UPSC Prelims की तैयारी के लिए Statutory Bodies MCQ in Hindi में solve करें। वैधानिक संस्थाएँ के Important MCQ, PYQ, Objective Questions, Practice MCQ और Exam-Oriented Questions के साथ तेज़ Revision करें। Hindi Medium Aspirants के लिए उपयोगी।

This quiz contains 60 carefully selected multiple-choice questions (MCQ) with detailed explanations for each answer. Questions cover important topics from Polity.

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Statutory Bodies MCQ in Hindi | वैधानिक संस्थाएँ Important MCQ, PYQ & UPSC Prelims Questions

UPSC Prelims की तैयारी के लिए Statutory Bodies MCQ in Hindi में solve करें। वैधानिक संस्थाएँ के Important MCQ, PYQ, Objective Questions, Practice MCQ और Exam-Oriented Questions के साथ तेज़ Revision करें। Hindi Medium Aspirants के लिए उपयोगी।

📊
Difficulty
Hard
❓
Num Questions
60
❓
Points Per Question
1
⏱️
Time Limit
60 minutes

All MCQ Questions with Answers and Explanations

प्रश्न 1: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) भारत में वैधानिक निकायों की स्थापना संबंधित विधायिका द्वारा पारित अधिनियम के माध्यम से की जाती है। (2) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग, केंद्रीय सतर्कता आयोग तथा लोकपाल सभी वैधानिक निकाय हैं। (3) इन निकायों की स्थापना का उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व तथा सुशासन को सुदृढ़ करना है। (4) इन सभी निकायों को न्यायालय के समान पूर्ण दंडात्मक शक्तियाँ प्राप्त हैं।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 2 और 4
सही उत्तर: C — केवल 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
कथन 1 सही है क्योंकि वैधानिक निकायों की स्थापना संबंधित विधायिका (संसद या राज्य विधानमंडल) द्वारा पारित अधिनियम से होती है। कथन 2 और 3 भी सही हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि इन निकायों को न्यायालय के समान पूर्ण दंडात्मक शक्तियाँ प्राप्त नहीं हैं।

प्रश्न 2: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) लोकपाल प्रधानमंत्री के विरुद्ध भ्रष्टाचार मामलों की जांच कर सकता है। (2) केंद्रीय सतर्कता आयोग लोकपाल के अधीन कार्य करता है। (3) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का संबंध केवल केंद्र सरकार के मामलों से है। (4) केंद्रीय सूचना आयोग सूचना के अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन हेतु जिम्मेदार है।

  • A. केवल 1 और 4 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1, 2 और 3
  • D. केवल 3 और 4
सही उत्तर: A — केवल 1 और 4
व्याख्या (Explanation):
लोकपाल प्रधानमंत्री सहित उच्च लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार मामलों की जांच कर सकता है (कुछ सीमाओं के साथ), और केंद्रीय सूचना आयोग RTI अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी है। अतः कथन 1 और 4 सही हैं। CVC लोकपाल के अधीन नहीं है और NHRC केंद्र व राज्य दोनों मामलों में कार्य करता है, इसलिए कथन 2 और 3 गलत हैं।

प्रश्न 3: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग, केंद्रीय सतर्कता आयोग और लोकपाल सभी संवैधानिक निकाय हैं। (2) इन सभी निकायों की स्थापना संसद द्वारा पारित अधिनियमों के माध्यम से हुई है। (3) इन सभी निकायों का उद्देश्य सुशासन और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना है। (4) इन सभी निकायों की सिफारिशें पूर्णतः बाध्यकारी होती हैं।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 4
  • C. केवल 1, 3 और 4
  • D. केवल 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
ये सभी निकाय संवैधानिक नहीं बल्कि वैधानिक हैं और संसद द्वारा पारित अधिनियमों से स्थापित हुए हैं। इनका उद्देश्य सुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना है। किंतु इनकी सिफारिशें पूर्णतः बाध्यकारी नहीं होतीं। अतः कथन 2 और 3 सही हैं।

प्रश्न 4: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 पारदर्शिता बढ़ाने हेतु एक क्रांतिकारी विधिक उपकरण है। (2) केंद्रीय सूचना आयोग को न्यायालय की भाँति नीति निर्णयों को रद्द करने का अधिकार प्राप्त है। (3) RTI अधिनियम के अंतर्गत सभी प्रकार की सूचनाएँ बिना किसी अपवाद के उपलब्ध कराई जाती हैं। (4) केंद्रीय सूचना आयोग केवल अपील और शिकायतों का निस्तारण करता है।

  • A. केवल 1 और 4 ✓
  • B. केवल 1, 2 और 3
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1, 3 और 4
सही उत्तर: A — केवल 1 और 4
व्याख्या (Explanation):
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 भारत में पारदर्शिता का महत्वपूर्ण साधन है तथा केंद्रीय सूचना आयोग मुख्यतः अपील और शिकायतों का निस्तारण करता है, अतः कथन 1 और 4 सही हैं। आयोग नीति निर्णयों को रद्द नहीं कर सकता और RTI के अंतर्गत कुछ सूचनाएँ (जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा, गोपनीयता आदि) अपवादों के अंतर्गत आती हैं, इसलिए कथन 2 और 3 गलत हैं।

प्रश्न 5: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा लोकपाल दोनों मानवाधिकार उल्लंघन और भ्रष्टाचार—दोनों प्रकार के मामलों की जांच कर सकते हैं। (2) केंद्रीय सूचना आयोग का उद्देश्य सूचना तक पहुँच सुनिश्चित करना है, न कि प्रशासनिक अथवा नीतिगत निर्णयों की वैधता की समीक्षा करना। (3) केंद्रीय सतर्कता आयोग का कार्य केवल CBI के भ्रष्टाचार मामलों पर अधीक्षण तक सीमित है। (4) लोकपाल तथा केंद्रीय सतर्कता आयोग दोनों वैधानिक निकाय हैं।

  • A. केवल 2 और 4 ✓
  • B. केवल 2, 3 और 4
  • C. केवल 1, 2 और 4
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — केवल 2 और 4
व्याख्या (Explanation):
कथन 1 गलत है क्योंकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और लोकपाल के कार्यक्षेत्र भिन्न हैं। कथन 2 सही है क्योंकि केंद्रीय सूचना आयोग सूचना उपलब्ध कराने से संबंधित अधिकारों की रक्षा करता है, न कि सरकारी नीतियों की वैधता का परीक्षण। कथन 3 गलत है क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग का कार्य केवल CBI पर अधीक्षण तक सीमित नहीं है; वह केंद्रीय सरकार की संपूर्ण सतर्कता व्यवस्था की निगरानी भी करता है। कथन 4 सही है।

प्रश्न 6: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों में मुआवजे की अनुशंसा कर सकता है। (2) आयोग को न्यायालय के समान दंडात्मक अधिकार प्राप्त हैं। (3) आयोग अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का अध्ययन कर सरकार को सुझाव दे सकता है। (4) आयोग केवल शिकायत प्राप्त होने पर ही कार्यवाही कर सकता है।

  • A. केवल 1 और 3 ✓
  • B. केवल 2 और 4
  • C. केवल 1, 2 और 3
  • D. केवल 3 और 4
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में मुआवजे की अनुशंसा कर सकता है तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का अध्ययन कर सरकार को सुझाव दे सकता है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं। किंतु इसे न्यायालय के समान दंडात्मक अधिकार प्राप्त नहीं हैं और यह स्वतः संज्ञान भी ले सकता है, इसलिए कथन 2 और 4 गलत हैं।

प्रश्न 7: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) लोकपाल का अधिकार क्षेत्र प्रधानमंत्री सहित केंद्रीय मंत्रिपरिषद तक विस्तृत हो सकता है। (2) लोकपाल केवल न्यायिक निकाय के रूप में कार्य करता है। (3) लोकपाल एक वैधानिक निकाय है। (4) लोकपाल के अधीन एक जांच एवं अभियोजन तंत्र हो सकता है।

  • A. केवल 1 और 3
  • B. केवल 2 और 4
  • C. केवल 1, 2 और 3
  • D. केवल 1, 3 और 4 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1, 3 और 4
व्याख्या (Explanation):
लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के अंतर्गत लोकपाल का अधिकार क्षेत्र प्रधानमंत्री सहित केंद्रीय मंत्रियों और उच्च लोक सेवकों तक विस्तृत हो सकता है, और यह एक वैधानिक निकाय है। इसके अधीन जांच एवं अभियोजन शाखा की व्यवस्था भी की गई है। अतः कथन 1, 3 और 4 सही हैं। किंतु यह केवल न्यायिक निकाय नहीं है, इसलिए कथन 2 गलत है।

प्रश्न 8: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) केंद्रीय सतर्कता आयोग का मुख्य कार्य केंद्रीय सरकार के सतर्कता प्रशासन की निगरानी करना तथा भ्रष्टाचार-निरोधी व्यवस्था को सुदृढ़ करना है। (2) केंद्रीय सतर्कता आयोग, दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत किए जाने वाले अन्वेषणों का अधीक्षण करता है। (3) केंद्रीय सतर्कता आयोग किसी लोक सेवक को सीधे दंडित कर सकता है। (4) केंद्रीय सतर्कता आयोग एक वैधानिक निकाय है।

  • A. केवल 1, 2 और 4 ✓
  • B. केवल 2 और 4
  • C. केवल 1, 2 और 3
  • D. केवल 3 और 4
सही उत्तर: A — केवल 1, 2 और 4
व्याख्या (Explanation):
कथन 1, 2 और 4 सही हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग का कार्य केवल भ्रष्टाचार की जांच करना नहीं, बल्कि केंद्रीय सरकार के सतर्कता प्रशासन की निगरानी करना भी है। यह CBI के भ्रष्टाचार संबंधी मामलों पर अधीक्षण करता है। आयोग स्वयं किसी लोक सेवक को दंडित नहीं कर सकता; वह केवल अनुशंसा करता है। इसलिए कथन 3 गलत है।

प्रश्न 9: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) केंद्रीय सूचना आयोग केवल केंद्रीय लोक प्राधिकरणों से संबंधित मामलों में कार्य करता है। (2) केंद्रीय सूचना आयोग के आदेशों को उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष न्यायिक समीक्षा के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है। (3) केंद्रीय सूचना आयोग किसी सरकारी नीति को संशोधित या निरस्त कर सकता है। (4) केंद्रीय सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • A. केवल 1, 2 और 4 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 3 और 4
सही उत्तर: A — केवल 1, 2 और 4
व्याख्या (Explanation):
कथन 1 सही है क्योंकि केंद्रीय सूचना आयोग केवल केंद्रीय लोक प्राधिकरणों से संबंधित मामलों की सुनवाई करता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि RTI अधिनियम में पृथक अपील का प्रावधान नहीं है, परंतु आयोग के आदेशों को संविधान के अनुच्छेद 226 अथवा 32 के अंतर्गत न्यायिक समीक्षा में चुनौती दी जा सकती है। कथन 3 गलत है क्योंकि आयोग किसी सरकारी नीति को संशोधित या निरस्त नहीं कर सकता; उसका कार्य केवल सूचना उपलब्ध कराना एवं अधिनियम का अनुपालन सुनिश्चित करना है। कथन 4 सही है।

प्रश्न 10: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग किसी मामले में स्वतः संज्ञान लेकर जांच प्रारंभ कर सकता है। (2) सशस्त्र बलों से जुड़े मामलों में आयोग की जांच करने की शक्ति पूर्ण एवं असीमित होती है। (3) आयोग की सिफारिशें सरकार के लिए विधिक रूप से बाध्यकारी होती हैं। (4) आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत कार्य करता है।

  • A. केवल 1 और 3
  • B. केवल 1 और 4 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1, 2 और 4
सही उत्तर: B — केवल 1 और 4
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है और यह स्वतः संज्ञान लेकर मामलों की जांच कर सकता है। अतः कथन 1 और 4 सही हैं। किंतु सशस्त्र बलों से जुड़े मामलों में इसकी शक्ति सीमित है तथा इसकी सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होतीं, इसलिए कथन 2 और 3 गलत हैं।

प्रश्न 11: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग, केंद्रीय सतर्कता आयोग तथा लोकपाल—सभी वैधानिक निकाय हैं। (2) इन सभी निकायों की सिफारिशें पूर्णतः बाध्यकारी होती हैं। (3) इन सभी का गठन संसद द्वारा पारित अलग-अलग अधिनियमों के माध्यम से हुआ है। (4) इन सभी निकायों का उद्देश्य सुशासन एवं उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करना है।

  • A. केवल 1, 3 और 4 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 4
सही उत्तर: A — केवल 1, 3 और 4
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग, केंद्रीय सतर्कता आयोग तथा लोकपाल सभी संसद द्वारा पारित अलग-अलग अधिनियमों के अंतर्गत स्थापित वैधानिक निकाय हैं और इनका उद्देश्य सुशासन, पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करना है। अतः कथन 1, 3 और 4 सही हैं। किंतु इनकी सिफारिशें/निर्णय सभी मामलों में पूर्णतः बाध्यकारी नहीं होते, इसलिए कथन 2 गलत है।

प्रश्न 12: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) लोकपाल उच्च लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच कर सकता है। (2) लोकपाल का गठन सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत हुआ है। (3) लोकपाल एक वैधानिक निकाय है। (4) लोकपाल राज्य स्तर पर लोकायुक्त से संबंधित मामलों में प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप कर सकता है।

  • A. केवल 1 और 3 ✓
  • B. केवल 2 और 4
  • C. केवल 1, 2 और 3
  • D. केवल 1, 3 और 4
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के अंतर्गत लोकपाल एक वैधानिक निकाय है जो केंद्र स्तर पर उच्च लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच करता है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं। इसका गठन RTI अधिनियम के अंतर्गत नहीं हुआ तथा राज्य लोकायुक्त के मामलों में इसका प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं होता, इसलिए कथन 2 और 4 गलत हैं।

प्रश्न 13: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन केंद्रीय सतर्कता आयोग के संबंध में सही है? (1) यह एक संवैधानिक निकाय है। (2) यह सीबीआई के भ्रष्टाचार मामलों पर पर्यवेक्षण करता है। (3) यह केवल राज्यों के मामलों में कार्य करता है। (4) इसे केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 द्वारा वैधानिक दर्जा प्राप्त है।

  • A. केवल 1 और 3
  • B. केवल 2 और 4 ✓
  • C. केवल 1, 2 और 3
  • D. केवल 3 और 4
सही उत्तर: B — केवल 2 और 4
व्याख्या (Explanation):
केंद्रीय सतर्कता आयोग एक वैधानिक निकाय है जिसे केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 द्वारा स्थापित किया गया है। यह सीबीआई के भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर पर्यवेक्षण की भूमिका निभाता है। अतः कथन 2 और 4 सही हैं। यह संवैधानिक निकाय नहीं है और न ही इसका कार्यक्षेत्र केवल राज्यों तक सीमित है, इसलिए कथन 1 और 3 गलत हैं।

प्रश्न 14: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) केंद्रीय सूचना आयोग को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत लोक सूचना अधिकारी पर आर्थिक दंड लगाने की शक्ति प्राप्त है। (2) आयोग सूचना उपलब्ध कराने में अनुचित विलंब अथवा बिना उचित कारण सूचना देने से इंकार करने पर दंड लगा सकता है। (3) आयोग किसी सरकारी नीति अथवा विधिक प्रावधान को अमान्य घोषित कर सकता है। (4) आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 4
  • C. केवल 1, 2 और 4 ✓
  • D. केवल 3 और 4
सही उत्तर: C — केवल 1, 2 और 4
व्याख्या (Explanation):
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुसार केंद्रीय सूचना आयोग लोक सूचना अधिकारी पर सूचना देने में अनुचित विलंब, बिना उचित कारण सूचना से इंकार करने अथवा अन्य निर्धारित परिस्थितियों में आर्थिक दंड लगा सकता है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं। आयोग सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी भी करता है, इसलिए कथन 4 सही है। किंतु आयोग किसी सरकारी नीति या विधिक प्रावधान को अमान्य घोषित नहीं कर सकता, अतः कथन 3 गलत है।

प्रश्न 15: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सशस्त्र बलों से जुड़े मानवाधिकार उल्लंघन मामलों में पूर्ण अधिकार-क्षेत्र रखता है। (2) आयोग ऐसे मामलों में संबंधित सरकार से रिपोर्ट मांग सकता है। (3) आयोग की सिफारिशें बाध्यकारी होती हैं। (3) आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत गठित है।

  • A. केवल 2 और 4 ✓
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 1, 2 और 3
  • D. केवल 3 और 4
सही उत्तर: A — केवल 2 और 4
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है तथा सशस्त्र बलों से जुड़े मामलों में इसका अधिकार-क्षेत्र सीमित होता है; यह संबंधित सरकार से रिपोर्ट मांग सकता है। अतः कथन 2 और 4 सही हैं। किंतु इसकी सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होतीं और सशस्त्र बलों के मामलों में यह पूर्ण अधिकार-क्षेत्र नहीं रखता, इसलिए कथन 1 और 3 गलत हैं।

प्रश्न 16: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) केंद्रीय सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत लोक सूचना अधिकारी पर निर्धारित परिस्थितियों में आर्थिक दंड अधिरोपित कर सकता है। (2) यह आयोग किसी लोक प्राधिकरण के रिकॉर्ड का निरीक्षण कर सकता है। (3) आयोग किसी कर्मचारी के विरुद्ध स्वयं अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकता, बल्कि ऐसी कार्रवाई की अनुशंसा कर सकता है। (4) आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी करता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1, 2 और 4 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1, 2 और 4
व्याख्या (Explanation):
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुसार केंद्रीय सूचना आयोग लोक सूचना अधिकारी पर अधिनियम की धारा 20 में वर्णित परिस्थितियों में आर्थिक दंड अधिरोपित कर सकता है। आयोग किसी लोक प्राधिकरण के अभिलेखों का निरीक्षण कर सकता है तथा सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी भी करता है। अतः कथन 1, 2 और 4 सही हैं। आयोग स्वयं अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करता, बल्कि सक्षम प्राधिकारी को ऐसी कार्रवाई की अनुशंसा कर सकता है। इसलिए कथन 3 गलत है।

प्रश्न 17: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का कार्य केवल शिकायतों की जांच तक सीमित है। (2) आयोग मानवाधिकारों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय संधियों का अध्ययन कर सकता है। (3) आयोग मानवाधिकार शिक्षा एवं जागरूकता को बढ़ावा दे सकता है। (4) आयोग के पास दंड देने की न्यायिक शक्ति होती है।

  • A. केवल 1 और 4
  • B. केवल 2 और 3 ✓
  • C. केवल 1, 2 और 4
  • D. केवल 2, 3 और 4
सही उत्तर: B — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग केवल शिकायतों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकारों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानकों का अध्ययन, सरकार को अनुशंसा, तथा मानवाधिकार शिक्षा एवं जागरूकता को बढ़ावा देने जैसे कार्य भी करता है। अतः कथन 2 और 3 सही हैं। किंतु यह दंड देने वाली न्यायिक संस्था नहीं है, इसलिए कथन 4 गलत है। कथन 1 भी गलत है क्योंकि इसका कार्य क्षेत्र व्यापक है।

प्रश्न 18: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) लोकपाल भ्रष्टाचार संबंधी मामलों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की जा रही जांच के संबंध में अधीक्षण की शक्ति रखता है। (2) केंद्रीय सतर्कता आयोग लोकपाल के अधीन एक विभाग है। (3) लोकपाल तथा केंद्रीय सतर्कता आयोग दोनों वैधानिक निकाय हैं। (4) लोकपाल और केंद्रीय सतर्कता आयोग का कार्यक्षेत्र पूर्णतः समान है।

  • A. केवल 1 और 3 ✓
  • B. केवल 2 और 4
  • C. केवल 1, 2 और 3
  • D. 1, 2, 3 और 4
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के अनुसार लोकपाल को उसके द्वारा संदर्भित मामलों में CBI की जांच पर अधीक्षण का अधिकार प्राप्त है। अतः कथन 1 सही है। लोकपाल और केंद्रीय सतर्कता आयोग दोनों वैधानिक निकाय हैं, इसलिए कथन 3 भी सही है। केंद्रीय सतर्कता आयोग लोकपाल के अधीन कोई विभाग नहीं है तथा दोनों का कार्यक्षेत्र अलग-अलग है। इसलिए कथन 2 और 4 गलत हैं।

प्रश्न 19: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) केंद्रीय सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित एक वैधानिक निकाय है। (2) आयोग किसी भी सरकारी विभाग की नीति को परिवर्तित करने का निर्देश दे सकता है। (3) आयोग का मुख्य कार्य सूचना उपलब्ध कराने से संबंधित द्वितीय अपीलों एवं शिकायतों का निस्तारण करना है। (4) आयोग न्यायालय नहीं है, किन्तु जांच के दौरान इसे सिविल न्यायालय की कुछ शक्तियाँ प्राप्त हैं।

  • A. केवल 1 और 3
  • B. केवल 1, 3 और 4 ✓
  • C. केवल 2 और 4
  • D. केवल 1 और 4
सही उत्तर: B — केवल 1, 3 और 4
व्याख्या (Explanation):
केंद्रीय सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित एक वैधानिक निकाय है। इसका प्रमुख कार्य सूचना उपलब्ध कराने से संबंधित द्वितीय अपीलों एवं शिकायतों का निस्तारण करना है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं। आयोग न्यायालय नहीं है, किन्तु सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 18(3) के अंतर्गत जांच करते समय इसे सिविल न्यायालय की कुछ शक्तियाँ प्राप्त होती हैं, इसलिए कथन 4 भी सही है। आयोग किसी सरकारी विभाग की नीति को बदलने का निर्देश नहीं दे सकता, अतः कथन 2 गलत है।

प्रश्न 20: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग किसी कारागार या निरोध गृह का निरीक्षण कर सकता है। (2) आयोग के निरीक्षण की रिपोर्ट सरकार के लिए बाध्यकारी होती है। (3) आयोग मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में संबंधित प्राधिकरण से रिपोर्ट मांग सकता है। (4) आयोग केवल केंद्र सरकार के मामलों में ही कार्य करता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 4
  • C. केवल 1, 3 और 4
  • D. केवल 1 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत कारागार एवं अन्य निरोध संस्थानों का निरीक्षण कर सकता है तथा मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में संबंधित प्राधिकरण या सरकार से रिपोर्ट मांग सकता है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं। किंतु आयोग की रिपोर्ट बाध्यकारी नहीं होती बल्कि सलाहकारी प्रकृति की होती है, इसलिए कथन 2 गलत है। इसके अतिरिक्त आयोग का कार्यक्षेत्र केवल केंद्र सरकार तक सीमित नहीं है, यह राज्यों के मामलों में भी कार्य कर सकता है, इसलिए कथन 4 भी गलत है।

प्रश्न 21: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग, केंद्रीय सतर्कता आयोग तथा लोकपाल, चारों का उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी बनाना है। (2) चारों निकायों का कार्यक्षेत्र, शक्तियाँ तथा अधिनियम समान हैं। (3) चारों निकाय संसद द्वारा पारित भिन्न-भिन्न अधिनियमों के अंतर्गत स्थापित किए गए हैं।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2
  • D. केवल 1 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
चारों वैधानिक निकाय—राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग, केंद्रीय सतर्कता आयोग तथा लोकपाल, अपने-अपने क्षेत्र में उत्तरदायित्व, पारदर्शिता, मानवाधिकार संरक्षण एवं भ्रष्टाचार-निरोध के माध्यम से सुशासन को सुदृढ़ करते हैं। अतः कथन 1 सही है। इनकी शक्तियाँ, अधिकार-क्षेत्र तथा स्थापना अधिनियम अलग-अलग हैं, इसलिए कथन 2 गलत है। कथन 3 सही है क्योंकि प्रत्येक निकाय संसद द्वारा पारित पृथक अधिनियम के अंतर्गत स्थापित किया गया है।

प्रश्न 22: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा केंद्रीय सूचना आयोग दोनों जन-जागरूकता को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में योगदान दे सकते हैं। (2) दोनों आयोगों का प्रमुख कार्य केवल शिकायतों का निस्तारण करना है। (3) दोनों आयोग अपने-अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित विषयों पर सरकार अथवा सक्षम प्राधिकार को अनुशंसाएँ दे सकते हैं।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकारों के संबंध में अनुसंधान, जन-जागरूकता तथा सरकार को अनुशंसाएँ देने का कार्य करता है। केंद्रीय सूचना आयोग सूचना के अधिकार की प्रभावी व्यवस्था के लिए अपने निर्णयों एवं वार्षिक प्रतिवेदनों के माध्यम से उपयुक्त अनुशंसाएँ दे सकता है। अतः कथन 1 एवं 3 सही हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि दोनों आयोगों के कार्य केवल शिकायतों के निस्तारण तक सीमित नहीं हैं।

प्रश्न 23: निम्नलिखित में से किन वैधानिक निकायों का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है? (1) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (2) केंद्रीय सूचना आयोग (3) केंद्रीय सतर्कता आयोग (4) लोकपाल

  • A. केवल 1, 2 और 4 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2, 3 और 4
सही उत्तर: A — केवल 1, 2 और 4
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का उद्देश्य मानवाधिकारों की रक्षा एवं संवर्धन करना है। केंद्रीय सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत नागरिकों के सूचना प्राप्त करने के वैधानिक अधिकार की रक्षा करता है। लोकपाल सार्वजनिक पदाधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच की व्यवस्था प्रदान कर उत्तरदायी एवं स्वच्छ प्रशासन को प्रोत्साहित करता है। दूसरी ओर, केंद्रीय सतर्कता आयोग मुख्यतः केंद्र सरकार के सतर्कता प्रशासन एवं भ्रष्टाचार-निरोधी तंत्र के पर्यवेक्षण और सलाह से संबंधित संस्थागत निकाय है; इसका प्रत्यक्ष उद्देश्य व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा नहीं है। अतः केवल 1, 2 और 4 सही हैं।

प्रश्न 24: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) केंद्रीय सतर्कता आयोग केंद्र सरकार के सतर्कता प्रशासन से संबंधित मामलों में सलाह दे सकता है। (2) केंद्रीय सतर्कता आयोग का प्राथमिक उद्देश्य भ्रष्टाचार की रोकथाम हेतु संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ करना है। (3) केंद्रीय सतर्कता आयोग सभी राज्य सरकारों के सतर्कता विभागों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण रखता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. केवल 1 और 2 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 के अंतर्गत आयोग केंद्र सरकार के सतर्कता प्रशासन को सुदृढ़ करने तथा भ्रष्टाचार-निरोधी व्यवस्था को प्रभावी बनाने हेतु सलाह, पर्यवेक्षण एवं समीक्षा का कार्य करता है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं। किंतु आयोग का प्रत्यक्ष अधिकार-क्षेत्र सभी राज्य सरकारों के सतर्कता विभागों पर नहीं है, इसलिए कथन 3 गलत है।

प्रश्न 25: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरण को अपने अभिलेखों का समुचित रख-रखाव करना अपेक्षित है। (2) केंद्रीय सूचना आयोग का एक उद्देश्य सूचना तक पहुँच सुनिश्चित कर शासन में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। (3) केंद्रीय सूचना आयोग किसी लोक प्राधिकरण की सभी नीतिगत निर्णयों को निरस्त कर सकता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुसार प्रत्येक लोक प्राधिकरण को अपने अभिलेख सुव्यवस्थित रखने तथा सूचना उपलब्ध कराने योग्य बनाने का दायित्व है। केंद्रीय सूचना आयोग का उद्देश्य सूचना तक प्रभावी पहुँच सुनिश्चित कर शासन में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करना है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं। किंतु आयोग किसी सरकारी नीति या प्रशासनिक निर्णय को निरस्त करने वाला न्यायिक या संवैधानिक निकाय नहीं है, इसलिए कथन 3 गलत है।

प्रश्न 26: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) लोकपाल का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में उत्तरदायित्व एवं ईमानदारी को प्रोत्साहित करना है। (2) लोकपाल के गठन का संबंध केवल भ्रष्टाचार-निरोध से है, मानवाधिकार संरक्षण से नहीं। (3) लोकपाल एवं केंद्रीय सूचना आयोग दोनों का गठन एक ही अधिनियम के अंतर्गत हुआ है।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 का उद्देश्य उच्च लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच की व्यवस्था प्रदान कर सार्वजनिक जीवन में उत्तरदायित्व एवं ईमानदारी को बढ़ावा देना है। इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि केंद्रीय सूचना आयोग का गठन सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत हुआ है, जबकि लोकपाल का गठन लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के अंतर्गत हुआ।

प्रश्न 27: निम्नलिखित का सही मिलान कीजिए: (1) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग - (क) मानवाधिकार जागरूकता का प्रसार (2) केंद्रीय सूचना आयोग - (ख) सूचना संबंधी द्वितीय अपील (3) केंद्रीय सतर्कता आयोग - (ग) सतर्कता प्रशासन का पर्यवेक्षण

  • A. 1-(ख), 2-(क), 3-(ग)
  • B. 1-(क), 2-(ख), 3-(ग) ✓
  • C. 1-(ग), 2-(क), 3-(ख)
  • D. 1-(क), 2-(ग), 3-(ख)
सही उत्तर: B — 1-(क), 2-(ख), 3-(ग)
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का एक महत्वपूर्ण कार्य मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता का प्रसार करना है। केंद्रीय सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत द्वितीय अपीलों एवं शिकायतों का निस्तारण करता है, जबकि केंद्रीय सतर्कता आयोग केंद्र सरकार की सतर्कता व्यवस्था का पर्यवेक्षण करता है।

प्रश्न 28: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) केंद्रीय सतर्कता आयोग केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों की सतर्कता व्यवस्था की समीक्षा कर सकता है। (2) केंद्रीय सतर्कता आयोग का प्रमुख उद्देश्य प्रशासनिक ईमानदारी एवं सतर्कता तंत्र को सुदृढ़ करना है। (3) केंद्रीय सतर्कता आयोग प्रत्येक आपराधिक मामले का अंतिम निर्णय स्वयं देता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. केवल 1 और 2 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
केंद्रीय सतर्कता आयोग एक वैधानिक निकाय है जिसका मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार के अधीन सतर्कता प्रशासन को सुदृढ़ करना तथा भ्रष्टाचार-निरोधी व्यवस्था की निगरानी करना है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं। किंतु आयोग किसी आपराधिक मामले का अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं देता; यह न्यायालय का कार्य है। आयोग की भूमिका मुख्यतः पर्यवेक्षण, सलाह एवं सतर्कता प्रशासन से संबंधित है।

प्रश्न 29: निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य केंद्रीय सूचना आयोग के अधिकार-क्षेत्र में आता है?

  • A. सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत द्वितीय अपील का निस्तारण करना। ✓
  • B. किसी सरकारी कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय दंड निर्धारित करना।
  • C. भ्रष्टाचार के प्रत्येक मामले में प्राथमिकी दर्ज करना।
  • D. संसद द्वारा पारित प्रत्येक विधेयक की संवैधानिक वैधता की समीक्षा करना।
सही उत्तर: A — सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत द्वितीय अपील का निस्तारण करना।
व्याख्या (Explanation):
केंद्रीय सूचना आयोग का मुख्य कार्य सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत सूचना संबंधी शिकायतों एवं द्वितीय अपीलों का निस्तारण करना है। यह न तो विभागीय अनुशासनात्मक प्राधिकारी है, न ही पुलिस या न्यायालय। इसी प्रकार संसद द्वारा पारित विधेयकों की संवैधानिक वैधता का परीक्षण न्यायपालिका का कार्य है। इस प्रकार के प्रश्न संस्थाओं की शक्तियों की सीमा को समझने की क्षमता का परीक्षण करते हैं।

प्रश्न 30: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकार संरक्षण से संबंधित किसी संधि या अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज के प्रावधानों के अध्ययन तथा उनके प्रभावी कार्यान्वयन हेतु अनुशंसा कर सकता है। (2) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहित कर सकता है। (3) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को केवल शिकायत प्राप्त होने पर ही कार्यवाही करने का अधिकार है।

  • A. केवल 1 और 3
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अनुसार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकारों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय संधियों एवं दस्तावेजों का अध्ययन कर उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार को अनुशंसा कर सकता है तथा मानवाधिकार संबंधी अनुसंधान एवं जन-जागरूकता को भी प्रोत्साहित करता है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि आयोग केवल शिकायत मिलने पर ही नहीं, बल्कि स्वतः संज्ञान लेकर भी कार्यवाही कर सकता है।

प्रश्न 31: निम्नलिखित में से कौन-सा निकाय मुख्यतः केंद्र सरकार के विभागों में सतर्कता प्रशासन एवं भ्रष्टाचार-निरोधी तंत्र की निगरानी करता है?

  • A. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
  • B. केंद्रीय सूचना आयोग
  • C. केंद्रीय सतर्कता आयोग ✓
  • D. लोकपाल
सही उत्तर: C — केंद्रीय सतर्कता आयोग
व्याख्या (Explanation):
केंद्रीय सतर्कता आयोग केंद्र सरकार के विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों तथा अन्य संबद्ध संगठनों में सतर्कता प्रशासन की निगरानी करने वाला एक वैधानिक निकाय है। इसे केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 द्वारा वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। आयोग भ्रष्टाचार-निरोधी तंत्र की समीक्षा करता है, सतर्कता संबंधी मामलों में मार्गदर्शन देता है तथा कुछ मामलों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के भ्रष्टाचार संबंधी अन्वेषणों पर अधीक्षण भी करता है। यह स्वयं सामान्यतः प्रत्यक्ष जांच एजेंसी के रूप में कार्य नहीं करता।

प्रश्न 32: निम्नलिखित में से कौन-सा निकाय मानवाधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से स्थापित किया गया है?

  • A. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ✓
  • B. केंद्रीय सूचना आयोग
  • C. केंद्रीय सतर्कता आयोग
  • D. लोकपाल
सही उत्तर: A — राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का उद्देश्य मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों की जांच करना, सरकार को अनुशंसाएँ देना, मानवाधिकार जागरूकता बढ़ाना तथा संबंधित नीतियों के सुधार हेतु सुझाव देना है। यह एक वैधानिक निकाय है जिसका गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत किया गया। इसकी अनुशंसाएँ सामान्यतः सलाहकारी प्रकृति की होती हैं।

प्रश्न 33: निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा सही सुमेलित है?

  • A. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग — सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
  • B. केंद्रीय सूचना आयोग — केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003
  • C. केंद्रीय सतर्कता आयोग — मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
  • D. केंद्रीय सूचना आयोग — सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 ✓
सही उत्तर: D — केंद्रीय सूचना आयोग — सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
व्याख्या (Explanation):
केंद्रीय सूचना आयोग का गठन सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत किया गया है। अन्य विकल्पों में अधिनियम और संस्था का मिलान गलत है।

प्रश्न 34: लोकपाल के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  • A. यह केवल राज्यों में कार्य करता है।
  • B. यह केंद्र स्तर पर भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच हेतु स्थापित निकाय है। ✓
  • C. यह सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत गठित निकाय है।
  • D. इसका गठन संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत हुआ है।
सही उत्तर: B — यह केंद्र स्तर पर भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच हेतु स्थापित निकाय है।
व्याख्या (Explanation):
लोकपाल केंद्र स्तर पर उच्च लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच के लिए स्थापित वैधानिक संस्था है। इसका गठन लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के अंतर्गत किया गया। राज्यों में इसी प्रकार की संस्था लोकायुक्त कहलाती है, जिसका गठन संबंधित राज्य कानूनों के अनुसार होता है। यह निकाय संवैधानिक नहीं बल्कि वैधानिक है।

प्रश्न 35: निम्नलिखित में से कौन-सा निकाय एक वैधानिक निकाय है, संवैधानिक निकाय नहीं?

  • A. निर्वाचन आयोग
  • B. वित्त आयोग
  • C. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ✓
  • D. संघ लोक सेवा आयोग
सही उत्तर: C — राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत स्थापित वैधानिक निकाय है। इसके विपरीत निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 324), वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) तथा संघ लोक सेवा आयोग (अनुच्छेद 315) संविधान द्वारा स्थापित संवैधानिक निकाय हैं। UPSC प्रारंभिक परीक्षा में संवैधानिक एवं वैधानिक निकायों के बीच अंतर बार-बार पूछा जाता है।

प्रश्न 36: लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया?

  • A. 2013 ✓
  • B. 2005
  • C. 1993
  • D. 2003
सही उत्तर: A — 2013
व्याख्या (Explanation):
लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए केंद्र स्तर पर लोकपाल तथा राज्यों में लोकायुक्त की व्यवस्था से संबंधित कानून है। इसके अंतर्गत केंद्र में लोकपाल की स्थापना का प्रावधान किया गया, जबकि राज्यों से अपेक्षा की गई कि वे अपने-अपने कानूनों के माध्यम से लोकायुक्त की व्यवस्था करें। यह अधिनियम पारदर्शिता, जवाबदेही तथा सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैधानिक व्यवस्था है।

प्रश्न 37: निम्नलिखित में से कौन-सा निकाय मुख्यतः सूचना प्राप्त करने के अधिकार से संबंधित अपीलों का निस्तारण करता है?

  • A. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
  • B. केंद्रीय सूचना आयोग ✓
  • C. केंद्रीय सतर्कता आयोग
  • D. लोकपाल
सही उत्तर: B — केंद्रीय सूचना आयोग
व्याख्या (Explanation):
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत यदि किसी नागरिक को अपेक्षित सूचना प्राप्त नहीं होती या वह लोक सूचना अधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट होता है, तो द्वितीय अपील केंद्रीय सूचना आयोग के समक्ष की जा सकती है। आयोग सूचना उपलब्ध कराने, विलंब या अनुचित अस्वीकृति जैसे मामलों का निर्णय करता है। यह पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण वैधानिक संस्था है।

प्रश्न 38: केंद्रीय सतर्कता आयोग का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

  • A. चुनावों का संचालन करना
  • B. मानवाधिकारों की रक्षा करना
  • C. सूचना का अधिकार लागू करना
  • D. भ्रष्टाचार निवारण से संबंधित सतर्कता व्यवस्था की निगरानी करना ✓
सही उत्तर: D — भ्रष्टाचार निवारण से संबंधित सतर्कता व्यवस्था की निगरानी करना
व्याख्या (Explanation):
केंद्रीय सतर्कता आयोग का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार के अधीन भ्रष्टाचार निवारण से संबंधित सतर्कता प्रशासन की निगरानी करना है। इसे प्रारंभ में 1964 में एक कार्यपालिका संकल्प द्वारा स्थापित किया गया था तथा बाद में केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 द्वारा वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। यह विभिन्न केंद्रीय विभागों एवं संगठनों में सतर्कता व्यवस्था पर निगरानी रखता है तथा भ्रष्टाचार निरोधक संस्थाओं के कार्यों का पर्यवेक्षण भी करता है।

प्रश्न 39: केंद्रीय सूचना आयोग का गठन किस अधिनियम के अंतर्गत किया गया है?

  • A. केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003
  • B. लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013
  • C. सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 ✓
  • D. मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
सही उत्तर: C — सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
व्याख्या (Explanation):
केंद्रीय सूचना आयोग का गठन सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को लोक प्राधिकरणों से सूचना प्राप्त करने के अधिकार का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। यह आयोग सूचना उपलब्ध कराने से संबंधित अपीलों एवं शिकायतों का निस्तारण करता है। यह एक वैधानिक निकाय है तथा इसका गठन संविधान के किसी अनुच्छेद के अंतर्गत नहीं हुआ है।

प्रश्न 40: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  • A. इसका गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत किया गया है। ✓
  • B. इसका गठन संविधान के भाग-III के अंतर्गत किया गया है।
  • C. यह एक संवैधानिक निकाय है।
  • D. इसका गठन राष्ट्रपति के अध्यादेश द्वारा किया गया था।
सही उत्तर: A — इसका गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत किया गया है।
व्याख्या (Explanation):
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय के रूप में किया गया था। यह संविधान द्वारा स्थापित निकाय नहीं है, इसलिए इसे संवैधानिक निकाय नहीं माना जाता। इसका उद्देश्य मानवाधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन से संबंधित मामलों की जांच करना तथा सरकार को आवश्यक अनुशंसाएँ देना है।

प्रश्न 41: कथन (A): राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा केंद्रीय सूचना आयोग दोनों वैधानिक निकाय हैं। कारण (R): क्योंकि दोनों की स्थापना संसद द्वारा पारित अधिनियमों के माध्यम से हुई है, न कि संविधान के किसी अनुच्छेद द्वारा।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है। ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है।
  • D. A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 तथा केंद्रीय सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत स्थापित वैधानिक निकाय हैं। कारण भी सही है क्योंकि दोनों की वैधता संविधान के किसी अनुच्छेद से नहीं बल्कि संसद द्वारा बनाए गए अधिनियमों से प्राप्त होती है। इसलिए कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 42: कथन (A): लोकपाल भारत के प्रत्येक राज्य में लोकायुक्त की स्थापना कर सकता है। कारण (R): क्योंकि लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 राज्यों से लोकायुक्त की स्थापना की अपेक्षा करता है, किंतु लोकायुक्त की स्थापना, संरचना एवं अधिकार-क्षेत्र संबंधित राज्य के कानून के अनुसार निर्धारित होते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है।
  • D. A गलत है पर R सही है। ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन (A) गलत है क्योंकि लोकपाल को किसी राज्य में लोकायुक्त की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त नहीं है। लोकायुक्त की स्थापना संबंधित राज्य द्वारा अपने कानून के अनुसार की जाती है। कारण (R) सही है क्योंकि लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 राज्यों से लोकायुक्त की स्थापना की अपेक्षा करता है, किंतु उसकी स्थापना, संरचना एवं अधिकार-क्षेत्र संबंधित राज्य के अधिनियमों द्वारा निर्धारित किए जाते हैं। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 43: कथन (A): केंद्रीय सतर्कता आयोग को किसी भी मंत्रालय अथवा विभाग के भ्रष्टाचार संबंधी मामलों में स्वयं अभियोजन प्रारंभ करने की शक्ति प्राप्त है। कारण (R): क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग मुख्यतः सतर्कता प्रशासन के पर्यवेक्षण तथा सलाहकारी कार्य करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है।
  • D. A गलत है पर R सही है। ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन (A) गलत है क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग को स्वयं किसी भ्रष्टाचार मामले में अभियोजन प्रारंभ करने की शक्ति प्राप्त नहीं है। आयोग मुख्यतः केंद्रीय सरकार के सतर्कता प्रशासन का पर्यवेक्षण करता है, भ्रष्टाचार संबंधी मामलों में सलाह देता है तथा कुछ मामलों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की जाने वाली जांच का अधीक्षण करता है। अभियोजन प्रारंभ करने अथवा अभियोजन स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार संबंधित सक्षम प्राधिकारी के पास होता है; केंद्रीय सतर्कता आयोग केवल आवश्यकतानुसार सलाह दे सकता है। कारण (R) सही है क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग का मूल स्वरूप एक पर्यवेक्षी एवं सलाहकारी वैधानिक निकाय का है। अतः कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 44: कथन (A): केंद्रीय सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत लोक सूचना अधिकारियों पर दंड अधिरोपित कर सकता है। कारण (R): क्योंकि केंद्रीय सूचना आयोग संबंधित लोक सूचना अधिकारी के विरुद्ध विभागीय दंडादेश स्वयं पारित करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है। ✓
  • D. A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20 के अंतर्गत केंद्रीय सूचना आयोग निर्धारित परिस्थितियों में लोक सूचना अधिकारी (PIO) पर आर्थिक दंड अधिरोपित कर सकता है। कारण गलत है क्योंकि आयोग स्वयं विभागीय दंडादेश पारित नहीं करता; वह आवश्यकता होने पर संबंधित सक्षम प्राधिकारी को अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा कर सकता है। अतः कथन सही तथा कारण गलत है।

प्रश्न 45: कथन (A): राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग राज्य सरकार को सूचना देकर किसी जेल अथवा राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन अन्य ऐसे संस्थान का निरीक्षण कर सकता है, जहाँ व्यक्तियों को उपचार, सुधार या संरक्षण के उद्देश्य से निरुद्ध अथवा रखा जाता है। कारण (R): क्योंकि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को ऐसे संस्थानों की जीवन-परिस्थितियों का अध्ययन करने तथा मानवाधिकारों के संरक्षण एवं सुधार हेतु अनुशंसाएँ करने का वैधानिक अधिकार प्रदान करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है। ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है।
  • D. A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन (A) सही है क्योंकि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12(c) के अनुसार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग राज्य सरकार को सूचना देकर किसी जेल अथवा राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन अन्य ऐसे संस्थान का निरीक्षण कर सकता है, जहाँ व्यक्तियों को उपचार, सुधार या संरक्षण के उद्देश्य से निरुद्ध अथवा रखा जाता है। आयोग वहाँ की जीवन-परिस्थितियों का अध्ययन कर मानवाधिकारों के संरक्षण एवं सुधार के लिए आवश्यक अनुशंसाएँ कर सकता है। कारण (R) भी सही है क्योंकि यही अधिनियम आयोग को ऐसे संस्थानों की जीवन-परिस्थितियों का अध्ययन करने तथा आवश्यक सुधारात्मक अनुशंसाएँ करने का वैधानिक अधिकार प्रदान करता है। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या करता है.

प्रश्न 46: कथन (A): राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग वार्षिक तथा विशेष प्रतिवेदन संबंधित सरकार को प्रस्तुत कर सकता है। कारण (R): क्योंकि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 आयोग को अपनी गतिविधियों एवं अनुशंसाओं का प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का वैधानिक दायित्व प्रदान करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अपनी वार्षिक तथा आवश्यकतानुसार विशेष प्रतिवेदन केंद्र अथवा संबंधित राज्य सरकार को प्रस्तुत करता है। कारण भी सही है क्योंकि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 आयोग पर ऐसा वैधानिक दायित्व अधिरोपित करता है। यही प्रावधान कथन का आधार है, इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 47: कथन (A): लोकपाल के सभी निर्णय एवं अनुशंसाएँ संबंधित प्राधिकारी पर न्यायालय के आदेश के समान पूर्णतः बाध्यकारी होती हैं। कारण (R): क्योंकि लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 लोकपाल को शिकायतों की जांच, प्रारंभिक जांच, अन्वेषण की अनुशंसा तथा अन्य वैधानिक कार्यवाहियों से संबंधित शक्तियाँ प्रदान करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है।
  • D. A गलत है पर R सही है। ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि लोकपाल न्यायालय नहीं है और उसके निर्णय एवं अनुशंसाएँ न्यायालय के आदेशों के समान पूर्णतः बाध्यकारी नहीं होतीं। लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के अंतर्गत उसे शिकायतों की जांच, प्रारंभिक जांच, अन्वेषण की अनुशंसा तथा अधिनियम के अनुसार अन्य वैधानिक कार्यवाहियों से संबंधित शक्तियाँ प्रदान की गई हैं। अतः कारण सही है जबकि कथन गलत है।

प्रश्न 48: कथन (A): केंद्रीय सूचना आयोग प्रत्येक सूचना आवेदन पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई प्रारंभ कर सकता है। कारण (R): क्योंकि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 आयोग को मुख्यतः शिकायतों एवं द्वितीय अपीलों के संदर्भ में अधिकार प्रदान करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है।
  • D. A गलत है पर R सही है। ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि केंद्रीय सूचना आयोग प्रत्येक सूचना आवेदन पर स्वतः संज्ञान लेकर कार्यवाही प्रारंभ नहीं करता। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत वह मुख्यतः शिकायतों (धारा 18) तथा द्वितीय अपीलों (धारा 19) की सुनवाई करता है। कारण सही है क्योंकि अधिनियम आयोग की अधिकारिता को मुख्यतः शिकायतों एवं द्वितीय अपीलों तक सीमित करता है। अतः कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 49: कथन (A): केंद्रीय सतर्कता आयोग, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित कुछ मामलों की जांच के पर्यवेक्षण का कार्य करता है। कारण (R): क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग स्वयं सभी भ्रष्टाचार मामलों की प्रत्यक्ष आपराधिक जांच करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 के अंतर्गत आयोग को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित कुछ जांचों के पर्यवेक्षण का अधिकार प्राप्त है। कारण गलत है क्योंकि आयोग स्वयं सभी मामलों की प्रत्यक्ष आपराधिक जांच नहीं करता; वास्तविक जांच का कार्य संबंधित अन्वेषण एजेंसियाँ करती हैं। आयोग मुख्यतः पर्यवेक्षी एवं सलाहकारी भूमिका निभाता है। अतः कथन सही तथा कारण गलत है।

प्रश्न 50: कथन (A): राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग किसी न्यायालय में लंबित मानवाधिकार संबंधी मामले में, संबंधित न्यायालय की अनुमति से हस्तक्षेप कर सकता है। कारण (R): क्योंकि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को ऐसे मामलों में न्यायालय की अनुमति प्राप्त होने पर हस्तक्षेप करने की शक्ति प्रदान करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अनुसार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग किसी न्यायालय के समक्ष लंबित मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित मामले में संबंधित न्यायालय की अनुमति से हस्तक्षेप कर सकता है। कारण भी सही है और वही इस शक्ति का वैधानिक आधार स्पष्ट करता है। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या है।

प्रश्न 51: कथन (A): केंद्रीय सूचना आयोग को सूचना उपलब्ध कराने के संबंध में उपयुक्त निर्देश जारी करने की शक्ति प्राप्त है। कारण (R): क्योंकि केंद्रीय सूचना आयोग का उद्देश्य सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि केंद्रीय सूचना आयोग अपील अथवा शिकायत का निस्तारण करते समय सूचना उपलब्ध कराने, अभिलेख प्रबंधन में सुधार तथा अधिनियम के अनुपालन हेतु आवश्यक निर्देश दे सकता है। कारण भी सही है क्योंकि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 का मूल उद्देश्य पारदर्शिता एवं जवाबदेही को बढ़ावा देना है और आयोग उसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु कार्य करता है। इसलिए कारण, कथन की सही व्याख्या है।

प्रश्न 52: कथन (A): लोकपाल के अधिकार-क्षेत्र में किसी भी प्रकार का लोक सेवक कभी नहीं आता। कारण (R): लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के अंतर्गत लोकपाल को कुछ श्रेणियों के लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच का अधिकार दिया गया है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि लोकपाल का गठन ही उच्च लोक पदाधिकारियों एवं अन्य निर्दिष्ट लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच के उद्देश्य से किया गया है। कारण सही है क्योंकि लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 इसके अधिकार-क्षेत्र का विधिक आधार प्रदान करता है। अतः कथन गलत तथा कारण सही है। अतिरिक्त तथ्य के रूप में लोकपाल का अधिकार-क्षेत्र अधिनियम द्वारा निर्धारित सीमाओं के अधीन होता है।

प्रश्न 53: कथन (A): राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग किसी न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय को निरस्त कर सकता है। कारण (R): क्योंकि आयोग मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की जांच कर सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को किसी न्यायालय के निर्णय को निरस्त, संशोधित अथवा पलटने की शक्ति प्राप्त नहीं है। कारण सही है क्योंकि आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की जांच, अनुशंसा तथा रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकता है। आयोग की अनुशंसाएँ सामान्यतः बाध्यकारी नहीं होतीं। अतः कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 54: कथन (A): केंद्रीय सतर्कता आयोग को केंद्रीय सरकार के अधीन सतर्कता प्रशासन की निगरानी का दायित्व सौंपा गया है। कारण (R): क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 ने आयोग को भ्रष्टाचार निरोधक तंत्र की निगरानी संबंधी वैधानिक आधार प्रदान किया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग केंद्रीय सरकार के विभिन्न विभागों एवं संगठनों में सतर्कता प्रशासन की निगरानी करता है। कारण भी सही है क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 ने आयोग को वैधानिक दर्जा एवं आवश्यक शक्तियाँ प्रदान कीं, जिनके आधार पर वह भ्रष्टाचार निरोधक व्यवस्था की निगरानी करता है। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या है।

प्रश्न 55: कथन (A): केंद्रीय सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत केंद्रीय लोक प्राधिकरणों से संबंधित दायर द्वितीय अपीलों का निर्णय करता है। कारण (R): क्योंकि प्रत्येक लोक प्राधिकरण के विरुद्ध सूचना संबंधी विवादों में केंद्रीय सूचना आयोग प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के रूप में कार्य करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है, परन्तु R गलत है। ✓
  • D. A गलत है, परन्तु R सही है।
सही उत्तर: C — A सही है, परन्तु R गलत है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि केंद्रीय सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत केंद्रीय लोक प्राधिकरणों से संबंधित मामलों में दायर द्वितीय अपीलों तथा शिकायतों की सुनवाई करता है। राज्य लोक प्राधिकरणों से संबंधित द्वितीय अपीलों की सुनवाई संबंधित राज्य सूचना आयोग करता है। कारण गलत है क्योंकि प्रथम अपील संबंधित लोक प्राधिकरण द्वारा नामित प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष दायर की जाती है, न कि केंद्रीय सूचना आयोग के समक्ष। केंद्रीय सूचना आयोग द्वितीय अपीलीय निकाय के रूप में कार्य करता है। अतः कथन सही तथा कारण गलत है।

प्रश्न 56: कथन (A): लोकपाल एक वैधानिक निकाय है। कारण (R): क्योंकि इसकी स्थापना लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 द्वारा की गई है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि लोकपाल एक वैधानिक निकाय है। कारण भी सही है क्योंकि इसकी स्थापना लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के माध्यम से की गई। यही तथ्य लोकपाल के वैधानिक स्वरूप का आधार है, इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या करता है। लोकपाल का गठन संविधान के किसी अनुच्छेद के अंतर्गत नहीं किया गया है।

प्रश्न 57: कथन (A): लोकपाल का गठन संविधान के मूल पाठ में एक संवैधानिक संस्था के रूप में किया गया था। कारण (R): लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के माध्यम से लोकपाल की स्थापना का प्रावधान किया गया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि लोकपाल संविधान के मूल पाठ में स्थापित कोई संवैधानिक संस्था नहीं है। कारण सही है क्योंकि लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के माध्यम से लोकपाल की स्थापना का प्रावधान किया गया, जिससे यह एक वैधानिक निकाय बना। अतः कथन गलत तथा कारण सही है। लोकपाल का उद्देश्य उच्च लोक पदाधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच करना है।

प्रश्न 58: कथन (A): केंद्रीय सतर्कता आयोग एक बहुसदस्यीय वैधानिक निकाय है। कारण (R): क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग का गठन सीधे संविधान के प्रावधानों द्वारा किया गया है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 के अंतर्गत स्थापित बहुसदस्यीय वैधानिक निकाय है, जिसमें एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त तथा अधिकतम दो सतर्कता आयुक्त होते हैं। कारण गलत है क्योंकि इसका गठन संविधान द्वारा नहीं, बल्कि संसद द्वारा बनाए गए अधिनियम के माध्यम से हुआ है। अतः यह संवैधानिक नहीं बल्कि वैधानिक निकाय है।

प्रश्न 59: कथन (A): केंद्रीय सूचना आयोग का गठन सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत किया गया है। कारण (R): क्योंकि केंद्रीय सूचना आयोग का मुख्य कार्य सभी लोक प्राधिकारों के प्रशासनिक निर्णयों को अनुमोदित करना है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि केंद्रीय सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत स्थापित एक वैधानिक निकाय है। कारण गलत है क्योंकि आयोग का मुख्य कार्य लोक प्राधिकारों के प्रशासनिक निर्णयों का अनुमोदन करना नहीं, बल्कि सूचना प्राप्ति से संबंधित द्वितीय अपीलों एवं शिकायतों का निस्तारण करना तथा सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है। आयोग आवश्यक होने पर सूचना उपलब्ध कराने के संबंध में निर्देश दे सकता है, किंतु वह सामान्य प्रशासनिक निर्णयों को स्वीकृति प्रदान करने वाला निकाय नहीं है। अतः कथन सही तथा कारण गलत है।

प्रश्न 60: कथन (A): राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत किया गया है। कारण (R): क्योंकि भारत में मानवाधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु एक वैधानिक निकाय की स्थापना का प्रावधान इसी अधिनियम द्वारा किया गया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय के रूप में किया गया। कारण भी सही है क्योंकि इसी अधिनियम का उद्देश्य मानवाधिकारों के बेहतर संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर पर आयोगों की स्थापना करना था। अतः कारण, कथन की प्रत्यक्ष एवं सही व्याख्या करता है। यह आयोग संवैधानिक निकाय नहीं बल्कि वैधानिक निकाय है।

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