न्यायपालिका (Judiciary) MCQ in Hindi for UPSC Prelims। Important Objective Questions, PYQ, Practice Quiz एवं Previous Year Questions के साथ भारतीय न्यायपालिका की तैयारी करें। Revision और Practice के लिए उपयोगी MCQ संग्रह।

This quiz contains 175 carefully selected multiple-choice questions (MCQ) with detailed explanations for each answer. Questions cover important topics from Polity.

Practice this online test to check your preparation, improve conceptual clarity, and track your score with explanations. All questions are accompanied by correct answers and explanatory notes for effective self-study and revision.

Use the interactive quiz interface above to solve one question at a time with timer, next/previous navigation and instant scoring. A complete list of all questions and answers is also provided below for quick reference and thorough revision.

न्यायपालिका MCQ in Hindi | UPSC Prelims PYQ, Important Objective Questions & Quiz

न्यायपालिका (Judiciary) MCQ in Hindi for UPSC Prelims। Important Objective Questions, PYQ, Practice Quiz एवं Previous Year Questions के साथ भारतीय न्यायपालिका की तैयारी करें। Revision और Practice के लिए उपयोगी MCQ संग्रह।

📊
Difficulty
Hard
❓
Num Questions
175
❓
Points Per Question
1
⏱️
Time Limit
120 minutes

All MCQ Questions with Answers and Explanations

प्रश्न 1: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) न्यायिक समीक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संविधान की सर्वोच्चता परस्पर संबद्ध संवैधानिक सिद्धांत हैं। (2) इन सिद्धांतों को सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में मूल संरचना के तत्वों के रूप में मान्यता दी है। (3) संसद संविधान संशोधन के माध्यम से इन सिद्धांतों को समाप्त नहीं कर सकती।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक समीक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता तथा संविधान की सर्वोच्चता भारतीय संवैधानिक व्यवस्था के आधारभूत सिद्धांत हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती, मिनर्वा मिल्स, एस. आर. बोम्मई, NJAC प्रकरण तथा अन्य निर्णयों में इन्हें मूल संरचना से जोड़ा है। मूल संरचना सिद्धांत के कारण संसद अपनी संशोधन शक्ति का प्रयोग करके इन सिद्धांतों को समाप्त नहीं कर सकती। यही व्यवस्था भारतीय लोकतंत्र, विधि के शासन और संवैधानिक संतुलन की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

प्रश्न 2: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) न्यायपालिका की स्वतंत्रता को संविधान की मूल संरचना का भाग माना गया है। (2) न्यायाधीशों की पद-सुरक्षा न्यायपालिका की स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संरक्षण है। (3) न्यायपालिका की स्वतंत्रता केवल न्यायिक समीक्षा पर आधारित है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
न्यायपालिका की स्वतंत्रता भारतीय संविधान की मूल संरचना का एक केंद्रीय तत्व है। न्यायाधीशों की पद-सुरक्षा, वेतन की सुरक्षा, हटाने की कठिन प्रक्रिया तथा कार्यपालिका से संस्थागत दूरी इसके महत्वपूर्ण संरक्षण हैं। यह केवल न्यायिक समीक्षा पर आधारित नहीं है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं।

प्रश्न 3: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) उपचारात्मक याचिका एक असाधारण न्यायिक उपाय है। (2) उपचारात्मक याचिका संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है। (3) इसका उद्देश्य न्याय की गंभीर विफलता को सुधारना है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
उपचारात्मक याचिका सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विकसित एक असाधारण न्यायिक उपाय है जिसका उपयोग अत्यंत सीमित परिस्थितियों में किया जाता है। इसका उद्देश्य न्याय की गंभीर विफलता को दूर करना है। यह संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित नहीं है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं।

प्रश्न 4: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) उच्च न्यायालय को अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है। (2) उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता मौलिक अधिकारों तक सीमित नहीं है। (3) उच्च न्यायालय अन्य विधिक अधिकारों के संरक्षण हेतु भी रिट जारी कर सकता है।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को व्यापक रिट अधिकारिता प्रदान करता है। वे न केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु बल्कि अन्य विधिक अधिकारों की रक्षा के लिए भी रिट जारी कर सकते हैं। यही कारण है कि विषयगत दृष्टि से उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता से अधिक व्यापक मानी जाती है।

प्रश्न 5: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) संविधान पीठ का गठन तब किया जाता है जब किसी मामले में संविधान की व्याख्या से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उपस्थित हो। (2) संविधान के अनुसार संविधान पीठ में कम-से-कम पाँच न्यायाधीश होते हैं। (3) प्रत्येक संविधान पीठ का निर्णय सर्वसम्मति से ही दिया जाना आवश्यक है।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 145(3) के अनुसार जब किसी मामले में संविधान की व्याख्या से संबंधित कोई महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न उत्पन्न होता है, तो उसका निर्णय कम-से-कम पाँच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ द्वारा किया जाता है। संविधान पीठ के निर्णय सर्वसम्मति से देना आवश्यक नहीं है; बहुमत का निर्णय भी मान्य होता है तथा असहमति मत भी दिया जा सकता है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं, जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 6: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) न्यायिक सक्रियता का संबंध न्यायालयों की अपेक्षाकृत सक्रिय संवैधानिक भूमिका से है। (2) जनहित याचिका न्यायिक सक्रियता के विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम रही है। (3) न्यायिक सक्रियता और न्यायिक समीक्षा पूर्णतः समान अवधारणाएँ हैं।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक सक्रियता न्यायालयों की उस भूमिका को दर्शाती है जिसमें वे संवैधानिक मूल्यों और लोकहित की रक्षा हेतु अपेक्षाकृत सक्रिय दृष्टिकोण अपनाते हैं। जनहित याचिका इसका प्रमुख उपकरण रही है। दूसरी ओर न्यायिक समीक्षा एक विशिष्ट संवैधानिक शक्ति है। इसलिए दोनों अवधारणाएँ समान नहीं हैं। अतः कथन 1 और 2 सही हैं।

प्रश्न 7: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 141 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होती है। (2) अनुच्छेद 141 सर्वोच्च न्यायालय को विधायिका के समान कानून बनाने की शक्ति प्रदान करता है। (3) न्यायिक नज़ीर का सिद्धांत अनुच्छेद 141 से सुदृढ़ होता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 141 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होती है और इससे नज़ीर का सिद्धांत मजबूत होता है। हालांकि यह प्रावधान सर्वोच्च न्यायालय को विधायिका के समान सामान्य कानून बनाने की शक्ति नहीं देता। अतः कथन 1 और 3 सही तथा कथन 2 गलत है।

प्रश्न 8: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त संवैधानिक उपचार का अधिकार स्वयं एक मौलिक अधिकार है। (2) अनुच्छेद 32 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने संविधान का "हृदय और आत्मा" कहा था। (3) अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय रिट जारी कर सकता है।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 32 भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु सर्वोच्च न्यायालय तक प्रत्यक्ष पहुँच का अधिकार प्रदान करता है। डॉ. अम्बेडकर ने इसे संविधान का "हृदय और आत्मा" कहा था। सर्वोच्च न्यायालय इस अनुच्छेद के अंतर्गत बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा तथा उत्प्रेषण जैसी रिटें जारी कर सकता है। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 9: निम्नलिखित में से किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 की व्याख्या को अत्यधिक विस्तृत करते हुए "विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया" को न्यायसंगत, उचित और युक्तिसंगत होने की आवश्यकता से जोड़ा?

  • A. ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
  • B. गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
  • C. शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ
  • D. मेनका गांधी बनाम भारत संघ ✓
सही उत्तर: D — मेनका गांधी बनाम भारत संघ
व्याख्या (Explanation):
मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) भारतीय संवैधानिक न्यायशास्त्र का एक ऐतिहासिक निर्णय है। न्यायालय ने कहा कि अनुच्छेद 21 में निहित "विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया" मनमानी नहीं हो सकती, बल्कि न्यायसंगत, उचित और युक्तिसंगत होनी चाहिए। यद्यपि यह मामला मुख्यतः मौलिक अधिकारों से संबंधित है, इसके प्रभाव ने न्यायिक समीक्षा और संवैधानिक व्याख्या की दिशा को गहराई से प्रभावित किया।

प्रश्न 10: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में लोकतंत्र, विधि का शासन तथा न्यायिक समीक्षा को संविधान की मूल संरचना का भाग माना है। (2) मूल संरचना सिद्धांत का प्रयोग केवल संविधान के मूल पाठ पर लागू होता है, संविधान संशोधनों पर नहीं। (3) मूल संरचना सिद्धांत संसद की संशोधन शक्ति पर संवैधानिक सीमा स्थापित करता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती तथा बाद के अनेक निर्णयों में लोकतंत्र, विधि का शासन, न्यायिक समीक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, संघवाद आदि को मूल संरचना का भाग माना गया है। मूल संरचना सिद्धांत विशेष रूप से संविधान संशोधनों की वैधता की जाँच हेतु विकसित किया गया था। यह संसद की संशोधन शक्ति पर एक संवैधानिक सीमा स्थापित करता है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 11: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय घोषित करता है। (2) अभिलेख न्यायालय होने के कारण सर्वोच्च न्यायालय को अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त है। (3) यह शक्ति न्यायपालिका की संस्थागत गरिमा बनाए रखने से संबंधित है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय का दर्जा प्रदान करता है। इस स्थिति के कारण उसे अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त होती है। यह शक्ति न्यायपालिका की गरिमा, अधिकारिता और न्याय प्रशासन की प्रभावशीलता बनाए रखने हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 12: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का भाग है। (2) न्यायिक नियुक्तियों से संबंधित व्यवस्थाओं का परीक्षण इस सिद्धांत की कसौटी पर किया जा सकता है। (3) न्यायपालिका की स्वतंत्रता केवल सर्वोच्च न्यायालय तक सीमित अवधारणा है।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का महत्वपूर्ण तत्व है और न्यायिक नियुक्तियों की किसी भी व्यवस्था का परीक्षण इसी मानक पर किया जा सकता है। यह सिद्धांत केवल सर्वोच्च न्यायालय तक सीमित नहीं है बल्कि संपूर्ण न्यायिक व्यवस्था पर लागू होता है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं।

प्रश्न 13: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है? (1) केशवानंद भारती - मूल संरचना सिद्धांत (2) मिनर्वा मिल्स - सीमित संशोधन शक्ति (3) एस. आर. बोम्मई - धर्मनिरपेक्षता एवं संघवाद (3) ए. के. गोपालन - कोलेजियम प्रणाली

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. केवल 3
  • D. केवल 4 ✓
सही उत्तर: D — केवल 4
व्याख्या (Explanation):
ए. के. गोपालन मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 की प्रारंभिक व्याख्या से संबंधित था, न कि कोलेजियम प्रणाली से। कोलेजियम प्रणाली का विकास द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993) तथा तृतीय न्यायाधीश मामला (1998) के माध्यम से हुआ। शेष तीनों युग्म सही सुमेलित हैं।

प्रश्न 14: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) जनहित याचिका का विकास मुख्यतः न्यायिक सक्रियता से संबंधित है। (2) जनहित याचिका ने न्याय तक पहुँच को व्यापक बनाया है। (3) जनहित याचिका में व्यक्तिगत अधिकारों के बजाय व्यापक लोकहित पर बल दिया जाता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
जनहित याचिका भारतीय न्यायिक सक्रियता का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। इसके माध्यम से न्यायालयों ने समाज के कमजोर वर्गों, पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकार तथा प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषयों पर हस्तक्षेप किया है। इसका उद्देश्य व्यापक लोकहित की रक्षा करना है, न कि केवल व्यक्तिगत विवादों का समाधान। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 15: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 141 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी है। (2) अनुच्छेद 141 के कारण भारत में न्यायिक नज़ीर का सिद्धांत संवैधानिक आधार प्राप्त करता है। (3) सर्वोच्च न्यायालय अपने किसी पूर्व निर्णय से कभी विचलित नहीं हो सकता।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 141 भारतीय न्यायिक व्यवस्था में नज़ीर के सिद्धांत को संवैधानिक आधार प्रदान करता है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होती है। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय उचित परिस्थितियों में अपने पूर्व निर्णयों पर पुनर्विचार कर सकता है, इसलिए तीसरा कथन गलत है।

प्रश्न 16: निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धांत न्यायपालिका को संविधान-विरोधी कानूनों को निरस्त करने का आधार प्रदान करता है?

  • A. न्यायिक समीक्षा ✓
  • B. न्यायिक सक्रियता
  • C. उपचारात्मक अधिकारिता
  • D. परामर्शदात्री अधिकारिता
सही उत्तर: A — न्यायिक समीक्षा
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक समीक्षा वह संवैधानिक शक्ति है जिसके माध्यम से न्यायालय संविधान-विरोधी कानूनों तथा कार्यपालिका के असंवैधानिक कार्यों को निरस्त कर सकते हैं। यह शक्ति संविधान की सर्वोच्चता तथा विधि के शासन की रक्षा करती है। भारतीय संविधान में यह शक्ति अनेक अनुच्छेदों से व्युत्पन्न होती है और इसे मूल संरचना का भाग माना गया है।

प्रश्न 17: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) उपचारात्मक याचिका संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लिखित संवैधानिक उपाय है। (2) उपचारात्मक याचिका पुनर्विलोकन याचिका के बाद उपलब्ध हो सकती है। (3) इसका उद्देश्य न्याय की गंभीर विफलता को दूर करना है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2
  • D. केवल 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
उपचारात्मक याचिका संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित नहीं है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विकसित एक असाधारण न्यायिक उपाय है। यह पुनर्विलोकन याचिका के निष्पादन के बाद सीमित परिस्थितियों में उपलब्ध होती है और इसका उद्देश्य न्याय की गंभीर विफलता को दूर करना है। अतः कथन 2 और 3 सही हैं।

प्रश्न 18: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता सर्वोच्च न्यायालय की तुलना में विषयगत रूप से व्यापक है। (2) अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के मामलों में ही रिट जारी कर सकता है। (3) अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत मौलिक अधिकारों के अतिरिक्त अन्य विधिक अधिकारों के संरक्षण हेतु भी रिट जारी कर सकता है, इसलिए उसकी विषयगत रिट अधिकारिता अधिक व्यापक मानी जाती है। अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार है। दूसरा कथन गलत है क्योंकि उच्च न्यायालय की शक्ति केवल मौलिक अधिकारों तक सीमित नहीं है।

प्रश्न 19: निम्नलिखित में से किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान की मूल संरचना के अंतर्गत "धर्मनिरपेक्षता" को एक मूल तत्व के रूप में विशेष महत्व दिया?

  • A. गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
  • B. शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ
  • C. एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ ✓
  • D. सज्जन सिंह बनाम राजस्थान राज्य
सही उत्तर: C — एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ
व्याख्या (Explanation):
एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) में सर्वोच्च न्यायालय ने धर्मनिरपेक्षता को संविधान की मूल संरचना का एक महत्वपूर्ण तत्व माना। इस निर्णय ने अनुच्छेद 356 के प्रयोग की न्यायिक समीक्षा के साथ-साथ संघवाद और धर्मनिरपेक्षता की संवैधानिक स्थिति को भी सुदृढ़ किया। यह निर्णय भारतीय संवैधानिक सिद्धांतों के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 20: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) न्यायिक समीक्षा की शक्ति संविधान के विभिन्न प्रावधानों से व्युत्पन्न होती है, न कि किसी एक अनुच्छेद से। (2) न्यायिक समीक्षा केवल विधायी कार्यों तक सीमित है। (3) न्यायिक समीक्षा के माध्यम से न्यायालय कार्यपालिका के कार्यों की भी संवैधानिक वैधता की जाँच कर सकते हैं।

  • A. केवल 1 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
भारत में न्यायिक समीक्षा का आधार अनुच्छेद 13, 32, 131–136, 226, 227 आदि अनेक संवैधानिक प्रावधानों में निहित है। न्यायिक समीक्षा केवल विधायी कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यपालिका की संवैधानिक एवं वैधानिक वैधता की भी जाँच करती है। यही कारण है कि न्यायिक समीक्षा संविधान की सर्वोच्चता सुनिश्चित करने का प्रमुख साधन मानी जाती है।

प्रश्न 21: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) न्यायिक समीक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता तथा संविधान की सर्वोच्चता को मूल संरचना का भाग माना गया है। (2) इन सिद्धांतों का संरक्षण भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र की स्थिरता के लिए आवश्यक है। (3) संसद संविधान संशोधन के माध्यम से इन सभी सिद्धांतों को समाप्त कर सकती है।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है क्योंकि संसद मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती।

प्रश्न 22: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) जनहित याचिका ने न्याय तक पहुँच को अधिक व्यापक बनाया है। (2) जनहित याचिका के कारण पारंपरिक लोकस स्टैंडी सिद्धांत में शिथिलता आई। (3) जनहित याचिका केवल प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित व्यक्ति द्वारा ही दायर की जा सकती है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
जनहित याचिका ने न्याय तक पहुँच को लोकतांत्रिक बनाया और समाज के कमजोर वर्गों को न्यायालय तक पहुँचने में सहायता प्रदान की। इसके परिणामस्वरूप लोकस स्टैंडी के पारंपरिक नियमों में उदारता लाई गई। अतः कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 23: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट जारी कर सकता है। (2) उच्च न्यायालय अनुच्छेद 227 के अंतर्गत अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण रखता है। (3) अनुच्छेद 226 और 227 दोनों का उद्देश्य और प्रकृति पूर्णतः समान है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 226 रिट अधिकारिता प्रदान करता है जबकि अनुच्छेद 227 अधीक्षण की शक्ति प्रदान करता है। दोनों की प्रकृति, उद्देश्य और उपयोग अलग-अलग हैं। इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 24: निम्नलिखित में से किस मामले का संबंध चुनावी प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा तथा मूल संरचना सिद्धांत के विस्तार से है?

  • A. इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण ✓
  • B. ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
  • C. रोमेश थापर बनाम मद्रास राज्य
  • D. शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ
सही उत्तर: A — इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण
व्याख्या (Explanation):
इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण (1975) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव को संवैधानिक व्यवस्था का मूल तत्व माना। इस निर्णय ने मूल संरचना सिद्धांत के दायरे को और विकसित किया तथा लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की संवैधानिक सुरक्षा को सुदृढ़ किया।

प्रश्न 25: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 142 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति संवैधानिक सीमाओं से परे है। (2) अनुच्छेद 142 के अंतर्गत पारित आदेश संविधान के अधीन रहते हैं। (3) पूर्ण न्याय की अवधारणा संवैधानिक सीमाओं से परे नहीं जा सकती।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. केवल 1 और 2
  • D. केवल 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को व्यापक शक्ति देता है, किंतु यह शक्ति असीमित नहीं है। न्यायालय ने अनेक मामलों में स्पष्ट किया है कि "पूर्ण न्याय" की अवधारणा संविधान और विधि के मूल ढाँचे के अधीन है। अतः कथन 2 और 3 सही हैं जबकि कथन 1 गलत है।

प्रश्न 26: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) न्यायिक सक्रियता और न्यायिक समीक्षा समानार्थी शब्द नहीं हैं। (2) न्यायिक समीक्षा संविधान प्रदत्त शक्ति है, जबकि न्यायिक सक्रियता न्यायिक दृष्टिकोण या पद्धति को दर्शाती है। (3) न्यायिक सक्रियता का प्रत्येक प्रयोग न्यायिक अतिक्रमण माना जाता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक समीक्षा एक संवैधानिक शक्ति है जिसके माध्यम से न्यायालय कानूनों और सरकारी कार्यों की वैधता की जाँच करते हैं। न्यायिक सक्रियता एक न्यायिक दृष्टिकोण है जिसके अंतर्गत न्यायालय संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हेतु अपेक्षाकृत सक्रिय भूमिका अपनाते हैं। न्यायिक सक्रियता को स्वतः न्यायिक अतिक्रमण नहीं माना जा सकता। अतः कथन 1 और 2 सही हैं।

प्रश्न 27: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 136 के अंतर्गत विशेष अनुमति याचिका सर्वोच्च न्यायालय की विवेकाधीन शक्ति है। (2) प्रत्येक मामले में SLP स्वीकार करना सर्वोच्च न्यायालय के लिए अनिवार्य है। (3) अनुच्छेद 136 की शक्ति अत्यंत व्यापक मानी जाती है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 136 सर्वोच्च न्यायालय को विशेष अनुमति से अपील सुनने की व्यापक विवेकाधीन शक्ति प्रदान करता है। यह अधिकार असाधारण प्रकृति का है और प्रत्येक SLP को स्वीकार करना न्यायालय के लिए अनिवार्य नहीं है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं जबकि कथन 2 गलत है।

प्रश्न 28: निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व विभिन्न निर्णयों में संविधान की मूल संरचना का भाग माना गया है?

  • A. न्यायपालिका की स्वतंत्रता ✓
  • B. संसद की असीमित संशोधन शक्ति
  • C. न्यायिक समीक्षा का उन्मूलन
  • D. मौलिक अधिकारों का पूर्ण निलंबन
सही उत्तर: A — न्यायपालिका की स्वतंत्रता
व्याख्या (Explanation):
न्यायपालिका की स्वतंत्रता को अनेक निर्णयों में संविधान की मूल संरचना का भाग माना गया है। इसके विपरीत संसद की असीमित संशोधन शक्ति को अस्वीकार किया गया है तथा न्यायिक समीक्षा और मौलिक अधिकारों के पूर्ण उन्मूलन को संविधान की मूल संरचना के विपरीत माना गया है। इसलिए केवल विकल्प A सही है।

प्रश्न 29: निम्नलिखित में से किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वप्रथम यह कहा कि संविधान संशोधन अनुच्छेद 13 के अर्थ में "विधि" नहीं हैं?

  • A. मिनर्वा मिल्स मामला
  • B. इंदिरा नेहरू गांधी मामला
  • C. गोलकनाथ मामला
  • D. शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ ✓
सही उत्तर: D — शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ
व्याख्या (Explanation):
शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ (1951) में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि संविधान संशोधन अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान-निर्माण शक्ति का प्रयोग है और अनुच्छेद 13 के अंतर्गत "विधि" नहीं है। इस दृष्टिकोण की पुनः पुष्टि सज्जन सिंह मामले में हुई, जबकि गोलकनाथ मामले में इसे अस्वीकार किया गया। बाद में केशवानंद भारती मामले में न्यायालय ने पुनः माना कि संविधान संशोधन अनुच्छेद 13 के अंतर्गत "विधि" नहीं हैं, किंतु वे मूल संरचना सिद्धांत के अधीन रहेंगे।

प्रश्न 30: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) मूल संरचना सिद्धांत का प्रमुख प्रयोग संविधान संशोधनों की वैधता की जाँच के लिए किया जाता है। (2) मूल संरचना सिद्धांत का स्रोत संविधान का कोई विशिष्ट अनुच्छेद नहीं है। (3) मूल संरचना सिद्धांत न्यायिक व्याख्या का परिणाम है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
मूल संरचना सिद्धांत का विकास केशवानंद भारती मामले में न्यायिक व्याख्या के माध्यम से हुआ। इसका कोई पृथक संवैधानिक अनुच्छेद नहीं है। यद्यपि इसका प्रमुख उपयोग संविधान संशोधनों की वैधता की जाँच में होता है, इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 31: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) न्यायिक समीक्षा संविधान की सर्वोच्चता सुनिश्चित करती है। (2) न्यायिक समीक्षा संघीय ढाँचे और मौलिक अधिकारों दोनों की रक्षा कर सकती है। (3) न्यायिक समीक्षा के बिना मूल संरचना सिद्धांत का प्रभावी प्रवर्तन कठिन हो जाएगा।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक समीक्षा भारतीय संवैधानिक व्यवस्था का केंद्रीय तत्व है। यह संविधान की सर्वोच्चता, मौलिक अधिकारों की सुरक्षा, संघीय संतुलन तथा विधि के शासन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मूल संरचना सिद्धांत का व्यावहारिक प्रवर्तन भी न्यायिक समीक्षा के माध्यम से ही संभव है। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 32: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 141 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होती है। (2) अनुच्छेद 141 के कारण भारतीय न्यायिक व्यवस्था में नज़ीर का सिद्धांत सुदृढ़ होता है। (3) सर्वोच्च न्यायालय स्वयं अपने प्रत्येक पूर्व निर्णय से किसी भी परिस्थिति में बंधा रहता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 141 भारतीय न्यायिक व्यवस्था में नज़ीर के सिद्धांत को संवैधानिक आधार प्रदान करता है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि सभी अधीनस्थ न्यायालयों पर बाध्यकारी होती है। तथापि सर्वोच्च न्यायालय उपयुक्त परिस्थितियों में अपने पूर्व निर्णयों पर पुनर्विचार कर सकता है। अतः कथन 1 और 2 सही तथा कथन 3 गलत है।

प्रश्न 33: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का भाग है। (2) न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया का मूल्यांकन भी इसी कसौटी पर किया जा सकता है। (3) इसी आधार पर राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग से संबंधित प्रावधानों की न्यायिक समीक्षा की गई थी।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
न्यायपालिका की स्वतंत्रता मूल संरचना का भाग है और न्यायिक नियुक्तियों की व्यवस्था का परीक्षण भी इसी संवैधानिक मानक पर किया जाता है। 2015 में NJAC मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रमुख आधार मानते हुए 99वें संविधान संशोधन और संबंधित अधिनियम को असंवैधानिक घोषित किया। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 34: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विकसित उपचारात्मक याचिका संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है। (2) उपचारात्मक याचिका का उद्देश्य अत्यंत दुर्लभ मामलों में न्याय की विफलता को सुधारना है। (3) उपचारात्मक याचिका सामान्य अपील का एक अतिरिक्त चरण नहीं है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 2
  • D. केवल 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
उपचारात्मक याचिका संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लिखित नहीं है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विकसित एक न्यायिक उपाय है। इसका उद्देश्य अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में न्याय की गंभीर विफलता को दूर करना है। यह सामान्य अपील या नियमित पुनर्विलोकन का विकल्प नहीं है। इसलिए कथन 2 और 3 सही हैं जबकि कथन 1 गलत है।

प्रश्न 35: निम्नलिखित में से किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक समीक्षा और सीमित संशोधन शक्ति दोनों को संविधान की मूल संरचना का भाग माना?

  • A. मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ ✓
  • B. ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
  • C. शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ
  • D. रोमेश थापर बनाम मद्रास राज्य
सही उत्तर: A — मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
व्याख्या (Explanation):
मिनर्वा मिल्स मामला (1980) न्यायिक समीक्षा तथा सीमित संशोधन शक्ति के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संसद की संशोधन शक्ति असीमित नहीं है तथा न्यायिक समीक्षा संविधान की मूल संरचना का अभिन्न अंग है। इस निर्णय ने 42वें संविधान संशोधन के कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया।

प्रश्न 36: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) न्यायिक सक्रियता का एक प्रमुख औजार जनहित याचिका है। (2) न्यायिक सक्रियता का उद्देश्य सदैव विधायिका का स्थान लेना होता है। (3) न्यायिक सक्रियता का औचित्य प्रायः संवैधानिक मूल्यों की रक्षा से जोड़ा जाता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
जनहित याचिका न्यायिक सक्रियता का प्रमुख साधन रही है। न्यायिक सक्रियता का उद्देश्य विधायिका का स्थान लेना नहीं बल्कि संवैधानिक मूल्यों, मौलिक अधिकारों और लोकहित की रक्षा करना है। हालांकि इसकी सीमाओं को लेकर बहस होती रही है, फिर भी इसका औचित्य संवैधानिक शासन को प्रभावी बनाने से जुड़ा माना जाता है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं।

प्रश्न 37: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है? (1) इंदिरा नेहरू गांधी मामला - स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव (2) एस. आर. बोम्मई मामला – संघवाद (3) मिनर्वा मिल्स मामला - सीमित संशोधन शक्ति

  • A. केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण मामले में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव को संवैधानिक व्यवस्था के मूल तत्वों में माना गया। एस. आर. बोम्मई मामले ने संघवाद की संवैधानिक स्थिति को सुदृढ़ किया, जबकि मिनर्वा मिल्स मामले ने सीमित संशोधन शक्ति तथा न्यायिक समीक्षा को मूल संरचना का भाग माना। इसलिए तीनों युग्म सही सुमेलित हैं।

प्रश्न 38: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की अधिकारिता केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन तक सीमित है। (2) अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के अतिरिक्त अन्य विधिक अधिकारों के संरक्षण हेतु भी रिट जारी कर सकता है। (3) इसलिए प्रत्येक स्थिति में अनुच्छेद 32 की अधिकारिता अनुच्छेद 226 से व्यापक है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. केवल 1 और 2 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 32 केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय अन्य विधिक अधिकारों के संरक्षण हेतु भी रिट जारी कर सकता है। इस दृष्टि से अनुच्छेद 226 की विषयगत सीमा अधिक व्यापक मानी जाती है। इसलिए तीसरा कथन गलत है जबकि पहला और दूसरा कथन सही हैं।

प्रश्न 39: निम्नलिखित में से किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्थापित किया कि संविधान संशोधन न्यायिक समीक्षा के अधीन हैं तथा मूल संरचना को क्षति पहुँचाने वाले संशोधन निरस्त किए जा सकते हैं?

  • A. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य ✓
  • B. ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
  • C. रोमेश थापर बनाम मद्रास राज्य
  • D. शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ
सही उत्तर: A — केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि संसद अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान में संशोधन कर सकती है, किंतु उसकी संशोधन शक्ति असीमित नहीं है। यदि कोई संविधान संशोधन संविधान की मूल संरचना को नष्ट या क्षति पहुँचाता है तो न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है। इसी निर्णय में मूल संरचना सिद्धांत का प्रतिपादन हुआ।

प्रश्न 40: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) मूल संरचना सिद्धांत के अंतर्गत कौन-कौन से तत्व सम्मिलित हैं, इसकी कोई संपूर्ण एवं अंतिम सूची सर्वोच्च न्यायालय ने निर्धारित नहीं की है। (2) मूल संरचना सिद्धांत का विकास विभिन्न न्यायिक निर्णयों के माध्यम से क्रमिक रूप से हुआ है। (3) संसद को यह अधिकार है कि वह संविधान संशोधन द्वारा मूल संरचना सिद्धांत को ही समाप्त कर दे।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
सर्वोच्च न्यायालय ने मूल संरचना के तत्वों की कोई अंतिम या बंद सूची निर्धारित नहीं की है। समय-समय पर विभिन्न मामलों जैसे केशवानंद भारती, इंदिरा नेहरू गांधी, मिनर्वा मिल्स, एस. आर. बोम्मई आदि में नए तत्वों को मूल संरचना का भाग माना गया है। संसद मूल संरचना सिद्धांत को समाप्त नहीं कर सकती क्योंकि वही सिद्धांत उसकी संशोधन शक्ति की संवैधानिक सीमा निर्धारित करता है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं।

प्रश्न 41: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) न्यायिक समीक्षा और न्यायपालिका की स्वतंत्रता दोनों को संविधान की मूल संरचना का भाग माना गया है। (2) संसद संविधान संशोधन द्वारा इन दोनों सिद्धांतों को पूर्णतः समाप्त नहीं कर सकती। (3) इन सिद्धांतों का संरक्षण भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र की स्थिरता से जुड़ा हुआ है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक समीक्षा तथा न्यायपालिका की स्वतंत्रता दोनों को सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान की मूल संरचना का अंग माना है। मूल संरचना सिद्धांत के कारण संसद इन सिद्धांतों को समाप्त नहीं कर सकती। ये दोनों तत्व संविधान की सर्वोच्चता, विधि के शासन, मौलिक अधिकारों की सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 42: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 141 और अनुच्छेद 142 दोनों सर्वोच्च न्यायालय की संस्थागत भूमिका को सुदृढ़ करते हैं। (2) अनुच्छेद 141 न्यायालय द्वारा घोषित विधि की बाध्यकारी प्रकृति से संबंधित है। (3) अनुच्छेद 142 पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने हेतु विशेष शक्ति प्रदान करता है।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 141 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि को सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी बनाता है, जबकि अनुच्छेद 142 न्यायालय को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश पारित करने की शक्ति देता है। दोनों प्रावधान सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक स्थिति और प्रभावशीलता को सुदृढ़ करते हैं। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 43: निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को अपने निर्णयों के पुनर्विलोकन की शक्ति प्रदान करता है?

  • A. अनुच्छेद 136
  • B. अनुच्छेद 137 ✓
  • C. अनुच्छेद 141
  • D. अनुच्छेद 142
सही उत्तर: B — अनुच्छेद 137
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 137 सर्वोच्च न्यायालय को अपने निर्णयों और आदेशों के पुनर्विलोकन की शक्ति प्रदान करता है। यह शक्ति न्यायालय को स्पष्ट त्रुटियों या न्याय के गंभीर विफल होने की स्थिति में अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की अनुमति देती है। यह सामान्य अपील का विकल्प नहीं है बल्कि एक सीमित संवैधानिक उपाय है।

प्रश्न 44: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) जनहित याचिका का विकास न्यायिक सक्रियता से निकटता से जुड़ा हुआ है। (2) जनहित याचिका ने लोकस स्टैंडी के सिद्धांत को उदार बनाया। (3) जनहित याचिका केवल पर्यावरणीय मामलों में ही स्वीकार की जाती है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
जनहित याचिका भारतीय न्यायिक सक्रियता का एक प्रमुख उपकरण है। इसने लोकस स्टैंडी के पारंपरिक सिद्धांत को उदार बनाकर व्यापक लोकहित के प्रश्नों को न्यायिक परीक्षण के लिए उपलब्ध कराया। इसका उपयोग पर्यावरण, मानवाधिकार, कारागार सुधार, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक जवाबदेही और अनेक अन्य विषयों में हुआ है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 45: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का भाग है। (2) न्यायाधीशों को पद से हटाने की कठिन प्रक्रिया न्यायपालिका की स्वतंत्रता का एक संरक्षण है। (3) न्यायाधीशों का वेतन साधारण विनियोग मतदान के अधीन होता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. केवल 1 और 2 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का भाग है। न्यायाधीशों को हटाने की जटिल महाभियोग प्रक्रिया तथा वेतन का संचित निधि पर भारित होना उनकी स्वतंत्रता की महत्वपूर्ण संवैधानिक सुरक्षा है। न्यायाधीशों का वेतन साधारण विनियोग मतदान के अधीन नहीं होता। अतः कथन 1 और 2 सही तथा कथन 3 गलत है।

प्रश्न 46: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता क्षेत्रीय सीमाओं से प्रभावित होती है। (2) सर्वोच्च न्यायालय की अनुच्छेद 32 के अंतर्गत अधिकारिता पूरे भारत में विस्तृत है। (3) अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय की विषयगत अधिकारिता अनुच्छेद 32 से व्यापक है।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता उसके क्षेत्राधिकार से संबंधित होती है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय की अधिकारिता पूरे भारत में लागू होती है। साथ ही उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत मौलिक अधिकारों के अतिरिक्त अन्य विधिक अधिकारों की रक्षा के लिए भी रिट जारी कर सकता है। इसलिए विषयगत दृष्टि से उसकी रिट अधिकारिता अनुच्छेद 32 से व्यापक मानी जाती है। तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 47: निम्नलिखित में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं? (1) केशवानंद भारती - मूल संरचना सिद्धांत (2) मिनर्वा मिल्स - न्यायिक समीक्षा (3) एस. आर. बोम्मई - संघवाद एवं अनुच्छेद 356

  • A. केवल 1
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती मामला मूल संरचना सिद्धांत से, मिनर्वा मिल्स मामला न्यायिक समीक्षा एवं सीमित संशोधन शक्ति से तथा एस. आर. बोम्मई मामला संघवाद एवं अनुच्छेद 356 की न्यायिक समीक्षा से संबंधित है। तीनों युग्म सही सुमेलित हैं।

प्रश्न 48: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अनुच्छेद 142 के संबंध में सही नहीं है?

  • A. यह सर्वोच्च न्यायालय को पूर्ण न्याय करने की शक्ति देता है।
  • B. इसका प्रयोग असाधारण परिस्थितियों में किया जा सकता है।
  • C. इसके अंतर्गत पारित आदेश पूरे भारत में प्रवर्तनीय हो सकते हैं।
  • D. इसके आधार पर सर्वोच्च न्यायालय संविधान की मूल संरचना को निरस्त कर सकता है। ✓
सही उत्तर: D — इसके आधार पर सर्वोच्च न्यायालय संविधान की मूल संरचना को निरस्त कर सकता है।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने हेतु व्यापक शक्ति प्रदान करता है, परंतु यह शक्ति संविधान से ऊपर नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय स्वयं संविधान की मूल संरचना का संरक्षक है, उसे निरस्त करने का अधिकार नहीं रखता। अन्य तीनों कथन अनुच्छेद 142 की प्रकृति के अनुरूप हैं।

प्रश्न 49: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय तक प्रत्यक्ष पहुँच प्राप्त होती है। (2) अनुच्छेद 32 केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन से संबंधित है। (3) अनुच्छेद 32 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने संविधान का "हृदय और आत्मा" कहा था।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 32 नागरिकों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है। यह स्वयं एक मौलिक अधिकार है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने इसे संविधान का "हृदय और आत्मा" कहा था। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 50: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान की मूल संरचना सिद्धांत का स्पष्ट उल्लेख संविधान के मूल पाठ में नहीं है। (2) मूल संरचना सिद्धांत न्यायिक व्याख्या के माध्यम से विकसित हुआ है। (3) संसद अनुच्छेद 368 के अंतर्गत मूल संरचना को समाप्त कर सकती है यदि संशोधन विशेष बहुमत से पारित हो जाए।

  • A. केवल 1 और 2 ✓
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
मूल संरचना सिद्धांत संविधान के मूल पाठ में कहीं उल्लिखित नहीं है। इसका विकास सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष रूप से केशवानंद भारती मामले (1973) में किया। इस सिद्धांत के अनुसार संसद संविधान में संशोधन तो कर सकती है, परंतु उसकी मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती। अतः कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 51: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) न्यायिक समीक्षा का उद्देश्य संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखना है। (2) न्यायिक समीक्षा संघीय संतुलन की रक्षा में भी सहायक होती है। (3) न्यायिक समीक्षा के अभाव में संविधान-विरोधी कानूनों को निरस्त करने का कोई न्यायिक साधन नहीं बचेगा।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक समीक्षा भारतीय संविधान की सर्वोच्चता, संघीय ढाँचे, मौलिक अधिकारों और विधि के शासन की रक्षा का प्रमुख साधन है। इसके माध्यम से न्यायालय संविधान-विरोधी विधियों और कार्यपालिका के आदेशों को निरस्त कर सकते हैं। यदि यह शक्ति न हो तो संविधान की सर्वोच्चता व्यवहारिक रूप से कमजोर हो जाएगी। इसी कारण सर्वोच्च न्यायालय ने इसे संविधान की मूल संरचना का हिस्सा माना है।

प्रश्न 52: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना और उच्च न्यायालय की अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति उनके अभिलेख न्यायालय होने से संबंधित है। (2) सर्वोच्च न्यायालय को यह शक्ति अनुच्छेद 129 से तथा उच्च न्यायालय को अनुच्छेद 215 से प्राप्त होती है।

  • A. केवल 1
  • B. 1 और 2 दोनों ✓
  • C. केवल 2
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: B — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 129) तथा उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 215) दोनों को अभिलेख न्यायालय का दर्जा प्राप्त है। इस स्थिति का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि दोनों न्यायालय अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति रखते हैं। न्यायपालिका की गरिमा, अधिकार और प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए यह शक्ति आवश्यक मानी जाती है। अतः दोनों कथन सही हैं।

प्रश्न 53: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) जनहित याचिका के माध्यम से न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण से संबंधित अनेक दिशा-निर्देश विकसित किए हैं। (2) जनहित याचिका के माध्यम से न्यायालय ने प्रशासनिक निष्क्रियता के मामलों में भी हस्तक्षेप किया है। (3) जनहित याचिका का प्रयोग केवल मौलिक अधिकारों के मामलों तक सीमित है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
जनहित याचिका के माध्यम से न्यायपालिका ने पर्यावरण संरक्षण, कारागार सुधार, बंधुआ मजदूरी, महिला अधिकार, प्रशासनिक जवाबदेही तथा सुशासन से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। इसका उपयोग केवल मौलिक अधिकारों तक सीमित नहीं रहा है। इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 54: निम्नलिखित में से किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को असंवैधानिक घोषित किया?

  • A. सर्वोच्च न्यायालय अधिवक्ता-रिकॉर्ड संघ बनाम भारत संघ ✓
  • B. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
  • C. मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
  • D. द्वितीय न्यायाधीश मामला
सही उत्तर: A — सर्वोच्च न्यायालय अधिवक्ता-रिकॉर्ड संघ बनाम भारत संघ
व्याख्या (Explanation):
2015 में सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय अधिवक्ता-रिकॉर्ड संघ बनाम भारत संघ मामले में 99वें संविधान संशोधन तथा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम को असंवैधानिक घोषित किया। न्यायालय ने माना कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का भाग है और प्रस्तावित व्यवस्था उस स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है। यह निर्णय न्यायिक नियुक्तियों के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 55: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने हेतु न्यायाधीशों के वेतन और भत्तों को भारत की संचित निधि पर भारित किया गया है। (2) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन को उनके कार्यकाल के दौरान उनके प्रतिकूल घटाया नहीं जा सकता, सिवाय वित्तीय आपातकाल की स्थिति में। (3) न्यायपालिका की स्वतंत्रता केवल न्यायिक समीक्षा पर आधारित है।

  • A. केवल 1 और 3
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने हेतु न्यायाधीशों के वेतन, भत्ते और पेंशन भारत की संचित निधि पर भारित किए गए हैं। उनके वेतन में कार्यकाल के दौरान प्रतिकूल परिवर्तन नहीं किया जा सकता, सिवाय वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) की स्थिति में। न्यायपालिका की स्वतंत्रता केवल न्यायिक समीक्षा पर आधारित नहीं है, बल्कि अनेक संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर आधारित है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं।

प्रश्न 56: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन "सीमित संशोधन शक्ति" के सिद्धांत को सर्वाधिक उपयुक्त रूप से व्यक्त करता है?

  • A. संसद संविधान के किसी भी भाग को बिना किसी सीमा के संशोधित कर सकती है।
  • B. संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, परंतु उसकी मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती। ✓
  • C. संसद केवल मौलिक अधिकारों में संशोधन कर सकती है।
  • D. संसद केवल नीति-निदेशक तत्वों में संशोधन कर सकती है।
सही उत्तर: B — संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, परंतु उसकी मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती।
व्याख्या (Explanation):
सीमित संशोधन शक्ति का सिद्धांत केशवानंद भारती तथा मिनर्वा मिल्स मामलों से विकसित हुआ। इसके अनुसार संसद को अनुच्छेद 368 के अंतर्गत व्यापक संशोधन शक्ति प्राप्त है, किंतु वह संविधान की मूल संरचना को नष्ट, परिवर्तित या समाप्त नहीं कर सकती। यह सिद्धांत भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र में शक्ति-संतुलन का महत्वपूर्ण आधार है।

प्रश्न 57: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) उच्च न्यायालय की अधीक्षण शक्ति [अनुच्छेद 227] और रिट अधिकारिता [अनुच्छेद 226] समान प्रकृति की हैं। (2) अनुच्छेद 227 के अंतर्गत उच्च न्यायालय अधीनस्थ न्यायालयों की कार्यवाही की निगरानी कर सकता है। (3) अनुच्छेद 227 का प्रयोग केवल प्रशासनिक नियंत्रण तक सीमित नहीं है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. केवल 2 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 226 और 227 अलग-अलग प्रकृति की शक्तियाँ प्रदान करते हैं। अनुच्छेद 226 रिट अधिकारिता से संबंधित है जबकि अनुच्छेद 227 अधीनस्थ न्यायालयों एवं अधिकरणों पर अधीक्षण शक्ति प्रदान करता है। यह शक्ति प्रशासनिक और न्यायिक दोनों प्रकार की हो सकती है। अतः कथन 1 गलत तथा कथन 2 और 3 सही हैं।

प्रश्न 58: निम्नलिखित में से किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने "मौलिक अधिकार" और "नीति-निदेशक तत्वों" के बीच सामंजस्य एवं संतुलन को संविधान की मूल संरचना का भाग माना?

  • A. मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ ✓
  • B. शंकर प्रसाद बनाम भारत संघ
  • C. ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
  • D. रोमेश थापर बनाम मद्रास राज्य
सही उत्तर: A — मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
व्याख्या (Explanation):
मिनर्वा मिल्स मामला (1980) भारतीय संवैधानिक विधि का एक ऐतिहासिक निर्णय है जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि मौलिक अधिकारों और नीति-निदेशक तत्वों के बीच संतुलन संविधान की मूल संरचना का भाग है। न्यायालय ने 42वें संविधान संशोधन के कुछ प्रावधानों को इसी आधार पर असंवैधानिक घोषित किया। यह निर्णय न्यायिक समीक्षा और सीमित संशोधन शक्ति की पुनर्पुष्टि भी करता है।

प्रश्न 59: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) सर्वोच्च न्यायालय की परामर्शदात्री राय सामान्यतः बाध्यकारी नहीं होती। (2) राष्ट्रपति लोकमहत्त्व के विधिक अथवा तथ्यात्मक प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श मांग सकता है। (3) अनुच्छेद 143 के अंतर्गत दिया गया परामर्श निर्णय के समान बाध्यकारी नहीं होता।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति विधि अथवा तथ्य के लोकमहत्त्व के प्रश्न पर परामर्श मांग सकता है। न्यायालय की राय सामान्यतः बाध्यकारी नहीं होती।

प्रश्न 60: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 13 के अंतर्गत "विधि" में अध्यादेश भी सम्मिलित हैं। (2) संविधान से असंगत विधि उस सीमा तक शून्य होती है जहाँ तक वह संविधान से असंगत है। (3) न्यायिक समीक्षा का प्रयोग केवल सर्वोच्च न्यायालय ही कर सकता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 13 में विधि की परिभाषा व्यापक है जिसमें अधिनियम, अध्यादेश, नियम, विनियम आदि सम्मिलित हैं। संविधान से असंगत विधि केवल उस सीमा तक शून्य होती है जहाँ तक वह असंगत है। न्यायिक समीक्षा की शक्ति उच्च न्यायालयों को भी अनुच्छेद 226 के अंतर्गत प्राप्त है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं।

प्रश्न 61: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) जनहित याचिका का प्रयोग मूलतः सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने हेतु किया गया था। (2) समय के साथ इसका उपयोग पर्यावरण संरक्षण, सुशासन और मानवाधिकार संबंधी मामलों में भी हुआ। (3) सर्वोच्च न्यायालय ने यह माना है कि जनहित याचिका का दुरुपयोग भी संभव है।

  • A. 1, 2 और 3 ✓
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: A — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
जनहित याचिका का प्रारंभिक उद्देश्य समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को न्याय उपलब्ध कराना था। बाद में इसका विस्तार पर्यावरण संरक्षण, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक जवाबदेही, मानवाधिकार तथा सुशासन जैसे क्षेत्रों तक हुआ। साथ ही न्यायालयों ने बार-बार यह चेतावनी भी दी है कि जनहित याचिका को व्यक्तिगत हित, राजनीतिक लाभ या प्रचार के साधन के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 62: निम्नलिखित में से कौन-सा मामला न्यायिक समीक्षा की शक्ति को संविधान की मूल संरचना से जोड़ने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है?

  • A. ए. के. गोपालन मामला
  • B. शंकर प्रसाद मामला
  • C. मिनर्वा मिल्स मामला ✓
  • D. रोमेश थापर मामला
सही उत्तर: C — मिनर्वा मिल्स मामला
व्याख्या (Explanation):
मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि सीमित संशोधन शक्ति तथा न्यायिक समीक्षा संविधान की मूल संरचना का हिस्सा हैं। इस निर्णय ने 42वें संविधान संशोधन के कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया और न्यायपालिका की भूमिका को पुनः सुदृढ़ किया। यह निर्णय केशवानंद भारती के सिद्धांत का महत्वपूर्ण विस्तार माना जाता है।

प्रश्न 63: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) कोलेजियम प्रणाली का उल्लेख संविधान के मूल पाठ में नहीं है। (2) कोलेजियम प्रणाली का विकास न्यायिक निर्णयों के माध्यम से हुआ। (3) राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक घोषित किया था।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
कोलेजियम प्रणाली संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित नहीं है, बल्कि इसका विकास द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993) तथा तृतीय न्यायाधीश मामला (1998) जैसे निर्णयों के माध्यम से हुआ। 2015 में सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम तथा 99वें संविधान संशोधन को न्यायपालिका की स्वतंत्रता के आधार पर असंवैधानिक घोषित कर दिया। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 64: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) उत्प्रेषण रिट अधीनस्थ न्यायालयों, अधिकरणों तथा न्यायिक/अर्ध-न्यायिक कार्य करने वाले निकायों के विरुद्ध जारी की जा सकती है। (2) प्रतिषेध रिट कार्यवाही पूर्ण होने के बाद जारी की जाती है। (3) उत्प्रेषण रिट का प्रभाव अधीनस्थ प्राधिकारी के आदेश को निरस्त करना हो सकता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
प्रतिषेध रिट कार्यवाही पूर्ण होने से पहले जारी की जाती है जबकि उत्प्रेषण रिट आदेश को निरस्त करने हेतु जारी की जा सकती है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं।

प्रश्न 65: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  • A. न्यायपालिका की स्वतंत्रता को संविधान की मूल संरचना का भाग माना गया है। ✓
  • B. न्यायपालिका की स्वतंत्रता केवल नीति-निदेशक तत्वों पर आधारित है।
  • C. न्यायपालिका की स्वतंत्रता केवल सर्वोच्च न्यायालय तक सीमित है।
  • D. न्यायपालिका की स्वतंत्रता का संविधान में कोई आधार नहीं है।
सही उत्तर: A — न्यायपालिका की स्वतंत्रता को संविधान की मूल संरचना का भाग माना गया है।
व्याख्या (Explanation):
सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को संविधान की मूल संरचना का भाग माना है। न्यायाधीशों की सुरक्षा, वेतन की संरक्षित स्थिति, हटाने की कठिन प्रक्रिया, न्यायिक समीक्षा तथा कार्यपालिका से पृथक्करण जैसी व्यवस्थाएँ इसकी संवैधानिक आधारशिला हैं। यह भारतीय लोकतंत्र और विधि के शासन के लिए अत्यंत आवश्यक सिद्धांत है।

प्रश्न 66: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता उसके भौगोलिक क्षेत्राधिकार से जुड़ी होती है। (2) उच्च न्यायालय ऐसे मामलों में भी रिट जारी कर सकता है जहाँ कारण-कार्यवाही का कोई भाग उसके क्षेत्र में उत्पन्न हुआ हो। (3) यह व्यवस्था संविधान [पंद्रहवाँ संशोधन] अधिनियम, 1963 के बाद अधिक स्पष्ट हुई।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता क्षेत्रीय सीमाओं से जुड़ी होती है। पंद्रहवें संविधान संशोधन, 1963 के बाद यह स्पष्ट किया गया कि यदि कारण-कार्यवाही का कोई भाग उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार में उत्पन्न हुआ है तो वह रिट जारी कर सकता है, भले ही संबंधित प्राधिकारी उसके क्षेत्र से बाहर स्थित हो। यह प्रशासनिक और संवैधानिक विधि का महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

प्रश्न 67: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है? (1) केशवानंद भारती - मूल संरचना सिद्धांत (2) मिनर्वा मिल्स - सीमित संशोधन शक्ति (3) एस. आर. बोम्मई - न्यायिक नियुक्तियाँ (4) गोलकनाथ - मौलिक अधिकार एवं संशोधन शक्ति

  • A. केवल 1
  • B. केवल 3 ✓
  • C. केवल 2 और 4
  • D. केवल 4
सही उत्तर: B — केवल 3
व्याख्या (Explanation):
एस. आर. बोम्मई मामला मुख्यतः अनुच्छेद 356, संघवाद तथा राष्ट्रपति शासन की न्यायिक समीक्षा से संबंधित था, न कि न्यायिक नियुक्तियों से। शेष सभी युग्म सही सुमेलित हैं। यह प्रश्न महत्वपूर्ण संवैधानिक निर्णयों और उनके विषय-वस्तु के बीच अंतर करने की क्षमता का परीक्षण करता है।

प्रश्न 68: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को पूर्ण न्याय करने हेतु आदेश पारित करने की शक्ति देता है। (2) अनुच्छेद 142 के अंतर्गत पारित आदेश संविधान के किसी भी प्रावधान को निरस्त कर सकते हैं। (3) अनुच्छेद 142 का प्रयोग न्यायालय द्वारा असाधारण परिस्थितियों में किया जाता है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 2
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को उसके समक्ष लंबित मामलों में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश पारित करने की शक्ति प्रदान करता है। हालांकि यह शक्ति व्यापक है, परंतु इसका प्रयोग संविधान या विधि के मूल प्रावधानों को निरस्त करने के लिए नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने विभिन्न मामलों में स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 142 संवैधानिक सीमाओं के भीतर ही प्रयोग किया जाएगा। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं।

प्रश्न 69: निम्नलिखित में से किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने संसद की संशोधन शक्ति को स्वीकार करते हुए मूल संरचना सिद्धांत प्रतिपादित किया?

  • A. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य ✓
  • B. गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
  • C. मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
  • D. शंकर प्रसाद बनाम भारत संघ
सही उत्तर: A — केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती मामला भारतीय संवैधानिक इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय माना जाता है। न्यायालय ने निर्णय दिया कि संसद संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है, किंतु संविधान की मूल संरचना को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती। यही मूल संरचना सिद्धांत कहलाता है। यह निर्णय संसद और न्यायपालिका के बीच संवैधानिक संतुलन स्थापित करता है।

प्रश्न 70: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) न्यायिक समीक्षा का संवैधानिक आधार केवल अनुच्छेद 13 तक सीमित नहीं है। (2) न्यायिक समीक्षा की शक्ति अनुच्छेद 32 और 226 से भी सुदृढ़ होती है। (3) न्यायिक समीक्षा को सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान की मूल संरचना का भाग माना है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक समीक्षा का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 13, 32, 131–136, 226 तथा 227 सहित अनेक प्रावधानों में निहित है। सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती तथा मिनर्वा मिल्स मामलों में न्यायिक समीक्षा को संविधान की मूल संरचना का भाग माना है। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 71: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) उच्च न्यायालय संविधान के अंतर्गत अभिलेख न्यायालय है। (2) उच्च न्यायालय को अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त है। (3) उच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय का दर्जा अनुच्छेद 215 द्वारा प्राप्त है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3 ✓
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 215 प्रत्येक उच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय घोषित करता है। अभिलेख न्यायालय होने के कारण उसके निर्णय स्थायी अभिलेख के रूप में मान्य होते हैं तथा उसे अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त होती है। यह शक्ति न्यायपालिका की गरिमा, स्वतंत्रता और प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए आवश्यक मानी जाती है। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 72: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन जनहित याचिका के संबंध में सही है?

  • A. न्यायालय ने पत्रों और पोस्टकार्डों को भी कुछ मामलों में याचिका के रूप में स्वीकार किया है। ✓
  • B. जनहित याचिका केवल सर्वोच्च न्यायालय में ही दायर की जा सकती है।
  • C. जनहित याचिका केवल मौलिक अधिकारों से संबंधित मामलों तक सीमित है।
  • D. जनहित याचिका में लोकस स्टैंडी का पारंपरिक सिद्धांत कठोर रूप से लागू होता है।
सही उत्तर: A — न्यायालय ने पत्रों और पोस्टकार्डों को भी कुछ मामलों में याचिका के रूप में स्वीकार किया है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय न्यायपालिका ने जनहित याचिका के विकास के दौरान प्रक्रिया को सरल और लचीला बनाया। कुछ मामलों में न्यायालयों ने पत्रों और पोस्टकार्डों को भी याचिका के रूप में स्वीकार किया, जिसे पत्राधिकार क्षेत्र कहा जाता है। जनहित याचिका उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों में दायर की जा सकती है तथा इसमें पारंपरिक लोकस स्टैंडी को उदार बनाया गया है।

प्रश्न 73: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 50 राज्य को न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक करने का निर्देश देता है। (2) यह राज्य के नीति-निदेशक तत्वों का भाग है। (3) यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुदृढ़ करने में सहायक माना जाता है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 और 3 ✓
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: B — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 50 राज्य के नीति-निदेशक तत्वों में सम्मिलित है और राज्य को न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक करने का निर्देश देता है। यह न्यायिक स्वतंत्रता की संवैधानिक अवधारणा को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण प्रावधान है। यद्यपि नीति-निदेशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रवर्तनीय नहीं हैं, फिर भी शासन के मूलभूत सिद्धांत माने जाते हैं। अतः तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 74: निम्नलिखित में से किस मामले का संबंध न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायिक नियुक्तियों में कोलेजियम प्रणाली के विकास से है?

  • A. एस. आर. बोम्मई मामला
  • B. केशवानंद भारती मामला
  • C. द्वितीय न्यायाधीश मामला ✓
  • D. गोलकनाथ मामला
सही उत्तर: C — द्वितीय न्यायाधीश मामला
व्याख्या (Explanation):
द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993) भारतीय न्यायिक नियुक्ति व्यवस्था के इतिहास में एक महत्वपूर्ण निर्णय है। इस निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में न्यायपालिका की प्रधान भूमिका को मान्यता दी और कोलेजियम प्रणाली की नींव रखी। बाद में तृतीय न्यायाधीश मामले (1998) ने इस प्रणाली को और स्पष्ट किया। यह विषय न्यायपालिका की स्वतंत्रता से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है।

प्रश्न 75: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का पुनर्विलोकन किया जा सकता है। (2) पुनर्विलोकन याचिका खारिज होने के बाद भी उपचारात्मक याचिका का सीमित उपाय उपलब्ध हो सकता है। (3) उपचारात्मक याचिका का उल्लेख संविधान में स्पष्ट रूप से किया गया है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 2 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
सर्वोच्च न्यायालय को अनुच्छेद 137 के अंतर्गत पुनर्विलोकन की शक्ति प्राप्त है। पुनर्विलोकन याचिका अस्वीकृत होने के बाद अत्यंत सीमित परिस्थितियों में उपचारात्मक याचिका का उपाय उपलब्ध हो सकता है, जिसका विकास न्यायालय ने न्यायिक निर्णयों के माध्यम से किया है। उपचारात्मक याचिका का संविधान में स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 76: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) न्यायिक समीक्षा संविधान की मूल संरचना का भाग मानी जाती है। (2) संसद संविधान संशोधन के माध्यम से न्यायिक समीक्षा को पूर्णतः समाप्त कर सकती है।

  • A. केवल 1 ✓
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — केवल 1
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती, मिनर्वा मिल्स तथा अन्य निर्णयों में सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक समीक्षा को संविधान की मूल संरचना का हिस्सा माना है। चूँकि संसद संविधान की मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती, इसलिए न्यायिक समीक्षा को पूर्णतः समाप्त करना संभव नहीं है। अतः पहला कथन सही और दूसरा कथन गलत है। यह भारतीय संवैधानिक कानून की अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है।

प्रश्न 77: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत उच्च न्यायालय को अधीनस्थ न्यायालयों पर प्रशासनिक नियंत्रण प्राप्त है?

  • A. अनुच्छेद 226
  • B. अनुच्छेद 235 ✓
  • C. अनुच्छेद 233
  • D. अनुच्छेद 227
सही उत्तर: B — अनुच्छेद 235
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 235 उच्च न्यायालय को अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण प्रदान करता है। इसमें पदस्थापन, पदोन्नति, अवकाश, अनुशासनात्मक कार्यवाही तथा सेवा-संबंधी प्रशासनिक नियंत्रण सम्मिलित हैं। दूसरी ओर अनुच्छेद 227 उच्च न्यायालय को अधीनस्थ न्यायालयों और अधिकरणों पर अधीक्षण की शक्ति प्रदान करता है। अतः "नियंत्रण" शब्द के संदर्भ में सही उत्तर अनुच्छेद 235 है।

प्रश्न 78: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन न्यायिक सक्रियता और न्यायिक अतिक्रमण के बीच अंतर को सर्वाधिक उचित रूप से व्यक्त करता है?

  • A. दोनों पूर्णतः समान अवधारणाएँ हैं।
  • B. न्यायिक सक्रियता केवल आपराधिक मामलों तक सीमित है।
  • C. न्यायिक अतिक्रमण केवल उच्च न्यायालयों द्वारा किया जाता है।
  • D. न्यायिक सक्रियता संवैधानिक सीमाओं के भीतर लोकहित संरक्षण पर बल देती है, जबकि न्यायिक अतिक्रमण में अन्य अंगों के क्षेत्र में अत्यधिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया जाता है। ✓
सही उत्तर: D — न्यायिक सक्रियता संवैधानिक सीमाओं के भीतर लोकहित संरक्षण पर बल देती है, जबकि न्यायिक अतिक्रमण में अन्य अंगों के क्षेत्र में अत्यधिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया जाता है।
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक सक्रियता का उद्देश्य संविधान, मौलिक अधिकारों तथा लोकहित की रक्षा करना है, जबकि न्यायिक अतिक्रमण शब्द का प्रयोग तब किया जाता है जब यह आरोप लगाया जाए कि न्यायपालिका विधायिका या कार्यपालिका के क्षेत्र में आवश्यकता से अधिक हस्तक्षेप कर रही है। दोनों अवधारणाओं के बीच यही मूल अंतर है।

प्रश्न 79: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) सर्वोच्च न्यायालय अपने पूर्व निर्णयों का पुनर्विलोकन कर सकता है। (2) पुनर्विलोकन की शक्ति संविधान के अनुच्छेद 137 में निहित है। (3) पुनर्विलोकन याचिका का उद्देश्य नियमित अपील का विकल्प प्रदान करना है।

  • A. केवल 1 और 3
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 137 सर्वोच्च न्यायालय को अपने निर्णयों या आदेशों का पुनर्विलोकन करने की शक्ति प्रदान करता है। यह शक्ति सीमित परिस्थितियों में प्रयोग की जाती है, जैसे स्पष्ट त्रुटि या न्याय के गंभीर विफल होने की स्थिति में। पुनर्विलोकन याचिका नियमित अपील का विकल्प नहीं है, बल्कि एक असाधारण संवैधानिक उपाय है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 80: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) संविधान का अनुच्छेद 141 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि को भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी बनाता है। (2) अनुच्छेद 141 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के प्रत्येक अवलोकन को बाध्यकारी विधि माना जाता है।

  • A. केवल 1 ✓
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — केवल 1
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 141 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होती है। किंतु किसी निर्णय में की गई प्रत्येक टिप्पणी, अवलोकन या प्रसंगवश कथन बाध्यकारी नहीं होता। केवल निर्णय का विधिक सिद्धांत बाध्यकारी माना जाता है। यह न्यायिक नज़ीर की अवधारणा का महत्वपूर्ण भाग है।

प्रश्न 81: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) जनहित याचिका की अवधारणा ने लोकस स्टैंडी के पारंपरिक सिद्धांत को उदार बनाया। (2) जनहित याचिका केवल प्रभावित व्यक्ति द्वारा ही दायर की जा सकती है। (3) जनहित याचिका का उद्देश्य न्याय तक व्यापक पहुँच सुनिश्चित करना है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2
  • D. केवल 1 और 3 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
जनहित याचिका ने लोकस स्टैंडी के पारंपरिक सिद्धांत को उदार बनाते हुए ऐसे व्यक्तियों और संगठनों को भी न्यायालय जाने की अनुमति दी जो सीधे प्रभावित न हों, किंतु सार्वजनिक हित में कार्य कर रहे हों। इसका उद्देश्य समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को न्याय तक पहुँच उपलब्ध कराना है। इसलिए कथन 1 और 3 सही हैं, जबकि कथन 2 गलत है। यह भारतीय न्यायिक सक्रियता का एक महत्वपूर्ण आयाम है।

प्रश्न 82: निम्नलिखित में से किस मामले ने संसद की संविधान संशोधन शक्ति और मौलिक अधिकारों के संबंध में व्यापक संवैधानिक बहस को जन्म दिया तथा केशवानंद भारती निर्णय में प्रतिपादित मूल संरचना सिद्धांत की पृष्ठभूमि तैयार की?

  • A. ए. के. गोपालन मामला
  • B. गोलकनाथ मामला ✓
  • C. एस. आर. बोम्मई मामला
  • D. शंकर प्रसाद मामला
सही उत्तर: B — गोलकनाथ मामला
व्याख्या (Explanation):
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि संसद मौलिक अधिकारों में संशोधन नहीं कर सकती। यद्यपि बाद में केशवानंद भारती मामले ने इस स्थिति को परिवर्तित किया, फिर भी गोलकनाथ निर्णय ने संसद की संशोधन शक्ति और मौलिक अधिकारों के संबंध में व्यापक संवैधानिक बहस को जन्म दिया। यह मूल संरचना सिद्धांत के विकास की महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि बना।

प्रश्न 83: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) उत्प्रेषण रिट अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को निरस्त कर सकती है। (2) प्रतिषेध रिट अधीनस्थ न्यायालय को आगे की कार्यवाही करने से रोकती है। (3) प्रतिषेध और उत्प्रेषण दोनों केवल प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध जारी की जाती हैं।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 2 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
उत्प्रेषण अधीनस्थ न्यायालय या अधिकरण के आदेश को निरस्त करने हेतु जारी की जा सकती है, जबकि प्रतिषेध कार्यवाही पूर्ण होने से पूर्व उसे रोकने हेतु जारी की जाती है। तीसरा कथन गलत है क्योंकि ये रिटें मुख्यतः न्यायिक या अर्ध-न्यायिक निकायों के विरुद्ध जारी की जाती हैं, केवल प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध नहीं।

प्रश्न 84: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन न्यायिक समीक्षा के संबंध में सही है?

  • A. यह संविधान की सर्वोच्चता सुनिश्चित करने का माध्यम है। ✓
  • B. यह केवल आपराधिक मामलों में लागू होती है।
  • C. यह केवल उच्च न्यायालयों द्वारा प्रयोग की जाती है।
  • D. इसका उल्लेख संविधान में कहीं नहीं है।
सही उत्तर: A — यह संविधान की सर्वोच्चता सुनिश्चित करने का माध्यम है।
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक समीक्षा भारतीय संवैधानिक व्यवस्था का एक मूलभूत तत्व है और संविधान की सर्वोच्चता सुनिश्चित करती है। इसका प्रयोग सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय दोनों करते हैं। यद्यपि "न्यायिक समीक्षा" शब्द संविधान में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है, इसकी शक्ति विभिन्न अनुच्छेदों जैसे 13, 32, 131–136, 226 और 227 से व्युत्पन्न होती है। इसे संविधान की मूल संरचना का भाग माना गया है।

प्रश्न 85: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। (2) जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति में संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श आवश्यक है। (3) जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 2 और 3
  • D. केवल 1 और 2 ✓
सही उत्तर: D — केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 233 के अनुसार जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है। राष्ट्रपति की इस प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं होती। यह व्यवस्था न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रशासन की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।

प्रश्न 86: निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायिक सक्रियता का प्रमुख उदाहरण माना जाता है?

  • A. संसद द्वारा संविधान संशोधन
  • B. जनहित याचिकाओं के माध्यम से सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना ✓
  • C. निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कराना
  • D. वित्त आयोग द्वारा संसाधनों का वितरण
सही उत्तर: B — जनहित याचिकाओं के माध्यम से सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक सक्रियता का आशय न्यायपालिका द्वारा संवैधानिक मूल्यों और लोकहित की रक्षा हेतु सक्रिय भूमिका निभाने से है। जनहित याचिका इसके सबसे प्रमुख उपकरणों में से एक है। पर्यावरण संरक्षण, कारागार सुधार, बंधुआ मजदूरी, महिला अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही से संबंधित अनेक निर्णय न्यायिक सक्रियता के उदाहरण हैं। अन्य विकल्प न्यायपालिका की भूमिका से संबंधित नहीं हैं।

प्रश्न 87: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता केवल मौलिक अधिकारों तक सीमित नहीं है। (2) उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत अन्य विधिक अधिकारों की रक्षा के लिए भी रिट जारी कर सकता है। (3) अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय की शक्ति, विषय-वस्तु की दृष्टि से अनुच्छेद 32 से व्यापक मानी जाती है।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. 1, 2 और 3 ✓
  • D. केवल 1 और 3
सही उत्तर: C — 1, 2 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को न केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु बल्कि अन्य विधिक अधिकारों के संरक्षण हेतु भी रिट जारी करने की शक्ति देता है। इसी कारण इसकी विषयगत सीमा अनुच्छेद 32 से व्यापक मानी जाती है। हालांकि अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार है, जबकि अनुच्छेद 226 ऐसा नहीं है। तीनों कथन सही हैं।

प्रश्न 88: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है? (1) अनुच्छेद 136 - विशेष अनुमति याचिका (2) अनुच्छेद 143 - राष्ट्रपति का परामर्शाधिकार

  • A. 1 और 2 दोनों ✓
  • B. केवल 1
  • C. केवल 2
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: A — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 136 सर्वोच्च न्यायालय को विशेष अनुमति याचिका स्वीकार करने की विवेकाधीन शक्ति प्रदान करता है, जबकि अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को सार्वजनिक महत्व के विधिक प्रश्नों पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श प्राप्त करने का अधिकार देता है। दोनों अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय के विशिष्ट अधिकार क्षेत्रों से संबंधित हैं।

प्रश्न 89: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार है। (2) अनुच्छेद 32 के अंतर्गत केवल सर्वोच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है। (3) डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान की "आत्मा और हृदय" कहा था।

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3 ✓
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु संवैधानिक उपचार का अधिकार प्रदान करता है और स्वयं एक मौलिक अधिकार है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने इसे संविधान का "हृदय और आत्मा" कहा था। दूसरा कथन गलत है क्योंकि अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय भी रिट जारी कर सकते हैं। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।

प्रश्न 90: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (1) सर्वोच्च न्यायालय का अभिलेख न्यायालय होना उसे अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्रदान करता है। (2) सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होती है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों ✓
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 129 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय है तथा उसे अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त है। अनुच्छेद 141 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होती है। अतः दोनों कथन सही हैं।

प्रश्न 91: निम्नलिखित में से कौन-सी रिट अधीनस्थ न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश या अभिलेख को उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष मंगवाने और उसे निरस्त करने हेतु जारी की जाती है?

  • A. उत्प्रेषण ✓
  • B. प्रतिषेध
  • C. अधिकार-पृच्छा
  • D. परमादेश
सही उत्तर: A — उत्प्रेषण
व्याख्या (Explanation):
उत्प्रेषण रिट उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किसी अधीनस्थ न्यायालय या अधिकरण के आदेश अथवा कार्यवाही को अपने समक्ष मंगवाने और अधिकार-क्षेत्र के अतिक्रमण, विधिक त्रुटि या प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन की स्थिति में उसे निरस्त करने हेतु जारी की जाती है। प्रतिषेध रिट कार्यवाही को आगे बढ़ने से रोकती है, जबकि उत्प्रेषण रिट पहले से किए गए आदेश को निरस्त कर सकती है।

प्रश्न 92: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (1) जनहित याचिका के अंतर्गत प्रभावित व्यक्ति के अतिरिक्त अन्य व्यक्ति भी याचिका दायर कर सकता है। (2) जनहित याचिका का उद्देश्य न्याय तक पहुँच को सरल बनाना है।

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों ✓
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
जनहित याचिका ने पारंपरिक लोकस स्टैंडी के सिद्धांत को उदार बनाया है। इसके अंतर्गत कोई भी जनहित से प्रेरित व्यक्ति, संगठन या समूह समाज के कमजोर, वंचित या पीड़ित वर्गों के हित में न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। इसका मूल उद्देश्य न्याय तक पहुँच का विस्तार करना और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना है। इसलिए दोनों कथन सही हैं।

प्रश्न 93: निम्नलिखित में से कौन-सा उच्च न्यायालय के अधीक्षण से संबंधित है?

  • A. अनुच्छेद 226
  • B. अनुच्छेद 227 ✓
  • C. अनुच्छेद 214
  • D. अनुच्छेद 233
सही उत्तर: B — अनुच्छेद 227
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 227 उच्च न्यायालय को अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी अधीनस्थ न्यायालयों और अधिकरणों पर अधीक्षण की शक्ति प्रदान करता है। यह शक्ति प्रशासनिक तथा न्यायिक दोनों प्रकार की हो सकती है। इसका उद्देश्य अधीनस्थ न्यायपालिका के सुचारु संचालन और न्यायिक मानकों की रक्षा करना है।

प्रश्न 94: निम्नलिखित में से कौन-सा मामला मूल संरचना सिद्धांत की स्थापना से संबंधित है?

  • A. ए. डी. एम. जबलपुर मामला
  • B. मिनर्वा मिल्स मामला
  • C. गोलकनाथ मामला
  • D. केशवानंद भारती मामला ✓
सही उत्तर: D — केशवानंद भारती मामला
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य [1973] के निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने मूल संरचना सिद्धांत प्रतिपादित किया। न्यायालय ने कहा कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, परंतु संविधान की मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती। बाद के मामलों जैसे मिनर्वा मिल्स तथा वामन राव ने भी इस सिद्धांत को और सुदृढ़ किया। यह भारतीय संवैधानिक विधि का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय माना जाता है।

प्रश्न 95: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन न्यायिक पुनर्विलोकन के संबंध में सही है?

  • A. न्यायालय संविधान-विरोधी कानूनों को अमान्य घोषित कर सकता है। ✓
  • B. न्यायालय संसद को भंग कर सकता है।
  • C. न्यायालय राष्ट्रपति को पदच्युत कर सकता है।
  • D. न्यायालय बजट को निरस्त कर सकता है।
सही उत्तर: A — न्यायालय संविधान-विरोधी कानूनों को अमान्य घोषित कर सकता है।
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक पुनर्विलोकन वह शक्ति है जिसके माध्यम से न्यायालय विधायिका और कार्यपालिका के कार्यों की संवैधानिक वैधता की जांच करते हैं। यदि कोई कानून संविधान के प्रावधानों, विशेषकर मौलिक अधिकारों या संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध पाया जाता है तो न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है। भारत में यह शक्ति संविधान की सर्वोच्चता का एक प्रमुख आधार है।

प्रश्न 96: निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वोच्च न्यायालय के मूल अधिकार क्षेत्र [अनुच्छेद 131] में नहीं आता?

  • A. दो राज्यों के बीच विधिक अधिकारों से संबंधित विवाद
  • B. संघ और राज्य के बीच विधिक अधिकारों से संबंधित विवाद
  • C. किसी नागरिक द्वारा मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की शिकायत ✓
  • D. संघ और दो या अधिक राज्यों के बीच विधिक अधिकारों से संबंधित विवाद
सही उत्तर: C — किसी नागरिक द्वारा मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की शिकायत
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 131 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय का मूल अधिकार क्षेत्र संघीय प्रकृति के विवादों तक सीमित है। किसी नागरिक द्वारा मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की शिकायत अनुच्छेद 32 के अंतर्गत लाई जाती है, न कि अनुच्छेद 131 के अंतर्गत।

प्रश्न 97: जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?

  • A. राष्ट्रपति
  • B. राज्यपाल ✓
  • C. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
  • D. मुख्यमंत्री
सही उत्तर: B — राज्यपाल
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 233 के अनुसार जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा उस उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है जिसके अधिकार क्षेत्र में वह राज्य आता है। यह व्यवस्था अधीनस्थ न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। जिला न्यायाधीश राज्य की न्यायिक संरचना में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

प्रश्न 98: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता के संबंध में सही है?

  • A. उच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के संरक्षण हेतु रिट जारी कर सकता है।
  • B. उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता सर्वोच्च न्यायालय से संकुचित है।
  • C. उच्च न्यायालय केवल राज्य सरकार के विरुद्ध रिट जारी कर सकता है।
  • D. उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों तथा अन्य विधिक अधिकारों दोनों के संरक्षण हेतु रिट जारी कर सकता है। ✓
सही उत्तर: D — उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों तथा अन्य विधिक अधिकारों दोनों के संरक्षण हेतु रिट जारी कर सकता है।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय न केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बल्कि अन्य विधिक अधिकारों के संरक्षण हेतु भी रिट जारी कर सकता है। इसी कारण उसकी रिट अधिकारिता विषय-वस्तु की दृष्टि से अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता से व्यापक मानी जाती है।

प्रश्न 99: निम्नलिखित में से किसके पास विधि द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करने की शक्ति है?

  • A. संसद ✓
  • B. राष्ट्रपति
  • C. सर्वोच्च न्यायालय स्वयं
  • D. विधि आयोग
सही उत्तर: A — संसद
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 124 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना का प्रावधान है, जबकि न्यायाधीशों की संख्या संसद द्वारा बनाए गए कानून से निर्धारित की जाती है। आवश्यकता के अनुसार संसद इस संख्या में परिवर्तन कर सकती है।

प्रश्न 100: निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय का दर्जा प्रदान करता है?

  • A. अनुच्छेद 129 ✓
  • B. अनुच्छेद 130
  • C. अनुच्छेद 132
  • D. अनुच्छेद 136
सही उत्तर: A — अनुच्छेद 129
व्याख्या (Explanation):
संविधान का अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय घोषित करता है। अभिलेख न्यायालय होने का अर्थ है कि उसके निर्णय, कार्यवाहियाँ और अभिलेख स्थायी साक्ष्य के रूप में मान्य होते हैं तथा उसे अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त होती है। इसी प्रकार उच्च न्यायालय को अनुच्छेद 215 के अंतर्गत अभिलेख न्यायालय का दर्जा प्राप्त है।

प्रश्न 101: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन न्यायिक सक्रियता के संबंध में सही है?

  • A. न्यायपालिका द्वारा संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हेतु सक्रिय भूमिका निभाना ✓
  • B. न्यायपालिका द्वारा संविधान में संशोधन करना
  • C. न्यायपालिका द्वारा संसद का स्थान ग्रहण करना
  • D. न्यायपालिका द्वारा सभी प्रशासनिक निर्णय स्वयं लेना
सही उत्तर: A — न्यायपालिका द्वारा संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हेतु सक्रिय भूमिका निभाना
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक सक्रियता से आशय ऐसी न्यायिक प्रवृत्ति से है जिसमें न्यायालय संविधान, मौलिक अधिकारों, सुशासन तथा लोकहित की रक्षा हेतु अपेक्षाकृत सक्रिय भूमिका निभाते हैं। जनहित याचिका, पर्यावरण संरक्षण, कारागार सुधार तथा प्रशासनिक जवाबदेही से संबंधित अनेक निर्णय इसके उदाहरण हैं। हालांकि न्यायिक सक्रियता और न्यायिक अतिक्रमण के बीच अंतर को लेकर समय-समय पर संवैधानिक एवं शैक्षणिक बहस भी होती रही है।

प्रश्न 102: जनहित याचिका के विकास में निम्नलिखित में से किसका विशेष योगदान माना जाता है?

  • A. न्यायमूर्ति एच. आर. खन्ना
  • B. न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती ✓
  • C. न्यायमूर्ति एम. हिदायतुल्लाह
  • D. न्यायमूर्ति एस. आर. दास
सही उत्तर: B — न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती
व्याख्या (Explanation):
भारत में जनहित याचिका की अवधारणा के विकास और विस्तार में न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती तथा न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्ण अय्यर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने पारंपरिक लोकस स्टैंडी के सिद्धांत को उदार बनाते हुए समाज के कमजोर वर्गों के हित में न्यायालयों के द्वार खोलने का प्रयास किया। जनहित याचिका भारतीय न्यायिक सक्रियता का महत्वपूर्ण उपकरण बन गई है।

प्रश्न 103: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है? (1) परमादेश - लोक प्राधिकारी को कर्तव्य पालन हेतु निर्देश (2) प्रतिषेध - अधीनस्थ न्यायालय को कार्यवाही रोकने का आदेश

  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों ✓
  • D. न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों
व्याख्या (Explanation):
परमादेश रिट किसी लोक प्राधिकारी, निकाय या अधिकारी को उसके वैधानिक कर्तव्य के पालन हेतु जारी की जाती है। प्रतिषेध रिट उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अधीनस्थ न्यायालय या अधिकरण को उसकी अधिकार-सीमा से बाहर जाने से रोकने हेतु जारी की जाती है। दोनों कथन सही हैं।

प्रश्न 104: न्यायिक समीक्षा का तात्पर्य है—

  • A. न्यायालय द्वारा विधायी एवं कार्यपालिका के कार्यों की संवैधानिक वैधता की जांच ✓
  • B. न्यायालय द्वारा संसद का विघटन
  • C. न्यायालय द्वारा बजट पारित करना
  • D. न्यायालय द्वारा चुनाव कराना
सही उत्तर: A — न्यायालय द्वारा विधायी एवं कार्यपालिका के कार्यों की संवैधानिक वैधता की जांच
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक समीक्षा वह शक्ति है जिसके माध्यम से न्यायालय विधायिका और कार्यपालिका के कार्यों, कानूनों तथा आदेशों की संविधान के अनुरूपता की जांच करते हैं। यदि कोई कानून संविधान के विपरीत पाया जाता है तो उसे असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है। भारत में न्यायिक समीक्षा का आधार संविधान की सर्वोच्चता, मौलिक अधिकारों की सुरक्षा और संघीय व्यवस्था है। इसे संविधान की मूल संरचना का भी हिस्सा माना गया है।

प्रश्न 105: संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श प्राप्त कर सकता है?

  • A. अनुच्छेद 136
  • B. अनुच्छेद 226
  • C. अनुच्छेद 131
  • D. अनुच्छेद 143 ✓
सही उत्तर: D — अनुच्छेद 143
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को किसी विधिक या लोकमहत्त्व के प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श मांगने की शक्ति प्रदान करता है। इसे सर्वोच्च न्यायालय का परामर्शदात्री अधिकार क्षेत्र कहा जाता है। न्यायालय द्वारा दिया गया परामर्श सामान्यतः बाध्यकारी नहीं होता, यद्यपि उसका अत्यधिक महत्व होता है। यह भारतीय संविधान की एक विशिष्ट विशेषता है।

प्रश्न 106: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने हेतु पदच्युति प्रस्ताव किसके द्वारा विशेष बहुमत से पारित किया जाता है?

  • A. केवल राष्ट्रपति
  • B. संसद के दोनों सदन ✓
  • C. केवल लोकसभा
  • D. केवल राज्यसभा
सही उत्तर: B — संसद के दोनों सदन
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 124(4) के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को सिद्ध दुराचार अथवा अक्षमता के आधार पर हटाया जा सकता है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा पृथक-पृथक विशेष बहुमत से पदच्युति प्रस्ताव पारित किया जाना आवश्यक है। इसके पश्चात राष्ट्रपति पद से हटाने का आदेश जारी करता है।

प्रश्न 107: निम्नलिखित में से कौन-सा उच्च न्यायालय के संबंध में सही है?

  • A. प्रत्येक राज्य के लिए पृथक उच्च न्यायालय होना अनिवार्य है।
  • B. उच्च न्यायालय का गठन संसद द्वारा साधारण कानून से नहीं किया जा सकता।
  • C. एक ही उच्च न्यायालय एक से अधिक राज्यों या राज्य एवं संघ राज्य क्षेत्र के लिए हो सकता है। ✓
  • D. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
सही उत्तर: C — एक ही उच्च न्यायालय एक से अधिक राज्यों या राज्य एवं संघ राज्य क्षेत्र के लिए हो सकता है।
व्याख्या (Explanation):
संविधान संसद को यह शक्ति देता है कि वह एक ही उच्च न्यायालय को एक से अधिक राज्यों या राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों के लिए स्थापित कर सके। उदाहरणस्वरूप, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय दोनों राज्यों तथा चंडीगढ़ संघ राज्य क्षेत्र के लिए कार्य करता है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। यह प्रश्न न्यायिक संरचना की बुनियादी समझ पर आधारित है।

प्रश्न 108: निम्नलिखित में से कौन-सा रिट अवैध निरोध के विरुद्ध व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जारी किया जाता है?

  • A. बंदी प्रत्यक्षीकरण ✓
  • B. अधिकार-पृच्छा
  • C. उत्प्रेषण
  • D. परमादेश
सही उत्तर: A — बंदी प्रत्यक्षीकरण
व्याख्या (Explanation):
बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा हेतु सबसे प्रभावी संवैधानिक उपाय मानी जाती है। यदि किसी व्यक्ति को अवैध रूप से निरुद्ध किया गया हो तो न्यायालय संबंधित प्राधिकारी को उस व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश देता है। अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 दोनों के अंतर्गत यह रिट जारी की जा सकती है। इसे नागरिक स्वतंत्रताओं का महत्वपूर्ण संरक्षक माना जाता है।

प्रश्न 109: संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को विशेष अनुमति याचिका स्वीकार करने की शक्ति प्राप्त है?

  • A. अनुच्छेद 131
  • B. अनुच्छेद 143
  • C. अनुच्छेद 32
  • D. अनुच्छेद 136 ✓
सही उत्तर: D — अनुच्छेद 136
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 136 सर्वोच्च न्यायालय को भारत के किसी भी न्यायालय या अधिकरण (सैन्य अधिकरणों को छोड़कर) के निर्णय, आदेश या दंडादेश के विरुद्ध विशेष अनुमति याचिका स्वीकार करने की विवेकाधीन शक्ति प्रदान करता है। यह सर्वोच्च न्यायालय की अत्यंत व्यापक और विशिष्ट शक्ति है।

प्रश्न 110: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वोच्च न्यायालय के अपीलीय अधिकार क्षेत्र के संबंध में सही है?

  • A. सर्वोच्च न्यायालय केवल दीवानी मामलों में अपील सुन सकता है।
  • B. सर्वोच्च न्यायालय संवैधानिक, दीवानी तथा आपराधिक मामलों में अपील सुन सकता है। ✓
  • C. सर्वोच्च न्यायालय केवल संवैधानिक मामलों में अपील सुन सकता है।
  • D. सर्वोच्च न्यायालय केवल राज्यों के मध्य विवादों की अपील सुन सकता है।
सही उत्तर: B — सर्वोच्च न्यायालय संवैधानिक, दीवानी तथा आपराधिक मामलों में अपील सुन सकता है।
व्याख्या (Explanation):
सर्वोच्च न्यायालय का अपीलीय अधिकार क्षेत्र संविधान के अनुच्छेद 132, 133 और 134 में निहित है। इसके अंतर्गत संवैधानिक, दीवानी तथा आपराधिक मामलों में अपील की जा सकती है, बशर्ते संविधान अथवा विधि द्वारा निर्धारित शर्तें पूरी हों। इसके अतिरिक्त अनुच्छेद 136 के अंतर्गत विशेष अनुमति याचिका के माध्यम से भी सर्वोच्च न्यायालय व्यापक अपीलीय अधिकार का प्रयोग कर सकता है।

प्रश्न 111: निम्नलिखित में से किस मामले ने भारत में संविधान की मूल संरचना सिद्धांत को प्रतिपादित किया?

  • A. गोलकनाथ मामला
  • B. शंकर प्रसाद मामला
  • C. सज्जन सिंह मामला
  • D. केशवानंद भारती मामला ✓
सही उत्तर: D — केशवानंद भारती मामला
व्याख्या (Explanation):
1973 के केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान की मूल संरचना सिद्धांत प्रतिपादित किया। न्यायालय ने निर्णय दिया कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, किंतु संविधान की मूल संरचना को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती। यह भारतीय संवैधानिक इतिहास का एक ऐतिहासिक निर्णय माना जाता है।

प्रश्न 112: जनहित याचिका का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

  • A. समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को न्याय तक पहुँच उपलब्ध कराना ✓
  • B. केवल सरकारी कर्मचारियों के सेवा विवादों का निपटारा करना
  • C. संसद के कार्यों की समीक्षा करना
  • D. केवल आपराधिक मामलों की सुनवाई करना
सही उत्तर: A — समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को न्याय तक पहुँच उपलब्ध कराना
व्याख्या (Explanation):
जनहित याचिका, भारतीय न्यायपालिका द्वारा विकसित एक महत्वपूर्ण न्यायिक नवाचार है जिसका उद्देश्य समाज के कमजोर, वंचित तथा न्याय तक पहुँच से वंचित वर्गों को न्याय उपलब्ध कराना है। 1980 के दशक में न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्ण अय्यर तथा न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती ने लोकस स्टैंडी के पारंपरिक सिद्धांत को उदार बनाकर इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जनहित याचिका ने पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकार, कारागार सुधार तथा प्रशासनिक जवाबदेही जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

प्रश्न 113: अधीनस्थ न्यायालयों पर प्रशासनिक नियंत्रण किसके पास होता है?

  • A. सर्वोच्च न्यायालय
  • B. संबंधित उच्च न्यायालय ✓
  • C. राज्यपाल
  • D. राज्य लोक सेवा आयोग
सही उत्तर: B — संबंधित उच्च न्यायालय
व्याख्या (Explanation):
संविधान का अनुच्छेद 235 अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण संबंधित उच्च न्यायालय को प्रदान करता है। इसमें पदस्थापन, पदोन्नति, अनुशासनात्मक नियंत्रण आदि सम्मिलित हैं। यह प्रावधान न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्यपाल की भूमिका कुछ नियुक्ति संबंधी मामलों तक सीमित होती है, जबकि वास्तविक नियंत्रण उच्च न्यायालय के पास रहता है।

प्रश्न 114: निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायिक समीक्षा का आधार नहीं है?

  • A. संविधान की सर्वोच्चता
  • B. मौलिक अधिकारों की सुरक्षा
  • C. संसदीय सर्वोच्चता का सिद्धांत ✓
  • D. विधि का शासन
सही उत्तर: C — संसदीय सर्वोच्चता का सिद्धांत
व्याख्या (Explanation):
भारत में न्यायिक समीक्षा संविधान की सर्वोच्चता, विधि के शासन तथा मौलिक अधिकारों की सुरक्षा पर आधारित है। भारत ने ब्रिटेन की भाँति संसदीय सर्वोच्चता को नहीं अपनाया है। भारतीय व्यवस्था में संविधान सर्वोच्च है और न्यायालय संविधान-विरोधी कानूनों को निरस्त कर सकते हैं। यही कारण है कि संसदीय सर्वोच्चता न्यायिक समीक्षा का आधार नहीं मानी जाती। यह प्रश्न भारतीय और ब्रिटिश संवैधानिक व्यवस्थाओं के तुलनात्मक अध्ययन से संबंधित है।

प्रश्न 115: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति की आयु क्या है?

  • A. 60 वर्ष
  • B. 62 वर्ष ✓
  • C. 65 वर्ष
  • D. 68 वर्ष
सही उत्तर: B — 62 वर्ष
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुसार उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद पर बने रहते हैं, जबकि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है।

प्रश्न 116: निम्नलिखित में से कौन-सी रिट किसी व्यक्ति को सार्वजनिक पद पर उसके अधिकार की वैधता सिद्ध करने हेतु जारी की जाती है?

  • A. अधिकार-पृच्छा ✓
  • B. परमादेश
  • C. प्रतिषेध
  • D. बंदी प्रत्यक्षीकरण
सही उत्तर: A — अधिकार-पृच्छा
व्याख्या (Explanation):
अधिकार-पृच्छा रिट का उद्देश्य यह जाँचना है कि कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक पद पर विधिसम्मत रूप से नियुक्त हुआ है या नहीं। यदि नियुक्ति वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है तो न्यायालय उसे पद छोड़ने का निर्देश दे सकता है। परमादेश लोक प्राधिकारी को कर्तव्य पालन हेतु निर्देशित करती है, प्रतिषेध अधीनस्थ न्यायालय को कार्यवाही रोकने हेतु जारी होती है तथा बंदी प्रत्यक्षीकरण अवैध निरोध के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करती है।

प्रश्न 117: संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है?

  • A. अनुच्छेद 32
  • B. अनुच्छेद 226 ✓
  • C. अनुच्छेद 227
  • D. अनुच्छेद 136
सही उत्तर: B — अनुच्छेद 226
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को रिट जारी करने की शक्ति प्रदान करता है। यह शक्ति केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य विधिक अधिकारों के संरक्षण हेतु भी प्रयुक्त की जा सकती है। इसके विपरीत अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु रिट जारी करता है। इसी कारण उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता कई मामलों में व्यापक मानी जाती है।

प्रश्न 118: भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है?

  • A. संसद
  • B. सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश
  • C. उपराष्ट्रपति
  • D. राष्ट्रपति ✓
सही उत्तर: D — राष्ट्रपति
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 124 के अंतर्गत भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। वर्तमान न्यायिक परंपरा के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। यह परंपरा न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संस्थागत निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित हुई है। नियुक्ति का संवैधानिक अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है।

प्रश्न 119: निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वोच्च न्यायालय के मूल अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है?

  • A. राज्यों के बीच प्रत्येक प्रकार का विवाद
  • B. संसद द्वारा पारित प्रत्येक कानून की वैधता का परीक्षण
  • C. संघ और एक या अधिक राज्यों के बीच विधिक अधिकारों से संबंधित विवाद ✓
  • D. सभी आपराधिक अपीलों की सुनवाई
सही उत्तर: C — संघ और एक या अधिक राज्यों के बीच विधिक अधिकारों से संबंधित विवाद
व्याख्या (Explanation):
संविधान के अनुच्छेद 131 के अनुसार संघ और एक या अधिक राज्यों अथवा राज्यों के बीच ऐसे विवाद, जिनमें विधिक अधिकारों का प्रश्न निहित हो, सर्वोच्च न्यायालय के मूल अधिकार क्षेत्र में आते हैं। हालांकि संसद अनुच्छेद 262 के अंतर्गत अंतर्राज्यीय नदी जल विवादों जैसे कुछ विषयों को सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर कर सकती है। संसद द्वारा पारित कानूनों की वैधता का परीक्षण न्यायिक समीक्षा का विषय है, जबकि आपराधिक अपीलें सर्वोच्च न्यायालय के अपीलीय अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं।

प्रश्न 120: भारत के सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना किस अनुच्छेद के अंतर्गत की गई है?

  • A. अनुच्छेद 124 ✓
  • B. अनुच्छेद 131
  • C. अनुच्छेद 136
  • D. अनुच्छेद 143
सही उत्तर: A — अनुच्छेद 124
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना तथा उसकी संरचना से संबंधित है। इसी अनुच्छेद के अंतर्गत भारत में एक सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था की गई है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीश होते हैं। अनुच्छेद 131 सर्वोच्च न्यायालय के मूल अधिकार क्षेत्र, अनुच्छेद 136 विशेष अनुमति याचिका तथा अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति के परामर्शाधिकार से संबंधित है।

प्रश्न 121: कथन (A): न्यायपालिका की स्वतंत्रता न्यायिक पुनर्विलोकन की प्रभावशीलता के लिए अनिवार्य है। कारण (R): स्वतंत्र न्यायपालिका ही संविधान-विरुद्ध विधायी और कार्यकारी कार्यों की निष्पक्ष समीक्षा कर सकती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
न्यायपालिका की स्वतंत्रता भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र की मूल विशेषताओं में से एक है। यदि न्यायपालिका स्वतंत्र न हो तो वह संविधान-विरुद्ध विधायी अथवा कार्यकारी कार्यों की निष्पक्ष समीक्षा नहीं कर पाएगी। न्यायिक पुनर्विलोकन की प्रभावशीलता सीधे न्यायिक स्वतंत्रता पर निर्भर करती है। इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या करता है और विकल्प A सही है।

प्रश्न 122: कथन (A): जनहित याचिका और न्यायिक सक्रियता के विस्तार ने कभी-कभी न्यायिक अतिक्रमण की बहस को जन्म दिया है। कारण (R): न्यायालयों ने पर्यावरण संरक्षण, कारागार सुधार तथा मानवाधिकारों से संबंधित अनेक मामलों में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
जनहित याचिका तथा न्यायिक सक्रियता के विस्तार के कारण न्यायपालिका ने प्रशासन, पर्यावरण, मानवाधिकार, कारागार सुधार तथा सुशासन से संबंधित अनेक क्षेत्रों में हस्तक्षेप किया है। इसी विस्तारित भूमिका के कारण कभी-कभी न्यायिक अतिक्रमण की बहस उत्पन्न होती है। दूसरी ओर, न्यायालयों द्वारा पर्यावरण संरक्षण, कारागार सुधार तथा मानवाधिकारों से संबंधित मामलों में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं, इसलिए कारण (R) भी सही है। किन्तु कारण केवल न्यायिक सक्रियता के उदाहरण प्रस्तुत करता है; वह यह नहीं बताता कि न्यायिक अतिक्रमण की बहस क्यों उत्पन्न हुई। इसलिए R, A की सही व्याख्या नहीं करता। अतः विकल्प B सही है।

प्रश्न 123: कथन (A): विशेष अनुमति याचिका भारतीय न्यायिक व्यवस्था में एक असाधारण संवैधानिक उपाय है। कारण (R): अनुच्छेद 136 सर्वोच्च न्यायालय को व्यापक विवेकाधीन अपीलीय शक्ति प्रदान करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 136 सर्वोच्च न्यायालय को व्यापक विवेकाधीन शक्ति प्रदान करता है जिसके आधार पर वह विशेष अनुमति याचिका स्वीकार कर सकता है। यह सामान्य अपीलीय अधिकार से भिन्न एक असाधारण संवैधानिक उपाय है। कारण कथन का प्रत्यक्ष संवैधानिक आधार प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 124: कथन (A): न्यायिक पुनर्विलोकन केवल संसद द्वारा पारित कानूनों तक सीमित है। कारण (R): न्यायालय कार्यपालिका की संवैधानिक वैधता की भी समीक्षा कर सकते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक पुनर्विलोकन केवल विधायी कार्यों तक सीमित नहीं है; न्यायालय कार्यपालिका की कार्रवाइयों की भी संवैधानिक समीक्षा करते हैं। यही कारण है कि यह शक्ति संवैधानिक शासन का महत्वपूर्ण नियंत्रण तंत्र मानी जाती है। इसलिए कथन गलत और कारण सही है।

प्रश्न 125: कथन (A): उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता की अपेक्षा अधिक व्यापक है। कारण (R): उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ अन्य विधिक अधिकारों के संरक्षण हेतु भी रिट जारी कर सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है। ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है परन्तु R गलत है।
  • D. A गलत है परन्तु R सही है।
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों को रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, जो न केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बल्कि अन्य विधिक अधिकारों के संरक्षण के लिए भी प्रयोग की जा सकती है। इसके विपरीत, अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय मुख्यतः मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु रिट जारी करता है। इसलिए उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता अधिक व्यापक मानी जाती है। अतः कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 126: कथन (A): अनुच्छेद 141 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के सभी अवलोकन बाध्यकारी होते हैं। कारण (R): अनुच्छेद 141 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि को सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी बनाता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है परन्तु R गलत है।
  • D. A गलत है परन्तु R सही है। ✓
सही उत्तर: D — A गलत है परन्तु R सही है।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 141 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होती है। अतः कारण (R) सही है। किन्तु सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का प्रत्येक अवलोकन बाध्यकारी नहीं होता। केवल निर्णय का आधारभूत विधिक सिद्धांत बाध्यकारी होता है, जबकि सामान्य टिप्पणियाँ अथवा Obiter Dicta बाध्यकारी नहीं मानी जातीं। इसलिए कथन (A) गलत है।

प्रश्न 127: कथन (A): न्यायिक सक्रियता का उद्देश्य संवैधानिक शासन को अधिक प्रभावी बनाना है। कारण (R): न्यायालयों ने अनेक मामलों में मौलिक अधिकारों की व्यापक व्याख्या करके अधिकार-सुरक्षा को सुदृढ़ किया है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक सक्रियता का उद्देश्य संविधान के मूल्यों, मौलिक अधिकारों तथा सुशासन को प्रभावी बनाना है। न्यायालयों द्वारा अनुच्छेद 21 सहित विभिन्न मौलिक अधिकारों की व्यापक व्याख्या तथा जनहित याचिकाओं के माध्यम से अधिकार-सुरक्षा को सुदृढ़ किया गया है। यह न्यायिक सक्रियता का प्रमुख उदाहरण है। अतः कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 128: कथन (A): अधीनस्थ न्यायपालिका का नियंत्रण पूर्णतः राज्य विधानमंडल के अधीन होता है। कारण (R): अनुच्छेद 235 उच्च न्यायालय को अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण प्रदान करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अधीनस्थ न्यायपालिका राज्य विधानमंडल के नियंत्रण में नहीं होती। अनुच्छेद 235 उच्च न्यायालय को अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण प्रदान करता है, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण साधन है। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 129: कथन (A): सर्वोच्च न्यायालय का परामर्शी मत सभी परिस्थितियों में बाध्यकारी होता है। कारण (R): अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श प्राप्त करने की अनुमति देता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है परन्तु R गलत है।
  • D. A गलत है परन्तु R सही है। ✓
सही उत्तर: D — A गलत है परन्तु R सही है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति किसी विधिक अथवा लोकमहत्त्व के प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। अतः कारण (R) सही है। किन्तु सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया परामर्शी मत सामान्यतः राष्ट्रपति पर विधिक रूप से बाध्यकारी नहीं होता। इसलिए कथन (A) गलत है।

प्रश्न 130: कथन (A): जनहित याचिका ने न्यायपालिका की पहुँच को सामाजिक न्याय के क्षेत्र तक विस्तारित किया है। कारण (R): जनहित याचिका की प्रक्रिया में न्यायालयों ने कुछ मामलों में पत्रों तथा समाचार रिपोर्टों को भी याचिका के रूप में स्वीकार किया है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है। ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है।
  • D. A गलत है पर R सही है।
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्या (Explanation):
जनहित याचिका ने पारंपरिक लोकस स्टैंडी के नियमों को उदार बनाया, जिससे निर्धनों, श्रमिकों, बंदियों तथा अन्य वंचित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए तीसरे पक्ष द्वारा भी याचिका दायर की जा सकी। इसी उद्देश्य से न्यायालयों ने कुछ मामलों में पत्रों तथा समाचार रिपोर्टों को भी याचिका के रूप में स्वीकार किया, जिसे एपिस्टोलरी जूरिस्डिक्शन कहा जाता है। इस नवाचार ने न्याय तक पहुँच का विस्तार किया और सामाजिक न्याय को सुदृढ़ बनाया। इसलिए R, A की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 131: कथन (A): न्यायिक पुनर्विलोकन को संविधान की मूल संरचना का हिस्सा माना गया है। कारण (R): न्यायिक पुनर्विलोकन के अभाव में संविधान की सर्वोच्चता तथा सीमित सरकार की अवधारणा कमजोर पड़ सकती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती वाद, मिनर्वा मिल्स वाद तथा एल. चंद्रकुमार वाद सहित विभिन्न निर्णयों में न्यायिक पुनर्विलोकन को संविधान की मूल संरचना का अभिन्न अंग माना गया है। यदि न्यायालयों के पास संविधान-विरुद्ध कार्यों को निरस्त करने की शक्ति न हो तो संविधान की सर्वोच्चता केवल सैद्धांतिक रह जाएगी। इसलिए कारण कथन की उचित व्याख्या करता है।

प्रश्न 132: कथन (A): भारतीय संविधान उच्च न्यायालयों को परामर्शी अधिकार क्षेत्र प्रदान करता है। कारण (R): अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति केवल सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श प्राप्त कर सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है पर R गलत है।
  • D. A गलत है पर R सही है। ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान उच्च न्यायालयों को कोई परामर्शी अधिकार क्षेत्र प्रदान नहीं करता। अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति लोकमहत्त्व अथवा विधिक प्रश्नों पर केवल सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श प्राप्त कर सकता है। अतः कथन (A) गलत तथा कारण (R) सही है।

प्रश्न 133: कथन (A): अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी रिट केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन से संबंधित होती हैं। कारण (R): अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों की भाँति अन्य विधिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु भी रिट जारी की जा सकती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 32 का उद्देश्य मौलिक अधिकारों का प्रवर्तन है और इसी कारण इसे संवैधानिक उपचार का अधिकार कहा जाता है। दूसरी ओर अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय अन्य विधिक अधिकारों के संरक्षण हेतु भी रिट जारी कर सकते हैं। इसलिए कथन सही और कारण गलत है।

प्रश्न 134: कथन (A): सर्वोच्च न्यायालय की विशेष अनुमति याचिका की शक्ति पर संविधान में कोई निश्चित विषयगत सीमा निर्धारित नहीं की गई है। कारण (R): अनुच्छेद 136 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय किसी भी न्यायालय या अधिकरण के प्रत्येक निर्णय के विरुद्ध अपील स्वीकार करने के लिए बाध्य है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है परन्तु R गलत है। ✓
  • D. A गलत है परन्तु R सही है।
सही उत्तर: C — A सही है परन्तु R गलत है।
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 136 सर्वोच्च न्यायालय को विशेष अनुमति याचिका के माध्यम से अत्यंत व्यापक विवेकाधीन अपीलीय अधिकार प्रदान करता है। यह शक्ति असाधारण प्रकृति की है तथा सामान्यतः किसी निश्चित विषयगत सीमा से बंधी नहीं है। इसलिए कथन (A) सही है। किन्तु विशेष अनुमति प्रदान करना सर्वोच्च न्यायालय का पूर्णतः विवेकाधीन अधिकार है; न्यायालय किसी भी निर्णय के विरुद्ध अपील स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है। अतः कारण (R) गलत है और विकल्प C सही है।

प्रश्न 135: कथन (A): भारतीय संविधान में न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति संविधान की सर्वोच्चता सुनिश्चित करने का प्रमुख साधन है। कारण (R): न्यायालय संविधान-विरुद्ध विधायी एवं कार्यकारी कृत्यों को अमान्य घोषित कर सकते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान सर्वोच्च विधि है और न्यायिक पुनर्विलोकन उसकी सर्वोच्चता बनाए रखने का प्रमुख साधन है। न्यायालय संविधान-विरुद्ध विधायी एवं कार्यकारी कृत्यों को अमान्य घोषित कर सकते हैं। अनुच्छेद 13, 32 तथा 226 आदि प्रावधान इस शक्ति का संवैधानिक आधार प्रदान करते हैं। इसी कारण न्यायिक पुनर्विलोकन संविधान की सर्वोच्चता को प्रभावी बनाता है। अतः कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है और विकल्प A सही है।

प्रश्न 136: कथन (A): न्यायपालिका की स्वतंत्रता न्यायिक पुनर्विलोकन के प्रभावी प्रयोग के लिए आवश्यक है। कारण (R): यदि न्यायपालिका स्वतंत्र न हो तो वह विधायिका एवं कार्यपालिका के विरुद्ध निष्पक्ष संवैधानिक निर्णय देने में कठिनाई का सामना कर सकती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक पुनर्विलोकन तभी प्रभावी हो सकता है जब न्यायपालिका स्वतंत्र और निष्पक्ष हो। यदि न्यायपालिका अन्य अंगों के प्रभाव में हो तो संविधान-विरुद्ध कानूनों या कार्यपालिका की कार्रवाइयों की निष्पक्ष समीक्षा संभव नहीं होगी। कारण कथन की प्रत्यक्ष व्याख्या करता है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता भारतीय संवैधानिक शासन की मूल आधारशिला मानी जाती है।

प्रश्न 137: कथन (A): जनहित याचिका का प्रयोग कभी-कभी न्यायिक अतिक्रमण की बहस को जन्म देता है। कारण (R): न्यायालय कभी-कभी प्रशासनिक नीति संबंधी मामलों में भी हस्तक्षेप करते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
दोनों कथन सही हैं। प्रशासनिक नीति संबंधी मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप न्यायिक अतिक्रमण की बहस का एक कारण हो सकता है, किन्तु यह बहस शक्तियों के पृथक्करण, संस्थागत संतुलन, न्यायिक सक्रियता की सीमा तथा संवैधानिक उत्तरदायित्व जैसे अनेक व्यापक प्रश्नों से भी जुड़ी होती है। इसलिए कारण कथन की पूर्ण व्याख्या नहीं करता। अतः विकल्प B सही है।

प्रश्न 138: कथन (A): विशेष अनुमति याचिका सर्वोच्च न्यायालय की एक असाधारण विवेकाधीन शक्ति है। कारण (R): अनुच्छेद 136 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय सामान्य अपीलीय सीमाओं से परे जाकर भी मामलों की सुनवाई कर सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 136 सर्वोच्च न्यायालय को अत्यंत व्यापक विवेकाधीन शक्ति प्रदान करता है। विशेष अनुमति याचिका के माध्यम से वह विभिन्न न्यायालयों एवं अधिकरणों के निर्णयों की समीक्षा कर सकता है। कारण कथन का संवैधानिक आधार प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 139: कथन (A): न्यायिक पुनर्विलोकन केवल संसद द्वारा बनाए गए कानूनों तक सीमित है। कारण (R): न्यायालय कार्यपालिका की संवैधानिक वैधता की भी समीक्षा कर सकते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक पुनर्विलोकन केवल विधायिका तक सीमित नहीं है बल्कि कार्यपालिका की कार्रवाइयों की भी संवैधानिक समीक्षा की जा सकती है। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है। यही न्यायिक पुनर्विलोकन का व्यापक स्वरूप है।

प्रश्न 140: कथन (A): उच्च न्यायालय को संविधान के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के समान परामर्शी अधिकार क्षेत्र प्राप्त है। कारण (R): अनुच्छेद 143 केवल सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है परन्तु R गलत है।
  • D. A गलत है परन्तु R सही है। ✓
सही उत्तर: D — A गलत है परन्तु R सही है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों को परामर्शी अधिकार क्षेत्र प्रदान नहीं किया गया है। परामर्शी अधिकार क्षेत्र का प्रावधान केवल सर्वोच्च न्यायालय के लिए अनुच्छेद 143 में किया गया है, जिसके तहत राष्ट्रपति किसी विधिक या लोकमहत्त्व के प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। अतः कथन (A) गलत है, जबकि कारण (R) सही है।

प्रश्न 141: कथन (A): सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि अनुच्छेद 141 के अंतर्गत सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होती है। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों में व्यक्त विधिक सिद्धांत अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा अनुसरण किए जाते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 141 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होती है। कारण भी सही है क्योंकि अधीनस्थ न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित विधिक सिद्धांतों का अनुसरण करते हैं। किन्तु यह अनुसरण स्वयं अनुच्छेद 141 के कारण होता है; कारण केवल उस बाध्यता का व्यावहारिक परिणाम बताता है, न कि उसका संवैधानिक आधार। इसलिए R, A की सही व्याख्या नहीं करता और विकल्प B सही है।

प्रश्न 142: कथन (A): न्यायिक सक्रियता का उद्देश्य केवल विधायिका की आलोचना करना नहीं है। कारण (R): न्यायिक सक्रियता का प्रमुख लक्ष्य संवैधानिक मूल्यों एवं अधिकारों की प्रभावी रक्षा करना है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक सक्रियता का उद्देश्य संवैधानिक शासन, अधिकारों की सुरक्षा तथा प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यह केवल अन्य अंगों की आलोचना तक सीमित नहीं है। कारण न्यायिक सक्रियता के वास्तविक उद्देश्य को स्पष्ट करता है और कथन की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 143: कथन (A): अधीनस्थ न्यायपालिका की नियुक्ति और नियंत्रण से उच्च न्यायालय का कोई संबंध नहीं है। कारण (R): जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा न्यायिक प्रशासन में उच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण भूमिका है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 233 से 235 तक की व्यवस्थाओं के अनुसार अधीनस्थ न्यायपालिका के संगठन एवं नियंत्रण में उच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए कथन गलत है जबकि कारण सही है। न्यायिक स्वतंत्रता के संरक्षण हेतु यह व्यवस्था बनाई गई है।

प्रश्न 144: कथन (A): सर्वोच्च न्यायालय का परामर्शी मत विधिक रूप से राष्ट्रपति पर बाध्यकारी होता है। कारण (R): अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श प्राप्त करने की अनुमति देता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है परन्तु R गलत है।
  • D. A गलत है परन्तु R सही है। ✓
सही उत्तर: D — A गलत है परन्तु R सही है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति किसी विधिक अथवा लोकमहत्त्व के प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। अतः कारण (R) सही है। किन्तु सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया परामर्शी मत सामान्यतः राष्ट्रपति पर विधिक रूप से बाध्यकारी नहीं होता; राष्ट्रपति उसे स्वीकार करने या न करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।

प्रश्न 145: कथन (A): जनहित याचिका ने न्याय तक पहुँच के लोकतंत्रीकरण में योगदान दिया है। कारण (R): जनहित याचिका के माध्यम से न्यायालयों ने पारंपरिक लोकस स्टैंडी नियम को शिथिल किया।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
दोनों कथन सही हैं। लोकस स्टैंडी नियम का शिथिलीकरण जनहित याचिका के विकास का एक महत्वपूर्ण पक्ष है, किन्तु न्याय तक पहुँच के लोकतंत्रीकरण में न्यायिक सक्रियता, पत्र-याचिका, सामाजिक न्याय उन्मुख दृष्टिकोण तथा प्रक्रियात्मक उदारता जैसे अन्य कारकों का भी योगदान रहा है। इसलिए कारण कथन की पूर्ण व्याख्या नहीं करता। अतः विकल्प B सही है।

प्रश्न 146: कथन (A): न्यायिक पुनर्विलोकन संविधान की मूल संरचना का एक अंग माना जाता है। कारण (R): यदि न्यायिक पुनर्विलोकन समाप्त कर दिया जाए तो संविधान की सर्वोच्चता और सीमित सरकार की अवधारणा प्रभावित होगी।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
केशवानंद भारती तथा बाद के अनेक निर्णयों में न्यायिक पुनर्विलोकन को संविधान की मूल संरचना का अंग माना गया है। इसका कारण यह है कि न्यायिक पुनर्विलोकन के बिना संविधान की सर्वोच्चता, सीमित सरकार तथा विधि के शासन की रक्षा प्रभावी रूप से नहीं की जा सकती। इसलिए कारण कथन की उचित व्याख्या करता है।

प्रश्न 147: कथन (A): उच्च न्यायालयों को अपने अधीनस्थ न्यायालयों पर कोई संवैधानिक पर्यवेक्षण शक्ति प्राप्त नहीं है। कारण (R): अनुच्छेद 227 उच्च न्यायालय को अधीनस्थ न्यायालयों एवं अधिकरणों पर पर्यवेक्षण का अधिकार देता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन स्पष्ट रूप से गलत है। अनुच्छेद 227 उच्च न्यायालय को अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत अधीनस्थ न्यायालयों और अधिकरणों पर अधीक्षण एवं पर्यवेक्षण की शक्ति प्रदान करता है। यह न्यायिक प्रशासन की एक महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था है। अतः कारण सही तथा कथन गलत होने से विकल्प D सही है।

प्रश्न 148: कथन (A): अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता केवल मौलिक अधिकारों तक सीमित है। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 32 के अंतर्गत अन्य सभी वैधानिक अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि अनुच्छेद 32 मुख्यतः मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए है। कारण गलत है क्योंकि अन्य वैधानिक अधिकारों हेतु व्यापक रिट अधिकारिता अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों को प्राप्त है। यही अनुच्छेद 32 और 226 के बीच महत्वपूर्ण अंतर है।

प्रश्न 149: कथन (A): सर्वोच्च न्यायालय का मूल अधिकार क्षेत्र संघीय ढाँचे से संबंधित कुछ विवादों तक विस्तारित होता है। कारण (R): संघ और राज्यों के मध्य कुछ विशिष्ट विवाद अनुच्छेद 131 के अंतर्गत सीधे सर्वोच्च न्यायालय में लाए जा सकते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 131 सर्वोच्च न्यायालय को कुछ संघीय विवादों में मूल अधिकार क्षेत्र प्रदान करता है। इसके अंतर्गत संघ और एक या अधिक राज्यों अथवा राज्यों के बीच उत्पन्न कुछ विवाद सीधे सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। यही व्यवस्था कथन (A) में उल्लिखित संघीय प्रकृति के मूल अधिकार क्षेत्र का आधार है। अतः कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है और विकल्प A सही है।

प्रश्न 150: कथन (A): न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति भारतीय संविधान में स्पष्ट तथा निहित दोनों आधारों पर विकसित हुई है। कारण (R): अनुच्छेद 13, 32, 131–136, 226 तथा 227 न्यायिक पुनर्विलोकन की संवैधानिक नींव प्रदान करते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान में न्यायिक पुनर्विलोकन का उल्लेख किसी एक पृथक अनुच्छेद में नहीं किया गया है, बल्कि यह विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों से विकसित होता है। अनुच्छेद 13 संविधान-विरुद्ध कानूनों को अमान्य घोषित करने का आधार प्रदान करता है, जबकि अनुच्छेद 32 एवं 226 न्यायालयों को रिट जारी करने की शक्ति देते हैं। अनुच्छेद 131–136 तथा 227 न्यायपालिका की संवैधानिक भूमिका और अधिकारिता को सुदृढ़ करते हैं। इसलिए कारण, कथन की उचित व्याख्या करता है।

प्रश्न 151: कथन (A): उच्च न्यायालय अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत अधीनस्थ न्यायालयों पर पर्यवेक्षण रखता है। कारण (R): उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 227 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को अपने क्षेत्राधिकार के अधीन सभी न्यायालयों एवं अधिकरणों पर पर्यवेक्षण की शक्ति प्राप्त है। अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उसे रिट जारी करने की शक्ति भी प्राप्त है। दोनों कथन सही हैं, किंतु रिट अधिकारिता और पर्यवेक्षण संबंधी शक्ति अलग-अलग संवैधानिक शक्तियाँ हैं। इसलिए कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता।

प्रश्न 152: कथन (A): न्यायिक पुनर्विलोकन संविधान की सर्वोच्चता को व्यावहारिक रूप से लागू करने का माध्यम है। कारण (R): यदि कोई कानून संविधान के विपरीत हो तो न्यायालय उसे अमान्य घोषित कर सकते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
संविधान की सर्वोच्चता तभी प्रभावी हो सकती है जब न्यायालय संविधान-विरुद्ध कानूनों को अमान्य घोषित करने की शक्ति रखते हों। यही न्यायिक पुनर्विलोकन का सार है। कारण कथन की सीधी व्याख्या करता है।

प्रश्न 153: कथन (A): जनहित याचिका ने लोकस स्टैंडी की पारंपरिक अवधारणा को उदार बनाया। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय को अनुच्छेद 137 के अंतर्गत पुनर्विलोकन की शक्ति प्राप्त है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
जनहित याचिका ने लोकस स्टैंडी की पारंपरिक अवधारणा को उदार बनाया, इसलिए कथन सही है। अनुच्छेद 137 सर्वोच्च न्यायालय को अपने निर्णयों के पुनर्विलोकन की शक्ति प्रदान करता है, इसलिए कारण भी सही है। किंतु पुनर्विलोकन शक्ति का जनहित याचिका द्वारा लोकस स्टैंडी के उदारीकरण से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

प्रश्न 154: कथन (A): सर्वोच्च न्यायालय के सभी निर्णय स्वतः संविधान संशोधन के समान प्रभाव रखते हैं। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय संविधान की व्याख्या करता है, संविधान संशोधन नहीं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
सर्वोच्च न्यायालय संविधान की व्याख्या करता है, किन्तु उसके निर्णय संविधान संशोधन नहीं होते। संविधान संशोधन की प्रक्रिया पृथक संवैधानिक प्रक्रिया है। अतः कथन गलत और कारण सही है।

प्रश्न 155: कथन (A): उच्च न्यायालय को संविधान के अंतर्गत परामर्शी अधिकार क्षेत्र प्राप्त है। कारण (R): परामर्शी अधिकार क्षेत्र केवल सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित संवैधानिक व्यवस्था है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है परन्तु R गलत है।
  • D. A गलत है परन्तु R सही है। ✓
सही उत्तर: D — A गलत है परन्तु R सही है।
व्याख्या (Explanation):
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों को परामर्शी अधिकार क्षेत्र प्रदान नहीं किया गया है। परामर्शी अधिकार क्षेत्र का प्रावधान केवल सर्वोच्च न्यायालय के लिए किया गया है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रपति अनुच्छेद 143 के अनुसार किसी विधिक या सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए कथन (A) गलत है, जबकि कारण (R) सही है।

प्रश्न 156: कथन (A): सर्वोच्च न्यायालय विशेष अनुमति याचिका के माध्यम से किसी भी न्यायालय या अधिकरण के निर्णय के विरुद्ध अपील सुन सकता है। कारण (R): अनुच्छेद 136 सर्वोच्च न्यायालय को व्यापक विवेकाधीन अपीलीय शक्ति प्रदान करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 136 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को विशेष अनुमति याचिका स्वीकार करने की व्यापक विवेकाधीन शक्ति प्राप्त है। इसके माध्यम से वह भारत के किसी भी न्यायालय या अधिकरण (सैन्य न्यायाधिकरणों को छोड़कर) के निर्णय के विरुद्ध अपील सुन सकता है। इसलिए कारण कथन की सही व्याख्या करता है।

प्रश्न 157: कथन (A): न्यायिक सक्रियता का विकास मुख्यतः न्यायपालिका की संवैधानिक व्याख्यात्मक भूमिका से जुड़ा है। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय भारत का सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक सक्रियता का विकास न्यायपालिका की सक्रिय संवैधानिक व्याख्या से जुड़ा है, इसलिए कथन सही है। सर्वोच्च न्यायालय देश का सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है, इसलिए कारण भी सही है। किंतु उसका सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय होना न्यायिक सक्रियता के विकास का प्रत्यक्ष कारण नहीं है। अतः सही उत्तर (B) है।

प्रश्न 158: कथन (A): अधीनस्थ न्यायालयों पर प्रशासनिक नियंत्रण संसद द्वारा प्रयोग किया जाता है। कारण (R): जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं अधीनस्थ न्यायपालिका के नियंत्रण से संबंधित प्रावधानों में उच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण भूमिका है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अधीनस्थ न्यायालय संसद के प्रशासनिक नियंत्रण में नहीं होते। संविधान के अनुच्छेद 233 से 237 तक अधीनस्थ न्यायपालिका से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं तथा उच्च न्यायालय को अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण संबंधी महत्वपूर्ण शक्तियाँ प्राप्त हैं। इसलिए कथन गलत तथा कारण सही है।

प्रश्न 159: कथन (A): जनहित याचिका का उद्देश्य केवल निजी विवादों का समाधान करना है। कारण (R): जनहित याचिका के माध्यम से सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के हितों की रक्षा की जा सकती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A सही है परन्तु R गलत है।
  • D. A गलत है परन्तु R सही है। ✓
सही उत्तर: D — A गलत है परन्तु R सही है।
व्याख्या (Explanation):
जनहित याचिका का उद्देश्य केवल निजी विवादों का समाधान करना नहीं, बल्कि व्यापक सार्वजनिक हित की रक्षा करना है। इसके माध्यम से समाज के कमजोर, वंचित तथा हाशिए पर स्थित वर्गों के अधिकारों और हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। इसलिए कथन (A) गलत है, जबकि कारण (R) सही है।

प्रश्न 160: कथन (A): न्यायिक पुनर्विलोकन विधायिका और कार्यपालिका की शक्तियों पर संवैधानिक नियंत्रण स्थापित करता है। कारण (R): न्यायालय संविधान के विपरीत पाए गए विधानों और कार्यकारी कार्यों को अमान्य घोषित कर सकते हैं।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
न्यायिक पुनर्विलोकन का मूल उद्देश्य संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखना है। न्यायालय संविधान-विरुद्ध विधानों एवं कार्यपालिका के कार्यों को अमान्य घोषित कर सकते हैं। यही शक्ति विधायिका और कार्यपालिका पर संवैधानिक नियंत्रण स्थापित करती है। अतः कारण कथन की सही व्याख्या करता है। न्यायिक पुनर्विलोकन भारतीय लोकतंत्र की आधारभूत संवैधानिक विशेषताओं में से एक है।

प्रश्न 161: कथन (A): उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का क्षेत्र सर्वोच्च न्यायालय की तुलना में व्यापक है। कारण (R): उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के अतिरिक्त अन्य विधिक अधिकारों के संरक्षण हेतु भी रिट जारी कर सकता है, इसलिए उसकी रिट अधिकारिता व्यापक है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, इसलिए कारण भी सही है। किंतु नियुक्ति की प्रक्रिया का रिट अधिकारिता की व्यापकता से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। अतः सही उत्तर (B) है।

प्रश्न 162: कथन (A): उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा स्वतंत्र रूप से की जाती है। कारण (R): उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित संवैधानिक परामर्श प्रक्रिया के अनुसार की जाती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 217 के अनुसार उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इस प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश, संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा संबंधित राज्यपाल से परामर्श किया जाता है। अतः कथन गलत और कारण सही है।

प्रश्न 163: कथन (A): सर्वोच्च न्यायालय अपने ही निर्णयों का पुनर्विलोकन कर सकता है। कारण (R): संविधान सर्वोच्च न्यायालय को अपने निर्णयों के विरुद्ध अपील सुनने की शक्ति देता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 137 सर्वोच्च न्यायालय को अपने निर्णयों के पुनर्विलोकन की शक्ति प्रदान करता है, इसलिए कथन सही है। कारण गलत है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय अपने ही निर्णयों के विरुद्ध अपील नहीं सुनता। वह केवल पुनर्विलोकन याचिका तथा अत्यंत सीमित परिस्थितियों में उपचारात्मक याचिका के माध्यम से अपने निर्णय की समीक्षा कर सकता है।

प्रश्न 164: कथन (A): सर्वोच्च न्यायालय का परामर्शी अधिकार क्षेत्र राष्ट्रपति द्वारा संदर्भित प्रश्नों से संबंधित है। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है ✓
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: B — A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति लोकमहत्त्व के विधिक या तथ्यात्मक प्रश्न सर्वोच्च न्यायालय को संदर्भित कर सकता है, अतः कथन सही है। सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 129 के अंतर्गत अभिलेख न्यायालय भी है, इसलिए कारण भी सही है। किंतु अभिलेख न्यायालय का दर्जा परामर्शी अधिकार क्षेत्र का कारण नहीं है। अतः सही उत्तर (B) है।

प्रश्न 165: कथन (A): सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय का दर्जा प्राप्त है। कारण (R): उसके अभिलेख एवं निर्णय स्थायी साक्ष्य के रूप में मान्य होते हैं तथा उसे अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
अनुच्छेद 129 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय है। अभिलेख न्यायालय होने का अर्थ है कि उसके निर्णय एवं अभिलेख स्थायी प्रमाणिकता रखते हैं तथा उसे अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त होती है। इसलिए कारण कथन की प्रत्यक्ष संवैधानिक व्याख्या करता है। इसी प्रकार उच्च न्यायालय भी अनुच्छेद 215 के अंतर्गत अभिलेख न्यायालय हैं।

प्रश्न 166: कथन (A): सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होते हैं। कारण (R): अनुच्छेद 141 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि देश के सभी न्यायालयों पर लागू होती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
दोनों कथन सही हैं। संविधान के अनुच्छेद 141 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होती है। यही संवैधानिक प्रावधान कथन का आधार है। इसलिए कारण, कथन की सही व्याख्या करता है और विकल्प A सही है।

प्रश्न 167: कथन (A): न्यायिक सक्रियता के अंतर्गत न्यायालय सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर व्यापक हस्तक्षेप कर सकते हैं। कारण (R): न्यायिक सक्रियता का उद्देश्य संविधान के मूल्यों और अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
दोनों कथन सही हैं। न्यायिक सक्रियता के माध्यम से न्यायालयों ने पर्यावरण संरक्षण, बंदी अधिकार, श्रमिक अधिकार तथा प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई। इसका मूल उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों, विधि के शासन तथा अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसलिए कारण कथन की उचित व्याख्या करता है और विकल्प A सही है।

प्रश्न 168: कथन (A): अधीनस्थ न्यायालय सीधे संसद के नियंत्रण में कार्य करते हैं। कारण (R): उच्च न्यायालयों को अधीनस्थ न्यायालयों पर पर्यवेक्षण की शक्ति प्राप्त है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि अधीनस्थ न्यायालय संसद के प्रत्यक्ष नियंत्रण में कार्य नहीं करते। कारण सही है क्योंकि अनुच्छेद 227 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों को अधीनस्थ न्यायालयों और अधिकरणों पर पर्यवेक्षण का अधिकार प्राप्त है। न्यायिक स्वतंत्रता बनाए रखने हेतु अधीनस्थ न्यायपालिका को विधायिका के प्रत्यक्ष नियंत्रण से पृथक रखा गया है।

प्रश्न 169: कथन (A): उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट जारी कर सकता है। कारण (R): उच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु ही रिट जारी कर सकता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को रिट जारी करने की शक्ति देता है। कारण गलत है क्योंकि उच्च न्यायालय न केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन बल्कि अन्य विधिक अधिकारों की रक्षा के लिए भी रिट जारी कर सकता है। यही कारण है कि अनुच्छेद 226 का क्षेत्र अनुच्छेद 32 की तुलना में व्यापक माना जाता है।

प्रश्न 170: कथन (A): जनहित याचिका ने न्याय तक पहुँच को व्यापक बनाया है। कारण (R): जनहित याचिका में केवल वही व्यक्ति याचिका दायर कर सकता है जिसका अधिकार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुआ हो।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है क्योंकि जनहित याचिका (PIL) ने निर्धनों, वंचितों और असहाय वर्गों को न्यायालय तक पहुँचने का अवसर प्रदान किया है। कारण गलत है क्योंकि PIL में याचिका दायर करने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि याचिकाकर्ता का अधिकार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुआ हो; कोई भी सार्वजनिक हित में न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। अतः विकल्प C सही है।

प्रश्न 171: कथन (A): न्यायिक पुनर्विलोकन भारतीय संविधान की मूल संरचना का हिस्सा माना गया है। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में न्यायिक पुनर्विलोकन को संविधान की मूल विशेषता माना है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
दोनों कथन सही हैं। विशेषकर केशवानंद भारती वाद तथा बाद के अनेक निर्णयों में न्यायिक पुनर्विलोकन को संविधान की मूल संरचना का अभिन्न अंग माना गया। न्यायिक पुनर्विलोकन के बिना संविधान की सर्वोच्चता तथा सीमित सरकार की अवधारणा प्रभावी नहीं रह सकती। कारण सीधे कथन का आधार प्रस्तुत करता है, इसलिए विकल्प A सही है।

प्रश्न 172: कथन (A): भारत में उच्च न्यायालयों की स्थापना और उन्मूलन का अधिकार संबंधित राज्य विधानमंडल के पास है। कारण (R): संसद विधि द्वारा उच्च न्यायालयों की स्थापना, पुनर्गठन अथवा उन्मूलन कर सकती है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है ✓
सही उत्तर: D — A गलत है पर R सही है
व्याख्या (Explanation):
कथन गलत है क्योंकि उच्च न्यायालयों की स्थापना या पुनर्गठन का अधिकार राज्य विधानमंडल को नहीं बल्कि संसद को प्राप्त है। कारण सही है क्योंकि संसद विधि बनाकर उच्च न्यायालयों के गठन, पुनर्गठन अथवा क्षेत्राधिकार में परिवर्तन कर सकती है। उच्च न्यायालयों से संबंधित प्रावधान संविधान के भाग VI में निहित हैं।

प्रश्न 173: कथन (A): अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु रिट जारी कर सकता है। कारण (R): अनुच्छेद 32 केवल संवैधानिक संशोधनों की वैधता की जांच से संबंधित है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
कथन पूर्णतः सही है। अनुच्छेद 32 को संविधान की आत्मा और हृदय कहा गया है तथा इसके अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण जैसी रिट जारी कर सकता है। कारण गलत है क्योंकि अनुच्छेद 32 का उद्देश्य मौलिक अधिकारों का प्रवर्तन है, न कि केवल संवैधानिक संशोधनों की वैधता की जांच। संवैधानिक संशोधनों की न्यायिक समीक्षा व्यापक न्यायिक पुनर्विलोकन के अंतर्गत आती है। इसलिए विकल्प C सही है।

प्रश्न 174: कथन (A): सर्वोच्च न्यायालय का मूल अधिकार क्षेत्र संघ और राज्यों के मध्य विवादों तक विस्तारित है। कारण (R): ऐसे सभी विवादों की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय केवल अपीलीय अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत करता है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है ✓
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: C — A सही है पर R गलत है
व्याख्या (Explanation):
कथन सही है। संविधान के अनुच्छेद 131 के अनुसार संघ और राज्यों अथवा राज्यों के बीच कुछ विवादों में सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकार क्षेत्र प्राप्त है। कारण गलत है क्योंकि ऐसे विवाद अपीलीय अधिकार क्षेत्र में नहीं, बल्कि मूल अधिकार क्षेत्र में सुने जाते हैं। अतः विकल्प C सही है।

प्रश्न 175: कथन (A): सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का संरक्षक माना जाता है। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय को संविधान-विरुद्ध कानूनों को निरस्त करने की शक्ति प्राप्त है।

  • A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है ✓
  • B. A और R दोनों सही हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है पर R गलत है
  • D. A गलत है पर R सही है
सही उत्तर: A — A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
व्याख्या (Explanation):
कथन और कारण दोनों सही हैं। सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का संरक्षक एवं अंतिम व्याख्याकार माना जाता है। अनुच्छेद 13, 32, 131-136 तथा न्यायिक पुनर्विलोकन की विकसित संवैधानिक अवधारणा के आधार पर वह संविधान-विरुद्ध विधियों एवं कार्यपालिका की कार्रवाइयों को निरस्त कर सकता है। यही शक्ति उसे संविधान का संरक्षक बनाती है, अतः कारण कथन की सही व्याख्या करता है।

Scroll to Top