संघीय सरकार पर महत्वपूर्ण MCQ हिंदी में। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद, संसद, धन विधेयक, वित्त विधेयक एवं संविधान संशोधन से संबंधित UPSC, PCS एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के PYQ, वस्तुनिष्ठ प्रश्न और विस्तृत व्याख्या सहित अभ्यास प्रश्न।

This quiz contains 175 carefully selected multiple-choice questions (MCQ) with detailed explanations for each answer. Questions cover important topics from Polity.

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संघीय सरकार MCQ हिंदी में | राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद प्रश्नोत्तरी, PYQ एवं UPSC प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

संघीय सरकार पर महत्वपूर्ण MCQ हिंदी में। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद, संसद, धन विधेयक, वित्त विधेयक एवं संविधान संशोधन से संबंधित UPSC, PCS एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के PYQ, वस्तुनिष्ठ प्रश्न और विस्तृत व्याख्या सहित अभ्यास प्रश्न।

📊
Difficulty
Hard
❓
Num Questions
175
❓
Points Per Question
1
⏱️
Time Limit
120 minutes

All MCQ Questions with Answers and Explanations

प्रश्न 1: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) भारतीय संविधान की संघीय व्यवस्था में संसद और राज्यों के बीच संतुलन स्थापित करने हेतु विशेष संशोधन प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है। (2) कुछ संवैधानिक संशोधनों में राज्यों की पुष्टि की आवश्यकता संघीय सिद्धांत की अभिव्यक्ति है। (3) संविधान संशोधन प्रक्रिया भारतीय संविधान के कठोर और लचीले दोनों स्वरूपों को प्रतिबिंबित करती है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान की संशोधन प्रक्रिया संघीय और एकात्मक दोनों तत्वों के बीच संतुलन स्थापित करती है। कुछ संशोधनों के लिए राज्यों की पुष्टि अनिवार्य है, जिससे संघीय सिद्धांत की रक्षा होती है। साथ ही कुछ प्रावधान साधारण बहुमत से और अन्य विशेष बहुमत से संशोधित किए जा सकते हैं, जिससे संविधान में कठोरता और लचीलापन दोनों के गुण दिखाई देते हैं। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 2: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राज्यसभा भारतीय संघवाद का संस्थागत संरक्षण प्रदान करती है। (2) राज्यसभा का अस्तित्व केवल विधायी पुनर्विचार के लिए है। (3) संविधान ने राज्यसभा को कुछ विशेष संघीय शक्तियाँ प्रदान की हैं।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 1 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
राज्यसभा राज्यों के प्रतिनिधित्व के माध्यम से भारतीय संघवाद को संस्थागत आधार प्रदान करती है। उसे अनुच्छेद 249 और अनुच्छेद 312 जैसी विशेष संघीय शक्तियाँ प्राप्त हैं। उसका उद्देश्य केवल विधायी पुनर्विचार तक सीमित नहीं है; वह संघीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 3: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान संशोधन की शक्ति असीमित नहीं है। (2) मूल संरचना सिद्धांत संसद की संशोधन शक्ति पर संवैधानिक सीमा लगाता है। (3) मूल संरचना सिद्धांत का उद्देश्य संविधान की पहचान और मूल मूल्यों की रक्षा करना है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित मूल संरचना सिद्धांत के अनुसार संसद की संशोधन शक्ति व्यापक अवश्य है, किंतु असीमित नहीं है। संसद संविधान की मूल पहचान, आधारभूत विशेषताओं और मौलिक मूल्यों को नष्ट नहीं कर सकती। यही सिद्धांत संवैधानिक सर्वोच्चता और लोकतांत्रिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 4: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) लोकसभा अध्यक्ष का धन विधेयक संबंधी प्रमाणन संवैधानिक महत्व रखता है। (2) धन विधेयक संबंधी विवादों ने संवैधानिक व्याख्या और न्यायिक समीक्षा के उत्पन्न किए हैं। (3) धन विधेयक की अवधारणा का उद्देश्य वित्तीय मामलों में लोकसभा की प्रधानता सुनिश्चित करना है।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 110 और 109 के अंतर्गत धन विधेयक की व्यवस्था लोकसभा को वित्तीय मामलों में प्रमुख भूमिका प्रदान करती है। लोकसभा अध्यक्ष का प्रमाणन संवैधानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल के वर्षों में धन विधेयक संबंधी वर्गीकरण को लेकर न्यायिक समीक्षा और संवैधानिक व्याख्या से जुड़े भी उठे हैं। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 5: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) विभाग संबंधी स्थायी समितियाँ विधेयकों की तकनीकी और विस्तृत जांच में सहायता करती हैं। (2) संसदीय समितियाँ संसद की विशेषज्ञता क्षमता को बढ़ाती हैं। (3) संसदीय समितियों की बैठकों का सार्वजनिक प्रसारण सामान्यतः नहीं किया जाता।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
संसदीय समितियाँ जटिल विधायी और प्रशासनिक विषयों की गहन जांच करती हैं, जिससे संसद की कार्यकुशलता और विशेषज्ञता दोनों बढ़ती हैं। समितियों की बैठकों को सामान्यतः गोपनीय रखा जाता है ताकि स्वतंत्र और विस्तृत विचार-विमर्श संभव हो सके। इसी कारण समिति प्रणाली को "लघु संसद" भी कहा जाता है। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 6: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व और मंत्रियों की व्यक्तिगत उत्तरदायित्व अलग-अलग अवधारणाएँ हैं। (2) कोई मंत्री प्रधानमंत्री के विश्वास की हानि होने पर पद पर बना रह सकता है। (3) मंत्रियों की व्यक्तिगत उत्तरदायित्व का संबंध राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करने से जुड़ा है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 1 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
सामूहिक उत्तरदायित्व लोकसभा के प्रति मंत्रिपरिषद की संयुक्त जिम्मेदारी है, जबकि व्यक्तिगत उत्तरदायित्व किसी मंत्री के पद पर बने रहने की व्यक्तिगत स्थिति से संबंधित है। व्यवहार में यदि कोई मंत्री प्रधानमंत्री का विश्वास खो देता है तो उसे पद छोड़ना पड़ता है। संविधान में मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, किंतु यह शक्ति प्रधानमंत्री की सलाह से संचालित होती है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं।

प्रश्न 7: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रधानमंत्री का पद भारतीय संविधान में ब्रिटिश परंपरा से प्रेरित है। (2) संविधान प्रधानमंत्री को "सरकार का प्रमुख" शब्दों में परिभाषित करता है। (3) प्रधानमंत्री की केंद्रीय भूमिका मुख्यतः संवैधानिक प्रावधानों तथा संसदीय व्यवहार दोनों से विकसित हुई है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संसदीय प्रणाली ब्रिटिश मॉडल से प्रेरित है और प्रधानमंत्री उसका केंद्रीय अंग है। संविधान प्रधानमंत्री का उल्लेख करता है, किंतु उसे स्पष्ट रूप से "सरकार का प्रमुख" शब्दों में परिभाषित नहीं करता। उसकी वास्तविक स्थिति संवैधानिक प्रावधानों, संसदीय परंपराओं, राजनीतिक नेतृत्व और दलगत व्यवस्था से विकसित हुई है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 8: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति दंड न्याय प्रणाली में मानवीय तत्व को सम्मिलित करती है। (2) क्षमादान शक्ति का प्रयोग न्यायिक प्रक्रिया के अतिरिक्त एक संवैधानिक सुरक्षा के रूप में भी कार्य करता है। (3) राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान प्रदान किए जाने पर न्यायालय का मूल निर्णय स्वतः शून्य हो जाता है।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 72 के अंतर्गत क्षमादान शक्ति का उद्देश्य न्याय व्यवस्था में मानवीय, सामाजिक और सार्वजनिक नीति संबंधी विचारों को समाहित करना है। यह न्यायिक प्रक्रिया के अतिरिक्त एक संवैधानिक सुरक्षा कवच के रूप में भी कार्य करती है। हालांकि क्षमादान से न्यायालय का निर्णय शून्य नहीं होता; केवल दंड के प्रभाव में परिवर्तन किया जाता है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 9: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति का बार-बार पुनर्प्रख्यापन संविधान की भावना के अनुरूप माना गया है। (2) सर्वोच्च न्यायालय ने अध्यादेशों के पुनर्प्रख्यापन की प्रवृत्ति की आलोचना की है। (3) अध्यादेश शक्ति का प्रयोग नियमित विधायी प्रक्रिया के विकल्प के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
सर्वोच्च न्यायालय ने डी.सी. वाधवा बनाम बिहार राज्य मामला सहित विभिन्न निर्णयों में अध्यादेशों के बार-बार पुनर्प्रख्यापन को संविधान की भावना के प्रतिकूल बताया है। अध्यादेश शक्ति एक असाधारण शक्ति है और इसका उपयोग नियमित विधायी प्रक्रिया को प्रतिस्थापित करने के लिए नहीं किया जा सकता। इसलिए कथन 1 गलत है जबकि कथन 2 और 3 सही हैं।

प्रश्न 10: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति पद रिक्त होने पर नए राष्ट्रपति के निर्वाचन तक, जो रिक्ति की तिथि से छह माह के भीतर होना चाहिए, उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है। (2) राष्ट्रपति पद रिक्त होने की स्थिति में छह माह के भीतर नए राष्ट्रपति का निर्वाचन कराया जाना अनिवार्य है। (3) कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति की सभी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग कर सकता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 65 और 62 के अनुसार राष्ट्रपति पद रिक्त होने पर उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है तथा छह माह के भीतर नए राष्ट्रपति का निर्वाचन कराया जाना आवश्यक है। इस अवधि में उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति की सभी संवैधानिक शक्तियों, उन्मुक्तियों और अधिकारों का प्रयोग कर सकता है। यह व्यवस्था कार्यपालिका में निरंतरता सुनिश्चित करती है। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 11: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राज्यसभा भारतीय संघीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण संस्थागत अंग है। (2) संविधान संशोधन विधेयकों पर राज्यसभा की सहमति आवश्यक है। (3) राज्यसभा राज्यों के हितों की संवैधानिक अभिव्यक्ति का माध्यम है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
राज्यसभा भारतीय संघवाद का एक महत्वपूर्ण संस्थागत स्तंभ है क्योंकि वह राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है। संविधान संशोधन विधेयकों के पारित होने के लिए राज्यसभा की सहमति अनिवार्य है तथा इस संबंध में संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है। राज्यसभा राज्यों के हितों की संवैधानिक अभिव्यक्ति का माध्यम होने के साथ-साथ संघीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 12: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान संशोधन की शक्ति संसद की विधायी शक्ति से भिन्न प्रकृति की मानी जाती है। (2) संविधान संशोधन करते समय संसद संविधान-निर्माता निकाय जैसी भूमिका निभाती है। (3) संविधान संशोधन अधिनियम संविधान संशोधनकारी शक्ति के प्रयोग का परिणाम होता है, न कि सामान्य विधायी शक्ति का।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
संविधान संशोधन करते समय संसद अपनी साधारण विधायी शक्ति का नहीं, बल्कि संविधान संशोधनकारी शक्ति का प्रयोग करती है। इस कारण संविधान संशोधन की प्रक्रिया, आवश्यक बहुमत तथा उसके संवैधानिक प्रभाव सामान्य कानून निर्माण से भिन्न होते हैं। संविधान संशोधन अधिनियम साधारण अधिनियमों से प्रकृति और प्रभाव दोनों में अलग माना जाता है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी संविधान संशोधन शक्ति की विशिष्ट प्रकृति को स्वीकार किया है। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 13: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है। (2) धन विधेयक प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा आवश्यक होती है। (3) राज्यसभा धन विधेयक को संशोधित कर बाध्यकारी रूप से वापस भेज सकती है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 109 और 110 के अनुसार धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है तथा इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा आवश्यक होती है। राज्यसभा धन विधेयक पर केवल सिफारिशें दे सकती है; उसके संशोधन बाध्यकारी नहीं होते। अतः कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 14: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संसद की विभाग संबंधी स्थायी समितियाँ मंत्रालयों के कार्यकलापों की जांच करती हैं। (2) इन समितियों की रिपोर्टें सामान्यतः सलाहकारी प्रकृति की होती हैं। (3) समितियों की अनुशंसाएँ सरकार पर न्यायिक आदेशों की भाँति बाध्यकारी होती हैं।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 2 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
विभाग संबंधी स्थायी समितियाँ मंत्रालयों की कार्यप्रणाली, अनुदान मांगों और विधेयकों की जांच करती हैं। उनकी रिपोर्टें संसद को प्रस्तुत की जाती हैं और उनका स्वरूप अनुशंसात्मक होता है। सरकार पर उन्हें न्यायिक आदेश की तरह लागू करना अनिवार्य नहीं होता। अतः कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 15: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राज्यसभा एक स्थायी सदन है। (2) राज्यसभा कभी भंग नहीं की जाती। (3) राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष बाद सेवानिवृत्त होते हैं।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 83 के अनुसार राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसे कभी भंग नहीं किया जाता। इसके सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है तथा प्रत्येक दो वर्ष में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं। यह व्यवस्था सदन में निरंतरता और संस्थागत स्थिरता सुनिश्चित करती है। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 16: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान मंत्री के रूप में सभी मंत्रियों को मान्यता देता है, किंतु व्यवहार में कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री की भूमिकाएँ भिन्न होती हैं। (2) कैबिनेट सरकार की प्रमुख नीतियों का निर्धारण करती है। (3) कैबिनेट मंत्रिपरिषद का आंतरिक एवं शक्तिशाली समूह है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
संविधान मंत्रियों के बीच कोई औपचारिक श्रेणीकरण नहीं करता, किंतु व्यवहार में कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री की भूमिकाएँ अलग-अलग होती हैं। कैबिनेट ही सरकार का वास्तविक निर्णयकारी केंद्र है तथा प्रमुख नीतियों का निर्धारण करती है। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 17: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद और राष्ट्रपति के बीच प्रमुख संपर्क सूत्र होता है। (2) अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री पर राष्ट्रपति को सूचना देने का दायित्व आरोपित करता है। (3) राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद के किसी निर्णय पर जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रधानमंत्री से पूछताछ कर सकता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच संवैधानिक कड़ी बनाता है। प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वह राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद के निर्णयों और प्रशासनिक मामलों की जानकारी दे। राष्ट्रपति आवश्यक जानकारी मांग सकता है और किसी विषय को मंत्रिपरिषद के विचारार्थ रखने के लिए भी कह सकता है। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 18: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) उपराष्ट्रपति के निर्वाचन विवादों का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय करता है। (2) उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में राज्य विधानसभाएँ भाग नहीं लेतीं। (3) उपराष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया राष्ट्रपति के महाभियोग के समान नहीं होती।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 71 के अनुसार उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित सभी विवादों एवं संदेहों का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय करता है। उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में केवल संसद के दोनों सदनों के सदस्य भाग लेते हैं; राज्य विधानसभाओं की इसमें कोई भूमिका नहीं होती। उपराष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया राष्ट्रपति के महाभियोग से भिन्न है। राष्ट्रपति को संविधान के उल्लंघन के आधार पर महाभियोग द्वारा हटाया जाता है, जबकि उपराष्ट्रपति को राज्यसभा में विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव तथा लोकसभा की सहमति द्वारा हटाया जाता है। इसलिए यह प्रक्रिया महाभियोग नहीं कहलाती। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 19: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा का विघटन मंत्रिपरिषद की सलाह से संबंधित शक्ति है। (2) राष्ट्रपति किसी भी समय अपनी इच्छा से लोकसभा भंग कर सकता है। (3) संसदीय शासन प्रणाली में लोकसभा का विघटन राजनीतिक उत्तरदायित्व की प्रक्रिया से जुड़ा है।

  • A. केवल 1 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
लोकसभा का विघटन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है, किंतु सामान्यतः यह मंत्रिपरिषद की सलाह पर आधारित होता है। राष्ट्रपति को लोकसभा भंग करने की निरंकुश शक्ति प्राप्त नहीं है। संसदीय लोकतंत्र में विघटन का संबंध जनादेश के नवीनीकरण और राजनीतिक उत्तरदायित्व से जुड़ा होता है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं।

प्रश्न 20: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति का प्रयोग केवल तब किया जा सकता है जब तत्काल विधायी कार्रवाई आवश्यक हो। (2) राष्ट्रपति अपनी व्यक्तिगत संतुष्टि के आधार पर अध्यादेश जारी करता है। (3) अध्यादेश का वही प्रभाव और बल होता है जो संसद द्वारा पारित अधिनियम का होता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 123 के अंतर्गत अध्यादेश केवल उन परिस्थितियों में जारी किया जा सकता है जब संसद सत्र में न हो और तत्काल विधायी कार्रवाई आवश्यक हो। राष्ट्रपति अपनी व्यक्तिगत संतुष्टि पर नहीं, बल्कि मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अध्यादेश का प्रभाव संसद द्वारा पारित कानून के समान होता है, यद्यपि उसका स्वरूप अस्थायी होता है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 21: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान संशोधन प्रक्रिया न तो पूर्णतः कठोर है और न ही पूर्णतः लचीली। (2) कुछ संवैधानिक प्रावधान साधारण बहुमत से परिवर्तित किए जा सकते हैं। (3) कुछ संशोधनों के लिए राज्यों की पुष्टि आवश्यक होती है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान की संशोधन प्रक्रिया को मिश्रित प्रकृति का माना जाता है क्योंकि इसमें लचीलापन और कठोरता दोनों के तत्व विद्यमान हैं। कुछ प्रावधान साधारण बहुमत से बदले जा सकते हैं, जबकि अधिकांश संशोधनों के लिए विशेष बहुमत आवश्यक होता है। संघीय महत्व के विषयों पर संशोधन हेतु कम-से-कम आधे राज्यों की पुष्टि भी आवश्यक होती है। यही कारण है कि भारतीय संविधान को न तो ब्रिटेन की तरह अत्यधिक लचीला और न ही अमेरिका की तरह अत्यधिक कठोर माना जाता है।

प्रश्न 22: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संसद संविधान की मूल संरचना को संशोधित नहीं कर सकती। (2) मूल संरचना सिद्धांत का प्रतिपादन सर्वोच्च न्यायालय ने किया था। (3) मूल संरचना सिद्धांत संविधान में स्पष्ट रूप से लिखित है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामला (1973) में मूल संरचना सिद्धांत प्रतिपादित किया। इसके अनुसार संसद संविधान में व्यापक संशोधन कर सकती है, किंतु संविधान की मूल संरचना को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती। यह सिद्धांत संविधान के पाठ में स्पष्ट रूप से लिखित नहीं है, बल्कि न्यायिक व्याख्या से विकसित हुआ है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं।

प्रश्न 23: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) वित्त विधेयक और धन विधेयक समानार्थी शब्द हैं। (2) प्रत्येक धन विधेयक वित्त विधेयक होता है। (3) प्रत्येक वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होता।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
धन विधेयक वित्तीय विधेयकों की एक विशेष श्रेणी है। प्रत्येक धन विधेयक वित्त विधेयक अवश्य होता है, किंतु सभी वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होते। कुछ वित्त विधेयकों में अनुच्छेद 110 के अतिरिक्त अन्य विषय भी सम्मिलित होते हैं, इसलिए वे धन विधेयक नहीं माने जाते। अतः कथन 2 और 3 सही हैं।

प्रश्न 24: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रवर समिति प्रणाली का उद्देश्य विधेयकों की अधिक विस्तृत जांच सुनिश्चित करना है। (2) किसी विधेयक को समिति के पास भेजना प्रत्येक स्थिति में अनिवार्य है। (3) संसदीय समितियाँ सदन के कार्यभार को कम करने में सहायता करती हैं।

  • A. केवल 1 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
संसदीय समितियाँ विधेयकों और प्रशासनिक विषयों की विस्तृत एवं तकनीकी जांच करती हैं। इससे संसद का कार्य अधिक प्रभावी बनता है और सदन का कार्यभार भी कम होता है। हालांकि प्रत्येक विधेयक को समिति के पास भेजना अनिवार्य नहीं है; यह सदन या अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर करता है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं।

प्रश्न 25: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) शून्यकाल का उल्लेख संविधान में किया गया है। (2) प्रश्नकाल संसदीय कार्यपालिका उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। (3) शून्यकाल भारतीय संसदीय परंपरा से विकसित हुआ है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3 ✓
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
प्रश्नकाल संसद में कार्यपालिका को उत्तरदायी बनाने का अत्यंत प्रभावी उपकरण है। दूसरी ओर शून्यकाल का उल्लेख संविधान या संसदीय नियमों में मूल रूप से नहीं किया गया था; यह भारतीय संसदीय व्यवहार से विकसित एक प्रथा है। इसलिए कथन 1 गलत है जबकि कथन 2 और 3 सही हैं।

प्रश्न 26: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व की अवधारणा लोकसभा के प्रति उत्तरदायित्व पर आधारित है। (2) सामूहिक उत्तरदायित्व का अर्थ है कि मंत्रिपरिषद एक इकाई के रूप में कार्य करती है। (3) यदि लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दे तो केवल संबंधित मंत्री को त्यागपत्र देना होता है।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। इसका अर्थ है कि मंत्रिपरिषद एक संयुक्त इकाई के रूप में कार्य करती है और उसके निर्णयों के लिए सभी मंत्री सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं। यदि लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित कर देती है तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, न कि केवल किसी एक मंत्री को। इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं।

प्रश्न 27: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। (2) संविधान राष्ट्रपति को किसी भी व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करने की पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान करता है। (3) संसदीय परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री वह व्यक्ति होता है जो लोकसभा का विश्वास प्राप्त करने में सक्षम हो।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। किंतु राष्ट्रपति को पूर्ण और निरंकुश स्वतंत्रता प्राप्त नहीं है; उसे उस व्यक्ति को नियुक्त करना होता है जो लोकसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त करने में सक्षम हो। यह संसदीय शासन प्रणाली का मूल सिद्धांत है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 28: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति न्यायपालिका के निर्णय को निरस्त नहीं करती, बल्कि दंड के प्रभाव को परिवर्तित करती है। (2) क्षमादान शक्ति का उद्देश्य केवल न्यायिक त्रुटियों को सुधारना है। (3) दया याचिका पर विचार करते समय मानवीय, सामाजिक और लोकहित संबंधी पहलुओं को भी ध्यान में रखा जा सकता है।

  • A. केवल 1 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति न्यायालय के निर्णय को अमान्य नहीं करती, बल्कि दंड को क्षमा, लघु, स्थगित या परिवर्तित कर सकती है। इसका उद्देश्य केवल न्यायिक त्रुटियों का सुधार नहीं है, बल्कि मानवीय, सामाजिक, राजनयिक अथवा लोकहित संबंधी विचारों को भी ध्यान में रखना है। यही कारण है कि कार्यपालिका को यह विशेष संवैधानिक शक्ति प्रदान की गई है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं।

प्रश्न 29: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति संसद की विधायी शक्ति का स्थायी विकल्प है। (2) अध्यादेश तभी जारी किया जा सकता है जब संसद का कोई भी सदन सत्र में न हो। (3) अध्यादेश को संसद के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह के भीतर अनुमोदित होना आवश्यक है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3 ✓
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 123 के अंतर्गत अध्यादेश शक्ति एक असाधारण एवं अस्थायी विधायी शक्ति है, न कि संसद की स्थायी विधायी शक्ति का विकल्प। अध्यादेश तभी जारी किया जा सकता है जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों तथा ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हों जिनमें तत्काल विधायी कार्रवाई आवश्यक हो। अध्यादेश संसद के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह पश्चात् प्रभावहीन हो जाता है, यदि उससे पूर्व संसद द्वारा उसे अनुमोदित न किया जाए। अतः कथन 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 1 गलत है।

प्रश्न 30: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) सर्वोच्च न्यायालय ने यह माना है कि राष्ट्रपति का निर्वाचन संपन्न हो जाने के बाद उससे संबंधित विवादों का निर्णय केवल सर्वोच्च न्यायालय कर सकता है। (2) राष्ट्रपति निर्वाचन संबंधी विवाद केवल सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत निर्वाचन याचिका द्वारा उठाए जा सकते हैं। (3) राष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित विवादों पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम होता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 71 के अनुसार राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से उत्पन्न सभी संदेहों और विवादों का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952 के अनुसार ऐसे विवाद सर्वोच्च न्यायालय में निर्वाचन याचिका के माध्यम से प्रस्तुत किए जाते हैं। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम होता है। साथ ही, राष्ट्रपति के निर्वाचन को बाद में अवैध घोषित किए जाने पर भी उसके द्वारा पद पर रहते हुए किए गए कार्य वैध बने रहते हैं। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 31: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राज्यसभा को संविधान ने कुछ विशेष शक्तियाँ प्रदान की हैं जो लोकसभा को प्राप्त नहीं हैं। (2) अनुच्छेद 249 के अंतर्गत राज्यसभा राष्ट्रीय हित में संसद को राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने की अनुमति दे सकती है। (3) अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन से संबंधित प्रस्ताव केवल राज्यसभा द्वारा विशेष बहुमत से पारित किया जा सकता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
राज्यसभा को कुछ विशिष्ट संघीय शक्तियाँ प्राप्त हैं। अनुच्छेद 249 के अंतर्गत वह राष्ट्रीय हित में संसद को राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार प्रदान कर सकती है। इसी प्रकार अनुच्छेद 312 के अंतर्गत नई अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन के लिए राज्यसभा को विशेष भूमिका दी गई है। ये शक्तियाँ राज्यसभा की संघीय प्रकृति को रेखांकित करती हैं और लोकसभा को प्राप्त नहीं हैं। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 32: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान संशोधन विधेयक के लिए संयुक्त बैठक का अभाव राज्यसभा को प्रभावी वीटो जैसी स्थिति प्रदान कर सकता है। (2) संविधान संशोधन विधेयकों के संदर्भ में राज्यसभा और लोकसभा की संवैधानिक स्थिति समान है। (3) संविधान संशोधन प्रक्रिया भारतीय संघवाद की रक्षा में योगदान देती है।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
संविधान संशोधन विधेयकों पर संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है; अतः किसी भी सदन की अस्वीकृति विधेयक को रोक सकती है। इस प्रकार राज्यसभा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। दोनों सदनों की स्थिति संविधान संशोधन के मामले में समान है। साथ ही कुछ संशोधनों के लिए राज्यों की पुष्टि की आवश्यकता संघीय संतुलन और भारतीय संघवाद की रक्षा करती है। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 33: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) किसी विधेयक का धन विधेयक होना न्यायिक समीक्षा से पूर्णतः परे है। (2) लोकसभा अध्यक्ष का धन विधेयक संबंधी निर्णय संवैधानिक रूप से अंतिम माना गया है। (3) सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ मामलों में धन विधेयक के पर सीमित न्यायिक समीक्षा की संभावना स्वीकार की है।

  • A. केवल 2
  • B. केवल 2 और 3 ✓
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 110(3) के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम माना गया है, किंतु संवैधानिक सर्वोच्चता के सिद्धांत के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ मामलों में यह संकेत दिया है कि यदि संवैधानिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन हो तो सीमित न्यायिक समीक्षा संभव हो सकती है। इसलिए कथन 1 गलत है जबकि 2 और 3 सही हैं। यह विषय हाल के संवैधानिक विमर्शों में विशेष महत्व रखता है।

प्रश्न 34: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्राक्कलन समिति सार्वजनिक व्यय में मितव्ययिता और दक्षता के उपाय सुझाती है। (2) लोक लेखा समिति यह जांचती है कि संसद द्वारा स्वीकृत धन का व्यय विधिसम्मत हुआ या नहीं। (3) लोक उपक्रम समिति सभी सार्वजनिक उपक्रमों के नीति-निर्धारण संबंधी निर्णयों की समीक्षा करती है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
प्राक्कलन समिति प्रशासन में मितव्ययिता एवं दक्षता बढ़ाने के उपाय सुझाती है। लोक लेखा समिति यह जांचती है कि संसद द्वारा स्वीकृत धन का उपयोग विधिसम्मत एवं नियमित रूप से हुआ या नहीं। लोक उपक्रम समिति सार्वजनिक उपक्रमों के कार्यनिष्पादन की समीक्षा करती है, किंतु उनके नीति-निर्धारण संबंधी निर्णयों की नहीं। अतः कथन 1 और 2 सही हैं तथा कथन 3 गलत है।

प्रश्न 35: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) कैबिनेट समितियाँ संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित हैं। (2) कैबिनेट समितियाँ शासन में विशेषज्ञता और त्वरित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देती हैं। (3) सभी कैबिनेट समितियाँ स्थायी प्रकृति की होती हैं।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 2
व्याख्या (Explanation):
कैबिनेट समितियाँ संवैधानिक नहीं बल्कि कार्यपालिका द्वारा निर्मित संस्थागत व्यवस्थाएँ हैं। इनका उद्देश्य जटिल प्रशासनिक विषयों पर विशेषज्ञतापूर्ण विचार-विमर्श तथा त्वरित निर्णय सुनिश्चित करना है। कुछ समितियाँ स्थायी होती हैं जबकि कुछ तदर्थ आधार पर गठित की जाती हैं। इसलिए कथन 2 सही है जबकि कथन 1 और 3 गलत हैं।

प्रश्न 36: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रधानमंत्री की संवैधानिक स्थिति का वास्तविक स्वरूप केवल संविधान के पाठ से नहीं, बल्कि संसदीय परंपराओं से भी निर्धारित होता है। (2) गठबंधन सरकारों में प्रधानमंत्री की प्रभावशीलता अपेक्षाकृत सीमित हो सकती है। (3) लोकसभा में प्रचंड बहुमत प्रधानमंत्री की राजनीतिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकता है।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
प्रधानमंत्री की भूमिका केवल संवैधानिक प्रावधानों से निर्धारित नहीं होती, बल्कि दलगत संरचना, संसदीय परंपराएँ, गठबंधन राजनीति और नेतृत्व क्षमता भी इसे प्रभावित करती हैं। गठबंधन सरकारों में सहयोगी दलों की भूमिका के कारण प्रधानमंत्री की स्वतंत्रता अपेक्षाकृत सीमित हो सकती है, जबकि स्पष्ट बहुमत उसकी स्थिति को अधिक मजबूत बनाता है। यह संवैधानिक विधि और राजनीतिक व्यवहार के अंतर्संबंध का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 37: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य नहीं करता। (2) कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति की सभी शक्तियाँ प्राप्त हो जाती हैं। (3) कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने की अवधि में उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति के वेतन एवं भत्ते प्राप्त होते हैं।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
जब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के पद की रिक्ति या असमर्थता की स्थिति में कार्यवाहक राष्ट्रपति बनता है, तब वह राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य नहीं करता। उस अवधि में उसे राष्ट्रपति की सभी संवैधानिक शक्तियाँ, उन्मुक्तियाँ, वेतन और भत्ते प्राप्त होते हैं। यह व्यवस्था राष्ट्रपति पद की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए की गई है। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 38: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया में जिस सदन में आरोप नहीं लगाया गया है, वह सदन आरोपों की जांच करता है या करवाता है। (2) राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग संविधान के उल्लंघन के अतिरिक्त किसी अन्य आधार पर भी चलाया जा सकता है। (3) संविधान ने "संविधान के उल्लंघन" शब्द की स्पष्ट परिभाषा प्रदान नहीं की है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 1 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 61 के अनुसार राष्ट्रपति पर केवल संविधान के उल्लंघन के आधार पर महाभियोग चलाया जा सकता है। एक सदन आरोप लगाता है और दूसरा सदन आरोपों की जांच करता है या करवाता है। संविधान ने "संविधान के उल्लंघन" की कोई परिभाषा नहीं दी है, जिससे इस अवधारणा की व्याख्या राजनीतिक एवं संवैधानिक संदर्भों पर निर्भर रहती है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 39: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति न्यायिक पुनर्विलोकन से पूर्णतः परे है। (2) सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि क्षमादान शक्ति का प्रयोग मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता। (3) राष्ट्रपति क्षमादान याचिका पर निर्णय लेते समय मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधा होता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. केवल 2 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति व्यापक है, किंतु यह पूर्णतः न्यायिक पुनर्विलोकन से परे नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न मामलों में स्पष्ट किया है कि दुर्भावना, मनमानी, अप्रासंगिक विचारों या प्रक्रिया संबंधी गंभीर त्रुटियों के आधार पर क्षमादान आदेश की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। राष्ट्रपति इस विषय में भी मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करता है। इसलिए कथन 1 गलत तथा 2 और 3 सही हैं।

प्रश्न 40: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति द्वारा मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करना भारतीय संविधान की मूल संरचना से संबंधित संसदीय शासन व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण तत्व माना गया है। (2) राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह को अनिश्चितकाल तक पुनर्विचार हेतु वापस भेज सकता है। (3) 44वें संविधान संशोधन के बाद राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह एक बार पुनर्विचार हेतु लौटाने का अधिकार प्राप्त है।

  • A. केवल 1 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
42वें संविधान संशोधन ने राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह से बाध्य किया तथा 44वें संविधान संशोधन ने यह व्यवस्था जोड़ी कि राष्ट्रपति सलाह को एक बार पुनर्विचार हेतु लौटा सकता है। यदि मंत्रिपरिषद पुनः वही सलाह दे तो राष्ट्रपति को उसे स्वीकार करना अनिवार्य है। अतः सलाह को अनिश्चितकाल तक लौटाने की शक्ति नहीं है। संसदीय शासन प्रणाली तथा मंत्रिपरिषद की प्रधानता को सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान की मूल संरचना के अनुरूप माना है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं।

प्रश्न 41: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकार नहीं कर सकती। (2) संविधान संशोधन विधेयकों पर राज्यसभा और लोकसभा की शक्तियाँ समान हैं। (3) राष्ट्रपति के निर्वाचन में राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकार नहीं कर सकती और उसकी भूमिका सीमित होती है। संविधान संशोधन विधेयकों के मामले में राज्यसभा और लोकसभा की शक्तियाँ समान हैं तथा किसी भी सदन को दूसरे पर वरीयता प्राप्त नहीं है। राष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं, जिसमें राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य भी शामिल हैं। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 42: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। (2) संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा आवश्यक नहीं है। (3) संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 368 के अनुसार संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा आवश्यक नहीं होती। साथ ही संविधान संशोधन विधेयकों के लिए संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है। यदि किसी सदन में आवश्यक बहुमत प्राप्त न हो तो विधेयक पारित नहीं माना जाता। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 43: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) धन विधेयक की परिभाषा संविधान के अनुच्छेद 110 में दी गई है। (2) किसी विधेयक को धन विधेयक घोषित करने का अंतिम अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास है। (3) धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा की भूमिका केवल परामर्शात्मक प्रकृति की है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 110 धन विधेयक की परिभाषा प्रदान करता है। किसी विधेयक के धन विधेयक होने का अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष करता है। राज्यसभा धन विधेयक को न तो अस्वीकार कर सकती है और न ही उसमें बाध्यकारी संशोधन कर सकती है; वह केवल सिफारिशें कर सकती है। इसलिए उसकी भूमिका परामर्शात्मक प्रकृति की होती है। तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 44: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) लोक लेखा समिति में राज्यसभा का प्रतिनिधित्व होता है। (2) प्राक्कलन समिति में राज्यसभा का प्रतिनिधित्व नहीं होता। (3) लोक उपक्रम समिति में लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य होते हैं।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
लोक लेखा समिति और लोक उपक्रम समिति दोनों में लोकसभा तथा राज्यसभा के सदस्य शामिल होते हैं। इसके विपरीत प्राक्कलन समिति केवल लोकसभा की समिति है। यह अंतर संसदीय वित्तीय समितियों की संरचना को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 45: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन संसदीय शासन प्रणाली और मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व के बीच संबंध को सर्वाधिक सटीक रूप से व्यक्त करता है?

  • A. सामूहिक उत्तरदायित्व संसदीय शासन प्रणाली की मूल आधारशिला है। ✓
  • B. सामूहिक उत्तरदायित्व केवल राज्यसभा के प्रति लागू होता है।
  • C. सामूहिक उत्तरदायित्व केवल कैबिनेट मंत्रियों पर लागू होता है।
  • D. सामूहिक उत्तरदायित्व का संबंध केवल वित्तीय मामलों से है।
सही उत्तर: A — सामूहिक उत्तरदायित्व संसदीय शासन प्रणाली की मूल आधारशिला है।
व्याख्या (Explanation):
संसदीय शासन प्रणाली का मूल सिद्धांत यह है कि मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी। यह व्यवस्था कार्यपालिका को लोकतांत्रिक नियंत्रण के अधीन रखती है। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को पद छोड़ना पड़ता है। इसलिए सामूहिक उत्तरदायित्व संसदीय शासन प्रणाली की आधारशिला मानी जाती है।

प्रश्न 46: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रधानमंत्री की मृत्यु होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद का अस्तित्व समाप्त माना जाता है। (2) किसी मंत्री के इस्तीफे से संपूर्ण मंत्रिपरिषद स्वतः समाप्त नहीं होती। (3) प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद की एकता का केंद्र माना जाता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रमुख और उसकी एकता का केंद्र होता है। प्रधानमंत्री की मृत्यु, त्यागपत्र या पदत्याग की स्थिति में संपूर्ण मंत्रिपरिषद का अस्तित्व समाप्त माना जाता है क्योंकि मंत्रिपरिषद उसी के नेतृत्व में कार्य करती है। दूसरी ओर किसी एक मंत्री के इस्तीफे से मंत्रिपरिषद समाप्त नहीं होती। यह प्रधानमंत्री की केंद्रीय संवैधानिक स्थिति को दर्शाता है। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 47: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) उपराष्ट्रपति के पद से हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है। (2) इस प्रस्ताव को राज्यसभा के तत्कालीन कुल सदस्यों के बहुमत से पारित किया जाना आवश्यक है। (3) लोकसभा की सहमति के बिना उपराष्ट्रपति को नहीं हटाया जा सकता।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 67 के अनुसार उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसे राज्यसभा के तत्कालीन कुल सदस्यों के बहुमत से पारित किया जाना आवश्यक है तथा बाद में लोकसभा द्वारा अनुमोदित किया जाना भी अनिवार्य है। इसलिए तीनों कथन सही हैं। यह प्रक्रिया राष्ट्रपति के महाभियोग से भिन्न और अपेक्षाकृत सरल है। प्रस्ताव लाने से पूर्व कम-से-कम 14 दिन का नोटिस आवश्यक होता है। राज्यसभा द्वारा प्रस्ताव पारित होने के बाद लोकसभा की सहमति आवश्यक है। राष्ट्रपति की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती।

प्रश्न 48: राष्ट्रपति के महाभियोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) महाभियोग संसद के किसी भी सदन में प्रारंभ किया जा सकता है। (2) आरोप प्रस्ताव लाने से पूर्व कम-से-कम 14 दिन की लिखित सूचना आवश्यक होती है। (3) राष्ट्रपति महाभियोग की जांच के दौरान स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 61 के अनुसार राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग संसद के किसी भी सदन में प्रारंभ किया जा सकता है। प्रस्ताव लाने से पूर्व कम-से-कम 14 दिन की लिखित सूचना आवश्यक होती है। जांच की प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति को स्वयं उपस्थित होकर अथवा प्रतिनिधि के माध्यम से अपना पक्ष रखने का अधिकार प्राप्त है। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 49: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति द्वारा लौटाए गए साधारण विधेयक को संसद पुनः पारित कर दे तो राष्ट्रपति को स्वीकृति देना अनिवार्य होता है। (2) राष्ट्रपति धन विधेयक को पुनर्विचार हेतु वापस नहीं भेज सकता। (3) राष्ट्रपति संविधान संशोधन विधेयक को भी पुनर्विचार हेतु वापस भेज सकता है।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रपति साधारण विधेयक को पुनर्विचार हेतु लौटा सकता है, किंतु यदि संसद उसे पुनः पारित कर दे तो उसे स्वीकृति देना अनिवार्य है। धन विधेयक को पुनर्विचार हेतु वापस भेजने की अनुमति नहीं है। संविधान संशोधन विधेयक के संबंध में राष्ट्रपति के पास पुनर्विचार हेतु लौटाने की शक्ति नहीं होती; संसद द्वारा विधिवत पारित होने पर उसे स्वीकृति देना आवश्यक है। इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 50: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति के निर्वाचन में प्रयुक्त एकल संक्रमणीय मत प्रणाली का उद्देश्य निर्वाचित राष्ट्रपति को व्यापक समर्थन प्रदान करना है। (2) राष्ट्रपति के निर्वाचन में मतदाता केवल एक उम्मीदवार को मत दे सकता है। (3) राष्ट्रपति के निर्वाचन में मतों की गणना वरीयताओं के आधार पर की जाती है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रपति के निर्वाचन में एकल संक्रमणीय मत प्रणाली का प्रयोग किया जाता है, जिसके अंतर्गत मतदाता उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में अंकित करता है। मतों की गणना भी वरीयताओं के आधार पर की जाती है, जिससे निर्वाचित राष्ट्रपति को व्यापक समर्थन प्राप्त हो सके। मतदाता केवल एक उम्मीदवार को मत नहीं देता, बल्कि अनेक उम्मीदवारों को क्रमवार वरीयता दे सकता है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 51: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राज्यसभा का गठन मुख्यतः संघीय सिद्धांत को प्रतिबिंबित करने के लिए किया गया है। (2) राज्यसभा लोकसभा के समान शक्तियाँ सभी प्रकार के विधेयकों पर रखती है। (3) संविधान संशोधन विधेयकों के मामले में राज्यसभा की स्थिति लोकसभा के बराबर है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 1 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
राज्यसभा संघीय व्यवस्था में राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है और इस प्रकार संघीय सिद्धांत को अभिव्यक्त करती है। धन विधेयकों के मामले में उसकी शक्तियाँ लोकसभा से कम हैं, इसलिए कथन 2 गलत है। किंतु संविधान संशोधन विधेयकों के संदर्भ में राज्यसभा और लोकसभा दोनों की स्थिति समान है तथा किसी भी सदन को दूसरे पर वरीयता प्राप्त नहीं है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं।

प्रश्न 52: संविधान संशोधन प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान संशोधन विधेयक को राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। (2) संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है। (3) यदि आवश्यक राज्यों द्वारा पुष्टि न की जाए तो संशोधन प्रभावी नहीं हो सकता।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
संविधान संशोधन विधेयक केवल संसद में प्रस्तुत किया जा सकता है; राज्य विधानमंडल इसमें पहल नहीं कर सकते। संविधान संशोधन विधेयकों के लिए संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है। जिन संशोधनों के लिए राज्यों की पुष्टि आवश्यक है, वे तब तक प्रभावी नहीं हो सकते जब तक कम-से-कम आधे राज्यों की स्वीकृति प्राप्त न हो जाए। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 53: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) धन विधेयक केवल अनुच्छेद 110 में निर्दिष्ट विषयों से संबंधित हो सकता है। (2) यदि किसी विधेयक में अनुच्छेद 110 के अतिरिक्त अन्य महत्वपूर्ण विषय भी शामिल हों, तो वह धन विधेयक नहीं माना जाएगा। (3) धन विधेयक होने या न होने का अंतिम निर्णय राज्यसभा के सभापति द्वारा किया जाता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 110 के अनुसार धन विधेयक केवल उन्हीं विषयों से संबंधित होना चाहिए जो उसमें निर्दिष्ट हैं, जैसे करारोपण, भारत की संचित निधि आदि। यदि विधेयक में अन्य स्वतंत्र और महत्वपूर्ण विषय शामिल हों, तो उसे धन विधेयक नहीं माना जाएगा। किसी विधेयक के धन विधेयक होने का अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष का होता है, न कि राज्यसभा के सभापति का। इसलिए कथन 1 और 2 सही तथा कथन 3 गलत है।

प्रश्न 54: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) लोक लेखा समिति के अध्यक्ष का चयन परंपरागत रूप से विपक्ष से किया जाता है। (2) लोक लेखा समिति नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों की जांच करती है। (3) लोक लेखा समिति न्यायिक निकाय की भाँति बाध्यकारी आदेश जारी कर सकती है।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
लोक लेखा समिति संसद की एक महत्वपूर्ण वित्तीय समिति है। इसका अध्यक्ष परंपरागत रूप से विपक्ष से चुना जाता है, जिससे वित्तीय निरीक्षण अधिक प्रभावी बन सके। यह समिति नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों की जांच करती है। हालांकि इसके पास न्यायालय जैसी बाध्यकारी आदेश जारी करने की शक्ति नहीं होती; यह केवल अपनी रिपोर्ट और अनुशंसाएँ प्रस्तुत करती है। लोक लेखा समिति में 22 सदस्य होते हैं—15 लोकसभा से तथा 7 राज्यसभा से। 1967 से इसके अध्यक्ष को परंपरागत रूप से विपक्ष से चुना जाता है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं।

प्रश्न 55: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व की अवधारणा का तार्किक परिणाम है?

  • A. प्रत्येक मंत्री स्वतंत्र रूप से सरकारी नीति की आलोचना कर सकता है और पद पर बना रह सकता है।
  • B. लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित करे तो केवल प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना होता है।
  • C. राज्यसभा द्वारा आलोचना होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद स्वतः भंग हो जाती है।
  • D. मंत्रिपरिषद के निर्णयों का सार्वजनिक रूप से समर्थन करना सभी मंत्रियों के लिए अपेक्षित है। ✓
सही उत्तर: D — मंत्रिपरिषद के निर्णयों का सार्वजनिक रूप से समर्थन करना सभी मंत्रियों के लिए अपेक्षित है।
व्याख्या (Explanation):
सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत मंत्रिपरिषद की एकता और गोपनीयता पर आधारित है। यदि कोई मंत्री मंत्रिपरिषद के निर्णयों से सार्वजनिक रूप से असहमति व्यक्त करता है तो सामान्यतः उसे इस्तीफा देना पड़ता है। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होता है। अतः विकल्प D इस सिद्धांत का सबसे उपयुक्त परिणाम है।

प्रश्न 56: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रधानमंत्री का पद संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित है। (2) संविधान प्रधानमंत्री की शक्तियों का विस्तृत विवरण देता है। (3) प्रधानमंत्री की वास्तविक शक्तियाँ संसदीय परंपराओं और राजनीतिक परिस्थितियों से भी प्रभावित होती हैं।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 1 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
संविधान प्रधानमंत्री के पद का उल्लेख करता है और उससे संबंधित कुछ प्रमुख प्रावधान अनुच्छेद 74, 75 और 78 में दिए गए हैं। किंतु उसकी सभी शक्तियों का विस्तृत विवरण संविधान में नहीं मिलता। प्रधानमंत्री की वास्तविक प्रभावशीलता लोकसभा में बहुमत, दलगत स्थिति, गठबंधन राजनीति तथा राजनीतिक नेतृत्व जैसे कारकों से भी प्रभावित होती है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 57: उपराष्ट्रपति के निर्वाचन और राष्ट्रपति के निर्वाचन के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) दोनों का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा एकल संक्रमणीय मत से होता है। (2) दोनों के निर्वाचन में संसद के मनोनीत सदस्य मतदान करते हैं। (3) दोनों के निर्वाचन में राज्यों की विधानसभाएँ भाग लेती हैं।

  • A. केवल 1 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों का निर्वाचन एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से होता है। किंतु राष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के मनोनीत सदस्य मतदान नहीं करते, जबकि उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में करते हैं। इसी प्रकार राज्यों की विधानसभाएँ राष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग लेती हैं, उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में नहीं। इसलिए केवल कथन 1 सही है।

प्रश्न 58: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति मृत्युदंड के मामलों तक सीमित नहीं है। (2) राष्ट्रपति सैन्य न्यायालयों द्वारा दिए गए दंडों के संबंध में भी क्षमादान शक्ति का प्रयोग कर सकता है। (3) राष्ट्रपति और राज्यपाल दोनों मृत्युदंड को पूर्णतः क्षमा कर सकते हैं।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति व्यापक है और यह केवल मृत्युदंड तक सीमित नहीं है। वह सैन्य न्यायालयों के मामलों तथा संघीय कानूनों के अंतर्गत दिए गए दंडों में भी हस्तक्षेप कर सकता है। राज्यपाल को अनुच्छेद 161 के अंतर्गत कुछ समान शक्तियाँ प्राप्त हैं, किंतु मृत्युदंड को पूर्ण क्षमा करने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है; राज्यपाल केवल दंड को निलंबित, परिवर्तित या लघु कर सकता है। अतः कथन 3 गलत है।

प्रश्न 59: निम्नलिखित में से किस स्थिति में राष्ट्रपति अपनी विवेकाधीन भूमिका अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय रूप से निभा सकता है?

  • A. जब संसद द्वारा पारित धन विधेयक उसकी स्वीकृति के लिए भेजा जाए।
  • B. जब मंत्रिपरिषद उसे सलाह दे कि वह अध्यादेश जारी करे।
  • C. जब लोकसभा में स्पष्ट बहुमत वाला दल मौजूद हो।
  • D. जब आम चुनाव के बाद किसी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त न हुआ हो। ✓
सही उत्तर: D — जब आम चुनाव के बाद किसी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त न हुआ हो।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय राष्ट्रपति सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है, किंतु त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में प्रधानमंत्री की नियुक्ति के पर उसकी भूमिका अपेक्षाकृत महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति को यह निर्धारित करना होता है कि किस नेता के पास सदन का विश्वास प्राप्त करने की सर्वाधिक संभावना है। धन विधेयक, अध्यादेश या स्पष्ट बहुमत की स्थिति में राष्ट्रपति की स्वतंत्र भूमिका अत्यंत सीमित रहती है।

प्रश्न 60: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति का निर्वाचन संघीय सिद्धांत और लोकतांत्रिक सिद्धांत दोनों को प्रतिबिंबित करता है। (2) राष्ट्रपति के निर्वाचन में राज्यों के निर्वाचित विधायक भाग लेते हैं, परंतु विधान परिषदों के सदस्य नहीं। (3) राष्ट्रपति के निर्वाचन में प्रत्येक राज्य को समान प्रतिनिधित्व प्राप्त होता है।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रपति का निर्वाचन संघीय तथा लोकतांत्रिक दोनों तत्वों का समन्वय है क्योंकि इसमें संसद और राज्यों दोनों का प्रतिनिधित्व होता है। राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य निर्वाचन मंडल का हिस्सा होते हैं, जबकि विधान परिषदों के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते। प्रत्येक राज्य को समान प्रतिनिधित्व नहीं मिलता; प्रतिनिधित्व जनसंख्या और निर्वाचित विधायकों की संख्या के आधार पर निर्धारित होता है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं तथा कथन 3 गलत है।

प्रश्न 61: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान संशोधन विधेयक पर संसद के दोनों सदनों में मतभेद होने पर संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है। (2) संविधान संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति को स्वीकृति देना अनिवार्य है। (3) प्रत्येक संविधान संशोधन विधेयक अनुच्छेद 368 में वर्णित विशेष बहुमत से ही पारित किया जाता है।

  • A. केवल 2 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 2
व्याख्या (Explanation):
संविधान संशोधन विधेयकों के लिए संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है। 24वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 के बाद राष्ट्रपति को संविधान संशोधन विधेयक पर स्वीकृति देना अनिवार्य है। कथन 3 गलत है क्योंकि संविधान के कुछ प्रावधान साधारण बहुमत से बदले जा सकते हैं और वे अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन नहीं माने जाते।

प्रश्न 62: निम्नलिखित में से कौन-सा विषय संविधान संशोधन के लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ-साथ कम-से-कम आधे राज्यों की पुष्टि भी आवश्यक बनाता है?

  • A. राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया ✓
  • B. नागरिकता संबंधी प्रावधान
  • C. लोकसभा के कार्य संचालन नियम
  • D. संसद सदस्यों के वेतन और भत्ते
सही उत्तर: A — राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 368 के अंतर्गत कुछ संवैधानिक संशोधनों के लिए संघीय सहमति आवश्यक होती है। राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की शक्तियाँ, संघ-राज्य विधायी संबंध तथा संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व जैसे विषयों पर संशोधन के लिए संसद के विशेष बहुमत के अतिरिक्त कम-से-कम आधे राज्यों की पुष्टि आवश्यक होती है। नागरिकता, वेतन-भत्ते या सदन के नियम इस श्रेणी में नहीं आते।

प्रश्न 63: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकार नहीं कर सकती। (2) राज्यसभा धन विधेयक में संशोधन कर सकती है और लोकसभा को उसे स्वीकार करना अनिवार्य है। (3) यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर धन विधेयक वापस नहीं करती तो वह दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
धन विधेयक के मामले में राज्यसभा की भूमिका सीमित होती है। वह इसे अस्वीकार नहीं कर सकती और केवल सिफारिशें दे सकती है। लोकसभा उन सिफारिशों को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है। यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर विधेयक वापस नहीं करती तो वह दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 64: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल (कैबिनेट) समानार्थी शब्द हैं। (2) प्रत्येक कैबिनेट मंत्री मंत्रिपरिषद का सदस्य होता है। (3) प्रत्येक मंत्रिपरिषद सदस्य कैबिनेट का सदस्य नहीं होता।

  • A. केवल 2
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 1 और 3
  • D. केवल 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
मंत्रिपरिषद एक व्यापक निकाय है जबकि कैबिनेट उसका छोटा एवं शक्तिशाली आंतरिक समूह है। प्रत्येक कैबिनेट मंत्री मंत्रिपरिषद का सदस्य होता है, किंतु सभी मंत्री कैबिनेट का हिस्सा नहीं होते। राज्य मंत्री और अन्य मंत्री मंत्रिपरिषद में हो सकते हैं परंतु आवश्यक नहीं कि वे कैबिनेट में भी हों। इसलिए कथन 1 गलत है जबकि 2 और 3 सही हैं।

प्रश्न 65: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) किसी मंत्री का लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य न होना उसकी नियुक्ति में बाधा नहीं है। (2) ऐसा व्यक्ति छह माह तक मंत्री पद पर रह सकता है। (3) छह माह के भीतर संसद का सदस्य न बनने पर उसे मंत्री पद छोड़ना होगा।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 75(5) के अनुसार कोई व्यक्ति संसद का सदस्य न होते हुए भी मंत्री नियुक्त किया जा सकता है। किंतु उसे छह माह के भीतर संसद के किसी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है, अन्यथा वह मंत्री पद पर बना नहीं रह सकता। यह प्रावधान विशेषज्ञ व्यक्तियों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने की लचीलापन प्रदान करता है। भारत में कई प्रधानमंत्रियों और मंत्रियों ने प्रारंभिक अवधि में संसद सदस्य बने बिना पद ग्रहण किया है।

प्रश्न 66: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन प्रधानमंत्री की संवैधानिक स्थिति को सर्वाधिक उपयुक्त रूप से व्यक्त करता है?

  • A. वह केवल लोकसभा का नेता होता है।
  • B. वह राष्ट्रपति का सचिवीय सलाहकार होता है।
  • C. वह मंत्रिपरिषद का प्रमुख तथा वास्तविक कार्यपालिका का केंद्र होता है। ✓
  • D. वह संसद और न्यायपालिका के बीच समन्वयक होता है।
सही उत्तर: C — वह मंत्रिपरिषद का प्रमुख तथा वास्तविक कार्यपालिका का केंद्र होता है।
व्याख्या (Explanation):
प्रधानमंत्री भारतीय शासन व्यवस्था का केंद्रीय स्तंभ है। वह मंत्रिपरिषद का प्रमुख, सरकार का नेता तथा वास्तविक कार्यपालिका का केंद्र होता है। अनुच्छेद 74, 75 और 78 प्रधानमंत्री की संवैधानिक भूमिका को परिभाषित करते हैं। प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के गठन, नीति-निर्धारण, प्रशासनिक समन्वय तथा राष्ट्रपति को सलाह देने में निर्णायक भूमिका निभाता है। इसीलिए उसे अक्सर “सरकार की धुरी” कहा जाता है।

प्रश्न 67: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में राज्यों की विधानसभाओं की कोई भूमिका नहीं होती। (2) उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के मनोनीत सदस्य मतदान कर सकते हैं। (3) उपराष्ट्रपति का निर्वाचन भी एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा होता है। इसमें मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं, जबकि राज्यों की विधानसभाओं की कोई भूमिका नहीं होती। चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अंतर्गत एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है।

प्रश्न 68: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति पर महाभियोग का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में प्रारंभ किया जा सकता है। (2) महाभियोग प्रस्ताव पारित करने के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। (3) राष्ट्रपति के महाभियोग की जांच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जाती है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 61 के अनुसार राष्ट्रपति पर महाभियोग संसद के किसी भी सदन में प्रारंभ किया जा सकता है। प्रस्ताव लाने से पूर्व कम-से-कम 14 दिन की लिखित सूचना तथा सदन की कुल सदस्य संख्या के कम-से-कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। आरोप लगाने वाला सदन तथा जांच के पश्चात दूसरा सदन, दोनों को प्रस्ताव अपनी कुल सदस्य संख्या के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से पारित करना होता है। जांच सर्वोच्च न्यायालय नहीं करता; दूसरा सदन स्वयं जांच करता है या करवाता है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं तथा कथन 3 गलत है।

प्रश्न 69: राष्ट्रपति की वीटो शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है? (1) पूर्ण वीटो - विधेयक को स्वीकृति देने से पूर्ण इंकार (2) निलंबनकारी वीटो - विधेयक को पुनर्विचार हेतु लौटाना (3) जेबी वीटो - विधेयक को अनिश्चित काल तक लंबित रखना

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारतीय राष्ट्रपति के पास पूर्ण वीटो, निलंबनकारी वीटो तथा जेबी वीटो जैसी शक्तियाँ उपलब्ध हैं। पूर्ण वीटो के अंतर्गत राष्ट्रपति स्वीकृति देने से इंकार कर सकता है; निलंबनकारी वीटो के अंतर्गत विधेयक को पुनर्विचार हेतु लौटा सकता है; जबकि जेबी वीटो में राष्ट्रपति विधेयक पर कोई निर्णय न लेकर उसे लंबित रख सकता है। भारतीय संविधान में जेबी वीटो का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, किंतु संवैधानिक व्याख्या और व्यवहार से इसकी मान्यता स्थापित हुई है। निलंबनकारी वीटो धन विधेयक एवं संविधान संशोधन विधेयक पर लागू नहीं होता।

प्रश्न 70: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति के निर्वाचन में किसी राज्य के विधायक के मत का मूल्य उस राज्य की जनसंख्या तथा विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों की संख्या पर आधारित होता है। (2) प्रत्येक सांसद के मत का मूल्य अलग-अलग राज्यों की जनसंख्या के अनुसार निर्धारित किया जाता है। (3) राष्ट्रपति के निर्वाचन में मतदान आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा होता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 55 राष्ट्रपति के निर्वाचन में संघ और राज्यों के बीच संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है। विधायक के मत का मूल्य संबंधित राज्य की जनसंख्या तथा विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों की संख्या के आधार पर निर्धारित होता है। सांसदों के मत का मूल्य सभी निर्वाचित सांसदों के लिए समान होता है, न कि राज्यवार अलग-अलग। राष्ट्रपति का चुनाव एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से होता है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 71: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राज्यसभा संघ की इकाइयों का प्रतिनिधित्व करती है। (2) लोकसभा प्रत्यक्ष रूप से जनता का प्रतिनिधित्व करती है। (3) संसद की द्विसदनीय व्यवस्था संघीय सिद्धांत को सुदृढ़ करती है।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
राज्यसभा को राज्यों की परिषद कहा जाता है और यह संघ की इकाइयों अर्थात राज्यों एवं कुछ संघ राज्य क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती है। लोकसभा प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा गठित सदन है और जनता का प्रतिनिधित्व करती है। संसद की द्विसदनीय व्यवस्था संघीय संतुलन, विधायी पुनर्विचार तथा व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 72: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान संशोधन विधेयक के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा आवश्यक नहीं होती। (2) संविधान संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति वीटो का प्रयोग कर सकता है। (3) संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2
  • D. केवल 1 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
संविधान संशोधन विधेयक प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा आवश्यक नहीं होती और इसे संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संसद द्वारा विधिवत पारित संविधान संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति को स्वीकृति देना अनिवार्य है; वह वीटो का प्रयोग नहीं कर सकता। अतः कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 73: धन विधेयक के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) इसे केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है। (2) राज्यसभा इसे अधिकतम 14 दिनों तक रोक सकती है। (3) इस पर संयुक्त बैठक का प्रावधान है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है और इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा आवश्यक होती है। राज्यसभा इसे अस्वीकार नहीं कर सकती तथा अधिकतम 14 दिनों तक अपने पास रख सकती है। यदि वह समय पर वापस नहीं करती तो विधेयक लोकसभा द्वारा पारित रूप में ही दोनों सदनों से पारित माना जाता है। धन विधेयक के लिए संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए कथन 1 और 2 सही तथा कथन 3 गलत है।

प्रश्न 74: निम्नलिखित युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? (1) लोक लेखा समिति - संसद (2) प्राक्कलन समिति - केवल लोकसभा (3) लोक उपक्रम समिति - संसद

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
लोक लेखा समिति तथा लोक उपक्रम समिति दोनों में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य सम्मिलित होते हैं, इसलिए वे संसदीय समितियाँ हैं। प्राक्कलन समिति केवल लोकसभा की समिति है और इसमें राज्यसभा का प्रतिनिधित्व नहीं होता। तीनों युग्म सही हैं।

प्रश्न 75: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन संसदीय शासन प्रणाली की विशेषता नहीं है?

  • A. सामूहिक उत्तरदायित्व
  • B. वास्तविक और नाममात्र की कार्यपालिका का विभाजन
  • C. कार्यपालिका का विधायिका से निकट संबंध
  • D. कार्यपालिका का निश्चित कार्यकाल ✓
सही उत्तर: D — कार्यपालिका का निश्चित कार्यकाल
व्याख्या (Explanation):
संसदीय शासन प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ हैं—मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व, वास्तविक एवं नाममात्र की कार्यपालिका का विभाजन तथा कार्यपालिका और विधायिका के बीच घनिष्ठ संबंध। इसके विपरीत निश्चित कार्यकाल राष्ट्रपति शासन प्रणाली की विशेषता है। भारत में मंत्रिपरिषद का कार्यकाल लोकसभा के विश्वास पर निर्भर करता है, इसलिए उसका कार्यकाल पूर्णतः निश्चित नहीं माना जाता।

प्रश्न 76: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है। (2) प्रधानमंत्री मंत्रियों के विभागों के आवंटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। (3) प्रधानमंत्री किसी मंत्री के त्यागपत्र की अनुशंसा राष्ट्रपति को कर सकता है।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
प्रधानमंत्री भारतीय शासन व्यवस्था का केंद्रीय बिंदु है। वह मंत्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है, मंत्रियों के विभागों का आवंटन करता है तथा किसी मंत्री को हटाने के लिए राष्ट्रपति को सलाह दे सकता है। व्यवहार में यदि प्रधानमंत्री किसी मंत्री से इस्तीफा मांगता है और वह मना कर दे, तो राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर उसे पद से हटा सकता है। इस कारण प्रधानमंत्री को मंत्रिपरिषद की धुरी कहा जाता है।

प्रश्न 77: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उपराष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया के संबंध में सही है?

  • A. इसके लिए महाभियोग चलाया जाता है।
  • B. प्रस्ताव राज्यसभा में प्रारंभ होता है और लोकसभा द्वारा अनुमोदित किया जाता है। ✓
  • C. प्रस्ताव लोकसभा में प्रारंभ होता है और राज्यसभा द्वारा अनुमोदित किया जाता है।
  • D. राष्ट्रपति अकेले उपराष्ट्रपति को पद से हटा सकता है।
सही उत्तर: B — प्रस्ताव राज्यसभा में प्रारंभ होता है और लोकसभा द्वारा अनुमोदित किया जाता है।
व्याख्या (Explanation):
उपराष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 67 में वर्णित है। इसके लिए महाभियोग नहीं चलाया जाता। हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा में प्रारंभ होता है और उसके तत्कालीन कुल सदस्यों के बहुमत से पारित होना चाहिए। तत्पश्चात लोकसभा द्वारा इसकी स्वीकृति आवश्यक होती है। राष्ट्रपति को उपराष्ट्रपति को एकतरफा हटाने की शक्ति प्राप्त नहीं है। यह प्रक्रिया राष्ट्रपति के महाभियोग से भिन्न है।

प्रश्न 78: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय से परामर्शात्मक मत प्राप्त कर सकता है। (2) सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया परामर्श राष्ट्रपति पर बाध्यकारी होता है। (3) यह शक्ति संविधान के अनुच्छेद 143 से संबंधित है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2
  • D. केवल 1 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति किसी विधिक या लोकमहत्व के पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श मांग सकता है। सर्वोच्च न्यायालय अपना परामर्श देता है, किंतु यह राष्ट्रपति पर बाध्यकारी नहीं होता। इस प्रकार कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है। राष्ट्रपति की यह शक्ति न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संवैधानिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

प्रश्न 79: निम्नलिखित में से कौन-सा विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा के बिना संसद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता? (1) धन विधेयक (2) भारत की संचित निधि से व्यय संबंधित विधेयक (3) राज्य की सीमा में परिवर्तन से संबंधित विधेयक

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 2 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
धन विधेयक केवल राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा पर ही प्रस्तुत किया जा सकता है। अनुच्छेद 117 के अंतर्गत ऐसा वित्तीय विधेयक, जिसमें भारत की संचित निधि से व्यय का प्रावधान हो, राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा के बिना प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। इसी प्रकार अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन से संबंधित विधेयक भी राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा पर ही संसद में प्रस्तुत किया जाता है। अतः 1, 2 और 3 सभी सही हैं।

प्रश्न 80: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति के निर्वाचन में प्रत्येक निर्वाचित सांसद के मत का मूल्य समान होता है। (2) राष्ट्रपति के निर्वाचन में प्रत्येक निर्वाचित विधायक के मत का मूल्य सभी राज्यों में समान होता है। (3) राष्ट्रपति के निर्वाचन में राज्यों के बीच जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व का सिद्धांत अपनाया गया है।

  • A. केवल 1 और 3 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 55 राष्ट्रपति के निर्वाचन में राज्यों के मध्य तथा संघ और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व की समानता स्थापित करने का प्रयास करता है। प्रत्येक निर्वाचित सांसद के मत का मूल्य समान होता है। जबकि प्रत्येक राज्य के विधायक के मत का मूल्य उस राज्य की जनसंख्या तथा विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों की संख्या के आधार पर निर्धारित किया जाता है, इसलिए सभी राज्यों में यह समान नहीं होता। अतः कथन 1 और 3 सही तथा कथन 2 गलत है।

प्रश्न 81: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) लोकसभा को भंग किया जा सकता है। (2) राज्यसभा को भंग नहीं किया जा सकता। (3) राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
लोकसभा एक अस्थायी सदन है और राष्ट्रपति द्वारा भंग की जा सकती है। इसके विपरीत राज्यसभा एक स्थायी सदन है जिसे कभी भंग नहीं किया जाता। राज्यसभा की निरंतरता बनाए रखने के लिए इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं तथा प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का होता है। यह व्यवस्था संघीय ढाँचे में संस्थागत स्थिरता सुनिश्चित करती है और भारतीय संसद की द्विसदनीय प्रकृति की एक प्रमुख विशेषता है।

प्रश्न 82: संविधान संशोधन प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। (2) संविधान संशोधन विधेयक पर संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान है। (3) कुछ संशोधनों के लिए राज्यों की पुष्टि आवश्यक होती है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 368 के अनुसार संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। संविधान संशोधन विधेयक के लिए संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है; यदि किसी सदन में विधेयक पारित नहीं होता तो वह समाप्त माना जाता है। राष्ट्रपति के निर्वाचन, संघ-राज्य संबंधों तथा न्यायपालिका जैसे कुछ विषयों से संबंधित संशोधनों के लिए राज्यों की पुष्टि आवश्यक होती है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 83: धन विधेयक और वित्त विधेयक के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रत्येक धन विधेयक एक वित्त विधेयक होता है। (2) प्रत्येक वित्त विधेयक एक धन विधेयक होता है। (3) धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित होती हैं।

  • A. केवल 2
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
धन विधेयक वित्त विधेयकों की एक विशेष श्रेणी है, इसलिए प्रत्येक धन विधेयक वित्त विधेयक होता है, किंतु प्रत्येक वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होता। धन विधेयक के मामले में राज्यसभा केवल सिफारिशें कर सकती है और उसे 14 दिनों के भीतर वापस करना होता है। वित्त विधेयकों पर राज्यसभा की भूमिका अपेक्षाकृत अधिक व्यापक होती है।

प्रश्न 84: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है? (1) लोक लेखा समिति - सरकारी व्यय की लेखा परीक्षा की जांच (2) प्राक्कलन समिति - नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट की जांच (3) लोक उपक्रम समिति - सार्वजनिक उपक्रमों का परीक्षण

  • A. केवल 1 और 3 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
लोक लेखा समिति नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों तथा सरकारी व्यय की जांच करती है। लोक उपक्रम समिति सार्वजनिक उपक्रमों के कार्यकलापों का परीक्षण करती है। प्राक्कलन समिति का मुख्य कार्य भविष्य के व्ययों के अनुमान का परीक्षण करना है, न कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों की जांच करना। इसलिए युग्म 2 गलत है जबकि 1 और 3 सही हैं।

प्रश्न 85: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत को सर्वोत्तम रूप से व्यक्त करता है?

  • A. प्रत्येक मंत्री केवल अपने विभाग के लिए उत्तरदायी होता है।
  • B. मंत्रिपरिषद राज्यसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
  • C. मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति के प्रति उत्तरदायी होती है।
  • D. मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य सरकारी नीति के लिए सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं। ✓
सही उत्तर: D — मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य सरकारी नीति के लिए सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। इसका अर्थ है कि मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य सरकारी नीतियों और निर्णयों के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार हैं। यदि लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दे तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है। यह सिद्धांत संसदीय शासन प्रणाली का आधार है और कैबिनेट एकता तथा प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करता है।

प्रश्न 86: प्रधानमंत्री के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के गठन में केंद्रीय भूमिका निभाता है। (2) प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद और राष्ट्रपति के बीच प्रमुख कड़ी होता है। (3) प्रधानमंत्री की नियुक्ति लोकसभा द्वारा प्रत्यक्ष मतदान से होती है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के गठन, पुनर्गठन और कार्य संचालन का केंद्र होता है। वह राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच संवैधानिक कड़ी के रूप में कार्य करता है तथा अनुच्छेद 78 के अंतर्गत राष्ट्रपति को आवश्यक सूचनाएँ उपलब्ध कराता है। प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है; लोकसभा द्वारा प्रत्यक्ष मतदान से नहीं। यद्यपि व्यवहार में लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन का नेता प्रधानमंत्री बनता है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं।

प्रश्न 87: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। (2) उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सदस्य होता है। (3) मतों की समानता की स्थिति में उपराष्ट्रपति निर्णायक मत दे सकता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
उपराष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 64 के अंतर्गत राज्यसभा का पदेन सभापति होता है, किंतु वह राज्यसभा का सदस्य नहीं होता। वह सदन की कार्यवाही का संचालन करता है। सामान्यतः उसे मतदान का अधिकार नहीं होता, परंतु मतों की समानता की स्थिति में वह निर्णायक मत दे सकता है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 88: निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य राष्ट्रपति द्वारा अपने विवेक से नहीं, बल्कि मंत्रिपरिषद की सलाह पर किया जाता है?

  • A. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा ✓
  • B. राष्ट्रपति का त्यागपत्र देना
  • C. महाभियोग की सूचना प्राप्त करना
  • D. राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनना
सही उत्तर: A — राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर कार्य करता है। राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की उद्घोषणा राष्ट्रपति द्वारा मंत्रिमंडल की लिखित सलाह पर की जाती है। इसलिए यह कार्य राष्ट्रपति के व्यक्तिगत विवेक का नहीं बल्कि मंत्रिपरिषद की सलाह का परिणाम होता है। राष्ट्रपति का त्यागपत्र देना या राष्ट्रपति पद हेतु उम्मीदवार बनना व्यक्तिगत संवैधानिक अधिकारों से संबंधित विषय हैं। अतः सही उत्तर A है।

प्रश्न 89: राष्ट्रपति की वीटो शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति संविधान संशोधन विधेयक पर पूर्ण वीटो का प्रयोग कर सकता है। (2) राष्ट्रपति साधारण विधेयक को पुनर्विचार हेतु संसद को लौटा सकता है। (3) धन विधेयक को राष्ट्रपति पुनर्विचार हेतु वापस नहीं भेज सकता।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. केवल 1 और 3
  • D. केवल 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रपति साधारण विधेयक पर निलंबनकारी वीटो का प्रयोग करते हुए उसे पुनर्विचार हेतु संसद को लौटा सकता है। यदि संसद उसे पुनः पारित कर दे तो राष्ट्रपति को स्वीकृति देना अनिवार्य होता है। धन विधेयक को राष्ट्रपति पुनर्विचार हेतु वापस नहीं भेज सकता क्योंकि वह उसकी पूर्व अनुशंसा पर ही प्रस्तुत होता है। संविधान संशोधन विधेयक के मामले में राष्ट्रपति के पास वीटो का विकल्प नहीं है; अनुच्छेद 368 के अंतर्गत उसे स्वीकृति देना अनिवार्य है। अतः कथन 1 गलत तथा कथन 2 और 3 सही हैं।

प्रश्न 90: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) राष्ट्रपति के निर्वाचन में राज्यों की विधान परिषदों के निर्वाचित सदस्य भाग नहीं लेते। (2) राष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के मनोनीत सदस्य भाग नहीं लेते। (3) उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के मनोनीत सदस्य भाग लेते हैं।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रपति के निर्वाचन (अनुच्छेद 54) में केवल संसद के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों एवं कुछ संघ राज्य क्षेत्रों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं। विधान परिषदों के सदस्य तथा संसद के मनोनीत सदस्य इसमें भाग नहीं लेते। दूसरी ओर, उपराष्ट्रपति के निर्वाचन (अनुच्छेद 66) में संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य, अर्थात् निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य भाग लेते हैं।

प्रश्न 91: निम्नलिखित में से कौन-सा संविधान संशोधन विधेयक के संबंध में सही है?

  • A. इसे केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • B. इसे राष्ट्रपति पुनर्विचार हेतु लौटा सकता है।
  • C. इसे संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। ✓
  • D. इसे पारित करने के लिए सदैव संयुक्त बैठक आवश्यक होती है।
सही उत्तर: C — इसे संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।
व्याख्या (Explanation):
संविधान संशोधन विधेयक अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसे पारित करने के लिए सामान्यतः विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है तथा कुछ मामलों में राज्यों की पुष्टि भी आवश्यक होती है। संविधान संशोधन विधेयक के संबंध में संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही राष्ट्रपति ऐसे विधेयक को पुनर्विचार हेतु वापस नहीं भेज सकता; संसद द्वारा विधिवत पारित होने पर उसे स्वीकृति देना अनिवार्य होता है।

प्रश्न 92: लोकसभा के अध्यक्ष के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  • A. वह लोकसभा की कार्यवाही का संचालन करता है। ✓
  • B. उसका निर्वाचन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।
  • C. वह राज्यसभा का सदस्य होता है।
  • D. वह संसद के दोनों सदनों की संयुक्त अध्यक्षता स्थायी रूप से करता है।
सही उत्तर: A — वह लोकसभा की कार्यवाही का संचालन करता है।
व्याख्या (Explanation):
लोकसभा अध्यक्ष का निर्वाचन लोकसभा के सदस्यों द्वारा किया जाता है और वह सदन की कार्यवाही का संचालन करता है। अध्यक्ष सदन में व्यवस्था बनाए रखने, नियमों की व्याख्या करने तथा धन विधेयक के संबंध में अंतिम निर्णय देने जैसी महत्वपूर्ण शक्तियाँ रखता है। भारतीय संसदीय लोकतंत्र में लोकसभा अध्यक्ष का पद निष्पक्षता और संसदीय गरिमा का प्रतीक माना जाता है।

प्रश्न 93: राज्यसभा के अधिकतम सदस्यों की संख्या संविधान में कितनी निर्धारित की गई है?

  • A. 238
  • B. 250 ✓
  • C. 245
  • D. 252
सही उत्तर: B — 250
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 हो सकती है, जिनमें से 238 सदस्य राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा 12 सदस्यों को राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव के आधार पर मनोनीत करता है। वर्तमान सदस्य संख्या इससे कम है, किंतु संवैधानिक अधिकतम सीमा 250 ही है।

प्रश्न 94: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन कैबिनेट और मंत्रिपरिषद के संबंध में सही है?

  • A. दोनों पूर्णतः समान संस्थाएँ हैं।
  • B. कैबिनेट, मंत्रिपरिषद से बड़ी संस्था है।
  • C. मंत्रिपरिषद में केवल कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
  • D. कैबिनेट, मंत्रिपरिषद का आंतरिक एवं छोटा समूह है। ✓
सही उत्तर: D — कैबिनेट, मंत्रिपरिषद का आंतरिक एवं छोटा समूह है।
व्याख्या (Explanation):
मंत्रिपरिषद एक व्यापक निकाय है जिसमें कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री तथा उपमंत्री सम्मिलित हो सकते हैं। इसके विपरीत कैबिनेट मंत्रिपरिषद का एक छोटा, शक्तिशाली तथा नीति-निर्माण करने वाला आंतरिक समूह होता है। संविधान में "कैबिनेट" शब्द को 44वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 352 में विशेष रूप से शामिल किया गया।

प्रश्न 95: संविधान के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए कौन-सी संस्था होती है?

  • A. मंत्रिपरिषद ✓
  • B. संसद
  • C. वित्त आयोग
  • D. नीति आयोग
सही उत्तर: A — मंत्रिपरिषद
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्रिपरिषद होगी। 42वें तथा 44वें संविधान संशोधन के बाद यह स्पष्ट कर दिया गया कि राष्ट्रपति सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करेगा। भारतीय संसदीय लोकतंत्र में यही व्यवस्था वास्तविक कार्यपालिका और नाममात्र की कार्यपालिका के बीच संबंध को परिभाषित करती है।

प्रश्न 96: निम्नलिखित में से कौन प्रधानमंत्री की प्रमुख भूमिका मानी जाती है?

  • A. न्यायपालिका का प्रमुख होना
  • B. संसद का अध्यक्ष होना
  • C. मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करना ✓
  • D. राज्यों का प्रशासन संचालित करना
सही उत्तर: C — मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करना
व्याख्या (Explanation):
प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रमुख तथा संसदीय शासन प्रणाली का केंद्रीय स्तंभ होता है। वह मंत्रियों की नियुक्ति के संबंध में राष्ट्रपति को सलाह देता है, मंत्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है तथा सरकार की नीतियों का समन्वय करता है। प्रधानमंत्री को अक्सर "मंत्रिपरिषद की धुरी" कहा जाता है। संविधान के अनुच्छेद 74 और 75 के संदर्भ में प्रधानमंत्री की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 97: उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने का प्रस्ताव किस सदन में प्रारंभ किया जा सकता है?

  • A. लोकसभा
  • B. राज्यसभा ✓
  • C. संसद के किसी भी सदन में
  • D. राष्ट्रपति के समक्ष
सही उत्तर: B — राज्यसभा
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 67 के अनुसार उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में प्रारंभ किया जा सकता है। इस प्रस्ताव को राज्यसभा के तत्कालीन कुल सदस्यों के बहुमत से पारित किया जाना चाहिए तथा बाद में लोकसभा द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है। राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया और उपराष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण अंतर है।

प्रश्न 98: निम्नलिखित में से कौन-सी राष्ट्रपति की न्यायिक शक्ति का उदाहरण है?

  • A. संसद को संबोधित करना
  • B. अध्यादेश जारी करना
  • C. वित्त आयोग की नियुक्ति
  • D. दंडादेश को क्षमा करना ✓
सही उत्तर: D — दंडादेश को क्षमा करना
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को क्षमादान, दंड लघुकरण, दंड विराम, दंड परिहार तथा दंड रूपांतरण की शक्ति प्राप्त है। यह राष्ट्रपति की न्यायिक शक्ति कहलाती है। विशेष रूप से मृत्युदंड के मामलों में राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह शक्ति न्यायिक निर्णय को निरस्त नहीं करती, बल्कि दंड के प्रभाव को संशोधित करती है।

प्रश्न 99: यदि राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र देना चाहे, तो वह अपना त्यागपत्र किसे संबोधित करेगा?

  • A. उपराष्ट्रपति ✓
  • B. प्रधानमंत्री
  • C. लोकसभा अध्यक्ष
  • D. भारत के मुख्य न्यायाधीश
सही उत्तर: A — उपराष्ट्रपति
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 56 के अनुसार राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को संबोधित करता है। उपराष्ट्रपति उस त्यागपत्र की सूचना लोकसभा अध्यक्ष को देता है। यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान है क्योंकि राष्ट्रपति के पद की रिक्ति की स्थिति में उपराष्ट्रपति ही कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर सकता है।

प्रश्न 100: निम्नलिखित में से कौन राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति का सही वर्णन करता है?

  • A. प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा साधारण बहुमत से
  • B. प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व से
  • C. एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से ✓
  • D. निर्वाचक मंडल द्वारा साधारण बहुमत से
सही उत्तर: C — एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 55 के अनुसार राष्ट्रपति का निर्वाचन निर्वाचक मंडल द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अंतर्गत एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) तथा गुप्त मतदान के माध्यम से किया जाता है। यद्यपि संविधान इसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली कहता है, राष्ट्रपति का निर्वाचन वास्तव में एक पद के लिए होता है और विजेता को आवश्यक निर्वाचन कोटा प्राप्त करना होता है। राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं किया जाता।

प्रश्न 101: निम्नलिखित में से कौन-सा संविधान संशोधन का ऐसा प्रकार है जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ-साथ कम-से-कम आधे राज्यों की पुष्टि भी आवश्यक होती है?

  • A. राष्ट्रपति के वेतन में परिवर्तन
  • B. राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया में परिवर्तन ✓
  • C. लोकसभा के कार्य संचालन नियमों में परिवर्तन
  • D. संसद की समिति व्यवस्था में परिवर्तन
सही उत्तर: B — राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया में परिवर्तन
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 368 के अंतर्गत कुछ संवैधानिक संशोधनों के लिए संसद के विशेष बहुमत के अतिरिक्त कम-से-कम आधे राज्यों की विधानसभाओं द्वारा अनुमोदन आवश्यक होता है। इनमें राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया, संघ एवं राज्यों के बीच विधायी तथा कार्यपालिका संबंध, सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों की शक्तियाँ, सातवीं अनुसूची तथा संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व आदि विषय शामिल हैं। इस प्रकार के संशोधन संघीय ढाँचे से संबंधित होने के कारण राज्यों की सहमति आवश्यक मानी जाती है।

प्रश्न 102: धन विधेयक के संबंध में अंतिम निर्णय कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, किसका होता है?

  • A. राष्ट्रपति
  • B. प्रधानमंत्री
  • C. राज्यसभा के सभापति
  • D. लोकसभा अध्यक्ष ✓
सही उत्तर: D — लोकसभा अध्यक्ष
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 110(3) के अनुसार यदि यह उठे कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, तो लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होगा। धन विधेयक की पहचान का विशेष महत्व है क्योंकि राज्यसभा की भूमिका इस प्रकार के विधेयकों में सीमित होती है। इस प्रावधान का उद्देश्य वित्तीय मामलों में लोकसभा की प्रधानता सुनिश्चित करना है, क्योंकि लोकसभा प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित सदन है।

प्रश्न 103: निम्नलिखित में से कौन-सी संसदीय समिति स्थायी समिति की श्रेणी में आती है?

  • A. संयुक्त संसदीय समिति
  • B. प्रवर समिति
  • C. लोक लेखा समिति ✓
  • D. चयन समिति
सही उत्तर: C — लोक लेखा समिति
व्याख्या (Explanation):
लोक लेखा समिति संसद की एक महत्वपूर्ण स्थायी वित्तीय समिति है। इसका प्रमुख कार्य नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों की जांच करना तथा सार्वजनिक व्यय पर संसदीय नियंत्रण सुनिश्चित करना है। संयुक्त संसदीय समिति, चयन समिति तथा प्रवर समिति सामान्यतः तदर्थ समितियों की श्रेणी में आती हैं। संसदीय समितियाँ संसद के कार्यभार को कम करने और विस्तृत परीक्षण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्रश्न 104: राज्यसभा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  • A. यह एक स्थायी सदन है। ✓
  • B. इसे राष्ट्रपति कभी भी भंग कर सकता है।
  • C. इसका कार्यकाल लोकसभा के समान होता है।
  • D. इसके सभी सदस्य प्रत्येक पाँच वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं।
सही उत्तर: A — यह एक स्थायी सदन है।
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 83(1) के अनुसार राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसे भंग नहीं किया जाता। इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं तथा प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का होता है। यही व्यवस्था राज्यसभा को निरंतरता प्रदान करती है और इसे लोकसभा से भिन्न बनाती है।

प्रश्न 105: लोकसभा का सामान्य कार्यकाल कितना होता है?

  • A. 4 वर्ष
  • B. 6 वर्ष
  • C. 7 वर्ष
  • D. 5 वर्ष ✓
सही उत्तर: D — 5 वर्ष
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 83(2) के अनुसार लोकसभा का सामान्य कार्यकाल उसके प्रथम अधिवेशन की तिथि से पाँच वर्ष होता है। राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संसद विधि द्वारा इस अवधि को एक-एक वर्ष के लिए बढ़ा सकती है, किंतु आपातकाल समाप्त होने के बाद यह विस्तार छह माह से अधिक नहीं रह सकता। यह प्रावधान लोकतांत्रिक निरंतरता तथा प्रशासनिक स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करता है।

प्रश्न 106: भारतीय संसदीय शासन प्रणाली में वास्तविक कार्यपालिका किसे माना जाता है?

  • A. राष्ट्रपति
  • B. प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद ✓
  • C. संसद
  • D. सर्वोच्च न्यायालय
सही उत्तर: B — प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान ने संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया है जिसमें राष्ट्रपति नाममात्र की कार्यपालिका तथा प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद वास्तविक कार्यपालिका होते हैं। अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद होती है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होता है। वास्तविक प्रशासनिक एवं नीतिगत निर्णय मंत्रिपरिषद द्वारा लिए जाते हैं। यह ब्रिटिश संसदीय मॉडल की प्रमुख विशेषता है।

प्रश्न 107: निम्नलिखित में से कौन-सा पद भारतीय संविधान के अनुसार उपराष्ट्रपति के रिक्त होने पर स्वतः ग्रहण नहीं किया जाता?

  • A. राष्ट्रपति का कार्यवाहक पद
  • B. राज्यसभा के सभापति का पद
  • C. प्रधानमंत्री का पद ✓
  • D. इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: C — प्रधानमंत्री का पद
व्याख्या (Explanation):
उपराष्ट्रपति का मुख्य संवैधानिक कार्य राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य करना है। यदि राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाए या राष्ट्रपति अपने कार्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हो तो उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है। किंतु उपराष्ट्रपति का प्रधानमंत्री पद से कोई संवैधानिक संबंध नहीं है। संसदीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री का चयन लोकसभा में बहुमत के आधार पर होता है।

प्रश्न 108: निम्नलिखित में से कौन-सी वीटो शक्तियाँ भारतीय राष्ट्रपति को प्राप्त हैं?

  • A. केवल पूर्ण वीटो और निलंबनकारी वीटो
  • B. केवल जेबी वीटो
  • C. पूर्ण वीटो, निलंबनकारी वीटो तथा जेबी वीटो ✓
  • D. केवल निलंबनकारी वीटो
सही उत्तर: C — पूर्ण वीटो, निलंबनकारी वीटो तथा जेबी वीटो
व्याख्या (Explanation):
भारतीय राष्ट्रपति को पूर्ण वीटो, निलंबनकारी वीटो तथा जेबी वीटो की शक्तियाँ प्राप्त हैं। निलंबनकारी वीटो के अंतर्गत राष्ट्रपति किसी साधारण विधेयक को पुनर्विचार हेतु संसद को लौटा सकता है। यदि संसद उसे पुनः पारित कर दे तो राष्ट्रपति को स्वीकृति देनी होती है। संविधान संशोधन विधेयकों पर निलंबनकारी वीटो लागू नहीं होता। जेबी वीटो के अंतर्गत राष्ट्रपति किसी विधेयक पर अनिश्चितकाल तक निर्णय सुरक्षित रख सकता है।

प्रश्न 109: भारत के राष्ट्रपति को पद एवं गोपनीयता की शपथ कौन दिलाता है?

  • A. प्रधानमंत्री
  • B. लोकसभा अध्यक्ष
  • C. भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त
  • D. भारत के मुख्य न्यायाधीश ✓
सही उत्तर: D — भारत के मुख्य न्यायाधीश
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 60 के अनुसार राष्ट्रपति को पद एवं गोपनीयता की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं। यदि मुख्य न्यायाधीश उपलब्ध न हों तो सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम उपलब्ध न्यायाधीश यह कार्य करते हैं। शपथ में संविधान के संरक्षण, परिरक्षण और प्रतिरक्षण तथा जनता की सेवा का संकल्प शामिल होता है।

प्रश्न 110: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति के संबंध में सही है?

  • A. अध्यादेश केवल लोकसभा के सत्रावसान के समय जारी किया जा सकता है।
  • B. अध्यादेश तब जारी किया जा सकता है जब संसद का कोई भी सदन सत्र में न हो। ✓
  • C. अध्यादेश केवल राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान जारी किया जा सकता है।
  • D. अध्यादेश जारी करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति आवश्यक होती है।
सही उत्तर: B — अध्यादेश तब जारी किया जा सकता है जब संसद का कोई भी सदन सत्र में न हो।
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार राष्ट्रपति तब अध्यादेश जारी कर सकता है जब संसद का कोई भी सदन सत्र में न हो तथा ऐसी परिस्थितियाँ हों जिनमें तत्काल विधायी कार्रवाई आवश्यक हो। राष्ट्रपति यह शक्ति मंत्रिपरिषद की सलाह पर प्रयोग करता है। अध्यादेश का वही प्रभाव होता है जो संसद द्वारा पारित अधिनियम का होता है, किंतु यह अस्थायी प्रकृति का होता है। संसद के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह पश्चात यह प्रभावहीन हो जाता है, यदि उससे पूर्व संसद द्वारा इसे अधिनियम के रूप में स्वीकृत न किया जाए। अध्यादेश शक्ति कार्यपालिका को प्रदान की गई एक असाधारण विधायी शक्ति है।

प्रश्न 111: भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया मुख्यतः किस अनुच्छेद में वर्णित है?

  • A. अनुच्छेद 352
  • B. अनुच्छेद 360
  • C. अनुच्छेद 324
  • D. अनुच्छेद 368 ✓
सही उत्तर: D — अनुच्छेद 368
व्याख्या (Explanation):
संविधान संशोधन की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 368 में वर्णित है। इसके अंतर्गत कुछ संशोधन विशेष बहुमत से, जबकि कुछ संशोधन विशेष बहुमत के साथ कम-से-कम आधे राज्यों की पुष्टि से किए जाते हैं। भारतीय संविधान न तो पूर्णतः कठोर है और न ही पूर्णतः लचीला; यह दोनों का समन्वय है।

प्रश्न 112: धन विधेयक केवल किस सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है?

  • A. लोकसभा ✓
  • B. राज्यसभा
  • C. संसद के किसी भी सदन में
  • D. संयुक्त बैठक में
सही उत्तर: A — लोकसभा
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 109 तथा अनुच्छेद 110 के अनुसार धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है और इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा आवश्यक होती है। राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकार नहीं कर सकती; वह केवल सिफारिशें कर सकती है और उसे 14 दिनों के भीतर वापस करना होता है। लोकसभा अध्यक्ष का यह निर्णय कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, अंतिम माना जाता है।

प्रश्न 113: मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व की व्यवस्था किसके प्रति होती है?

  • A. राष्ट्रपति
  • B. लोकसभा ✓
  • C. राज्यसभा
  • D. संसद के दोनों सदनों
सही उत्तर: B — लोकसभा
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। यदि लोकसभा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित कर देती है तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को पद छोड़ना पड़ता है। यही सिद्धांत संसदीय शासन प्रणाली का मूल आधार है और वास्तविक लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व सुनिश्चित करता है। राज्यसभा मंत्रिपरिषद को पदच्युत नहीं कर सकती।

प्रश्न 114: भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति कौन करता है?

  • A. लोकसभा अध्यक्ष
  • B. राज्यसभा के सभापति
  • C. मंत्रिपरिषद
  • D. राष्ट्रपति ✓
सही उत्तर: D — राष्ट्रपति
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। सामान्यतः लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है। संसदीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका का प्रमुख होता है जबकि राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होता है। बहुमत स्पष्ट न होने की स्थिति में राष्ट्रपति की भूमिका अपेक्षाकृत महत्वपूर्ण हो जाती है।

प्रश्न 115: भारत के उपराष्ट्रपति पदेन किस पद का कार्य करते हैं?

  • A. लोकसभा अध्यक्ष
  • B. प्रधानमंत्री
  • C. राज्यसभा के सभापति ✓
  • D. राष्ट्रपति के प्रधान सलाहकार
सही उत्तर: C — राज्यसभा के सभापति
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 64 के अनुसार उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। वे राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करते हैं और सदन की गरिमा एवं अनुशासन बनाए रखते हैं। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सदस्य नहीं होते, इसलिए सामान्यतः मतदान नहीं करते; किंतु मतों की समानता की स्थिति में निर्णायक मत दे सकते हैं। यह भारतीय संसदीय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।

प्रश्न 116: भारत के उपराष्ट्रपति का निर्वाचन किसके द्वारा किया जाता है?

  • A. संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य ✓
  • B. केवल संसद के निर्वाचित सदस्य
  • C. केवल लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य
  • D. संसद और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
सही उत्तर: A — संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति के निर्वाचन से भिन्न, इसमें संसद के मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं। राज्यों की विधानसभाओं की इसमें कोई भूमिका नहीं होती।

प्रश्न 117: राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग की प्रक्रिया किस आधार पर प्रारंभ की जा सकती है?

  • A. संसद के प्रति उत्तरदायित्व न निभाने पर
  • B. सर्वोच्च न्यायालय की अनुशंसा पर
  • C. प्रधानमंत्री की सलाह की अवहेलना पर
  • D. संविधान के उल्लंघन पर ✓
सही उत्तर: D — संविधान के उल्लंघन पर
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 61 के अनुसार राष्ट्रपति पर केवल संविधान के उल्लंघन के आरोप में महाभियोग चलाया जा सकता है। महाभियोग संसद के किसी भी सदन द्वारा प्रारंभ किया जा सकता है। आरोप प्रस्ताव से कम से कम 14 दिन पूर्व सूचना दी जाती है तथा विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। भारतीय संविधान ने “संविधान का उल्लंघन” शब्द की कोई परिभाषा नहीं दी है, जो इसे एक महत्वपूर्ण संवैधानिक अवधारणा बनाती है।

प्रश्न 118: निम्नलिखित में से कौन-सी राष्ट्रपति की विधायी शक्ति है?

  • A. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति
  • B. संसद के सत्र को आहूत करना तथा स्थगित करना ✓
  • C. क्षमादान प्रदान करना
  • D. वित्त आयोग की नियुक्ति
सही उत्तर: B — संसद के सत्र को आहूत करना तथा स्थगित करना
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रपति की विधायी शक्तियों में संसद के सत्र को आहूत करना, सत्रावसान करना तथा लोकसभा को भंग करना शामिल है। यह शक्ति संविधान के अनुच्छेद 85 से संबंधित है। न्यायाधीशों की नियुक्ति कार्यपालिका शक्ति, क्षमादान न्यायिक शक्ति तथा वित्त आयोग की नियुक्ति प्रशासनिक/कार्यपालिका शक्ति के अंतर्गत आती है।

प्रश्न 119: भारतीय संविधान के अनुसार राष्ट्रपति का कार्यकाल कितना होता है?

  • A. 4 वर्ष
  • B. 6 वर्ष
  • C. 5 वर्ष ✓
  • D. 7 वर्ष
सही उत्तर: C — 5 वर्ष
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 56 के अनुसार राष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तिथि से पाँच वर्ष की अवधि तक पद पर बना रहता है। हालांकि कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वह तब तक पद पर बना रह सकता है जब तक उसका उत्तराधिकारी पद ग्रहण न कर ले। राष्ट्रपति पुनः निर्वाचित होने के लिए पात्र होता है और संविधान में पुनर्निर्वाचन की संख्या पर कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

प्रश्न 120: भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित निर्वाचक मंडल में निम्नलिखित में से कौन सम्मिलित होते हैं?

  • A. संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य ✓
  • B. संसद के सभी सदस्य तथा राज्यों की विधानसभाओं के सभी सदस्य
  • C. केवल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
  • D. संसद तथा राज्यों की विधानसभाओं एवं विधान परिषदों के सभी सदस्य
सही उत्तर: A — संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति का निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनों सदनों (लोकसभा एवं राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य सम्मिलित होते हैं। 70वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तथा पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भी इसमें शामिल किए गए। मनोनीत सदस्य तथा विधान परिषदों के सदस्य राष्ट्रपति निर्वाचन में भाग नहीं लेते।

प्रश्न 121: कथन (A): लोकसभा के विघटन से सभी संसदीय समितियाँ स्वतः समाप्त हो जाती हैं। कारण (R): कुछ संसदीय समितियाँ स्थायी प्रकृति की होती हैं और राज्यसभा से भी संबद्ध रहती हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
लोकसभा के विघटन से सभी संसदीय समितियाँ स्वतः समाप्त नहीं हो जातीं। कुछ समितियाँ, विशेषकर राज्यसभा से संबंधित समितियाँ तथा अनेक स्थायी समितियाँ, अपनी प्रकृति के कारण कार्य करती रहती हैं। इसलिए कथन गलत है। कारण सही है क्योंकि कुछ संसदीय समितियाँ स्थायी प्रकृति की होती हैं तथा उनका अस्तित्व केवल लोकसभा पर निर्भर नहीं होता। यही तथ्य कथन को असत्य सिद्ध करता है। ध्यान रहे कि कुछ समितियाँ (जैसे लोकसभा-आधारित कुछ तदर्थ समितियाँ) विघटन के साथ समाप्त हो सकती हैं, जबकि कई स्थायी समितियाँ पुनर्गठित होकर कार्य जारी रखती हैं।

प्रश्न 122: कथन (A): राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकार नहीं कर सकती। कारण (R): धन विधेयक का अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष द्वारा उसके धन विधेयक होने के प्रमाणन से निर्धारित होता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकार नहीं कर सकती और केवल सिफारिशें दे सकती है। इसलिए कथन सही है। लोकसभा अध्यक्ष का प्रमाणन यह निर्धारित करता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, अतः कारण भी सही है। किंतु राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकार क्यों नहीं कर सकती, इसका वास्तविक कारण उसकी सीमित संवैधानिक भूमिका है, न कि केवल अध्यक्ष का प्रमाणन। इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता।

प्रश्न 123: कथन (A): अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को पद छोड़ना पड़ता है। कारण (R): प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रमुख होता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है क्योंकि मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। अतः कथन सही है। प्रधानमंत्री वास्तव में मंत्रिपरिषद का प्रमुख होता है, इसलिए कारण भी सही है। किंतु मंत्रिपरिषद के इस्तीफे का कारण प्रधानमंत्री का प्रमुख होना नहीं, बल्कि सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत है। इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता।

प्रश्न 124: कथन (A): वित्त विधेयक (श्रेणी-I) और धन विधेयक में कुछ समानताएँ होने के बावजूद उनकी संवैधानिक स्थिति समान नहीं होती। कारण (R): वित्त विधेयक (श्रेणी-I) को केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
वित्त विधेयक (श्रेणी-I) और धन विधेयक दोनों केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किए जा सकते हैं तथा दोनों के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा आवश्यक होती है। इसलिए कारण सही है। किंतु दोनों की संवैधानिक स्थिति में अंतर का मुख्य कारण यह है कि वित्त विधेयक (श्रेणी-I) में धन विधेयक से अतिरिक्त विषय भी शामिल हो सकते हैं और उस पर राज्यसभा की शक्तियाँ धन विधेयक की तुलना में अधिक होती हैं। अतः कारण सही है, लेकिन कथन की सही व्याख्या नहीं करता।

प्रश्न 125: कथन (A): संसदीय समितियाँ संसद का विकल्प हैं। कारण (R): समितियाँ संसद की ओर से विस्तृत परीक्षण और जांच का कार्य करती हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
संसदीय समितियाँ संसद का विकल्प नहीं बल्कि उसकी सहायक संस्थाएँ हैं। वे संसद की ओर से विस्तृत परीक्षण, जांच और समीक्षा का कार्य करती हैं। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है। संसदीय नियंत्रण को प्रभावी बनाने में समितियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 126: कथन (A): धन विधेयक के संबंध में लोकसभा अध्यक्ष का प्रमाणन न्यायिक समीक्षा से पूर्णतः परे है। कारण (R): संविधान अध्यक्ष के निर्णय को अंतिम घोषित करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 110(3) के अनुसार किसी विधेयक के धन विधेयक होने या न होने के संबंध में लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम माना जाता है, इसलिए कारण सही है। किन्तु सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष रूप से दक्षिण भारतीय बैंक बनाम रोजर मैथ्यू तथा आधार प्रकरण (के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ) में यह संकेत दिया है कि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा किया गया धन विधेयक का प्रमाणन पूर्णतः न्यायिक समीक्षा से परे नहीं है और असाधारण परिस्थितियों में इसकी सीमित न्यायिक समीक्षा संभव हो सकती है। अतः कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 127: कथन (A): लोकसभा और राज्यसभा दोनों को संविधान संशोधन विधेयकों के संबंध में समान शक्तियाँ प्राप्त हैं। कारण (R): संविधान संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों को पृथक-पृथक आवश्यक विशेष बहुमत से विधेयक पारित करना होता है तथा संयुक्त अधिवेशन का कोई प्रावधान नहीं है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा दोनों द्वारा पृथक-पृथक आवश्यक विशेष बहुमत से पारित किया जाना अनिवार्य है। किसी मतभेद की स्थिति में संयुक्त अधिवेशन का प्रावधान नहीं है। इससे दोनों सदनों की समान संवैधानिक स्थिति स्पष्ट होती है। अतः कारण कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 128: कथन (A): संविधान संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति जेबी वीटो का प्रयोग कर सकता है। कारण (R): संविधान संशोधन विधेयक पारित होने के बाद राष्ट्रपति को अनिवार्य रूप से स्वीकृति देनी होती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संसद द्वारा विधिवत पारित संविधान संशोधन विधेयक राष्ट्रपति को प्रस्तुत किए जाने पर राष्ट्रपति स्वीकृति देने के लिए बाध्य होता है। इसलिए वह न तो निलंबनकारी वीटो और न ही जेबी वीटो का प्रयोग कर सकता है। कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 129: कथन (A): राज्यसभा धन विधेयक को अधिकतम 14 दिनों तक ही अपने पास रख सकती है। कारण (R): धन विधेयक पर राज्यसभा की भूमिका केवल सिफारिशें देने तक सीमित है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 109 के अनुसार राज्यसभा धन विधेयक को अधिकतम 14 दिनों तक ही रोक सकती है। इसके बाद विधेयक लोकसभा द्वारा पारित माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि धन विधेयक पर राज्यसभा की भूमिका केवल सिफारिशात्मक है और उसके संशोधन लोकसभा पर बाध्यकारी नहीं होते। इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 130: कथन (A): मंत्रिपरिषद का कोई मंत्री सार्वजनिक रूप से मंत्रिमंडल के निर्णय का विरोध कर सकता है और फिर भी सामूहिक उत्तरदायित्व अक्षुण्ण रह सकता है। कारण (R): सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत मंत्रिमंडलीय एकता पर आधारित है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
सामूहिक उत्तरदायित्व का अर्थ है कि सभी मंत्री सार्वजनिक रूप से मंत्रिमंडल के निर्णयों का समर्थन करेंगे। यदि कोई मंत्री सार्वजनिक विरोध करता है तो सामान्यतः उसे त्यागपत्र देना पड़ता है। अतः कथन गलत है। कारण सही है क्योंकि यह सिद्धांत मंत्रिमंडलीय एकता और राजनीतिक सामंजस्य पर आधारित है।

प्रश्न 131: कथन (A): त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति में विवेकाधिकार का सीमित प्रयोग कर सकता है। कारण (R): ऐसी स्थिति में यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि नियुक्त व्यक्ति सदन का विश्वास प्राप्त कर सके।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
सामान्य परिस्थितियों में राष्ट्रपति बहुमत दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है, किंतु त्रिशंकु लोकसभा में राष्ट्रपति को यह निर्धारित करना पड़ सकता है कि कौन व्यक्ति बहुमत सिद्ध करने की सर्वाधिक संभावना रखता है। इसीलिए सीमित विवेकाधिकार का प्रयोग किया जाता है। कारण इसी संवैधानिक आवश्यकता की व्याख्या करता है।

प्रश्न 132: कथन (A): उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में राज्यों की विधानसभाएँ भाग लेती हैं। कारण (R): उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा किया जाता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन केवल संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा किया जाता है। राज्यों की विधानसभाओं की इसमें कोई भूमिका नहीं होती। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में यही सबसे महत्वपूर्ण अंतर है। विकल्प D सही है।

प्रश्न 133: कथन (A): राष्ट्रपति के महाभियोग प्रस्ताव को पारित करने के लिए दोनों सदनों में कुल सदस्य संख्या के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। कारण (R): राष्ट्रपति का महाभियोग संविधान के उल्लंघन के आरोप पर चलायी जाने वाली एक विशेष संवैधानिक प्रक्रिया है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 61 के अनुसार राष्ट्रपति के महाभियोग प्रस्ताव को जिस सदन में विचारार्थ लिया जाता है, वहाँ उसे उस सदन की कुल सदस्य संख्या के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाना आवश्यक है। अतः कथन सही है। कारण भी सही है क्योंकि राष्ट्रपति का महाभियोग संविधान के उल्लंघन के आरोप पर चलायी जाने वाली एक विशेष संवैधानिक प्रक्रिया है। किन्तु राष्ट्रपति के महाभियोग में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता का प्रत्यक्ष कारण यह नहीं है कि वह केवल एक विशेष संवैधानिक प्रक्रिया है, बल्कि संविधान ने राष्ट्रपति पद की गरिमा एवं स्थिरता बनाए रखने हेतु यह विशेष बहुमत निर्धारित किया है। अतः कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता।

प्रश्न 134: कथन (A): राष्ट्रपति की वीटो शक्तियों में पूर्ण वीटो, निलंबनकारी वीटो और जेबी वीटो सम्मिलित मानी जाती हैं। कारण (R): संविधान में इन तीनों वीटो शक्तियों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संवैधानिक व्यवहार में राष्ट्रपति की पूर्ण वीटो, निलंबनकारी वीटो और जेबी वीटो शक्तियों को मान्यता दी जाती है, अतः कथन सही है। किंतु संविधान में इन वीटो शक्तियों का नामोल्लेख नहीं किया गया है; ये संसदीय परंपराओं, संवैधानिक व्याख्या और व्यवहार से विकसित अवधारणाएँ हैं। इसलिए कारण गलत है।

प्रश्न 135: कथन (A): राष्ट्रपति के निर्वाचन में मतों के मूल्य निर्धारण की व्यवस्था का उद्देश्य राज्यों के बीच तथा राज्यों और संघ के बीच प्रतिनिधित्व में संतुलन स्थापित करना है। कारण (R): राष्ट्रपति का निर्वाचन प्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति से होता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 55 राष्ट्रपति निर्वाचन में राज्यों के बीच तथा संघ और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व की समरूपता सुनिश्चित करने का प्रयास करता है, इसलिए कथन सही है। किंतु राष्ट्रपति का निर्वाचन प्रत्यक्ष नहीं बल्कि निर्वाचक मंडल द्वारा अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति से होता है। अतः कारण गलत है।

प्रश्न 136: कथन (A): धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा की सिफारिशों को लोकसभा स्वीकार करने के लिए बाध्य है। कारण (R): धन विधेयक पर अंतिम निर्णय लेने की शक्ति लोकसभा के पास होती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
राज्यसभा धन विधेयक पर केवल सिफारिशें दे सकती है और लोकसभा उन्हें स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं होती। अंतिम निर्णय लोकसभा का होता है। अतः कथन गलत तथा कारण सही है। अनुच्छेद 109 धन विधेयक की इस विशेष प्रक्रिया को निर्धारित करता है।

प्रश्न 137: कथन (A): राष्ट्रपति अध्यादेश जारी करते समय संसद के दोनों सदनों की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करता है। कारण (R): अध्यादेश जारी करने की शक्ति संसद के अवकाशकाल में प्रयोग की जाती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 123 के अंतर्गत अध्यादेश जारी करने के लिए संसद की पूर्व स्वीकृति आवश्यक नहीं होती। यह शक्ति संसद के अवकाशकाल में प्रयोग की जाती है जब तत्काल विधायी कार्रवाई आवश्यक हो। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 138: कथन (A): अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में लाया जा सकता है। कारण (R): मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 75(3) मंत्रिपरिषद को लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी बनाता है। इसी कारण अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में लाया जा सकता है। यदि सरकार लोकसभा का विश्वास खो देती है तो उसे त्यागपत्र देना पड़ता है। कारण कथन की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है।

प्रश्न 139: कथन (A): विभाग-संबंधित स्थायी समितियाँ संसद की स्थायी समिति प्रणाली का हिस्सा हैं। कारण (R): इन समितियों का उद्देश्य मंत्रालयों की कार्यप्रणाली और अनुदान मांगों का परीक्षण करना है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
विभाग-संबंधित स्थायी समितियाँ संसदीय समिति प्रणाली का महत्त्वपूर्ण भाग हैं। ये मंत्रालयों की नीतियों, अनुदान मांगों और कार्यप्रणाली की विस्तृत जांच करती हैं। यही उनका प्रमुख उद्देश्य है, इसलिए कारण कथन की उचित व्याख्या करता है। संसदीय उत्तरदायित्व को मजबूत करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

प्रश्न 140: कथन (A): राज्यसभा को संविधान संशोधन विधेयक के मामले में लोकसभा से कम शक्ति प्राप्त है। कारण (R): संविधान संशोधन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A और R दोनों गलत हैं ✓
सही उत्तर: D — A और R दोनों गलत हैं
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा या राज्यसभा किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। संविधान संशोधन के मामले में दोनों सदनों की शक्तियाँ समान हैं तथा दोनों को आवश्यक विशेष बहुमत से विधेयक पारित करना होता है। इसलिए कथन (A) गलत है। कारण (R) भी गलत है। अतः दोनों कथन गलत हैं।

प्रश्न 141: कथन (A): सभी वित्त विधेयकों के लिए लोकसभा अध्यक्ष का धन विधेयक प्रमाणन आवश्यक होता है। कारण (R): केवल धन विधेयकों के लिए अध्यक्ष का प्रमाणन संवैधानिक रूप से आवश्यक है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
सभी वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होते। अध्यक्ष का विशेष प्रमाणन केवल धन विधेयकों के लिए आवश्यक है। अतः कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 142: कथन (A): लोकसभा अध्यक्ष का पद दलगत राजनीति से ऊपर माना जाता है। कारण (R): अध्यक्ष का दायित्व सदन की कार्यवाही को निष्पक्ष रूप से संचालित करना है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
संसदीय परंपरा के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष से निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है। सदन की कार्यवाही का संतुलित संचालन उसका प्रमुख दायित्व है। इसी कारण अध्यक्ष का पद दलगत राजनीति से ऊपर माना जाता है। कारण कथन की उचित व्याख्या करता है।

प्रश्न 143: कथन (A): संविधान संशोधन विधेयक को संसद के संयुक्त अधिवेशन में पारित किया जा सकता है। कारण (R): संविधान संशोधन विधेयक के लिए संयुक्त अधिवेशन का कोई प्रावधान नहीं है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन विधेयक के लिए संयुक्त अधिवेशन का प्रावधान नहीं है। दोनों सदनों को इसे पृथक-पृथक आवश्यक बहुमत से पारित करना होता है। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है। यह सामान्य विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक के बीच महत्वपूर्ण अंतर है।

प्रश्न 144: कथन (A): राज्यसभा वित्तीय मामलों में लोकसभा के समान शक्तियाँ रखती है। कारण (R): धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
वित्तीय मामलों में राज्यसभा की शक्तियाँ लोकसभा से कम हैं। धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है और राज्यसभा केवल सिफारिशें दे सकती है। अतः कथन गलत है तथा कारण सही है।

प्रश्न 145: कथन (A): मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल समान संवैधानिक अभिव्यक्तियाँ हैं। कारण (R): संविधान में मूल रूप से ‘मंत्रिमंडल’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल समान नहीं हैं। मंत्रिमंडल मंत्रिपरिषद का आंतरिक एवं छोटा निर्णयकारी समूह है। कारण सही है क्योंकि मूल संविधान में ‘मंत्रिमंडल’ शब्द नहीं था; इसे 44वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 352 में सम्मिलित किया गया। अतः कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 146: कथन (A): लोकसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त दल का नेता सामान्यतः प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है। कारण (R): संसदीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री को लोकसभा का विश्वास प्राप्त होना आवश्यक है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संसदीय प्रणाली में राष्ट्रपति सामान्यतः उस व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है जो लोकसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त कर सके। लोकसभा का विश्वास बनाए रखना सरकार के अस्तित्व की संवैधानिक शर्त है। इसलिए कारण कथन की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है। अनुच्छेद 75 की भावना इसी सिद्धांत पर आधारित है।

प्रश्न 147: कथन (A): उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में प्रारंभ किया जाता है। कारण (R): उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है, इसलिए उसे हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा में प्रारंभ होता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 67 के अनुसार उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा में प्रारंभ होता है तथा बाद में लोकसभा द्वारा अनुमोदित किया जाता है। इसलिए कथन गलत है। कारण सही है क्योंकि राज्यसभा के सभापति होने के कारण हटाने की प्रक्रिया उसी सदन से प्रारंभ होती है।

प्रश्न 148: कथन (A): राष्ट्रपति के निर्वाचन में मनोनीत सांसद मतदान कर सकते हैं। कारण (R): राष्ट्रपति राष्ट्र का संवैधानिक प्रमुख है, इसलिए संसद के सभी सदस्य निर्वाचन में भाग लेते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A और R दोनों गलत हैं ✓
सही उत्तर: D — A और R दोनों गलत हैं
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति के निर्वाचन में केवल संसद के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों (दिल्ली एवं पुडुचेरी) की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं। संसद के मनोनीत सदस्य मतदान नहीं करते। इसलिए कथन (A) गलत है। कारण (R) भी गलत है क्योंकि राष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के सभी सदस्य भाग नहीं लेते। अतः दोनों कथन गलत हैं।

प्रश्न 149: कथन (A): राष्ट्रपति द्वारा लौटाए गए साधारण विधेयक को यदि संसद पुनः पारित कर दे, तो राष्ट्रपति उस पर पुनः निलंबनकारी वीटो का प्रयोग कर सकता है। कारण (R): पुनर्विचार के बाद पुनः पारित विधेयक पर राष्ट्रपति को स्वीकृति देना अनिवार्य होता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रपति किसी साधारण विधेयक को केवल एक बार पुनर्विचार हेतु वापस भेज सकता है। यदि संसद उसे पुनः पारित कर देती है, तो राष्ट्रपति को स्वीकृति देनी होती है। इसलिए कथन गलत है जबकि कारण सही है। यह निलंबनकारी वीटो की संवैधानिक सीमा को दर्शाता है।

प्रश्न 150: कथन (A): यदि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों के पद रिक्त हो जाएँ, तो भारत के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन कर सकते हैं। कारण (R): संविधान एवं राष्ट्रपति (कार्य निर्वहन) संबंधी व्यवस्थाएँ यह सुनिश्चित करती हैं कि राष्ट्रपति पद कभी रिक्तावस्था के कारण निष्क्रिय न हो।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 65 तथा राष्ट्रपति (कार्य निर्वहन) संबंधी वैधानिक प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों के पद रिक्त होने या कार्य करने में असमर्थ होने की स्थिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन कर सकते हैं। यह व्यवस्था शासन की निरंतरता बनाए रखने हेतु की गई है। अतः कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की उचित व्याख्या करता है।

प्रश्न 151: कथन (A): संविधान संशोधन की प्रत्येक विधि में राज्यों की स्वीकृति आवश्यक होती है। कारण (R): कुछ संविधान संशोधन केवल संसद के विशेष बहुमत से भी किए जा सकते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
संविधान के सभी संशोधनों के लिए राज्यों की स्वीकृति आवश्यक नहीं होती। अनुच्छेद 368 के अंतर्गत अनेक संशोधन केवल संसद के विशेष बहुमत से किए जा सकते हैं, जबकि कुछ मामलों में कम-से-कम आधे राज्यों की पुष्टि आवश्यक होती है। इसलिए कथन गलत और कारण सही है।

प्रश्न 152: कथन (A): संसदीय समितियों की सभी रिपोर्टें सरकार पर विधिक रूप से बाध्यकारी होती हैं। कारण (R): संसदीय समितियाँ संसद की सहायता हेतु गठित निकाय हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
संसदीय समितियों की रिपोर्टें अत्यंत प्रभावशाली होती हैं, परंतु वे सामान्यतः विधिक रूप से बाध्यकारी नहीं होतीं। इसलिए कथन गलत है। कारण सही है क्योंकि समितियाँ संसद को विशेषज्ञ सहायता प्रदान करती हैं। उनकी भूमिका जांच, परीक्षण और अनुशंसा करना है।

प्रश्न 153: कथन (A): कैबिनेट मंत्रिपरिषद का आंतरिक एवं शक्तिशाली भाग होती है। कारण (R): प्रमुख नीतिगत निर्णय सामान्यतः कैबिनेट स्तर पर लिए जाते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कैबिनेट मंत्रिपरिषद का मुख्य निर्णयकारी निकाय है। शासन, नीति-निर्माण और प्रशासनिक दिशा से जुड़े प्रमुख निर्णय सामान्यतः कैबिनेट द्वारा लिए जाते हैं। इसी कारण कैबिनेट को मंत्रिपरिषद का शक्तिशाली एवं आंतरिक भाग कहा जाता है। कारण कथन की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है।

प्रश्न 154: कथन (A): लोकसभा अध्यक्ष को धन विधेयक के संबंध में कोई विशेष भूमिका प्राप्त नहीं है। कारण (R): धन विधेयक का प्रमाणन लोकसभा अध्यक्ष द्वारा किया जाता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
धन विधेयक के संदर्भ में लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वही प्रमाणित करता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है। अध्यक्ष का निर्णय अंतिम माना जाता है।

प्रश्न 155: कथन (A): प्रधानमंत्री का लोकसभा का सदस्य होना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है। कारण (R): प्रधानमंत्री संसद के किसी भी सदन का सदस्य हो सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
संविधान प्रधानमंत्री के लिए लोकसभा सदस्य होना अनिवार्य नहीं बनाता। प्रधानमंत्री लोकसभा या राज्यसभा किसी भी सदन का सदस्य हो सकता है। इसलिए कथन गलत है और कारण सही है। भारतीय राजनीति में ऐसे कई प्रधानमंत्री रहे हैं जो राज्यसभा के सदस्य रहे।

प्रश्न 156: कथन (A): वित्त विधेयक और धन विधेयक समान संवैधानिक श्रेणी के विधेयक हैं। कारण (R): प्रत्येक धन विधेयक वित्त विधेयक होता है, लेकिन प्रत्येक वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होता।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
धन विधेयक और वित्त विधेयक अलग-अलग संवैधानिक श्रेणियाँ हैं। धन विधेयक अनुच्छेद 110 के अंतर्गत आता है जबकि वित्त विधेयक का दायरा व्यापक है। कारण सही है क्योंकि प्रत्येक धन विधेयक वित्त विधेयक होता है, किंतु प्रत्येक वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होता। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 157: कथन (A): राज्यसभा एक स्थायी सदन है। कारण (R): राज्यसभा कभी भंग नहीं होती तथा इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष बाद सेवानिवृत्त होते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 83 के अनुसार राज्यसभा एक स्थायी सदन है जिसे भंग नहीं किया जा सकता। इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष बाद सेवानिवृत्त होते हैं और नए सदस्य चुने जाते हैं। यही कारण इसे स्थायी सदन बनाता है। इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 158: कथन (A): संविधान संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति पुनर्विचार हेतु संसद को वापस भेज सकता है। कारण (R): संविधान संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति को स्वीकृति देना अनिवार्य होता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संसद द्वारा विधिवत पारित संविधान संशोधन विधेयक राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत होने पर राष्ट्रपति उसे वापस नहीं भेज सकता। उसे स्वीकृति देना अनिवार्य है। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है। यह साधारण विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक के बीच महत्वपूर्ण अंतर है।

प्रश्न 159: कथन (A): राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकार कर सकती है। कारण (R): राज्यसभा धन विधेयक पर केवल सिफारिशें दे सकती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
धन विधेयक के मामले में राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित हैं। वह न तो धन विधेयक को अस्वीकार कर सकती है और न ही उसमें संशोधन करने के लिए लोकसभा को बाध्य कर सकती है। वह केवल सिफारिशें दे सकती है। इसलिए कथन गलत और कारण सही है। अनुच्छेद 109 एवं 110 इस व्यवस्था का आधार हैं।

प्रश्न 160: कथन (A): सामूहिक उत्तरदायित्व का अर्थ है कि मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य प्रत्येक सरकारी निर्णय के लिए संयुक्त रूप से उत्तरदायी होते हैं। कारण (R): कोई मंत्री मंत्रिपरिषद के निर्णय से सार्वजनिक रूप से असहमत होकर भी मंत्री पद पर बना रह सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। इसका अर्थ है कि सभी मंत्री मंत्रिपरिषद के निर्णयों और सरकारी नीतियों के लिए संयुक्त रूप से उत्तरदायी होते हैं तथा सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन करते हैं। यदि कोई मंत्री मंत्रिपरिषद के निर्णय से सार्वजनिक रूप से असहमति व्यक्त करता है, तो संसदीय परंपरा के अनुसार उसे त्यागपत्र देना पड़ता है या पद से हटाया जा सकता है। इसलिए कथन सही है, जबकि कारण गलत है।

प्रश्न 161: कथन (A): प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के गठन में केंद्रीय भूमिका निभाता है। कारण (R): राष्ट्रपति सामान्यतः उन्हीं व्यक्तियों को मंत्री नियुक्त करता है जिनकी सिफारिश प्रधानमंत्री करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
संसदीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का निर्माता माना जाता है। अनुच्छेद 75 के अंतर्गत राष्ट्रपति मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है। इसलिए मंत्रिपरिषद की संरचना, आकार तथा विभागों के वितरण में प्रधानमंत्री की केंद्रीय भूमिका होती है। कारण सीधे कथन की व्याख्या करता है।

प्रश्न 162: कथन (A): उपराष्ट्रपति का निर्वाचन केवल लोकसभा द्वारा किया जाता है। कारण (R): उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा किया जाता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा किया जाता है। इसमें निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य भाग लेते हैं। अतः कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 163: कथन (A): राष्ट्रपति के महाभियोग का आधार संविधान का उल्लंघन है। कारण (R): संविधान ने ‘संविधान के उल्लंघन’ की स्पष्ट परिभाषा प्रदान की है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 61 के अनुसार राष्ट्रपति को केवल संविधान के उल्लंघन के आधार पर महाभियोग द्वारा पद से हटाया जा सकता है। अतः कथन सही है। परंतु संविधान ने ‘संविधान के उल्लंघन’ की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी है। इस कारण इसका निर्धारण राजनीतिक एवं संसदीय प्रक्रिया पर निर्भर करता है। इसलिए कारण गलत है और विकल्प C सही है।

प्रश्न 164: कथन (A): राष्ट्रपति जेबी वीटो का प्रयोग कर सकता है। कारण (R): संविधान राष्ट्रपति के लिए किसी साधारण विधेयक पर निर्णय लेने की समय-सीमा निर्धारित नहीं करता।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान में जेबी वीटो का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, किंतु व्यवहार में राष्ट्रपति किसी साधारण विधेयक पर अनिश्चितकाल तक निर्णय लंबित रख सकता है। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि संविधान राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृति, अस्वीकृति अथवा पुनर्विचार हेतु वापसी के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं करता। इसी समय-सीमा के अभाव के कारण जेबी वीटो की अवधारणा अस्तित्व में आती है। अतः कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है। इसलिए विकल्प A सही है।

प्रश्न 165: कथन (A): राष्ट्रपति के निर्वाचन में प्रत्येक राज्य की विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों के मतों का मूल्य समान नहीं होता। कारण (R): राष्ट्रपति के निर्वाचन में मतों का मूल्य संबंधित राज्य की जनसंख्या तथा निर्वाचित विधायकों की संख्या के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 55 राष्ट्रपति के निर्वाचन में राज्यों के बीच तथा राज्यों और संघ के बीच प्रतिनिधित्व की समरूपता सुनिश्चित करने का प्रयास करता है। इसी कारण प्रत्येक विधायक के मत का मूल्य राज्य की जनसंख्या और निर्वाचित विधायकों की संख्या के आधार पर निर्धारित किया जाता है। फलस्वरूप विभिन्न राज्यों के विधायकों के मतों का मूल्य अलग-अलग हो सकता है। कारण सीधे कथन की व्याख्या करता है, अतः विकल्प A सही है।

प्रश्न 166: कथन (A): संसदीय समितियाँ संसद के कार्यभार को कम करने और विधायी परीक्षण को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता करती हैं। कारण (R): संसदीय समितियाँ सदन के बाहर अपेक्षाकृत विस्तृत एवं तकनीकी परीक्षण कर सकती हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
संसदीय समितियाँ विधेयकों, बजट प्रस्तावों तथा प्रशासनिक कार्यों की विस्तृत जांच-पड़ताल करती हैं। इससे संसद के समक्ष आने वाले कार्यभार का विभाजन होता है तथा विधायी परीक्षण अधिक गहन और प्रभावी बनता है। अतः कथन (A) सही है। कारण (R) भी सही है क्योंकि समितियाँ सदन की औपचारिक कार्यवाही से बाहर अपेक्षाकृत कम राजनीतिक वातावरण में विशेषज्ञों की सहायता से तकनीकी एवं विस्तृत परीक्षण कर सकती हैं। यही विशेषता उन्हें संसद के कार्यभार को कम करने तथा विधायी परीक्षण को अधिक प्रभावी बनाने में सक्षम बनाती है।

प्रश्न 167: कथन (A): लोकसभा अध्यक्ष यह निर्णय करता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं। कारण (R): धन विधेयक के संबंध में लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम माना जाता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 110 के अनुसार किसी विधेयक को धन विधेयक घोषित करने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष को प्राप्त है। साथ ही अध्यक्ष का प्रमाणन अंतिम माना जाता है। यही संवैधानिक स्थिति कथन को आधार प्रदान करती है, इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या है।

प्रश्न 168: कथन (A): संविधान संशोधन विधेयक पर संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक आयोजित की जा सकती है। कारण (R): संविधान संशोधन विधेयक के लिए दोनों सदनों द्वारा पृथक-पृथक विशेष बहुमत से पारित किया जाना आवश्यक है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए कथन गलत है। कारण सही है क्योंकि संविधान संशोधन विधेयक को दोनों सदनों द्वारा पृथक-पृथक आवश्यक विशेष बहुमत से पारित किया जाना अनिवार्य है। यदि किसी सदन में विधेयक अस्वीकृत हो जाए तो संयुक्त बैठक नहीं बुलाई जा सकती। अतः विकल्प D सही है।

प्रश्न 169: कथन (A): धन विधेयक राज्यसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है। कारण (R): धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 109 तथा अनुच्छेद 110 के अनुसार धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसलिए कथन गलत है। कारण सही है। धन विधेयक पर राज्यसभा केवल सिफारिशें दे सकती है तथा उसे 14 दिनों के भीतर वापस करना होता है। लोकसभा अध्यक्ष का प्रमाणन निर्णायक होता है। अतः विकल्प D सही है।

प्रश्न 170: कथन (A): मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। कारण (R): मंत्रिपरिषद का प्रत्येक मंत्री संसद के किसी भी सदन का सदस्य हो सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। कथन सही है। कारण भी सही है क्योंकि मंत्री लोकसभा या राज्यसभा किसी भी सदन का सदस्य हो सकता है। किंतु यह तथ्य सामूहिक उत्तरदायित्व का कारण नहीं है। सामूहिक उत्तरदायित्व का आधार संसदीय शासन प्रणाली है, न कि मंत्री की सदन सदस्यता। इसलिए विकल्प B सही है।

प्रश्न 171: कथन (A): प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का वास्तविक प्रमुख होता है। कारण (R): राष्ट्रपति सामान्यतः प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संसदीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका का प्रमुख होता है। अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है। यही व्यवस्था प्रधानमंत्री को शासन का वास्तविक केंद्र बनाती है। इसलिए कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की व्याख्या करता है। 42वें एवं 44वें संविधान संशोधन ने इस सिद्धांत को और स्पष्ट किया। विकल्प A सही है।

प्रश्न 172: कथन (A): उपराष्ट्रपति राज्यसभा का निर्वाचित सदस्य होता है। कारण (R): उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुसार उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सदस्य नहीं होता, बल्कि उसका पदेन सभापति होता है। इसलिए कथन गलत है। कारण सही है क्योंकि अनुच्छेद 64 उपराष्ट्रपति को राज्यसभा का पदेन सभापति घोषित करता है।

प्रश्न 173: कथन (A): राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन में प्रारंभ की जा सकती है। कारण (R): महाभियोग प्रस्ताव को प्रारंभ करने के लिए राज्य विधानसभाओं की स्वीकृति आवश्यक होती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 61 के अनुसार राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग की प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन में आरंभ की जा सकती है। अतः कथन सही है। किंतु इस प्रक्रिया में राज्य विधानसभाओं की कोई भूमिका नहीं है; यह पूर्णतः संसद की प्रक्रिया है। इसलिए कारण गलत है। महाभियोग प्रस्ताव के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है और दोनों सदनों की भागीदारी अनिवार्य है। इस प्रकार विकल्प C सही है।

प्रश्न 174: कथन (A): राष्ट्रपति को संसद द्वारा पारित साधारण विधेयक पर निलंबनकारी वीटो का प्रयोग करने का अधिकार प्राप्त है। कारण (R): राष्ट्रपति धन विधेयक को पुनर्विचार हेतु संसद को वापस भेज सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रपति साधारण विधेयक को पुनर्विचार हेतु संसद को वापस भेज सकता है। इसे निलंबनकारी वीटो कहा जाता है। अतः कथन (A) सही है। किन्तु राष्ट्रपति धन विधेयक को पुनर्विचार हेतु वापस नहीं भेज सकता। धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है और संसद द्वारा पारित होने के बाद राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, जहाँ उसे वापस भेजने का विकल्प उपलब्ध नहीं होता। अतः कारण (R) गलत है।

प्रश्न 175: कथन (A): राष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं। कारण (R): राष्ट्रपति का निर्वाचन संघीय स्वरूप के अनुरूप संघ और राज्यों दोनों को प्रतिनिधित्व प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति का निर्वाचन निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तथा पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य सम्मिलित होते हैं। कथन सही है। कारण भी सही है क्योंकि संविधान निर्माताओं ने राष्ट्रपति को संघ का प्रमुख मानते हुए उसके निर्वाचन में संघ और राज्यों दोनों की भागीदारी सुनिश्चित की ताकि भारतीय संघवाद की भावना प्रतिबिंबित हो। यही कारण कथन की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है, इसलिए विकल्प A सही है। उन्मूलन तकनीक के रूप में यदि प्रश्न में राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति संघ और राज्यों दोनों की भागीदारी सुनिश्चित करती है, जिससे भारतीय संघवाद की भावना प्रतिबिंबित होती है।

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