भारतीय संविधान MCQ in Hindi, UPSC Polity Important Questions, Quiz और Previous Year Questions (PYQ) पढ़ें। UPSC Prelims के लिए महत्वपूर्ण Objective Questions एवं Practice MCQ के साथ अपनी तैयारी मजबूत करें।

This quiz contains 175 carefully selected multiple-choice questions (MCQ) with detailed explanations for each answer. Questions cover important topics from Polity.

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भारतीय संविधान MCQ in Hindi | UPSC Polity Important Questions, Quiz & PYQ

भारतीय संविधान MCQ in Hindi, UPSC Polity Important Questions, Quiz और Previous Year Questions (PYQ) पढ़ें। UPSC Prelims के लिए महत्वपूर्ण Objective Questions एवं Practice MCQ के साथ अपनी तैयारी मजबूत करें।

📊
Difficulty
Hard
❓
Num Questions
175
❓
Points Per Question
1
⏱️
Time Limit
120 minutes

All MCQ Questions with Answers and Explanations

प्रश्न 1: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया। (2) संविधान का अधिकांश भाग 26 जनवरी 1950 को प्रभावी हुआ। (3) 26 जनवरी की तिथि का चयन स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से भी जुड़ा था।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया। संविधान का अधिकांश भाग 26 जनवरी 1950 को प्रभावी हुआ, जिस दिन भारत गणराज्य बना। 26 जनवरी का चयन 1930 के पूर्ण स्वराज्य संकल्प की ऐतिहासिक स्मृति को सम्मान देने के लिए किया गया था। इस प्रकार यह तिथि संवैधानिक और राष्ट्रीय आंदोलन दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 2: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय संविधान की संघीय विशेषताओं में लिखित संविधान, शक्तियों का विभाजन और स्वतंत्र न्यायपालिका शामिल हैं। (2) एकल नागरिकता तथा अवशिष्ट शक्तियों का केंद्र में निहित होना एकात्मक झुकाव को दर्शाते हैं। (3) भारतीय संविधान संघीय और एकात्मक दोनों विशेषताओं का समन्वय करता है।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान की विशेषता उसकी मिश्रित प्रकृति में निहित है। इसमें संघीय विशेषताएँ—जैसे लिखित संविधान, शक्तियों का विभाजन, संविधान की सर्वोच्चता तथा स्वतंत्र न्यायपालिका—और एकात्मक विशेषताएँ—जैसे एकल नागरिकता, अवशिष्ट शक्तियों का केंद्र में निहित होना तथा आपातकालीन प्रावधान—दोनों सम्मिलित हैं। इसी कारण अनेक विद्वान भारत को सहकारी संघवाद अथवा अर्ध-संघीय व्यवस्था का उदाहरण मानते हैं।

प्रश्न 3: प्रस्तावना के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रस्तावना संविधान के उद्देश्यों और दर्शन को व्यक्त करती है। (2) प्रस्तावना संविधान की व्याख्या में सहायक हो सकती है। (3) प्रस्तावना स्वयं संविधान संशोधन की शक्ति का स्रोत है।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
प्रस्तावना संविधान के उद्देश्यों, मूल्यों और दर्शन को व्यक्त करती है तथा संवैधानिक व्याख्या में सहायक होती है। किंतु यह संविधान संशोधन की शक्ति का स्रोत नहीं है; यह शक्ति संविधान के अन्य प्रावधानों से प्राप्त होती है। अतः तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 4: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान की सर्वोच्चता भारतीय शासन प्रणाली की मूल विशेषता है। (2) संसद की विधायी शक्ति संविधान से सीमित और नियंत्रित होती है। (3) संसद किसी भी संवैधानिक सीमा से परे जाकर कानून बना सकती है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
भारतीय व्यवस्था में संविधान सर्वोच्च है और संसद अपनी शक्तियाँ संविधान से प्राप्त करती है। संसद द्वारा निर्मित कोई भी कानून संविधान के अनुरूप होना चाहिए। न्यायिक पुनरावलोकन की व्यवस्था इसी सिद्धांत की रक्षा करती है। अतः तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 5: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारत शासन अधिनियम, 1935 के अंतर्गत प्रांतीय स्वायत्तता की व्यवस्था की गई थी। (2) भारतीय संविधान ने राज्यों को पूर्ण संप्रभुता प्रदान कर दी। (3) भारतीय संविधान ने 1935 के अधिनियम की कुछ प्रशासनिक अवधारणाओं को अपनाया।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारत शासन अधिनियम, 1935 ने प्रांतीय स्वायत्तता का प्रावधान किया था। भारतीय संविधान ने अनेक प्रशासनिक एवं संस्थागत तत्व इसी अधिनियम से ग्रहण किए, किंतु राज्यों को पूर्ण संप्रभुता नहीं दी। भारतीय संघ की संप्रभुता संविधान में निहित है और राज्य संघ का अभिन्न अंग हैं। इसलिए दूसरा कथन गलत है।

प्रश्न 6: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान सभा में विभिन्न समितियों की व्यवस्था का उद्देश्य कार्य को अधिक व्यवस्थित और विशेषज्ञतापूर्ण बनाना था। (2) सभी संवैधानिक विषयों पर सीधे पूर्ण सभा में ही प्रारंभिक मसौदा तैयार किया गया था।

  • A. केवल 1 ✓
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — केवल 1
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा ने अपने कार्य को कुशल बनाने के लिए अनेक समितियाँ गठित की थीं, जैसे प्रारूप समिति, संघ संविधान समिति, संघ शक्तियाँ समिति तथा मौलिक अधिकार समिति। इन समितियों ने प्रारंभिक रिपोर्टें तैयार कीं, जिन पर बाद में पूर्ण सभा में चर्चा हुई। इसलिए दूसरा कथन गलत है।

प्रश्न 7: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन प्रस्तावना के संबंध में सही नहीं है?

  • A. प्रस्तावना संविधान के मूल आदर्शों को व्यक्त करती है।
  • B. प्रस्तावना संविधान की व्याख्या में सहायक हो सकती है।
  • C. प्रस्तावना संविधान की दार्शनिक पृष्ठभूमि प्रस्तुत करती है।
  • D. प्रस्तावना स्वयं न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय अधिकार प्रदान करती है। ✓
सही उत्तर: D — प्रस्तावना स्वयं न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय अधिकार प्रदान करती है।
व्याख्या (Explanation):
प्रस्तावना संविधान के उद्देश्यों, आदर्शों और दर्शन का सार प्रस्तुत करती है तथा संवैधानिक व्याख्या में सहायक है। किंतु यह स्वयं न्यायालय में प्रत्यक्ष रूप से प्रवर्तनीय अधिकार प्रदान नहीं करती। इसलिए विकल्प D गलत कथन है।

प्रश्न 8: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय संघ की संवैधानिक प्रकृति के संबंध में सर्वाधिक उपयुक्त है?

  • A. भारतीय संघ राज्यों के बीच समझौते का परिणाम है।
  • B. भारतीय संघ संविधान द्वारा निर्मित अविभाज्य राजनीतिक इकाई है। ✓
  • C. राज्यों को संघ से पृथक होने का अधिकार प्राप्त है।
  • D. संसद राज्यों की सीमाओं में कोई परिवर्तन नहीं कर सकती।
सही उत्तर: B — भारतीय संघ संविधान द्वारा निर्मित अविभाज्य राजनीतिक इकाई है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी संविदात्मक समझौते का परिणाम नहीं है। संविधान निर्माताओं ने जानबूझकर "Union of States" शब्द का प्रयोग किया ताकि यह स्पष्ट हो कि संघ अविभाज्य है और किसी राज्य को पृथक होने का अधिकार प्राप्त नहीं है। संसद अनुच्छेद 3 के अंतर्गत राज्यों की सीमाओं एवं नामों में परिवर्तन कर सकती है।

प्रश्न 9: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय धर्मनिरपेक्षता का तात्पर्य राज्य द्वारा सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान एवं निष्पक्ष व्यवहार से है। (2) भारतीय धर्मनिरपेक्षता का मॉडल धर्म और राज्य के पूर्ण पृथक्करण पर आधारित है। (3) भारतीय धर्मनिरपेक्षता को प्रायः सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता के रूप में वर्णित किया जाता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारतीय धर्मनिरपेक्षता पश्चिमी मॉडल की तरह धर्म और राज्य के पूर्ण पृथक्करण पर आधारित नहीं है। भारतीय मॉडल को सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता कहा जाता है, जिसमें राज्य सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और निष्पक्षता का दृष्टिकोण अपनाता है। इसलिए पहला और तीसरा कथन सही हैं जबकि दूसरा कथन गलत है।

प्रश्न 10: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) केशवानंद भारती निर्णय ने संसद की संशोधन शक्ति को पूर्णतः समाप्त नहीं किया। (2) इस निर्णय ने संसद की संशोधन शक्ति पर मूल संरचना सिद्धांत के माध्यम से सीमाएँ निर्धारित कीं। (3) प्रस्तावना में निहित कुछ आदर्श मूल संरचना की पहचान में सहायक हो सकते हैं।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने संसद की संशोधन शक्ति को स्वीकार किया, किंतु यह भी स्पष्ट किया कि संविधान की मूल संरचना को नष्ट या परिवर्तित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने प्रस्तावना के आदर्शों जैसे लोकतंत्र, गणराज्य, न्याय, स्वतंत्रता और समानता को मूल संरचना की पहचान में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक माना। यह निर्णय भारतीय संवैधानिक कानून का सबसे महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है।

प्रश्न 11: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रस्तावना में उल्लिखित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व परस्पर पूरक आदर्श हैं। (2) इनमें से किसी एक आदर्श की पूर्ण उपेक्षा संविधान की मूल भावना को प्रभावित कर सकती है। (3) सर्वोच्च न्यायालय ने संवैधानिक व्याख्या में इन मूल्यों को महत्व दिया है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
प्रस्तावना में वर्णित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व भारतीय संवैधानिक दर्शन के परस्पर जुड़े हुए स्तंभ हैं। संविधान सभा की बहसों और सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्याओं में इन मूल्यों को समग्र रूप से समझने पर बल दिया गया है। मूल संरचना सिद्धांत के विकास में भी इन आदर्शों का महत्वपूर्ण प्रभाव देखा जाता है।

प्रश्न 12: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के अंतर्गत संविधान सभा संविधान-निर्माण के साथ-साथ केंद्रीय विधायिका के रूप में भी कार्य कर सकती थी। (2) स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा और केंद्रीय विधानमंडल अलग-अलग संस्थाएँ थीं।

  • A. केवल 1 ✓
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — केवल 1
व्याख्या (Explanation):
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के पश्चात संविधान सभा दोहरी भूमिका निभा रही थी। वह संविधान-निर्माण का कार्य भी कर रही थी तथा केंद्रीय विधायिका के रूप में भी कार्य करती थी। जब वह विधायी कार्य करती थी, तब उसे संविधान सभा (विधायी) कहा जाता था। अतः पहला कथन सही तथा दूसरा कथन गलत है।

प्रश्न 13: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान सभा ने उद्देश्य प्रस्ताव को स्वीकार किया था। (2) उद्देश्य प्रस्ताव बाद में प्रस्तावना की वैचारिक आधारशिला बना। (3) उद्देश्य प्रस्ताव 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत किया गया था।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। संविधान सभा द्वारा इसे स्वीकार किया गया और बाद में यही प्रस्तावना की वैचारिक एवं दार्शनिक आधारशिला बना। प्रस्तावना में निहित अनेक आदर्शों की जड़ें इसी प्रस्ताव में मिलती हैं।

प्रश्न 14: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय संविधान की संघीय-एकात्मक मिश्रित प्रकृति को सर्वाधिक सटीक रूप से व्यक्त करता है?

  • A. सामान्य परिस्थितियों में संघीय तथा आपातकालीन परिस्थितियों में अपेक्षाकृत अधिक एकात्मक स्वरूप उभर सकता है। ✓
  • B. भारत पूर्णतः अमेरिकी मॉडल का अनुसरण करता है।
  • C. राज्यों को अवशिष्ट शक्तियाँ प्राप्त हैं।
  • D. संसद राज्यों की सीमाओं अथवा अस्तित्व में कोई परिवर्तन नहीं कर सकती।
सही उत्तर: A — सामान्य परिस्थितियों में संघीय तथा आपातकालीन परिस्थितियों में अपेक्षाकृत अधिक एकात्मक स्वरूप उभर सकता है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान सामान्य परिस्थितियों में संघीय ढाँचे पर आधारित है, किंतु आपातकालीन अथवा विशेष परिस्थितियों में केंद्र की शक्तियाँ बढ़ जाती हैं और व्यवस्था अपेक्षाकृत अधिक एकात्मक स्वरूप ग्रहण कर सकती है। यही कारण है कि भारतीय संघवाद को लचीला एवं विशिष्ट संघवाद माना जाता है।

प्रश्न 15: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान की सर्वोच्चता और न्यायिक पुनरावलोकन परस्पर संबंधित अवधारणाएँ हैं। (2) यदि न्यायिक पुनरावलोकन समाप्त कर दिया जाए तो संविधान की सर्वोच्चता अप्रभावित रहेगी। (3) सर्वोच्च न्यायालय संविधान का अंतिम व्याख्याकार माना जाता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक पुनरावलोकन संविधान की सर्वोच्चता की रक्षा का प्रमुख साधन है। यदि न्यायिक पुनरावलोकन समाप्त हो जाए तो संविधान के विरुद्ध बनाए गए कानूनों को चुनौती देना कठिन हो जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय संविधान का अंतिम व्याख्याकार माना जाता है। इसलिए दूसरा कथन गलत है।

प्रश्न 16: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान सभा के सभी सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने गए थे। (2) संविधान सभा में देशी रियासतों के प्रतिनिधि भी सम्मिलित थे। (3) संविधान सभा की संरचना में प्रांतों तथा रियासतों दोनों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया था।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3 ✓
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा के सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा नहीं चुने गए थे। प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन करते थे। साथ ही देशी रियासतों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया था। इसलिए दूसरा और तीसरा कथन सही हैं।

प्रश्न 17: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रस्तावना में "समाजवादी" शब्द मूल संविधान का भाग था। (2) "धर्मनिरपेक्ष" शब्द भी मूल संविधान में विद्यमान था। (3) दोनों शब्द 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. केवल 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 3
व्याख्या (Explanation):
मूल संविधान की प्रस्तावना में "समाजवादी" और "धर्मनिरपेक्ष" शब्द नहीं थे। इन्हें 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया। हालांकि इन मूल्यों की भावना संविधान के विभिन्न प्रावधानों में प्रारंभ से ही निहित थी। अतः केवल तीसरा कथन सही है।

प्रश्न 18: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय संविधान की मूल संरचना में संघवाद को शामिल माना गया है। (2) राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन करने की संसद की शक्ति संघवाद के विरुद्ध मानी गई है। (3) भारतीय संघवाद का स्वरूप शास्त्रीय अमेरिकी संघवाद से भिन्न है।

  • A. केवल 1 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
संघवाद भारतीय संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है। हालांकि संसद को अनुच्छेद 3 के अंतर्गत राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन की शक्ति प्राप्त है, इसे भारतीय संघवाद की संवैधानिक विशेषता माना गया है, न कि संघवाद के विरोध में। भारत का संघवाद अमेरिकी संघवाद की तुलना में अधिक केंद्रीकृत है। इसलिए दूसरा कथन गलत है।

प्रश्न 19: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

  • A. रेगुलेटिंग अधिनियम, 1773 — बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर-जनरल बनाना
  • B. पिट्स इंडिया अधिनियम, 1784 — द्वैध नियंत्रण व्यवस्था
  • C. चार्टर अधिनियम, 1833 — बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाना
  • D. चार्टर अधिनियम, 1853 — पृथक निर्वाचन मंडल की व्यवस्था ✓
सही उत्तर: D — चार्टर अधिनियम, 1853 — पृथक निर्वाचन मंडल की व्यवस्था
व्याख्या (Explanation):
पृथक निर्वाचन मंडल की व्यवस्था भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 (मार्ले-मिंटो सुधार) द्वारा प्रारंभ की गई थी। चार्टर अधिनियम, 1853 ने विधायी एवं कार्यपालिका कार्यों के आंशिक पृथक्करण तथा सिविल सेवाओं में प्रतियोगी भर्ती की दिशा में महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया था। इसलिए विकल्प D सही सुमेलित नहीं है।

प्रश्न 20: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) बेरुबारी संघ मामला में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है। (2) केशवानंद भारती मामला ने इस दृष्टिकोण को परिवर्तित करते हुए प्रस्तावना को संविधान का भाग माना। (3) वर्तमान संवैधानिक स्थिति के अनुसार प्रस्तावना संविधान से पृथक दस्तावेज मानी जाती है।

  • A. केवल 1 और 3
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
बेरुबारी संघ मामला में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रस्तावना को संविधान का भाग नहीं माना था। बाद में केशवानंद भारती मामला में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न भाग है और उसकी व्याख्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 21: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय संविधान का निर्माण केवल विदेशी संविधानों से उधार लिए गए प्रावधानों का संकलन नहीं था। (2) संविधान सभा ने भारतीय परिस्थितियों, औपनिवेशिक अनुभवों और स्वतंत्रता आंदोलन की आकांक्षाओं को भी संविधान में समाहित किया। (3) संविधान की प्रस्तावना इन ऐतिहासिक और वैचारिक उद्देश्यों का संक्षिप्त सार प्रस्तुत करती है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान विभिन्न देशों के संवैधानिक अनुभवों से प्रेरित अवश्य है, किंतु यह मात्र उधार लिए गए प्रावधानों का संग्रह नहीं है। संविधान सभा ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र और विकास की आकांक्षाओं को संवैधानिक रूप दिया। प्रस्तावना इन मूल उद्देश्यों और आदर्शों का संक्षिप्त किंतु अत्यंत प्रभावशाली सार प्रस्तुत करती है।

प्रश्न 22: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित "न्याय" की अवधारणा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आयामों को सम्मिलित करती है। (2) प्रस्तावना में वर्णित न्याय का आदर्श नीति-निदेशक तत्वों और मौलिक अधिकारों दोनों से संबंधित है।

  • A. 1 और 2 दोनों ✓
  • B. केवल 1
  • C. केवल 2
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
प्रस्तावना में न्याय को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप में व्यक्त किया गया है। मौलिक अधिकार राजनीतिक एवं नागरिक स्वतंत्रताओं को सुदृढ़ करते हैं, जबकि राज्य के नीति-निदेशक तत्व सामाजिक एवं आर्थिक न्याय की दिशा में राज्य का मार्गदर्शन करते हैं। इस प्रकार प्रस्तावना संविधान के विभिन्न भागों को वैचारिक रूप से जोड़ती है।

प्रश्न 23: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारत शासन अधिनियम, 1935 और भारतीय संविधान के बीच संबंध को सर्वाधिक सटीक रूप से व्यक्त करता है?

  • A. भारतीय संविधान भारत शासन अधिनियम, 1935 की लगभग पूर्ण प्रतिकृति है।
  • B. भारतीय संविधान ने भारत शासन अधिनियम, 1935 से अनेक प्रशासनिक, विधायी तथा संस्थागत प्रावधान ग्रहण किए, परंतु उन्हें लोकतांत्रिक ढाँचे में रूपांतरित किया। ✓
  • C. भारतीय संविधान ने भारत शासन अधिनियम, 1935 को पूर्णतः अस्वीकार कर दिया।
  • D. भारतीय संविधान केवल भारत शासन अधिनियम, 1935 पर आधारित है।
सही उत्तर: B — भारतीय संविधान ने भारत शासन अधिनियम, 1935 से अनेक प्रशासनिक, विधायी तथा संस्थागत प्रावधान ग्रहण किए, परंतु उन्हें लोकतांत्रिक ढाँचे में रूपांतरित किया।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान ने भारत शासन अधिनियम, 1935 से अनेक प्रशासनिक, विधायी तथा संस्थागत प्रावधान ग्रहण किए, जैसे संघीय ढाँचा, राज्यपाल का पद, लोक सेवा आयोग आदि। किंतु इन्हें लोकतांत्रिक, गणतांत्रिक एवं संप्रभु भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप रूपांतरित किया गया। अतः संविधान को 1935 के अधिनियम की प्रतिलिपि कहना भी गलत है और उससे पूर्णतः असंबद्ध मानना भी गलत है।

प्रश्न 24: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय संविधान का संघीय ढाँचा उसकी मूल संरचना का भाग माना गया है। (2) संसद संविधान संशोधन के माध्यम से संघीय ढाँचे को पूर्णतः समाप्त कर सकती है। (3) मूल संरचना सिद्धांत संसद की संशोधन शक्ति पर सीमा लगाता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
संघवाद भारतीय संविधान की मूल संरचना का एक महत्वपूर्ण तत्व माना गया है। मूल संरचना सिद्धांत संसद की संशोधन शक्ति को सीमित करता है और उसे संविधान की आधारभूत पहचान को नष्ट करने से रोकता है। इसलिए संसद संघीय ढाँचे को पूर्णतः समाप्त नहीं कर सकती।

प्रश्न 25: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रस्तावना संविधान की व्याख्या में सहायता कर सकती है जहाँ संवैधानिक भाषा अस्पष्ट हो। (2) प्रस्तावना संविधान के प्रत्येक अनुच्छेद का स्वतंत्र विधिक स्रोत है।

  • A. केवल 1 ✓
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — केवल 1
व्याख्या (Explanation):
न्यायालयों ने अनेक अवसरों पर माना है कि प्रस्तावना संविधान के उद्देश्यों और दर्शन को समझने में सहायता करती है, विशेषकर जब संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या की आवश्यकता हो। किंतु प्रस्तावना स्वयं किसी अनुच्छेद की स्वतंत्र विधिक शक्ति का स्रोत नहीं है। अतः दूसरा कथन गलत है।

प्रश्न 26: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 दोनों नए राज्यों के गठन से संबंधित हैं। (2) अनुच्छेद 2 मुख्यतः नए क्षेत्रों के संघ में प्रवेश या स्थापना से संबंधित है। (3) अनुच्छेद 3 मुख्यतः विद्यमान राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 2 संसद को नए राज्यों को संघ में सम्मिलित करने या स्थापित करने की शक्ति देता है, जबकि अनुच्छेद 3 विद्यमान राज्यों के गठन, विभाजन, सीमाओं एवं नामों में परिवर्तन से संबंधित है। दोनों प्रावधान मिलकर भारतीय संघ के क्षेत्रीय पुनर्गठन की संवैधानिक रूपरेखा प्रदान करते हैं।

प्रश्न 27: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन संविधान सभा की वैधता के संबंध में सर्वाधिक उपयुक्त है?

  • A. संविधान सभा ब्रिटिश संसद द्वारा नियुक्त निकाय थी और उसका कोई भारतीय आधार नहीं था।
  • B. यद्यपि संविधान सभा का गठन सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा नहीं हुआ था, फिर भी उसने व्यापक प्रतिनिधित्व, सार्वजनिक विमर्श और विस्तृत संवैधानिक बहसों के माध्यम से लोकतांत्रिक वैधता अर्जित की। ✓
  • C. संविधान सभा केवल देशी रियासतों का प्रतिनिधित्व करती थी।
  • D. संविधान सभा के निर्णयों पर सार्वजनिक चर्चा नहीं हुई।
सही उत्तर: B — यद्यपि संविधान सभा का गठन सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा नहीं हुआ था, फिर भी उसने व्यापक प्रतिनिधित्व, सार्वजनिक विमर्श और विस्तृत संवैधानिक बहसों के माध्यम से लोकतांत्रिक वैधता अर्जित की।
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा का गठन सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा नहीं हुआ था। इसके अधिकांश सदस्य प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा निर्वाचित किए गए थे। फिर भी इसमें विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों तथा विचारधाराओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व था। व्यापक बहसों, समिति-प्रणाली, संशोधन प्रक्रिया तथा सार्वजनिक विमर्श के कारण इसे पर्याप्त लोकतांत्रिक वैधता प्राप्त हुई।

प्रश्न 28: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय संविधान में संघीय तत्वों और एकात्मक तत्वों का सह-अस्तित्व है। (2) आपातकालीन प्रावधान संघीय ढाँचे को पूर्णतः समाप्त कर देते हैं। (3) भारतीय संघवाद को अक्सर "सहकारी संघवाद" के संदर्भ में समझा जाता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान में संघीय एवं एकात्मक दोनों तत्व मौजूद हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में केंद्र की शक्तियाँ बढ़ जाती हैं, किंतु इससे संघीय ढाँचा पूर्णतः समाप्त नहीं हो जाता। आधुनिक संवैधानिक चर्चा में भारतीय संघवाद को सहकारी संघवाद तथा कभी-कभी प्रतिस्पर्धी संघवाद की दृष्टि से भी देखा जाता है।

प्रश्न 29: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय संविधान की प्रस्तावना और मूल संरचना सिद्धांत के संबंध को सर्वाधिक उचित रूप से व्यक्त करता है?

  • A. प्रस्तावना के आदर्श मूल संरचना की पहचान में सहायक हो सकते हैं। ✓
  • B. प्रस्तावना मूल संरचना सिद्धांत से पूर्णतः असंबंधित है।
  • C. प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है, इसलिए उसका कोई महत्व नहीं है।
  • D. मूल संरचना सिद्धांत केवल मौलिक अधिकारों तक सीमित है।
सही उत्तर: A — प्रस्तावना के आदर्श मूल संरचना की पहचान में सहायक हो सकते हैं।
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रस्तावना को संविधान का भाग माना और यह स्वीकार किया कि प्रस्तावना में निहित मूल्य एवं आदर्श संविधान की मूल संरचना को समझने में सहायक हो सकते हैं। न्याय, स्वतंत्रता, समानता, लोकतंत्र और गणराज्य जैसे सिद्धांत मूल संरचना की पहचान में महत्वपूर्ण संदर्भ प्रदान करते हैं।

प्रश्न 30: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित "गणराज्य" की अवधारणा केवल निर्वाचित राष्ट्रपति तक सीमित नहीं है। (2) गणराज्य की अवधारणा सार्वजनिक पदों तक समान अवसर की संवैधानिक भावना से भी जुड़ी है। (3) गणराज्य होने के लिए संसदीय शासन प्रणाली का होना अनिवार्य है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
गणराज्य का मूल अर्थ यह है कि राज्य का प्रमुख वंशानुगत न होकर निर्वाचित होता है। इसके साथ ही सार्वजनिक पदों तक समान अवसर और जनसत्ता की अवधारणा भी जुड़ी होती है। संसदीय शासन प्रणाली गणराज्य होने की अनिवार्य शर्त नहीं है; अनेक गणराज्य राष्ट्रपति प्रणाली भी अपनाते हैं। इसलिए तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 31: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय संविधान का संघीय ढाँचा और संविधान की सर्वोच्चता परस्पर संबंधित अवधारणाएँ हैं। (2) यदि संविधान सर्वोच्च न हो, तो शक्तियों के संवैधानिक विभाजन का संरक्षण कठिन हो जाएगा। (3) संघीय व्यवस्था के संचालन में स्वतंत्र न्यायपालिका महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
संघीय शासन व्यवस्था में संविधान सर्वोच्च होता है क्योंकि वही केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन निर्धारित करता है। स्वतंत्र न्यायपालिका इस विभाजन की संरक्षक होती है और संवैधानिक विवादों का समाधान करती है। भारतीय संविधान में संघवाद, संविधान की सर्वोच्चता और न्यायिक पुनरावलोकन परस्पर पूरक सिद्धांत हैं।

प्रश्न 32: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) 42वें संविधान संशोधन ने प्रस्तावना में परिवर्तन किया। (2) प्रस्तावना में किया गया संशोधन भी मूल संरचना सिद्धांत के अधीन है। (3) संसद प्रस्तावना के किसी भी भाग को असीमित रूप से परिवर्तित कर सकती है।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
42वें संविधान संशोधन द्वारा प्रस्तावना में परिवर्तन किया गया था। किंतु केशवानंद भारती निर्णय के पश्चात संविधान संशोधन की शक्ति मूल संरचना सिद्धांत द्वारा सीमित है। अतः संसद प्रस्तावना के मूलभूत संवैधानिक मूल्यों को नष्ट नहीं कर सकती। इसलिए तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 33: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय संविधान की "संविधान की सर्वोच्चता" की अवधारणा के संदर्भ में सही है?

  • A. संसद संविधान से ऊपर है।
  • B. संविधान और संसद समान स्तर पर हैं।
  • C. संविधान सर्वोच्च है तथा संसद उसकी सीमाओं के भीतर कार्य करती है। ✓
  • D. न्यायपालिका संविधान से ऊपर है।
सही उत्तर: C — संविधान सर्वोच्च है तथा संसद उसकी सीमाओं के भीतर कार्य करती है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संवैधानिक व्यवस्था में संविधान सर्वोच्च विधिक दस्तावेज है। संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका सभी अपनी शक्तियाँ संविधान से प्राप्त करते हैं। न्यायिक पुनरावलोकन इसी सिद्धांत की रक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन है। अतः न संसद और न ही न्यायपालिका संविधान से ऊपर हैं।

प्रश्न 34: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारत शासन अधिनियम, 1935 में प्रस्तावित संघीय व्यवस्था पूर्ण रूप से लागू नहीं हो सकी। (2) भारतीय संविधान ने संघीय व्यवस्था को स्वतंत्र भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्संरचित एवं लोकतांत्रिक स्वरूप प्रदान किया।

  • A. केवल 1
  • B. 1 और 2 दोनों ✓
  • C. केवल 2
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: B — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
भारत शासन अधिनियम, 1935 में प्रस्तावित अखिल भारतीय संघ कभी पूर्णतः अस्तित्व में नहीं आ सका क्योंकि पर्याप्त संख्या में देशी रियासतें उसमें सम्मिलित नहीं हुईं। स्वतंत्र भारत के संविधान ने संघीय ढाँचे को लोकतांत्रिक, गणतांत्रिक तथा संसदीय शासन व्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्गठित किया। अतः दोनों कथन सही हैं।

प्रश्न 35: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित आदर्श न्यायालय द्वारा मूल संरचना की पहचान में उपयोग किए जा सकते हैं। (2) प्रस्तावना स्वयं में न्यायिक रूप से प्रवर्तनीय अधिकार प्रदान करती है। (3) प्रस्तावना संविधान की व्याख्या में सहायक स्रोत है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2
  • D. केवल 1 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
प्रस्तावना स्वयं प्रवर्तनीय अधिकारों का स्रोत नहीं है, किंतु यह संविधान की व्याख्या और मूल संरचना की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सर्वोच्च न्यायालय ने अनेक मामलों में प्रस्तावना को संवैधानिक दर्शन का मार्गदर्शक माना है। इसलिए दूसरा कथन गलत है।

प्रश्न 36: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संबंध में सर्वाधिक उपयुक्त है?

  • A. संविधान सभा ने व्यापक बहस, समिति प्रणाली और संशोधन प्रक्रिया के माध्यम से संविधान का निर्माण किया। ✓
  • B. संविधान सभा ने बिना किसी संशोधन चर्चा के संविधान को स्वीकार कर लिया।
  • C. संविधान सभा का संचालन मुख्यतः ब्रिटिश विशेषज्ञों द्वारा किया गया था।
  • D. संविधान सभा का कार्य केवल उद्देश्य प्रस्ताव पारित करना था।
सही उत्तर: A — संविधान सभा ने व्यापक बहस, समिति प्रणाली और संशोधन प्रक्रिया के माध्यम से संविधान का निर्माण किया।
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा ने लगभग तीन वर्षों तक व्यापक बहस, विभिन्न समितियों की रिपोर्टों, हजारों संशोधन प्रस्तावों तथा विस्तृत विचार-विमर्श के माध्यम से संविधान का निर्माण किया। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक विमर्श और सहमति-निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।

प्रश्न 37: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद किसी राज्य का नाम परिवर्तित कर सकती है। (2) अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद किसी राज्य के क्षेत्रफल अथवा सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है। (3) अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद संविधान की मूल संरचना में निहित संघीय व्यवस्था को समाप्त कर सकती है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 3 संसद को राज्यों के गठन, विभाजन, सीमाओं में परिवर्तन तथा नाम परिवर्तन की शक्ति प्रदान करता है। किंतु यह शक्ति संविधान की मूल संरचना को नष्ट करने की शक्ति नहीं है। भारतीय संविधान की संघीय व्यवस्था संविधान की मूल संरचना का भाग मानी जाती है, इसलिए संसद उसे समाप्त नहीं कर सकती। अतः तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 38: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रस्तावना में "लोकतांत्रिक" शब्द केवल राजनीतिक लोकतंत्र का संकेत देता है। (2) संविधान निर्माताओं ने लोकतंत्र को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय से भी जोड़ा। (3) प्रस्तावना का लोकतांत्रिक आदर्श संविधान के अन्य भागों से पृथक है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 ✓
  • C. केवल 1 और 2
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 2
व्याख्या (Explanation):
भारतीय लोकतंत्र की अवधारणा केवल राजनीतिक लोकतंत्र तक सीमित नहीं है। संविधान निर्माताओं ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के समन्वित दृष्टिकोण को अपनाया। प्रस्तावना, मौलिक अधिकार तथा राज्य के नीति-निदेशक तत्व मिलकर लोकतांत्रिक राज्य की व्यापक अवधारणा को व्यक्त करते हैं। अतः पहला और तीसरा कथन गलत हैं।

प्रश्न 39: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय संघ की प्रकृति के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या के सर्वाधिक निकट है?

  • A. भारत पूर्णतः एकात्मक राज्य है।
  • B. भारत राज्यों के बीच संविदात्मक संघ है।
  • C. राज्यों को संघ से पृथक होने का संवैधानिक अधिकार है।
  • D. भारत का संघ संविधान द्वारा निर्मित है और राज्यों को पृथक होने का अधिकार प्राप्त नहीं है। ✓
सही उत्तर: D — भारत का संघ संविधान द्वारा निर्मित है और राज्यों को पृथक होने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी संविदात्मक समझौते का परिणाम नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को "राज्यों का संघ" कहा गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में स्पष्ट किया है कि भारतीय संघ अविभाज्य है तथा किसी राज्य को संघ से पृथक होने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। इसलिए विकल्प D सही है।

प्रश्न 40: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) केशवानंद भारती निर्णय ने यह स्थापित किया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है। (2) इस निर्णय में न्यायालय ने कहा कि प्रस्तावना संविधान की मूल संरचना की पहचान में सहायक हो सकती है। (3) इस निर्णय ने बेरुबारी संघ मामले में प्रस्तावना संबंधी दृष्टिकोण से भिन्न मत अपनाया।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है। न्यायालय ने यह भी स्वीकार किया कि प्रस्तावना में निहित आदर्श संविधान की मूल संरचना को समझने और उसकी पहचान करने में सहायक हो सकते हैं। यह दृष्टिकोण बेरुबारी संघ परामर्श (1960) में व्यक्त उस मत से भिन्न था जिसमें प्रस्तावना को संविधान का भाग नहीं माना गया था। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 41: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) भारतीय संविधान ने ब्रिटिश संसदीय प्रणाली को अपनाया। (2) भारतीय संविधान ने अमेरिकी संघवाद से कुछ विशेषताएँ ग्रहण कीं। (3) भारतीय संविधान विभिन्न देशों के संवैधानिक अनुभवों का रचनात्मक समन्वय है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान विश्व के विभिन्न संविधानों से प्रेरित है। संसदीय शासन प्रणाली ब्रिटेन से, संघीय ढाँचे के कुछ तत्व अमेरिका से, नीति-निर्देशक तत्व आयरलैंड से, तथा अन्य कई प्रावधान विभिन्न देशों से ग्रहण किए गए। किंतु भारतीय संविधान मात्र प्रतिलिपि नहीं है; यह भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित एक मौलिक एवं समन्वित संवैधानिक दस्तावेज है।

प्रश्न 42: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) संविधान सभा में सभी निर्णय केवल साधारण बहुमत से लिए जाते थे। (2) संविधान सभा में व्यापक सहमति की परंपरा विकसित की गई थी। (3) संविधान निर्माण प्रक्रिया में अनेक संशोधन प्रस्तावों पर गंभीर विचार किया गया।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. केवल 1 और 3
  • D. केवल 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा की कार्यप्रणाली केवल मतदान पर आधारित नहीं थी। अधिकांश महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक सहमति विकसित करने का प्रयास किया गया। हजारों संशोधन प्रस्तावों पर चर्चा हुई और अनेक सुझाव स्वीकार किए गए। यही कारण है कि भारतीय संविधान को विचार-विमर्श और सहमति का दस्तावेज माना जाता है।

प्रश्न 43: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) भारतीय संविधान में संघीय विशेषताओं की तुलना में केंद्र को अपेक्षाकृत अधिक शक्तियाँ प्रदान की गई हैं। (2) अवशिष्ट शक्तियाँ राज्यों को प्राप्त हैं। (3) आपातकालीन प्रावधान संविधान के एकात्मक झुकाव को दर्शाते हैं।

  • A. केवल 1 और 3 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान में केंद्र अपेक्षाकृत अधिक शक्तिशाली है। अवशिष्ट शक्तियाँ संसद/केंद्र को प्राप्त हैं, न कि राज्यों को। साथ ही आपातकालीन प्रावधान केंद्र की शक्तियों को और अधिक बढ़ाते हैं, जिससे संविधान का एकात्मक झुकाव स्पष्ट होता है। अतः दूसरा कथन गलत है।

प्रश्न 44: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) भारतीय संविधान की सर्वोच्चता संसद की सर्वोच्चता पर आधारित है। (2) भारत में संविधान सर्वोच्च है और संसद उसकी सीमाओं के भीतर कार्य करती है। (3) न्यायिक पुनरावलोकन संविधान की सर्वोच्चता को संरक्षित करने का एक माध्यम है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. केवल 2 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारत में ब्रिटेन की भाँति संसद सर्वोच्च नहीं है; संविधान सर्वोच्च है। संसद की शक्तियाँ संविधान द्वारा निर्धारित एवं सीमित हैं। न्यायिक पुनरावलोकन के माध्यम से न्यायपालिका यह सुनिश्चित करती है कि संसद और कार्यपालिका संविधान की सीमाओं का उल्लंघन न करें। इसलिए पहला कथन गलत है।

प्रश्न 45: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

  • A. प्रारूप समिति — जवाहरलाल नेहरू
  • B. मौलिक अधिकार उपसमिति — जे.बी. कृपलानी ✓
  • C. संघ संविधान समिति — सरदार पटेल
  • D. संचालन समिति — के.एम. मुंशी
सही उत्तर: B — मौलिक अधिकार उपसमिति — जे.बी. कृपलानी
व्याख्या (Explanation):
जे. बी. कृपलानी मौलिक अधिकार उपसमिति के अध्यक्ष थे। प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. अम्बेडकर, संघ संविधान समिति के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू तथा संचालन समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।

प्रश्न 46: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) भारतीय संघ की सीमाओं का पुनर्गठन संसद के साधारण विधेयक द्वारा किया जा सकता है। (2) राज्य पुनर्गठन हेतु सदैव संविधान संशोधन आवश्यक होता है। (3) अनुच्छेद 4 के अंतर्गत ऐसे कानूनों को संविधान संशोधन नहीं माना जाता।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 2, 3 और 4 के अंतर्गत संसद साधारण विधि द्वारा राज्यों का गठन, पुनर्गठन तथा सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है। अनुच्छेद 4 स्पष्ट करता है कि ऐसे कानूनों को अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन नहीं माना जाएगा। इसलिए दूसरा कथन गलत है।

प्रश्न 47: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) प्रस्तावना में वर्णित "समानता" का अर्थ केवल राजनीतिक समानता है। (2) प्रस्तावना अवसर की समानता का भी समर्थन करती है। (3) समानता का आदर्श मौलिक अधिकारों में भी परिलक्षित होता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 2 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
प्रस्तावना में समानता का अर्थ केवल राजनीतिक समानता तक सीमित नहीं है। यह स्थिति एवं अवसर की समानता दोनों का समर्थन करती है। यही आदर्श आगे चलकर संविधान के समानता संबंधी मौलिक अधिकारों में अभिव्यक्त होता है। इसलिए पहला कथन गलत है जबकि दूसरा और तीसरा सही हैं।

प्रश्न 48: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन संविधान सभा की संप्रभुता के विकास को सर्वाधिक सही रूप में व्यक्त करता है?

  • A. 15 अगस्त 1947 के बाद संविधान सभा पूर्णतः संप्रभु निकाय बन गई। ✓
  • B. संविधान सभा प्रारंभ से ही ब्रिटिश संसद से पूर्णतः स्वतंत्र थी।
  • C. संविधान सभा केवल परामर्शदात्री निकाय थी।
  • D. संविधान सभा को केवल संविधान निर्माण का अधिकार था, विधायी अधिकार नहीं।
सही उत्तर: A — 15 अगस्त 1947 के बाद संविधान सभा पूर्णतः संप्रभु निकाय बन गई।
व्याख्या (Explanation):
प्रारंभ में संविधान सभा कैबिनेट मिशन योजना की रूपरेखा के भीतर कार्य कर रही थी, किंतु 15 अगस्त 1947 के बाद वह पूर्णतः संप्रभु निकाय बन गई। स्वतंत्रता के पश्चात उसने संविधान निर्माण और विधायी दोनों कार्य किए। इस प्रकार संविधान सभा की स्थिति स्वतंत्रता के बाद मौलिक रूप से परिवर्तित हुई।

प्रश्न 49: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ने ब्रिटिश संसद की भारत पर विधायी सर्वोच्चता समाप्त कर दी। (2) इस अधिनियम ने संविधान सभा को पूर्ण विधायी शक्ति प्रदान की। (3) इस अधिनियम के बाद भारत का शासन अभी भी ब्रिटिश संसद की स्वीकृति पर निर्भर था।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ने ब्रिटिश संसद की भारत पर विधायी सर्वोच्चता समाप्त कर दी और संविधान सभा को संविधान निर्माण के साथ-साथ विधायी अधिकार भी प्रदान किए। स्वतंत्रता के पश्चात भारतीय विधायिका ब्रिटिश संसद की स्वीकृति पर निर्भर नहीं रही। इसलिए तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 50: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) चार्टर एक्ट, 1833 ने भारतीय प्रशासन के केंद्रीकरण की प्रक्रिया को सुदृढ़ किया। (2) इस अधिनियम ने विधि संहिताकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया। (3) इसी अधिनियम के अंतर्गत प्रथम विधि आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
चार्टर एक्ट, 1833 ब्रिटिश भारत के संवैधानिक विकास का एक मील का पत्थर था। इसने विधायी केंद्रीकरण को मजबूत किया तथा भारतीय कानूनों के संहिताकरण की आवश्यकता को स्वीकार किया। इसी अधिनियम के अंतर्गत प्रथम विधि आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया, जिसके प्रथम अध्यक्ष थॉमस बैबिंगटन मैकॉले थे। आगे चलकर भारतीय दंड संहिता सहित कई विधियों के निर्माण में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

प्रश्न 51: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) संविधान सभा ने संविधान को 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया। (2) संविधान का संपूर्ण भाग उसी दिन लागू हो गया। (3) 26 जनवरी 1950 को संविधान पूर्ण रूप से प्रभावी हुआ।

  • A. केवल 1 और 3 ✓
  • B. केवल 1
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया था। हालांकि कुछ अनुच्छेद तत्काल प्रभाव से लागू हुए, जबकि संविधान का अधिकांश भाग 26 जनवरी 1950 को प्रभावी हुआ। इसी दिन भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना। अतः दूसरा कथन गलत है और पहला तथा तीसरा सही हैं।

प्रश्न 52: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) भारतीय संविधान में संघीय विशेषताओं की तुलना में एकात्मक विशेषताएँ भी पर्याप्त रूप से मौजूद हैं। (2) इसी कारण अनेक विद्वानों ने भारत को "क्वासी-फेडरल" राज्य कहा है।

  • A. केवल 1
  • B. 1 और 2 दोनों ✓
  • C. केवल 2
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: B — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान में संघीय तथा एकात्मक दोनों प्रकार की विशेषताएँ विद्यमान हैं। इसी मिश्रित स्वरूप के कारण संवैधानिक विद्वानों, विशेषकर के. सी. व्हीयर ने भारतीय संविधान को 'अर्ध-संघीय' बताया है। वर्तमान संवैधानिक चिंतन में 'सहकारी संघवाद' की अवधारणा भी व्यापक रूप से स्वीकार की जाती है।

प्रश्न 53: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारत शासन अधिनियम, 1935 और भारतीय संविधान के संबंध में सही है?

  • A. भारतीय संविधान ने 1935 के अधिनियम के सभी प्रावधानों को अस्वीकार कर दिया।
  • B. संविधान ने केवल संघीय न्यायालय की अवधारणा ग्रहण की।
  • C. संविधान ने 1935 के अधिनियम से अनेक प्रशासनिक एवं संस्थागत प्रावधान ग्रहण किए। ✓
  • D. संविधान ने 1935 के अधिनियम को मूल अधिकारों सहित यथावत स्वीकार कर लिया।
सही उत्तर: C — संविधान ने 1935 के अधिनियम से अनेक प्रशासनिक एवं संस्थागत प्रावधान ग्रहण किए।
व्याख्या (Explanation):
भारत शासन अधिनियम, 1935 भारतीय संविधान का सबसे बड़ा औपनिवेशिक स्रोत माना जाता है। संघीय ढाँचा, राज्यपाल का पद, लोक सेवा आयोग, प्रशासनिक विभाजन और अनेक संस्थागत व्यवस्थाएँ इसी अधिनियम से प्रेरित हैं। हालांकि संविधान ने इसे यथावत स्वीकार नहीं किया बल्कि लोकतांत्रिक और स्वतंत्र भारत की आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित किया।

प्रश्न 54: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) प्रस्तावना में वर्णित बंधुत्व व्यक्ति की गरिमा से संबंधित है। (2) प्रस्तावना के अनुसार बंधुत्व राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने से भी जुड़ा है। (3) बंधुत्व का विचार संविधान में केवल 42वें संशोधन के बाद जोड़ा गया।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. केवल 1 और 2 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
बंधुत्व प्रारंभिक प्रस्तावना का ही भाग था और इसका संबंध व्यक्ति की गरिमा तथा राष्ट्र की एकता से था। 42वें संविधान संशोधन द्वारा "अखंडता" शब्द जोड़ा गया, किंतु बंधुत्व की अवधारणा पहले से ही प्रस्तावना में विद्यमान थी। इसलिए तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 55: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) भारतीय संविधान में "राज्यों का संघ" शब्द का प्रयोग जानबूझकर किया गया था। (2) संविधान निर्माताओं का उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि राज्यों को संघ से पृथक होने का अधिकार नहीं होगा।

  • A. 1 और 2 दोनों ✓
  • B. केवल 1
  • C. केवल 2
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा में डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर ने स्पष्ट किया था कि "राज्यों का संघ" शब्द का चयन जानबूझकर किया गया था, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है तथा किसी भी राज्य को संघ से पृथक होने का अधिकार प्राप्त नहीं है। यह भारतीय संघवाद की एक मूलभूत विशेषता है और भारत की एकता एवं अखंडता को सुदृढ़ बनाती है।

प्रश्न 56: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अनुच्छेद 3 के संबंध में सही है?

  • A. संसद किसी राज्य की सीमा तभी बदल सकती है जब संबंधित राज्य सहमत हो।
  • B. संसद संबंधित राज्य की राय प्राप्त करने के बाद उसकी सीमा बदल सकती है, भले ही राज्य असहमत हो। ✓
  • C. केवल राष्ट्रपति ही नए राज्य का गठन कर सकता है।
  • D. राज्य पुनर्गठन के लिए संवैधानिक संशोधन आवश्यक है।
सही उत्तर: B — संसद संबंधित राज्य की राय प्राप्त करने के बाद उसकी सीमा बदल सकती है, भले ही राज्य असहमत हो।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 3 के अंतर्गत राष्ट्रपति संबंधित राज्य की विधानमंडल से राय मांगते हैं, किंतु संसद उस राय से बाध्य नहीं होती। इसलिए राज्य की असहमति के बावजूद संसद कानून बनाकर राज्य की सीमा, क्षेत्रफल या नाम में परिवर्तन कर सकती है। यही कारण है कि भारतीय संघ को अपेक्षाकृत अधिक केंद्रीकृत संघीय व्यवस्था माना जाता है।

प्रश्न 57: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) भारतीय संविधान की प्रस्तावना स्वयं में राज्य की शक्ति का स्रोत है। (2) प्रस्तावना संविधान की प्रकृति और उद्देश्यों को समझने में सहायक है। (3) प्रस्तावना को संवैधानिक व्याख्या में न्यायालयों द्वारा संदर्भित किया जा सकता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 2 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
प्रस्तावना संविधान की शक्ति का स्वतंत्र स्रोत नहीं है और न ही यह स्वयं प्रवर्तनीय अधिकार प्रदान करती है। किंतु यह संविधान के दर्शन, उद्देश्यों तथा मूल मूल्यों को व्यक्त करती है और न्यायालय संवैधानिक व्याख्या के दौरान इसका संदर्भ लेते हैं। केशवानंद भारती निर्णय ने इस भूमिका को विशेष महत्व दिया।

प्रश्न 58: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) संविधान सभा की प्रारूप समिति ने संविधान का प्रथम प्रारूप संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत किया। (2) प्रारूप समिति द्वारा तैयार प्रारूप पर संविधान सभा में विस्तृत अनुच्छेद-दर-अनुच्छेद चर्चा हुई।

  • A. 1 और 2 दोनों ✓
  • B. केवल 1
  • C. केवल 2
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
प्रारूप समिति ने संविधान का मसौदा तैयार कर संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके बाद प्रत्येक अनुच्छेद पर विस्तृत बहस हुई, अनेक संशोधन प्रस्तावित किए गए और लंबी विचार-विमर्श प्रक्रिया के पश्चात अंतिम संविधान अंगीकृत किया गया। यही कारण है कि भारतीय संविधान को व्यापक विचार-विमर्श से निर्मित दस्तावेज माना जाता है।

प्रश्न 59: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

  • A. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 — सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना
  • B. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 — बोर्ड ऑफ कंट्रोल
  • C. भारत शासन अधिनियम, 1858 — भारत सचिव का पद
  • D. भारतीय परिषद अधिनियम, 1892 — पृथक निर्वाचक मंडल ✓
सही उत्तर: D — भारतीय परिषद अधिनियम, 1892 — पृथक निर्वाचक मंडल
व्याख्या (Explanation):
पृथक निर्वाचक मंडलों की व्यवस्था भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 (मॉर्ले-मिंटो सुधार) द्वारा प्रारंभ की गई थी, न कि 1892 के अधिनियम द्वारा। 1892 के अधिनियम ने विधायी परिषदों का विस्तार किया और अप्रत्यक्ष निर्वाचन की दिशा में सीमित प्रगति की। अन्य सभी युग्म सही हैं।

प्रश्न 60: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) चार्टर एक्ट, 1853 ने पहली बार विधायी और कार्यपालिका कार्यों के बीच आंशिक पृथक्करण का प्रयास किया। (2) इस अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को स्थायी रूप से 20 वर्षों के लिए बढ़ा दिया। (3) इस अधिनियम के अंतर्गत सिविल सेवाओं में खुली प्रतियोगिता का सिद्धांत स्वीकार किया गया।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 1 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
चार्टर एक्ट, 1853 ब्रिटिश भारत के संवैधानिक विकास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। इसने गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी एवं कार्यकारी कार्यों के बीच आंशिक विभाजन स्थापित किया तथा सिविल सेवाओं में प्रतिस्पर्धी परीक्षा की दिशा में मार्ग प्रशस्त किया। इस अधिनियम ने कंपनी के शासन को किसी निश्चित अवधि के लिए नवीनीकृत नहीं किया था; यह पूर्ववर्ती चार्टर अधिनियमों से भिन्न था। इसलिए दूसरा कथन गलत है।

प्रश्न 61: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) भारतीय संविधान की संघीय विशेषताओं में लिखित संविधान, शक्तियों का विभाजन तथा स्वतंत्र न्यायपालिका शामिल हैं। (2) भारतीय संविधान की एकात्मक विशेषताओं में एकल नागरिकता तथा अवशिष्ट शक्तियों का केंद्र में निहित होना शामिल है। (3) भारतीय संविधान पूर्णतः अमेरिकी संघीय मॉडल का अनुसरण करता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान में संघीय और एकात्मक दोनों प्रकार की विशेषताएँ सम्मिलित हैं। संघीय विशेषताओं में लिखित संविधान, शक्तियों का विभाजन तथा स्वतंत्र न्यायपालिका प्रमुख हैं, जबकि एकल नागरिकता, अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र को मिलना तथा आपातकालीन प्रावधान एकात्मक झुकाव को दर्शाते हैं। भारत ने अमेरिकी मॉडल से कुछ तत्व ग्रहण किए हैं, परंतु वह उसका पूर्ण अनुकरण नहीं करता। इसलिए तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 62: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) भारतीय संविधान की सर्वोच्चता का सिद्धांत न्यायिक पुनरावलोकन की अवधारणा से जुड़ा हुआ है। (2) यदि संसद कोई ऐसा कानून बनाए जो संविधान के विपरीत हो, तो न्यायालय उसे निरस्त कर सकता है।

  • A. 1 और 2 दोनों ✓
  • B. केवल 1
  • C. केवल 2
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
संविधान की सर्वोच्चता तभी प्रभावी रहती है जब कोई संस्था संविधान से ऊपर न हो। न्यायिक पुनरावलोकन के माध्यम से न्यायपालिका संसद या कार्यपालिका के उन कार्यों की समीक्षा कर सकती है जो संविधान के विपरीत हों। यही सिद्धांत भारतीय संवैधानिक शासन की आधारशिला है और मूल संरचना सिद्धांत से भी निकटता से जुड़ा हुआ है।

प्रश्न 63: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

  • A. संघ शक्तियाँ समिति — सरदार वल्लभभाई पटेल
  • B. संघ शक्तियाँ समिति — जवाहरलाल नेहरू ✓
  • C. प्रारूप समिति — बी. एन. राउ
  • D. संचालन समिति — के. एम. मुंशी
सही उत्तर: B — संघ शक्तियाँ समिति — जवाहरलाल नेहरू
व्याख्या (Explanation):
संघ शक्तियाँ समिति के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे। प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे। बी. एन. राउ संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे, प्रारूप समिति के अध्यक्ष नहीं। संचालन समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। अतः केवल विकल्प B सही है।

प्रश्न 64: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) 42वें संविधान संशोधन द्वारा प्रस्तावना में "समाजवादी" और "धर्मनिरपेक्ष" शब्द जोड़े गए। (2) इसी संशोधन द्वारा "राष्ट्रीय एकता" के स्थान पर "राष्ट्रीय एकता और अखंडता" शब्द जोड़े गए। (3) इस संशोधन ने प्रस्तावना की संशोधन-योग्यता को पहली बार मान्यता दी।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में "समाजवादी", "धर्मनिरपेक्ष" तथा "राष्ट्र की एकता और अखंडता" शब्द जोड़े गए। किंतु प्रस्तावना की संशोधन-योग्यता का प्रश्न न्यायिक व्याख्या, विशेषकर केशवानंद भारती मामले से संबंधित है; 42वें संशोधन ने इसे पहली बार मान्यता नहीं दी थी। अतः तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 65: निम्नलिखित में से किस समिति को संविधान सभा की सबसे महत्वपूर्ण समिति माना जाता है क्योंकि उसने विभिन्न संवैधानिक प्रस्तावों को अंतिम विधिक स्वरूप प्रदान किया?

  • A. प्रारूप समिति ✓
  • B. संघ शक्तियाँ समिति
  • C. संचालन समिति
  • D. परामर्शदात्री समिति
सही उत्तर: A — प्रारूप समिति
व्याख्या (Explanation):
प्रारूप समिति ने विभिन्न समितियों की सिफारिशों और संविधान सभा की बहसों को विधिक एवं संवैधानिक भाषा में रूपांतरित किया। डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर के नेतृत्व में प्रारूप समिति ने संविधान का अंतिम प्रारूप तैयार किया। इसी कारण इसे संविधान निर्माण प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण समितियों में से एक माना जाता है।

प्रश्न 66: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) प्रस्तावना में निहित स्वतंत्रता की अवधारणा केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है। (2) प्रस्तावना विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता का उल्लेख करती है। (3) प्रस्तावना में आर्थिक स्वतंत्रता शब्द का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

  • A. केवल 1 और 3
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
प्रस्तावना विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता की बात करती है। स्वतंत्रता का दायरा केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है। हालांकि "आर्थिक स्वतंत्रता" शब्द का स्पष्ट उल्लेख प्रस्तावना में नहीं किया गया है।

प्रश्न 67: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय संघ की प्रकृति के संदर्भ में सर्वाधिक उपयुक्त है?

  • A. भारत अमेरिकी प्रकार का संघ है जिसमें राज्यों की संप्रभुता सर्वोपरि है।
  • B. भारत का संघ अविनाशी है जबकि राज्यों की सीमाएँ परिवर्तनीय हैं। ✓
  • C. संसद राज्यों के अस्तित्व को समाप्त नहीं कर सकती।
  • D. राज्यों का संघ से पृथक होना संवैधानिक रूप से संभव है।
सही उत्तर: B — भारत का संघ अविनाशी है जबकि राज्यों की सीमाएँ परिवर्तनीय हैं।
व्याख्या (Explanation):
भारत को प्रायः अविनाशी संघ तथा परिवर्तनीय राज्यों वाला संघ कहा जाता है। संसद अनुच्छेद 3 के अंतर्गत राज्यों की सीमाओं, नामों तथा क्षेत्रीय संरचना में परिवर्तन कर सकती है, किंतु संघ की एकता एवं अखंडता सर्वोपरि रहती है। यह भारतीय संघवाद की विशिष्ट विशेषता है और इसे अमेरिकी मॉडल से अलग करती है।

प्रश्न 68: संविधान सभा के संबंध में निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) संविधान सभा की कुल निर्धारित सदस्य संख्या 389 थी। (2) विभाजन के पश्चात संविधान सभा की सदस्य संख्या घटकर 299 रह गई। (3) संविधान सभा पूर्णतः सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनी गई थी।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई थी। विभाजन के बाद पाकिस्तान से संबंधित सदस्य अलग हो गए और सदस्य संख्या 299 रह गई। संविधान सभा का निर्वाचन सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर नहीं हुआ था, बल्कि प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया गया था। इसलिए तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 69: निम्नलिखित में से किस अधिनियम ने पहली बार ईस्ट इंडिया कंपनी के राजनीतिक कार्यों को ब्रिटिश सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में रखा?

  • A. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 ✓
  • B. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773
  • C. भारतीय परिषद अधिनियम, 1861
  • D. भारत शासन अधिनियम, 1858
सही उत्तर: A — पिट्स इंडिया एक्ट, 1784
व्याख्या (Explanation):
पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 ने पहली बार ईस्ट इंडिया कंपनी के राजनीतिक कार्यों को ब्रिटिश सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण के अधीन कर दिया। इसके माध्यम से भारत के प्रशासन पर ब्रिटिश सरकार का प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ। यद्यपि प्रत्यक्ष क्राउन शासन 1858 में प्रारंभ हुआ, तथापि इसकी संवैधानिक आधारशिला 1784 में रखी गई थी।

प्रश्न 70: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) चार्टर एक्ट, 1833 ने भारत के लिए एक केंद्रीकृत विधायी व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। (2) इस अधिनियम ने बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बना दिया। (3) इस अधिनियम ने प्रांतीय विधान शक्तियों को और अधिक सुदृढ़ किया।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
चार्टर एक्ट, 1833 भारतीय संवैधानिक विकास का एक महत्वपूर्ण चरण था। इसके द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाया गया तथा संपूर्ण ब्रिटिश भारत के लिए केंद्रीकृत विधायी शक्ति स्थापित की गई। इस अधिनियम के अंतर्गत लॉर्ड विलियम बेंटिंक भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल बने। इस अधिनियम ने प्रांतीय विधान शक्तियों को सुदृढ़ नहीं बल्कि सीमित किया, इसलिए तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 71: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) केशवानंद भारती मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि प्रस्तावना संविधान का भाग है। (2) प्रस्तावना संविधान की मूल संरचना की पहचान में सहायक हो सकती है।

  • A. 1 और 2 दोनों ✓
  • B. केवल 1
  • C. केवल 2
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है तथा संविधान की मूल संरचना की पहचान करने में सहायक है। यद्यपि प्रस्तावना स्वयं अधिकारों का स्वतंत्र स्रोत नहीं है, फिर भी इसका महत्वपूर्ण व्याख्यात्मक और संवैधानिक महत्व है।

प्रश्न 72: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) संसद किसी राज्य का नाम बदल सकती है। (2) संसद किसी राज्य का क्षेत्रफल बढ़ा या घटा सकती है। (3) संसद किसी राज्य को संघ से पृथक घोषित कर सकती है।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 3 संसद को राज्यों का नाम बदलने, उनकी सीमाओं में परिवर्तन करने तथा उनका क्षेत्रफल बढ़ाने या घटाने की शक्ति प्रदान करता है। किंतु किसी राज्य को संघ से पृथक होने या स्वतंत्र घोषित करने की संवैधानिक व्यवस्था नहीं है। भारतीय संघ को एक अविभाज्य संघ माना जाता है। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं, जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 73: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

  • A. उद्देश्य प्रस्ताव — डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  • B. प्रारूप समिति — जवाहरलाल नेहरू
  • C. संवैधानिक सलाहकार — बी.एन. राउ ✓
  • D. संचालन समिति — डॉ. बी.आर. अम्बेडकर
सही उत्तर: C — संवैधानिक सलाहकार — बी.एन. राउ
व्याख्या (Explanation):
बी. एन. राउ संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे। उद्देश्य प्रस्ताव जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत किया गया था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे तथा संचालन समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। अतः केवल विकल्प C सही है।

प्रश्न 74: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) प्रस्तावना में वर्णित न्याय का अर्थ केवल राजनीतिक न्याय है। (2) प्रस्तावना सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की बात करती है।

  • A. केवल 2 ✓
  • B. केवल 1
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — केवल 2
व्याख्या (Explanation):
प्रस्तावना सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक न्याय तीनों प्रकार के न्याय की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित करती है। यह भारतीय संविधान की कल्याणकारी राज्य की अवधारणा का महत्वपूर्ण आधार है। पहला कथन गलत है क्योंकि न्याय को केवल राजनीतिक आयाम तक सीमित नहीं किया गया है।

प्रश्न 75: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय धर्मनिरपेक्षता के बारे में सही है?

  • A. राज्य किसी भी धर्म को मान्यता नहीं देता और धर्म को पूर्णतः निजी विषय मानता है।
  • B. राज्य केवल बहुसंख्यक धर्म को संरक्षण देता है।
  • C. राज्य सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार करता है तथा धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता।
  • D. राज्य सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान का व्यवहार करता है तथा आवश्यक होने पर सुधारात्मक हस्तक्षेप भी कर सकता है। ✓
सही उत्तर: D — राज्य सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान का व्यवहार करता है तथा आवश्यक होने पर सुधारात्मक हस्तक्षेप भी कर सकता है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय धर्मनिरपेक्षता का अर्थ सभी धर्मों के प्रति राज्य की समान सम्मानपूर्ण एवं निष्पक्ष नीति है। भारतीय राज्य किसी धर्म को राज्य धर्म के रूप में स्वीकार नहीं करता, किंतु सामाजिक सुधार, समानता, सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता तथा स्वास्थ्य के हित में धार्मिक गतिविधियों को विनियमित कर सकता है। अतः विकल्प D सर्वाधिक उपयुक्त है।

प्रश्न 76: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) भारतीय संविधान में एकल नागरिकता की व्यवस्था है। (2) एकल नागरिकता भारतीय संविधान की एकात्मक विशेषताओं में से एक मानी जाती है।

  • A. केवल 1
  • B. 1 और 2 दोनों ✓
  • C. केवल 2
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: B — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
भारत में केवल भारतीय नागरिकता की व्यवस्था है; राज्यों की पृथक नागरिकता नहीं है। यह व्यवस्था ब्रिटिश मॉडल से प्रेरित है और भारतीय संविधान की एकात्मक प्रवृत्ति को दर्शाती है। इसके विपरीत, अमेरिका जैसे देशों में संघीय तथा राज्य दोनों स्तरों की नागरिकता की अवधारणा पाई जाती है।

प्रश्न 77: निम्नलिखित में से किस समिति का संबंध मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों एवं जनजातीय क्षेत्रों से था?

  • A. प्रारूप समिति
  • B. संघ शक्तियाँ समिति
  • C. परामर्शदात्री समिति ✓
  • D. संचालन समिति
सही उत्तर: C — परामर्शदात्री समिति
व्याख्या (Explanation):
सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता वाली परामर्शदात्री समिति मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों, जनजातीय क्षेत्रों तथा बहिष्कृत क्षेत्रों से संबंधित विषयों पर विचार करने के लिए गठित की गई थी। इस समिति की विभिन्न उपसमितियों ने आगे चलकर संविधान के अनेक महत्वपूर्ण प्रावधानों की आधारशिला तैयार की।

प्रश्न 78: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) संविधान सभा एक संप्रभु निकाय के रूप में कार्य कर रही थी। (2) स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा ने अस्थायी संसद के रूप में भी कार्य किया।

  • A. 1 और 2 दोनों ✓
  • B. केवल 1
  • C. केवल 2
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
15 अगस्त 1947 के बाद संविधान सभा पूर्णतः संप्रभु निकाय बन गई और ब्रिटिश संसद के नियंत्रण से मुक्त हो गई। साथ ही संविधान निर्माण के अतिरिक्त इसने अस्थायी संसद के रूप में भी विधायी कार्य किए। संविधान सभा की यह दोहरी भूमिका भारतीय संवैधानिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

प्रश्न 79: निम्नलिखित में से कौन-सा कालक्रमानुसार सही क्रम है? (1) मॉर्ले-मिंटो सुधार (2) भारत शासन अधिनियम, 1935 (3) भारतीय परिषद अधिनियम, 1892 (4) मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार

  • A. 3–1–2–4
  • B. 1–3–4–2
  • C. 3–4–1–2
  • D. 3–1–4–2 ✓
सही उत्तर: D — 3–1–4–2
व्याख्या (Explanation):
भारतीय परिषद अधिनियम 1892, मॉर्ले-मिंटो सुधार 1909, मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार 1919 तथा भारत शासन अधिनियम 1935 का क्रम भारतीय संवैधानिक विकास की प्रमुख घटनाओं को दर्शाता है।

प्रश्न 80: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 ने भारत में द्वैध शासन की स्थापना की। (2) इस अधिनियम के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के वाणिज्यिक एवं राजनीतिक कार्यों के बीच स्पष्ट अंतर किया गया।

  • A. केवल 1
  • B. 1 और 2 दोनों ✓
  • C. केवल 2
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: B — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 ब्रिटिश संसद द्वारा पारित एक महत्वपूर्ण अधिनियम था जिसने भारत के मामलों पर द्वैध नियंत्रण की व्यवस्था स्थापित की। बोर्ड ऑफ कंट्रोल राजनीतिक मामलों की देखरेख करता था जबकि कंपनी के निदेशक मंडल वाणिज्यिक मामलों को संभालते थे। इस प्रकार कंपनी के राजनीतिक तथा वाणिज्यिक कार्यों के बीच संस्थागत विभाजन स्थापित किया गया। यह ब्रिटिश सरकार के बढ़ते नियंत्रण का महत्वपूर्ण चरण था।

प्रश्न 81: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय संविधान की संघीय प्रकृति और एकात्मक विशेषताओं के संबंध में सर्वाधिक उपयुक्त है?

  • A. भारत पूर्णतः संघीय राज्य है और उसमें कोई एकात्मक तत्व नहीं है।
  • B. भारत पूर्णतः एकात्मक राज्य है।
  • C. भारत एक परिसंघ है।
  • D. भारत में संघीय संरचना है, किंतु कुछ परिस्थितियों में संविधान एकात्मक रूप ग्रहण कर सकता है। ✓
सही उत्तर: D — भारत में संघीय संरचना है, किंतु कुछ परिस्थितियों में संविधान एकात्मक रूप ग्रहण कर सकता है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान संघीय और एकात्मक दोनों विशेषताओं का संतुलित समन्वय प्रस्तुत करता है। सामान्य परिस्थितियों में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संवैधानिक विभाजन संघीय ढाँचे को दर्शाता है, जबकि आपातकाल, राज्य पुनर्गठन, अवशिष्ट शक्तियों का केंद्र में निहित होना तथा एकल नागरिकता जैसी विशेषताएँ एकात्मक झुकाव को प्रदर्शित करती हैं। इसी कारण भारत को "संघीय व्यवस्था के साथ एकात्मक प्रवृत्ति" वाला राज्य कहा जाता है।

प्रश्न 82: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) संसद किसी राज्य की सीमा में परिवर्तन कर सकती है। (2) संबंधित राज्य की विधानमंडल की सहमति संसद पर बाध्यकारी होती है।

  • A. केवल 1 ✓
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — केवल 1
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 3 संसद को राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान करता है। यद्यपि राष्ट्रपति संबंधित राज्य की विधानमंडल से राय मांगते हैं, परंतु संसद उस राय से बाध्य नहीं होती। यही कारण है कि दूसरा कथन गलत है। यह भारतीय संघ की एकात्मक प्रवृत्ति का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।

प्रश्न 83: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

  • A. 42वाँ संविधान संशोधन — समाजवादी शब्द का समावेश
  • B. उद्देश्य प्रस्ताव — डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ✓
  • C. संविधान सभा के अध्यक्ष — डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  • D. संवैधानिक सलाहकार — बी.एन. राउ
सही उत्तर: B — उद्देश्य प्रस्ताव — डॉ. बी.आर. अम्बेडकर
व्याख्या (Explanation):
उद्देश्य प्रस्ताव जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था, न कि डॉ. बी.आर. अम्बेडकर द्वारा।

प्रश्न 84: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) प्रस्तावना संविधान की व्याख्या में सहायता करती है। (2) प्रस्तावना स्वयं में न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय अधिकार प्रदान करती है। (3) प्रस्तावना संविधान के मूल ढाँचे को समझने में सहायक मानी गई है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1
  • D. केवल 1 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
प्रस्तावना संविधान की मूल भावना, उद्देश्यों और दर्शन को व्यक्त करती है तथा संवैधानिक व्याख्या में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है। केशवानंद भारती मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे संविधान के मूल ढाँचे की पहचान में सहायक माना। हालांकि प्रस्तावना स्वयं किसी प्रवर्तनीय अधिकार का स्रोत नहीं है, इसलिए दूसरा कथन गलत है।

प्रश्न 85: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय संसदीय शासन प्रणाली के संदर्भ में सही है?

  • A. राष्ट्रपति वास्तविक कार्यपालिका है।
  • B. मंत्रिपरिषद संसद से स्वतंत्र होती है।
  • C. मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। ✓
  • D. राष्ट्रपति लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होता है।
सही उत्तर: C — मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संसदीय प्रणाली में राष्ट्रपति संवैधानिक या नाममात्र की कार्यपालिका है, जबकि प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद वास्तविक कार्यपालिका हैं। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है और लोकसभा में बहुमत खोने पर पद पर नहीं रह सकती। यही संसदीय उत्तरदायित्व का मूल सिद्धांत है।

प्रश्न 86: निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) भारतीय संविधान संघीय और एकात्मक दोनों विशेषताओं का मिश्रण है। (2) राज्यों को संघ से पृथक होने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।

  • A. केवल 1 ✓
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — केवल 1
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान संघीय ढाँचे के साथ एकात्मक झुकाव वाली शासन व्यवस्था स्थापित करता है। राज्यों को संघ से पृथक होने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। संविधान निर्माताओं ने संविधान के अनुच्छेद 1 में "संघीय राज्य" शब्द का प्रयोग न करके "राज्यों का संघ" शब्द का प्रयोग किया, जिससे यह स्पष्ट हो कि भारतीय संघ राज्यों के किसी समझौते का परिणाम नहीं है तथा राज्यों को संघ से पृथक होने का अधिकार प्राप्त नहीं है।

प्रश्न 87: निम्नलिखित समितियों तथा उनके अध्यक्षों का सही मिलान कीजिए: (1) प्रारूप समिति - डॉ. भीमराव अम्बेडकर (2) संघ शक्तियाँ समिति - जवाहरलाल नेहरू (3) संघ संविधान समिति - जवाहरलाल नेहरू (4) प्रांतीय संविधान समिति - सरदार वल्लभभाई पटेल

  • A. केवल 1, 2 और 3
  • B. केवल 2, 3 और 4
  • C. 1, 2, 3 और 4 ✓
  • D. केवल 1 और 4
सही उत्तर: C — 1, 2, 3 और 4
व्याख्या (Explanation):
प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे। संघ शक्तियाँ समिति तथा संघ संविधान समिति दोनों के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे, जबकि प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे।

प्रश्न 88: संविधान सभा के संबंध में निम्नलिखित कथनों में सही उत्तर चुनिए: (1) संविधान सभा के सभी सदस्य प्रत्यक्ष वयस्क मताधिकार द्वारा चुने गए थे। (2) संविधान सभा आंशिक रूप से निर्वाचित तथा आंशिक रूप से नामित निकाय थी।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 ✓
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: B — केवल 2
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा के सदस्य प्रत्यक्ष वयस्क मताधिकार द्वारा नहीं चुने गए थे। प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से उनका चुनाव किया गया था, जबकि देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का नामांकन किया गया। अतः संविधान सभा आंशिक रूप से निर्वाचित और आंशिक रूप से नामित निकाय थी।

प्रश्न 89: निम्नलिखित में से कौन-से प्रावधान भारत शासन अधिनियम, 1935 से संबंधित हैं? (1) प्रांतीय स्वायत्तता (2) संघीय न्यायालय की स्थापना (3) पृथक निर्वाचक मंडलों का पूर्ण उन्मूलन

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
भारत शासन अधिनियम, 1935 ने प्रांतीय स्वायत्तता प्रदान की तथा संघीय न्यायालय की स्थापना का प्रावधान किया। पृथक निर्वाचक मंडलों को समाप्त नहीं किया गया था; बल्कि उनका विस्तार किया गया था। यही कारण है कि तीसरा कथन गलत है। यह अधिनियम भारतीय संविधान का सबसे महत्वपूर्ण औपनिवेशिक स्रोत माना जाता है।

प्रश्न 90: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 ने पहली बार ब्रिटिश संसद के नियंत्रण को ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन पर स्थापित किया। (2) इस अधिनियम ने मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी को पूर्णतः स्वतंत्र बना दिया।

  • A. केवल 1 ✓
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — केवल 1
व्याख्या (Explanation):
रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 भारत के प्रशासन में ब्रिटिश संसद के हस्तक्षेप की शुरुआत का प्रतीक था और इसने ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को विनियमित करने का प्रयास किया। इसके अंतर्गत बंगाल के गवर्नर-जनरल को मद्रास और बंबई पर कुछ नियंत्रण प्राप्त हुआ, अतः दूसरा कथन गलत है।

प्रश्न 91: संविधान सभा को संविधान निर्माण में कुल कितना समय लगा?

  • A. 1 वर्ष 11 माह 18 दिन
  • B. 3 वर्ष 2 माह 11 दिन
  • C. 2 वर्ष 11 माह 18 दिन ✓
  • D. 2 वर्ष 6 माह 15 दिन
सही उत्तर: C — 2 वर्ष 11 माह 18 दिन
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा ने 9 दिसंबर 1946 से 26 नवंबर 1949 तक संविधान निर्माण का कार्य किया, जिसमें कुल 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन लगे। इस अवधि में 11 सत्र आयोजित हुए तथा संविधान के मसौदे पर विस्तृत चर्चा की गई। मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं। यह विश्व के सबसे विस्तृत लिखित संविधानों में से एक माना जाता है।

प्रश्न 92: भारतीय संविधान की कौन-सी विशेषता उसे विश्व के अधिकांश संविधानों से अलग बनाती है?

  • A. एक ही संविधान में संघीय एवं एकात्मक दोनों तत्वों का समन्वय ✓
  • B. केवल संघीय संरचना
  • C. केवल एकात्मक शासन
  • D. राष्ट्रपति शासन प्रणाली
सही उत्तर: A — एक ही संविधान में संघीय एवं एकात्मक दोनों तत्वों का समन्वय
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान संघीय तथा एकात्मक दोनों प्रकार की विशेषताओं का अद्वितीय समन्वय प्रस्तुत करता है। सामान्य परिस्थितियों में यह संघीय ढाँचे के अनुसार कार्य करता है, जबकि विशेष परिस्थितियों विशेषकर आपातकाल में इसकी प्रकृति अधिक एकात्मक हो जाती है। इसी कारण कई विद्वान भारत को "अर्ध-संघीय" या "सहकारी संघीय" व्यवस्था वाला राज्य बताते हैं।

प्रश्न 93: राज्यों के पुनर्गठन हेतु गठित राज्य पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष कौन थे?

  • A. के.एम. पाणिक्कर
  • B. एच.एन. कुंजरू
  • C. गोविंद बल्लभ पंत
  • D. फ़ज़ल अली ✓
सही उत्तर: D — फ़ज़ल अली
व्याख्या (Explanation):
1953 में गठित राज्य पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष फ़ज़ल अली थे, जबकि के.एम. पाणिक्कर और एच.एन. कुंजरू इसके सदस्य थे। आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 पारित किया गया, जिसने भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का मार्ग प्रशस्त किया।

प्रश्न 94: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय संविधान की संघीय प्रकृति को दर्शाता है?

  • A. संसद को राज्यों की सीमाएँ बदलने की शक्ति प्राप्त है।
  • B. केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संवैधानिक विभाजन है। ✓
  • C. अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र को प्राप्त हैं।
  • D. आपातकाल में केंद्र अधिक शक्तिशाली हो जाता है।
सही उत्तर: B — केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संवैधानिक विभाजन है।
व्याख्या (Explanation):
संघीय शासन की मूल विशेषता केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संवैधानिक विभाजन है। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची तथा समवर्ती सूची के माध्यम से यह विभाजन किया गया है। अन्य विकल्प भारतीय संविधान के एकात्मक झुकाव को प्रदर्शित करते हैं। UPSC अक्सर संघीय तथा एकात्मक विशेषताओं के बीच अंतर पर प्रश्न पूछता है।

प्रश्न 95: भारतीय संघ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  • A. भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है। ✓
  • B. राज्यों को संघ से पृथक होने का अधिकार है।
  • C. भारत एक परिसंघ है।
  • D. प्रत्येक राज्य का अपना संविधान है।
सही उत्तर: A — भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान के अनुसार भारत "राज्यों का संघ" है। डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने स्पष्ट किया था कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है और किसी राज्य को संघ से पृथक होने का अधिकार प्राप्त नहीं है। यह विशेषता भारत को अमेरिका जैसे पारंपरिक संघीय राज्यों से अलग बनाती है।

प्रश्न 96: अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य कर सकती है? (1) नए राज्य का गठन (2) किसी राज्य की सीमा में परिवर्तन (3) किसी राज्य का नाम बदलना

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 3 संसद को राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित व्यापक शक्तियाँ प्रदान करता है। इसके अंतर्गत नए राज्य का निर्माण, राज्य का विभाजन, राज्यों का विलय, सीमाओं में परिवर्तन तथा नाम परिवर्तन जैसे सभी कार्य किए जा सकते हैं। उदाहरणस्वरूप तेलंगाना का गठन (2014) तथा उड़ीसा का नाम बदलकर ओडिशा किया जाना (2011) इसी संवैधानिक शक्ति के अंतर्गत हुआ।

प्रश्न 97: भारतीय संविधान के अनुसार नए राज्य का गठन करने की शक्ति किसके पास है?

  • A. राष्ट्रपति
  • B. संसद ✓
  • C. राज्य विधानमंडल
  • D. सर्वोच्च न्यायालय
सही उत्तर: B — संसद
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 संसद को नए राज्यों के गठन, राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन, क्षेत्रफल बढ़ाने या घटाने तथा राज्यों के नाम बदलने की शक्ति प्रदान करते हैं। संबंधित राज्य की विधानमंडल से राष्ट्रपति राय अवश्य मांगते हैं, किंतु संसद उस राय से बाध्य नहीं होती। यह भारतीय संघ की विशिष्ट एकात्मक विशेषता मानी जाती है।

प्रश्न 98: निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द भारतीय संविधान की मूल प्रस्तावना में नहीं था?

  • A. न्याय
  • B. समानता
  • C. लोकतांत्रिक
  • D. समाजवादी ✓
सही उत्तर: D — समाजवादी
व्याख्या (Explanation):
संविधान की मूल प्रस्तावना में "समाजवादी" तथा "धर्मनिरपेक्ष" शब्द नहीं थे। इन्हें 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया। जबकि न्याय, स्वतंत्रता, समानता, लोकतंत्र और गणराज्य जैसे शब्द प्रारंभ से ही प्रस्तावना का हिस्सा थे।

प्रश्न 99: निम्नलिखित में से किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने पहली बार कहा कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है?

  • A. बेरुबारी संघ मामला ✓
  • B. केशवानंद भारती मामला
  • C. मिनर्वा मिल्स मामला
  • D. गोलकनाथ मामला
सही उत्तर: A — बेरुबारी संघ मामला
व्याख्या (Explanation):
बेरुबारी संघ प्रकरण (1960) में सर्वोच्च न्यायालय ने मत व्यक्त किया था कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है तथा यह संविधान की शक्तियों का स्रोत भी नहीं है। बाद में केशवानंद भारती मामले (1973) में न्यायालय ने इस दृष्टिकोण को परिवर्तित करते हुए कहा कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न भाग है तथा संविधान की मूल संरचना को समझने में सहायक है।

प्रश्न 100: भारतीय संविधान की प्रस्तावना के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  • A. प्रस्तावना संविधान का प्रवर्तनीय भाग है।
  • B. प्रस्तावना संविधान सभा द्वारा 1946 में स्वीकार कर ली गई थी।
  • C. प्रस्तावना संविधान के उद्देश्यों एवं दर्शन को व्यक्त करती है। ✓
  • D. प्रस्तावना को कभी संशोधित नहीं किया जा सकता।
सही उत्तर: C — प्रस्तावना संविधान के उद्देश्यों एवं दर्शन को व्यक्त करती है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान की प्रस्तावना संविधान के मूल आदर्शों, उद्देश्यों तथा दर्शन को व्यक्त करती है। इसमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल संवैधानिक मूल्य निहित हैं। केशवानंद भारती मामला (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है, किंतु यह स्वयं प्रवर्तनीय नहीं है। साथ ही, 42वें संविधान संशोधन द्वारा प्रस्तावना में संशोधन भी किया गया था, अतः इसे पूर्णतः असंशोधनीय नहीं माना जाता।

प्रश्न 101: संविधान की सर्वोच्चता का तात्पर्य है कि—

  • A. संसद संविधान से ऊपर है।
  • B. न्यायपालिका संविधान को संशोधित कर सकती है।
  • C. कार्यपालिका संविधान से स्वतंत्र है।
  • D. संविधान देश का सर्वोच्च विधिक दस्तावेज है और सभी संस्थाएँ उसके अधीन हैं। ✓
सही उत्तर: D — संविधान देश का सर्वोच्च विधिक दस्तावेज है और सभी संस्थाएँ उसके अधीन हैं।
व्याख्या (Explanation):
संविधान की सर्वोच्चता भारतीय संवैधानिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत है। संसद, कार्यपालिका, न्यायपालिका तथा अन्य सभी संस्थाएँ संविधान द्वारा निर्मित हैं और उसकी सीमाओं के भीतर कार्य करती हैं। यदि कोई कानून संविधान के विपरीत पाया जाता है तो न्यायपालिका न्यायिक पुनरावलोकन के माध्यम से उसे असंवैधानिक घोषित कर सकती है। यही सिद्धांत विधि के शासन तथा संवैधानिक शासन की आधारशिला है।

प्रश्न 102: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय गणराज्य की अवधारणा को सर्वाधिक सही रूप में व्यक्त करता है?

  • A. राज्य का प्रमुख वंशानुगत होता है।
  • B. राज्य का प्रमुख प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होता है। ✓
  • C. केवल संसद सर्वोच्च होती है।
  • D. केवल राज्यों को स्वायत्तता प्राप्त होती है।
सही उत्तर: B — राज्य का प्रमुख प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होता है।
व्याख्या (Explanation):
गणराज्य का अर्थ है कि राज्य का प्रमुख जनता द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होता है तथा उसका पद वंशानुगत नहीं होता। भारत में राष्ट्रपति राज्य का प्रमुख है, जिसका निर्वाचन निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। यही विशेषता भारत को गणराज्य बनाती है। ब्रिटेन संवैधानिक राजतंत्र है जबकि भारत लोकतांत्रिक गणराज्य है।

प्रश्न 103: भारतीय संविधान में "धर्मनिरपेक्ष" शब्द प्रस्तावना में किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?

  • A. 24वाँ संविधान संशोधन, 1971
  • B. 42वाँ संविधान संशोधन, 1976 ✓
  • C. 44वाँ संविधान संशोधन, 1978
  • D. 52वाँ संविधान संशोधन, 1985
सही उत्तर: B — 42वाँ संविधान संशोधन, 1976
व्याख्या (Explanation):
1976 में पारित 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में "समाजवादी" और "धर्मनिरपेक्ष" शब्द जोड़े गए तथा "राष्ट्र की एकता" के स्थान पर "राष्ट्र की एकता और अखंडता" शब्द जोड़े गए। भारतीय धर्मनिरपेक्षता का अर्थ सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान है, न कि राज्य और धर्म का पूर्ण पृथक्करण जैसा कुछ पश्चिमी देशों में देखा जाता है।

प्रश्न 104: निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय संसदीय शासन प्रणाली का प्रमुख लक्षण नहीं है?

  • A. वास्तविक कार्यपालिका मंत्रिपरिषद होती है।
  • B. मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
  • C. नाममात्र कार्यपालिका और वास्तविक कार्यपालिका में अंतर होता है।
  • D. कार्यपालिका का निश्चित कार्यकाल होता है और वह विधायिका से स्वतंत्र होती है। ✓
सही उत्तर: D — कार्यपालिका का निश्चित कार्यकाल होता है और वह विधायिका से स्वतंत्र होती है।
व्याख्या (Explanation):
संसदीय शासन प्रणाली में कार्यपालिका विधायिका से निकलती है और उसके प्रति उत्तरदायी रहती है। राष्ट्रपति नाममात्र की कार्यपालिका तथा मंत्रिपरिषद वास्तविक कार्यपालिका होती है। मंत्रिपरिषद लोकसभा के विश्वास पर निर्भर रहती है और उसका कार्यकाल निश्चित नहीं होता। निश्चित कार्यकाल तथा शक्तियों का कठोर पृथक्करण राष्ट्रपति शासन प्रणाली की विशेषताएँ हैं, न कि संसदीय प्रणाली की।

प्रश्न 105: भारतीय संविधान को एकात्मक झुकाव वाली संघीय व्यवस्था वाला संविधान क्यों कहा जाता है?

  • A. क्योंकि केंद्र को राज्यों की तुलना में अधिक शक्तियाँ प्राप्त हैं। ✓
  • B. क्योंकि राज्यों को पृथक संविधान प्राप्त हैं।
  • C. क्योंकि राज्य संप्रभु इकाइयाँ हैं।
  • D. क्योंकि अवशिष्ट शक्तियाँ राज्यों को दी गई हैं।
सही उत्तर: A — क्योंकि केंद्र को राज्यों की तुलना में अधिक शक्तियाँ प्राप्त हैं।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान में संघीय व्यवस्था के तत्व जैसे द्विस्तरीय शासन, लिखित संविधान और शक्तियों का विभाजन मौजूद हैं, किंतु साथ ही केंद्र को व्यापक शक्तियाँ प्रदान की गई हैं। अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र को प्राप्त हैं, आपातकालीन प्रावधान केंद्र को और अधिक सशक्त बनाते हैं तथा राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन करने की शक्ति भी संसद के पास है। इसी कारण भारत को शुद्ध संघीय नहीं बल्कि संघीय व्यवस्था के साथ एकात्मक झुकाव वाला राज्य माना जाता है।

प्रश्न 106: भारतीय संविधान को संविधान सभा द्वारा कब अंगीकृत (स्वीकार) किया गया?

  • A. 26 जनवरी 1950
  • B. 26 नवंबर 1949 ✓
  • C. 15 अगस्त 1947
  • D. 9 दिसंबर 1946
सही उत्तर: B — 26 नवंबर 1949
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा ने लगभग 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में संविधान तैयार किया और 26 नवंबर 1949 को इसे अंगीकृत किया। इसी कारण 26 नवंबर को 'संविधान दिवस' मनाया जाता है। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ था। 9 दिसंबर 1946 में संविधान सभा की पहली बैठक हुई थी। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ। इसे 1930 के 'पूर्ण स्वराज दिवस' की स्मृति में चुना गया था, इसलिए इसे गणतंत्र दिवस मनाते हैं।

प्रश्न 107: संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार कौन थे?

  • A. के. एम. मुंशी
  • B. डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
  • C. बी. एन. राउ ✓
  • D. एच. वी. कामथ
सही उत्तर: C — बी. एन. राउ
व्याख्या (Explanation):
बेनेगल नरसिंह राउ (बी. एन. राउ) संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे। उन्होंने विभिन्न देशों के संविधानों का अध्ययन कर प्रारंभिक संवैधानिक मसौदा तैयार किया, जो आगे चलकर प्रारूप समिति के कार्य का आधार बना। संविधान निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी, यद्यपि वे प्रारूप समिति के सदस्य नहीं थे।

प्रश्न 108: संविधान सभा की प्रारूप समिति (ड्राफ्टिंग कमेटी) के अध्यक्ष कौन थे?

  • A. डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  • B. डॉ. भीमराव अंबेडकर ✓
  • C. पंडित जवाहरलाल नेहरू
  • D. सरदार वल्लभभाई पटेल
सही उत्तर: B — डॉ. भीमराव अंबेडकर
व्याख्या (Explanation):
डॉ. अंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे, इसलिए उन्हें 'भारतीय संविधान का शिल्पकार' कहा जाता है। इसी समिति ने संविधान का मसौदा तैयार किया। डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष थे और बाद में भारत के पहले राष्ट्रपति बने। पंडित नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में 'उद्देश्य प्रस्ताव' रखा, जो आगे चलकर प्रस्तावना का आधार बना। सरदार पटेल मौलिक अधिकार व अल्पसंख्यक संबंधी सलाहकार समिति के अध्यक्ष थे और रियासतों के विलय में उनकी प्रमुख भूमिका रही।

प्रश्न 109: निम्नलिखित में से किसने संविधान सभा में "उद्देश्य प्रस्ताव" प्रस्तुत किया था?

  • A. सरदार वल्लभभाई पटेल
  • B. डॉ. बी.आर. अम्बेडकर
  • C. मौलाना अबुल कलाम आज़ाद
  • D. जवाहरलाल नेहरू ✓
सही उत्तर: D — जवाहरलाल नेहरू
व्याख्या (Explanation):
13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जिसे 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया। यही प्रस्ताव आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का वैचारिक आधार बना। इसमें संप्रभुता, लोकतंत्र, न्याय तथा समानता जैसे मूल संवैधानिक आदर्शों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी।

प्रश्न 110: संविधान सभा के प्रथम अस्थायी अध्यक्ष कौन थे?

  • A. डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  • B. डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ✓
  • C. जवाहरलाल नेहरू
  • D. बी.एन. राउ
सही उत्तर: B — डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी। इस बैठक की अध्यक्षता सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने अस्थायी अध्यक्ष के रूप में की। बाद में 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित हुए।

प्रश्न 111: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  • A. इसने द्वैध शासन लागू किया।
  • B. इसने संघीय न्यायालय की स्थापना की।
  • C. इसने पृथक निर्वाचक मंडल प्रारंभ किए।
  • D. इसने भारत और पाकिस्तान को दो स्वतंत्र अधिराज्य (डोमिनियन) के रूप में स्थापित किया। ✓
सही उत्तर: D — इसने भारत और पाकिस्तान को दो स्वतंत्र अधिराज्य (डोमिनियन) के रूप में स्थापित किया।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ब्रिटिश संसद द्वारा पारित वह अधिनियम था जिसने 15 अगस्त 1947 से भारत और पाकिस्तान को दो स्वतंत्र डोमिनियन के रूप में स्थापित किया। इसने ब्रिटिश संसद की विधायी सर्वोच्चता समाप्त कर दी तथा दोनों देशों की संविधान सभाओं को पूर्ण विधायी अधिकार प्रदान किए। यह अधिनियम औपनिवेशिक शासन से संप्रभु शासन की ओर संक्रमण का संवैधानिक आधार बना।

प्रश्न 112: संविधान सभा के गठन का आधार कौन-सी योजना थी?

  • A. कैबिनेट मिशन योजना, 1946 ✓
  • B. वेवेल योजना, 1945
  • C. क्रिप्स प्रस्ताव, 1942
  • D. अगस्त प्रस्ताव, 1940
सही उत्तर: A — कैबिनेट मिशन योजना, 1946
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा का गठन 1946 की कैबिनेट मिशन योजना के आधार पर किया गया था। कैबिनेट मिशन ने संविधान निर्माण हेतु एक निर्वाचित संविधान सभा का प्रस्ताव दिया। संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन 9 दिसंबर 1946 को हुआ तथा डॉ. राजेंद्र प्रसाद बाद में इसके अध्यक्ष चुने गए। यह भारतीय संविधान निर्माण प्रक्रिया का संस्थागत आधार बना।

प्रश्न 113: निम्नलिखित में से किस अधिनियम को भारतीय संविधान का प्रमुख स्रोत माना जाता है?

  • A. भारतीय परिषद अधिनियम, 1892
  • B. भारत शासन अधिनियम, 1935 ✓
  • C. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947
  • D. चार्टर एक्ट, 1833
सही उत्तर: B — भारत शासन अधिनियम, 1935
व्याख्या (Explanation):
भारत शासन अधिनियम, 1935 भारतीय संविधान का सबसे महत्वपूर्ण औपनिवेशिक स्रोत माना जाता है। संघीय व्यवस्था, राज्यपाल का पद, लोक सेवा आयोग, संघ-राज्य संबंधों की अनेक अवधारणाएँ तथा प्रशासनिक ढाँचे के अनेक तत्व इसी अधिनियम से प्रेरित हैं। संविधान निर्माताओं ने इसे व्यापक प्रशासनिक अनुभव का आधार माना और इसके अनेक प्रावधानों को संशोधित रूप में अपनाया।

प्रश्न 114: मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार के अंतर्गत प्रांतों में कौन-सी व्यवस्था लागू की गई?

  • A. पृथक निर्वाचक मंडल
  • B. प्रांतीय स्वायत्तता
  • C. द्वैध शासन ✓
  • D. संघीय शासन
सही उत्तर: C — द्वैध शासन
व्याख्या (Explanation):
भारत शासन अधिनियम, 1919 ने प्रांतीय स्तर पर द्वैध शासन लागू किया, जिसमें प्रांतीय विषयों को आरक्षित एवं हस्तांतरित विषयों में विभाजित किया गया। आरक्षित विषय गवर्नर एवं उसकी कार्यकारिणी के अधीन रहे जबकि हस्तांतरित विषय भारतीय मंत्रियों को सौंपे गए। यह उत्तरदायी शासन की दिशा में सीमित प्रयोग था, जिसे बाद में 1935 के अधिनियम द्वारा समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता लागू की गई।

प्रश्न 115: मॉर्ले-मिंटो सुधार का सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रभाव क्या था?

  • A. प्रांतीय स्वायत्तता की स्थापना
  • B. द्वैध शासन का प्रारंभ
  • C. संविधान सभा की स्थापना
  • D. पृथक निर्वाचक मंडलों की शुरुआत ✓
सही उत्तर: D — पृथक निर्वाचक मंडलों की शुरुआत
व्याख्या (Explanation):
भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 जिसे मॉर्ले-मिंटो सुधार कहा जाता है, ने मुस्लिमों के लिए पृथक निर्वाचक मंडलों की व्यवस्था प्रारंभ की। इसे भारत में सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। यह प्रावधान आगे चलकर भारतीय राजनीति और विभाजन की प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।

प्रश्न 116: भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 का एक महत्वपूर्ण प्रावधान था—

  • A. विधायी परिषदों में नामित गैर-सरकारी सदस्यों को सम्मिलित करना ✓
  • B. पृथक निर्वाचक मंडल लागू करना
  • C. प्रांतीय स्वायत्तता प्रदान करना
  • D. द्विसदनीय केंद्रीय विधानमंडल स्थापित करना
सही उत्तर: A — विधायी परिषदों में नामित गैर-सरकारी सदस्यों को सम्मिलित करना
व्याख्या (Explanation):
भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 ने वायसराय की विस्तारित विधायी परिषद में कुछ गैर-सरकारी सदस्यों को नामित करने की अनुमति दी। इसे भारतीयों को विधायी प्रक्रिया से जोड़ने की प्रारंभिक पहल माना जाता है। लॉर्ड कैनिंग ने इस अधिनियम के अंतर्गत भारतीयों को परिषदों में सम्मिलित किया। पृथक निर्वाचक मंडल 1909 से तथा प्रांतीय स्वायत्तता 1935 से संबंधित है।

प्रश्न 117: भारत शासन अधिनियम, 1858 के परिणामस्वरूप कौन-सा परिवर्तन हुआ?

  • A. पृथक निर्वाचक मंडल प्रारंभ हुए
  • B. भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित हुआ ✓
  • C. द्वैध शासन लागू हुआ
  • D. संविधान सभा गठित हुई
सही उत्तर: B — भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित हुआ
व्याख्या (Explanation):
1857 के विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश संसद ने भारत शासन अधिनियम, 1858 पारित किया जिसके द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर भारत का प्रशासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया। भारत सचिव तथा उसकी परिषद की स्थापना की गई। इस अधिनियम ने कंपनी शासन का अंत और प्रत्यक्ष ब्रिटिश शासन का प्रारंभ सुनिश्चित किया, जो 1947 तक जारी रहा।

प्रश्न 118: निम्नलिखित में से किस चार्टर एक्ट ने ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को पूर्णतः समाप्त कर दिया?

  • A. चार्टर एक्ट, 1793
  • B. चार्टर एक्ट, 1813
  • C. चार्टर एक्ट, 1833 ✓
  • D. चार्टर एक्ट, 1853
सही उत्तर: C — चार्टर एक्ट, 1833
व्याख्या (Explanation):
चार्टर एक्ट, 1813 ने भारत के साथ व्यापार पर कंपनी का एकाधिकार समाप्त किया था, किंतु चीन व्यापार और चाय व्यापार पर उसका एकाधिकार बना रहा। चार्टर एक्ट, 1833 ने शेष व्यापारिक गतिविधियाँ भी समाप्त कर दीं और कंपनी को केवल प्रशासनिक संस्था बना दिया।

प्रश्न 119: पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 का प्रमुख उद्देश्य क्या था?

  • A. भारत में संसदीय शासन स्थापित करना
  • B. प्रांतीय स्वायत्तता प्रदान करना
  • C. कंपनी के राजनीतिक कार्यों पर ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण स्थापित करना ✓
  • D. संविधान सभा का गठन करना
सही उत्तर: C — कंपनी के राजनीतिक कार्यों पर ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण स्थापित करना
व्याख्या (Explanation):
पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 ने ईस्ट इंडिया कंपनी के वाणिज्यिक तथा राजनीतिक कार्यों के बीच पृथक्करण स्थापित किया। इसके अंतर्गत ब्रिटिश सरकार द्वारा 'नियंत्रण मंडल' (बोर्ड ऑफ कंट्रोल) की स्थापना की गई, जिसके माध्यम से कंपनी के राजनीतिक मामलों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित हुआ। इस प्रकार भारत में द्वैध नियंत्रण प्रणाली की व्यवस्था विकसित हुई। यह अधिनियम ब्रिटिश संसद द्वारा भारतीय प्रशासन पर बढ़ते नियंत्रण का महत्वपूर्ण चरण था।

प्रश्न 120: रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  • A. इसने बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर-जनरल बनाया। ✓
  • B. इसने भारत में द्वैध शासन प्रारंभ किया।
  • C. इसने पृथक निर्वाचक मंडल प्रारंभ किए।
  • D. इसने प्रांतीय स्वायत्तता प्रदान की।
सही उत्तर: A — इसने बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर-जनरल बनाया।
व्याख्या (Explanation):
रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 ब्रिटिश संसद द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन को नियंत्रित करने हेतु पारित पहला महत्वपूर्ण अधिनियम था। इसके अंतर्गत बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर-जनरल बनाया गया तथा चार सदस्यीय परिषद की व्यवस्था की गई। वॉरेन हेस्टिंग्स बंगाल के प्रथम गवर्नर-जनरल बने। इसी अधिनियम द्वारा कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना का प्रावधान भी किया गया। द्वैध शासन 1919 के अधिनियम से तथा प्रांतीय स्वायत्तता 1935 के अधिनियम से संबंधित है, जबकि पृथक निर्वाचक मंडल 1909 के अधिनियम से जुड़ा है।

प्रश्न 121: कथन (A): भारतीय संविधान का संघीय स्वरूप न्यायपालिका द्वारा संविधान की मूल संरचना का भाग माना गया है। कारण (R): संसद संविधान संशोधन द्वारा भारत को पूर्णतः एकात्मक राज्य में परिवर्तित नहीं कर सकती।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि संघीयता को सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान की मूल संरचना का अंग माना है। कारण भी सही है क्योंकि मूल संरचना सिद्धांत के अनुसार संसद संविधान संशोधन की शक्ति का प्रयोग करते हुए संविधान की संघीय पहचान को समाप्त नहीं कर सकती। इसलिए कारण, कथन की सही व्याख्या करता है। अतः विकल्प A सही है।

प्रश्न 122: कथन (A): अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 दोनों नए राज्यों के गठन से संबंधित हैं। कारण (R): अनुच्छेद 2 विदेशी क्षेत्रों को संघ में सम्मिलित करने से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 3 संघ के भीतर राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि दोनों अनुच्छेद राज्य निर्माण से संबंधित हैं, किंतु उनका दायरा अलग-अलग है। कारण भी सही है और दोनों के बीच मूल अंतर स्पष्ट करता है। इसलिए कारण, कथन की सही व्याख्या करता है। विकल्प A सही है।

प्रश्न 123: कथन (A): भारतीय संघ की संरचना अमेरिकी संघवाद की तुलना में अधिक केंद्रीकृत मानी जाती है। कारण (R): भारतीय संविधान संसद को अनुच्छेद 3 के अंतर्गत राज्यों की सीमाओं और नामों में परिवर्तन की शक्ति देता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि भारतीय संघवाद में केंद्र अपेक्षाकृत अधिक शक्तिशाली है। कारण भी सही है क्योंकि संसद राज्यों की सीमाओं, क्षेत्र तथा नाम में परिवर्तन कर सकती है। यह शक्ति अमेरिकी संघीय व्यवस्था में उपलब्ध नहीं है और भारतीय संघवाद की अपेक्षाकृत केंद्रीकृत प्रकृति को दर्शाती है। अतः विकल्प A सही है।

प्रश्न 124: कथन (A): 42वें संविधान संशोधन द्वारा प्रस्तावना में "धर्मनिरपेक्ष" और "समाजवादी" शब्द जोड़े गए। कारण (R): इन शब्दों के जुड़ने से पहले संविधान में धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक-आर्थिक न्याय की कोई अवधारणा मौजूद नहीं थी।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि 42वें संशोधन 1976 में ये शब्द जोड़े गए। कारण गलत है क्योंकि इन मूल्यों का प्रतिबिंब संविधान के विभिन्न प्रावधानों में पहले से मौजूद था। इसलिए विकल्प C सही है।

प्रश्न 125: कथन (A): प्रस्तावना संविधान की शक्ति का स्रोत मानी जाती है। कारण (R): प्रस्तावना स्पष्ट करती है कि संविधान "हम भारत के लोग" द्वारा अंगीकृत, अधिनियमित एवं आत्मार्पित किया गया है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि प्रस्तावना जनता की संप्रभुता और संविधान की वैधता का स्रोत स्पष्ट करती है। कारण भी सही है और वही कथन का आधार है। "हम भारत के लोग" संविधान की जनस्रोत अवधारणा को स्थापित करता है। अतः विकल्प A सही है।

प्रश्न 126: कथन (A): प्रारूप समिति संविधान सभा की एकमात्र समिति थी जिसने संविधान निर्माण में भूमिका निभाई। कारण (R): प्रारूप समिति संविधान सभा की सबसे प्रभावशाली समितियों में से एक थी।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि संविधान निर्माण में संघ संविधान समिति, संघ शक्तियाँ समिति, प्रांतीय संविधान समिति, मौलिक अधिकार समिति, अल्पसंख्यक समिति आदि अनेक समितियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था। कारण सही है क्योंकि प्रारूप समिति संविधान सभा की सबसे प्रभावशाली समितियों में से एक थी तथा अंतिम प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी उसी पर थी। अतः विकल्प D सही है।

प्रश्न 127: कथन (A): संविधान सभा विधिक दृष्टि से ब्रिटिश संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित हुई थी, किंतु स्वतंत्रता के बाद व्यवहार में संप्रभु निकाय बन गई। कारण (R): भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के बाद संविधान सभा पर ब्रिटिश संसद का कोई विधायी नियंत्रण नहीं रहा।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है। संविधान सभा की उत्पत्ति कैबिनेट मिशन योजना और ब्रिटिश विधिक प्रक्रिया से हुई, किंतु 15 अगस्त 1947 के बाद वह संप्रभु निकाय के रूप में कार्य करने लगी। कारण भी सही है और यही कथन की व्याख्या करता है। अतः विकल्प A सही है।

प्रश्न 128: कथन (A): भारत शासन अधिनियम, 1935 के अंतर्गत प्रस्तावित संघीय ढाँचा पूर्णतः लागू कर दिया गया था। कारण (R): देशी रियासतों के अपेक्षित संख्या में शामिल न होने के कारण संघीय योजना लागू नहीं हो सकी।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि प्रस्तावित संघीय ढाँचा कभी लागू नहीं हुआ। कारण सही है क्योंकि आवश्यक संख्या में रियासतों के न जुड़ने के कारण संघीय योजना विफल रही। इसलिए विकल्प D सही है।

प्रश्न 129: कथन (A): मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार, 1919 ने प्रांतीय स्तर पर उत्तरदायित्व के सिद्धांत को आंशिक रूप से लागू किया। कारण (R): हस्तांतरित विषयों का प्रशासन भारतीय मंत्रियों को सौंपा गया था।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि द्वैध शासन की व्यवस्था के माध्यम से प्रांतों में सीमित उत्तरदायी शासन लागू किया गया। कारण भी सही है क्योंकि हस्तांतरित विषय भारतीय मंत्रियों के अधीन थे, जो प्रांतीय विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी थे। यही आंशिक उत्तरदायित्व का आधार था। अतः विकल्प A सही है।

प्रश्न 130: कथन (A): मॉर्ले-मिंटो सुधार, 1909 ने पहली बार सांप्रदायिक निर्वाचन व्यवस्था लागू की। कारण (R): इस अधिनियम का उद्देश्य भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार करना था।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि मुस्लिमों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था 1909 के अधिनियम द्वारा प्रारंभ हुई। कारण गलत है क्योंकि कांग्रेस की सभी मांगें स्वीकार नहीं की गई थीं; उत्तरदायी शासन जैसी प्रमुख मांगें अस्वीकार रहीं। इसलिए विकल्प C सही है।

प्रश्न 131: कथन (A): भारतीय परिषद अधिनियम, 1892 ने प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को सीमित रूप में स्वीकार किया। कारण (R): परिषदों में कुछ सदस्यों के चयन हेतु स्थानीय निकायों एवं संस्थाओं की सिफारिशों को आधार बनाया गया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि 1892 के अधिनियम ने अप्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व का तत्व जोड़ा। कारण भी सही है क्योंकि स्थानीय निकायों की सिफारिशों पर सदस्य नामित किए जाते थे। यही प्रतिनिधित्व के सीमित सिद्धांत का आधार था। अतः विकल्प A सही है।

प्रश्न 132: कथन (A): भारत शासन अधिनियम, 1858 ने भारत में संसदीय उत्तरदायी शासन स्थापित किया। कारण (R): इस अधिनियम के अंतर्गत भारत सचिव का पद सृजित किया गया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि 1858 का अधिनियम केवल कंपनी शासन समाप्त कर क्राउन शासन स्थापित करता है; उत्तरदायी शासन नहीं। कारण सही है क्योंकि भारत सचिव का पद इसी अधिनियम से बना। अतः विकल्प D सही है।

प्रश्न 133: कथन (A): चार्टर एक्ट, 1833 ने भारत में विधायी केंद्रीकरण को मजबूत किया। कारण (R): इस अधिनियम ने मद्रास और बंबई की विधायी शक्तियों को समाप्त कर दिया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि 1833 के अधिनियम ने केंद्रीय विधायिका को सशक्त बनाया। कारण भी सही है क्योंकि मद्रास एवं बंबई की पृथक विधायी शक्तियाँ समाप्त कर दी गईं और कानून निर्माण का अधिकार केंद्र में निहित किया गया। यही विधायी केंद्रीकरण का प्रत्यक्ष कारण था। अतः विकल्प A सही है।

प्रश्न 134: कथन (A): पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 ने कंपनी शासन को समाप्त कर प्रत्यक्ष क्राउन शासन स्थापित कर दिया। कारण (R): इस अधिनियम के तहत नियंत्रण बोर्ड की स्थापना की गई थी।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि कंपनी शासन 1858 तक जारी रहा। कारण सही है क्योंकि इसी अधिनियम द्वारा नियंत्रण बोर्ड की स्थापना की गई थी, जिससे भारतीय राजनीतिक मामलों पर ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण बढ़ गया। इस अधिनियम ने द्वैध नियंत्रण की व्यवस्था स्थापित की। अतः विकल्प D सही है।

प्रश्न 135: कथन (A): रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 को भारत में ब्रिटिश संवैधानिक विकास की आधारशिला माना जाता है। कारण (R): यह पहला अधिनियम था जिसके द्वारा ब्रिटिश संसद ने ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय प्रशासन को विनियमित करने का प्रयास किया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 भारत में ब्रिटिश संसदीय हस्तक्षेप और संवैधानिक नियंत्रण का प्रथम संगठित प्रयास था। कारण भी सही है क्योंकि इससे पूर्व कंपनी लगभग स्वतंत्र रूप से शासन कर रही थी। संसद द्वारा प्रशासनिक विनियमन की शुरुआत ही इस अधिनियम को संवैधानिक विकास की आधारशिला बनाती है। अतः विकल्प A सही है।

प्रश्न 136: कथन (A): भारतीय संविधान में संघीय ढाँचे के साथ एकात्मक प्रवृत्तियों का समावेश राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया था। कारण (R): संविधान निर्माताओं ने विभाजन के अनुभव और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत केंद्र को प्राथमिकता दी।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि भारतीय संविधान में संघीय एवं एकात्मक तत्वों का मिश्रण जानबूझकर अपनाया गया। कारण भी सही है क्योंकि विभाजन, राष्ट्रीय एकीकरण और प्रशासनिक स्थिरता की चुनौतियों ने मजबूत केंद्र की आवश्यकता को जन्म दिया। यही कारण भारतीय संविधान की विशिष्ट संघीय संरचना की व्याख्या करता है। अतः विकल्प A सही है।

प्रश्न 137: कथन (A): अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद राज्य की सीमा, क्षेत्र या नाम में परिवर्तन कर सकती है। कारण (R): संबंधित राज्य की विधानमंडल की राय संसद पर बाध्यकारी होती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है। ✓
  • D. A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है।
व्याख्या (Explanation):
संसद को अनुच्छेद 3 के अंतर्गत राज्य की सीमा, क्षेत्र तथा नाम में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है। संबंधित राज्य की विधानमंडल से केवल राय ली जाती है, जो संसद पर बाध्यकारी नहीं होती। अतः विकल्प C सही है।

प्रश्न 138: कथन (A): भारतीय संविधान राज्यों को संघ से पृथक होने का अधिकार प्रदान करता है। कारण (R): संविधान भारत को "राज्यों का संघ" कहता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि भारतीय संविधान राज्यों को पृथक होने का अधिकार नहीं देता। कारण सही है क्योंकि अनुच्छेद 1 भारत को "राज्यों का संघ" घोषित करता है। डॉ. आंबेडकर ने स्पष्ट किया था कि यह संघ राज्यों के समझौते का परिणाम नहीं है। अतः विकल्प D सही है।

प्रश्न 139: कथन (A): केशवानंद भारती निर्णय 1973 ने प्रस्तावना की संवैधानिक स्थिति को सुदृढ़ किया। कारण (R): इस निर्णय में प्रस्तावना को संविधान का भाग माना गया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि केशवानंद भारती मामले ने प्रस्तावना के महत्व और उसकी व्याख्यात्मक भूमिका को स्वीकार किया। कारण भी सही है और यही कथन का आधार है। इस निर्णय ने मूल संरचना सिद्धांत को भी प्रतिपादित किया। अतः विकल्प A सही है।

प्रश्न 140: कथन (A): प्रस्तावना में प्रयुक्त "समाजवादी" शब्द मूल संविधान का भाग था। कारण (R): "समाजवादी" शब्द 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है।
  • D. A गलत है पर R सही है। ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
मूल संविधान में "समाजवादी" शब्द नहीं था। इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया। अतः कथन गलत तथा कारण सही है। विकल्प D सही है।

प्रश्न 141: कथन (A): संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार बी. एन. राव थे। कारण (R): बी. एन. राव प्रारूप समिति के अध्यक्ष भी थे।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है। ✓
  • D. A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है।
व्याख्या (Explanation):
बी. एन. राव संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे। किंतु प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर थे। अतः विकल्प C सही है।

प्रश्न 142: कथन (A): संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के आधार पर किया गया था। कारण (R): संविधान सभा की संरचना प्रत्यक्ष सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर आधारित थी।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है। ✓
  • D. A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है।
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के आधार पर हुआ था। किंतु उसके सदस्य प्रत्यक्ष वयस्क मताधिकार से नहीं चुने गए थे, बल्कि प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए थे। अतः विकल्प C सही है।

प्रश्न 143: कथन (A): भारत शासन अधिनियम, 1935 के अंतर्गत संघीय न्यायालय की स्थापना नहीं की गई थी। कारण (R): 1935 के अधिनियम ने संघीय न्यायालय की स्थापना का प्रावधान किया था।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि 1937 में संघीय न्यायालय की स्थापना इसी अधिनियम के अंतर्गत हुई। कारण सही है। इसलिए विकल्प D सही है। वर्तमान सर्वोच्च न्यायालय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि समझने के लिए यह तथ्य महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 144: कथन (A): भारत शासन अधिनियम, 1919 ने केंद्र स्तर पर उत्तरदायी शासन स्थापित कर दिया। कारण (R): भारत शासन अधिनियम, 1919 के अंतर्गत द्वैध शासन की व्यवस्था केवल प्रांतों में लागू की गई थी।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है।
  • D. A गलत है पर R सही है। ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि भारत शासन अधिनियम, 1919 ने केंद्र स्तर पर उत्तरदायी शासन स्थापित नहीं किया था। केंद्र में गवर्नर-जनरल तथा उसकी कार्यकारिणी ब्रिटिश सरकार के प्रति उत्तरदायी बनी रही। कारण सही है क्योंकि इस अधिनियम के अंतर्गत द्वैध शासन की व्यवस्था केवल प्रांतों में लागू की गई थी, केंद्र में नहीं। अतः विकल्प D सही है।

प्रश्न 145: कथन (A): मॉर्ले-मिंटो सुधार, 1909 ने सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की औपचारिक संवैधानिक शुरुआत की। कारण (R): पृथक निर्वाचन प्रणाली के माध्यम से विभिन्न समुदायों के लिए पृथक राजनीतिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की गई।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि 1909 के सुधारों ने सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व को संवैधानिक मान्यता दी। कारण भी सही है क्योंकि पृथक निर्वाचन इसका प्रत्यक्ष साधन था। यही व्यवस्था आगे चलकर भारतीय राजनीति में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आधार बनी। इसलिए कारण, कथन की सही व्याख्या करता है और विकल्प A सही है।

प्रश्न 146: कथन (A): भारतीय परिषद अधिनियम, 1892 ने परिषद सदस्यों को बजट पर चर्चा का अधिकार दिया। कारण (R): परिषदों को बजट पर मतदान करने तथा सरकार को बाध्यकारी निर्देश देने की शक्ति भी प्रदान कर दी गई थी।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है। ✓
  • D. A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि सदस्यों को बजट पर चर्चा का सीमित अधिकार दिया गया था। कारण गलत है क्योंकि उन्हें मतदान या सरकार को बाध्य करने की शक्ति प्राप्त नहीं थी। अतः विकल्प C सही है।

प्रश्न 147: कथन (A): भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 ने केंद्रीय विधायी शक्ति को पूर्णतः समाप्त कर प्रांतीय संप्रभुता स्थापित कर दी। कारण (R): इस अधिनियम ने सीमित स्तर पर विधायी विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ की।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि 1861 का अधिनियम केंद्रीय विधायी शक्ति को समाप्त नहीं करता था। कारण सही है क्योंकि इस अधिनियम ने बंबई और मद्रास को सीमित विधायी शक्तियाँ देकर विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया आरंभ की। अतः विकल्प D सही है। यह पूर्ण प्रांतीय स्वायत्तता नहीं बल्कि सीमित प्रशासनिक विकेंद्रीकरण था।

प्रश्न 148: कथन (A): चार्टर एक्ट, 1833 ने भारतीयों के लिए सार्वजनिक रोजगार में अवसरों की समानता के सिद्धांत को मान्यता दी। कारण (R): इस अधिनियम के बाद भारतीयों को तत्काल उच्च सिविल सेवाओं में व्यापक रूप से नियुक्त किया जाने लगा।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि चार्टर एक्ट, 1833 ने धर्म, जाति, जन्मस्थान आदि के आधार पर सरकारी रोजगार में भेदभाव न करने का सिद्धांत प्रस्तुत किया। कारण गलत है क्योंकि व्यवहार में उच्च प्रशासनिक सेवाओं में भारतीयों की व्यापक नियुक्ति तत्काल नहीं हुई। इसलिए विकल्प C सही है।

प्रश्न 149: कथन (A): पिट्स इंडिया अधिनियम, 1784 ने कंपनी के क्षेत्रों को पहली बार "ब्रिटिश अधिग्रहण" के रूप में मान्यता दी। कारण (R): इस अधिनियम के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी पूर्णतः समाप्त कर दी गई थी।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है। ✓
  • D. A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि पिट्स इंडिया अधिनियम, 1784 ने भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्रों को ब्रिटिश अधिग्रहणों के रूप में मान्यता दी। कारण गलत है क्योंकि ईस्ट इंडिया कंपनी 1858 तक अस्तित्व में रही। अतः विकल्प C सही है।

प्रश्न 150: कथन (A): रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के अंतर्गत स्थापित सर्वोच्च न्यायालय और गवर्नर-जनरल की परिषद के बीच अधिकार-क्षेत्र संबंधी विवाद उत्पन्न हुए थे। कारण (R): रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 ने न्यायिक और कार्यपालिका शक्तियों के बीच सीमाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया था।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि 1774 में स्थापित कलकत्ता के सर्वोच्च न्यायालय और गवर्नर-जनरल की परिषद के बीच अधिकार-क्षेत्र तथा प्रशासनिक शक्तियों को लेकर अनेक विवाद उत्पन्न हुए थे। कारण भी सही है क्योंकि रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 न्यायपालिका और कार्यपालिका के अधिकारों की सीमाओं को पर्याप्त स्पष्टता से परिभाषित नहीं कर पाया था। इस अस्पष्टता के कारण दोनों संस्थाओं के बीच बार-बार टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई। इन कमियों को दूर करने के लिए 1781 के संशोधन अधिनियम द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार-क्षेत्र को अधिक स्पष्ट किया गया। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या करता है और विकल्प A सही है।

प्रश्न 151: कथन (A): संसद अनुच्छेद 3 के अंतर्गत राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है। कारण (R): नए राज्यों के गठन एवं राज्य पुनर्गठन से संबंधित शक्ति संसद को संविधान द्वारा प्रदान की गई है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 3 संसद को राज्यों के गठन, क्षेत्र, सीमा तथा नाम परिवर्तन की शक्ति प्रदान करता है। इसलिए संसद राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है। कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 152: कथन (A): भारतीय संविधान में संघीय तथा एकात्मक दोनों प्रकार के तत्व विद्यमान हैं। कारण (R): संविधान निर्माताओं ने भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप एक मजबूत संघ की अवधारणा अपनाई।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि भारतीय संविधान में संघीय व्यवस्था के प्रमुख लक्षण विद्यमान हैं। साथ ही, इसमें एकात्मक तत्व भी पाए जाते हैं कारण भी सही है क्योंकि संविधान निर्माताओं ने भारत की भौगोलिक विशालता, सामाजिक विविधता, विभाजन के अनुभव तथा राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत संघ की अवधारणा अपनाई। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या करता है और विकल्प A सही है।

प्रश्न 153: कथन (A): प्रस्तावना को सर्वोच्च न्यायालय ने कभी भी संविधान का भाग नहीं माना। कारण (R): केशवानंद भारती मामले में प्रस्तावना को संविधान का भाग माना गया था।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य के ऐतिहासिक निर्णय में स्पष्ट रूप से माना था कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न भाग है। यद्यपि प्रारंभिक बेरीबारी संघ मामला में प्रस्तावना को संविधान का भाग नहीं माना गया था, लेकिन केशवानंद भारती मामले में इस दृष्टिकोण को परिवर्तित कर दिया गया। कारण सही है क्योंकि केशवानंद भारती मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रस्तावना को संविधान का भाग स्वीकार किया। अतः कथन गलत तथा कारण सही है, इसलिए विकल्प D सही उत्तर है।

प्रश्न 154: कथन (A): प्रारूप समिति संविधान सभा की सबसे महत्वपूर्ण समितियों में से एक थी। कारण (R): डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
दोनों कथन सही हैं, पर समिति की महत्ता केवल डॉ. आंबेडकर के अध्यक्ष होने के कारण नहीं थी बल्कि संविधान का प्रारूप तैयार करने में उसकी केंद्रीय भूमिका के कारण थी।

प्रश्न 155: कथन (A): संविधान सभा के सभी सदस्य प्रत्यक्ष सार्वभौमिक मताधिकार द्वारा चुने गए थे। कारण (R): संविधान सभा के अधिकांश सदस्य प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा निर्वाचित हुए थे।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
संविधान सभा प्रत्यक्ष वयस्क मताधिकार से निर्वाचित नहीं थी। अधिकांश सदस्य प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा निर्वाचित हुए थे। अतः कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 156: कथन (A): भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ने ब्रिटिश संसद की भारत पर विधायी सर्वोच्चता समाप्त कर दी। कारण (R): इस अधिनियम के अंतर्गत भारत और पाकिस्तान को स्वतंत्र अधिराज्य का दर्जा दिया गया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
स्वतंत्र अधिराज्यों की स्थापना के साथ भारत एवं पाकिस्तान को विधायी संप्रभुता प्राप्त हुई और ब्रिटिश संसद की सर्वोच्चता समाप्त हो गई। अतः विकल्प A सही है।

प्रश्न 157: कथन (A): भारत शासन अधिनियम, 1935 ने प्रांतीय स्वायत्तता का प्रावधान किया। कारण (R): इसी अधिनियम के अंतर्गत प्रस्तावित संघीय ढाँचा पूर्ण रूप से लागू हो गया था।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
प्रांतीय स्वायत्तता 1935 अधिनियम की प्रमुख विशेषता थी। किंतु प्रस्तावित अखिल भारतीय संघ कभी लागू नहीं हो सका क्योंकि रियासतों ने इसमें शामिल होने की सहमति नहीं दी। अतः कारण गलत है।

प्रश्न 158: कथन (A): मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार, 1919 ने केंद्र में द्वैध शासन लागू किया। कारण (R): इस अधिनियम ने प्रांतीय विषयों को आरक्षित एवं हस्तांतरित श्रेणियों में विभाजित किया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
द्वैध शासन केवल प्रांतों में लागू किया गया था, केंद्र में नहीं। अतः कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 159: कथन (A): मॉर्ले-मिंटो सुधार, 1909 ने मंत्रिपरिषद के प्रति उत्तरदायी सरकार की स्थापना कर दी। कारण (R): इस अधिनियम ने पृथक निर्वाचन प्रणाली लागू की।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
1909 के सुधारों ने उत्तरदायी शासन स्थापित नहीं किया था। उत्तरदायी शासन की दिशा में वास्तविक प्रगति 1919 और 1935 के अधिनियमों में हुई। पृथक निर्वाचन प्रणाली 1909 अधिनियम की प्रमुख विशेषता थी। अतः विकल्प D सही है।

प्रश्न 160: कथन (A): भारतीय परिषद अधिनियम, 1892 ने विधायी परिषदों के सदस्यों की संख्या में वृद्धि की। कारण (R): इस अधिनियम का उद्देश्य प्रशासनिक निर्णयों में सीमित प्रतिनिधिक तत्व जोड़ना था।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
परिषदों का विस्तार भारतीय प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम था। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 161: कथन (A): भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 ने विधायी प्रक्रिया में भारतीयों की सीमित भागीदारी का मार्ग खोला। कारण (R): इस अधिनियम के अंतर्गत पहली बार वायसराय को विधायी परिषद में भारतीय सदस्यों को नामित करने का अधिकार मिला।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 के अंतर्गत पहली बार भारतीयों को विधायी परिषद में नामित करने की व्यवस्था की गई। यही प्रावधान भारतीयों की सीमित भागीदारी का आधार बना। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 162: कथन (A): चार्टर एक्ट, 1833 ने भारत में संघीय शासन व्यवस्था स्थापित कर दी। कारण (R): चार्टर एक्ट, 1833 ने भारत के गवर्नर-जनरल को संपूर्ण ब्रिटिश भारत के लिए विधायी शक्ति प्रदान की।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
1833 का अधिनियम संघीय व्यवस्था नहीं बल्कि प्रशासनिक केंद्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। इसने गवर्नर-जनरल ऑफ बंगाल को गवर्नर-जनरल ऑफ इंडिया बनाया तथा उसे संपूर्ण ब्रिटिश भारत के लिए विधायी शक्तियाँ प्रदान कीं। अतः विकल्प D सही है।

प्रश्न 163: कथन (A): चार्टर एक्ट, 1813 ने ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया। कारण (R): इस अधिनियम ने कंपनी को चीन के साथ व्यापार करने के अधिकार से भी वंचित कर दिया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
चार्टर एक्ट, 1813 ने भारत के साथ व्यापार पर कंपनी का एकाधिकार समाप्त कर दिया, किंतु चाय एवं चीन व्यापार पर उसका एकाधिकार बना रहा। चीन व्यापार का एकाधिकार 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा समाप्त हुआ। अतः विकल्प C सही है।

प्रश्न 164: कथन (A): पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 ने कंपनी के राजनीतिक मामलों पर ब्रिटिश सरकार का प्रभाव बढ़ाया। कारण (R): इस अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में व्यापार करने से पूर्णतः वंचित कर दिया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा बोर्ड ऑफ़ कण्ट्रोल की स्थापना की गई, जिससे ब्रिटिश सरकार का कंपनी के राजनीतिक मामलों पर नियंत्रण बढ़ गया। कारण गलत है क्योंकि इस अधिनियम ने कंपनी के व्यापारिक अधिकार समाप्त नहीं किए थे। कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार बाद के चार्टर एक्टों द्वारा क्रमशः समाप्त हुआ। अतः विकल्प C सही है।

प्रश्न 165: कथन (A): रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 ने बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर-जनरल बना दिया। कारण (R): इस अधिनियम का उद्देश्य कंपनी के भारतीय प्रशासन में केंद्रीकरण और नियंत्रण को बढ़ाना था।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 द्वारा बंगाल के गवर्नर का पद गवर्नर-जनरल ऑफ बंगाल में परिवर्तित किया गया और वॉरेन हेस्टिंग्स इसके प्रथम गवर्नर-जनरल बने। इसका प्रमुख उद्देश्य कंपनी प्रशासन में केंद्रीकरण एवं नियंत्रण स्थापित करना था। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 166: कथन (A): प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग मानी जाती है। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती वाद में प्रस्तावना को संविधान का भाग माना था।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है। इसी कारण वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था में प्रस्तावना को संविधान का अभिन्न अंग माना जाता है। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 167: कथन (A): संविधान सभा एक संप्रभु निकाय के रूप में संविधान निर्माण कार्य कर रही थी। कारण (R): भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के बाद संविधान सभा को विधायिका तथा संविधान-निर्माता दोनों भूमिकाएँ प्राप्त हो गई थीं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के बाद संविधान सभा किसी बाहरी नियंत्रण के अधीन नहीं रही और उसे संविधान निर्माण के साथ-साथ केंद्रीय विधायिका के रूप में कार्य करने का अधिकार भी प्राप्त हुआ। यही उसकी संप्रभु स्थिति का आधार था।

प्रश्न 168: कथन (A): भारत शासन अधिनियम, 1935 के अंतर्गत प्रस्तावित संघीय व्यवस्था पूर्ण रूप से लागू कर दी गई थी। कारण (R): इस अधिनियम ने प्रांतीय स्वायत्तता का प्रावधान किया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
1935 के अधिनियम द्वारा प्रस्तावित अखिल भारतीय संघ कभी लागू नहीं हो सका। लेकिन प्रांतीय स्वायत्तता का प्रावधान लागू किया गया था। अतः कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 169: कथन (A): मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार, 1919 ने प्रांतीय स्तर पर द्वैध शासन लागू किया। कारण (R): इस अधिनियम के अंतर्गत केंद्र में पूर्ण संघीय शासन स्थापित किया गया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
1919 के अधिनियम ने प्रांतों में द्वैध शासन लागू की। केंद्र में संघीय शासन स्थापित नहीं किया गया था। अतः कारण गलत है।

प्रश्न 170: कथन (A): मॉर्ले-मिंटो सुधार, 1909 ने पृथक निर्वाचन (Separate Electorates) की व्यवस्था प्रारंभ की। कारण (R): इस अधिनियम ने भारत में पूर्ण उत्तरदायी शासन स्थापित कर दिया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
मॉर्ले-मिंटो सुधार, 1909 ने मुस्लिमों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था प्रारंभ की, इसलिए कथन सही है। किन्तु इस अधिनियम ने पूर्ण उत्तरदायी शासन स्थापित नहीं किया था। अतः कारण गलत है।

प्रश्न 171: कथन (A): भारतीय परिषद अधिनियम, 1892 ने विधायी परिषदों में अप्रत्यक्ष निर्वाचन के तत्व का प्रवेश कराया। कारण (R): इस अधिनियम के अंतर्गत कुछ गैर-सरकारी सदस्यों के चयन हेतु स्थानीय निकायों, विश्वविद्यालयों तथा वाणिज्य मंडलों की सिफारिशों को महत्व दिया गया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
1892 के अधिनियम ने अप्रत्यक्ष निर्वाचन की व्यवस्था का प्रारंभिक स्वरूप विकसित किया। स्थानीय निकायों आदि की सिफारिशों के आधार पर सदस्य चुने जाते थे। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 172: कथन (A): भारत शासन अधिनियम, 1858 ने भारत में उत्तरदायी शासन स्थापित कर दिया। कारण (R): इस अधिनियम के तहत भारत का प्रशासन ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित किया गया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
1858 का अधिनियम केवल कंपनी शासन को समाप्त कर ब्रिटिश क्राउन का प्रत्यक्ष शासन स्थापित करता है। इसने उत्तरदायी शासन स्थापित नहीं किया। अतः कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 173: कथन (A): चार्टर एक्ट, 1833 ने भारत के गवर्नर-जनरल को संपूर्ण ब्रिटिश भारत का गवर्नर-जनरल बना दिया। कारण (R): चार्टर एक्ट, 1833 ने प्रांतों को स्वतंत्र विधायी शक्तियाँ प्रदान कीं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
1833 के अधिनियम ने बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाया। लॉर्ड विलियम बेंटिंक इस पद पर प्रथम नियुक्त हुए। इस अधिनियम ने विधायी शक्तियों का केंद्रीकरण किया था, न कि प्रांतों को स्वतंत्र विधायी शक्तियाँ प्रदान की थीं। अतः कारण गलत है।

प्रश्न 174: कथन (A): पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 ने भारत में द्वैध नियंत्रण की व्यवस्था स्थापित की। कारण (R): इस अधिनियम द्वारा बोर्ड ऑफ़ कण्ट्रोल की स्थापना की गई, जिसके माध्यम से ब्रिटिश सरकार को कंपनी के राजनीतिक मामलों पर नियंत्रण प्राप्त हुआ।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता बोर्ड ऑफ़ कण्ट्रोल की स्थापना थी। इससे राजनीतिक मामलों पर ब्रिटिश सरकार तथा व्यापारिक मामलों पर Court of Directors का नियंत्रण बना रहा, जिसे द्वैध नियंत्रण कहा जाता है। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 175: कथन (A): रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 ने भारत में ब्रिटिश संसदीय नियंत्रण की औपचारिक शुरुआत की। कारण (R): इस अधिनियम द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासनिक कार्यों को पहली बार ब्रिटिश संसद के विनियमन के अधीन लाया गया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 ब्रिटिश संसद द्वारा पारित पहला महत्वपूर्ण अधिनियम था जिसने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन एवं राजनीतिक कार्यों पर संसदीय नियंत्रण स्थापित किया। पहली बार कंपनी के प्रशासन को संसद के विनियमन के अधीन लाया गया। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

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