद के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
-
A.
वे केवल संस्कृत में उपदेश देते थे
-
B.
वे दक्षिण भारत के शैव संत थे
-
C.
उन्होंने केवल ब्राह्मणों को शिष्य बनाया
-
D.
उन्होंने भक्ति को सभी जातियों के लिए खुला बनाया
✓
सही उत्तर:
D
— उन्होंने भक्ति को सभी जातियों के लिए खुला बनाया
व्याख्या (Explanation):रामानंद उत्तर भारत के प्रमुख वैष्णव संत थे। उन्होंने जाति-बंधन को कम महत्व दिया और सभी वर्गों को भक्ति का अधिकार प्रदान किया। कबीर और रविदास को भी उनकी परंपरा से जोड़ा जाता है।
प्रश्न 111: भक्ति आंदोलन के कारण निम्नलिखित में से कौन-सा प्रभाव पड़ा?
-
A.
संस्कृत का पूर्ण पतन
-
B.
जाति व्यवस्था का पूर्ण अंत
-
C.
क्षेत्रीय भाषाओं का विकास
✓
-
D.
केवल मंदिर निर्माण में वृद्धि
सही उत्तर:
C
— क्षेत्रीय भाषाओं का विकास
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन ने क्षेत्रीय भाषाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। संतों ने लोकभाषाओं में रचनाएँ लिखीं, जिससे साहित्य और संस्कृति का प्रसार हुआ। जाति व्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं हुई, इसलिए विकल्प B गलत है।
प्रश्न 112: निम्नलिखित में से कौन-सा संत “वारकरी संप्रदाय” से संबंधित था?
-
A.
तुकाराम
✓
-
B.
चैतन्य महाप्रभु
-
C.
रामानंद
-
D.
वल्लभाचार्य
सही उत्तर:
A
— तुकाराम
व्याख्या (Explanation):तुकाराम महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के प्रमुख संत थे। यह संप्रदाय विठोबा (विठ्ठल) की भक्ति से जुड़ा था। वारकरी परंपरा सामाजिक समानता और भक्ति संगीत के लिए प्रसिद्ध थी।
प्रश्न 113: “अभंग” रचनाएँ मुख्यतः किस भाषा में लिखी गई थीं?
-
A.
पंजाबी
-
B.
बंगाली
-
C.
अवधी
-
D.
मराठी
✓
सही उत्तर:
D
— मराठी
व्याख्या (Explanation):अभंग महाराष्ट्र की भक्ति परंपरा की प्रसिद्ध काव्य शैली थी, जिसे नामदेव और तुकाराम जैसे संतों ने लोकप्रिय बनाया। ये मुख्यतः मराठी भाषा में लिखे गए।
प्रश्न 114: मीराबाई किस भक्ति परंपरा से संबंधित थीं?
-
A.
निर्गुण भक्ति
-
B.
शैव भक्ति
-
C.
कृष्ण भक्ति
✓
-
D.
सूफी परंपरा
सही उत्तर:
C
— कृष्ण भक्ति
व्याख्या (Explanation):मीराबाई राजस्थान की प्रसिद्ध कृष्णभक्त संत थीं। उनकी रचनाएँ प्रेम और समर्पण पर आधारित थीं। वे सगुण भक्ति परंपरा से जुड़ी थीं और कृष्ण को अपना आराध्य मानती थीं।
प्रश्न 115: निम्नलिखित में से किस संत ने “एक ओंकार” का सिद्धांत दिया?
-
A.
रामानुजाचार्य
-
B.
गुरु नानक
✓
-
C.
नामदेव
-
D.
मीराबाई
सही उत्तर:
B
— गुरु नानक
व्याख्या (Explanation):गुरु नानक ने “एक ओंकार” के माध्यम से एकेश्वरवाद का संदेश दिया। उन्होंने जाति-भेद, अंधविश्वास और कर्मकांड का विरोध किया। उनका संदेश बाद में सिख धर्म की आधारशिला बना।
प्रश्न 116: भक्ति आंदोलन के संदर्भ में “निर्गुण भक्ति” का अर्थ क्या है?
-
A.
ईश्वर को निराकार मानना
✓
-
B.
केवल वेदों की पूजा करना
-
C.
अनेक देवताओं की उपासना करना
-
D.
मूर्तियों को ईश्वर का रूप मानना
सही उत्तर:
A
— ईश्वर को निराकार मानना
व्याख्या (Explanation):निर्गुण भक्ति परंपरा में ईश्वर को निराकार, अजन्मा और सर्वव्यापी माना गया। कबीर, गुरु नानक और दादूदयाल इसके प्रमुख संत थे। इसके विपरीत सगुण भक्ति में ईश्वर को साकार रूप में स्वीकार किया गया।
प्रश्न 117: निम्नलिखित में से कौन-सा संत कृष्ण भक्ति से संबंधित था?
-
A.
चैतन्य महाप्रभु
✓
-
B.
बसवन्ना
-
C.
कबीर
-
D.
दादूदयाल
सही उत्तर:
A
— चैतन्य महाप्रभु
व्याख्या (Explanation):चैतन्य महाप्रभु बंगाल में कृष्ण भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत थे। उन्होंने संकीर्तन परंपरा को लोकप्रिय बनाया। वे वैष्णव भक्ति की सगुण शाखा से जुड़े थे।
प्रश्न 118: गुरु नानक द्वारा प्रतिपादित “लंगर” व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य क्या था?
-
A.
सैन्य प्रशिक्षण देना
-
B.
धार्मिक कर एकत्र करना
-
C.
व्यापार को बढ़ावा देना
-
D.
सामाजिक समानता स्थापित करना
✓
सही उत्तर:
D
— सामाजिक समानता स्थापित करना
व्याख्या (Explanation):गुरु नानक ने लंगर व्यवस्था के माध्यम से जाति-भेद और सामाजिक असमानता को समाप्त करने का प्रयास किया। इसमें सभी लोग एक साथ बैठकर भोजन करते थे। यह सिख परंपरा में समानता और सेवा का प्रतीक है।
प्रश्न 119: कबीर के उपदेशों का मुख्य आधार क्या था?
-
A.
मूर्ति पूजा का समर्थन
-
B.
जाति व्यवस्था का समर्थन
-
C.
निर्गुण भक्ति और सामाजिक समानता
✓
-
D.
वैदिक कर्मकांड का विस्तार
सही उत्तर:
C
— निर्गुण भक्ति और सामाजिक समानता
व्याख्या (Explanation):कबीर निर्गुण भक्ति परंपरा के प्रमुख संत थे। उन्होंने हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के आडंबरों की आलोचना की तथा जाति-भेद का विरोध किया। उनके दोहे सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक एकता पर आधारित थे।
प्रश्न 120: 'रामचरितमानस' के रचयिता कौन हैं?
-
A.
सूरदास
-
B.
कबीर
-
C.
मलिक मुहम्मद जायसी
-
D.
तुलसीदास
✓
सही उत्तर:
D
— तुलसीदास
व्याख्या (Explanation):गोस्वामी तुलसीदास ने सोलहवीं शताब्दी में अवधी भाषा में 'रामचरितमानस' की रचना की, जो राम-भक्ति परंपरा का प्रमुख ग्रंथ है। सूरदास ने ब्रजभाषा में कृष्ण-भक्ति के पद लिखे, जो 'सूरसागर' में संकलित माने जाते हैं। कबीर निर्गुण भक्ति के संत थे और उनकी वाणी 'बीजक' में मिलती है। जायसी सूफी कवि थे, जिन्होंने 'पद्मावत' लिखा।
प्रश्न 121: रामानुजाचार्य किस दर्शन से संबंधित थे?
-
A.
द्वैतवाद
-
B.
अद्वैतवाद
-
C.
विशिष्टाद्वैतवाद
✓
-
D.
शुद्धाद्वैतवाद
सही उत्तर:
C
— विशिष्टाद्वैतवाद
व्याख्या (Explanation):रामानुजाचार्य ने विशिष्टाद्वैतवाद का प्रतिपादन किया। उनके अनुसार जीव और ब्रह्म अलग होते हुए भी ब्रह्म से जुड़े रहते हैं। उन्होंने भक्ति को मोक्ष का प्रमुख मार्ग माना।
प्रश्न 122: भक्ति आंदोलन के प्रसार में किस तत्व की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही?
-
A.
संस्कृत भाषा का अनिवार्य प्रयोग
-
B.
स्थानीय भाषाओं का उपयोग
✓
-
C.
राजकीय आदेश
-
D.
विदेशी व्यापार
सही उत्तर:
B
— स्थानीय भाषाओं का उपयोग
व्याख्या (Explanation):भक्ति संतों ने जनसाधारण तक पहुँचने के लिए स्थानीय भाषाओं का उपयोग किया। कबीर ने सधुक्कड़ी, तुलसीदास ने अवधी, मीरा ने राजस्थानी तथा नामदेव ने मराठी में रचनाएँ कीं। यही कारण था कि आंदोलन व्यापक जनसमर्थन प्राप्त कर सका।
प्रश्न 123: नयनार संतों का संबंध किस धार्मिक परंपरा से था?
-
A.
शैव परंपरा
✓
-
B.
बौद्ध परंपरा
-
C.
जैन परंपरा
-
D.
सूफी परंपरा
सही उत्तर:
A
— शैव परंपरा
व्याख्या (Explanation):नयनार संत शैव भक्ति परंपरा से जुड़े थे और उन्होंने भगवान शिव की उपासना का प्रचार किया। इन्होंने तमिल भाषा में भक्ति साहित्य की रचना की तथा जैन और बौद्ध प्रभाव का विरोध किया।
प्रश्न 124: आलवार संत मुख्यतः किस देवता के उपासक थे?
-
A.
शिव
-
B.
शक्ति
-
C.
विष्णु
✓
-
D.
सूर्य
सही उत्तर:
C
— विष्णु
व्याख्या (Explanation):आलवार संत वैष्णव परंपरा से जुड़े थे और विष्णु भक्ति का प्रचार करते थे। इसके विपरीत नयनार संत शिवभक्त थे।
प्रश्न 125: निम्नलिखित में से किसे भक्ति आंदोलन का प्रारंभिक केंद्र माना जाता है?
-
A.
पंजाब
-
B.
तमिलनाडु
✓
-
C.
बंगाल
-
D.
गुजरात
सही उत्तर:
B
— तमिलनाडु
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन का प्रारंभ दक्षिण भारत, विशेषकर तमिल क्षेत्र में आलवार और नयनार संतों से माना जाता है। ये संत 6वीं–9वीं शताब्दी के बीच सक्रिय थे। उन्होंने स्थानीय भाषा में भक्ति का प्रचार किया।
प्रश्न 126: भक्ति आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
-
A.
यह केवल दक्षिण भारत तक सीमित आंदोलन था
-
B.
इसका मुख्य उद्देश्य वैदिक यज्ञों को पुनर्जीवित करना था
-
C.
इसने ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत भक्ति पर बल दिया
✓
-
D.
यह केवल मुस्लिम संतों द्वारा चलाया गया आंदोलन था
सही उत्तर:
C
— इसने ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत भक्ति पर बल दिया
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन का मुख्य आधार ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत भक्ति था। इस आंदोलन ने कर्मकांड, जातिगत भेदभाव और धार्मिक आडंबरों का विरोध किया। यह आंदोलन दक्षिण भारत से प्रारंभ होकर उत्तर भारत तक फैला।
प्रश्न 127: Assertion (A): तुलसीदास ने अवधी भाषा में रचनाएँ कीं। Reason (R): तुलसीदास मुगल सम्राट अकबर के नवरत्नों में शामिल थे।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):तुलसीदास ने अवधी भाषा में ‘रामचरितमानस’ की रचना की। वे अकबर के नवरत्नों में शामिल नहीं थे।
प्रश्न 128: Assertion (A): सूफी और भक्ति आंदोलनों में कुछ समानताएँ थीं। Reason (R): दोनों ने प्रेम और भक्ति के माध्यम से ईश्वर तक पहुँचने पर बल दिया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):सूफी और भक्ति परंपराओं दोनों में ईश्वर के प्रति प्रेम, भक्ति और आंतरिक आध्यात्मिक अनुभव पर बल दिया गया। यही उनकी समानता का प्रमुख कारण था।
प्रश्न 129: Assertion (A): चैतन्य महाप्रभु शैव भक्ति परंपरा से जुड़े थे। Reason (R): चैतन्य महाप्रभु कृष्ण भक्ति के प्रमुख संत माने जाते हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):चैतन्य महाप्रभु वैष्णव एवं कृष्ण भक्ति परंपरा के प्रमुख संत थे। इसलिए Assertion गलत तथा Reason सही है।
प्रश्न 130: Assertion (A): भक्ति संतों ने क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग किया। Reason (R): इससे उनकी शिक्षाएँ सामान्य जनता तक आसानी से पहुँचीं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):भक्ति संतों ने संस्कृत के बजाय क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग किया ताकि सामान्य जनता उनकी शिक्षाओं को समझ सके। इसलिए Reason, Assertion की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 131: Assertion (A): मीराबाई कृष्ण भक्ति परंपरा से जुड़ी थीं। Reason (R): मीराबाई ने ‘रामचरितमानस’ की रचना की।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):मीराबाई कृष्ण की अनन्य भक्त थीं। ‘रामचरितमानस’ की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की थी, न कि मीराबाई ने।
प्रश्न 132: Assertion (A): गुरु नानक ने जाति-भेद का विरोध किया। Reason (R): गुरु नानक सभी मनुष्यों की समानता में विश्वास करते थे।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):गुरु नानक ने सामाजिक समानता पर बल दिया और जाति-भेद का विरोध किया। सभी मनुष्यों की समानता में विश्वास ही उनके जाति-विरोध का मुख्य कारण था।
प्रश्न 133: Assertion (A): भक्ति आंदोलन केवल दक्षिण भारत तक सीमित था। Reason (R): उत्तर भारत में भी कई संतों ने भक्ति परंपरा को आगे बढ़ाया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन दक्षिण भारत से प्रारंभ अवश्य हुआ, परंतु बाद में यह उत्तर भारत सहित पूरे देश में फैल गया। उत्तर भारत में कबीर, तुलसीदास, गुरु नानक आदि संतों ने इसे आगे बढ़ाया।
प्रश्न 134: Assertion (A): रामानुजाचार्य ने भक्ति को मोक्ष प्राप्ति का महत्वपूर्ण साधन माना। Reason (R): रामानुजाचार्य अद्वैत वेदांत के प्रमुख प्रवर्तक थे।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):रामानुजाचार्य ने विशिष्टाद्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया तथा भक्ति को महत्व दिया। वे अद्वैत वेदांत के प्रवर्तक नहीं थे; अद्वैत वेदांत के प्रमुख प्रवर्तक आदि शंकराचार्य थे।
प्रश्न 135: Assertion (A): कबीर ने हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों की रूढ़ियों की आलोचना की। Reason (R): कबीर ने ‘बीजक’ नामक ग्रंथ की रचना की।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):कबीर द्वारा दोनों धर्मों की रूढ़ियों की आलोचना करना सत्य है। ‘बीजक’ उनकी रचनाओं का संग्रह है, परंतु यह Assertion का प्रत्यक्ष कारण या व्याख्या नहीं है। इसलिए उत्तर B है।
प्रश्न 136: Assertion (A): भक्ति आंदोलन ने ईश्वर तक पहुँच के लिए व्यक्तिगत भक्ति पर बल दिया। Reason (R): भक्ति संतों ने जटिल कर्मकांडों और पुरोहितवाद की आलोचना की।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):भक्ति आंदोलन का मुख्य उद्देश्य ईश्वर के साथ प्रत्यक्ष एवं व्यक्तिगत संबंध स्थापित करना था। इसलिए संतों ने कर्मकांड और पुरोहितवाद का विरोध किया। यह Reason सीधे Assertion की व्याख्या करता है।