भूख एवं कुपोषण
भारत जैसे विकासशील देश में भूख (Hunger) और कुपोषण (Malnutrition) सामाजिक एवं आर्थिक विकास की सबसे गंभीर चुनौतियों में से हैं। UPSC Prelims तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विषय से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस नोट्स में आप भूख, खाद्य सुरक्षा (Food Security), खाद्य असुरक्षा, Hidden Hunger, Stunting, Wasting, Underweight, एनीमिया, Global Hunger Index (GHI), Food Fortification तथा भारत सरकार की प्रमुख पोषण योजनाएँ जैसे ICDS, POSHAN Abhiyaan, PM POSHAN एवं Anaemia Mukt Bharat का विस्तृत अध्ययन करेंगे। साथ ही UPSC आधारित ट्रिक, तथ्य, ट्रैप एरिया और अभ्यास प्रश्न भी दिए गए हैं ताकि आपकी तैयारी अधिक प्रभावी हो सके।
Table of Contents
गरीबी का सबसे गंभीर प्रभाव भूख और कुपोषण के रूप में दिखाई देता है। केवल भोजन की उपलब्धता पर्याप्त नहीं होती, बल्कि व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा, गुणवत्ता और पोषणयुक्त भोजन प्राप्त होना आवश्यक है। भारत जैसे विकासशील देश में भूख और कुपोषण लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक विकास की प्रमुख चुनौतियाँ रही हैं।
UPSC तथ्य: भूख केवल भोजन की कमी नहीं है, बल्कि पर्याप्त पोषण, स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ी बहुआयामी समस्या है।
जब किसी व्यक्ति को शरीर की आवश्यक ऊर्जा और पोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं होता, तो इसे भूख कहते हैं।
भूख के प्रमुख प्रकार
भूख को मुख्य रूप से तीन भागों में समझा जा सकता है—
1. तीव्र भूख (Acute Hunger): कम समय के लिए भोजन की गंभीर कमी। कारण: प्राकृतिक आपदा, युद्ध, आर्थिक संकट, बेरोजगारी प्रभाव: तेजी से वजन कम होना, कमजोरी, मृत्यु का जोखिम
2. दीर्घकालिक भूख (Chronic Hunger): लंबे समय तक पर्याप्त भोजन न मिलना। कारण: गरीबी, खाद्य असुरक्षा, कम आय प्रभाव: कुपोषण, विकास में बाधा
3. छिपी हुई भूख (Hidden Hunger): जब व्यक्ति को पर्याप्त कैलोरी मिलती है लेकिन आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) नहीं मिलते। उदाहरण: कमी- आयरन, विटामिन A, आयोडीन, जिंक की।
खाद्य सुरक्षा (Food Security)
खाद्य सुरक्षा का अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को हर समय पर्याप्त मात्रा में भोजन, सुरक्षित भोजन, पौष्टिक भोजन प्राप्त हो।
Food and Agriculture Organization के अनुसार खाद्य सुरक्षा तब होती है जब सभी लोगों को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन तक भौतिक एवं आर्थिक पहुंच प्राप्त हो।
खाद्य सुरक्षा के चार प्रमुख स्तंभ
आधुनिक दृष्टिकोण में खाद्य सुरक्षा के चार आयाम माने जाते हैं—
1. उपलब्धता (Availability): देश या क्षेत्र में पर्याप्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध होना। निर्भर करता है कृषि उत्पादन, आयात, और खाद्यान्न भंडार पर।
2. पहुंच (Access): लोग भोजन प्राप्त करने में सक्षम हों। प्रभावित करने वाले कारक आय, बाजार तक पहुंच और सामाजिक स्थिति।
3. उपयोग (Utilization): भोजन का शरीर द्वारा उचित उपयोग। यह निर्भर करता है स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण ज्ञान पर।
4. स्थिरता (Stability): भोजन की उपलब्धता समय के साथ बनी रहे।
खाद्य असुरक्षा (Food Insecurity)
जब व्यक्ति या परिवार को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन प्राप्त नहीं होता, तो खाद्य असुरक्षा कहलाती है।
खाद्य असुरक्षा के कारण
1. गरीबी: कम आय के कारण भोजन खरीदने की क्षमता कम होती है।
2. बेरोजगारी: आय स्रोत समाप्त हो जाता है।
3. प्राकृतिक आपदाएँ: सूखा, बाढ़ और चक्रवात खाद्य उपलब्धता प्रभावित करते हैं।
4. खाद्य कीमतों में वृद्धि: मुद्रास्फीति गरीबों की भोजन तक पहुंच कम करती है।
5. सामाजिक असमानता: कुछ समूहों को भोजन और संसाधनों तक कम पहुंच मिलती है।
भारत में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था
भारत में खाद्य सुरक्षा के लिए प्रमुख साधन—
1. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS): गरीबों को सब्सिडी वाले खाद्यान्न उपलब्ध कराना।
2. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013: खाद्य सुरक्षा को कानूनी अधिकार प्रदान करता है।
3. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY): संकट के समय अतिरिक्त खाद्यान्न सहायता।
4. मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal): बच्चों में पोषण सुधार।
5. आंगनवाड़ी सेवाएँ: बच्चों और माताओं के पोषण के लिए।
भूख मापन के प्रमुख संकेतक
भूख और पोषण स्थिति को मापने के लिए कैलोरी सेवन, BMI, बच्चों का वजन, ऊंचाई, पोषण स्तर, जैसे संकेतकों का उपयोग किया जाता है।
UPSC Perspective
प्रश्न 1 Hidden Hunger किससे संबंधित है?
(A) केवल कैलोरी की कमी
(B) सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी
(C) भोजन की अधिकता
(D) मोटापा
उत्तर: (B)
प्रश्न 2 खाद्य सुरक्षा का कौन-सा आयाम भोजन की आर्थिक पहुंच से संबंधित है?
(A) Availability
(B) Access
(C) Utilization
(D) Stability
उत्तर: (B)
UPSC Trap Areas
Trap 1 खाद्य सुरक्षा = केवल खाद्यान्न उत्पादन ❌ गलत
इसमें पहुंच और उपयोग भी शामिल हैं।
Trap 2 Hidden Hunger में भोजन की पूर्ण अनुपलब्धता होती है। ❌ गलत
भोजन उपलब्ध होता है लेकिन पोषक तत्वों की कमी होती है।
Trap 3 भूख केवल आर्थिक समस्या है। ❌ गलत
यह सामाजिक, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी समस्या भी है।
अक्सर भ्रमित करने वाली अवधारणाएँ
| अवधारणा | अर्थ |
|---|---|
| भूख (Hunger) | भोजन की कमी या पर्याप्त भोजन न मिलना |
| खाद्य असुरक्षा (Food Insecurity) | पर्याप्त, सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन तक नियमित पहुँच का अभाव |
| कुपोषण (Malnutrition) | पोषण का असंतुलन (पोषक तत्वों की कमी, अधिकता या असंतुलित सेवन) |
| छिपी हुई भूख (Hidden Hunger) | सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) जैसे आयरन, आयोडीन, विटामिन A, जिंक आदि की कमी |
Quick Revision Box
| तथ्य | याद रखें |
|---|---|
| भूख (Hunger) | पर्याप्त भोजन की कमी |
| छिपी हुई भूख (Hidden Hunger) | सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) की कमी |
| खाद्य सुरक्षा (Food Security) | उपलब्धता (Availability) + पहुँच (Access) + उपयोग (Utilization) + स्थिरता (Stability) |
| मुख्य कारण | गरीबी एवं खाद्य असुरक्षा |
कुपोषण (Malnutrition) की अवधारणा
कुपोषण (Malnutrition) केवल भोजन की कमी नहीं है, बल्कि यह पोषक तत्वों के असंतुलन से उत्पन्न स्थिति है। यह तब उत्पन्न होता है जब व्यक्ति को—
- पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती,
- आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है,
- या आवश्यकता से अधिक पोषण प्राप्त होता है।
इसलिए कुपोषण को एक बहुआयामी स्वास्थ्य और सामाजिक समस्या माना जाता है।
UPSC तथ्य: कुपोषण में अल्पपोषण (Undernutrition) और अतिपोषण (Overnutrition) दोनों शामिल होते हैं।
कुपोषण की परिभाषा (Definition of Malnutrition)
World Health Organization के अनुसार— कुपोषण शरीर में पोषक तत्वों की कमी, अधिकता या असंतुलन से उत्पन्न स्थिति है।
कुपोषण का वर्गीकरण (Classification of Malnutrition)
कुपोषण को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जाता है—
1. अल्पपोषण (Undernutrition): जब शरीर को आवश्यक ऊर्जा और पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते, तो इसे अल्पपोषण कहते हैं।
अल्पपोषण के प्रमुख रूप: (A) बौनापन (Stunting), (B) क्षीणता (Wasting), (C) कम वजन (Underweight)
2. सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी (Micronutrient Deficiency): जब शरीर में आवश्यक विटामिन और खनिज तत्वों की कमी होती है।
प्रमुख उदाहरण
| पोषक तत्व | कमी से समस्या |
|---|---|
| आयरन | एनीमिया |
| आयोडीन | घेंघा (Goitre) |
| विटामिन A | दृष्टि समस्या |
| जिंक | प्रतिरक्षा कमजोरी |
3. अतिपोषण (Overnutrition): जब शरीर को आवश्यकता से अधिक ऊर्जा या पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। परिणाम: मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग
कुपोषण के प्रमुख संकेतक
बच्चों में कुपोषण मापने के लिए WHO मानकों का उपयोग किया जाता है। प्रमुख संकेतक—
- Height-for-age (आयु के अनुसार लंबाई) — बौनापन (Stunting) का संकेतक; दीर्घकालिक कुपोषण को दर्शाता है।
- Weight-for-height (लंबाई के अनुसार वजन) — क्षीणता (Wasting) का संकेतक; तीव्र (Acute) कुपोषण को दर्शाता है।
- Weight-for-age (आयु के अनुसार वजन) — कम वजन (Underweight) का संकेतक; यह दीर्घकालिक और तीव्र दोनों प्रकार के कुपोषण का संयुक्त प्रभाव दर्शाता है।
1. बौनापन (Stunting): लंबे समय तक पोषण की कमी के कारण बच्चे की लंबाई उम्र के अनुसार कम होना। कारण: लंबे समय तक कुपोषण, बार-बार संक्रमण, मातृ कुपोषण प्रभाव: शारीरिक विकास में बाधा, मानसिक विकास प्रभावित, सीखने की क्षमता में कमी
2. क्षीणता (Wasting): कम समय में गंभीर पोषण कमी के कारण बच्चे का वजन लंबाई के अनुसार कम होना। कारण: अचानक भोजन की कमी, बीमारी, संक्रमण प्रभाव: कमजोरी, मृत्यु का अधिक जोखिम
3. कम वजन (Underweight): बच्चे का वजन उम्र के अनुसार कम होना।
Stunting, Wasting और Underweight में अंतर
| आधार | बौनापन (Stunting) | क्षीणता (Wasting) | कम वजन (Underweight) |
|---|---|---|---|
| माप | आयु के अनुसार लंबाई (Height-for-age) | लंबाई के अनुसार वजन (Weight-for-height) | आयु के अनुसार वजन (Weight-for-age) |
| प्रकृति | दीर्घकालिक (Chronic) कुपोषण | तीव्र (Acute) कुपोषण | दीर्घकालिक एवं तीव्र दोनों का संयुक्त प्रभाव |
| मुख्य कारण | लंबे समय तक पोषण की कमी | अचानक भोजन या पोषण की कमी, बीमारी | दीर्घकालिक एवं तीव्र कुपोषण दोनों |
| प्रभाव | शारीरिक एवं मानसिक विकास बाधित | अत्यधिक कमजोरी एवं दुबलापन | आयु के अनुसार अपेक्षित वजन से कम वृद्धि |
कुपोषण के कारण
1. गरीबी: गरीब परिवार पौष्टिक भोजन खरीदने में सक्षम नहीं होते।
2. खाद्य असुरक्षा: भोजन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं।
3. मातृ कुपोषण: गर्भावस्था में पोषण की कमी बच्चे के विकास को प्रभावित करती है।
4. अशिक्षा: पोषण संबंधी जानकारी की कमी।
5. स्वच्छता की कमी: गंदा पानी और संक्रमण पोषण को प्रभावित करते हैं।
6. स्वास्थ्य सेवाओं की कमी: बीमारियों का समय पर उपचार न होना।
भारत में कुपोषण की स्थिति
भारत में कुपोषण एक महत्वपूर्ण विकास चुनौती है। प्रमुख कारण—
- गरीबी
- असमानता
- मातृ स्वास्थ्य समस्याएँ
- स्वच्छता की कमी
- पोषण जागरूकता का अभाव
भारत सरकार की प्रमुख पहल
1. पोषण अभियान 2018: बच्चों में कुपोषण कम करना, गर्भवती महिलाओं और माताओं के पोषण में सुधार
2. आंगनवाड़ी सेवाएँ: पूरक पोषण, स्वास्थ्य जांच, पोषण शिक्षा
3. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): गर्भवती महिलाओं को सहायता।
4. एनीमिया मुक्त भारत अभियान: एनीमिया की समस्या कम करना।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
प्रश्न 1. बौनापन (Stunting) किसका संकेतक है?
(A) आयु के अनुसार लंबाई (Height-for-age)
(B) लंबाई के अनुसार वजन (Weight-for-height)
(C) आयु के अनुसार वजन (Weight-for-age)
(D) बॉडी मास इंडेक्स (BMI)
उत्तर: (A)
प्रश्न 2. क्षीणता (Wasting) मुख्य रूप से किससे संबंधित है?
(A) दीर्घकालिक पोषण की कमी
(B) तीव्र पोषण की कमी
(C) अत्यधिक भोजन
(D) मोटापा
उत्तर: (B)
UPSC के भ्रमित करने वाले तथ्य
Trap 1 कथन: कुपोषण = केवल भोजन की कमी ❌ गलत
सही तथ्य: कुपोषण (Malnutrition) में पोषक तत्वों की कमी, अधिकता तथा असंतुलन—तीनों शामिल होते हैं।
Trap 2 कथन: बौनापन (Stunting) अचानक होता है। ❌ गलत
सही तथ्य: बौनापन दीर्घकालिक (Chronic) कुपोषण का परिणाम है।
Trap 3 कथन: क्षीणता (Wasting) लंबी अवधि की समस्या है। ❌ गलत
सही तथ्य: क्षीणता तीव्र (Acute) कुपोषण या अचानक पोषण की कमी से संबंधित होती है।
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त्वरित पुनरावृत्ति बॉक्स (Quick Revision Box)
| तथ्य | याद रखें |
|---|---|
| कुपोषण (Malnutrition) | पोषक तत्वों का असंतुलन (कमी, अधिकता या असंतुलित सेवन) |
| बौनापन (Stunting) | आयु के अनुसार लंबाई (Height-for-age) |
| क्षीणता (Wasting) | लंबाई के अनुसार वजन (Weight-for-height) |
| कम वजन (Underweight) | आयु के अनुसार वजन (Weight-for-age) |
| छिपी हुई भूख (Hidden Hunger) | सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) की कमी |
बौनापन (Stunting), क्षीणता (Wasting) और कम वजन (Underweight)
बच्चों में कुपोषण के प्रमुख संकेतक
बच्चों में कुपोषण का आकलन केवल भोजन की मात्रा से नहीं किया जाता, बल्कि बच्चे की—
- उम्र,
- लंबाई,
- वजन
के आधार पर किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बच्चों के पोषण स्तर को मापने के लिए World Health Organization (WHO) के Growth Standards का उपयोग किया जाता है। UPSC Prelims में Stunting, Wasting और Underweight के बीच अंतर से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
बौनापन (Stunting)
जब किसी बच्चे की लंबाई उसकी उम्र के अनुसार अपेक्षित लंबाई से कम होती है, तो इसे बौनापन (Stunting) कहते हैं। बौनापन दीर्घकालिक कुपोषण को दर्शाता है?
बौनापन के प्रमुख कारण
1. लंबे समय तक पोषण की कमी: बच्चे को लंबे समय तक पर्याप्त पोषण नहीं मिलना।
2. मातृ कुपोषण: गर्भावस्था के दौरान मां का कमजोर पोषण बच्चे के विकास को प्रभावित करता है।
3. बार-बार संक्रमण: जैसे- दस्त, निमोनिया
4. खराब स्वच्छता: गंदे पानी और स्वच्छता की कमी से संक्रमण बढ़ता है।
बौनापन के प्रभाव
1. शारीरिक विकास में कमी: बच्चे की लंबाई सामान्य से कम रह जाती है।
2. संज्ञानात्मक विकास प्रभावित: सीखने की क्षमता कम हो सकती है। मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है।
3. भविष्य की आय पर प्रभाव: कम शारीरिक और मानसिक क्षमता से उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
क्षीणता (Wasting)
जब बच्चे का वजन उसकी लंबाई के अनुसार कम होता है, तो इसे क्षीणता (Wasting) कहते हैं। क्षीणता तीव्र कुपोषण को दर्शाता है?
क्षीणता के कारण
1. अचानक भोजन की कमी: सूखा, आपदा, आर्थिक संकट
2. गंभीर बीमारी: संक्रमण के कारण तेजी से वजन कम होना।
3. अपर्याप्त स्तनपान: विशेषकर शुरुआती जीवन में।
क्षीणता के प्रभाव: कमजोरी, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, मृत्यु का अधिक खतरा
कम वजन (Underweight)
जब बच्चे का वजन उसकी उम्र के अनुसार कम होता है, तो इसे कम वजन कहते हैं। Underweight एक मिश्रित संकेतक है। यह दर्शा सकता है दीर्घकालिक कुपोषण और तीव्र कुपोषण दोनों को।
Stunting, Wasting और Underweight में अंतर
| आधार | बौनापन (Stunting) | क्षीणता (Wasting) | कम वजन (Underweight) |
|---|---|---|---|
| माप | आयु के अनुसार लंबाई (Height-for-age) | लंबाई के अनुसार वजन (Weight-for-height) | आयु के अनुसार वजन (Weight-for-age) |
| प्रकृति | दीर्घकालिक (Chronic) | तीव्र (Acute) | मिश्रित (दीर्घकालिक एवं तीव्र दोनों का प्रभाव) |
| मुख्य समस्या | शारीरिक एवं मानसिक विकास में बाधा | अपेक्षा से कम वजन एवं अत्यधिक दुबलापन | आयु के अनुसार कम वजन |
| समयावधि | लंबे समय तक पोषण की कमी | अचानक या अल्पकालिक पोषण की कमी | दोनों परिस्थितियों में संभव |
| UPSC Keyword | Height | Weight + Height | Weight + Age |
भारत में बच्चों के कुपोषण की स्थिति
भारत में बच्चों का कुपोषण विकास की प्रमुख चुनौतियों में शामिल है। इसके प्रमुख कारण—
- गरीबी
- मातृ कुपोषण
- कम जन्म वजन
- स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
- स्वच्छता की समस्या
NFHS और कुपोषण
भारत में बच्चों के पोषण स्तर का आकलन मुख्य रूप से National Family Health Survey (NFHS) के माध्यम से किया जाता है।
NFHS-5 (2019-21) के प्रमुख संकेतक
भारत में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में—
भारत में कुपोषण की स्थिति (संकेतक)
| संकेतक | स्थिति (लगभग) |
|---|---|
| बौनापन (Stunting) | लगभग 35% |
| क्षीणता (Wasting) | लगभग 19% |
| कम वजन (Underweight) | लगभग 32% |
UPSC Current Affairs Linkage
कुपोषण से संबंधित विषयों में UPSC निम्न पहलुओं पर प्रश्न पूछ सकता है—
- NFHS रिपोर्ट
- POSHAN अभियान
- एनीमिया
- मातृ स्वास्थ्य
- खाद्य सुरक्षा
सरकारी पहल
1. पोषण अभियान 2018: बौनापन कम करना, Underweight (कम वजन) कम करना, महिलाओं और बच्चों का पोषण सुधारना
2. POSHAN 2.0: पोषण सेवाओं को मजबूत करना, आंगनवाड़ी व्यवस्था सुधारना
3. सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0: बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं का पोषण सुधारना।
4. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): गर्भवती महिलाओं को मातृत्व सहायता प्रदान करना।
5. एनीमिया मुक्त भारत: आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया को कम करना।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से बौनापन (Stunting) किसका संकेतक है?
(A) लंबाई के अनुसार वजन (Weight-for-height)
(B) आयु के अनुसार लंबाई (Height-for-age)
(C) आयु के अनुसार वजन (Weight-for-age)
(D) बॉडी मास इंडेक्स (BMI)
उत्तर: (B)
प्रश्न 2. क्षीणता (Wasting) किससे संबंधित है?
(A) दीर्घकालिक (Chronic) कुपोषण
(B) तीव्र (Acute) कुपोषण
(C) अतिपोषण (Overnutrition)
(D) मोटापा (Obesity)
उत्तर: (B)
UPSC के भ्रमित करने वाले तथ्य
Trap 1 बौनापन = कम वजन ❌ गलत
बौनापन = उम्र के अनुसार कम लंबाई।
Trap 2 क्षीणता = लंबे समय की समस्या ❌ गलत
क्षीणता = तीव्र कुपोषण।
Trap 3 Underweight (कम वजन) केवल भोजन की कमी बताता है। ❌ गलत
यह कई कारणों से हो सकता है।
Quick Revision Box
| संकेतक | माप (Formula/Measure) | प्रकार (Type) |
|---|---|---|
| बौनापन (Stunting) | आयु के अनुसार लंबाई (Height-for-age) | दीर्घकालिक (Chronic) |
| क्षीणता (Wasting) | लंबाई के अनुसार वजन (Weight-for-height) | तीव्र (Acute) |
| कम वजन (Underweight) | आयु के अनुसार वजन (Weight-for-age) | मिश्रित (दीर्घकालिक एवं तीव्र दोनों) |
एनीमिया (Anaemia) और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी (Micronutrient Deficiency)
एनीमिया एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और किशोरियों को प्रभावित करती है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब रक्त में हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। एनीमिया के कारण शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे—
- थकान,
- कमजोरी,
- कार्य क्षमता में कमी
जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
UPSC तथ्य: भारत में एनीमिया का सबसे प्रमुख कारण आयरन की कमी (Iron Deficiency) है।
World Health Organization (WHO) के अनुसार एनीमिया वह स्थिति है जिसमें रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) या हीमोग्लोबिन की मात्रा शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होती।
हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) क्या है?
हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) में पाया जाने वाला आयरन युक्त प्रोटीन है। इसका मुख्य कार्य फेफड़ों से शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाना।
एनीमिया के प्रमुख प्रकार
1. आयरन की कमी से एनीमिया
2. विटामिन की कमी से एनीमिया
3. आनुवंशिक एनीमिया
4. संक्रमण संबंधित एनीमिया
आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया
जब शरीर में आयरन की कमी के कारण पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता, तो इसे आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया कहते हैं। भारत में एनीमिया का सबसे सामान्य प्रकार यही है। आयरन आवश्यक है—
- हीमोग्लोबिन निर्माण के लिए
- ऑक्सीजन परिवहन के लिए
- शारीरिक विकास के लिए
एनीमिया के कारण
1. पोषण की कमी: आयरन युक्त भोजन का कम सेवन। उदाहरण: हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, मांस, अंडे
2. रक्त हानि: विशेष रूप से महिलाओं में मासिक धर्म, प्रसव के दौरान रक्तस्राव
3. संक्रमण: कुछ संक्रमण शरीर में पोषक तत्वों की कमी बढ़ा सकते हैं।
4. मातृ कुपोषण: गर्भावस्था में आयरन की आवश्यकता बढ़ जाती है।
एनीमिया के प्रभाव
1. महिलाओं पर प्रभाव: कमजोरी, मातृ मृत्यु का जोखिम, गर्भावस्था संबंधी समस्याएँ
2. बच्चों पर प्रभाव: शारीरिक विकास में कमी, सीखने की क्षमता प्रभावित, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
3. आर्थिक प्रभाव: कम कार्य क्षमता से उत्पादकता प्रभावित होती है।
भारत में एनीमिया की स्थिति
भारत में एनीमिया विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और किशोरियों में अधिक पाया जाता है।
NFHS-5 (2019-21) के अनुसार भारत में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में एनीमिया की समस्या महत्वपूर्ण है। महिलाओं में भी एनीमिया का स्तर उच्च बना हुआ है।
(UPSC में आंकड़ों से अधिक प्रवृत्ति और कारणों पर ध्यान दिया जाता है।)
सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी (Micronutrient Deficiency)
जब शरीर को आवश्यक मात्रा में विटामिन और खनिज तत्व नहीं मिलते, तो इसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी कहते हैं।
1. आयरन (Iron) की कमी से एनीमिया
2. आयोडीन (Iodine) की कमी से घेंघा (Goitre), मानसिक विकास प्रभावित
3. विटामिन A की कमी से रतौंधी (Night Blindness), रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी
4. जिंक (Zinc) की कमी से कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, विकास में बाधा
Hidden Hunger
जब व्यक्ति पर्याप्त कैलोरी प्राप्त करता है लेकिन आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों से वंचित रहता है। उदाहरण: आयरन की कमी, आयोडीन की कमी, विटामिन A की कमी
सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के कारण
1. एकरूप भोजन (Monotonous Diet): केवल सीमित प्रकार के भोजन का सेवन।
2. गरीबी: विविध और पौष्टिक भोजन खरीदने में कठिनाई।
3. पोषण जागरूकता की कमी
4. स्वास्थ्य समस्याएँ: शरीर पोषक तत्वों का सही उपयोग नहीं कर पाता।
भारत सरकार की प्रमुख पहल
1. एनीमिया मुक्त भारत अभियान 2018: भारत में एनीमिया की समस्या को कम करना। लक्ष्य समूह: बच्चे, किशोर, महिलाएँ, गर्भवती महिलाएँ
रणनीतियाँ
- आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन (IFA): आयरन और फोलिक एसिड की गोलियाँ उपलब्ध कराना।
- डिवॉर्मिंग (Deworming): कृमि संक्रमण कम करना।
- जागरूकता:
पोषण संबंधी व्यवहार में सुधार।
2. पोषण अभियान: एनीमिया और कुपोषण कम करने के लिए व्यापक अभियान।
3. फोर्टिफिकेशन (Food Fortification): खाद्य पदार्थों में आवश्यक पोषक तत्व मिलाना। उदाहरण: आयरन युक्त चावल, आयोडीन युक्त नमक
एनीमिया और कुपोषण में अंतर
| आधार | एनीमिया | कुपोषण |
|---|---|---|
| मुख्य समस्या | हीमोग्लोबिन की कमी | पोषक तत्व असंतुलन |
| प्रमुख कारण | आयरन कमी | विभिन्न पोषक तत्व |
| प्रभाव | ऑक्सीजन परिवहन प्रभावित | विकास प्रभावित |
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
प्रश्न 1 भारत में एनीमिया का सबसे सामान्य कारण क्या है?
(A) कैल्शियम की कमी
(B) आयरन की कमी
(C) विटामिन C की अधिकता
(D) प्रोटीन की अधिकता
उत्तर: (B)
प्रश्न 2 Hidden Hunger किससे संबंधित है?
(A) केवल कैलोरी की कमी
(B) सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी
(C) भोजन की अधिकता
(D) मोटापा
उत्तर: (B)
UPSC के भ्रमित करने वाले तथ्य
Trap 1 एनीमिया केवल महिलाओं की समस्या है। ❌ गलत
बच्चे और पुरुष भी प्रभावित हो सकते हैं।
Trap 2 सिर्फ अधिक भोजन खाने से कुपोषण समाप्त हो जाता है। ❌ गलत
भोजन की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है।
Trap 3 Hidden Hunger में भोजन उपलब्ध नहीं होता। ❌ गलत
भोजन उपलब्ध होता है लेकिन पोषक तत्वों की कमी होती है।
Quick Revision Box
| तथ्य | याद रखें |
|---|---|
| एनीमिया (Anemia) | हीमोग्लोबिन की कमी |
| मुख्य कारण | आयरन (लौह) की कमी |
| छिपी हुई भूख (Hidden Hunger) | सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) की कमी |
| अभियान | एनीमिया मुक्त भारत (Anemia Mukt Bharat) |
| शुरुआत | वर्ष 2018 |
वैश्विक भूख सूचकांक 2006 (Global Hunger Index – GHI)
वैश्विक भूख सूचकांक (Global Hunger Index – GHI) विश्व स्तर पर भूख और कुपोषण की स्थिति को मापने वाला एक महत्वपूर्ण सूचकांक है। यह सूचकांक किसी देश में—
- भूख,
- बाल कुपोषण,
- बाल मृत्यु दर
जैसे संकेतकों के आधार पर खाद्य और पोषण सुरक्षा की स्थिति का आकलन करता है।
UPSC तथ्य: GHI केवल भोजन की उपलब्धता नहीं मापता, बल्कि भूख और कुपोषण के व्यापक प्रभावों को मापता है।
GHI को संयुक्त रूप से प्रकाशित किया जाता है—
- Concern Worldwide
- Welthungerhilfe
GHI का उद्देश्य
1. भूख की स्थिति को मापना: देशों में भूख की गंभीरता का आकलन करना।
2. पोषण सुधार को बढ़ावा देना: सरकारों और संस्थाओं को नीति निर्माण में सहायता देना।
3. वैश्विक तुलना: विभिन्न देशों की भूख स्थिति की तुलना करना।
GHI का इतिहास
GHI Score कैसे काम करता है?
GHI एक संयुक्त स्कोर (Composite Score) है। इसमें चार प्रमुख संकेतकों को शामिल किया जाता है।
1. अल्पपोषण (Undernourishment)
2. बाल क्षीणता (Child Wasting)
3. बाल बौनापन (Child Stunting)
4. बाल मृत्यु दर (Child Mortality)
1. अल्पपोषण (Undernourishment): ऐसे लोगों का प्रतिशत जिनका भोजन सेवन शरीर की आवश्यक ऊर्जा आवश्यकता को पूरा नहीं करता। इसे पूरी जनसंख्या की खाद्य ऊर्जा उपलब्धता के आधार पर मापा जाता हैं।
2. बाल क्षीणता (Child Wasting): 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में लंबाई के अनुसार कम वजन। यह तीव्र कुपोषण को दर्शाता हैं।
3. बाल बौनापन (Child Stunting): 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में उम्र के अनुसार कम लंबाई। यह दीर्घकालिक कुपोषण को दर्शाता है।
4. बाल मृत्यु दर (Child Mortality): 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर। यह भूख और कुपोषण के गंभीर प्रभावों को दर्शाता है।
वैश्विक भूख सूचकांक (GHI) के संकेतकों का सारांश
| संकेतक | क्या मापता है? |
|---|---|
| अल्पपोषण (Undernourishment) | पर्याप्त भोजन ऊर्जा (कैलोरी) की कमी |
| क्षीणता (Wasting) | तीव्र (Acute) कुपोषण |
| बौनापन (Stunting) | दीर्घकालिक (Chronic) कुपोषण |
| बाल मृत्यु दर (Child Mortality) | कुपोषण एवं संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का गंभीर प्रभाव |
GHI स्कोर के आधार पर देशों को भूख की गंभीरता के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।
वैश्विक भूख सूचकांक (GHI) की गंभीरता श्रेणी (Severity Scale)
| स्कोर श्रेणी | स्थिति |
|---|---|
| 9.9 या उससे कम | निम्न (Low) |
| 10.0 – 19.9 | मध्यम (Moderate) |
| 20.0 – 34.9 | गंभीर (Serious) |
| 35.0 – 49.9 | चिंताजनक (Alarming) |
| 50 या उससे अधिक | अत्यंत चिंताजनक (Extremely Alarming) |
भारत और GHI
भारत में GHI को लेकर चर्चा होती रही है क्योंकि भारत में बाल कुपोषण, एनीमिया, खाद्य असुरक्षा जैसी समस्याएँ मौजूद हैं।
भारत की स्थिति
भारत की GHI रैंकिंग समय के साथ बदलती रही है। UPSC में केवल रैंक याद करने के बजाय संकेतक, पद्धति, आलोचना पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।
भारत में भूख और कुपोषण के कारण
1. गरीबी: कम आय के कारण पौष्टिक भोजन की पहुंच सीमित होती है।
2. मातृ कुपोषण: गर्भावस्था में पोषण की कमी बच्चों को प्रभावित करती है।
3. स्वास्थ्य सेवाओं की कमी: बीमारियाँ पोषण स्थिति खराब करती हैं।
4. स्वच्छता की समस्या: संक्रमण पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित करते हैं।
5. पोषण जागरूकता की कमी: संतुलित आहार का ज्ञान कम होना।
GHI की आलोचनाएँ
भारत सहित कई देशों ने GHI की पद्धति पर प्रश्न उठाए हैं।
1. डेटा स्रोतों पर प्रश्न: कुछ संकेतकों के डेटा की गुणवत्ता और उपलब्धता पर बहस होती है।
2. सीमित संकेतक: आलोचक कहते हैं कि भूख एक जटिल समस्या है जिसे केवल चार संकेतकों से पूरी तरह नहीं मापा जा सकता।
3. बाल मृत्यु दर का भार: कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि बाल मृत्यु दर को भूख सूचकांक में शामिल करने पर बहस हो सकती है।
4. आय और खाद्य पहुंच का सीधा समावेश नहीं: GHI सीधे गरीबी या आय असमानता को नहीं मापता।
GHI बनाम अन्य प्रमुख सूचकांक
| सूचकांक | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|
| वैश्विक भूख सूचकांक (GHI) | भूख एवं कुपोषण का आकलन |
| मानव विकास सूचकांक (HDI) | मानव विकास के स्तर का आकलन |
| बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) | बहुआयामी गरीबी का आकलन |
| बॉडी मास इंडेक्स (BMI) | शरीर की संरचना (ऊँचाई के अनुसार वजन) का आकलन |
GHI और भारत की नीतियाँ
भारत में भूख और पोषण सुधार के लिए—
1. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA): खाद्य अधिकार।
2. पोषण अभियान: कुपोषण में कमी।
3. POSHAN 2.0: पोषण सेवाओं का विस्तार।
4. मिड-डे मील / PM POSHAN: बच्चों के पोषण में सुधार।
5. एनीमिया मुक्त भारत: एनीमिया नियंत्रण।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
प्रश्न 1. वैश्विक भूख सूचकांक (Global Hunger Index – GHI) में निम्नलिखित में से कौन-कौन से संकेतक शामिल हैं?
- बाल बौनापन (Child Stunting)
- बाल क्षीणता (Child Wasting)
- बाल मृत्यु दर (Child Mortality)
सही विकल्प चुनिए—
(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) केवल 1 और 2
(D) 1, 2 और 3
उत्तर: (D)
प्रश्न 2. वैश्विक भूख सूचकांक (GHI) मुख्य रूप से किससे संबंधित है?
(A) आर्थिक विकास
(B) भूख एवं कुपोषण
(C) औद्योगिक उत्पादन
(D) व्यापार
उत्तर: (B)
UPSC के भ्रमित करने वाले तथ्य
Trap 1 GHI केवल खाद्यान्न उत्पादन मापता है। ❌ गलत
यह भूख और पोषण परिणामों को मापता है।
Trap 2 GHI = Human Development Index ❌ गलत
दोनों अलग सूचकांक हैं।
Trap 3 GHI केवल बच्चों का सूचकांक है। ❌ गलत
इसमें जनसंख्या स्तर का Undernourishment भी शामिल है।
Quick Revision Box
| तथ्य | याद रखें |
|---|---|
| GHI की शुरुआत | वर्ष 2006 |
| प्रकार | समग्र (Composite) सूचकांक |
| संकेतकों की संख्या | 4 |
| मुख्य विषय | भूख एवं कुपोषण (Hunger & Malnutrition) |
| प्रमुख संकेतक | अल्पपोषण (Undernourishment), बौनापन (Stunting), क्षीणता (Wasting) एवं बाल मृत्यु दर (Child Mortality) |
भूख एवं कुपोषण से संबंधित सरकारी योजनाएँ और नीतियाँ
भारत में भूख और कुपोषण केवल भोजन की कमी की समस्या नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, शिक्षा, गरीबी, स्वच्छता और सामाजिक असमानता से जुड़ी बहुआयामी चुनौती है। इसी कारण भारत सरकार ने पोषण सुधार के लिए विभिन्न योजनाएँ शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य—
- बच्चों में कुपोषण कम करना,
- महिलाओं और माताओं के स्वास्थ्य में सुधार,
- एनीमिया को नियंत्रित करना,
- खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना
है।
UPSC तथ्य: भारत की पोषण नीति का दृष्टिकोण अब केवल “भोजन उपलब्ध कराना” नहीं बल्कि “पोषण सुरक्षा (Nutrition Security)” सुनिश्चित करना है।
भारत की प्रमुख पोषण योजनाएँ
1. एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) 1975: 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों तथा महिलाओं के पोषण और स्वास्थ्य में सुधार करना। मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय। लाभार्थी: 6 वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ
ICDS की छह प्रमुख सेवाएँ
- पूरक पोषण (Supplementary Nutrition): बच्चों और महिलाओं को अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना।
- टीकाकरण (Immunization): बच्चों को रोगों से बचाना।
- स्वास्थ्य जांच (Health Check-up): स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी।
- रेफरल सेवाएँ (Referral Services): गंभीर मामलों को स्वास्थ्य केंद्रों तक भेजना।
- पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा: माताओं को जागरूक करना।
- प्री-स्कूल शिक्षा: बच्चों के मानसिक विकास में सहायता।
ICDS का कार्यान्वयन: ICDS मुख्य रूप से आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से लागू किया जाता है।
2. पोषण (POSHAN) अभियान 2018: भारत सरकार का प्रमुख पोषण मिशन है। जिसका उद्देश्य भारत में कुपोषण की समस्या को कम करना। POSHAN का पूरा नाम Prime Minister’s Overarching Scheme for Holistic Nourishment हैं। प्रमुख लक्ष्य: बौनापन (Stunting) में कमी लाना, कम वजन (Underweight) में कमी लाना, महिलाओं एवं बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना, एनीमिया (रक्ताल्पता) में कमी लाना
POSHAN Abhiyaan की विशेषताएँ
- जन आंदोलन (Jan Andolan): पोषण को जन भागीदारी से जोड़ना।
- तकनीक आधारित निगरानी: डेटा आधारित मॉनिटरिंग।
- विभिन्न मंत्रालयों का समन्वय: पोषण को बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण से देखना।
3. सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0: पोषण सेवाओं को मजबूत करने के लिए शुरू किया गया। उद्देश्य: पोषण सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाना। आंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत करना। बच्चों और महिलाओं के पोषण में सुधार। प्रमुख लाभार्थी: बच्चे, किशोरियाँ, गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली महिलाएँ
4. PM POSHAN योजना: पूरा नाम Pradhan Mantri Poshan Shakti Nirman, पूर्व नाम Mid-Day Meal Scheme शुरुआत: 2021 में नया नाम दिया गया। उद्देश्य: स्कूल जाने वाले बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना। लाभार्थी: सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चे।
PM POSHAN के लाभ
- पोषण सुधार: बच्चों को पौष्टिक भोजन।
- स्कूल उपस्थिति बढ़ाना: भोजन प्रोत्साहन के रूप में कार्य करता है।
- सामाजिक समानता: सभी बच्चों को समान भोजन उपलब्ध।
5. एनीमिया मुक्त भारत अभियान: शुरुआत 2018 उद्देश्य: भारत में एनीमिया की समस्या को कम करना। लक्षित समूह: बच्चे, किशोर, महिलाएँ, गर्भवती महिलाएँ
प्रमुख रणनीतियाँ
- आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंट
- कृमि नियंत्रण
- पोषण जागरूकता
- परीक्षण और उपचार
6. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): उद्देश्य- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सहायता प्रदान करना। महत्व: मातृ पोषण सुधार, कम जन्म वजन में कमी, स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा
7. खाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification): खाद्य पदार्थों में आवश्यक पोषक तत्वों को जोड़ना।
उदाहरण
| खाद्य पदार्थ | मिलाया जाने वाला तत्व |
|---|---|
| नमक | आयोडीन |
| चावल | आयरन आदि |
| दूध | विटामिन D |
पोषण योजनाओं का तुलनात्मक अध्ययन
| योजना | शुरुआत | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) | 1975 | बच्चों एवं महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य एवं प्रारंभिक बाल विकास को बढ़ावा देना |
| पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan) | 2018 | कुपोषण में कमी लाना एवं पोषण स्तर में सुधार करना |
| पीएम पोषण योजना (PM POSHAN) | 2021 | स्कूली बच्चों को पौष्टिक मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराना |
| एनीमिया मुक्त भारत (Anaemia Mukt Bharat) | 2018 | एनीमिया (रक्ताल्पता) की रोकथाम एवं नियंत्रण |
| प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) | 2017 | गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को मातृत्व सहायता प्रदान करना |
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
प्रश्न 1. ICDS योजना मुख्य रूप से किसके लिए है?
(A) केवल किसानों के लिए
(B) बच्चों और महिलाओं के पोषण के लिए
(C) उद्योगों के लिए
(D) केवल वृद्ध लोगों के लिए
उत्तर: (B)
प्रश्न 2 POSHAN Abhiyaan का मुख्य उद्देश्य है—
(A) कृषि निर्यात बढ़ाना
(B) कुपोषण कम करना
(C) औद्योगिक उत्पादन बढ़ाना
(D) रोजगार देना
उत्तर: (B)
UPSC के भ्रमित करने वाले तथ्य
Trap 1 PM POSHAN = केवल पोषण योजना ❌ अधूरा
यह स्कूल उपस्थिति और सामाजिक समानता से भी जुड़ी है।
Trap 2 ICDS केवल बच्चों के लिए है। ❌ गलत
इसमें माताएँ भी शामिल हैं।
Trap 3 Food Fortification = भोजन की मात्रा बढ़ाना ❌ गलत
यह पोषक तत्वों की गुणवत्ता बढ़ाना है।
Quick Revision Box
| तथ्य | याद रखें |
|---|---|
| समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) | 1975 |
| पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan) | 2018 |
| पीएम पोषण योजना (PM POSHAN) | स्कूली बच्चों का पोषण |
| एनीमिया मुक्त भारत (Anaemia Mukt Bharat) | आयरन (लौह) की कमी से होने वाले एनीमिया की रोकथाम |
| खाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification) | खाद्य पदार्थों में आवश्यक पोषक तत्वों का समावेशन (Nutrient Addition) |
महत्वपूर्ण संस्थाएँ
| संस्था | कार्य |
|---|---|
| WHO | स्वास्थ्य एवं पोषण मानक |
| FAO | खाद्य एवं कृषि |
| UNICEF | बच्चों का पोषण |
| World Bank | गरीबी एवं विकास |
| NITI Aayog | भारत की नीति निर्माण |
Last Minute Revision Notes
याद रखने योग्य तथ्य
- भूख और कुपोषण गरीबी के प्रमुख परिणाम हैं।
- Hidden Hunger Micronutrient deficiency से संबंधित है।
- Stunting दीर्घकालिक कुपोषण का संकेत है।
- Wasting तीव्र कुपोषण का संकेत है।
- Underweight एक मिश्रित संकेतक है।
- Iron deficiency भारत में एनीमिया का प्रमुख कारण है।
- GHI भूख और पोषण स्थिति को मापता है।
- ICDS की शुरुआत 1975 में हुई।
- POSHAN Abhiyaan 2018 में शुरू हुआ।
- Food Security में चार आयाम होते हैं।
Key Takeaways
- गरीबी भूख और कुपोषण का प्रमुख कारण है।
- भोजन की उपलब्धता और पोषण सुरक्षा अलग अवधारणाएँ हैं।
- Hidden Hunger सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी है।
- Stunting लंबी अवधि की समस्या है।
- Wasting अचानक पोषण कमी दर्शाता है।
- Underweight उम्र आधारित संकेतक है।
- एनीमिया का प्रमुख कारण आयरन की कमी है।
- GHI भूख की वैश्विक स्थिति मापता है।
- ICDS भारत की पुरानी पोषण योजना है।
- POSHAN Abhiyaan एक मिशन मोड कार्यक्रम है।
- PM POSHAN बच्चों के स्कूल पोषण से जुड़ा है।
- Food Fortification पोषण गुणवत्ता बढ़ाता है।
- मातृ पोषण बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
- स्वच्छता और स्वास्थ्य पोषण से जुड़े हैं।
- कुपोषण मानव पूंजी विकास को प्रभावित करता है।
भूख और कुपोषण भारत के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं। UPSC Prelims के दृष्टिकोण से इनकी अवधारणाओं, सूचकांकों और सरकारी पहलों को समझना आवश्यक है।
गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना सतत मानव विकास की आधारशिला है।
📚 गरीबी (Poverty) UPSC Notes – इस अध्याय के सभी भाग
यदि आप UPSC Prelims Economy की पूरी तैयारी करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए सभी भाग क्रमवार पढ़ें।
✅ 1. गरीबी की अवधारणा (पूरा पढ़ें)
- गरीबी का अर्थ
- निरपेक्ष गरीबी
- सापेक्ष गरीबी
- अत्यधिक गरीबी
- बहुआयामी गरीबी
👉 यह पोस्ट पढ़ें →गरीबी UPSC Notes in Hindi | Poverty Concepts & Schemes
✅ 2. भारत में गरीबी का मापन (पूरा पढ़ें)
- गरीबी का मापन
- गरीबी रेखा
- कैलोरी आधारित दृष्टिकोण
- लकड़ावाला समिति
- तेंदुलकर समिति
- रंगराजन समिति
- World Bank Poverty Line
- PPP
- MPI
- HDI
👉 यह पोस्ट पढ़ें →भारत में गरीबी का मापन (Poverty Measurement in India) UPSC Notes in Hindi | लकड़ावाला, तेंदुलकर, रंगराजन समिति, MPI, HDI
✅ 3. गरीबी मापन के संकेतक (पूरा पढ़ें)
- गरीबी अनुपात (Head Count Ratio)
- Poverty Gap
- Poverty Severity
- उपभोग व्यय आधारित मापन
👉 यह पोस्ट पढ़ें → गरीबी मापन के संकेतक (Indicators of Poverty Measurement) | HCR, Poverty Gap, Poverty Severity, MPCE Notes in Hindi
✅ 4. गरीबी के कारण (पूरा पढ़ें)
- बेरोजगारी
- अशिक्षा
- निम्न आय
- मुद्रास्फीति
- जनसंख्या वृद्धि
- कृषि पर अत्यधिक निर्भरता
- क्षेत्रीय असमानता
- सामाजिक असमानता
👉 यह पोस्ट पढ़ें → गरीबी के कारण एवं समाधान | UPSC Economy Notes in Hindi
✅ 5. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम (पूरा पढ़ें)
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम
- अंत्योदय अन्न योजना
👉 यह पोस्ट पढ़ें → गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम (Poverty Alleviation Programmes) UPSC Notes in Hindi | MGNREGA, NRLM, NFSA, PMGKAY, AAY
📖 6. भूख एवं कुपोषण (आप अभी यही पोस्ट पढ़ रहे हैं)
- कुपोषण
- अल्पपोषण
- बौनापन (Stunting)
- क्षीणता (Wasting)
- कम वजन
- एनीमिया
- वैश्विक भूख सूचकांक
FAQ
Q1. भूख (Hunger) क्या है?
उत्तर: जब किसी व्यक्ति को अपनी ऊर्जा और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त भोजन प्राप्त नहीं होता, तो उसे भूख कहते हैं।
Q2. खाद्य सुरक्षा (Food Security) के चार प्रमुख आयाम कौन-से हैं?
उत्तर: खाद्य सुरक्षा के चार प्रमुख आयाम हैं— उपलब्धता (Availability), पहुँच (Access), उपयोग (Utilization) तथा स्थिरता (Stability)।
Q3. Hidden Hunger क्या है?
उत्तर: जब व्यक्ति को पर्याप्त कैलोरी मिलती है लेकिन आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) नहीं मिलते, तो इसे Hidden Hunger कहते हैं।
Q4. Stunting और Wasting में क्या अंतर है?
उत्तर: Stunting दीर्घकालिक (Chronic) कुपोषण का संकेतक है जबकि Wasting तीव्र (Acute) कुपोषण का संकेतक है।
Q5. Global Hunger Index (GHI) किन संकेतकों पर आधारित है?
उत्तर: GHI चार संकेतकों—Undernourishment, Child Wasting, Child Stunting तथा Child Mortality—पर आधारित समग्र सूचकांक है।
Q6. भारत में कुपोषण कम करने के लिए प्रमुख सरकारी योजनाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर: प्रमुख योजनाओं में ICDS, POSHAN Abhiyaan, Saksham Anganwadi and POSHAN 2.0, PM POSHAN, Anaemia Mukt Bharat तथा PMMVY शामिल हैं।


