प्रश्न 1: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) किसी शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संस्थागत क्षमता एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। (2) यदि संस्थागत क्षमता कमजोर हो, तो केवल अधिक पारदर्शिता से सभी प्रशासनिक समस्याओं का समाधान आवश्यक रूप से हो जाएगा। (3) सुशासन के लिए संस्थागत सुधार और प्रक्रियागत सुधार दोनों महत्त्वपूर्ण हो सकते हैं।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 1 और 3
✓
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
B
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
पहला और तीसरा कथन सही हैं। पारदर्शिता आवश्यक है, परंतु अकेले उससे सभी समस्याओं का समाधान नहीं होता; संस्थागत क्षमता, संसाधन, प्रक्रियाएँ और उत्तरदायित्व भी आवश्यक हैं। दूसरा कथन Single Solution Trap है।
प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन लोक-केंद्रित शासन की सर्वोत्तम व्याख्या करता है?
-
A.
शासन व्यवस्था का मूल्यांकन केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों के वास्तविक अनुभव और परिणामों से भी किया जाना चाहिए।
✓
-
B.
शासन का मुख्य उद्देश्य केवल प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखना है।
-
C.
यदि नियमों का पालन हो रहा है, तो नागरिक अनुभव अप्रासंगिक है।
-
D.
लोक-केंद्रित शासन का संबंध केवल कल्याणकारी योजनाओं से है।
सही उत्तर:
A
— शासन व्यवस्था का मूल्यांकन केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों के वास्तविक अनुभव और परिणामों से भी किया जाना चाहिए।
व्याख्या (Explanation):
लोक-केंद्रित शासन (People-Centred Governance) नागरिक अनुभव, सेवा गुणवत्ता, समावेशन और परिणामों पर बल देता है। अन्य विकल्प शासन को अत्यधिक संकीर्ण रूप में प्रस्तुत करते हैं।
प्रश्न 3: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) शासन में Feedback Loop केवल शिकायतों तक सीमित नहीं होता। (2) स्वतंत्र मूल्यांकन, नागरिक अनुभव और सेवा आँकड़े—तीनों भविष्य की नीति को प्रभावित कर सकते हैं। (3) एक बार नीति लागू होने के बाद उसमें परिवर्तन करना सुशासन के विरुद्ध माना जाता है।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 2
✓
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
C
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
शासन में Feedback Loop एक सतत सुधार तंत्र है जिसमें विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर नीति में परिवर्तन किए जा सकते हैं। तीसरा कथन गलत है क्योंकि अनुकूलनशीलता सुशासन का महत्वपूर्ण तत्व है।
प्रश्न 4: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) प्रशासनिक विवेकाधिकार का पूर्ण उन्मूलन प्रत्येक परिस्थिति में सुशासन के अनुकूल होगा। (2) विवेकाधिकार के प्रयोग के साथ स्पष्ट मानक और उत्तरदायित्व व्यवस्था होने पर मनमानी की संभावना कम की जा सकती है। (3) विवेकाधिकार और विधि का शासन परस्पर अनिवार्य रूप से विरोधी हैं।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 2
-
D.
केवल 2
✓
सही उत्तर:
D
— केवल 2
व्याख्या (Explanation):
प्रशासनिक विवेकाधिकार कई परिस्थितियों में आवश्यक होता है, पर उसका प्रयोग स्पष्ट मानकों, कारणयुक्त निर्णय और उत्तरदायित्व के साथ होना चाहिए। पहला और तीसरा कथन अतिशयोक्तिपूर्ण हैं।
प्रश्न 5: यदि किसी सार्वजनिक नीति का मूल्यांकन केवल औसत राष्ट्रीय आँकड़ों के आधार पर किया जाए, तो निम्नलिखित में से कौन-सी सीमा उत्पन्न हो सकती है?
-
A.
क्षेत्रीय एवं सामाजिक असमानताओं का पर्याप्त आकलन नहीं हो पाएगा।
✓
-
B.
विधिक वैधता स्वतः समाप्त हो जाएगी।
-
C.
वित्तीय अनुशासन का मूल्यांकन असंभव हो जाएगा।
-
D.
नीति का कोई भी निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकेगा।
सही उत्तर:
A
— क्षेत्रीय एवं सामाजिक असमानताओं का पर्याप्त आकलन नहीं हो पाएगा।
व्याख्या (Explanation):
औसत आँकड़े अनेक बार क्षेत्रीय, लैंगिक या सामाजिक विषमताओं को छिपा देते हैं। इसलिए केवल औसत के आधार पर नीति का मूल्यांकन अधूरा हो सकता है। अन्य विकल्प अतिरंजित हैं।
प्रश्न 6: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) शासन में सीखने की क्षमता का अर्थ केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है। (2) यदि किसी संस्था द्वारा पूर्व की त्रुटियों के आधार पर नियमों और प्रक्रियाओं में सुधार किया जाए, तो यह संस्थागत सीखने का उदाहरण हो सकता है। (3) संस्थागत सीखने का शासन की अनुकूलन क्षमता से कोई संबंध नहीं है।
-
A.
केवल 1 और 3
-
B.
केवल 1 और 2
✓
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
B
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
संस्थागत सीखना केवल प्रशिक्षण नहीं बल्कि अनुभवों से प्रक्रियागत सुधार करना भी है। तीसरा कथन गलत है क्योंकि सीखना और अनुकूलन एक-दूसरे से जुड़े हैं।
प्रश्न 7: निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष सर्वाधिक उपयुक्त है?
-
A.
यदि किसी नीति का उद्देश्य लोकहितकारी है, तो उसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया का महत्व गौण हो जाता है।
-
B.
प्रभावी परिणाम प्राप्त होने पर प्रक्रियात्मक निष्पक्षता का मूल्यांकन आवश्यक नहीं रहता।
-
C.
लोकतांत्रिक शासन में उद्देश्य और प्रक्रिया दोनों की वैधता सार्वजनिक स्वीकार्यता को प्रभावित करती है।
✓
-
D.
प्रक्रियात्मक वैधता केवल न्यायिक कार्यवाही में प्रासंगिक होती है।
सही उत्तर:
C
— लोकतांत्रिक शासन में उद्देश्य और प्रक्रिया दोनों की वैधता सार्वजनिक स्वीकार्यता को प्रभावित करती है।
व्याख्या (Explanation):
लोकतांत्रिक शासन में साधन और उद्देश्य दोनों का महत्व है। केवल अच्छे परिणाम से प्रक्रियात्मक कमियाँ उचित नहीं ठहरतीं।
प्रश्न 8: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) शासन में वैधता और विश्वास एक-दूसरे को प्रभावित कर सकते हैं, परंतु दोनों समानार्थी नहीं हैं। (2) उच्च सार्वजनिक विश्वास का अर्थ यह नहीं कि संस्थागत उत्तरदायित्व की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। (3) यदि किसी संस्था पर सार्वजनिक विश्वास हो, तो उसकी प्रक्रियाओं का परीक्षण आवश्यक नहीं रहता।
-
A.
केवल 1 और 2
✓
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
विश्वास और वैधता परस्पर जुड़े हैं, पर समान नहीं। विश्वास होने पर भी उत्तरदायित्व और समीक्षा आवश्यक रहती है।
प्रश्न 9: यदि किसी प्रशासनिक व्यवस्था में सभी निर्णयों का पूर्ण केन्द्रीकरण कर दिया जाए ताकि नीति-क्रियान्वयन में एकरूपता बनी रहे, तो निम्नलिखित में से कौन-सा संभावित निष्कर्ष सर्वाधिक उपयुक्त है?
-
A.
स्थानीय नवाचार स्वतः बढ़ जाएगा।
-
B.
नागरिक सहभागिता आवश्यक रूप से बढ़ेगी।
-
C.
प्रशासनिक उत्तरदायित्व समाप्त हो जाएगा।
-
D.
नीति की एकरूपता बढ़ सकती है, किन्तु स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलन प्रभावित हो सकता है।
✓
सही उत्तर:
D
— नीति की एकरूपता बढ़ सकती है, किन्तु स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलन प्रभावित हो सकता है।
व्याख्या (Explanation):
अत्यधिक केंद्रीकरण से नीति की समानता बढ़ सकती है, पर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार लचीलापन कम हो सकता है। A और B आवश्यक परिणाम नहीं हैं तथा C अतिशयोक्तिपूर्ण है।
प्रश्न 10: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) किसी शासन सुधार की स्थिरता का आकलन केवल उसके प्रारम्भिक परिणामों से नहीं किया जा सकता। (2) यदि कोई सुधार राजनीतिक परिवर्तन के बाद भी संस्थागत रूप से कार्य करता रहे, तो यह उसकी संस्थागत परिपक्वता का संकेत हो सकता है। (3) किसी शासन सुधार की सफलता का एकमात्र मापदण्ड उसका अल्पकालिक जनसमर्थन है।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 1 और 2
✓
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
B
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
पहला और दूसरा कथन सही हैं। शासन सुधार की वास्तविक सफलता उसकी संस्थागत स्थिरता, निरंतरता और दीर्घकालिक प्रभाव से भी आँकी जाती है। तीसरा कथन गलत है क्योंकि जनसमर्थन महत्त्वपूर्ण हो सकता है, पर वह अकेला मापदण्ड नहीं है।
प्रश्न 11: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) किसी शासन व्यवस्था में संस्थागत स्वायत्तता और संस्थागत उत्तरदायित्व परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि संतुलित रूप से सह-अस्तित्व में रह सकते हैं। (2) पूर्ण स्वायत्तता का अर्थ है कि संस्था किसी भी प्रकार की सार्वजनिक समीक्षा से मुक्त हो। (3) लोकतांत्रिक शासन में संस्थागत स्वतंत्रता का औचित्य उत्तरदायित्व की व्यवस्था के साथ और अधिक सुदृढ़ होता है।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 2
-
D.
केवल 1 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
संस्थागत स्वतंत्रता और उत्तरदायित्व एक-दूसरे के पूरक हैं। स्वतंत्रता का अर्थ सार्वजनिक समीक्षा से मुक्ति नहीं है।
प्रश्न 12: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) शासन सुधारों का मूल्यांकन केवल अल्पकालिक परिणामों से करना पर्याप्त नहीं होता। (2) दीर्घकालिक संस्थागत प्रभाव कभी-कभी प्रारंभिक प्रदर्शन संकेतकों से भिन्न हो सकते हैं। (3) यदि प्रारंभिक लक्ष्य पूरे हो जाएँ, तो आगे मूल्यांकन की आवश्यकता नहीं रहती।
-
A.
केवल 1 और 2
✓
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
शासन सुधारों का वास्तविक मूल्यांकन दीर्घकालिक संस्थागत प्रभाव, स्थिरता और नागरिक परिणामों से भी जुड़ा होता है।
प्रश्न 13: निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति Institutional Resilience का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है?
-
A.
सभी निर्णय केवल एक अधिकारी द्वारा लिए जाना।
-
B.
संकट की स्थिति में भी संस्थागत प्रक्रियाओं, सीखने की क्षमता तथा निरंतर सेवा उपलब्धता का बनाए रखना।
✓
-
C.
सभी नियमों को अस्थायी रूप से समाप्त कर देना।
-
D.
केवल अतिरिक्त बजट उपलब्ध करा देना।
सही उत्तर:
B
— संकट की स्थिति में भी संस्थागत प्रक्रियाओं, सीखने की क्षमता तथा निरंतर सेवा उपलब्धता का बनाए रखना।
व्याख्या (Explanation):
Institutional Resilience का अर्थ है कि संस्था संकट में भी सीखने, अनुकूलन और सेवा निरंतरता बनाए रखने में सक्षम हो। अन्य विकल्प आंशिक या भ्रामक हैं।
प्रश्न 14: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) किसी नीति की प्रभावशीलता और उसकी वैधता सदैव समान नहीं होती। (2) प्रभावी नीति अनिवार्य रूप से संवैधानिक रूप से उचित भी होगी। (3) लोकतांत्रिक शासन में साधन और उद्देश्य दोनों का मूल्यांकन महत्त्वपूर्ण है।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
✓
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
C
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
प्रभावशीलता और संवैधानिक वैधता अलग अवधारणाएँ हैं। कोई नीति प्रभावी हो सकती है, परंतु उसे वैधानिक एवं प्रक्रियात्मक कसौटियों पर भी खरा उतरना होगा। दूसरा कथन इसी कारण गलत है।
प्रश्न 15: यदि किसी शासन सुधार में अत्यधिक डिजिटलीकरण कर दिया जाए, परंतु वैकल्पिक ऑफ़लाइन व्यवस्था समाप्त होने से कुछ नागरिक सेवाओं से वंचित हो जाएँ, तो शासन के किस सिद्धांत की सबसे अधिक परीक्षा होगी?
-
A.
प्रशासनिक गोपनीयता
-
B.
वित्तीय अनुशासन
-
C.
प्रक्रियात्मक सरलता
-
D.
समावेशन तथा समान पहुँच
✓
सही उत्तर:
D
— समावेशन तथा समान पहुँच
व्याख्या (Explanation):
डिजिटलीकरण का उद्देश्य सेवा सुधार है, लेकिन यदि इससे कुछ वर्ग बाहर रह जाएँ तो समावेशी शासन प्रभावित होता है।
प्रश्न 16: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) जटिल सार्वजनिक समस्याओं के समाधान में विभिन्न संस्थाओं के बीच ज्ञान-साझाकरण उपयोगी हो सकता है। (2) संस्थागत समन्वय का अर्थ सभी संस्थाओं का विलय है। (3) समन्वित शासन में भूमिका स्पष्टता उतनी ही आवश्यक है जितनी सहयोग।
-
A.
केवल 1 और 3
✓
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 2
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
समन्वय और विलय समान नहीं हैं। संस्थाएँ स्वतंत्र रहते हुए भी सहयोग कर सकती हैं।
प्रश्न 17: निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष सार्वजनिक विश्वास की अवधारणा के सर्वाधिक अनुरूप है?
-
A.
विश्वास केवल सेवा वितरण की गति से उत्पन्न होता है।
-
B.
विश्वास प्रक्रिया की निष्पक्षता, निर्णय की विश्वसनीयता तथा संस्थागत उत्तरदायित्व के संयुक्त प्रभाव से विकसित हो सकता है।
✓
-
C.
विश्वास केवल विधिक अनुपालन का परिणाम है।
-
D.
विश्वास का शासन की गुणवत्ता से कोई संबंध नहीं है।
सही उत्तर:
B
— विश्वास प्रक्रिया की निष्पक्षता, निर्णय की विश्वसनीयता तथा संस्थागत उत्तरदायित्व के संयुक्त प्रभाव से विकसित हो सकता है।
व्याख्या (Explanation):
सार्वजनिक विश्वास बहुआयामी है। यह निष्पक्षता, उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और विश्वसनीय संस्थाओं के सम्मिलित प्रभाव से निर्मित होता है। अन्य विकल्प किसी एक कारक को पर्याप्त मानते हैं।
प्रश्न 18: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) Meta-Governance का आशय विभिन्न शासन व्यवस्थाओं के समन्वित संचालन के लिए व्यापक संस्थागत दिशा प्रदान करना हो सकता है। (2) Meta-Governance का अर्थ प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण को समाप्त करना है। (3) Meta-Governance में सरकार कभी-कभी समन्वयक की भूमिका निभाती है।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 2
-
D.
केवल 1 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
Meta-Governance में सरकार प्रत्यक्ष नियंत्रण के बजाय समन्वय, नियम निर्धारण और दिशा प्रदान कर सकती है। यह प्रशासनिक नियंत्रण की पूर्ण समाप्ति का सिद्धांत नहीं है। दूसरा कथन इसी कारण गलत है।
प्रश्न 19: यदि किसी मंत्रालय ने उत्कृष्ट प्रदर्शन संकेतक प्राप्त किए हों, किन्तु उसके निर्णयों का आधार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न हो तथा स्वतंत्र समीक्षा भी संभव न हो, तो निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष सर्वाधिक उपयुक्त होगा?
-
A.
दक्षता उत्तरदायित्व का विकल्प नहीं हो सकती।
✓
-
B.
उच्च प्रदर्शन संकेतक स्वयं पर्याप्त उत्तरदायित्व सिद्ध करते हैं।
-
C.
सार्वजनिक परिणामों के रहते प्रक्रियात्मक परीक्षण आवश्यक नहीं रहता।
-
D.
स्वतंत्र समीक्षा केवल न्यायपालिका का विषय है।
सही उत्तर:
A
— दक्षता उत्तरदायित्व का विकल्प नहीं हो सकती।
व्याख्या (Explanation):
शासन में प्रदर्शन महत्वपूर्ण है, परंतु उत्तरदायित्व के लिए निर्णय प्रक्रिया, समीक्षा और पारदर्शिता भी आवश्यक हैं। B और C दक्षता को पर्याप्त शर्त मान लेते हैं। D संस्थागत उत्तरदायित्व की अवधारणा को अनुचित रूप से सीमित करता है।
प्रश्न 20: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) किसी सार्वजनिक नीति की वैधता केवल उसके विधिक आधार से निर्धारित नहीं होती। (2) यदि किसी नीति का व्यापक सामाजिक स्वीकार हो, तो उसका विधिक परीक्षण अप्रासंगिक हो जाता है। (2) लोकतांत्रिक शासन में प्रक्रियात्मक वैधता तथा सामाजिक वैधता दोनों सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
✓
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
C
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
नीति की वैधता बहुआयामी होती है। केवल विधिक वैधता पर्याप्त नहीं होती, किंतु इसका अर्थ यह भी नहीं कि सामाजिक स्वीकार्यता विधिक समीक्षा का स्थान ले सकती है। इसलिए 1 और 3 सही हैं जबकि 2 गलत है।
प्रश्न 21: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) Behavioural Governance सार्वजनिक नीतियों में मानव व्यवहार की समझ का उपयोग कर सकती है। (2) Behavioural Governance का अर्थ नागरिकों की स्वतंत्रता को अनिवार्य रूप से समाप्त करना है। (3) व्यवहारगत अंतर्दृष्टियाँ (Behavioural Insights) सेवा वितरण की प्रभावशीलता बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
1, 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
Behavioural Governance का उद्देश्य मानव व्यवहार की समझ के आधार पर नीतियों और सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। इसका अर्थ नागरिक स्वतंत्रता समाप्त करना नहीं है। तीसरा कथन सही है क्योंकि व्यवहारगत अंतर्दृष्टियाँ अनुपालन, सेवा उपयोग और नीति परिणामों को बेहतर बना सकती हैं।
प्रश्न 22: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन संस्थागत क्षमता के संबंध में सर्वाधिक उपयुक्त है?
-
A.
इसमें मानव संसाधन, प्रक्रियाएँ, समन्वय, नेतृत्व तथा संसाधनों का समेकित उपयोग सम्मिलित हो सकता है।
✓
-
B.
इसका अर्थ केवल बजटीय संसाधनों की उपलब्धता है।
-
C.
यह केवल प्रशासनिक कर्मचारियों की संख्या से निर्धारित होती है।
-
D.
इसका संबंध केवल तकनीकी अवसंरचना से है।
सही उत्तर:
A
— इसमें मानव संसाधन, प्रक्रियाएँ, समन्वय, नेतृत्व तथा संसाधनों का समेकित उपयोग सम्मिलित हो सकता है।
व्याख्या (Explanation):
संस्थागत क्षमता बहुआयामी होती है। केवल धन, कर्मचारी या तकनीक पर्याप्त नहीं होते; नेतृत्व, समन्वय, प्रक्रियाएँ और संगठनात्मक दक्षता भी आवश्यक हैं।
प्रश्न 23: यदि किसी सरकारी कार्यक्रम का मूल्यांकन केवल पूर्वनिर्धारित संकेतकों के आधार पर किया जाए और अप्रत्याशित सामाजिक प्रभावों की अनदेखी कर दी जाए, तो यह मुख्यतः किस प्रकार की सीमा को दर्शाता है?
-
A.
संवैधानिक सीमा
-
B.
विधिक सीमा
-
C.
मूल्यांकन ढाँचे की सीमा
✓
-
D.
वित्तीय संघवाद की सीमा
सही उत्तर:
C
— मूल्यांकन ढाँचे की सीमा
व्याख्या (Explanation):
शासन मूल्यांकन में केवल पूर्वनिर्धारित संकेतकों पर निर्भर रहने से अनपेक्षित प्रभाव, व्यवहारगत परिवर्तन तथा दीर्घकालिक परिणाम छूट सकते हैं।
प्रश्न 24: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) नीति प्रतिपुष्टि का अर्थ है कि किसी नीति के प्रभाव भविष्य की नीति निर्माण प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। (2) Policy Feedback केवल बजटीय समीक्षा तक सीमित है। (3) प्रभाव मूल्यांकन से प्राप्त निष्कर्ष भविष्य के संस्थागत सुधारों का आधार बन सकते हैं।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 2
-
D.
केवल 1 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
Policy Feedback एक गतिशील अवधारणा है जिसमें नीतियों के परिणाम भविष्य के निर्णयों को प्रभावित करते हैं। इसे केवल बजट समीक्षा तक सीमित करना गलत है। तीसरा कथन इसी अवधारणा का विस्तार है।
प्रश्न 25: निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प विश्वास-आधारित शासन का सर्वोत्तम उदाहरण है?
-
A.
नियमों के पालन के साथ नागरिकों और प्रशासन के बीच पारस्परिक विश्वास को बढ़ाने वाली व्यवस्था।
✓
-
B.
निरीक्षण एवं उत्तरदायित्व की सभी व्यवस्थाओं को समाप्त कर देना।
-
C.
केवल स्व-घोषणा पर आधारित शासन, बिना किसी सत्यापन के।
-
D.
केवल दंडात्मक नियंत्रण पर आधारित प्रशासन।
सही उत्तर:
A
— नियमों के पालन के साथ नागरिकों और प्रशासन के बीच पारस्परिक विश्वास को बढ़ाने वाली व्यवस्था।
व्याख्या (Explanation):
विश्वास-आधारित शासन (Trust-based Governance) का अर्थ नियंत्रण समाप्त करना नहीं, बल्कि अनुपालन को विश्वास, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के संतुलन के साथ बढ़ाना है।
प्रश्न 26: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) Open Government का उद्देश्य केवल सरकारी आँकड़ों का प्रकाशन है। (2) Open Government में पारदर्शिता के साथ नागरिक सहभागिता और सहयोग भी महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। (3) Open Data, Open Government का एक घटक हो सकता है, पर दोनों समानार्थी नहीं हैं।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
✓
-
C.
केवल 1 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
B
— केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
Open Government एक व्यापक अवधारणा है जिसमें पारदर्शिता, सहभागिता और सहयोग सम्मिलित हैं। Open Data इसका एक महत्वपूर्ण साधन है, पर दोनों समानार्थी नहीं हैं। पहला कथन इसी कारण गलत है।
प्रश्न 27: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन क्षैतिज उत्तरदायित्व के संबंध में सर्वाधिक उपयुक्त है?
-
A.
केवल नागरिकों द्वारा सरकार को उत्तरदायी बनाना।
-
B.
केवल चुनावों के माध्यम से उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना।
-
C.
राज्य की विभिन्न संस्थाओं द्वारा एक-दूसरे की निगरानी एवं नियंत्रण की व्यवस्था।
✓
-
D.
केवल विभागीय वरिष्ठता के आधार पर नियंत्रण।
सही उत्तर:
C
— राज्य की विभिन्न संस्थाओं द्वारा एक-दूसरे की निगरानी एवं नियंत्रण की व्यवस्था।
व्याख्या (Explanation):
क्षैतिज उत्तरदायित्व का आशय शासन की संस्थाओं के बीच पारस्परिक निगरानी, नियंत्रण और संतुलन से है। इसे केवल चुनावी या नागरिक उत्तरदायित्व तक सीमित करना गलत है।
प्रश्न 28: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) Whole-of-Government Approach का उद्देश्य विभागीय समन्वय को बढ़ाना है। (2) यह मानकर चलता है कि जटिल सार्वजनिक समस्याओं का समाधान प्रायः एक ही विभाग द्वारा संभव होता है। (3) इस दृष्टिकोण में सूचना साझाकरण और समन्वित नीति क्रियान्वयन महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
-
A.
केवल 1 और 3
✓
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 2
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
A
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
Whole-of-Government Approach बहु-विभागीय समन्वय, साझा लक्ष्यों और एकीकृत नीति क्रियान्वयन पर आधारित है। दूसरा कथन गलत है क्योंकि यह दृष्टिकोण जटिल समस्याओं के लिए बहु-संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देता है।
प्रश्न 29: यदि किसी सरकारी विभाग के सभी सेवा मानक समय पर पूरे हो रहे हों, किन्तु सेवाएँ लगातार उन्हीं समूहों तक सीमित रहें जो पहले से अपेक्षाकृत सक्षम हैं, तो निम्नलिखित में से सबसे उपयुक्त निष्कर्ष क्या होगा?
-
A.
विभाग ने पूर्ण सुशासन प्राप्त कर लिया है।
-
B.
विभाग केवल दक्षता की समस्या से जूझ रहा है।
-
C.
समयबद्धता ही सेवा वितरण का अंतिम मापदंड है।
-
D.
सेवा वितरण में समानता एवं समावेशन का पक्ष कमजोर है।
✓
सही उत्तर:
D
— सेवा वितरण में समानता एवं समावेशन का पक्ष कमजोर है।
व्याख्या (Explanation):
यह प्रश्न Efficiency बनाम Equity के अंतर पर आधारित है। समयबद्ध सेवा आवश्यक है, पर यदि वंचित वर्ग तक पहुँच नहीं बनती तो समावेशी शासन का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। A और C आवश्यक एवं पर्याप्त की भूल हैं।
प्रश्न 30: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) प्रक्रिया उत्तरदायित्व का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्णय विधिसम्मत एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिए जाएँ। (2) परिणाम उत्तरदायित्व केवल व्यय की मात्रा का मूल्यांकन करता है। (3) सुशासन में प्रक्रिया और परिणाम—दोनों प्रकार की उत्तरदायित्व व्यवस्थाएँ परस्पर पूरक हो सकती हैं।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 1 और 3
✓
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
B
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
पहला कथन सही है क्योंकि प्रक्रिया उत्तरदायित्व विधिकता, निष्पक्षता और निर्धारित प्रक्रिया के पालन पर बल देता है। दूसरा कथन गलत है; परिणाम उत्तरदायित्व सामाजिक प्रभाव एवं उपलब्ध परिणामों का मूल्यांकन करता है, केवल व्यय का नहीं। तीसरा कथन सही है।
प्रश्न 31: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? नागरिक सह-उत्पादन का अर्थ है कि नागरिक सार्वजनिक सेवाओं के निर्माण या सुधार में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। (2) नागरिक सह-उत्पादन में सरकार की भूमिका समाप्त हो जाती है। (3) नागरिक सहभागिता कभी-कभी सेवा की गुणवत्ता और उत्तरदायित्व दोनों में सुधार ला सकती है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 3
✓
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
C
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
नागरिक सह-उत्पादन (Citizen Co-production) में नागरिक और सरकार मिलकर सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाते हैं। इससे सरकार की भूमिका समाप्त नहीं होती, बल्कि साझेदारी बढ़ती है। तीसरा कथन भी सही है क्योंकि सक्रिय सहभागिता सेवा गुणवत्ता और उत्तरदायित्व को बेहतर बना सकती है।
प्रश्न 32: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन नियामक शासन के संदर्भ में सर्वाधिक उपयुक्त है?
-
A.
इसका उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि निष्पक्ष अनुपालन और प्रभावी विनियमन सुनिश्चित करना भी है।
✓
-
B.
इसका उद्देश्य केवल दंड देना है।
-
C.
यह केवल निजी क्षेत्र तक सीमित है।
-
D.
यह केवल न्यायपालिका का कार्य है।
सही उत्तर:
A
— इसका उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि निष्पक्ष अनुपालन और प्रभावी विनियमन सुनिश्चित करना भी है।
व्याख्या (Explanation):
नियामक शासन में नियम निर्माण, अनुपालन, निगरानी और संतुलित प्रवर्तन सम्मिलित हैं। इसे केवल दंड, निजी क्षेत्र या न्यायपालिका तक सीमित करना गलत है।
प्रश्न 33: यदि किसी विभाग का प्रदर्शन केवल व्यय और कार्यों की संख्या से मापा जाए, जबकि नागरिक संतुष्टि, गुणवत्ता तथा दीर्घकालिक प्रभाव की उपेक्षा हो, तो यह मुख्यतः किस प्रकार की सीमा को दर्शाता है?
-
A.
विधिक उत्तरदायित्व की सीमा
-
B.
प्रदर्शन मापन की अपूर्णता
✓
-
C.
संघवाद की सीमा
-
D.
वित्त आयोग की सीमा
सही उत्तर:
B
— प्रदर्शन मापन की अपूर्णता
व्याख्या (Explanation):
आधुनिक शासन में प्रदर्शन का मूल्यांकन केवल इनपुट या आउटपुट से नहीं, बल्कि गुणवत्ता, प्रभाव और नागरिक अनुभव से भी किया जाता है।
प्रश्न 34: निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (1) नेटवर्क गवर्नेंस में विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय का महत्व होता है। (2) नेटवर्क गवर्नेंस का अर्थ प्रशासनिक पदानुक्रम का पूर्ण उन्मूलन है। (3) नेटवर्क गवर्नेंस में सूचना साझाकरण शासन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 3
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 1 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
नेटवर्क गवर्नेंस समन्वय और सहयोग पर आधारित है, लेकिन यह पदानुक्रम को पूर्णतः समाप्त नहीं करता। सूचना साझाकरण इसकी प्रभावशीलता का महत्त्वपूर्ण आधार है।
प्रश्न 35: निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के सर्वाधिक निकट है?
-
A.
नीति निर्माण में विश्वसनीय आँकड़ों, मूल्यांकन तथा शोध निष्कर्षों का उपयोग करना।
✓
-
B.
केवल जनमत के आधार पर नीति बनाना।
-
C.
केवल राजनीतिक घोषणापत्र पर आधारित नीति बनाना।
-
D.
केवल प्रशासनिक परंपरा के आधार पर निर्णय लेना।
सही उत्तर:
A
— नीति निर्माण में विश्वसनीय आँकड़ों, मूल्यांकन तथा शोध निष्कर्षों का उपयोग करना।
व्याख्या (Explanation):
साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में आँकड़ों, अनुसंधान, प्रभाव मूल्यांकन और अनुभवजन्य प्रमाणों का उपयोग किया जाता है। अन्य विकल्प नीति-निर्माण के सीमित आधार हैं।
प्रश्न 36: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) सार्वजनिक मूल्य की अवधारणा केवल राजस्व संग्रह से संबंधित है। (2) किसी सरकारी कार्यक्रम की वैधता नागरिकों द्वारा अनुभव किए गए सार्वजनिक लाभ से भी जुड़ी हो सकती है। (3) सार्वजनिक मूल्य का आकलन केवल आर्थिक लाभ से किया जाता है।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 2
✓
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
C
— केवल 2
व्याख्या (Explanation):
सार्वजनिक मूल्य (Public Value) नागरिकों को प्राप्त समग्र सार्वजनिक लाभ, विश्वास, वैधता एवं सेवा गुणवत्ता से जुड़ी अवधारणा है। इसे केवल आर्थिक लाभ या राजस्व से जोड़ना गलत है।
प्रश्न 37: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अनुकूली शासन का सर्वाधिक उपयुक्त वर्णन करता है?
-
A.
एक बार बनाई गई नीति में किसी प्रकार का परिवर्तन न करना।
-
B.
बदलती परिस्थितियों एवं प्राप्त अनुभवों के आधार पर नीतियों एवं प्रक्रियाओं में संशोधन करना।
✓
-
C.
केवल आपदा प्रबंधन से संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था।
-
D.
केवल डिजिटल माध्यम से शासन करना।
सही उत्तर:
B
— बदलती परिस्थितियों एवं प्राप्त अनुभवों के आधार पर नीतियों एवं प्रक्रियाओं में संशोधन करना।
व्याख्या (Explanation):
अनुकूली शासन का तात्पर्य बदलती परिस्थितियों, नए प्रमाणों और अनुभवों के आधार पर नीतियों में संशोधन करना है। इसे केवल आपदा प्रबंधन या डिजिटल शासन तक सीमित करना गलत है।
प्रश्न 38: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) सहयोगात्मक शासन में केवल सरकारी संस्थाएँ ही निर्णय प्रक्रिया का भाग होती हैं। (2) सहयोगात्मक शासन में नागरिक समाज, निजी क्षेत्र तथा समुदाय की भागीदारी परिस्थितियों के अनुसार महत्त्वपूर्ण हो सकती है। (3) सहयोगात्मक शासन से सरकार की उत्तरदायित्व संबंधी भूमिका समाप्त हो जाती है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 3
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
केवल 2
✓
सही उत्तर:
D
— केवल 2
व्याख्या (Explanation):
सहयोगात्मक शासन में विभिन्न हितधारकों की सहभागिता होती है, परंतु अंतिम सार्वजनिक उत्तरदायित्व सरकार का ही रहता है। पहला और तीसरा कथन इसी कारण गलत हैं।
प्रश्न 39: यदि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम का स्वतंत्र मूल्यांकन यह दर्शाता है कि निर्धारित लक्ष्य पूरे हुए, किंतु लक्षित वर्ग की वास्तविक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो निम्नलिखित में से सबसे उपयुक्त निष्कर्ष क्या होगा?
-
A.
कार्यक्रम के आउटपुट और आउटकम में अंतर रहा है।
✓
-
B.
कार्यक्रम पूर्णतः असफल माना जाएगा।
-
C.
वित्तीय प्रबंधन अवश्य ही दोषपूर्ण रहा होगा।
-
D.
योजना का मूल्यांकन केवल लाभार्थियों की संख्या से किया जाना चाहिए।
सही उत्तर:
A
— कार्यक्रम के आउटपुट और आउटकम में अंतर रहा है।
व्याख्या (Explanation):
यह प्रश्न Output और Outcome के भेद की समझ पर आधारित है। लक्ष्य पूरे होना (Output) और वास्तविक सामाजिक परिवर्तन (Outcome) अलग-अलग बातें हैं।
प्रश्न 40: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) परिणाम-आधारित शासन में केवल वित्तीय व्यय की मात्रा से कार्यक्रम की सफलता का आकलन नहीं किया जाता। (2) परिणाम-आधारित शासन में आउटपुट और आउटकम दोनों का मूल्यांकन आवश्यक हो सकता है। (3) यदि किसी योजना के सभी वित्तीय लक्ष्य प्राप्त हो जाएँ, तो उसके परिणाम भी आवश्यक रूप से संतोषजनक माने जाएँगे।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2 और 3
-
C.
केवल 1 और 2
✓
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
C
— केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
परिणाम-आधारित शासन केवल खर्च या भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वास्तविक सामाजिक प्रभाव पर भी बल देता है। तीसरा कथन गलत है क्योंकि अधिक व्यय या लक्ष्य-पूर्ति से स्वतः वांछित परिणाम सिद्ध नहीं होते।
प्रश्न 41: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) पारदर्शिता नागरिकों को शासन की निगरानी करने में सहायता करती है। जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शिता सदैव पर्याप्त होती है।
-
A.
केवल 2
-
B.
केवल 1
✓
-
C.
दोनों 1 और 2
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
B
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):
पहला कथन सही है क्योंकि सूचना उपलब्ध होने पर नागरिक शासन की निगरानी कर सकते हैं। दूसरा कथन गलत है क्योंकि केवल पारदर्शिता पर्याप्त नहीं; जवाबदेही के लिए शिकायत निवारण, दंडात्मक या सुधारात्मक तंत्र तथा संस्थागत उत्तरदायित्व भी आवश्यक हैं।
प्रश्न 42: सेवा वितरण प्रणाली के मूल्यांकन में निम्नलिखित में से किसे सबसे उपयुक्त संकेतक माना जाएगा?
-
A.
सेवा प्राप्त करने में लगने वाला समय, गुणवत्ता तथा नागरिक संतुष्टि
✓
-
B.
केवल विभाग का वार्षिक बजट
-
C.
केवल कर्मचारियों की संख्या
-
D.
केवल कार्यालयों की संख्या
सही उत्तर:
A
— सेवा प्राप्त करने में लगने वाला समय, गुणवत्ता तथा नागरिक संतुष्टि
व्याख्या (Explanation):
आधुनिक सेवा वितरण प्रणाली का मूल्यांकन केवल संसाधनों से नहीं बल्कि परिणामों के आधार पर किया जाता है, जैसे सेवा की गुणवत्ता, समयबद्धता, पहुँच और नागरिक संतुष्टि। अन्य विकल्प इनका आंशिक या अप्रत्यक्ष संकेत देते हैं।
प्रश्न 43: निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति सुशासन के सिद्धांतों के सर्वाधिक प्रतिकूल है?
-
A.
निर्णय प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी
-
B.
समयबद्ध सेवा वितरण
-
C.
प्रशासनिक निर्णयों का अनावश्यक गोपनीयकरण
✓
-
D.
शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था
सही उत्तर:
C
— प्रशासनिक निर्णयों का अनावश्यक गोपनीयकरण
व्याख्या (Explanation):
अनावश्यक गोपनीयता पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों को कमजोर करती है, जो सुशासन के मूल तत्व हैं। अन्य विकल्प सुशासन को सुदृढ़ करते हैं। ध्यान दें कि सभी सूचनाएँ सार्वजनिक नहीं हो सकतीं, परंतु अनावश्यक गोपनीयता उचित नहीं है।
प्रश्न 44: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन नागरिक चार्टर के संबंध में सही नहीं है?
-
A.
यह सेवा मानकों को सार्वजनिक करता है।
-
B.
यह नागरिकों की अपेक्षाओं को स्पष्ट करता है।
-
C.
यह सेवा वितरण में सुधार का प्रयास करता है।
-
D.
इसका प्रत्येक प्रावधान स्वतः न्यायालय में प्रवर्तनीय होता है।
✓
सही उत्तर:
D
— इसका प्रत्येक प्रावधान स्वतः न्यायालय में प्रवर्तनीय होता है।
व्याख्या (Explanation):
सामान्यतः नागरिक चार्टर एक प्रशासनिक प्रतिबद्धता है, न कि स्वतः न्यायालय में प्रवर्तनीय कानूनी दस्तावेज़। अन्य सभी कथन नागरिक चार्टर की वास्तविक विशेषताओं को दर्शाते हैं।
प्रश्न 45: यदि किसी विभाग ने नागरिकों को ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने, उसकी स्थिति देखने तथा निर्धारित समय में निस्तारण की सुविधा उपलब्ध कराई है, तो यह मुख्यतः किस सिद्धांत को सुदृढ़ करता है?
-
A.
पारदर्शिता एवं जवाबदेही
✓
-
B.
प्रशासनिक गोपनीयता
-
C.
विधायी सर्वोच्चता
-
D.
वित्तीय संघवाद
सही उत्तर:
A
— पारदर्शिता एवं जवाबदेही
व्याख्या (Explanation):
ऑनलाइन शिकायत प्रणाली, ट्रैकिंग और समयबद्ध निस्तारण नागरिकों को सूचना उपलब्ध कराते हैं तथा प्रशासन को उत्तरदायी बनाते हैं। इसलिए यह पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों को मजबूत करता है।
प्रश्न 46: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ई-गवर्नेंस और सुशासन के संबंध में सर्वाधिक उपयुक्त है?
-
A.
दोनों पूर्णतः समान अवधारणाएँ हैं।
-
B.
ई-गवर्नेंस, सुशासन प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।
✓
-
C.
सुशासन केवल ई-गवर्नेंस के माध्यम से ही संभव है।
-
D.
ई-गवर्नेंस का संबंध केवल सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग से है।
सही उत्तर:
B
— ई-गवर्नेंस, सुशासन प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।
व्याख्या (Explanation):
ई-गवर्नेंस तकनीक के माध्यम से शासन को अधिक दक्ष, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाता है, इसलिए यह सुशासन प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। किंतु सुशासन का दायरा इससे व्यापक है और इसमें विधि का शासन, सहभागिता तथा उत्तरदायित्व जैसे अन्य तत्व भी शामिल हैं।
प्रश्न 47: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) सामाजिक अंकेक्षण का उद्देश्य केवल वित्तीय अनियमितताओं की पहचान करना है। सामाजिक अंकेक्षण नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करता है। सामाजिक अंकेक्षण सेवा वितरण की गुणवत्ता पर भी प्रकाश डाल सकता है।
-
A.
केवल 1 और 2
-
B.
केवल 1 और 3
-
C.
केवल 2 और 3
✓
-
D.
1, 2 और 3
सही उत्तर:
C
— केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
पहला कथन गलत है क्योंकि सामाजिक अंकेक्षण केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है; यह कार्यान्वयन, लाभार्थियों, गुणवत्ता और पारदर्शिता का भी मूल्यांकन करता है। दूसरा और तीसरा कथन सही हैं।
प्रश्न 48: निम्नलिखित में से कौन-सा उदाहरण "प्रो-एक्टिव डिस्क्लोज़र" का सबसे उपयुक्त उदाहरण है?
-
A.
विभाग द्वारा महत्वपूर्ण सूचनाएँ बिना आवेदन के सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराना
✓
-
B.
प्रत्येक सूचना केवल आवेदन मिलने पर देना
-
C.
सभी अभिलेखों को गोपनीय घोषित करना
-
D.
केवल न्यायालय के निर्देश पर सूचना देना
सही उत्तर:
A
— विभाग द्वारा महत्वपूर्ण सूचनाएँ बिना आवेदन के सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराना
व्याख्या (Explanation):
स्वप्रेरित सूचना प्रकटीकरण का उद्देश्य नागरिकों को बिना आवेदन किए आवश्यक सूचनाएँ उपलब्ध कराना है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है और सूचना के अधिकार के अंतर्गत अनावश्यक आवेदनों की संख्या घट सकती है।
प्रश्न 49: यदि किसी सरकारी विभाग ने सेवाओं की समय-सीमा निर्धारित की है, परंतु उस समय-सीमा के उल्लंघन पर किसी प्रकार की उत्तरदायित्व व्यवस्था नहीं है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष सर्वाधिक उपयुक्त होगा?
-
A.
विभाग में पूर्ण सुशासन स्थापित हो गया है।
-
B.
केवल पारदर्शिता का अभाव है।
-
C.
केवल ई-गवर्नेंस का अभाव है।
-
D.
सेवा मानक तो निर्धारित हैं, पर जवाबदेही का तंत्र कमजोर है।
✓
सही उत्तर:
D
— सेवा मानक तो निर्धारित हैं, पर जवाबदेही का तंत्र कमजोर है।
व्याख्या (Explanation):
केवल सेवा मानक निर्धारित कर देना पर्याप्त नहीं है। यदि उनके उल्लंघन पर उत्तरदायित्व तय न हो, तो जवाबदेही कमजोर रहती है। सुशासन में सेवा मानकों के साथ उत्तरदायित्व एवं प्रभावी शिकायत निवारण भी आवश्यक है।
प्रश्न 50: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) सुशासन में केवल प्रशासनिक दक्षता पर्याप्त होती है। (2) नागरिक सहभागिता सुशासन का एक महत्वपूर्ण घटक है।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 2
✓
-
C.
दोनों 1 और 2
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
B
— केवल 2
व्याख्या (Explanation):
पहला कथन गलत है क्योंकि सुशासन केवल दक्षता तक सीमित नहीं है; इसमें पारदर्शिता, जवाबदेही, विधि का शासन, सहभागिता, समावेशन तथा उत्तरदायित्व भी शामिल हैं। दूसरा कथन सही है क्योंकि नागरिक सहभागिता से शासन अधिक उत्तरदायी एवं जनोन्मुख बनता है।
प्रश्न 51: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) ई-गवर्नेंस सुशासन का एक साधन है। (2) सुशासन की प्राप्ति केवल सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग पर निर्भर करती है।
-
A.
केवल 2
-
B.
दोनों 1 और 2
-
C.
केवल 1
✓
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
C
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):
पहला कथन सही है क्योंकि ई-गवर्नेंस सुशासन प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। दूसरा कथन गलत है क्योंकि सुशासन के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही, विधि का शासन, सहभागिता, दक्षता तथा उत्तरदायी संस्थाएँ भी आवश्यक हैं; केवल सूचना प्रौद्योगिकी पर्याप्त नहीं है।
प्रश्न 52: यदि किसी सरकारी सेवा में ऑनलाइन आवेदन, आवेदन की स्थिति का वास्तविक समय में अवलोकन तथा समय-सीमा निर्धारित हो, तो यह मुख्यतः किस सिद्धांत को सुदृढ़ करता है?
-
A.
पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व दोनों को
✓
-
B.
केवल प्रशासनिक गोपनीयता को
-
C.
केवल वित्तीय नियंत्रण को
-
D.
केवल विधायी सर्वोच्चता को
सही उत्तर:
A
— पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व दोनों को
व्याख्या (Explanation):
ऑनलाइन ट्रैकिंग, समय-सीमा और आवेदन की स्थिति की जानकारी नागरिकों को पारदर्शिता प्रदान करती है, जबकि निर्धारित समय में सेवा देने का दायित्व प्रशासन की जवाबदेही को मजबूत करता है।
प्रश्न 53: सुशासन के संदर्भ में "उत्तरदायित्व" और "पारदर्शिता" के बीच संबंध को सबसे उचित रूप से कौन-सा विकल्प व्यक्त करता है?
-
A.
दोनों परस्पर विरोधी सिद्धांत हैं।
-
B.
पारदर्शिता उत्तरदायित्व को प्रभावी बनाने का आधार प्रदान करती है।
✓
-
C.
उत्तरदायित्व होने पर पारदर्शिता की आवश्यकता नहीं रहती।
-
D.
दोनों का संबंध केवल न्यायपालिका से है।
सही उत्तर:
B
— पारदर्शिता उत्तरदायित्व को प्रभावी बनाने का आधार प्रदान करती है।
व्याख्या (Explanation):
पारदर्शिता के बिना नागरिकों या संस्थाओं के लिए प्रशासन से उत्तर मांगना कठिन हो जाता है। इसलिए पारदर्शिता जवाबदेही का आधार तैयार करती है। अन्य विकल्प या तो दोनों को विरोधी बताते हैं या उनके दायरे को अनुचित रूप से सीमित करते हैं।
प्रश्न 54: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन जन शिकायत निवारण प्रणाली के संबंध में सही नहीं है?
-
A.
यह नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
-
B.
यह प्रशासनिक उत्तरदायित्व को मजबूत कर सकती है।
-
C.
यह सेवा वितरण में सुधार का माध्यम बन सकती है।
-
D.
शिकायतों का अस्तित्व स्वयं इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन पूर्णतः विफल है।
✓
सही उत्तर:
D
— शिकायतों का अस्तित्व स्वयं इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन पूर्णतः विफल है।
व्याख्या (Explanation):
शिकायतों का होना किसी भी प्रशासन में स्वाभाविक है; महत्वपूर्ण यह है कि उनका समाधान कितना प्रभावी और समयबद्ध है।
प्रश्न 55: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सेवा वितरण प्रणाली के संबंध में सर्वाधिक उपयुक्त है?
-
A.
इसका मूल्यांकन केवल सेवाओं की उपलब्धता से नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, समयबद्धता और नागरिक संतुष्टि से भी किया जाता है।
✓
-
B.
इसका उद्देश्य केवल सरकारी व्यय बढ़ाना है।
-
C.
यह केवल शहरी क्षेत्रों में लागू होती है।
-
D.
इसका संबंध केवल ई-गवर्नेंस से है।
सही उत्तर:
A
— इसका मूल्यांकन केवल सेवाओं की उपलब्धता से नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, समयबद्धता और नागरिक संतुष्टि से भी किया जाता है।
व्याख्या (Explanation):
प्रभावी सेवा वितरण प्रणाली का आकलन सेवा की गुणवत्ता, समयबद्धता, पहुँच, दक्षता तथा नागरिक संतुष्टि के आधार पर किया जाता है। ई-गवर्नेंस इसका एक साधन हो सकता है, पर सम्पूर्ण सेवा वितरण प्रणाली का पर्याय नहीं है।
प्रश्न 56: यदि किसी सरकारी विभाग ने सभी सूचनाएँ वेबसाइट पर उपलब्ध करा दीं, किन्तु शिकायतों का समाधान समय पर नहीं किया, तो निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष सर्वाधिक उपयुक्त होगा?
-
A.
विभाग पूर्णतः सुशासन के सिद्धांतों का पालन कर रहा है।
-
B.
केवल ई-गवर्नेंस होने से सुशासन स्वतः स्थापित हो जाता है।
-
C.
पारदर्शिता तो बढ़ी है, पर जवाबदेही अभी भी अपर्याप्त है।
✓
-
D.
विभाग में सामाजिक अंकेक्षण की आवश्यकता नहीं है।
सही उत्तर:
C
— पारदर्शिता तो बढ़ी है, पर जवाबदेही अभी भी अपर्याप्त है।
व्याख्या (Explanation):
सूचना उपलब्ध कराना पारदर्शिता का संकेत है, लेकिन शिकायतों का समयबद्ध समाधान न होना जवाबदेही की कमी को दर्शाता है। सुशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
प्रश्न 57: निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति सामाजिक अंकेक्षण की भावना के सर्वाधिक अनुरूप है?
-
A.
विभाग द्वारा केवल आंतरिक लेखा-परीक्षण कराना
-
B.
स्थानीय समुदाय द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन की सार्वजनिक समीक्षा करना
✓
-
C.
केवल नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा व्यय का परीक्षण करना
-
D.
केवल न्यायालय द्वारा योजनाओं की वैधता की समीक्षा करना
सही उत्तर:
B
— स्थानीय समुदाय द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन की सार्वजनिक समीक्षा करना
व्याख्या (Explanation):
सामाजिक अंकेक्षण का मूल उद्देश्य नागरिकों एवं स्थानीय समुदाय की भागीदारी के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन की सार्वजनिक समीक्षा करना है। यह वित्तीय लेखा-परीक्षण या न्यायिक समीक्षा का विकल्प नहीं बल्कि सामाजिक जवाबदेही का माध्यम है।
प्रश्न 58: नागरिक चार्टर के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) यह सेवा मानकों का सार्वजनिक घोषणा-पत्र होता है। (2) सामान्यतः नागरिक चार्टर स्वयं में विधिक रूप से बाध्यकारी दस्तावेज़ नहीं होता। (3) इसका उद्देश्य नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को प्रोत्साहित करना है।
-
A.
केवल 1
-
B.
केवल 1 और 2
-
C.
केवल 2 और 3
-
D.
1, 2 और 3
✓
सही उत्तर:
D
— 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
नागरिक चार्टर सेवा मानकों, समय-सीमा तथा शिकायत निवारण संबंधी जानकारी का सार्वजनिक घोषणा-पत्र होता है। सामान्यतः यह स्वयं में विधिक रूप से बाध्यकारी दस्तावेज़ नहीं होता, जब तक किसी विशेष कानून द्वारा ऐसा प्रावधान न किया गया हो। इसका उद्देश्य नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण तथा प्रशासनिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना है।
प्रश्न 59: निम्नलिखित में से कौन-सा ई-गवर्नेंस का सर्वाधिक उपयुक्त उद्देश्य है?
-
A.
प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाना
✓
-
B.
सभी प्रशासनिक प्रक्रियाओं का निजीकरण करना
-
C.
सभी सरकारी सेवाओं को पूर्णतः ऑनलाइन कर देना, चाहे डिजिटल पहुँच उपलब्ध हो या नहीं
-
D.
सरकारी कार्यालयों को समाप्त कर देना
सही उत्तर:
A
— प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाना
व्याख्या (Explanation):
ई-गवर्नेंस का उद्देश्य केवल डिजिटलीकरण नहीं बल्कि प्रशासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, जवाबदेह तथा नागरिक-केंद्रित बनाना है।
प्रश्न 60: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है? (1) पारदर्शिता प्रशासनिक निर्णयों को सार्वजनिक परीक्षण के योग्य बनाती है। (2) जवाबदेही केवल विधायिका के प्रति उत्तरदायित्व तक सीमित होती है।
-
A.
केवल 2
-
B.
दोनों 1 और 2
-
C.
केवल 1
✓
-
D.
न तो 1, न ही 2
सही उत्तर:
C
— केवल 1
व्याख्या (Explanation):
पहला कथन सही है क्योंकि पारदर्शिता से निर्णय प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यवाही सार्वजनिक परीक्षण के दायरे में आती है, जिससे उत्तरदायित्व मजबूत होता है। दूसरा कथन गलत है क्योंकि जवाबदेही बहुआयामी है—यह विधायिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका, लेखा-परीक्षण संस्थाओं तथा नागरिकों के प्रति भी हो सकती है।
प्रश्न 61: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ई-गवर्नेंस के संबंध में सही है?
-
A.
इसका उद्देश्य केवल सरकारी अभिलेखों का डिजिटलीकरण है।
-
B.
इसका उपयोग केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित है।
-
C.
यह केवल आंतरिक सरकारी संचार के लिए प्रयुक्त होता है।
-
D.
यह प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता तथा नागरिक सेवाओं में सुधार का माध्यम है।
✓
सही उत्तर:
D
— यह प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता तथा नागरिक सेवाओं में सुधार का माध्यम है।
व्याख्या (Explanation):
ई-गवर्नेंस केवल अभिलेखों के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को बढ़ाना है।
प्रश्न 62: सेवा वितरण प्रणाली का नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण मुख्यतः किस पर बल देता है?
-
A.
सेवाओं की सुलभता, गुणवत्ता एवं समयबद्ध उपलब्धता
✓
-
B.
केवल प्रशासनिक नियंत्रण बढ़ाने पर
-
C.
विभागीय गोपनीयता बढ़ाने पर
-
D.
कागजी प्रक्रियाओं का विस्तार करने पर
सही उत्तर:
A
— सेवाओं की सुलभता, गुणवत्ता एवं समयबद्ध उपलब्धता
व्याख्या (Explanation):
नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवाएँ सरल, गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और समय पर नागरिकों तक पहुँचें। प्रशासनिक नियंत्रण, गोपनीयता या अनावश्यक कागजी कार्यवाही इस दृष्टिकोण के मूल उद्देश्य नहीं हैं।
प्रश्न 63: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन पारदर्शिता और जवाबदेही के संबंध को सबसे उचित रूप से व्यक्त करता है?
-
A.
दोनों एक-दूसरे से पूर्णतः असंबंधित हैं।
-
B.
केवल जवाबदेही आवश्यक है, पारदर्शिता नहीं।
-
C.
पारदर्शिता जवाबदेही को सुदृढ़ बनाने में सहायक होती है।
✓
-
D.
पारदर्शिता केवल निजी क्षेत्र पर लागू होती है।
सही उत्तर:
C
— पारदर्शिता जवाबदेही को सुदृढ़ बनाने में सहायक होती है।
व्याख्या (Explanation):
पारदर्शिता से सूचना उपलब्ध होती है, जिसके आधार पर नागरिक एवं संस्थाएँ प्रशासन से जवाब मांग सकती हैं। इसलिए पारदर्शिता और जवाबदेही परस्पर पूरक हैं। अन्य विकल्प या तो संबंध को नकारते हैं या उसका दायरा गलत बताते हैं।
प्रश्न 64: जन शिकायत निवारण प्रणाली की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक क्या माना जाएगा?
-
A.
शिकायतों की संख्या बढ़ना
-
B.
अधिक नियम बनाना
-
C.
नए कार्यालय खोलना
-
D.
शिकायतों का प्रभावी एवं समयबद्ध समाधान
✓
सही उत्तर:
D
— शिकायतों का प्रभावी एवं समयबद्ध समाधान
व्याख्या (Explanation):
किसी भी शिकायत निवारण प्रणाली का वास्तविक मूल्यांकन इस आधार पर होता है कि शिकायतों का समाधान कितना प्रभावी, निष्पक्ष और समयबद्ध हुआ। केवल शिकायतों की संख्या, नियमों की वृद्धि या नए कार्यालय खोलना सफलता का पर्याप्त संकेतक नहीं है।
प्रश्न 65: निम्नलिखित में से कौन-सा ई-गवर्नेंस का प्रत्यक्ष लाभ है?
-
A.
सेवाओं तक शीघ्र एवं सरल पहुँच
✓
-
B.
सभी प्रशासनिक स्तरों का उन्मूलन
-
C.
न्यायपालिका का स्थान लेना
-
D.
केवल कागजी अभिलेखों पर निर्भरता
सही उत्तर:
A
— सेवाओं तक शीघ्र एवं सरल पहुँच
व्याख्या (Explanation):
ई-गवर्नेंस से नागरिकों को सेवाएँ तेज़, सुविधाजनक और अधिक सुलभ रूप में प्राप्त होती हैं। इसका उद्देश्य प्रशासन को समाप्त करना या न्यायपालिका का स्थान लेना नहीं है, बल्कि डिजिटल माध्यम से सेवाओं को बेहतर बनाना है।
प्रश्न 66: नागरिक चार्टर सामान्यतः किस विषय को स्पष्ट करता है?
-
A.
संवैधानिक संशोधन की प्रक्रिया
-
B.
सेवाओं के मानक एवं समय-सीमा
✓
-
C.
न्यायिक पुनर्विलोकन की प्रक्रिया
-
D.
संसद की कार्यवाही
सही उत्तर:
B
— सेवाओं के मानक एवं समय-सीमा
व्याख्या (Explanation):
नागरिक चार्टर किसी विभाग द्वारा दी जाने वाली सेवाओं, उनकी गुणवत्ता, समय-सीमा तथा शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी देता है। यह संवैधानिक संशोधन, न्यायिक पुनर्विलोकन या संसदीय प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज नहीं है।
प्रश्न 67: सामाजिक अंकेक्षण का प्रमुख लाभ क्या है?
-
A.
कर संग्रह बढ़ाना
-
B.
न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना
-
C.
योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व बढ़ाना
✓
-
D.
सरकारी विभागों की संख्या बढ़ाना
सही उत्तर:
C
— योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व बढ़ाना
व्याख्या (Explanation):
सामाजिक अंकेक्षण में स्थानीय समुदाय योजनाओं के क्रियान्वयन और व्यय की सार्वजनिक समीक्षा करता है। इससे भ्रष्टाचार में कमी, पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ती है। यह कर संग्रह, न्यायिक प्रक्रिया या विभागों की संख्या बढ़ाने से संबंधित नहीं है।
प्रश्न 68: निम्नलिखित में से कौन-सा सुशासन के सिद्धांतों में सम्मिलित है?
-
A.
सहभागिता
✓
-
B.
प्रशासनिक गोपनीयता
-
C.
पूर्ण केंद्रीकरण
-
D.
मनमाना निर्णय
सही उत्तर:
A
— सहभागिता
व्याख्या (Explanation):
सहभागिता सुशासन का प्रमुख स्तंभ है, क्योंकि इससे नीति-निर्माण और क्रियान्वयन में नागरिकों की भूमिका बढ़ती है। अन्य विकल्प लोकतांत्रिक शासन के विपरीत हैं और पारदर्शिता तथा उत्तरदायित्व को कमजोर करते हैं।
प्रश्न 69: ई-गवर्नेंस में "जी2सी (Government to Citizen)" का तात्पर्य है
-
A.
सरकार से सरकार के बीच सेवाएँ
-
B.
सरकार से व्यवसायों के बीच सेवाएँ
-
C.
व्यवसाय से सरकार के बीच सेवाएँ
-
D.
सरकार से नागरिकों को सेवाएँ
✓
सही उत्तर:
D
— सरकार से नागरिकों को सेवाएँ
व्याख्या (Explanation):
जी2सी मॉडल में सरकार नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से सेवाएँ, प्रमाणपत्र, भुगतान, शिकायत निवारण तथा अन्य सुविधाएँ डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराती है। G2G सरकारों के बीच, G2B व्यवसायों के लिए तथा B2G व्यवसायों द्वारा सरकार से संबंधित प्रक्रियाओं को दर्शाता है।
प्रश्न 70: निम्नलिखित में से किसका प्रमुख उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है?
-
A.
वित्त आयोग
-
B.
सूचना का अधिकार
✓
-
C.
नीति आयोग
-
D.
निर्वाचन आयोग
सही उत्तर:
B
— सूचना का अधिकार
व्याख्या (Explanation):
सूचना का अधिकार नागरिकों को लोक प्राधिकरणों से सूचना प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार प्रदान करता है, जिससे शासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ता है। वित्त आयोग वित्तीय संसाधनों के बंटवारे से संबंधित है, नीति आयोग नीतिगत सहयोग देता है तथा निर्वाचन आयोग चुनावों का संचालन करता है।
प्रश्न 71: ई-गवर्नेंस के प्रभावी क्रियान्वयन से निम्नलिखित में से कौन-सा परिणाम अपेक्षित है?
-
A.
केवल सरकारी कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि
-
B.
नागरिकों और सरकार के बीच दूरी बढ़ना
-
C.
सेवाओं की दक्षता एवं पारदर्शिता में सुधार
✓
-
D.
प्रशासनिक प्रक्रियाओं का अधिक जटिल होना
सही उत्तर:
C
— सेवाओं की दक्षता एवं पारदर्शिता में सुधार
व्याख्या (Explanation):
ई-गवर्नेंस का उद्देश्य सेवा वितरण को तेज, पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित बनाना है। इससे प्रक्रियाएँ सरल होती हैं तथा भ्रष्टाचार और अनावश्यक विलंब में कमी आ सकती है।
प्रश्न 72: निम्नलिखित में से कौन-सा सुशासन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है?
-
A.
विधि का शासन
✓
-
B.
मनमाना प्रशासन
-
C.
अनिश्चित निर्णय प्रक्रिया
-
D.
उत्तरदायित्व का अभाव
सही उत्तर:
A
— विधि का शासन
व्याख्या (Explanation):
विधि का शासन सुशासन का आधारभूत सिद्धांत है, जिसके अनुसार सभी व्यक्ति और संस्थाएँ कानून के अधीन होते हैं। मनमाना प्रशासन, अनिश्चित निर्णय प्रक्रिया तथा जवाबदेही का अभाव सुशासन के विपरीत हैं।
प्रश्न 73: सेवा वितरण प्रणाली का मुख्य उद्देश्य क्या है?
-
A.
केवल सरकारी आय बढ़ाना
-
B.
नागरिकों तक सार्वजनिक सेवाओं को प्रभावी एवं समय पर पहुँचाना
✓
-
C.
न्यायपालिका का विस्तार करना
-
D.
केवल नए विभाग स्थापित करना
सही उत्तर:
B
— नागरिकों तक सार्वजनिक सेवाओं को प्रभावी एवं समय पर पहुँचाना
व्याख्या (Explanation):
सेवा वितरण प्रणाली का उद्देश्य नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ तथा समयबद्ध सार्वजनिक सेवाएँ उपलब्ध कराना है। यही सुशासन का व्यावहारिक पक्ष है। सरकारी आय बढ़ाना, न्यायपालिका का विस्तार या नए विभाग स्थापित करना इसका प्रत्यक्ष उद्देश्य नहीं है।
प्रश्न 74: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन जवाबदेही को सबसे अच्छी तरह व्यक्त करता है?
-
A.
केवल वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निर्णय लेना
-
B.
सरकारी अभिलेखों को गोपनीय रखना
-
C.
सार्वजनिक पदाधिकारी अपने कार्यों के लिए उत्तर देने के लिए बाध्य हों
✓
-
D.
नागरिकों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखना
सही उत्तर:
C
— सार्वजनिक पदाधिकारी अपने कार्यों के लिए उत्तर देने के लिए बाध्य हों
व्याख्या (Explanation):
जवाबदेही का अर्थ है कि सार्वजनिक अधिकारी अपने निर्णयों और कार्यों के लिए उत्तरदायी हों तथा आवश्यकता पड़ने पर उनका स्पष्टीकरण दें। यह सुशासन का केंद्रीय तत्व है। अन्य विकल्प या तो केंद्रीकरण अथवा गोपनीयता को बढ़ावा देते हैं, जो जवाबदेही के विपरीत हैं।
प्रश्न 75: जन शिकायत निवारण प्रणाली का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
-
A.
नई योजनाएँ बनाना
-
B.
अधिकारियों की नियुक्ति करना
-
C.
बजट तैयार करना
-
D.
नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान करना
✓
सही उत्तर:
D
— नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान करना
व्याख्या (Explanation):
जन शिकायत निवारण प्रणाली नागरिकों की प्रशासनिक शिकायतों का प्रभावी एवं समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के लिए विकसित की जाती है। यह सेवा वितरण की गुणवत्ता सुधारने का महत्वपूर्ण माध्यम है। नई योजनाएँ बनाना, नियुक्तियाँ करना अथवा बजट तैयार करना इसका उद्देश्य नहीं है।
प्रश्न 76: पारदर्शिता का सर्वाधिक उपयुक्त अर्थ क्या है?
-
A.
सरकारी निर्णयों एवं प्रक्रियाओं के संबंध में आवश्यक सूचना नागरिकों के लिए उपलब्ध होना
✓
-
B.
सभी सरकारी दस्तावेजों को बिना किसी अपवाद के सार्वजनिक करना
-
C.
केवल संसद को सूचना देना
-
D.
केवल न्यायपालिका को सूचना देना
सही उत्तर:
A
— सरकारी निर्णयों एवं प्रक्रियाओं के संबंध में आवश्यक सूचना नागरिकों के लिए उपलब्ध होना
व्याख्या (Explanation):
पारदर्शिता का अर्थ है कि शासन की प्रक्रियाएँ और आवश्यक सूचनाएँ विधिसम्मत सीमा तक नागरिकों के लिए उपलब्ध हों। इसका अर्थ यह नहीं कि प्रत्येक गोपनीय सूचना सार्वजनिक कर दी जाए।
प्रश्न 77: नागरिक चार्टर (Citizen's Charter) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
-
A.
नए कानून बनाना
-
B.
नागरिकों को सेवाओं के मानक एवं समय-सीमा की जानकारी देना
✓
-
C.
न्यायालयों के अधिकार बढ़ाना
-
D.
करों की दर निर्धारित करना
सही उत्तर:
B
— नागरिकों को सेवाओं के मानक एवं समय-सीमा की जानकारी देना
व्याख्या (Explanation):
नागरिक चार्टर किसी विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं, उनके मानकों, समय-सीमा तथा नागरिकों की अपेक्षाओं को स्पष्ट करता है। यह सेवा वितरण में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाने का साधन है। यह कानून नहीं बनाता, न्यायिक अधिकार नहीं बढ़ाता और कर निर्धारण से संबंधित नहीं है।
प्रश्न 78: निम्नलिखित में से कौन-सा उपकरण मुख्यतः सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की सार्वजनिक समीक्षा से संबंधित है?
-
A.
नागरिक चार्टर
-
B.
सूचना का अधिकार
-
C.
जन शिकायत निवारण
-
D.
सामाजिक अंकेक्षण
✓
सही उत्तर:
D
— सामाजिक अंकेक्षण
व्याख्या (Explanation):
सामाजिक अंकेक्षण में स्थानीय समुदाय स्वयं योजनाओं के क्रियान्वयन, व्यय और लाभार्थियों की सार्वजनिक समीक्षा करता है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना है। नागरिक चार्टर सेवा मानकों को बताता है, सूचना का अधिकार सूचना प्राप्त करने का अधिकार देता है तथा जन शिकायत निवारण व्यक्तिगत शिकायतों के समाधान का माध्यम है।
प्रश्न 79: ई-गवर्नेंस का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
-
A.
सरकारी कार्यालयों की संख्या बढ़ाना
-
B.
कागजी कार्यवाही को अनिवार्य बनाना
-
C.
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रशासनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना
✓
-
D.
केवल सरकारी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना
सही उत्तर:
C
— सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रशासनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना
व्याख्या (Explanation):
ई-गवर्नेंस का मूल उद्देश्य सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग करके प्रशासन को अधिक पारदर्शी, दक्ष, त्वरित तथा नागरिक-केंद्रित बनाना है। इसका लक्ष्य केवल डिजिटलीकरण नहीं बल्कि बेहतर सेवा वितरण भी है।
प्रश्न 80: सुशासन (Good Governance) की मूल विशेषता निम्नलिखित में से कौन-सी मानी जाती है?
-
A.
पारदर्शिता, जवाबदेही एवं जनभागीदारी
✓
-
B.
केवल प्रशासनिक गोपनीयता
-
C.
केवल सरकारी व्यय में वृद्धि
-
D.
केवल निर्णयों का केंद्रीकरण
सही उत्तर:
A
— पारदर्शिता, जवाबदेही एवं जनभागीदारी
व्याख्या (Explanation):
सुशासन का उद्देश्य प्रशासन को पारदर्शी, उत्तरदायी, सहभागी, प्रभावी तथा विधि के शासन पर आधारित बनाना है। पारदर्शिता नागरिकों को सूचना उपलब्ध कराती है, जबकि जवाबदेही अधिकारियों को अपने कार्यों के लिए उत्तर देने हेतु बाध्य करती है।
प्रश्न 81: कथन (A): यदि किसी शासन व्यवस्था में नागरिकों की सहभागिता संस्थागत रूप से सुनिश्चित हो, तो नीति-निर्णयों की गुणवत्ता अनिवार्य रूप से बेहतर होगी। कारण (R): संस्थागत नागरिक सहभागिता निर्णय-प्रक्रिया में विविध दृष्टिकोण और स्थानीय अनुभव जोड़ सकती है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि संस्थागत नागरिक सहभागिता से बेहतर निर्णयों की संभावना बढ़ती है, पर उनकी गुणवत्ता अनिवार्य रूप से बेहतर होगी यह निष्कर्ष उचित नहीं है। निर्णय की गुणवत्ता संसाधनों, विशेषज्ञता, क्रियान्वयन क्षमता और संस्थागत डिज़ाइन सहित अनेक कारकों पर निर्भर करती है। कारण सही है क्योंकि नागरिक सहभागिता विविध दृष्टिकोण और स्थानीय अनुभव उपलब्ध कराती है।
प्रश्न 82: कथन (A): पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन स्थापित करना सुशासन का अभिन्न अंग है। कारण (R): लोकतांत्रिक शासन में सभी सूचनाओं का असीमित प्रकटीकरण न तो व्यावहारिक है और न ही सदैव सार्वजनिक हित में।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
दोनों कथन सही हैं। सुशासन में अधिकतम पारदर्शिता का लक्ष्य रखा जाता है, किन्तु राष्ट्रीय सुरक्षा, व्यक्तिगत निजता, वाणिज्यिक गोपनीयता तथा वैध अपवादों के कारण कुछ सूचनाओं पर सीमित प्रतिबंध उचित हो सकते हैं। यही कारण है कि पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन आवश्यक माना जाता है।
प्रश्न 83: कथन (A): ई-गवर्नेंस में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निर्णय-सहायक प्रणालियों के उपयोग से प्रशासनिक विवेकाधिकार पूर्णतः समाप्त हो जाता है। कारण (R): AI आधारित प्रणालियाँ निर्णय-प्रक्रिया में सहायता कर सकती हैं, किन्तु सार्वजनिक प्रशासन में अंतिम उत्तरदायित्व सामान्यतः मानव प्राधिकारी पर ही रहता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि AI निर्णय-सहायक उपकरण हो सकता है, पर वह प्रशासनिक उत्तरदायित्व या वैधानिक विवेकाधिकार का पूर्ण विकल्प नहीं है। अंतिम निर्णय, वैधानिक दायित्व और जवाबदेही सामान्यतः सक्षम लोक प्राधिकारी के पास रहती है। कारण सही है और यही शासन-सिद्धांत का मूल है।
प्रश्न 84: कथन (A): किसी विभाग में शिकायतों के शीघ्र निस्तारण मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि विभाग प्रशासनिक सुधार हेतु अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं का नियमित विश्लेषण भी कर रहा है। कारण (R): शिकायत निवारण प्रणाली से प्राप्त आँकड़े प्रशासनिक सुधार हेतु महत्त्वपूर्ण प्रतिपुष्टि का स्रोत बन सकते हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
✓
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
B
— A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
व्याख्या (Explanation):
दोनों कथन सही हैं। शिकायत निवारण प्रणाली से प्राप्त आँकड़ों का उपयोग प्रशासनिक सुधार के लिए किया जा सकता है, किन्तु केवल शिकायतों के शीघ्र निस्तारण से यह सिद्ध नहीं होता कि विभाग वास्तव में इन आँकड़ों का विश्लेषण कर रहा है या उनसे संस्थागत सीख प्राप्त कर रहा है। अतः कारण सही होते हुए भी कथन की प्रत्यक्ष व्याख्या नहीं करता।
प्रश्न 85: कथन (A): किसी सेवा वितरण प्रणाली में सभी सेवाओं का समयबद्ध निष्पादन यह सिद्ध नहीं करता कि नागरिक-केंद्रित शासन के सिद्धांत प्रभावी रूप से लागू हैं। कारण (R): नागरिक-केंद्रित शासन में सेवा की समयबद्धता के साथ-साथ सेवा की गुणवत्ता, पहुँच, निष्पक्षता तथा शिकायत के प्रभावी निवारण का भी महत्व है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि समयबद्ध सेवा वितरण नागरिक-केंद्रित शासन का केवल एक आयाम है। यदि सेवा सुलभ, निष्पक्ष, गुणवत्तापूर्ण या उत्तरदायी नहीं है तो केवल समय-सीमा का पालन सुशासन सिद्ध नहीं करता। कारण भी सही है और सीधे कथन का आधार प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 86: कथन (A): सुशासन का मूल्यांकन करते समय प्रशासनिक दक्षता और लोकतांत्रिक वैधता के बीच कभी-कभी संतुलन स्थापित करना पड़ सकता है। कारण (R): सहभागी निर्णय-प्रक्रिया अनेक बार निर्णय लेने में अधिक समय ले सकती है, किन्तु उससे निर्णयों की स्वीकार्यता और उत्तरदायित्व बढ़ सकता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
दोनों कथन सही हैं। शासन में कई बार शीघ्र निर्णय और व्यापक परामर्श के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। सहभागी प्रक्रिया समय बढ़ा सकती है, पर उससे निर्णयों की वैधता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व में वृद्धि होती है। कारण, कथन का प्रत्यक्ष स्पष्टीकरण है।
प्रश्न 87: कथन (A): शिकायतों की कम संख्या किसी विभाग की उच्च प्रशासनिक गुणवत्ता का विश्वसनीय संकेतक मानी जा सकती है। कारण (R): शिकायतों की संख्या शिकायत दर्ज करने की सुगमता, नागरिक जागरूकता तथा शिकायत प्रणाली पर विश्वास से भी प्रभावित होती है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि कम शिकायतें बेहतर सेवा का संकेत हो सकती हैं, लेकिन यह कमजोर शिकायत व्यवस्था, कम जागरूकता या नागरिकों के अविश्वास का परिणाम भी हो सकती हैं। कारण सही है और यही बताता है कि शिकायतों की संख्या का सीधा अर्थ निकालना उचित नहीं।
प्रश्न 88: कथन (A): सामाजिक अंकेक्षण की प्रभावशीलता मुख्यतः उसके वैधानिक स्वरूप पर निर्भर करती है। कारण (R): यदि समुदाय की वास्तविक भागीदारी न हो, तो विधिक रूप से अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण भी औपचारिक प्रक्रिया बन सकता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि सामाजिक अंकेक्षण की सफलता केवल वैधानिक दर्जे पर निर्भर नहीं करती; वास्तविक सामुदायिक सहभागिता, अभिलेखों तक पहुँच, प्रशासनिक सहयोग और अनुवर्ती कार्रवाई भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। कारण सही है और प्रशासनिक व्यवहार की वास्तविकता को दर्शाता है।
प्रश्न 89: कथन (A): किसी ई-गवर्नेंस परियोजना की सफलता का मूल्यांकन केवल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के उपयोगकर्ताओं की संख्या से करना शासन-विश्लेषण की दृष्टि से पर्याप्त नहीं है। कारण (R): ई-गवर्नेंस का अंतिम उद्देश्य प्रशासनिक परिणामों, नागरिक अनुभव तथा सेवा वितरण की गुणवत्ता में सुधार है, न कि केवल डिजिटल लेन-देन की वृद्धि।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
दोनों कथन सही हैं। उपयोगकर्ताओं की संख्या मात्र एक आउटपुट संकेतक है, जबकि ई-गवर्नेंस का वास्तविक मूल्यांकन दक्षता, पारदर्शिता, नागरिक संतुष्टि, समावेशन तथा सेवा गुणवत्ता जैसे परिणामों पर आधारित होना चाहिए। कारण सीधे कथन की व्याख्या करता है।
प्रश्न 90: कथन (A): यदि किसी प्रशासनिक व्यवस्था में सूचना तक पहुँच का अधिकार प्रभावी हो, तो शासन में उत्तरदायित्व का स्तर अनिवार्य रूप से उच्च होगा। कारण (R): उत्तरदायित्व का प्रभाव केवल सूचना की उपलब्धता पर नहीं, बल्कि सूचना के आधार पर उत्तरदायित्व निर्धारित करने वाली संस्थाओं की प्रभावशीलता पर भी निर्भर करता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A सही है, R सही है, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि सूचना तक पहुँच उत्तरदायित्व की आवश्यक शर्त हो सकती है, परन्तु पर्याप्त शर्त नहीं। उत्तरदायित्व तभी प्रभावी बनता है जब शिकायत निवारण, स्वतंत्र निगरानी, दंडात्मक व्यवस्था और संस्थागत अनुपालन भी कार्य करें। कारण सही है और यही प्रशासनिक सिद्धांत स्थापित करता है।
प्रश्न 91: कथन (A): किसी शासन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के उपाय, यदि स्वतंत्र निगरानी एवं उत्तरदायित्व तंत्र से जुड़े न हों, तो उनके अपेक्षित परिणाम सीमित रह सकते हैं। कारण (R): पारदर्शिता मुख्यतः सूचना उपलब्ध कराती है, जबकि जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत प्रवर्तन, समीक्षा और सुधारात्मक कार्रवाई आवश्यक होती है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि सूचना उपलब्ध कराना शासन सुधार का पहला चरण है, अंतिम नहीं। यदि स्वतंत्र निगरानी, दायित्व निर्धारण तथा सुधारात्मक व्यवस्था प्रभावी न हो, तो पारदर्शिता का व्यावहारिक प्रभाव सीमित रह सकता है। कारण भी सही है और यही कथन का प्रत्यक्ष कारणात्मक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 92: कथन (A): जन शिकायतों की संख्या में वृद्धि को हमेशा प्रशासनिक विफलता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। कारण (R): प्रभावी शिकायत निवारण मंच उपलब्ध होने पर नागरिक शिकायत दर्ज कराने के प्रति अधिक जागरूक और सक्रिय हो सकते हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि शिकायतों की अधिक संख्या दो प्रकार की स्थितियाँ दर्शा सकती है—सेवा में वास्तविक कमियाँ अथवा शिकायत दर्ज करने की बेहतर व्यवस्था। कारण भी सही है क्योंकि जब शिकायत मंच सुलभ और विश्वसनीय होता है, तब नागरिक अधिक सक्रियता से शिकायतें दर्ज करते हैं। इसलिए केवल शिकायतों की संख्या के आधार पर प्रशासन की गुणवत्ता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
प्रश्न 93: कथन (A): प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पूर्ण डिजिटलीकरण से सभी नागरिकों के लिए सार्वजनिक सेवाओं तक समान पहुँच स्वतः सुनिश्चित हो जाती है। कारण (R): डिजिटल सेवा वितरण की प्रभावशीलता इंटरनेट उपलब्धता, डिजिटल साक्षरता तथा सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से भी प्रभावित होती है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि डिजिटलीकरण अपने-आप समान पहुँच की गारंटी नहीं देता। यदि इंटरनेट, उपकरण, डिजिटल साक्षरता या स्थानीय भाषा में सेवाएँ उपलब्ध न हों तो डिजिटल विभाजन बना रह सकता है। कारण सही है क्योंकि सेवा वितरण की वास्तविक सफलता तकनीक के साथ-साथ सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है।
प्रश्न 94: कथन (A): यदि किसी सार्वजनिक योजना में नागरिकों की भागीदारी केवल लाभार्थी चयन तक सीमित हो, तो उसे प्रभावी सहभागी शासन का पर्याप्त उदाहरण नहीं माना जा सकता। कारण (R): सहभागी शासन में नागरिकों की भूमिका नीति-निर्माण, कार्यान्वयन, निगरानी तथा मूल्यांकन जैसे विभिन्न चरणों तक विस्तृत हो सकती है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि वास्तविक सहभागी शासन केवल लाभार्थी चयन तक सीमित नहीं होता। नागरिक नीति-निर्माण, सामाजिक अंकेक्षण, निगरानी, प्रतिपुष्टि तथा मूल्यांकन में भी भूमिका निभा सकते हैं। कारण सही है और यही व्यापक अवधारणा कथन का प्रत्यक्ष आधार है।
प्रश्न 95: कथन (A): किसी विभाग में सेवाओं का समयबद्ध वितरण होना आवश्यक रूप से यह सिद्ध नहीं करता कि वहाँ सुशासन के सभी तत्व प्रभावी हैं। कारण (R): सुशासन का मूल्यांकन केवल दक्षता के आधार पर नहीं, बल्कि समानता, जवाबदेही, पारदर्शिता, सहभागिता तथा विधि के शासन जैसे मानकों पर भी किया जाता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि समयबद्ध सेवा वितरण सुशासन का एक महत्वपूर्ण संकेतक अवश्य है, किन्तु अकेला पर्याप्त नहीं। सुशासन बहुआयामी अवधारणा है जिसमें समानता, विधि का शासन, पारदर्शिता, जवाबदेही, नागरिक सहभागिता तथा प्रभावशीलता सभी सम्मिलित हैं। कारण भी सही है और स्पष्ट रूप से बताता है कि केवल दक्षता के आधार पर सुशासन का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
प्रश्न 96: कथन (A): सेवा वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के उपाय कभी-कभी प्रशासनिक जवाबदेही को सुदृढ़ कर सकते हैं, पर दोनों के बीच सदैव प्रत्यक्ष कारणात्मक संबंध होना आवश्यक नहीं है। कारण (R): पारदर्शिता सूचना की उपलब्धता सुनिश्चित करती है, जबकि जवाबदेही के लिए उत्तरदायित्व तय करने वाली संस्थागत व्यवस्था भी अपेक्षित होती है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि पारदर्शिता और जवाबदेही परस्पर जुड़े हुए हैं, किन्तु दोनों समानार्थी नहीं हैं। अनेक परिस्थितियों में पारदर्शिता जवाबदेही को मजबूत करती है, फिर भी यदि उत्तरदायित्व तय करने, निगरानी तथा दंडात्मक कार्रवाई की संस्थागत व्यवस्था कमजोर हो तो केवल सूचना उपलब्ध होने से जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती। कारण भी सही है और यही तथ्य कथन का प्रत्यक्ष स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 97: कथन (A): जन शिकायत निवारण प्रणाली का प्रभावी होना यह सिद्ध करता है कि संबंधित विभाग में सेवा वितरण की सभी समस्याएँ समाप्त हो चुकी हैं। कारण (R): प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली प्रशासन को सेवा वितरण संबंधी कमियों की पहचान तथा सुधार का अवसर प्रदान करती है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि शिकायत निवारण प्रणाली का प्रभावी होना सेवा वितरण की गुणवत्ता में सुधार का संकेत हो सकता है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी समस्याएँ समाप्त हो गई हैं। कारण सही है क्योंकि शिकायतों का विश्लेषण प्रणालीगत कमियों की पहचान तथा सुधारात्मक उपायों के लिए महत्वपूर्ण स्रोत होता है।
प्रश्न 98: कथन (A): ई-गवर्नेंस की सफलता का मूल्यांकन केवल ऑनलाइन उपलब्ध सेवाओं की संख्या से नहीं किया जा सकता। कारण (R): ई-गवर्नेंस का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता, नागरिक सुविधा, पारदर्शिता तथा सेवा की गुणवत्ता में सुधार करना भी है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि केवल सेवाओं की संख्या किसी ई-गवर्नेंस प्रणाली की सफलता का पर्याप्त संकेतक नहीं है। सेवा की गुणवत्ता, समयबद्धता, उपयोगकर्ता अनुभव, पारदर्शिता तथा प्रशासनिक दक्षता भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। कारण भी सही है और स्पष्ट करता है कि ई-गवर्नेंस का उद्देश्य मात्र डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि शासन की गुणवत्ता में सुधार है। इसलिए कारण, कथन की प्रत्यक्ष एवं पर्याप्त व्याख्या करता है।
प्रश्न 99: कथन (A): यदि किसी योजना का सामाजिक अंकेक्षण नियमित रूप से हो रहा हो, तो उस योजना में भ्रष्टाचार की संभावना नगण्य हो जाती है। कारण (R): सामाजिक अंकेक्षण सार्वजनिक व्यय, लाभार्थियों के अनुभव तथा क्रियान्वयन प्रक्रिया की सामुदायिक समीक्षा को प्रोत्साहित करता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि सामाजिक अंकेक्षण भ्रष्टाचार की संभावना को कम करने में सहायक हो सकता है, पर उसे नगण्य या लगभग समाप्त मान लेना उचित नहीं है। कारण सही है क्योंकि सामाजिक अंकेक्षण समुदाय को योजना के व्यय, गुणवत्ता, लाभार्थी चयन तथा क्रियान्वयन की समीक्षा का अवसर देता है।
प्रश्न 100: कथन (A): किसी विभाग द्वारा नागरिक चार्टर प्रकाशित कर देने मात्र से उस विभाग की प्रशासनिक जवाबदेही स्वतः स्थापित नहीं मानी जा सकती। कारण (R): प्रशासनिक जवाबदेही का निर्धारण केवल घोषित सेवा मानकों से नहीं, बल्कि उनके अनुपालन की निगरानी, उत्तरदायित्व निर्धारण, शिकायत निवारण तंत्र तथा सुधारात्मक व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता से भी होता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि नागरिक चार्टर मुख्यतः विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं, सेवा मानकों तथा नागरिकों के प्रति प्रशासनिक प्रतिबद्धताओं की घोषणा करता है। मात्र नागरिक चार्टर प्रकाशित कर देने से प्रशासनिक जवाबदेही स्वतः स्थापित नहीं हो जाती। कारण भी सही है क्योंकि वास्तविक प्रशासनिक जवाबदेही केवल सेवा मानकों की घोषणा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उनके प्रभावी अनुपालन, निगरानी, उत्तरदायित्व निर्धारण, शिकायत निवारण तथा आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की संस्थागत व्यवस्था पर भी आधारित होती है। अतः कारण, कथन की प्रत्यक्ष एवं पर्याप्त व्याख्या करता है।
प्रश्न 101: कथन (A): जन शिकायत निवारण प्रणाली का अस्तित्व अपने-आप में सुशासन की पूर्ण गारंटी है। कारण (R): शिकायत निवारण प्रणाली तभी प्रभावी होती है जब शिकायतों का समयबद्ध, निष्पक्ष एवं पारदर्शी निस्तारण हो।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
केवल शिकायत निवारण प्रणाली का अस्तित्व पर्याप्त नहीं है; उसकी प्रभावशीलता उसके वास्तविक कार्यान्वयन पर निर्भर करती है। समयबद्ध, निष्पक्ष एवं पारदर्शी निस्तारण ही ऐसी प्रणाली को सार्थक बनाता है। ‘पूर्ण गारंटी’ UPSC शैली का ट्रैप है, जो आवश्यक और पर्याप्त शर्तों के बीच अंतर की परीक्षा लेता है।
प्रश्न 102: कथन (A): पारदर्शिता नागरिकों को शासन के बारे में सूचित निर्णय लेने में सहायता कर सकती है। कारण (R): सूचना की उपलब्धता नागरिकों की सहभागिता और सार्वजनिक निगरानी को सशक्त बनाती है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
पर्याप्त एवं विश्वसनीय सूचना नागरिकों को शासन संबंधी निर्णयों, योजनाओं तथा नीतियों का मूल्यांकन करने में सक्षम बनाती है। सूचना की उपलब्धता से नागरिक सहभागिता तथा सार्वजनिक निगरानी मजबूत होती है, जिससे सूचित निर्णय संभव होते हैं। अतः कारण, कथन की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है।
प्रश्न 103: कथन (A): सुशासन की स्थापना केवल विधिक सुधारों से सुनिश्चित की जा सकती है। कारण (R): सुशासन के लिए संस्थागत क्षमता, नैतिक प्रशासन और नागरिक सहभागिता भी आवश्यक हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
केवल विधिक सुधार सुशासन के लिए पर्याप्त नहीं होते; संस्थागत दक्षता, नैतिकता, पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सहभागिता का समन्वय भी आवश्यक है। कारण सही है तथा सुशासन की बहुआयामी प्रकृति को स्पष्ट करता है। ‘केवल’ शब्द आवश्यक और पर्याप्त शर्तों में भ्रम उत्पन्न करता है।
प्रश्न 104: कथन (A): ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवा वितरण में कोई अंतर नहीं है। कारण (R): डिजिटल सेवा वितरण, ई-गवर्नेंस का एक महत्वपूर्ण घटक हो सकता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
ई-गवर्नेंस का दायरा व्यापक है जिसमें प्रशासनिक सुधार, आंतरिक कार्यप्रणाली, नागरिक सहभागिता तथा डिजिटल सेवा वितरण सभी सम्मिलित हो सकते हैं। डिजिटल सेवा वितरण उसका केवल एक भाग है। कारण सही है और इसी व्यापकता को स्पष्ट करता है। ‘कोई अंतर नहीं’ जैसे पूर्ण कथन UPSC के सामान्य ट्रैप होते हैं।
प्रश्न 105: कथन (A): सेवा वितरण प्रणाली की गुणवत्ता केवल तकनीकी संसाधनों पर निर्भर करती है। कारण (R): प्रभावी सेवा वितरण के लिए प्रशासनिक क्षमता, प्रक्रियागत सरलता और मानव संसाधन भी महत्वपूर्ण होते हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
सेवा वितरण की गुणवत्ता केवल तकनीक से निर्धारित नहीं होती; प्रशासनिक दक्षता, संस्थागत क्षमता, प्रशिक्षित कार्मिक तथा प्रक्रियाओं की सरलता भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। कारण सही है और सेवा वितरण की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट करता है। ‘केवल’ शब्द कथन को गलत बनाता है।
प्रश्न 106: कथन (A): प्रभावी जन शिकायत निवारण प्रणाली प्रशासनिक सुधारों का एक महत्वपूर्ण घटक मानी जाती है। कारण (R): शिकायतों के विश्लेषण से सेवा वितरण में सुधार हेतु प्रणालीगत कमियों की पहचान की जा सकती है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
जन शिकायत निवारण केवल विवाद समाधान का माध्यम नहीं बल्कि प्रशासनिक सुधार का उपकरण भी है। शिकायतों के विश्लेषण से प्रक्रियागत कमजोरियाँ, विलंब तथा सेवा वितरण की समस्याएँ सामने आती हैं, जिनके आधार पर सुधार किए जा सकते हैं। अतः कारण, कथन की उपयुक्त व्याख्या करता है।
प्रश्न 107: कथन (A): पारदर्शिता और जवाबदेही एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं। कारण (R): पारदर्शिता सूचना उपलब्ध कराती है, जबकि जवाबदेही निर्णयों और कार्यों के लिए उत्तरदायित्व सुनिश्चित करती है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
पारदर्शिता और जवाबदेही परस्पर संबंधित अवश्य हैं, लेकिन समानार्थी नहीं हैं। पारदर्शिता सूचना की उपलब्धता सुनिश्चित करती है, जबकि जवाबदेही निर्णयों एवं कार्यों के लिए उत्तर देने की व्यवस्था स्थापित करती है। कारण दोनों अवधारणाओं का सही अंतर स्पष्ट करता है।
प्रश्न 108: कथन (A): नागरिक चार्टर का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को सेवा मानकों एवं उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक करना है। कारण (R): नागरिक चार्टर के प्रावधानों के उल्लंघन पर प्रत्येक स्थिति में स्वतः विधिक दंड लागू हो जाता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि नागरिक चार्टर सेवा मानकों, समय-सीमा, उत्तरदायित्व तथा नागरिकों की अपेक्षाओं को स्पष्ट करता है। कारण गलत है क्योंकि सामान्यतः नागरिक चार्टर स्वयं ऐसा विधिक दस्तावेज़ नहीं होता जिसके उल्लंघन पर प्रत्येक स्थिति में स्वतः विधिक दंड लागू हो जाए। ‘प्रत्येक स्थिति’ तथा ‘स्वतः’ जैसे शब्द कथन को निरपेक्ष और इसलिए गलत बनाते हैं।
प्रश्न 109: कथन (A): सामाजिक अंकेक्षण सार्वजनिक योजनाओं के कार्यान्वयन में उत्तरदायित्व बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है। कारण (R): सामाजिक अंकेक्षण में लाभार्थियों एवं स्थानीय समुदाय को योजनाओं की समीक्षा का अवसर मिलता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
सामाजिक अंकेक्षण का उद्देश्य सार्वजनिक योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना है। लाभार्थियों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी ही सामाजिक अंकेक्षण की आधारशिला है, जिससे योजनाओं के वास्तविक कार्यान्वयन की समीक्षा संभव होती है। अतः कारण, कथन की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है।
प्रश्न 110: कथन (A): ई-गवर्नेंस से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ सकती है। कारण (R): ई-गवर्नेंस के अंतर्गत सभी प्रशासनिक सूचनाएँ स्वतः सार्वजनिक हो जाती हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि ई-गवर्नेंस डिजिटल अभिलेखों, ऑनलाइन सेवाओं, ट्रैकिंग प्रणाली तथा सूचना की बेहतर उपलब्धता के माध्यम से प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देता है। कारण गलत है क्योंकि ई-गवर्नेंस का उद्देश्य सभी प्रशासनिक सूचनाओं को स्वतः सार्वजनिक करना नहीं है; राष्ट्रीय सुरक्षा, गोपनीयता, वाणिज्यिक हित तथा विधि द्वारा संरक्षित सूचनाओं पर वैध प्रतिबंध बने रहते हैं। ‘सभी’ और ‘स्वतः’ जैसे निरपेक्ष शब्द कथन को गलत बनाते हैं।
प्रश्न 111: कथन (A): नागरिक चार्टर का उद्देश्य नागरिकों की अपेक्षाओं एवं सेवा मानकों को स्पष्ट करना है। कारण (R): नागरिक चार्टर अपनाने मात्र से सभी विभागों में सेवा गुणवत्ता स्वतः समान हो जाती है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि नागरिक चार्टर सेवाओं, समय-सीमा और उत्तरदायित्व को स्पष्ट करने वाला प्रशासनिक साधन है। कारण गलत है क्योंकि केवल चार्टर अपनाने से स्वतः सभी विभागों में समान सेवा गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं हो जाती; इसके लिए प्रभावी कार्यान्वयन, निगरानी और संस्थागत क्षमता आवश्यक है। UPSC प्रायः "मात्र", "स्वतः" जैसे शब्दों से भ्रम उत्पन्न करता है।
प्रश्न 112: कथन (A): जवाबदेही लोकतांत्रिक शासन की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने वाला एक महत्वपूर्ण तत्व है। कारण (R): जब लोक अधिकारी अपने निर्णयों के लिए उत्तर देने के लिए बाध्य होते हैं, तब प्रशासन अधिक उत्तरदायी बनता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि लोकतांत्रिक शासन में जवाबदेही प्रशासन की गुणवत्ता एवं जनविश्वास को मजबूत करती है। कारण भी सही है क्योंकि निर्णयों के लिए उत्तरदायित्व तय होने से प्रशासन अधिक उत्तरदायी एवं जिम्मेदार बनता है। कारण, कथन की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है।
प्रश्न 113: कथन (A): ई-गवर्नेंस से सरकारी सेवाओं की उपलब्धता में सुधार हो सकता है। कारण (R): ई-गवर्नेंस में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का उपयोग प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सक्षम, पारदर्शी एवं सुलभ बनाने के लिए किया जाता है। यद्यपि सेवा उपलब्धता का वास्तविक स्तर आधारभूत संरचना, डिजिटल साक्षरता तथा संस्थागत क्षमता जैसे अन्य कारकों से भी प्रभावित होता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि ई-गवर्नेंस के माध्यम से सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सक्षम, पारदर्शी तथा सुलभ बनाता है, जिससे सरकारी सेवाओं की उपलब्धता में सुधार हो सकता है। कारण भी सही है क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि सेवा उपलब्धता में सुधार का प्रमुख आधार ICT का उपयोग है, साथ ही यह भी स्वीकार करता है कि आधारभूत संरचना, डिजिटल साक्षरता तथा संस्थागत क्षमता जैसे अन्य कारक भी इसकी प्रभावशीलता को प्रभावित करते हैं। अतः कारण, कथन की उचित एवं समग्र व्याख्या करता है।
प्रश्न 114: कथन (A): पारदर्शिता का अर्थ यह है कि शासन की प्रत्येक सूचना बिना किसी अपवाद के सार्वजनिक कर दी जाए। कारण (R): राष्ट्रीय सुरक्षा एवं गोपनीयता से संबंधित कुछ सूचनाओं पर वैध प्रतिबंध हो सकते हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि पारदर्शिता का अर्थ सभी सूचनाओं का बिना किसी अपवाद के प्रकटीकरण नहीं है। राष्ट्रीय सुरक्षा, गोपनीयता एवं वैधानिक अपवादों के कारण कुछ सूचनाएँ सार्वजनिक नहीं की जातीं। कारण सही है और इसी सीमा को स्पष्ट करता है।
प्रश्न 115: कथन (A): सेवा वितरण प्रणाली का उद्देश्य केवल सरकारी राजस्व बढ़ाना है। कारण (R): सेवा वितरण प्रणाली का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों तक सार्वजनिक सेवाएँ प्रभावी ढंग से पहुँचाना है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि सेवा वितरण प्रणाली का उद्देश्य नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध सार्वजनिक सेवाएँ पहुँचाना है, न कि केवल राजस्व बढ़ाना। कारण सही है और सेवा वितरण की वास्तविक अवधारणा को व्यक्त करता है। कथन में "केवल" शब्द भ्रम उत्पन्न करता है।
प्रश्न 116: कथन (A): प्रभावी जन शिकायत निवारण प्रणाली नागरिकों के प्रशासन पर विश्वास को बढ़ा सकती है। कारण (R): शिकायतों के समयबद्ध एवं निष्पक्ष निस्तारण से प्रशासनिक उत्तरदायित्व मजबूत होता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि प्रभावी शिकायत निवारण से नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास बढ़ता है। कारण भी सही है क्योंकि समयबद्ध एवं निष्पक्ष निस्तारण उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करता है, जिससे विश्वास का निर्माण होता है। अतः कारण, कथन की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है।
प्रश्न 117: कथन (A): सामाजिक अंकेक्षण केवल निजी कंपनियों द्वारा किया जाता है। कारण (R): सामाजिक अंकेक्षण में नागरिकों एवं समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि सामाजिक अंकेक्षण मुख्यतः सार्वजनिक योजनाओं एवं कार्यक्रमों में नागरिक सहभागिता के माध्यम से उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने का उपकरण है। कारण सही है क्योंकि इसकी सफलता समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर आधारित होती है। UPSC का सामान्य ट्रैप "केवल" जैसे निरपेक्ष शब्द होते हैं।
प्रश्न 118: कथन (A): नागरिक चार्टर नागरिकों को सेवाओं के मानकों की जानकारी उपलब्ध कराता है। कारण (R): नागरिक चार्टर स्वयं एक विधिक रूप से बाध्यकारी दस्तावेज़ है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
✓
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
C
— A सही है पर R गलत है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि नागरिक चार्टर का उद्देश्य सेवाओं, समय-सीमा, उत्तरदायित्व तथा शिकायत निवारण संबंधी जानकारी नागरिकों को देना है। कारण गलत है क्योंकि सामान्यतः नागरिक चार्टर एक प्रशासनिक प्रतिबद्धता है, न कि स्वतः विधिक रूप से बाध्यकारी दस्तावेज़।
प्रश्न 119: कथन (A): ई-गवर्नेंस लागू होने से प्रत्येक स्थिति में प्रशासनिक भ्रष्टाचार पूर्णतः समाप्त हो जाता है। कारण (R): ई-गवर्नेंस मानवीय विवेकाधिकार को अनेक प्रक्रियाओं में कम कर सकता है।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
✓
सही उत्तर:
D
— A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि ई-गवर्नेंस भ्रष्टाचार को कम करने में सहायक हो सकता है, परन्तु उसे प्रत्येक स्थिति में पूर्णतः समाप्त नहीं करता। कारण सही है क्योंकि डिजिटलीकरण अनेक प्रक्रियाओं में मानवीय विवेकाधिकार एवं प्रत्यक्ष संपर्क घटाता है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावनाएँ कम हो सकती हैं। इसलिए कथन में प्रयुक्त "पूर्णतः" शब्द UPSC शैली का ट्रैप है। स्मरण सूत्र: "ई-गवर्नेंस भ्रष्टाचार में कमी तो कर सकता हैं लेकिन समाप्त नहीं कर सकता।
प्रश्न 120: कथन (A): सुशासन का उद्देश्य नागरिकों को प्रभावी, उत्तरदायी तथा पारदर्शी प्रशासन उपलब्ध कराना है। कारण (R): पारदर्शिता, जवाबदेही, सहभागिता तथा विधि का शासन जैसे सिद्धांत प्रशासन को अधिक उत्तरदायी, प्रभावी एवं नागरिक-केंद्रित बनाते हैं।
-
A.
A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
✓
-
B.
A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
-
C.
A सही है पर R गलत है।
-
D.
A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर:
A
— A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि सुशासन का मूल उद्देश्य नागरिक-केंद्रित, प्रभावी, पारदर्शी एवं उत्तरदायी प्रशासन स्थापित करना है। कारण भी सही है क्योंकि पारदर्शिता, जवाबदेही, सहभागिता तथा विधि का शासन सुशासन के स्वीकृत आधारभूत सिद्धांत हैं और यही सिद्धांत उक्त उद्देश्य को प्राप्त करने का माध्यम बनते हैं। अतः कारण, कथन की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है।