प्रश्न 1: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मौलिक अधिकार व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करते हैं। (2) नीति निर्देशक तत्व सामाजिक-आर्थिक न्याय आधारित व्यवस्था की दिशा प्रदान करते हैं। (3) मौलिक कर्तव्य नागरिकों में संवैधानिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं। (4) इन तीनों का समन्वित अध्ययन भारतीय संविधान की मूल दर्शन-व्यवस्था को समझने के लिए आवश्यक है। सही उत्तर चुनिए:
-
A.
केवल 1, 2 और 3
-
B.
केवल 2, 3 और 4
-
C.
केवल 1, 3 और 4
-
D.
1, 2, 3 और 4
✓
सही उत्तर:
D
— 1, 2, 3 और 4
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान का दार्शनिक ढाँचा मौलिक अधिकारों, राज्य के नीति निर्देशक तत्वों और मौलिक कर्तव्यों के समन्वय पर आधारित है। मौलिक अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता, समानता और गरिमा की रक्षा करते हैं; नीति निर्देशक तत्व सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना का मार्गदर्शन करते हैं; जबकि मौलिक कर्तव्य नागरिकों को संविधान, राष्ट्र और समाज के प्रति उत्तरदायी बनाते हैं। उच्चतम न्यायालय ने भी समय-समय पर इन तीनों को परस्पर पूरक माना है।
प्रश्न 2: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय संविधान में अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन की अवधारणा निहित है। (2) मौलिक कर्तव्य नागरिक स्वतंत्रताओं को समाप्त करने के लिए नहीं जोड़े गए थे। (3) लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारों के साथ उत्तरदायित्व भी आवश्यक माने जाते हैं।
-
A.
1, 2 और 3
✓
-
B.
केवल 1 और 2
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
A
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान नागरिकों को व्यापक मौलिक अधिकार प्रदान करता है, किंतु साथ ही उत्तरदायी नागरिकता को प्रोत्साहित करने हेतु मौलिक कर्तव्यों का भी प्रावधान करता है। मौलिक कर्तव्यों का उद्देश्य अधिकारों को समाप्त करना नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्कृति, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करना है। यह अधिकार और दायित्व के संतुलित संवैधानिक दर्शन को दर्शाता है।
प्रश्न 3: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) 42वें संविधान संशोधन द्वारा मौलिक कर्तव्य जोड़े गए। (2) 86वें संविधान संशोधन द्वारा एक अतिरिक्त मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया। (3) वर्तमान में संविधान में 11 मौलिक कर्तव्य हैं।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
1, 2 और 3
✓
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
B
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रारंभिक 10 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए थे। 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा माता-पिता या अभिभावकों का अपने 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने का कर्तव्य जोड़ा गया। परिणामस्वरूप वर्तमान में कुल 11 मौलिक कर्तव्य हैं।
प्रश्न 4: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता से संबंधित है। (2) अनुच्छेद 44 उदार-बौद्धिक नीति निर्देशक तत्वों में गिना जाता है। (3) इसका उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक विधि व्यवस्था को प्रोत्साहित करना है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 44 राज्य को भारत के समस्त क्षेत्र में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करने का निर्देश देता है। यह उदार-बौद्धिक नीति निर्देशक तत्वों में शामिल है। इसका उद्देश्य नागरिक मामलों में समान विधिक ढाँचे की दिशा में कार्य करना है।
प्रश्न 5: निम्नलिखित में से किस निर्णय ने यह स्पष्ट किया कि "मनमानी समानता की विरोधी है"?
-
A.
ई. पी. रॉयप्पा बनाम तमिलनाडु राज्य
✓
-
B.
ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
-
C.
शंकर प्रसाद बनाम भारत संघ
-
D.
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
सही उत्तर:
A
— ई. पी. रॉयप्पा बनाम तमिलनाडु राज्य
व्याख्या (Explanation):
ई. पी. रॉयप्पा बनाम तमिलनाडु राज्य (1974) में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि समानता और मनमानी एक-दूसरे के विरोधी हैं। यदि कोई राज्य कार्रवाई मनमानी है तो वह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन मानी जा सकती है। इस निर्णय ने समानता के अधिकार की आधुनिक एवं गतिशील व्याख्या का आधार तैयार किया।
प्रश्न 6: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 39A, अनुच्छेद 21 की न्यायिक व्याख्या से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। (2) निःशुल्क विधिक सहायता को न्यायपूर्ण प्रक्रिया का आवश्यक अंग माना गया है। (3) यह विकास मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के परस्पर समन्वय का उदाहरण है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
1, 2 और 3
✓
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
C
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 39A समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित नीति निर्देशक तत्व है। उच्चतम न्यायालय ने इसे अनुच्छेद 21 के साथ जोड़कर पढ़ा और कहा कि न्यायपूर्ण एवं उचित प्रक्रिया के लिए विधिक सहायता आवश्यक है। इस प्रकार एक गैर-न्यायसंगत राज्य के नीति-निर्देशक को न्यायिक व्याख्या के माध्यम से मौलिक अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन से जोड़ा गया, जो मौलिक अधिकारों, राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्वों के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रश्न 7: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों की संवैधानिक स्थिति का सर्वाधिक उपयुक्त वर्णन करता है?
-
A.
वे न्यायालय द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रवर्तनीय अधिकार हैं।
-
B.
वे केवल नैतिक उपदेश हैं और उनका कोई संवैधानिक महत्व नहीं है।
-
C.
वे केवल केंद्र सरकार पर लागू होते हैं।
-
D.
वे नागरिकों के संवैधानिक दायित्व हैं, जिनका उपयोग न्यायिक एवं विधायी व्याख्या में किया जा सकता है।
✓
सही उत्तर:
D
— वे नागरिकों के संवैधानिक दायित्व हैं, जिनका उपयोग न्यायिक एवं विधायी व्याख्या में किया जा सकता है।
व्याख्या (Explanation):
मौलिक कर्तव्य प्रत्यक्ष रूप से न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते, किंतु वे संवैधानिक शासन, विधायी नीतियों और न्यायिक व्याख्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय सम्मान, शिक्षा और नागरिक उत्तरदायित्व से जुड़े मामलों में न्यायालयों ने इनका उल्लेख किया है। अतः उन्हें केवल नैतिक उपदेश मानना गलत होगा।
प्रश्न 8: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 दोनों रिट अधिकारिता से संबंधित हैं। (2) अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों की अधिकारिता, अनुच्छेद 32 की तुलना में अधिक व्यापक है। (3) उच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में ही रिट जारी कर सकते हैं।
-
A.
केवल 1 और 2 सही हैं
✓
-
B.
केवल 2 और 3 सही हैं
-
C.
केवल 1 और 3 सही हैं
-
D.
1, 2 और 3 सही हैं
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 2 सही हैं
व्याख्या (Explanation):
उच्च न्यायालय न केवल मौलिक अधिकारों बल्कि अन्य विधिक अधिकारों की रक्षा हेतु भी रिट जारी कर सकते हैं। इसलिए तीसरा कथन गलत है।
प्रश्न 9: निम्नलिखित में से किस निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने "संविधान की सीमित संशोधन शक्ति" को मूल संरचना का भाग माना?
-
A.
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
✓
-
B.
ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
-
C.
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
-
D.
रोमेश थापर बनाम मद्रास राज्य
सही उत्तर:
A
— केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में 13 न्यायाधीशों की पीठ ने निर्णय दिया कि संसद को संविधान संशोधन की व्यापक शक्ति प्राप्त है, किंतु यह शक्ति असीमित नहीं है। संविधान की मूल संरचना को नष्ट या परिवर्तित नहीं किया जा सकता। इस प्रकार सीमित संशोधन शक्ति स्वयं मूल संरचना का एक तत्व बन गई।
प्रश्न 10: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान की मूल संरचना सिद्धांत की कोई निश्चित एवं संपूर्ण सूची उच्चतम न्यायालय ने निर्धारित नहीं की है। (2) विभिन्न मामलों में न्यायालय ने समय-समय पर मूल संरचना के नए तत्वों की पहचान की है। (3) मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन को भी मूल संरचना का भाग माना गया है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
1, 2 और 3
✓
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
C
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती (1973) से लेकर मिनर्वा मिल्स, एस. आर. बोम्मई, एल. चंद्र कुमार तथा आई. आर. कोएलो जैसे मामलों तक उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मूल संरचना की कोई बंद या अंतिम सूची नहीं है। विभिन्न मामलों में लोकतंत्र, न्यायिक पुनरावलोकन, संघीयता, धर्मनिरपेक्षता, विधि का शासन, स्वतंत्र न्यायपालिका तथा मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन जैसे तत्वों को मूल संरचना का अंग माना गया है। अतः तीनों कथन सही हैं।
प्रश्न 11: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों, नीति निर्देशक तत्वों और मौलिक कर्तव्यों का समन्वय व्यक्ति तथा समाज दोनों के हितों को संतुलित करने का प्रयास करता है। (2) उच्चतम न्यायालय ने समय के साथ इन तीनों घटकों की परस्पर पूरकता को स्वीकार किया है।
-
A.
केवल 1 सही है
-
B.
केवल 2 सही है
-
C.
दोनों गलत हैं
-
D.
दोनों सही हैं
✓
सही उत्तर:
D
— दोनों सही हैं
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता या केवल सामाजिक कल्याण पर आधारित दस्तावेज नहीं है, बल्कि दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। मौलिक अधिकार व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करते हैं, नीति निर्देशक तत्व सामाजिक-आर्थिक न्याय को बढ़ावा देते हैं तथा मौलिक कर्तव्य नागरिक उत्तरदायित्व को प्रोत्साहित करते हैं। न्यायपालिका ने अनेक निर्णयों में इनकी पूरकता को स्वीकार किया है, जिससे संविधान के समग्र उद्देश्यों की पूर्ति होती है।
प्रश्न 12: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का उन्मूलन करता है। (2) अनुच्छेद 17 का उल्लंघन दंडनीय अपराध है। (3) नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 इस अनुच्छेद को प्रभावी बनाने हेतु बनाया गया था।
-
A.
1, 2 और 3
✓
-
B.
केवल 1 और 2
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
A
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का उन्मूलन करता है और इसके किसी भी रूप के व्यवहार को निषिद्ध घोषित करता है। इसे प्रभावी बनाने के लिए नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 अधिनियमित किया गया। यह मौलिक अधिकारों में सामाजिक समानता के संवैधानिक दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
प्रश्न 13: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) 42वें संविधान संशोधन को कभी-कभी "लघु संविधान" कहा जाता है। (2) इसी संशोधन द्वारा मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा गया। (3) इसी संशोधन द्वारा अनुच्छेद 48A भी जोड़ा गया।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
1, 2 और 3
✓
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
C
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम (1976) भारतीय संवैधानिक इतिहास के सबसे व्यापक संशोधनों में से एक था, इसलिए इसे "लघु संविधान" कहा जाता है। इसी संशोधन द्वारा भाग IVA (मौलिक कर्तव्य) तथा अनुच्छेद 48A (पर्यावरण संरक्षण) जोड़े गए। FR-DPSP संबंधों को प्रभावित करने वाले कई अन्य परिवर्तन भी इसी संशोधन द्वारा किए गए थे।
प्रश्न 14: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
-
A.
अनुच्छेद 39A समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित है।
-
B.
अनुच्छेद 43A उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी से संबंधित है।
-
C.
अनुच्छेद 48A पर्यावरण संरक्षण से संबंधित है।
-
D.
अनुच्छेद 44 ग्राम पंचायतों के संगठन से संबंधित है।
✓
सही उत्तर:
D
— अनुच्छेद 44 ग्राम पंचायतों के संगठन से संबंधित है।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता से संबंधित है। ग्राम पंचायतों के संगठन का निर्देश अनुच्छेद 40 में दिया गया है। शेष तीनों युग्म सही हैं।
प्रश्न 15: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 29 और अनुच्छेद 30 दोनों सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकारों से संबंधित हैं। (2) अनुच्छेद 29[1] केवल अल्पसंख्यकों को उपलब्ध है। (3) अनुच्छेद 30 विशेष रूप से धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यकों को संरक्षण देता है।
-
A.
केवल 1 और 3
✓
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 2
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 29(1) किसी भी नागरिक वर्ग को, जिसकी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति हो, उसे संरक्षित करने का अधिकार देता है; यह केवल अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है। दूसरी ओर, अनुच्छेद 30 विशेष रूप से धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार प्रदान करता है। अतः दूसरा कथन गलत है।
प्रश्न 16: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अनुच्छेद 25 और अनुच्छेद 26 के संबंध में सर्वाधिक उपयुक्त है?
-
A.
दोनों केवल व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित हैं।
-
B.
अनुच्छेद 25 व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 26 धार्मिक संप्रदायों के अधिकारों से संबंधित है।
✓
-
C.
अनुच्छेद 26 केवल अल्पसंख्यकों पर लागू होता है।
-
D.
दोनों केवल नागरिकों पर लागू होते हैं।
सही उत्तर:
B
— अनुच्छेद 25 व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 26 धार्मिक संप्रदायों के अधिकारों से संबंधित है।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 25 प्रत्येक व्यक्ति को अंतःकरण की स्वतंत्रता तथा धर्म के स्वतंत्र पालन, आचरण और प्रचार का अधिकार देता है। अनुच्छेद 26 धार्मिक संप्रदायों को धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन और धार्मिक मामलों के संचालन से संबंधित अधिकार प्रदान करता है। दोनों प्रावधान सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन हैं।
प्रश्न 17: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) "संवैधानिक नैतिकता" की अवधारणा का प्रयोग न्यायपालिका ने मौलिक अधिकारों की व्याख्या में किया है। (2) संवैधानिक नैतिकता का उद्देश्य केवल राज्य की शक्तियों को सीमित करना है। (3) यह अवधारणा संविधान के मूल मूल्यों की रक्षा से संबंधित है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
✓
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
C
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
संवैधानिक नैतिकता का प्रयोग उच्चतम न्यायालय ने अनेक मामलों में किया है, विशेषकर मौलिक अधिकारों की प्रगतिशील व्याख्या के संदर्भ में। इसका उद्देश्य केवल राज्य शक्ति को सीमित करना नहीं, बल्कि संविधान में निहित स्वतंत्रता, समानता, गरिमा और न्याय जैसे मूल्यों की रक्षा करना भी है। अतः दूसरा कथन गलत है।
प्रश्न 18: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 14 मनमानी राज्य कार्रवाई के विरुद्ध भी सुरक्षा प्रदान करता है। (2) समानता का अधिकार केवल समान परिस्थितियों वाले व्यक्तियों के समान व्यवहार की अपेक्षा करता है। (3) युक्तिसंगत वर्गीकरण अनुच्छेद 14 के अंतर्गत स्वीकार्य है।
-
A.
1, 2 और 3
✓
-
B.
केवल 1 और 2
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
A
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 14 केवल औपचारिक समानता तक सीमित नहीं है, बल्कि मनमानी के विरुद्ध भी सुरक्षा प्रदान करता है। ई. पी. रॉयप्पा तथा मेनका गांधी जैसे मामलों में न्यायालय ने मनमानी को समानता के विपरीत माना। साथ ही, समान परिस्थितियों वाले व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार तथा युक्तिसंगत वर्गीकरण की अनुमति अनुच्छेद 14 की स्थापित संवैधानिक व्याख्या का भाग है।
प्रश्न 19: निम्नलिखित में से किस मामले में उच्चतम न्यायालय ने न्यायिक पुनरावलोकन को संविधान की मूल संरचना का अभिन्न भाग माना?
-
A.
ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
-
B.
शंकर प्रसाद बनाम भारत संघ
-
C.
सज्जन सिंह बनाम राजस्थान राज्य
-
D.
मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
✓
सही उत्तर:
D
— मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
व्याख्या (Explanation):
मिनर्वा मिल्स (1980) में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सीमित संशोधन शक्ति और न्यायिक पुनरावलोकन संविधान की मूल संरचना के आवश्यक घटक हैं। न्यायालय ने 42वें संविधान संशोधन के उन प्रावधानों को निरस्त किया जो संसद की संशोधन शक्ति को असीमित बनाने का प्रयास करते थे। यह निर्णय संवैधानिक संतुलन की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 20: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) न्यायिक पुनरावलोकन को उच्चतम न्यायालय ने संविधान की मूल संरचना का भाग माना है। (2) न्यायिक पुनरावलोकन का आधार केवल अनुच्छेद 32 है। (3) अनुच्छेद 13, 32, 136, 226 और 227 मिलकर न्यायिक पुनरावलोकन की संवैधानिक नींव निर्मित करते हैं।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 1 और 3
✓
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
B
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक पुनरावलोकन भारतीय संविधान की मूल संरचना का एक महत्वपूर्ण तत्व है। इसका आधार केवल अनुच्छेद 32 नहीं, बल्कि अनुच्छेद 13, 32, 136, 226, 227 तथा अन्य संवैधानिक प्रावधानों में निहित है। केशवानंद भारती, मिनर्वा मिल्स तथा एल. चंद्र कुमार जैसे मामलों में न्यायपालिका ने इसकी संवैधानिक महत्ता को स्पष्ट किया। अतः दूसरा कथन गलत है जबकि पहला और तीसरा सही हैं।
प्रश्न 21: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय संविधान का उद्देश्य केवल राजनीतिक लोकतंत्र स्थापित करना नहीं है। (2) नीति निर्देशक तत्व सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना की दिशा प्रदान करते हैं। (3) मौलिक अधिकार, नीति निर्देशक तत्व और मौलिक कर्तव्य मिलकर संवैधानिक शासन की त्रिस्तरीय संरचना निर्मित करते हैं।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान राजनीतिक लोकतंत्र के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की भी स्थापना करना चाहता है। मौलिक अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा करते हैं, नीति निर्देशक तत्व कल्याणकारी राज्य की दिशा निर्धारित करते हैं तथा मौलिक कर्तव्य नागरिकों को संवैधानिक उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूक बनाते हैं।
प्रश्न 22: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मौलिक कर्तव्य मुख्यतः नागरिकों के लिए हैं। (2) अधिकांश मौलिक अधिकारों की तरह मौलिक कर्तव्य भी नागरिक-केंद्रित संवैधानिक अवधारणा हैं। (3) सभी मौलिक कर्तव्य केवल राज्य के विरुद्ध प्रवर्तनीय हैं।
-
A.
केवल 1 और 2
✓
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
मौलिक कर्तव्य मुख्यतः भारतीय नागरिकों पर लागू होते हैं और नागरिकों की संवैधानिक जिम्मेदारियों को परिभाषित करते हैं। वे राज्य के विरुद्ध प्रवर्तनीय अधिकार नहीं हैं, बल्कि नागरिकों के लिए नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व हैं। इसलिए तीसरा कथन गलत है।
प्रश्न 23: निम्नलिखित में से किस मामले में उच्चतम न्यायालय ने शिक्षा के अधिकार को अनुच्छेद 21 से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण व्याख्या की थी, जो बाद में अनुच्छेद 21A के रूप में विकसित हुई?
-
A.
मेनका गांधी मामला
-
B.
उन्नीकृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य
✓
-
C.
केशवानंद भारती मामला
-
D.
गोलकनाथ मामला
सही उत्तर:
B
— उन्नीकृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य
व्याख्या (Explanation):
उन्नीकृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1993) में उच्चतम न्यायालय ने शिक्षा को जीवन के अधिकार से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण व्याख्या प्रस्तुत की। इसी संवैधानिक विकास ने बाद में 86वें संविधान संशोधन (2002) और अनुच्छेद 21A के रूप में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के मौलिक अधिकार का मार्ग प्रशस्त किया।
प्रश्न 24: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) पर्यावरण संरक्षण से संबंधित संवैधानिक ढाँचे में अनुच्छेद 21, अनुच्छेद 48A तथा अनुच्छेद 51A(ग) तीनों महत्वपूर्ण हैं। (2) उच्चतम न्यायालय ने इन प्रावधानों का संयुक्त रूप से उपयोग करके पर्यावरणीय अधिकारों का विकास किया है।
-
A.
केवल 1 सही है
-
B.
केवल 2 सही है
-
C.
दोनों गलत हैं
-
D.
दोनों सही हैं
✓
सही उत्तर:
D
— दोनों सही हैं
व्याख्या (Explanation):
भारतीय पर्यावरणीय न्यायशास्त्र का विकास मुख्यतः अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार), अनुच्छेद 48A (राज्य का पर्यावरण संरक्षण संबंधी दायित्व) तथा अनुच्छेद 51A(ग) (नागरिकों का पर्यावरण संरक्षण संबंधी कर्तव्य) के संयुक्त आधार पर हुआ है। अनेक निर्णयों में उच्चतम न्यायालय ने स्वच्छ पर्यावरण को जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग माना है।
प्रश्न 25: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन "हार्मोनियस कंस्ट्रक्शन" (सामंजस्यपूर्ण व्याख्या) के संवैधानिक सिद्धांत को सर्वाधिक सही रूप में व्यक्त करता है?
-
A.
मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों की ऐसी व्याख्या की जाए जिससे दोनों को अधिकतम प्रभाव मिल सके।
✓
-
B.
नीति निर्देशक तत्वों को सदैव प्राथमिकता दी जाए।
-
C.
मौलिक अधिकारों को सदैव प्राथमिकता दी जाए।
-
D.
दोनों के बीच संघर्ष होने पर न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
सही उत्तर:
A
— मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों की ऐसी व्याख्या की जाए जिससे दोनों को अधिकतम प्रभाव मिल सके।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय न्यायपालिका ने समय के साथ यह दृष्टिकोण विकसित किया कि संविधान के विभिन्न प्रावधानों को परस्पर विरोधी न मानकर सामंजस्यपूर्ण रूप से पढ़ा जाना चाहिए। मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व दोनों संविधान के मूल उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं। मिनर्वा मिल्स और अन्य निर्णयों में इसी सिद्धांत को बल दिया गया।
प्रश्न 26: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 51A(ज) उत्कृष्टता के सभी क्षेत्रों में उच्च उपलब्धि प्राप्त करने का प्रयास करने का कर्तव्य निर्धारित करता है। (2) यह मौलिक कर्तव्य नागरिकों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान हेतु प्रेरित करता है।
-
A.
केवल 1 सही है
-
B.
केवल 2 सही है
-
C.
दोनों सही हैं
✓
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
C
— दोनों सही हैं
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 51A(ज) प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता की ओर अग्रसर हो ताकि राष्ट्र निरंतर उच्च उपलब्धियों को प्राप्त कर सके। यह कर्तव्य संविधान में केवल निषेधात्मक दायित्व ही नहीं बल्कि सकारात्मक राष्ट्रीय विकास की भावना को भी प्रतिबिंबित करता है।
प्रश्न 27: निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं? (1) गोलकनाथ मामला — संसद मौलिक अधिकारों में संशोधन नहीं कर सकती (2) केशवानंद भारती मामला — मूल संरचना सिद्धांत (3) मिनर्वा मिल्स मामला — मौलिक अधिकारों एवं नीति-निर्देशक तत्त्वों के बीच संतुलन
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
1, 2 और 3
✓
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
B
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
गोलकनाथ (1967) में संसद की संशोधन शक्ति पर प्रतिबंध का दृष्टिकोण अपनाया गया, केशवानंद भारती (1973) में मूल संरचना सिद्धांत प्रतिपादित हुआ और मिनर्वा मिल्स (1980) में मौलिक अधिकारों एवं नीति निर्देशक तत्वों के संतुलन को संविधान की मूल संरचना का भाग माना गया। इन तीनों निर्णयों ने भारतीय संवैधानिक कानून के विकास को गहराई से प्रभावित किया है।
प्रश्न 28: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय की रिट अधिकारिता को संविधान की मूल संरचना से संबंधित माना गया है। (2) संसद साधारण विधि द्वारा अनुच्छेद 32 को समाप्त कर सकती है।
-
A.
केवल 1 सही है
✓
-
B.
केवल 2 सही है
-
C.
दोनों सही हैं
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
A
— केवल 1 सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 32 को डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने संविधान का "हृदय और आत्मा" कहा था। न्यायिक पुनरावलोकन एवं संवैधानिक उपचारों की उपलब्धता संविधान की मूल संरचना से संबंधित मानी गई है। अतः संसद साधारण कानून द्वारा अनुच्छेद 32 को समाप्त नहीं कर सकती।
प्रश्न 29: निम्नलिखित में से किस मामले में उच्चतम न्यायालय ने गोपनीयता के अधिकार को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार घोषित किया?
-
A.
के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ
✓
-
B.
मेनका गांधी बनाम भारत संघ
-
C.
ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
-
D.
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
सही उत्तर:
A
— के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ
व्याख्या (Explanation):
के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017) में नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से निर्णय दिया कि निजता या गोपनीयता का अधिकार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभिन्न अंग है। यह निर्णय भारतीय मौलिक अधिकार न्यायशास्त्र के विकास में ऐतिहासिक महत्व रखता है तथा डिजिटल युग में नागरिक स्वतंत्रताओं की संवैधानिक सुरक्षा को मजबूत करता है।
प्रश्न 30: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) आई. आर. कोएलो बनाम तमिलनाडु राज्य (2007) के निर्णय ने नौवीं अनुसूची में सम्मिलित सभी कानूनों को पूर्णतः न्यायिक पुनरावलोकन से मुक्त घोषित कर दिया। (2) इस निर्णय के अनुसार 24 अप्रैल 1973 के बाद नौवीं अनुसूची में रखे गए कानून मूल संरचना परीक्षण के अधीन हो सकते हैं।
-
A.
केवल 1 सही है
-
B.
केवल 2 सही है
✓
-
C.
दोनों सही हैं
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
B
— केवल 2 सही है
व्याख्या (Explanation):
आई.आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु राज्य निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नौवीं अनुसूची में रखे गए कानून भी न्यायिक पुनरावलोकन से पूर्णतः मुक्त नहीं हैं। 24 अप्रैल 1973 के बाद नौवीं अनुसूची में जोड़े गए कानून मूल संरचना परीक्षण के अधीन हो सकते हैं।
प्रश्न 31: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मौलिक अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं। (2) नीति निर्देशक तत्व सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन का संवैधानिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। (3) मौलिक कर्तव्य नागरिकों को संवैधानिक मूल्यों के प्रति उत्तरदायी बनाते हैं।
-
A.
1, 2 और 3
✓
-
B.
केवल 1 और 2
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
A
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान के भाग III, भाग IV और भाग IVA मिलकर अधिकार, दायित्व और राज्य की नीतिगत दिशा का संतुलित ढाँचा प्रस्तुत करते हैं। मौलिक अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा करते हैं, नीति निर्देशक तत्व सामाजिक-आर्थिक न्याय आधारित व्यवस्था के निर्माण का लक्ष्य रखते हैं, जबकि मौलिक कर्तव्य नागरिकों में संवैधानिक अनुशासन, राष्ट्रीय एकता और सार्वजनिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं।
प्रश्न 32: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उच्चतम न्यायालय के न्यायिक दृष्टिकोण के सबसे निकट है?
-
A.
नीति निर्देशक तत्व सदैव मौलिक अधिकारों से श्रेष्ठ हैं।
-
B.
मौलिक अधिकार सदैव नीति निर्देशक तत्वों से श्रेष्ठ हैं।
-
C.
दोनों के बीच संघर्ष होने पर नीति निर्देशक तत्व स्वतः प्रभावी हो जाते हैं।
-
D.
दोनों का सामंजस्यपूर्ण निर्माण एवं संतुलित व्याख्या आवश्यक है।
✓
सही उत्तर:
D
— दोनों का सामंजस्यपूर्ण निर्माण एवं संतुलित व्याख्या आवश्यक है।
व्याख्या (Explanation):
उच्चतम न्यायालय ने विशेष रूप से केशवानंद भारती और मिनर्वा मिल्स मामलों में यह स्पष्ट किया कि मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व परस्पर विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं। संविधान की व्याख्या इस प्रकार की जानी चाहिए कि दोनों के उद्देश्यों को अधिकतम प्रभाव मिले। यही "हार्मोनियस कंस्ट्रक्शन" का संवैधानिक सिद्धांत है।
प्रश्न 33: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान के भाग III और भाग IV के बीच संघर्ष का प्रश्न भूमि सुधार कानूनों के संदर्भ में विशेष रूप से उभरा। (2) प्रथम संविधान संशोधन और बाद के कई संशोधन इस विवाद से प्रभावित थे।
-
A.
केवल 1 सही है
-
B.
दोनों सही हैं
✓
-
C.
केवल 2 सही है
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
B
— दोनों सही हैं
व्याख्या (Explanation):
स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधार कानूनों को लागू करने के प्रयासों में संपत्ति के अधिकार और नीति निर्देशक तत्वों के बीच संघर्ष सामने आया। प्रथम संविधान संशोधन, अनुच्छेद 31A, 31B, नौवीं अनुसूची तथा बाद के अनेक संवैधानिक संशोधन इसी पृष्ठभूमि में विकसित हुए। मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति-निर्देशक के संबंधों का संवैधानिक इतिहास समझने के लिए यह संदर्भ अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 34: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 51A(ग) दोनों पर्यावरण संरक्षण से संबंधित हैं। (2) पहला राज्य का दायित्व है जबकि दूसरा नागरिक का कर्तव्य है। (3) पर्यावरणीय न्यायशास्त्र के विकास में दोनों प्रावधानों का उपयोग किया गया है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
1, 2 और 3
✓
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
C
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण, वन एवं वन्यजीवों की रक्षा करने का निर्देश देता है, जबकि अनुच्छेद 51A(ग) नागरिकों पर प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा एवं संवर्धन का कर्तव्य आरोपित करता है। उच्चतम न्यायालय ने अनेक पर्यावरणीय मामलों में दोनों प्रावधानों को अनुच्छेद 21 के साथ पढ़ते हुए पर्यावरणीय अधिकारों का विकास किया है। यह मौलिक अधिकारों, राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्वों तथा मौलिक कर्तव्यों के परस्पर संबंध का उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रश्न 35: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
-
A.
मौलिक कर्तव्य संविधान सभा द्वारा मूल संविधान में सम्मिलित किए गए थे।
-
B.
मौलिक कर्तव्य न्यायालय द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रवर्तनीय हैं।
-
C.
स्वर्ण सिंह समिति ने मौलिक अधिकारों को समाप्त करने की अनुशंसा की थी।
-
D.
स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर मौलिक कर्तव्य जोड़े गए।
✓
सही उत्तर:
D
— स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर मौलिक कर्तव्य जोड़े गए।
व्याख्या (Explanation):
1976 में गठित स्वर्ण सिंह समिति ने संविधान में नागरिकों के कुछ कर्तव्यों को शामिल करने की अनुशंसा की थी। इसी के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा मौलिक कर्तव्यों को संविधान के भाग IVA में जोड़ा गया। समिति की सभी सिफारिशें स्वीकार नहीं की गई थीं, किंतु मौलिक कर्तव्यों का समावेश उसकी प्रमुख उपलब्धि माना जाता है।
प्रश्न 36: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 21 के अंतर्गत "जीवन" का अर्थ केवल शारीरिक अस्तित्व नहीं है। (2) मेनका गांधी निर्णय के बाद अनुच्छेद 21 की व्याख्या विस्तृत हुई। (3) स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार अनुच्छेद 21 से जोड़ा गया है।
-
A.
1, 2 और 3
✓
-
B.
केवल 1 और 2
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
A
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
मेनका गांधी निर्णय (1978) के बाद अनुच्छेद 21 की व्याख्या अत्यंत व्यापक हो गई। उच्चतम न्यायालय ने जीवन के अधिकार में गरिमा, स्वच्छ पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा (21A से पूर्व सीमित रूप में), विधिक सहायता, गोपनीयता और अन्य अनेक अधिकारों को शामिल किया। इस प्रकार अनुच्छेद 21 भारतीय मौलिक अधिकारों का सबसे गतिशील प्रावधान बन गया है।
प्रश्न 37: निम्नलिखित में से कौन-सा रिट किसी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक पद पर अवैध रूप से अधिकार करने की स्थिति में जारी किया जाता है?
-
A.
परमादेश
-
B.
अधिकार-पृच्छा
✓
-
C.
उत्प्रेषण
-
D.
प्रतिषेध
सही उत्तर:
B
— अधिकार-पृच्छा
व्याख्या (Explanation):
अधिकार-पृच्छा रिट का उद्देश्य यह जांचना होता है कि कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक पद पर किस वैधानिक अधिकार से कार्य कर रहा है। यदि उसका दावा विधिसम्मत न हो तो न्यायालय उसे उस पद से हटाने का आदेश दे सकता है। यह रिट सार्वजनिक पदों में वैधानिकता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण साधन है।
प्रश्न 38: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 31C के वर्तमान स्वरूप का संरक्षण केवल अनुच्छेद 39[b] एवं 39[c] को लागू करने वाले कानूनों तक सीमित है। (2) मिनर्वा मिल्स निर्णय के बाद सभी नीति-निर्देशक तत्त्वों को अनुच्छेद 31C का संरक्षण प्राप्त है।
-
A.
केवल 1 सही है
✓
-
B.
केवल 2 सही है
-
C.
दोनों सही हैं
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
A
— केवल 1 सही है
व्याख्या (Explanation):
मूलतः अनुच्छेद 31C केवल अनुच्छेद 39(b) एवं 39(c) को लागू करने वाले कानूनों को संरक्षण देता था। 42वें संविधान संशोधन द्वारा इसका विस्तार सभी नीति-निर्देशक तत्त्वों तक किया गया था, किंतु मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ निर्णय में इस विस्तार को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया। अतः वर्तमान में इसका प्रभाव केवल अनुच्छेद 39(b) एवं 39(c) तक सीमित है।
प्रश्न 39: निम्नलिखित में से किस मामले में उच्चतम न्यायालय ने "मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच सामंजस्य तथा संतुलन" को संविधान की मूल संरचना का भाग माना?
-
A.
शंकर प्रसाद बनाम भारत संघ
-
B.
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
-
C.
मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
✓
-
D.
सज्जन सिंह बनाम राजस्थान राज्य
सही उत्तर:
C
— मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
व्याख्या (Explanation):
मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व संविधान के परस्पर पूरक तत्व हैं तथा दोनों के बीच संतुलन संविधान की मूल संरचना का अंग है। न्यायालय ने 42वें संविधान संशोधन के कुछ प्रावधानों को इसी आधार पर निरस्त किया। यह निर्णय FR-DPSP संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक स्रोत माना जाता है।
प्रश्न 40: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) केशवानंद भारती निर्णय में मूल संरचना सिद्धांत प्रतिपादित किया गया। (2) मूल संरचना सिद्धांत का स्पष्ट उल्लेख संविधान के किसी अनुच्छेद में नहीं है। (3) संसद संविधान की मूल संरचना को परिवर्तित कर सकती है यदि वह विशेष बहुमत से संशोधन करे।
-
A.
केवल 1 और 2
✓
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में उच्चतम न्यायालय ने मूल संरचना सिद्धांत प्रतिपादित किया। संविधान में इस सिद्धांत का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं है; यह न्यायिक व्याख्या से विकसित सिद्धांत है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, किंतु उसकी मूल संरचना को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती। अतः तीसरा कथन गलत है।
प्रश्न 41: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मौलिक अधिकार राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना में सहायक हैं। (2) नीति निर्देशक तत्व सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना का लक्ष्य रखते हैं। (3) दोनों के बीच संतुलन भारतीय संविधान की मूल संरचना का भाग माना गया है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
1, 2 और 3
✓
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
B
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
मौलिक अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक लोकतंत्र की रक्षा करते हैं, जबकि नीति निर्देशक तत्व सामाजिक एवं आर्थिक न्याय पर आधारित व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास करते हैं। उच्चतम न्यायालय ने विशेष रूप से मिनर्वा मिल्स निर्णय में दोनों के बीच संतुलन को संविधान की मूल संरचना का हिस्सा माना। यही संतुलन भारतीय संविधान को उदार लोकतांत्रिक तथा कल्याणकारी राज्य के रूप में विशिष्ट बनाता है।
प्रश्न 42: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सीधे उच्चतम न्यायालय में जाया जा सकता है। (2) अनुच्छेद 32 संविधान की मूल संरचना का भाग माना गया है। (3) संसद अनुच्छेद 32 को पूर्णतः समाप्त कर सकती है।
-
A.
केवल 1 और 2
✓
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 32 नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु सीधे उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार देता है। उच्चतम न्यायालय ने केशवानंद भारती, एल. चंद्र कुमार तथा अन्य मामलों में न्यायिक पुनरावलोकन और मौलिक अधिकारों के प्रभावी प्रवर्तन की व्यवस्था को संविधान की मूल संरचना का अंग माना है। इसलिए अनुच्छेद 32 के मूल सार को समाप्त नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 43: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अनुच्छेद 39[d] के संबंध में सही है?
-
A.
यह ग्राम पंचायतों के संगठन से संबंधित है।
-
B.
यह समान नागरिक संहिता से संबंधित है।
-
C.
यह समान कार्य के लिए समान वेतन से संबंधित है।
✓
-
D.
यह पर्यावरण संरक्षण से संबंधित है।
सही उत्तर:
C
— यह समान कार्य के लिए समान वेतन से संबंधित है।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 39(d) राज्य को पुरुषों और महिलाओं के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करने का निर्देश देता है। यह समाजवादी नीति निर्देशक तत्वों का महत्वपूर्ण भाग है तथा श्रम न्याय और लैंगिक समानता के संवैधानिक लक्ष्य को व्यक्त करता है। उच्चतम न्यायालय ने अनेक मामलों में इस सिद्धांत को संवैधानिक महत्व प्रदान किया है।
प्रश्न 44: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 51A[क] संविधान का पालन करने और उसके आदर्शों का सम्मान करने का कर्तव्य निर्धारित करता है। (2) राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान भी इसी कर्तव्य का भाग है।
-
A.
दोनों कथन सही हैं
✓
-
B.
केवल 1 सही है
-
C.
केवल 2 सही है
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
A
— दोनों कथन सही हैं
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 51A(क) प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह संविधान, उसके आदर्शों एवं संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करे। यह मौलिक कर्तव्यों की सूची का पहला कर्तव्य है और संवैधानिक राष्ट्रवाद की भावना को सुदृढ़ करता है।
प्रश्न 45: निम्नलिखित में से किस मामले में उच्चतम न्यायालय ने नौवीं अनुसूची में रखे गए कानूनों को भी न्यायिक पुनरावलोकन के अधीन माना?
-
A.
शंकर प्रसाद मामला
-
B.
सज्जन सिंह मामला
-
C.
गोलकनाथ मामला
-
D.
आई. आर. कोएलो बनाम तमिलनाडु राज्य
✓
सही उत्तर:
D
— आई. आर. कोएलो बनाम तमिलनाडु राज्य
व्याख्या (Explanation):
आई. आर. कोएलो बनाम तमिलनाडु राज्य (2007) में उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि 24 अप्रैल 1973 (केशवानंद भारती निर्णय की तिथि) के बाद नौवीं अनुसूची में रखे गए कानून भी यदि संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन करते हैं, तो न्यायिक पुनरावलोकन के अधीन होंगे। यह निर्णय मौलिक अधिकारों और मूल संरचना सिद्धांत के संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 46: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मौलिक कर्तव्य सीधे न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं हैं। (2) न्यायालय संवैधानिक व्याख्या में मौलिक कर्तव्यों का उपयोग कर सकते हैं। (3) मौलिक कर्तव्य पूर्णतः अप्रासंगिक संवैधानिक प्रावधान हैं।
-
A.
केवल 1 और 2
✓
-
B.
केवल 1 और 3
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
मौलिक कर्तव्य न्यायालय द्वारा प्रत्यक्ष रूप से लागू नहीं कराए जा सकते, किंतु वे संवैधानिक व्याख्या, सार्वजनिक हित तथा विधायी नीतियों के परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उच्चतम न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय सम्मान तथा शिक्षा संबंधी मामलों में मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया है। अतः तीसरा कथन स्पष्ट रूप से गलत है।
प्रश्न 47: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है? (1) अनुच्छेद 41 - काम, शिक्षा और लोक सहायता का अधिकार (2) अनुच्छेद 42 - मानवीय कार्य दशाएँ एवं प्रसूति सहायता (3) अनुच्छेद 43A सहकारी समितियों का संवर्धन (4) अनुच्छेद 43B - सहकारी समितियों का संवर्धन
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2
-
C.
केवल 3
✓
-
D.
केवल 4
सही उत्तर:
C
— केवल 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 43A उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी से संबंधित है, जबकि सहकारी समितियों के संवर्धन का प्रावधान अनुच्छेद 43B में है, जिसे 97वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। अनुच्छेद 41 और 42 के युग्म सही हैं।
प्रश्न 48: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 38 और अनुच्छेद 39 दोनों सामाजिक एवं आर्थिक न्याय की स्थापना से संबंधित हैं। (2) अनुच्छेद 38 व्यापक उद्देश्य निर्धारित करता है जबकि अनुच्छेद 39 विशिष्ट नीतिगत दिशाएँ प्रदान करता है।
-
A.
दोनों कथन सही हैं
✓
-
B.
केवल 1 सही है
-
C.
केवल 2 सही है
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
A
— दोनों कथन सही हैं
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 38 राज्य को न्याय आधारित सामाजिक व्यवस्था स्थापित करने का व्यापक निर्देश देता है, जबकि अनुच्छेद 39 राज्य नीति के लिए विशिष्ट दिशानिर्देश प्रदान करता है, जैसे संसाधनों का न्यायसंगत वितरण, समान वेतन और आर्थिक संकेंद्रण की रोकथाम। दोनों मिलकर संविधान के समाजवादी कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को सुदृढ़ करते हैं।
प्रश्न 49: निम्नलिखित में से किस मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह माना कि संविधान संशोधन भी अनुच्छेद 13 के अंतर्गत "कानून" नहीं है?
-
A.
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
-
B.
मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
-
C.
आई. आर. कोएलो बनाम तमिलनाडु राज्य
-
D.
शंकर प्रसाद बनाम भारत संघ
✓
सही उत्तर:
D
— शंकर प्रसाद बनाम भारत संघ
व्याख्या (Explanation):
शंकर प्रसाद बनाम भारत संघ (1951) में उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि संविधान संशोधन अनुच्छेद 13 के अंतर्गत "कानून" नहीं है, इसलिए संसद मौलिक अधिकारों में संशोधन कर सकती है। यह दृष्टिकोण बाद में गोलकनाथ मामले में बदला गया, किंतु केशवानंद भारती के निर्णय में संशोधित रूप में पुनः स्थापित हुआ। UPSC के लिए संवैधानिक संशोधन न्यायशास्त्र का क्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 50: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 34 भारत के किसी भाग में मार्शल लॉ लागू होने की स्थिति से संबंधित है। (2) अनुच्छेद 34 संसद को ऐसे क्षेत्र में किए गए कुछ कार्यों को विधिक संरक्षण प्रदान करने हेतु कानून बनाने की अनुमति देता है। (3) अनुच्छेद 34 राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा से संबंधित है।
-
A.
केवल 1 और 2
✓
-
B.
केवल 1 और 3
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 34 उन परिस्थितियों से संबंधित है जहाँ भारत के किसी भाग में मार्शल लॉ लागू किया गया हो। यह संसद को ऐसे क्षेत्र में शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए किए गए कार्यों को विधिक संरक्षण देने तथा क्षतिपूर्ति संबंधी कानून बनाने की शक्ति देता है। इसका राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
प्रश्न 51: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय रिट जारी कर सकता है। (2) अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय रिट जारी कर सकते हैं। (3) उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता केवल मौलिक अधिकारों तक सीमित नहीं है।
-
A.
1, 2 और 3
✓
-
B.
केवल 1 और 2
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
A
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 32 उच्चतम न्यायालय को तथा अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को रिट जारी करने की शक्ति प्रदान करते हैं। उच्च न्यायालय न केवल मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए बल्कि अन्य वैधानिक और विधिक अधिकारों की रक्षा हेतु भी रिट जारी कर सकते हैं। इसी कारण उनकी रिट अधिकारिता क्षेत्र की दृष्टि से अधिक व्यापक मानी जाती है।
प्रश्न 52: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
-
A.
अनुच्छेद 48A मूल संविधान का भाग था।
-
B.
अनुच्छेद 48A 44वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया।
-
C.
अनुच्छेद 48A मौलिक कर्तव्यों का भाग है।
-
D.
अनुच्छेद 48A 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया।
✓
सही उत्तर:
D
— अनुच्छेद 48A 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 48A, जो पर्यावरण, वन और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित है, 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में जोड़ा गया था। इसी संशोधन द्वारा मौलिक कर्तव्यों को भी संविधान में सम्मिलित किया गया। पर्यावरणीय संवैधानिकता के विकास में यह संशोधन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रश्न 53: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 45 मूल संविधान में 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा से संबंधित था। (2) 86वें संविधान संशोधन के बाद अनुच्छेद 45 का विषय बदल गया। (3) वर्तमान अनुच्छेद 45 प्रारंभिक बाल्यावस्था की देखभाल और शिक्षा से संबंधित है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
1, 2 और 3
✓
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
B
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
मूल संविधान में अनुच्छेद 45 राज्य को 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश देता था। 86वें संविधान संशोधन के बाद यह उद्देश्य अनुच्छेद 21A में स्थानांतरित हो गया और संशोधित अनुच्छेद 45 छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा से संबंधित हो गया। यह FR और DPSP के बीच संवैधानिक विकास का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
प्रश्न 54: निम्नलिखित में से कौन-सा मौलिक कर्तव्य भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा एवं उसे अक्षुण्ण रखने से संबंधित है?
-
A.
अनुच्छेद 51A(c)
✓
-
B.
अनुच्छेद 51A(e)
-
C.
अनुच्छेद 51A(f)
-
D.
अनुच्छेद 51A(g)
सही उत्तर:
A
— अनुच्छेद 51A(c)
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 51A(c) प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे तथा उसे अक्षुण्ण रखे। यह 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए मौलिक कर्तव्यों में से एक है।
प्रश्न 55: निम्नलिखित में से किस मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया कि मौलिक अधिकारों में संशोधन संसद की शक्ति के बाहर है?
-
A.
शंकर प्रसाद बनाम भारत संघ
-
B.
सज्जन सिंह बनाम राजस्थान राज्य
-
C.
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
-
D.
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
✓
सही उत्तर:
D
— गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
व्याख्या (Explanation):
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य (1967) में उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि संसद अनुच्छेद 368 के अंतर्गत मौलिक अधिकारों में संशोधन नहीं कर सकती। बाद में 24वें संविधान संशोधन तथा केशवानंद भारती निर्णय द्वारा इस स्थिति में परिवर्तन आया। भारतीय संवैधानिक इतिहास में शंकर प्रसाद, सज्जन सिंह, गोलकनाथ और केशवानंद भारती मामलों का क्रम विशेष महत्व रखता है।
प्रश्न 56: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मौलिक कर्तव्य संविधान के भाग IVA में निहित हैं। (2) मौलिक कर्तव्यों की संख्या में वृद्धि अब तक केवल एक बार की गई है। (3) वर्तमान में संविधान में 11 मौलिक कर्तव्य हैं।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
1, 2 और 3
✓
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
C
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
संविधान के भाग IVA में अनुच्छेद 51A के अंतर्गत मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है। 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रारंभिक रूप से 10 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए थे। बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने संबंधी एक अतिरिक्त कर्तव्य जोड़ा गया। इस प्रकार मौलिक कर्तव्यों की संख्या 11 हो गई। मौलिक कर्तव्यों की संख्या में वृद्धि अब तक केवल एक बार हुई है।
प्रश्न 57: निम्नलिखित में से कौन-सा रिट किसी सार्वजनिक अधिकारी को उसके वैधानिक कर्तव्य के पालन हेतु जारी किया जाता है?
-
A.
बंदी प्रत्यक्षीकरण
-
B.
परमादेश
✓
-
C.
उत्प्रेषण
-
D.
अधिकार-पृच्छा
सही उत्तर:
B
— परमादेश
व्याख्या (Explanation):
परमादेश का शाब्दिक अर्थ है—"हम आदेश देते हैं"। यह रिट न्यायालय द्वारा किसी सार्वजनिक अधिकारी, निकाय या प्राधिकरण को उसके वैधानिक कर्तव्य के पालन हेतु जारी की जाती है। यह निजी व्यक्तियों के विरुद्ध सामान्यतः जारी नहीं की जाती।
प्रश्न 58: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 39(b) भौतिक संसाधनों के समान वितरण से संबंधित है। (2) अनुच्छेद 39[c] धन के संकेंद्रण को रोकने से संबंधित है। (3) दोनों प्रावधान समाजवादी नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत आते हैं। सही उत्तर चुनिए:
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 39(b) राज्य को समुदाय के भौतिक संसाधनों का ऐसा वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश देता है जिससे सामूहिक हित की सर्वोत्तम पूर्ति हो सके। अनुच्छेद 39(c) आर्थिक व्यवस्था को इस प्रकार संचालित करने पर बल देता है कि धन एवं उत्पादन के साधनों का संकेंद्रण जनहित के प्रतिकूल न हो। दोनों समाजवादी नीति निर्देशक तत्वों के मूल आधार हैं और अनुच्छेद 31C से भी ऐतिहासिक रूप से जुड़े रहे हैं।
प्रश्न 59: निम्नलिखित में से किस निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना संविधान का भाग है?
-
A.
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
✓
-
B.
इन रे: बेरुबारी यूनियन (1960)
-
C.
मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
-
D.
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
सही उत्तर:
A
— केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न भाग है और संविधान की व्याख्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे पहले इन रे: बेरुबारी यूनियन (1960) में न्यायालय ने विपरीत मत व्यक्त किया था। प्रस्तावना में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श मौलिक अधिकारों एवं नीति निर्देशक तत्वों दोनों को दिशा प्रदान करते हैं।
प्रश्न 60: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 35 संसद को कुछ मौलिक अधिकारों से संबंधित विषयों पर विशेष विधायी शक्ति प्रदान करता है। (2) अनुच्छेद 16(3), 32(3), 33 तथा 34 से संबंधित विषयों पर विधियाँ केवल संसद ही बना सकती है। (3) राज्य विधानमंडल इन विषयों पर कानून नहीं बना सकते।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
1, 2 और 3
✓
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
C
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 35 यह सुनिश्चित करता है कि कुछ विशिष्ट मौलिक अधिकारों के क्रियान्वयन से संबंधित विषयों पर केवल संसद ही कानून बनाए। इनमें सार्वजनिक रोजगार में निवास संबंधी अर्हता [अनुच्छेद 16(3)], उच्चतम न्यायालय के अतिरिक्त अन्य न्यायालयों को रिट जारी करने की शक्ति प्रदान करना [अनुच्छेद 32(3)], सशस्त्र बलों एवं संबंधित सेवाओं के सदस्यों के मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध [अनुच्छेद 33] तथा मार्शल लॉ से संबंधित संरक्षण [अनुच्छेद 34] शामिल हैं। इसलिए इन विषयों पर राज्य विधानमंडल कानून नहीं बना सकते।
प्रश्न 61: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 43B सहकारी समितियों के प्रोत्साहन से संबंधित है। (2) यह प्रावधान 97वें संविधान संशोधन अधिनियम से जुड़ा है। (3) सहकारी समितियों का लोकतांत्रिक एवं स्वायत्त संचालन सुनिश्चित करना इसका उद्देश्य है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 (प्रभावी: 15 फरवरी 2012) द्वारा संविधान में अनुच्छेद 43B जोड़ा गया। यह राज्य को स्वैच्छिक गठन, लोकतांत्रिक नियंत्रण, सदस्य सहभागिता तथा व्यावसायिक प्रबंधन पर आधारित सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करने का निर्देश देता है। इसका उद्देश्य सहकारी समितियों के लोकतांत्रिक, स्वायत्त एवं प्रभावी संचालन को बढ़ावा देना था।
प्रश्न 62: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अनुच्छेद 30 के संबंध में सही है?
-
A.
धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थान स्थापित और संचालित करने का अधिकार प्राप्त है।
✓
-
B.
केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों को यह अधिकार प्राप्त है।
-
C.
केवल भाषायी अल्पसंख्यकों को यह अधिकार प्राप्त है।
-
D.
यह अधिकार सभी नागरिकों को समान रूप से प्राप्त है।
सही उत्तर:
A
— धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थान स्थापित और संचालित करने का अधिकार प्राप्त है।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 30 धार्मिक तथा भाषायी दोनों प्रकार के अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार प्रदान करता है। यह भारत की बहुलतावादी संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण घटक है। विभिन्न न्यायिक निर्णयों ने इस अधिकार की सीमा, प्रशासनिक नियंत्रण और संस्थागत स्वायत्तता को स्पष्ट किया है।
प्रश्न 63: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 38 राज्य को लोककल्याण की उन्नति के लिए ऐसी सामाजिक व्यवस्था स्थापित करने का निर्देश देता है जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं को अनुप्राणित करे। (2) 44वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 38 में असमानताओं को कम करने संबंधी प्रावधान जोड़ा गया।
-
A.
केवल 1 सही है
-
B.
केवल 2 सही है
-
C.
दोनों सही हैं
✓
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
C
— दोनों सही हैं
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 38 राज्य को लोककल्याण की उन्नति हेतु ऐसी सामाजिक व्यवस्था स्थापित करने का निर्देश देता है जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं को अनुप्राणित करे। 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इसमें एक अतिरिक्त उपबंध जोड़ा गया जिसके अनुसार राज्य आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं को कम करने का प्रयास करेगा।
प्रश्न 64: निम्नलिखित में से कौन-सा मौलिक कर्तव्य सीधे पर्यावरण संरक्षण से संबंधित है?
-
A.
राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना
-
B.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना
-
C.
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना
-
D.
प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा एवं संवर्धन करना
✓
सही उत्तर:
D
— प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा एवं संवर्धन करना
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 51A(ग) प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह प्राकृतिक पर्यावरण, वन, झील, नदी और वन्यजीवों की रक्षा एवं संवर्धन करे तथा जीवधारियों के प्रति करुणा रखे। यह 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए कर्तव्यों में से एक है। पर्यावरण संरक्षण का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 48A (DPSP) और अनुच्छेद 51A(ग) दोनों में मिलता है।
प्रश्न 65: निम्नलिखित में से किस मामले में उच्चतम न्यायालय ने "मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच सामंजस्य" को संवैधानिक लक्ष्य बताया?
-
A.
केरल एजुकेशन बिल संदर्भ मामला, 1958
✓
-
B.
ए. के. गोपालन मामला
-
C.
शंकर प्रसाद मामला
-
D.
सज्जन सिंह मामला
सही उत्तर:
A
— केरल एजुकेशन बिल संदर्भ मामला, 1958
व्याख्या (Explanation):
केरल एजुकेशन बिल संदर्भ (1958) में उच्चतम न्यायालय ने प्रारंभिक स्तर पर यह दृष्टिकोण व्यक्त किया कि मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच टकराव के बजाय सामंजस्य स्थापित किया जाना चाहिए। बाद के निर्णयों, विशेषकर केशवानंद भारती और मिनर्वा मिल्स में इस सिद्धांत को और विकसित किया गया।
प्रश्न 66: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार है। (2) अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर ही रिट जारी कर सकते हैं। (3) अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उपलब्ध संवैधानिक उपचार का अधिकार सामान्यतः उपलब्ध रहता है, यद्यपि संविधान में निर्धारित विशेष परिस्थितियों में इसके प्रवर्तन पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 1 और 3
✓
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
B
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार है तथा नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु सीधे उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार प्रदान करता है। अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के अतिरिक्त अन्य वैधानिक एवं विधिक अधिकारों के संरक्षण के लिए भी रिट जारी कर सकते हैं, इसलिए दूसरा कथन गलत है। सामान्यतः अनुच्छेद 32 के अंतर्गत संवैधानिक उपचार का अधिकार उपलब्ध रहता है, यद्यपि संविधान में उपबंधित विशेष परिस्थितियों (जैसे अनुच्छेद 359 के अंतर्गत) में कुछ मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को अस्थायी रूप से स्थगित किया जा सकता है। डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान का "हृदय और आत्मा" कहा था।
प्रश्न 67: निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद समान न्याय तथा निःशुल्क विधिक सहायता की संवैधानिक व्यवस्था को मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच सेतु के रूप में प्रस्तुत करता है?
-
A.
अनुच्छेद 38
-
B.
अनुच्छेद 41
-
C.
अनुच्छेद 39A
✓
-
D.
अनुच्छेद 43A
सही उत्तर:
C
— अनुच्छेद 39A
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 39A राज्य को समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश देता है। बाद के न्यायिक निर्णयों में इसे अनुच्छेद 21 के साथ जोड़कर पढ़ा गया, जिसके परिणामस्वरूप विधिक सहायता को न्यायपूर्ण प्रक्रिया का आवश्यक अंग माना गया। यह DPSP और मौलिक अधिकारों के बीच व्यावहारिक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रश्न 68: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 33 संसद को सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस बलों तथा गुप्तचर संगठनों के सदस्यों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने की शक्ति प्रदान करता है। (2) यह शक्ति राज्य विधानमंडलों को भी प्राप्त है।
-
A.
केवल 1 सही है
✓
-
B.
केवल 2 सही है
-
C.
दोनों सही हैं
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
A
— केवल 1 सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस बलों, गुप्तचर संगठनों तथा उनसे संबंधित सेवाओं के सदस्यों के मौलिक अधिकारों को उनके कर्तव्यों के प्रभावी निर्वहन तथा अनुशासन बनाए रखने के लिए सीमित या प्रतिबंधित कर सके। यह शक्ति केवल संसद को प्राप्त है; राज्य विधानमंडलों को नहीं।
प्रश्न 69: निम्नलिखित में से किस निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 21 की व्यापक एवं उदार व्याख्या करते हुए उसके दायरे का उल्लेखनीय विस्तार किया?
-
A.
ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
-
B.
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
-
C.
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
-
D.
मेनका गांधी बनाम भारत संघ
✓
सही उत्तर:
D
— मेनका गांधी बनाम भारत संघ
व्याख्या (Explanation):
मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) के ऐतिहासिक निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 21 में प्रयुक्त "विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया" की व्यापक व्याख्या करते हुए कहा कि ऐसी प्रक्रिया न्यायसंगत, उचित और तर्कसंगत होनी चाहिए, न कि मनमानी, दमनकारी या अन्यायपूर्ण। इस निर्णय ने अनुच्छेद 14, 19 और 21 के बीच परस्पर संबंध स्थापित किया तथा अनुच्छेद 21 के दायरे का उल्लेखनीय विस्तार किया। इसके बाद गरिमापूर्ण जीवन, विधिक सहायता, स्वच्छ पर्यावरण, गोपनीयता, शीघ्र न्याय और अन्य अनेक अधिकारों को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त हुई।
प्रश्न 70: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 31C मूल रूप से केवल अनुच्छेद 39[b] एवं 39[c] को लागू करने वाले कानूनों को संरक्षण प्रदान करता था। (2) 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 31C का विस्तार सभी नीति-निर्देशक तत्वों को लागू करने वाले कानूनों तक कर दिया गया था। (3) मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ [1980] में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 31C के इस विस्तारित भाग को असंवैधानिक घोषित कर दिया।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
1, 2 और 3
✓
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
B
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
25वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 31C ने प्रारंभ में केवल अनुच्छेद 39(b) और 39(c) को लागू करने वाले कानूनों को अनुच्छेद 14 तथा अनुच्छेद 19 की चुनौतियों से संरक्षण प्रदान किया था। 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा इस संरक्षण का विस्तार सभी नीति-निर्देशक तत्वों तक कर दिया गया। किंतु मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) में उच्चतम न्यायालय ने इस विस्तार को संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध मानते हुए असंवैधानिक घोषित कर दिया। यह निर्णय मौलिक अधिकारों और नीति-निर्देशक तत्वों के बीच संवैधानिक संतुलन का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
प्रश्न 71: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्वों के बीच सामंजस्य भारतीय संविधान की मूल संरचना का भाग माना गया है। (2) मिनर्वा मिल्स निर्णय ने इस सिद्धांत को सुदृढ़ किया। (3) संविधान केवल मौलिक अधिकारों को महत्व देता है, नीति निर्देशक तत्वों को नहीं।
-
A.
केवल 1 और 2
✓
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मौलिक अधिकार और राज्य के नीति निर्देशक तत्व संविधान की संतुलित संरचना के आवश्यक घटक हैं तथा दोनों के बीच सामंजस्य संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है। इसलिए कथन (1) और (2) सही हैं। कथन (3) गलत है क्योंकि संविधान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की स्थापना हेतु मौलिक अधिकारों तथा नीति निर्देशक तत्वों दोनों को महत्वपूर्ण मानता है। यह निर्णय मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन के सिद्धांत का प्रमुख न्यायिक आधार है।
प्रश्न 72: निम्नलिखित में से कौन-सा मौलिक कर्तव्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद तथा ज्ञानार्जन और सुधार की भावना विकसित करने से संबंधित है?
-
A.
अनुच्छेद 51A(ह)
✓
-
B.
अनुच्छेद 51A(क)
-
C.
अनुच्छेद 51A(ग)
-
D.
अनुच्छेद 51A(ज)
सही उत्तर:
A
— अनुच्छेद 51A(ह)
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 51A(ह) प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद तथा ज्ञानार्जन एवं सुधार की भावना का विकास करे। यह प्रावधान आधुनिक, प्रगतिशील और तर्कसंगत समाज के निर्माण की संवैधानिक अपेक्षा को दर्शाता है।
प्रश्न 73: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है? (1) अनुच्छेद 48 — कृषि एवं पशुपालन का संगठन (2) अनुच्छेद 48A — पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव संरक्षण (3) अनुच्छेद 49 — राष्ट्रीय महत्त्व के स्मारकों, स्थानों एवं वस्तुओं का संरक्षण
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
1, 2 और 3
✓
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
B
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 48 राज्य को कृषि और पशुपालन को आधुनिक एवं वैज्ञानिक आधार पर संगठित करने तथा गौवंश एवं दुग्ध एवं भारवाही पशुओं के संरक्षण एवं सुधार हेतु प्रयास करने का निर्देश देता है। अनुच्छेद 48A पर्यावरण, वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण और संवर्धन से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 49 राष्ट्रीय महत्त्व के स्मारकों, स्थानों एवं वस्तुओं के संरक्षण का निर्देश देता है। अतः तीनों युग्म सही सुमेलित हैं।
प्रश्न 74: निम्नलिखित में से किस मामले में उच्चतम न्यायालय ने संसद की संशोधन शक्ति पर "मूल संरचना सिद्धांत" लागू किया?
-
A.
शंकर प्रसाद बनाम भारत संघ
-
B.
सज्जन सिंह बनाम राजस्थान राज्य
-
C.
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
-
D.
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
✓
सही उत्तर:
D
— केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में 13 न्यायाधीशों की पीठ ने निर्णय दिया कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, किंतु संविधान की मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती। यह निर्णय मौलिक अधिकारों, नीति निर्देशक तत्वों तथा संवैधानिक संतुलन की समझ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 75: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 47 राज्य को पोषण स्तर और लोक स्वास्थ्य सुधारने का निर्देश देता है। (2) अनुच्छेद 47 मादक पेयों के उपभोग पर नियंत्रण की भी बात करता है।
-
A.
दोनों कथन सही हैं
✓
-
B.
केवल 1 सही है
-
C.
केवल 2 सही है
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
A
— दोनों कथन सही हैं
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 47 राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में सम्मिलित है और राज्य को पोषण स्तर बढ़ाने, लोक स्वास्थ्य सुधारने तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पेयों एवं नशीले पदार्थों के उपभोग को सीमित करने का निर्देश देता है। यह समाजवादी कल्याणकारी राज्य की अवधारणा से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रावधान है।
प्रश्न 76: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
-
A.
मौलिक कर्तव्य संविधान सभा द्वारा मूल संविधान में जोड़े गए थे।
-
B.
मौलिक कर्तव्यों का विचार अमेरिकी संविधान से लिया गया है।
-
C.
मौलिक कर्तव्यों की प्रेरणा सोवियत संघ के संविधान से प्राप्त हुई है।
✓
-
D.
मौलिक कर्तव्य न्यायालय द्वारा प्रत्यक्ष रूप से लागू कराए जा सकते हैं।
सही उत्तर:
C
— मौलिक कर्तव्यों की प्रेरणा सोवियत संघ के संविधान से प्राप्त हुई है।
व्याख्या (Explanation):
मौलिक कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था और इनकी प्रेरणा तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) के संविधान से ली गई थी। मूल संविधान में इनका उल्लेख नहीं था। ये न्यायालय द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रवर्तनीय नहीं हैं, किंतु संवैधानिक व्याख्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 77: निम्नलिखित में से कौन-सा नीति निर्देशक तत्व गांधीवादी सिद्धांतों के अंतर्गत आता है?
-
A.
समान नागरिक संहिता
-
B.
अंतरराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना
-
C.
पर्यावरण संरक्षण
-
D.
कुटीर उद्योगों का प्रोत्साहन
✓
सही उत्तर:
D
— कुटीर उद्योगों का प्रोत्साहन
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 43 ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत या सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करने की बात करता है। यह गांधीवादी आर्थिक दर्शन से प्रेरित है। समान नागरिक संहिता उदार-बौद्धिक सिद्धांतों से तथा पर्यावरण संरक्षण आधुनिक संवैधानिक उद्देश्यों से संबंधित माना जाता है।
प्रश्न 78: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 32 के अंतर्गत केवल उच्चतम न्यायालय रिट जारी कर सकता है। (2) अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय भी रिट जारी कर सकते हैं। (3) अनुच्छेद 226 का क्षेत्राधिकार अनुच्छेद 32 की तुलना में व्यापक है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
✓
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
B
— केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 32 उच्चतम न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु रिट जारी करने की शक्ति देता है, जबकि अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय न केवल मौलिक अधिकारों बल्कि अन्य वैधानिक अधिकारों के संरक्षण हेतु भी रिट जारी कर सकते हैं। इसलिए अनुच्छेद 226 का क्षेत्राधिकार अधिक व्यापक माना जाता है। पहला कथन गलत है क्योंकि रिट जारी करने की शक्ति केवल उच्चतम न्यायालय तक सीमित नहीं है।
प्रश्न 79: निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित है?
-
A.
अनुच्छेद 39A
✓
-
B.
अनुच्छेद 41
-
C.
अनुच्छेद 43
-
D.
अनुच्छेद 45
सही उत्तर:
A
— अनुच्छेद 39A
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 39A राज्य को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देता है कि न्याय प्राप्ति के अवसर आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण किसी व्यक्ति से वंचित न हों। इसी उद्देश्य से निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था की गई है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) जैसी संस्थाएँ इसी संवैधानिक दर्शन को आगे बढ़ाती हैं। यह प्रावधान 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था।
प्रश्न 80: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 29[1] किसी भी नागरिक वर्ग को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है। (2) अनुच्छेद 29 केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों पर लागू होता है।
-
A.
केवल 1 सही है
✓
-
B.
केवल 2 सही है
-
C.
दोनों सही हैं
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
A
— केवल 1 सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 29(1) भारत के किसी भी नागरिक वर्ग को, जिसकी अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसके संरक्षण का अधिकार प्रदान करता है। यह केवल अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है। दूसरी ओर अनुच्छेद 30 विशेष रूप से धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार देता है।
प्रश्न 81: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मौलिक अधिकार नकारात्मक और सकारात्मक दोनों प्रकार के दायित्व उत्पन्न कर सकते हैं। (2) नीति निर्देशक तत्व शासन संचालन के लिए मूलभूत संवैधानिक दिशा-निर्देश प्रदान करते हैं। (3) नीति निर्देशक तत्वों के आधार पर अनेक कल्याणकारी कानून बनाए गए हैं।
-
A.
1, 2 और 3
✓
-
B.
केवल 1 और 2
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
A
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
मौलिक अधिकार कई स्थितियों में राज्य पर नकारात्मक दायित्व (हस्तक्षेप न करना) तथा सकारात्मक दायित्व दोनों आरोपित करते हैं। नीति निर्देशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, किंतु वे शासन संचालन के लिए मूलभूत दिशा प्रदान करते हैं। भूमि सुधार, विधिक सहायता, पर्यावरण संरक्षण, पंचायत राज तथा शिक्षा संबंधी अनेक कानून DPSP से प्रेरित होकर बनाए गए हैं।
प्रश्न 82: निम्नलिखित में से कौन-सा मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व के बीच सामंजस्य स्थापित करने का उदाहरण है?
-
A.
अनुच्छेद 18
-
B.
अनुच्छेद 30
-
C.
अनुच्छेद 32
-
D.
अनुच्छेद 21A
✓
सही उत्तर:
D
— अनुच्छेद 21A
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 21A के माध्यम से 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार बनाया गया। यह पूर्व में अनुच्छेद 45 के अंतर्गत नीति निर्देशक तत्व के रूप में निहित था। इस प्रकार अनुच्छेद 21A मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच सामंजस्य तथा संवैधानिक विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रश्न 83: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मौलिक कर्तव्य न्यायालय द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रवर्तनीय नहीं हैं। (2) संसद मौलिक कर्तव्यों को प्रभावी बनाने हेतु कानून बना सकती है।
-
A.
केवल 1 सही है
-
B.
दोनों सही हैं
✓
-
C.
केवल 2 सही है
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
B
— दोनों सही हैं
व्याख्या (Explanation):
मौलिक कर्तव्य गैर-न्यायोचित हैं, अर्थात् नागरिकों को सीधे न्यायालय में इनके पालन हेतु बाध्य नहीं किया जा सकता। तथापि संसद इनके क्रियान्वयन हेतु कानून बना सकती है, जैसे राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम। उच्चतम न्यायालय ने अनेक मामलों में मौलिक कर्तव्यों को संवैधानिक व्याख्या के सहायक स्रोत के रूप में भी स्वीकार किया है।
प्रश्न 84: निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों की उन्नति से संबंधित है?
-
A.
अनुच्छेद 44
-
B.
अनुच्छेद 45
-
C.
अनुच्छेद 46
✓
-
D.
अनुच्छेद 47
सही उत्तर:
C
— अनुच्छेद 46
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 46 राज्य को अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा समाज के अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों को बढ़ावा देने तथा उन्हें सामाजिक अन्याय एवं शोषण से संरक्षण प्रदान करने का निर्देश देता है। यह समाजवादी नीति निर्देशक तत्वों का महत्वपूर्ण घटक है और सामाजिक न्याय की संवैधानिक अवधारणा को मजबूत करता है।
प्रश्न 85: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अनुच्छेद 25 के संदर्भ में सही है?
-
A.
धार्मिक स्वतंत्रता पूर्णतः निरपेक्ष है।
-
B.
राज्य धार्मिक संस्थानों का विनियमन नहीं कर सकता।
-
C.
केवल नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है।
-
D.
धार्मिक स्वतंत्रता सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है।
✓
सही उत्तर:
D
— धार्मिक स्वतंत्रता सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 25 अंतःकरण की स्वतंत्रता तथा धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार देता है, किंतु यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य तथा अन्य मौलिक अधिकारों के अधीन है। अतः धार्मिक स्वतंत्रता निरपेक्ष नहीं है।
प्रश्न 86: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 16 राज्य के अधीन नियुक्तियों एवं पदों के संबंध में अवसर की समानता से संबंधित है। (2) अनुच्छेद 16 निजी क्षेत्र के रोजगार पर सीधे लागू नहीं होता। (3) अनुच्छेद 16 के अंतर्गत आरक्षण का प्रावधान किया जा सकता है।
-
A.
1, 2 और 3
✓
-
B.
केवल 1 और 2
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
A
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 16 राज्य के अधीन नियुक्तियों एवं पदों के संबंध में अवसर की समानता सुनिश्चित करता है। यह निजी क्षेत्र के रोजगार पर प्रत्यक्ष रूप से लागू नहीं होता। साथ ही अनुच्छेद 16[4], 16[4A] आदि के अंतर्गत पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की जा सकती है।
प्रश्न 87: निम्नलिखित में से किस मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया कि संसद संविधान के किसी भी भाग, जिसमें मौलिक अधिकार भी शामिल हैं, में संशोधन कर सकती है, किंतु संविधान की मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती?
-
A.
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
-
B.
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
✓
-
C.
मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
-
D.
आई.आर. कोएलो बनाम तमिलनाडु राज्य
सही उत्तर:
B
— केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि संसद संविधान के किसी भी भाग, जिसमें मौलिक अधिकार भी शामिल हैं, में संशोधन कर सकती है, किंतु संविधान की मूल संरचना को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती। इसी निर्णय में मूल संरचना सिद्धांत प्रतिपादित किया गया।
प्रश्न 88: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मौलिक अधिकार मुख्यतः व्यक्ति-केंद्रित हैं। (2) नीति निर्देशक तत्व मुख्यतः राज्य-केंद्रित हैं। (3) दोनों का अंतिम उद्देश्य कल्याणकारी राज्य की स्थापना है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
मौलिक अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं गरिमा की रक्षा करते हैं, जबकि नीति निर्देशक तत्व राज्य को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय आधारित नीतियाँ बनाने हेतु दिशा प्रदान करते हैं। दोनों की प्रकृति भिन्न होने के बावजूद उनका अंतिम लक्ष्य कल्याणकारी राज्य की स्थापना और संविधान की प्रस्तावना में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुत्व के आदर्शों को साकार करना है।
प्रश्न 89: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है? (1) अनुच्छेद 39A - समान न्याय एवं निःशुल्क विधिक सहायता (2) अनुच्छेद 43A - श्रमिकों की प्रबंधन में भागीदारी (3) अनुच्छेद 48A - पर्यावरण संरक्षण
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
1, 2 और 3
✓
-
D.
केवल 1 और 3
सही उत्तर:
C
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 39A समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता से, अनुच्छेद 43A उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी से तथा अनुच्छेद 48A पर्यावरण एवं वन संरक्षण से संबंधित है। ये सभी राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। अनुच्छेद 39A और 48A को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था।
प्रश्न 90: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 15[1] राज्य को केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान अथवा इनमें से किसी के आधार पर भेदभाव करने से रोकता है। (2) अनुच्छेद 15[3] राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान बनाने की अनुमति देता है।
-
A.
दोनों कथन सही हैं
✓
-
B.
केवल 1 सही है
-
C.
केवल 2 सही है
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
A
— दोनों कथन सही हैं
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 15(1) राज्य को केवल धर्म, मूलवंश (Race), जाति, लिंग, जन्मस्थान अथवा इनमें से किसी एक आधार पर किसी नागरिक के विरुद्ध भेदभाव करने से प्रतिबंधित करता है। साथ ही, अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं और बच्चों के हित में विशेष प्रावधान बनाने की अनुमति देता है। यह प्रावधान औपचारिक समानता के साथ-साथ वास्तविक या सार्थक समानता की संवैधानिक अवधारणा को भी प्रतिबिंबित करता है।
प्रश्न 91: मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन की अवधारणा को विशेष रूप से किस उच्चतम न्यायालय के निर्णय में बल दिया गया?
-
A.
ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
-
B.
मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
✓
-
C.
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
-
D.
शंकर प्रसाद बनाम भारत संघ
सही उत्तर:
B
— मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
व्याख्या (Explanation):
मिनर्वा मिल्स (1980) में न्यायालय ने कहा कि मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व संविधान की आत्मा के पूरक अंग हैं तथा इनके मध्य संतुलन संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है।
प्रश्न 92: निम्नलिखित में से कौन-सा अधिकार भारतीय संविधान में केवल अल्पसंख्यकों को विशेष रूप से प्रदान किया गया है?
-
A.
धर्म का पालन करने का अधिकार
-
B.
विधि के समक्ष समानता
-
C.
संवैधानिक उपचारों का अधिकार
-
D.
शैक्षणिक संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार
✓
सही उत्तर:
D
— शैक्षणिक संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 30 धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार प्रदान करता है। यह भारत की बहुलतावादी व्यवस्था और सांस्कृतिक विविधता की संवैधानिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन है। अन्य विकल्पों में वर्णित अधिकार सामान्यतः सभी नागरिकों या व्यक्तियों को उपलब्ध हैं।
प्रश्न 93: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
-
A.
नीति निर्देशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं।
-
B.
मौलिक कर्तव्य न्यायालय द्वारा सीधे लागू कराए जा सकते हैं।
-
C.
नीति निर्देशक तत्व शासन संचालन के लिए मूलभूत हैं।
✓
-
D.
मौलिक अधिकार राज्य के लिए केवल मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।
सही उत्तर:
C
— नीति निर्देशक तत्व शासन संचालन के लिए मूलभूत हैं।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 37 के अनुसार राज्य के नीति निर्देशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, किंतु वे देश के शासन में मूलभूत हैं और राज्य का कर्तव्य है कि वह कानून निर्माण में उनका अनुपालन करे। यही कारण है कि DPSP को भारतीय कल्याणकारी राज्य की आधारशिला माना जाता है।
प्रश्न 94: निम्नलिखित में से किस रिट का प्रयोग किसी व्यक्ति को अवैध निरोध से मुक्त कराने हेतु किया जाता है?
-
A.
बंदी प्रत्यक्षीकरण
✓
-
B.
परमादेश
-
C.
उत्प्रेषण
-
D.
अधिकार-पृच्छा
सही उत्तर:
A
— बंदी प्रत्यक्षीकरण
व्याख्या (Explanation):
बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सबसे प्रभावी संवैधानिक सुरक्षा मानी जाती है। जब किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखा जाता है, तब न्यायालय संबंधित प्राधिकारी को उस व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश देता है। अनुच्छेद 32 और 226 के अंतर्गत यह रिट जारी की जा सकती है।
प्रश्न 95: निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद राज्य को अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने का निर्देश देता है?
-
A.
अनुच्छेद 44
-
B.
अनुच्छेद 46
-
C.
अनुच्छेद 48
-
D.
अनुच्छेद 51
✓
सही उत्तर:
D
— अनुच्छेद 51
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 51 राज्य को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने, राष्ट्रों के बीच सम्मानजनक संबंध बनाए रखने तथा अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को प्रोत्साहित करने का निर्देश देता है। यह उदार-बौद्धिक नीति निर्देशक तत्वों का महत्वपूर्ण अंग है और भारत की विदेश नीति के संवैधानिक आधारों में से एक माना जाता है।
प्रश्न 96: निम्नलिखित में से कौन-सा मौलिक कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया?
-
A.
राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना
-
B.
6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा दिलाना
✓
-
C.
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना
-
D.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना
सही उत्तर:
B
— 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा दिलाना
व्याख्या (Explanation):
86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा अनुच्छेद 51A में एक नया मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके अनुसार माता-पिता या अभिभावकों का यह कर्तव्य है कि वे 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करें। इसी संशोधन द्वारा अनुच्छेद 21A भी जोड़ा गया था।
प्रश्न 97: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मौलिक कर्तव्य संविधान के भाग IVA में निहित हैं। (2) मौलिक कर्तव्य अनुच्छेद 51A में वर्णित हैं।
-
A.
केवल 1 सही है
-
B.
केवल 2 सही है
-
C.
दोनों सही हैं
✓
-
D.
दोनों गलत हैं
सही उत्तर:
C
— दोनों सही हैं
व्याख्या (Explanation):
मौलिक कर्तव्य संविधान के भाग IVA में सम्मिलित किए गए हैं और इनका उल्लेख अनुच्छेद 51A में किया गया है। इन्हें 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था। इनका उद्देश्य नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों एवं राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूकता विकसित करना है।
प्रश्न 98: 44वें संविधान संशोधन के पश्चात राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी निम्नलिखित में से किस मौलिक अधिकार के प्रवर्तन को निलंबित नहीं किया जा सकता?
-
A.
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
✓
-
B.
संगठन बनाने की स्वतंत्रता
-
C.
भारत में भ्रमण की स्वतंत्रता
-
D.
सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता
सही उत्तर:
A
— जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
व्याख्या (Explanation):
44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के बाद अनुच्छेद 359 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में भी अनुच्छेद 20 तथा अनुच्छेद 21 के अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित नहीं किया जा सकता। इसलिए जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार विशेष संवैधानिक संरक्षण प्राप्त करता है।
प्रश्न 99: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
-
A.
अनुच्छेद 32 — संवैधानिक उपचारों का अधिकार
-
B.
अनुच्छेद 30 — अल्पसंख्यकों के शैक्षिक अधिकार
-
C.
अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता का उन्मूलन
-
D.
अनुच्छेद 29 — धार्मिक स्वतंत्रता
✓
सही उत्तर:
D
— अनुच्छेद 29 — धार्मिक स्वतंत्रता
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 29 सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकारों से संबंधित है तथा भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण की गारंटी देता है। धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 25 से 28 में निहित है। अन्य सभी युग्म सही हैं।
प्रश्न 100: निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के समाजवादी सिद्धांतों से संबंधित है?
-
A.
ग्राम पंचायतों का संगठन
-
B.
धन एवं उत्पादन के साधनों के संकेंद्रण की रोकथाम
✓
-
C.
राष्ट्रीय महत्त्व के स्मारकों का संरक्षण
-
D.
समान नागरिक संहिता
सही उत्तर:
B
— धन एवं उत्पादन के साधनों के संकेंद्रण की रोकथाम
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 39 के अंतर्गत राज्य को यह प्रयास करने का निर्देश दिया गया है कि धन एवं उत्पादन के साधनों का संकेंद्रण कुछ व्यक्तियों के हाथों में न हो। यह समाजवादी नीति निर्देशक तत्वों का महत्वपूर्ण भाग है जिसका उद्देश्य आर्थिक न्याय और संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना है। ग्राम पंचायतों का संगठन गांधीवादी तथा समान नागरिक संहिता उदार-बौद्धिक सिद्धांतों से संबंधित है।
प्रश्न 101: निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के उदार-बौद्धिक सिद्धांतों से संबंधित है?
-
A.
ग्राम पंचायतों का संगठन
-
B.
कुटीर उद्योगों का प्रोत्साहन
-
C.
समान नागरिक संहिता की स्थापना
✓
-
D.
समान कार्य के लिए समान वेतन
सही उत्तर:
C
— समान नागरिक संहिता की स्थापना
व्याख्या (Explanation):
समान नागरिक संहिता का प्रावधान अनुच्छेद 44 में किया गया है और यह राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के उदार-बौद्धिक सिद्धांतों का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून की व्यवस्था करना है। दूसरी ओर ग्राम पंचायतें और कुटीर उद्योग गांधीवादी सिद्धांतों से, जबकि समान कार्य के लिए समान वेतन समाजवादी सिद्धांतों से संबंधित है।
प्रश्न 102: शिक्षा का अधिकार (6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा) संविधान के किस अनुच्छेद में दिया गया है?
-
A.
अनुच्छेद 19
-
B.
अनुच्छेद 21
-
C.
अनुच्छेद 32
-
D.
अनुच्छेद 21A
✓
सही उत्तर:
D
— अनुच्छेद 21A
व्याख्या (Explanation):
86वें संविधान संशोधन (2002) द्वारा अनुच्छेद 21A जोड़ा गया, जिसके तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा मौलिक अधिकार है। इसे लागू करने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 बना, जो 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ। अनुच्छेद 19 में अभिव्यक्ति, सम्मेलन, संघ बनाने, घूमने, बसने और व्यवसाय करने की स्वतंत्रता है। अनुच्छेद 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है। शिक्षा का अधिकार इसी से अलग 21A में दिया गया। अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार है, जिसे अंबेडकर ने संविधान का 'हृदय और आत्मा' कहा था।
प्रश्न 103: सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार मुख्यतः किन अनुच्छेदों में निहित हैं?
-
A.
अनुच्छेद 25–28
-
B.
अनुच्छेद 29–30
✓
-
C.
अनुच्छेद 30–32
-
D.
अनुच्छेद 26–29
सही उत्तर:
B
— अनुच्छेद 29–30
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 29 एवं 30 सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकारों से संबंधित हैं। अनुच्छेद 29 भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण की गारंटी देता है, जबकि अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित और संचालित करने का अधिकार प्रदान करता है। यह भारत की सांस्कृतिक विविधता की संवैधानिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है।
प्रश्न 104: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार है। (2) यह अधिकार अनुच्छेद 26 के अंतर्गत प्रदान किया गया है।
-
A.
केवल 1 सही है
-
B.
केवल 2 सही है
-
C.
दोनों गलत हैं
-
D.
दोनों सही हैं
✓
सही उत्तर:
D
— दोनों सही हैं
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 26 प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी भाग को धार्मिक एवं धर्मार्थ संस्थाओं की स्थापना तथा प्रबंधन का अधिकार प्रदान करता है, बशर्ते यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन हो। धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का यह एक महत्वपूर्ण घटक है।
प्रश्न 105: 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों एवं खानों में नियोजित करने पर प्रतिबंध किस अनुच्छेद में है?
-
A.
अनुच्छेद 24
✓
-
B.
अनुच्छेद 23
-
C.
अनुच्छेद 21A
-
D.
अनुच्छेद 39
सही उत्तर:
A
— अनुच्छेद 24
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 24 के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के किसी भी बालक को कारखानों, खानों अथवा अन्य जोखिमपूर्ण कार्यों में नियोजित नहीं किया जा सकता। यह प्रावधान बाल श्रम के उन्मूलन और बाल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। अनुच्छेद 21A शिक्षा के अधिकार से संबंधित है जबकि अनुच्छेद 39 नीति निर्देशक तत्वों का भाग है।
प्रश्न 106: निम्नलिखित में से कौन-सा अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को प्राप्त है?
-
A.
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
-
B.
विधि के समक्ष समानता का अधिकार
-
C.
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार
✓
-
D.
धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
सही उत्तर:
C
— अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्रदत्त स्वतंत्रताएँ केवल भारतीय नागरिकों को उपलब्ध हैं। इसके विपरीत अनुच्छेद 14 और 21 सभी व्यक्तियों को प्राप्त हैं, जबकि अनुच्छेद 25 भी नागरिकों तथा गैर-नागरिकों दोनों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म का पालन, आचरण तथा प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है।
प्रश्न 107: निम्नलिखित में से कौन-सी स्वतंत्रता अनुच्छेद 19[1] के अंतर्गत वर्तमान में प्रदत्त छह स्वतंत्रताओं में सम्मिलित नहीं है?
-
A.
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
-
B.
संपत्ति अर्जित करने की स्वतंत्रता
✓
-
C.
संगठन बनाने की स्वतंत्रता
-
D.
भारत में भ्रमण करने की स्वतंत्रता
सही उत्तर:
B
— संपत्ति अर्जित करने की स्वतंत्रता
व्याख्या (Explanation):
मूल संविधान में अनुच्छेद 19(1) के अंतर्गत सात स्वतंत्रताएँ थीं, जिनमें अनुच्छेद 19(1)(f) के तहत संपत्ति अर्जित करने, धारण करने और व्यय करने की स्वतंत्रता भी शामिल थी। किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों से हटाकर अनुच्छेद 300A के अंतर्गत एक संवैधानिक अधिकार बना दिया गया। वर्तमान में अनुच्छेद 19(1) के अंतर्गत छह स्वतंत्रताएँ उपलब्ध हैं, अतः संपत्ति अर्जित करने की स्वतंत्रता उनमें सम्मिलित नहीं है।
प्रश्न 108: निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद के अंतर्गत उपाधियों का उन्मूलन किया गया है?
-
A.
अनुच्छेद 15
-
B.
अनुच्छेद 16
-
C.
अनुच्छेद 17
-
D.
अनुच्छेद 18
✓
सही उत्तर:
D
— अनुच्छेद 18
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 18 राज्य को सैन्य तथा शैक्षणिक विशिष्टताओं को छोड़कर अन्य उपाधियाँ प्रदान करने से निषिद्ध करता है। इसका उद्देश्य सामाजिक समानता को बढ़ावा देना तथा सामंती विशेषाधिकारों को समाप्त करना है। भारत रत्न, पद्म पुरस्कार आदि को उच्चतम न्यायालय ने उपाधि नहीं बल्कि राज्य सम्मान माना है, बशर्ते उनका नाम व्यक्ति के नाम के साथ स्थायी उपसर्ग या प्रत्यय के रूप में न जोड़ा जाए।
प्रश्न 109: संविधान के किस अनुच्छेद द्वारा अस्पृश्यता का अंत किया गया है?
-
A.
अनुच्छेद 17
✓
-
B.
अनुच्छेद 15
-
C.
अनुच्छेद 16
-
D.
अनुच्छेद 18
सही उत्तर:
A
— अनुच्छेद 17
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का उन्मूलन करता है और किसी भी रूप में उसके आचरण को दंडनीय अपराध बनाता है। यह समता के अधिकार (अनुच्छेद 14-18) का भाग है और सामाजिक समानता का मूल आधार है। अनुच्छेद 15, धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध करता है। अनुच्छेद 16, सरकारी नौकरियों में अवसर की समानता देता है। अनुच्छेद 18, उपाधियों (जैसे राय बहादुर) का अंत करता है।
प्रश्न 110: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 14 सभी व्यक्तियों को विधि के समक्ष समानता प्रदान करता है। (2) अनुच्छेद 14 केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होता है।
-
A.
केवल 1
✓
-
B.
केवल 2
-
C.
दोनों 1 और 2
-
D.
न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर:
A
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 14 भारतीय क्षेत्र में उपस्थित सभी व्यक्तियों—नागरिकों और विदेशियों—को विधि के समक्ष समानता तथा विधियों के समान संरक्षण की गारंटी देता है। अतः पहला कथन सही है जबकि दूसरा कथन गलत है।
प्रश्न 111: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के संबंध में सही है?
-
A.
दोनों न्यायालय द्वारा समान रूप से प्रवर्तनीय हैं।
-
B.
नीति निर्देशक तत्व मौलिक अधिकारों से श्रेष्ठ हैं।
-
C.
मौलिक अधिकार केवल राज्य नीति के लिए मार्गदर्शक हैं।
-
D.
दोनों मिलकर सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय की स्थापना का प्रयास करते हैं।
✓
सही उत्तर:
D
— दोनों मिलकर सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय की स्थापना का प्रयास करते हैं।
व्याख्या (Explanation):
मौलिक अधिकार राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना करते हैं, जबकि राज्य के नीति निर्देशक तत्व सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना का लक्ष्य रखते हैं। उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों, विशेषकर केशवानंद भारती व मिनर्वा मिल्स मामलों में दोनों के मध्य संतुलन को संविधान की मूल संरचना का महत्त्वपूर्ण तत्व माना है।
प्रश्न 112: वर्तमान में भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों की कुल संख्या कितनी है?
सही उत्तर:
A
— 11
व्याख्या (Explanation):
वर्तमान में संविधान के अनुच्छेद 51A में 11 मौलिक कर्तव्य हैं। प्रारंभ में 42वें संविधान संशोधन द्वारा 10 कर्तव्य जोड़े गए थे। बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा माता-पिता या अभिभावकों का 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा दिलाने का कर्तव्य जोड़ा गया।
प्रश्न 113: मौलिक कर्तव्यों को संविधान में किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था?
-
A.
42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1976
✓
-
B.
44वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1978
-
C.
52वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1985
-
D.
86वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2002
सही उत्तर:
A
— 42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1976
व्याख्या (Explanation):
मौलिक कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVA में अनुच्छेद 51A के अंतर्गत जोड़ा गया था। मौलिक कर्तव्यों की अवधारणा तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) के संविधान से प्रेरित मानी जाती है। प्रारंभ में 10 कर्तव्य थे, जबकि 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा एक अतिरिक्त कर्तव्य जोड़ा गया और कुल संख्या 11 हो गई।
प्रश्न 114: निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के गांधीवादी सिद्धांतों का उदाहरण है?
-
A.
समान नागरिक संहिता
-
B.
अंतरराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना
-
C.
श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना
-
D.
ग्राम पंचायतों का संगठन
✓
सही उत्तर:
D
— ग्राम पंचायतों का संगठन
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 40 के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का संगठन गांधीवादी नीति निर्देशक तत्वों का प्रमुख उदाहरण है। गांधीजी ग्राम स्वराज की अवधारणा के समर्थक थे। गांधीवादी सिद्धांतों में कुटीर उद्योगों का प्रोत्साहन, पशुधन संरक्षण तथा ग्राम पंचायतों का विकास शामिल है। 73वाँ संविधान संशोधन पंचायतों को संवैधानिक दर्जा प्रदान करने के कारण इस संदर्भ में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है।
प्रश्न 115: निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के समाजवादी सिद्धांतों से संबंधित है?
-
A.
ग्राम पंचायतों का संगठन
-
B.
समान नागरिक संहिता
-
C.
समान कार्य के लिए समान वेतन
✓
-
D.
ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण
सही उत्तर:
C
— समान कार्य के लिए समान वेतन
व्याख्या (Explanation):
समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत अनुच्छेद 39 के अंतर्गत समाजवादी नीति निर्देशक तत्वों में सम्मिलित है। समाजवादी सिद्धांत सामाजिक एवं आर्थिक न्याय की स्थापना पर बल देते हैं। ग्राम पंचायतों का संगठन गांधीवादी सिद्धांतों से तथा समान नागरिक संहिता उदार-बौद्धिक सिद्धांतों से संबंधित है।
प्रश्न 116: संवैधानिक उपचारों के अधिकार को भारतीय संविधान का "हृदय और आत्मा" किसने कहा था?
-
A.
डॉ. भीमराव आंबेडकर
✓
-
B.
जवाहरलाल नेहरू
-
C.
सरदार वल्लभभाई पटेल
-
D.
के.एम. मुंशी
सही उत्तर:
A
— डॉ. भीमराव आंबेडकर
व्याख्या (Explanation):
डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान का "हृदय और आत्मा" कहा था। यह नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के संरक्षण हेतु सीधे उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार प्रदान करता है। अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार है।
प्रश्न 117: धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भारतीय संविधान के किन अनुच्छेदों में निहित है?
-
A.
अनुच्छेद 19 से 22
-
B.
अनुच्छेद 21 से 24
-
C.
अनुच्छेद 22 से 25
-
D.
अनुच्छेद 25 से 28
✓
सही उत्तर:
D
— अनुच्छेद 25 से 28
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 25 से 28 धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से संबंधित हैं। इनमें अंतःकरण की स्वतंत्रता, धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन, प्रचार एवं प्रसार, धार्मिक संस्थाओं का प्रबंधन तथा धार्मिक शिक्षा से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है, जहाँ राज्य सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण रखता है।
प्रश्न 118: शोषण के विरुद्ध अधिकार के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद मानव तस्करी तथा बेगार का निषेध करता है?
-
A.
अनुच्छेद 21
-
B.
अनुच्छेद 23
✓
-
C.
अनुच्छेद 24
-
D.
अनुच्छेद 25
सही उत्तर:
B
— अनुच्छेद 23
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 23 मानव तस्करी, बेगार तथा अन्य प्रकार के बलात् श्रम का निषेध करता है। अनुच्छेद 24, 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खानों तथा अन्य जोखिमपूर्ण कार्यों में नियोजित किए जाने पर प्रतिबंध लगाता है। शोषण के विरुद्ध अधिकार सामाजिक न्याय की स्थापना का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक साधन है।
प्रश्न 119: निम्नलिखित में से कौन-सा अधिकार मूलतः स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत नहीं आता है?
-
A.
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
-
B.
संगठन बनाने की स्वतंत्रता
-
C.
अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार
✓
-
D.
भारत में स्वतंत्र रूप से भ्रमण करने का अधिकार
सही उत्तर:
C
— अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 19 के अंतर्गत अभिव्यक्ति, संगठन बनाने, शांतिपूर्ण सभा करने, भारत में भ्रमण करने, निवास करने तथा व्यवसाय करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई है। अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार अनुच्छेद 30 के अंतर्गत प्राप्त है, जो सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकारों का भाग है।
प्रश्न 120: भारतीय संविधान में समानता का अधिकार मुख्यतः किस भाग में निहित है?
-
A.
अनुच्छेद 14 से 18
✓
-
B.
अनुच्छेद 19 से 22
-
C.
अनुच्छेद 23 से 24
-
D.
अनुच्छेद 25 से 28
सही उत्तर:
A
— अनुच्छेद 14 से 18
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान के भाग III में अनुच्छेद 14 से 18 तक समानता का अधिकार निहित है। इसमें विधि के समक्ष समानता, विधियों का समान संरक्षण, धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान आदि के आधार पर भेदभाव का निषेध, सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता तथा उपाधियों का उन्मूलन सम्मिलित हैं। यह अधिकार भारतीय लोकतंत्र के मूल स्तंभों में से एक है।
प्रश्न 121: कथन (A): मौलिक अधिकार, नीति-निर्देशक तत्त्व और मौलिक कर्तव्य मिलकर भारतीय संविधान की अधिकार-कल्याण-उत्तरदायित्व त्रयी का निर्माण करते हैं। कारण (R): संविधान व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और नागरिक दायित्व के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
मौलिक अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं, नीति-निर्देशक तत्त्व सामाजिक-आर्थिक न्याय की दिशा प्रदान करते हैं और मौलिक कर्तव्य नागरिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करते हैं। संविधान इन तीनों के बीच संतुलन स्थापित करके लोकतांत्रिक एवं कल्याणकारी राज्य की स्थापना का प्रयास करता है। अतः कारण कथन की सही व्याख्या करता है। विकल्प A सही है।
प्रश्न 122: कथन (A): राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्व न्यायालयों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रवर्तनीय हैं। कारण (R): अनुच्छेद 37 उन्हें शासन के लिए मौलिक मानता है, परन्तु न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय नहीं बनाता।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि नीति-निर्देशक तत्त्व न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, यद्यपि वे शासन के लिए मौलिक हैं। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है। विकल्प D सही है।
प्रश्न 123: कथन (A): मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक तत्त्व दोनों संविधान की प्रस्तावना में निहित आदर्शों की प्राप्ति में सहायक हैं। कारण (R): नीति-निर्देशक तत्त्व न्यायालयों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रवर्तनीय नहीं हैं, जबकि मौलिक अधिकार न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक तत्त्व दोनों संविधान की प्रस्तावना में निहित आदर्शों, विशेषकर न्याय, स्वतंत्रता, समानता और सामाजिक कल्याण की प्राप्ति में सहायक हैं। इसलिए कथन सही है। कारण भी सही है क्योंकि मौलिक अधिकार न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं जबकि नीति-निर्देशक तत्त्व न्यायालयों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रवर्तनीय नहीं हैं। किन्तु यह तथ्य इस बात की व्याख्या नहीं करता कि दोनों प्रस्तावना के आदर्शों की प्राप्ति में कैसे सहायक हैं। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता। इसलिए विकल्प B सही है।
प्रश्न 124: कथन (A): अनुच्छेद 51A के अंतर्गत वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना नागरिकों का कर्तव्य नहीं है। कारण (R): अनुच्छेद 51A(ह) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद तथा सुधार की भावना विकसित करने का निर्देश देता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 51A(ह) के अनुसार प्रत्येक भारतीय नागरिक का यह मौलिक कर्तव्य है कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद तथा सुधार की भावना का विकास करे। अतः कथन (A) गलत है, क्योंकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना वास्तव में नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है। कारण (R) सही है क्योंकि वह अनुच्छेद 51A(ह) की वास्तविक संवैधानिक व्यवस्था को व्यक्त करता है। इसलिए विकल्प D सही है।
प्रश्न 125: कथन (A): केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य वाद ने मौलिक अधिकारों और संविधान संशोधन शक्ति के संबंध को पुनर्परिभाषित किया। कारण (R): इसी वाद में आधारभूत संरचना सिद्धांत प्रतिपादित किया गया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
1973 के केशवानंद भारती निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने आधारभूत संरचना सिद्धांत प्रतिपादित किया और संसद की संशोधन शक्ति पर संवैधानिक सीमा निर्धारित की। इससे मौलिक अधिकारों और संशोधन शक्ति का संबंध पुनर्परिभाषित हुआ। कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 126: कथन (A): संविधान का अनुच्छेद 51A(क) संविधान, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान के सम्मान का कर्तव्य निर्धारित करता है। कारण (R): यह मौलिक कर्तव्यों की सूची का प्रथम कर्तव्य है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 51A(क) संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के सम्मान का कर्तव्य निर्धारित करता है। कारण भी सही है, किन्तु केवल क्रम बताता है; वह कर्तव्य के उद्देश्य की व्याख्या नहीं करता। अतः विकल्प B सही है।
प्रश्न 127: कथन (A): मौलिक कर्तव्यों का एक उद्देश्य संविधान के आदर्शों के प्रति नागरिक प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना है। कारण (R): 42वें संविधान संशोधन के समय यह महसूस किया गया कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों पर भी बल दिया जाना चाहिए।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
मौलिक कर्तव्यों को जोड़ने का प्रमुख उद्देश्य नागरिक उत्तरदायित्व को प्रोत्साहित करना था। स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसाओं के आधार पर 42वें संशोधन द्वारा इन्हें जोड़ा गया। कारण इस संवैधानिक पृष्ठभूमि को स्पष्ट करता है, इसलिए विकल्प A सही है।
प्रश्न 128: कथन (A): संविधान में वर्णित सभी मौलिक कर्तव्य विदेशी नागरिकों पर भी समान रूप से लागू होते हैं। कारण (R): मौलिक कर्तव्य विशेष रूप से भारतीय नागरिकों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
मौलिक कर्तव्य भारतीय नागरिकों के लिए निर्धारित हैं। विदेशी नागरिक इनके प्रत्यक्ष संवैधानिक दायरे में नहीं आते। अतः कथन गलत तथा कारण सही है।
प्रश्न 129: कथन (A): अनुच्छेद 48A पर्यावरण एवं वन संरक्षण से संबंधित नीति-निर्देशक तत्त्व है। कारण (R): पर्यावरण संरक्षण का उल्लेख केवल नीति-निर्देशक तत्त्वों में ही किया गया है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 48A पर्यावरण संरक्षण से संबंधित है, अतः कथन सही है। किन्तु पर्यावरण संरक्षण का उल्लेख अनुच्छेद 51A(g) के अंतर्गत मौलिक कर्तव्य के रूप में भी किया गया है। इसलिए कारण गलत है। विकल्प C सही है।
प्रश्न 130: कथन (A): समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता का सिद्धांत अनुच्छेद 39A में निहित है। कारण (R): यह प्रावधान 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 39A वास्तव में समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित है। यह 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। कारण संवैधानिक स्रोत बताता है, किन्तु अनुच्छेद के उद्देश्य की प्रत्यक्ष व्याख्या नहीं करता। इसलिए विकल्प B सही है।
प्रश्न 131: कथन (A): अनुच्छेद 38 राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय से युक्त व्यवस्था स्थापित करने का निर्देश देता है। कारण (R): नीति-निर्देशक तत्त्वों का व्यापक उद्देश्य लोककल्याणकारी राज्य की स्थापना है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 38 नीति-निर्देशक तत्त्वों का मूल आधार माना जाता है और सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक न्याय पर आधारित व्यवस्था की स्थापना का निर्देश देता है। यही लोककल्याणकारी राज्य की अवधारणा का आधार है। अतः कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 132: कथन (A): सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्राप्त हैं। कारण (R): अनुच्छेद 29 किसी भी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति वाले वर्ग को संरक्षण प्रदान करता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 29 केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है; यह किसी भी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति वाले वर्ग को संरक्षण देता है। इसलिए कथन गलत है। कारण सही है और अनुच्छेद 29 की वास्तविक संवैधानिक स्थिति बताता है। अतः विकल्प D सही है।
प्रश्न 133: कथन (A): अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन तक सीमित है। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 32 के अंतर्गत किसी भी वैधानिक अधिकार के उल्लंघन पर रिट जारी कर सकता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 32 विशेष रूप से मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु उपलब्ध है। वैधानिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु सामान्यतः अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय की व्यापक रिट अधिकारिता का प्रयोग किया जाता है। इसलिए कथन सही तथा कारण गलत है।
प्रश्न 134: कथन (A): अनुच्छेद 31C के विकास का प्रमुख उद्देश्य कुछ नीति-निर्देशक तत्त्वों को प्रभावी बनाना था। कारण (R): अनुच्छेद 31C प्रारम्भ से ही सभी नीति-निर्देशक तत्त्वों को मौलिक अधिकारों पर पूर्ण प्राथमिकता प्रदान करता था।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 31C का मूल उद्देश्य अनुच्छेद 39(b) एवं 39(c) से संबंधित नीति-निर्देशक तत्त्वों को प्रभावी बनाना था। प्रारम्भ से यह सभी नीति-निर्देशक तत्त्वों को मौलिक अधिकारों पर प्राथमिकता नहीं देता था। 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा इसका विस्तार सभी नीति-निर्देशक तत्त्वों तक किया गया, किन्तु बाद में मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) में इस विस्तार को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया। अतः कथन सही तथा कारण गलत है।
प्रश्न 135: कथन (A): मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि मौलिक अधिकार और राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्व संविधान के बीच संतुलन की व्यवस्था के पूरक अंग हैं। कारण (R): न्यायालय ने माना कि इनमें से किसी एक को पूर्ण प्रधानता देना संविधान की आधारभूत संरचना को प्रभावित कर सकता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
मिनर्वा मिल्स वाद (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक तत्त्व संविधान की आत्मा के पूरक घटक हैं। न्यायालय ने कहा कि यदि किसी एक को पूर्ण वर्चस्व दे दिया जाए तो संविधान का संतुलन नष्ट हो जाएगा और आधारभूत संरचना प्रभावित होगी। इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 136: कथन (A): मौलिक अधिकारों और नीति-निर्देशक तत्त्वों के बीच संतुलन भारतीय संवैधानिक व्यवस्था का मूल तत्व माना जाता है। कारण (R): मिनर्वा मिल्स वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों के बीच सामंजस्य को संविधान की आधारभूत संरचना से जोड़ा।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक तत्त्व संविधान के दो पूरक घटक हैं तथा दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। न्यायालय ने इस संतुलन को संविधान की आधारभूत संरचना से जोड़ा। अतः कारण कथन की सही व्याख्या करता है। विकल्प A सही है।
प्रश्न 137: कथन (A): मौलिक कर्तव्य न्यायालयों द्वारा उसी प्रकार प्रवर्तनीय हैं जैसे मौलिक अधिकार। कारण (R): न्यायालय मौलिक कर्तव्यों को संवैधानिक व्याख्या में सहायक तत्व के रूप में उपयोग कर सकते हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
मौलिक कर्तव्य प्रत्यक्ष रूप से प्रवर्तनीय नहीं हैं, इसलिए कथन गलत है। किन्तु न्यायालय संवैधानिक व्याख्या में उन्हें सहायक सिद्धांत के रूप में प्रयोग कर सकते हैं, इसलिए कारण सही है। विकल्प D सही है।
प्रश्न 138: कथन (A): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन करना नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है। कारण (R): पर्यावरण संरक्षण से संबंधित अनेक विधियाँ संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 51A(ग) नागरिकों पर प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन का मौलिक कर्तव्य अधिरोपित करता है, इसलिए कथन सही है। पर्यावरण संरक्षण हेतु विभिन्न विधियाँ भी बनाई गई हैं, इसलिए कारण सही है। किन्तु विधियों का अस्तित्व इस बात की व्याख्या नहीं करता कि पर्यावरण संरक्षण नागरिकों का मौलिक कर्तव्य क्यों है। अतः विकल्प B सही है।
प्रश्न 139: कथन (A): सभी मौलिक कर्तव्य मूल संविधान का हिस्सा थे। कारण (R): मौलिक कर्तव्य 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
मौलिक कर्तव्य मूल संविधान का भाग नहीं थे। इन्हें 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। अतः कथन गलत तथा कारण सही है। विकल्प D सही है।
प्रश्न 140: कथन (A): नीति-निर्देशक तत्त्वों का उद्देश्य सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करना है। कारण (R): केवल राजनीतिक लोकतंत्र संविधान के लक्ष्यों की पूर्ति के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
नीति-निर्देशक तत्त्व सामाजिक एवं आर्थिक न्याय पर आधारित व्यवस्था की स्थापना हेतु निर्देश प्रदान करते हैं। संविधान-निर्माताओं का दृष्टिकोण था कि केवल राजनीतिक लोकतंत्र पर्याप्त नहीं होगा जब तक सामाजिक और आर्थिक असमानताएँ दूर न हों। इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या करता है। विकल्प A सही है।
प्रश्न 141: कथन (A): अनुच्छेद 43 ग्रामों में व्यक्तिगत अथवा सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों के संवर्धन का निर्देश देता है। कारण (R): संविधान-निर्माताओं ने ग्राम-आधारित अर्थव्यवस्था और स्वावलंबन के गांधीवादी आदर्शों से प्रेरित होकर इस प्रावधान को शामिल किया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 43 राज्य को ग्रामों में व्यक्तिगत अथवा सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करने का निर्देश देता है। यह प्रावधान गांधीजी के ग्राम-स्वराज, विकेन्द्रीकृत अर्थव्यवस्था और स्वावलंबन के आदर्शों से प्रेरित है। इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 142: कथन (A): अनुच्छेद 39A न्याय तक समान पहुँच सुनिश्चित करने हेतु निःशुल्क विधिक सहायता की अवधारणा का समर्थन करता है। कारण (R): सामाजिक एवं आर्थिक अक्षमताओं के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे, यह संविधान की चिंता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 39A का उद्देश्य समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता सुनिश्चित करना है। कारण इस नीति-निर्देशक तत्त्व की मूल संवैधानिक भावना को स्पष्ट करता है। अतः विकल्प A सही है।
प्रश्न 143: कथन (A): समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत मौलिक अधिकारों में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है। कारण (R): समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्वों में सम्मिलित है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत अनुच्छेद 39(d) में राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्व के रूप में निहित है, मौलिक अधिकार के रूप में नहीं। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है। यद्यपि न्यायालयों ने कुछ मामलों में इसे अनुच्छेद 14 और 16 से जोड़कर लागू किया है, फिर भी इसका मूल स्रोत DPSP है। विकल्प D सही है।
प्रश्न 144: कथन (A): अनुच्छेद 30 के अंतर्गत अल्पसंख्यकों को अपनी शैक्षणिक संस्थाओं के प्रशासन का अधिकार प्राप्त है। कारण (R): राज्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं का किसी भी परिस्थिति में विनियमन नहीं कर सकता।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार देता है। किन्तु यह अधिकार पूर्णतः निरपेक्ष नहीं है और शैक्षणिक मानकों, प्रशासनिक दक्षता तथा सार्वजनिक हित हेतु राज्य उचित विनियमन कर सकता है। अतः कथन सही तथा कारण गलत है। विकल्प C सही है।
प्रश्न 145: कथन (A): अनुच्छेद 26 धार्मिक संप्रदायों को धार्मिक मामलों के प्रबंधन का अधिकार प्रदान करता है। कारण (R): यह अधिकार केवल बहुसंख्यक धार्मिक समुदायों को प्राप्त है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 26 सभी धार्मिक संप्रदायों तथा उनके उप-संप्रदायों को धार्मिक मामलों के प्रबंधन का अधिकार प्रदान करता है। यह अधिकार केवल बहुसंख्यक समुदायों तक सीमित नहीं है। इसलिए कथन सही तथा कारण गलत है। अतः विकल्प C सही है।
प्रश्न 146: कथन (A): अनुच्छेद 25 के अंतर्गत धार्मिक स्वतंत्रता सार्वजनिक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के अधीन है। कारण (R): धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार पूर्णतः निरपेक्ष अधिकार नहीं है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है, किन्तु यह सार्वजनिक व्यवस्था, सदाचार तथा स्वास्थ्य जैसे प्रतिबंधों के अधीन है। यही तथ्य सिद्ध करता है कि यह अधिकार निरपेक्ष नहीं है। इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या करता है। विकल्प A सही है।
प्रश्न 147: कथन (A): अनुच्छेद 21A मूल संविधान का भाग था। कारण (R): 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार जोड़ा गया।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 21A मूल संविधान में नहीं था। इसे 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया और 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया। अतः कथन गलत तथा कारण सही है। विकल्प D सही है।
प्रश्न 148: कथन (A): अनुच्छेद 20 के संरक्षण केवल नागरिकों को उपलब्ध हैं। कारण (R): अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि से संबंधित संरक्षण प्रदान करता है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 20 के अंतर्गत पूर्वव्यापी दंड का निषेध, द्वितीय दंड से सुरक्षा तथा आत्म-अभिशंसन के विरुद्ध संरक्षण प्रदान किया गया है। ये संरक्षण केवल नागरिकों को नहीं बल्कि सभी व्यक्तियों को उपलब्ध हैं। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है। अतः विकल्प D सही है।
प्रश्न 149: कथन (A): अनुच्छेद 19(1)(क) के अंतर्गत प्रेस की स्वतंत्रता का पृथक उल्लेख नहीं किया गया है। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्वीकार किया है कि प्रेस की स्वतंत्रता अनुच्छेद 19(2) के अधीन युक्तियुक्त प्रतिबंधों के अधीन है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
संविधान में प्रेस की स्वतंत्रता का पृथक रूप से उल्लेख नहीं किया गया है; इसे अनुच्छेद 19(1)(क) द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अंग माना जाता है। अतः कथन (A) सही है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट किया है कि प्रेस की स्वतंत्रता निरपेक्ष नहीं है और यह अनुच्छेद 19(2) में निर्दिष्ट युक्तियुक्त प्रतिबंधों के अधीन है, इसलिए कारण (R) भी सही है। किन्तु प्रेस की स्वतंत्रता पर युक्तियुक्त प्रतिबंधों की संवैधानिक वैधता इस बात की व्याख्या नहीं करती कि संविधान में प्रेस की स्वतंत्रता का पृथक उल्लेख क्यों नहीं किया गया। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है। इसलिए विकल्प B सही है।
प्रश्न 150: कथन (A): संविधान का अनुच्छेद 13 यह उपबंध करता है कि मौलिक अधिकारों के असंगत कोई भी विधि उस सीमा तक शून्य होगी जिस सीमा तक वह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। कारण (R): न्यायिक पुनर्विलोकन की संवैधानिक नींव का एक महत्त्वपूर्ण आधार अनुच्छेद 13 है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 13 संविधान-विरुद्ध विधियों को शून्य घोषित करने की व्यवस्था करता है और यह मौलिक अधिकारों की सर्वोच्चता को सुरक्षित रखता है। इसी प्रावधान के कारण न्यायपालिका को विधियों की संवैधानिक वैधता की समीक्षा करने का आधार प्राप्त होता है। अतः कारण कथन की संवैधानिक पृष्ठभूमि और उद्देश्य को स्पष्ट करता है। इसलिए विकल्प A सही है।
प्रश्न 151: कथन (A): मौलिक अधिकार, नीति-निर्देशक तत्त्व और मौलिक कर्तव्य मिलकर भारतीय संविधान की नैतिक-सामाजिक दर्शन की आधारशिला बनाते हैं। कारण (R): संविधान नागरिक स्वतंत्रता, सामाजिक कल्याण और नागरिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
मौलिक अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं, नीति-निर्देशक तत्त्व सामाजिक-आर्थिक न्याय की दिशा प्रदान करते हैं और मौलिक कर्तव्य नागरिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करते हैं। इन तीनों का संयुक्त उद्देश्य संविधान की लोकतांत्रिक एवं कल्याणकारी दर्शन को साकार करना है। इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या करता है और विकल्प A सही है।
प्रश्न 152: कथन (A): मौलिक कर्तव्य न्यायालयों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रवर्तनीय हैं। कारण (R): मौलिक कर्तव्य संविधान के भाग IV-A में निहित हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
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C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
मौलिक कर्तव्य प्रत्यक्ष रूप से न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, अतः कथन गलत है। कारण सही है क्योंकि वे भाग IV-A में निहित हैं। इसलिए विकल्प D सही है।
प्रश्न 153: कथन (A): वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन की भावना का विकास करना नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है। कारण (R): यह प्रावधान अनुच्छेद 51A में सम्मिलित है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 51A(h) प्रत्येक नागरिक का यह मौलिक कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद तथा ज्ञानार्जन एवं सुधार की भावना का विकास करे। कारण सही है क्योंकि यह प्रावधान वास्तव में अनुच्छेद 51A में सम्मिलित है। किन्तु कारण केवल इस कर्तव्य का संवैधानिक स्थान बताता है, उसके स्वरूप या उद्देश्य की व्याख्या नहीं करता। अतः A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है। इसलिए विकल्प B सही है।
प्रश्न 154: कथन (A): पर्यावरण संरक्षण से संबंधित नीति-निर्देशक तत्त्व 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़े गए। कारण (R): पर्यावरण संरक्षण का कोई उल्लेख संविधान में नहीं है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
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C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 48A जोड़ा गया, जो पर्यावरण संरक्षण से संबंधित है। अतः कथन सही है। कारण गलत है क्योंकि संविधान में नीति-निर्देशक तत्त्वों तथा मौलिक कर्तव्यों दोनों में पर्यावरण संरक्षण का उल्लेख मिलता है। इसलिए विकल्प C सही है।
प्रश्न 155: कथन (A): समान नागरिक संहिता की स्थापना का निर्देश राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्वों में निहित है। कारण (R): अनुच्छेद 44 राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करने का निर्देश देता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 44 भाग IV में स्थित एक उदार-बौद्धिक नीति-निर्देशक तत्त्व है जो समान नागरिक संहिता के प्रयास का निर्देश देता है। कारण सीधे कथन की पुष्टि और व्याख्या करता है। अतः विकल्प A सही है।
प्रश्न 156: कथन (A): अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार प्राप्त है। कारण (R): यह अधिकार अनुच्छेद 30 में निहित है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
धार्मिक एवं भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार प्राप्त है। यह अधिकार वास्तव में अनुच्छेद 30 में निहित है, इसलिए कारण सही है। किन्तु कारण केवल उस संवैधानिक अनुच्छेद की पहचान बताता है जिसमें यह अधिकार निहित है; वह इस अधिकार के उद्देश्य अथवा औचित्य की व्याख्या नहीं करता। अतः A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है। इसलिए विकल्प B सही है।
प्रश्न 157: कथन (A): अनुच्छेद 29 सांस्कृतिक एवं भाषाई पहचान के संरक्षण का संवैधानिक आधार प्रदान करता है। कारण (R): भारत की सांस्कृतिक विविधता की रक्षा संविधान का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 29 विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति रखने वाले वर्गों को उसके संरक्षण का अधिकार प्रदान करता है। कारण भी सही है क्योंकि भारत की सांस्कृतिक विविधता की रक्षा संविधान का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है। किन्तु यह अनुच्छेद 29 द्वारा प्रदत्त विशिष्ट संवैधानिक अधिकार का प्रत्यक्ष कारण नहीं है, बल्कि उसका व्यापक संवैधानिक दर्शन है। अतः विकल्प B सही है।
प्रश्न 158: कथन (A): अनुच्छेद 28 के अंतर्गत किसी भी शैक्षणिक संस्था में धार्मिक शिक्षा पूर्णतः निषिद्ध है। कारण (R): संविधान राज्य द्वारा पूर्णतः वित्तपोषित शैक्षणिक संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा पर प्रतिबंध लगाता है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 28 सभी संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा पर प्रतिबंध नहीं लगाता। यह प्रतिबंध केवल उन संस्थाओं पर लागू है जो पूर्णतः राज्य द्वारा पोषित हों। अतः कथन गलत है जबकि कारण सही है। इसलिए विकल्प D सही है।
प्रश्न 159: कथन (A): अनुच्छेद 24 चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों एवं जोखिमपूर्ण कार्यों में नियोजित करने पर प्रतिबंध लगाता है। कारण (R): अनुच्छेद 24 केवल निजी क्षेत्र पर लागू होता है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 24 बच्चों के शोषण से सुरक्षा प्रदान करता है और चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों के जोखिमपूर्ण नियोजन पर प्रतिबंध लगाता है। यह केवल निजी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसलिए कथन सही तथा कारण गलत है। विकल्प C सही है।
प्रश्न 160: कथन (A): अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी और निरोध के मामलों में कुछ प्रक्रियात्मक संरक्षण प्रदान करता है। कारण (R): गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराना संवैधानिक आवश्यकता है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी एवं निरोध के मामलों में अनेक प्रक्रियात्मक संरक्षण प्रदान करता है, जैसे गिरफ्तारी के कारण बताना, वकील से परामर्श का अधिकार तथा 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना। कारण सही है क्योंकि गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराना अनुच्छेद 22(1) के अंतर्गत संवैधानिक आवश्यकता है। किन्तु यह अनुच्छेद 22 द्वारा प्रदत्त सभी प्रक्रियात्मक संरक्षणों की व्याख्या नहीं करता, बल्कि उनमें से केवल एक संरक्षण का उल्लेख करता है। अतः A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है। इसलिए विकल्प B सही है।
प्रश्न 161: कथन (A): अनुच्छेद 21 की न्यायिक व्याख्या ने जीवन के अधिकार का दायरा अत्यंत व्यापक बना दिया है। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय ने जीवन के अधिकार को केवल शारीरिक अस्तित्व तक सीमित नहीं माना है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
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C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 21 की विस्तृत न्यायिक व्याख्या के माध्यम से गरिमामय जीवन, स्वच्छ पर्यावरण, विधिक सहायता, निजता, शिक्षा (पूर्व में न्यायिक व्याख्या के माध्यम से) आदि अनेक अधिकार विकसित हुए। इसका आधार यही है कि न्यायालय ने जीवन को केवल जैविक अस्तित्व नहीं माना। इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या करता है। विकल्प A सही है।
प्रश्न 162: कथन (A): अनुच्छेद 18 सैन्य एवं शैक्षणिक उपाधियों को भी पूर्णतः प्रतिबंधित करता है। कारण (R): संविधान वंशानुगत तथा राज्य प्रदत्त कुलीन उपाधियों के उन्मूलन का प्रावधान करता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 18 कुलीनता-आधारित उपाधियों को समाप्त करता है, किन्तु सैन्य सम्मान तथा शैक्षणिक उपाधियाँ इसके अंतर्गत निषिद्ध नहीं हैं। अतः कथन गलत है। कारण सही है क्योंकि संविधान का उद्देश्य सामाजिक समानता स्थापित करना तथा औपनिवेशिक कुलीनता व्यवस्था का अंत करना था। इसलिए विकल्प D सही है।
प्रश्न 163: कथन (A): अनुच्छेद 17 द्वारा अस्पृश्यता का उन्मूलन किया गया है। कारण (R): अनुच्छेद 17 केवल सरकारी कार्यालयों में अस्पृश्यता के व्यवहार को प्रतिबंधित करता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
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C.
A सही है पर R गलत है
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का पूर्ण उन्मूलन करता है तथा उसके किसी भी रूप के व्यवहार को दंडनीय बनाता है। यह केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं है बल्कि समाज के सभी क्षेत्रों पर लागू होता है। इसलिए कथन सही और कारण गलत है। अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955 को बाद में नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम के रूप में परिवर्तित किया गया। अतः विकल्प C सही है।
प्रश्न 164: कथन (A): अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता प्रदान करता है। कारण (R): अनुच्छेद 16 अवसर की समानता के साथ कुछ विशेष वर्गों के लिए आरक्षण की अनुमति भी देता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता सुनिश्चित करता है, इसलिए कथन सही है। कारण भी सही है क्योंकि अनुच्छेद 16(4), 16(4A) आदि के अंतर्गत कुछ वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है। किन्तु आरक्षण का प्रावधान सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता प्रदान किए जाने का प्रत्यक्ष कारण नहीं है, बल्कि समानता के सिद्धांत का एक विशेष अपवाद/सहायक प्रावधान है। अतः A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है। इसलिए विकल्प B सही है।
प्रश्न 165: कथन (A): अनुच्छेद 15 के अंतर्गत राज्य केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर किसी नागरिक के विरुद्ध भेदभाव नहीं कर सकता। कारण (R): समानता का अधिकार औपचारिक समानता के साथ-साथ सामाजिक न्याय की अवधारणा को भी स्वीकार करता है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 15(1) राज्य को धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव करने से रोकता है। कारण भी सही है क्योंकि भारतीय संविधान केवल औपचारिक समानता तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय एवं वास्तविक समानता को भी स्वीकार करता है। किन्तु यह अनुच्छेद 15(1) में निहित विशिष्ट निषेध का प्रत्यक्ष कारण नहीं है। अतः A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है। इसलिए विकल्प B सही है।
प्रश्न 166: कथन (A): नागरिकों का यह कर्तव्य है कि वे भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें। कारण (R): मौलिक कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 51A(c) के अनुसार प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे, अतः कथन सही है। कारण भी सही है क्योंकि मौलिक कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। किन्तु यह तथ्य कथन में वर्णित विशिष्ट कर्तव्य की व्याख्या नहीं करता, बल्कि केवल उसके संवैधानिक इतिहास को बताता है। इसलिए कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता। अतः विकल्प B सही है।
प्रश्न 167: कथन (A): मौलिक अधिकार और राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्व परस्पर पूरक माने जाते हैं। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय ने समय-समय पर दोनों के बीच सामंजस्यपूर्ण व्याख्या के सिद्धांत को स्वीकार किया है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
-
C.
A सही है पर R गलत है
-
D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
प्रारम्भिक न्यायिक दृष्टिकोण में मौलिक अधिकारों को प्रधानता दी गई थी, किन्तु बाद के निर्णयों विशेषकर केशवानंद भारती तथा मिनर्वा मिल्स मामलों में न्यायालय ने मौलिक अधिकारों और नीति-निर्देशक तत्त्वों के बीच संतुलन एवं सामंजस्य की आवश्यकता पर बल दिया। इस प्रकार दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। कारण इस संवैधानिक स्थिति की सही व्याख्या करता है। अतः विकल्प A सही है।
प्रश्न 168: कथन (A): मौलिक कर्तव्य संविधान के मूल भाग में 1950 से ही विद्यमान थे। कारण (R): मौलिक कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
-
B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
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C.
A सही है पर R गलत है
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D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
मूल संविधान में मौलिक कर्तव्य शामिल नहीं थे। इन्हें 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग IV-A में जोड़ा गया। अतः कथन गलत तथा कारण सही है। बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा एक अतिरिक्त कर्तव्य जोड़ा गया। इसलिए विकल्प D सही है।
प्रश्न 169: कथन (A): गांधीवादी नीति-निर्देशक तत्त्वों में ग्राम पंचायतों के संगठन पर बल दिया गया है। कारण (R): ग्राम पंचायतों का उल्लेख संविधान के भाग IV-A में किया गया है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
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C.
A सही है पर R गलत है
✓
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D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 40 राज्य को ग्राम पंचायतों के संगठन हेतु निर्देश देता है और इसे गांधीवादी नीति-निर्देशक तत्त्व माना जाता है, इसलिए कथन सही है। किन्तु यह प्रावधान भाग IV में है, भाग IV-A में नहीं। भाग IV-A मौलिक कर्तव्यों से संबंधित है। अतः कारण गलत है और विकल्प C सही है।
प्रश्न 170: कथन (A): राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्व न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं। कारण (R): संविधान के अनुसार नीति-निर्देशक तत्त्वों का उद्देश्य कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
✓
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C.
A सही है पर R गलत है
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D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि नीति-निर्देशक तत्त्व न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, अतः कथन सही है। साथ ही उनका उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय पर आधारित कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है, इसलिए कारण भी सही है। किन्तु उनका अप्रवर्तनीय होना और कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना दो पृथक तथ्य हैं; कारण कथन की प्रत्यक्ष व्याख्या नहीं करता। इसलिए विकल्प B सही है।
प्रश्न 171: कथन (A): संवैधानिक उपचार का अधिकार मौलिक अधिकारों के संरक्षण का साधन माना जाता है। कारण (R): अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
✓
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
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C.
A सही है पर R गलत है
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D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु सर्वोच्च न्यायालय में सीधे जाने का अधिकार देता है। इसी कारण डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इसे संविधान का “हृदय और आत्मा” कहा था। सर्वोच्च न्यायालय को बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण जैसी रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है। अतः कारण यह स्पष्ट करता है कि संवैधानिक उपचार का अधिकार मौलिक अधिकारों की रक्षा का प्रभावी साधन क्यों है। इसलिए विकल्प A सही है।
प्रश्न 172: कथन (A): धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार केवल भारत के नागरिकों को उपलब्ध है। कारण (R): अनुच्छेद 25 सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता प्रदान करता है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
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C.
A सही है पर R गलत है
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D.
A गलत है पर R सही है
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित अनुच्छेद 25 से 28 केवल नागरिकों तक सीमित नहीं हैं बल्कि “सभी व्यक्तियों” पर लागू होते हैं। अतः कथन गलत है। कारण सही है क्योंकि अनुच्छेद 25 अंतःकरण की स्वतंत्रता तथा धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। इसलिए विकल्प D सही है।
प्रश्न 173: कथन (A): शोषण के विरुद्ध अधिकार के अंतर्गत मानव तस्करी और बेगार तथा बंधुआ मजदूरी का निषेध किया गया है। कारण (R): संविधान का अनुच्छेद 23 केवल सरकारी संस्थाओं पर लागू होता है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
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C.
A सही है पर R गलत है
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D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 23 मानव तस्करी, बेगार तथा अन्य प्रकार के बलात श्रम का निषेध करता है, अतः कथन सही है। किन्तु अनुच्छेद 23 केवल राज्य के विरुद्ध नहीं बल्कि निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी लागू होता है, इसलिए कारण गलत है। यह मौलिक अधिकारों में एक महत्त्वपूर्ण अपवाद है क्योंकि अधिकांश अधिकार मुख्यतः राज्य के विरुद्ध प्रवर्तनीय होते हैं। अतः विकल्प C सही है।
प्रश्न 174: कथन (A): अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्रदत्त स्वतंत्रताएँ पूर्णतः निरपेक्ष नहीं हैं। कारण (R): संविधान के अनुच्छेद 19 के अंतर्गत नागरिकों को छह स्वतंत्रताएँ प्रदान की गई हैं।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
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C.
A सही है पर R गलत है
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D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्रदत्त स्वतंत्रताएँ पूर्णतः निरपेक्ष नहीं हैं क्योंकि संविधान राज्य को विभिन्न आधारों पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है। अतः कथन सही है। कारण भी सही है क्योंकि अनुच्छेद 19 नागरिकों को छह स्वतंत्रताएँ प्रदान करता है। किन्तु स्वतंत्रताओं की संख्या का उनकी निरपेक्षता या अनिरपेक्षता से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। इसलिए कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता। अतः विकल्प B सही है।
प्रश्न 175: कथन (A): समानता का अधिकार राज्य को विधि के समक्ष समानता तथा विधियों के समान संरक्षण प्रदान करने के लिए बाध्य करता है। कारण (R): संविधान का अनुच्छेद 14 मनमाने राज्यीय व्यवहार के विरुद्ध संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है।
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A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
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B.
A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
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C.
A सही है पर R गलत है
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D.
A गलत है पर R सही है
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समानता तथा विधियों के समान संरक्षण की गारंटी देता है। सर्वोच्च न्यायालय ने अनेक निर्णयों में स्पष्ट किया है कि मनमानी समानता की विरोधी है, अतः अनुच्छेद 14 राज्य की मनमानी पर संवैधानिक नियंत्रण स्थापित करता है। इसलिए कथन सही है तथा कारण यह स्पष्ट करता है कि समानता का अधिकार केवल औपचारिक समानता नहीं बल्कि मनमाने व्यवहार के निषेध का भी सिद्धांत है। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या करता है। अन्य विकल्प असंगत हैं।