गरीबी (Poverty) UPSC Notes in Hindi | अवधारणा, मापन, समितियाँ एवं योजनाएँ
गरीबी की अवधारणा (Concept of Poverty) भारतीय अर्थव्यवस्था तथा UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। UPSC केवल गरीबी की परिभाषा नहीं पूछता, बल्कि गरीबी के विभिन्न प्रकार, उसके मापन के आधार, बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty), अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा प्रयुक्त मानकों तथा सरकारी नीतियों से जुड़े अवधारणात्मक प्रश्न पूछता है।
यदि किसी अभ्यर्थी को गरीबी का अर्थ, निरपेक्ष गरीबी, सापेक्ष गरीबी, अत्यधिक गरीबी एवं बहुआयामी गरीबी का स्पष्ट ज्ञान है, तो वह भारतीय अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास, मानव विकास, सतत विकास (SDGs) तथा सरकारी योजनाओं से जुड़े अनेक प्रश्नों को आसानी से हल कर सकता है।
इन नोट्स में केवल “गरीबी की अवधारणा” को UPSC Prelims के दृष्टिकोण से विस्तारपूर्वक समझाया गया है।
इन नोट्स से आप क्या सीखेंगे? (What You Will Learn)
इस लेख के अध्ययन के बाद आप—
- गरीबी की सही अवधारणा समझ पाएंगे।
- गरीबी के विभिन्न प्रकारों में अंतर कर पाएंगे।
- UPSC द्वारा पूछे जाने वाले Conceptual प्रश्नों को हल कर पाएंगे।
- निरपेक्ष एवं सापेक्ष गरीबी में अंतर समझेंगे।
- बहुआयामी गरीबी की आवश्यकता जानेंगे।
- Extreme Poverty एवं Multidimensional Poverty के बीच अंतर समझेंगे।
- UPSC की Elimination Technique सीखेंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
गरीबी मानव सभ्यता जितनी पुरानी समस्या है। प्राचीन काल में गरीबी का अर्थ केवल भोजन और जीवन-निर्वाह की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति न होना माना जाता था। औद्योगिक क्रांति के बाद आय असमानता बढ़ी, जिससे गरीबी का अध्ययन केवल भोजन तक सीमित न रहकर आय एवं जीवन स्तर से जुड़ गया। 20वीं शताब्दी में संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक तथा विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने गरीबी को व्यापक सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण से समझना प्रारम्भ किया। 21वीं शताब्दी में गरीबी की अवधारणा और विकसित हुई तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, आवास एवं जीवन की गुणवत्ता को भी गरीबी का हिस्सा माना जाने लगा। यही आधुनिक अवधारणा बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) कहलाती है।
गरीबी का अर्थ (Meaning of Poverty)
गरीबी वह स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति या परिवार अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम नहीं होता। इन आवश्यकताओं में केवल भोजन ही नहीं बल्कि—
- पर्याप्त पोषण
- वस्त्र
- आवास
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- स्वच्छ पेयजल
- स्वच्छता
- ऊर्जा
- सम्मानजनक जीवन
भी शामिल हैं।
अर्थात—
गरीबी केवल आय की कमी नहीं बल्कि अवसरों, संसाधनों तथा जीवन की गुणवत्ता की कमी भी है।
सरल उदाहरण
यदि किसी व्यक्ति की आय पर्याप्त है लेकिन उसके गाँव में—
- अस्पताल नहीं है
- विद्यालय नहीं है
- शौचालय नहीं है
- स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है
तो आधुनिक दृष्टिकोण में वह व्यक्ति अनेक आयामों में गरीब माना जा सकता है।
गरीबी की परिभाषाएँ (Definitions of Poverty)
सामान्य परिभाषा: गरीबी वह अवस्था है जिसमें व्यक्ति अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाता।
विश्व बैंक (Conceptual Definition): विश्व बैंक गरीबी को न्यूनतम जीवन स्तर प्राप्त करने हेतु आवश्यक संसाधनों की कमी के रूप में देखता है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार: गरीबी केवल आय का अभाव नहीं बल्कि विकल्पों (Choices), अवसरों (Opportunities), सम्मान (Dignity) तथा मानव विकास की कमी भी है।
अमर्त्य सेन (Capability Approach): गरीबी का वास्तविक अर्थ है Capabilities (क्षमताओं) का अभाव। यदि व्यक्ति—
- शिक्षित नहीं है
- स्वस्थ नहीं है
- सामाजिक अवसरों से वंचित है
तो वह गरीब माना जाएगा, चाहे उसकी आय कुछ सीमा तक पर्याप्त क्यों न हो।
UPSC Fact : आज विश्व स्तर पर गरीबी को समझने के लिए केवल आय पर्याप्त नहीं मानी जाती। अब शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जीवन स्तर को भी समान महत्व दिया जाता है।
गरीबी की प्रमुख विशेषताएँ (Characteristics of Poverty)
1. न्यून आय: आय जीवन-निर्वाह के लिए पर्याप्त नहीं होती।
2. न्यून उपभोग: भोजन, कपड़ा एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त उपभोग नहीं हो पाता।
3. कुपोषण: पोषण स्तर कम होने से स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
4. निम्न जीवन स्तर: स्वच्छ आवास, बिजली, शौचालय एवं सुरक्षित पेयजल का अभाव रहता है।
5. शिक्षा का अभाव: गरीबी और अशिक्षा एक-दूसरे को बढ़ावा देते हैं।
6. स्वास्थ्य सेवाओं की कमी: उचित चिकित्सा न मिलने से गरीबी और गहरी होती है।
7. सामाजिक बहिष्करण: गरीब वर्ग अनेक सामाजिक एवं आर्थिक अवसरों से वंचित रहता है।
8. पीढ़ी-दर-पीढ़ी गरीबी: गरीबी अक्सर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चली जाती है।
गरीबी की अवधारणा का विकास (Evolution of Poverty Concept)
| समय | प्रमुख अवधारणा |
|---|---|
| प्रारंभिक काल | भोजन की कमी |
| औद्योगिक युग | आय की कमी |
| 20वीं शताब्दी | आय + उपभोग |
| 1990 के बाद | मानव विकास |
| वर्तमान | बहुआयामी गरीबी |
क्यों बदलती गई गरीबी की अवधारणा?
पहले माना जाता था यदि व्यक्ति के पास भोजन है तो वह गरीब नहीं है। लेकिन बाद में पाया गया—
- स्कूल नहीं
- अस्पताल नहीं
- स्वच्छ पानी नहीं
- रोजगार नहीं
- बिजली नहीं
तो केवल भोजन उपलब्ध होने के बावजूद जीवन की गुणवत्ता खराब रहती है। इसी कारण गरीबी की अवधारणा आय से आगे बढ़कर मानव विकास आधारित हो गई।
UPSC Prelims Perspective
UPSC निम्न प्रकार के प्रश्न पूछ सकता है—
- गरीबी की आधुनिक अवधारणा किस पर आधारित है?
- Capability Approach किसने दिया?
- आय आधारित गरीबी और बहुआयामी गरीबी में अंतर।
- कौन-सा कथन गरीबी के बारे में सही है?
- कौन-सा कथन आधुनिक गरीबी की अवधारणा को व्यक्त करता है?
Current Affairs Linkage
हाल के वर्षों में भारत में बहुआयामी गरीबी में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इसलिए UPSC अब केवल “गरीबी” नहीं, बल्कि बहुआयामी गरीबी, मानव विकास, SDGs, पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े एकीकृत प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति रखता है।
Revision Box
✔ गरीबी केवल आय की कमी नहीं है।
✔ आधुनिक अवधारणा = शिक्षा + स्वास्थ्य + जीवन स्तर।
✔ अमर्त्य सेन → Capability Approach।
✔ संयुक्त राष्ट्र → अवसरों एवं सम्मान की कमी भी गरीबी।
✔ UPSC अक्सर Concept आधारित Statement Questions पूछता है।
गरीबी की अवधारणा — निरपेक्ष गरीबी, सापेक्ष गरीबी एवं अत्यधिक गरीबी
निरपेक्ष गरीबी (Absolute Poverty) वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी जीवन-निर्वाह की न्यूनतम आवश्यकताओं (Minimum Basic Needs) को भी पूरा नहीं कर पाता। इन आवश्यकताओं में सामान्यतः शामिल हैं—
- पर्याप्त भोजन
- न्यूनतम कैलोरी
- वस्त्र
- आवास
- स्वच्छ पेयजल
- बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएँ
- आवश्यक जीवनोपयोगी वस्तुएँ
अर्थात् व्यक्ति का जीवन स्तर न्यूनतम मानक (Minimum Standard of Living) से नीचे होता है।
परिभाषा
निरपेक्ष गरीबी वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति न्यूनतम जीवन-निर्वाह के लिए आवश्यक संसाधनों से भी वंचित हो।
प्रमुख विशेषताएँ
- न्यूनतम आवश्यकताओं पर आधारित।
- एक निश्चित गरीबी रेखा (Poverty Line) से मापी जाती है।
- आय या उपभोग व्यय के आधार पर निर्धारण।
- विकासशील देशों में अधिक प्रचलित।
- समय-समय पर गरीबी रेखा में संशोधन संभव।
उदाहरण
यदि किसी देश में यह निर्धारित किया गया है कि प्रतिदिन ₹X से कम व्यय करने वाला व्यक्ति अपनी न्यूनतम आवश्यकताएँ पूरी नहीं कर सकता, तो उस सीमा से नीचे रहने वाले व्यक्ति निरपेक्ष गरीब माने जाएँगे।
भारत के संदर्भ में
भारत में लंबे समय तक गरीबी का आकलन उपभोग व्यय आधारित गरीबी रेखा के माध्यम से किया जाता रहा है। विभिन्न समितियों (लकड़ावाला, तेंदुलकर, रंगराजन) ने समय-समय पर गरीबी रेखा के निर्धारण की पद्धति में परिवर्तन सुझाए। (इन समितियों का विस्तृत अध्ययन अगले उप-विषय “गरीबी का मापन” में किया जाएगा।)
UPSC Prelims Perspective
UPSC यह पूछ सकता है—
निरपेक्ष गरीबी किस पर आधारित होती है?
- न्यूनतम आवश्यकताएँ ✔
- समाज की औसत आय ❌
- आय असमानता ❌
- केवल संपत्ति का स्वामित्व ❌
सापेक्ष गरीबी (Relative Poverty)
सापेक्ष गरीबी (Relative Poverty) वह स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति की आय या जीवन स्तर समाज के अन्य लोगों की तुलना में काफी कम होता है। यहाँ मुख्य आधार तुलना (Comparison) है।
परिभाषा
जब किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति समाज के औसत या मध्य (Median) स्तर की तुलना में काफी निम्न हो, तो उसे सापेक्ष गरीबी कहते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
- समाज की आय असमानता को दर्शाती है।
- गरीबी रेखा प्रत्येक देश में अलग हो सकती है।
- विकसित देशों में अधिक उपयोगी अवधारणा।
- सामाजिक बहिष्करण (Social Exclusion) से जुड़ी।
उदाहरण
मान लीजिए—
- देश A में औसत मासिक आय ₹1,00,000 है।
- कोई व्यक्ति ₹35,000 प्रतिमाह कमाता है।
वह भूखा नहीं है, लेकिन समाज के औसत स्तर की तुलना में काफी पीछे है। ऐसी स्थिति सापेक्ष गरीबी कहलाती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
कोई व्यक्ति सापेक्ष गरीब हो सकता है, लेकिन निरपेक्ष गरीब नहीं। उदाहरण— एक विकसित देश में रहने वाला व्यक्ति भोजन, स्वास्थ्य और शिक्षा प्राप्त कर रहा है, फिर भी यदि उसकी आय समाज के अधिकांश लोगों से बहुत कम है, तो वह सापेक्ष गरीबी की श्रेणी में आ सकता है।
UPSC Concept
सापेक्ष गरीबी का संबंध आय असमानता (Income Inequality) से अधिक है, न कि केवल भूख या भोजन की उपलब्धता से।
अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty)
अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) गरीबी का सबसे गंभीर रूप है। इस स्थिति में व्यक्ति अपनी बुनियादी आवश्यकताओं—जैसे पर्याप्त भोजन, सुरक्षित पेयजल, बुनियादी स्वास्थ्य सेवा और आश्रय—की पूर्ति भी नहीं कर पाता।
अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण
विश्व स्तर पर अत्यधिक गरीबी का आकलन प्रायः विश्व बैंक की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा (International Poverty Line) के आधार पर किया जाता है। समय-समय पर इसकी सीमा क्रय-शक्ति समता (PPP) के अनुसार संशोधित की जाती है। (वर्तमान सीमा का विस्तृत अध्ययन अगले उप-विषय “विश्व बैंक गरीबी रेखा” में किया जाएगा।)
विशेषताएँ
- कुपोषण का उच्च स्तर
- भुखमरी का जोखिम
- शिक्षा से वंचित
- स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
- अत्यधिक सामाजिक एवं आर्थिक असुरक्षा
उदाहरण
युद्धग्रस्त क्षेत्रों, भीषण सूखा प्रभावित क्षेत्रों या लंबे समय तक सामाजिक-आर्थिक संकट झेल रहे समुदायों में अत्यधिक गरीबी देखने को मिल सकती है।
निरपेक्ष, सापेक्ष एवं अत्यधिक गरीबी में अंतर
| आधार | निरपेक्ष गरीबी | सापेक्ष गरीबी | अत्यधिक गरीबी |
|---|---|---|---|
| आधार | न्यूनतम आवश्यकताएँ | समाज से तुलना | न्यूनतम आवश्यकताओं से भी बहुत नीचे |
| तुलना | निश्चित गरीबी रेखा | समाज की औसत आय/जीवन स्तर | अंतरराष्ट्रीय न्यूनतम जीवन स्तर |
| प्रमुख उद्देश्य | जीवन-निर्वाह का आकलन | असमानता का आकलन | सबसे वंचित आबादी की पहचान |
| अधिक उपयोग | विकासशील देश | विकसित देश | वैश्विक तुलना |
| मुख्य संकेत | भोजन, वस्त्र, आवास | आय एवं सामाजिक स्थिति | भुखमरी, गंभीर अभाव |
UPSC Elimination Technique
यदि विकल्पों में निम्न शब्द दिखाई दें—
- तुलना (Comparison)
- आय असमानता (Income Inequality)
- मध्य आय (Median Income)
➡️ तो उत्तर प्रायः सापेक्ष गरीबी (Relative Poverty) से संबंधित होगा।
यदि विकल्पों में निम्न शब्द दिखाई दें—
- न्यूनतम आवश्यकताएँ (Minimum Needs)
- मूलभूत आवश्यकताएँ (Basic Necessities)
- गरीबी रेखा (Poverty Line)
➡️ तो उत्तर प्रायः निरपेक्ष गरीबी (Absolute Poverty) की ओर संकेत करेगा।
यदि प्रश्न में निम्न संकेत मिलें—
- भुखमरी (Starvation)
- गंभीर वंचना (Severe Deprivation)
- जीवन-निर्वाह की मूलभूत आवश्यकताएँ (Basic Survival)
- अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा (International Poverty Line)
➡️ तो उत्तर प्रायः अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) से संबंधित होने की संभावना अधिक होती है।
Quick Revision Box
✔ निरपेक्ष गरीबी = न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं।
✔ सापेक्ष गरीबी = समाज की तुलना में कम आय/जीवन स्तर।
✔ अत्यधिक गरीबी = जीवन-निर्वाह की मूलभूत आवश्यकताओं का भी गंभीर अभाव।
✔ सापेक्ष गरीबी का संबंध असमानता से है।
✔ निरपेक्ष गरीबी का संबंध गरीबी रेखा से है।
बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) | आय आधारित गरीबी बनाम बहुआयामी गरीबी
बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) वह स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति केवल आय की कमी से ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर जैसी अनेक आवश्यक सुविधाओं से भी वंचित होता है।
दूसरे शब्दों में—
जब किसी व्यक्ति के जीवन के कई महत्वपूर्ण आयामों (Dimensions) में अभाव हो, तो उसे बहुआयामी गरीबी कहते हैं।
यह आधुनिक समय में गरीबी को समझने का सबसे व्यापक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण माना जाता है।
बहुआयामी गरीबी की आवश्यकता क्यों पड़ी?
पहले गरीबी का निर्धारण केवल आय या उपभोग व्यय के आधार पर किया जाता था।
लेकिन समय के साथ यह स्पष्ट हुआ कि—
- अधिक आय होने के बावजूद व्यक्ति अशिक्षित हो सकता है।
- आय होने पर भी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध न हों।
- भोजन उपलब्ध होने पर भी कुपोषण हो सकता है।
- आय होने के बावजूद स्वच्छ पेयजल या शौचालय का अभाव हो सकता है।
अतः केवल आय किसी व्यक्ति के वास्तविक जीवन स्तर को नहीं दर्शाती।
अमर्त्य सेन का Capability Approach
नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने गरीबी को समझने के लिए Capability Approach (क्षमता दृष्टिकोण) प्रस्तुत किया।
मुख्य विचार
गरीबी का वास्तविक अर्थ केवल धन की कमी नहीं है, बल्कि व्यक्ति की उन क्षमताओं (Capabilities) का अभाव है जिनसे वह सम्मानपूर्वक जीवन जी सके। इन क्षमताओं में शामिल हैं—
- शिक्षित होना
- स्वस्थ रहना
- पोषण प्राप्त करना
- सुरक्षित जीवन जीना
- सामाजिक एवं आर्थिक अवसर प्राप्त करना
UPSC तथ्य: Capability Approach ने आधुनिक मानव विकास (Human Development) और बहुआयामी गरीबी की अवधारणा को गहराई से प्रभावित किया।
बहुआयामी गरीबी के प्रमुख आयाम
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुआयामी गरीबी का आकलन मुख्यतः तीन प्रमुख आयामों के आधार पर किया जाता है—
| प्रमुख आयाम | उदाहरण |
|---|---|
| स्वास्थ्य (Health) | पोषण, बाल मृत्यु |
| शिक्षा (Education) | स्कूली शिक्षा के वर्ष, विद्यालय में उपस्थिति |
| जीवन स्तर (Living Standard) | बिजली, स्वच्छ ईंधन, आवास, पेयजल, स्वच्छता, संपत्ति |
बहुआयामी गरीबी की प्रमुख विशेषताएँ
- केवल आय पर आधारित नहीं।
- जीवन की गुणवत्ता का समग्र आकलन करती है।
- सामाजिक विकास का बेहतर संकेतक।
- नीति निर्माण में अधिक उपयोगी।
- सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप।
आय आधारित गरीबी बनाम बहुआयामी गरीबी
| आधार | आय आधारित गरीबी | बहुआयामी गरीबी |
|---|---|---|
| मुख्य आधार | आय या उपभोग व्यय | शिक्षा + स्वास्थ्य + जीवन स्तर |
| मापन | एक आय सीमा | अनेक संकेतक |
| उद्देश्य | आर्थिक अभाव का आकलन | समग्र मानव विकास का आकलन |
| सीमाएँ | जीवन की वास्तविक गुणवत्ता नहीं बताती | अधिक व्यापक एवं यथार्थवादी |
| उपयोग | पारंपरिक गरीबी मापन | आधुनिक नीति निर्माण |
उदाहरण
➡️ एक परिवार की आय पर्याप्त है, लेकिन—
- बच्चे विद्यालय नहीं जाते।
- घर में शौचालय नहीं है।
- स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं।
- परिवार कुपोषित है।
निष्कर्ष: यह परिवार आय के आधार पर गरीब न हो, फिर भी बहुआयामी गरीबी से प्रभावित हो सकता है।
➡️ दूसरे परिवार की आय कम है, लेकिन—
- सभी बच्चे शिक्षित हैं।
- स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हैं।
- स्वच्छ पानी एवं शौचालय है।
ऐसे परिवार की स्थिति पहले परिवार से बेहतर हो सकती है।
भारत के संदर्भ में बहुआयामी गरीबी
भारत ने हाल के वर्षों में बहुआयामी गरीबी में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। इसका प्रमुख कारण—
- शिक्षा तक पहुँच में सुधार
- स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
- स्वच्छ भारत मिशन
- जल जीवन मिशन
- उज्ज्वला योजना
- विद्युत एवं आवास योजनाओं का विस्तार
रहे हैं।
UPSC ध्यान दें: योजनाओं के नाम याद रखना पर्याप्त नहीं है; यह समझना अधिक महत्वपूर्ण है कि वे बहुआयामी गरीबी के किस आयाम को प्रभावित करती हैं।
बहुआयामी गरीबी और सतत विकास लक्ष्य (SDGs)
बहुआयामी गरीबी सीधे निम्न SDGs से संबंधित है—
- SDG 1 – गरीबी का अंत (No Poverty)
- SDG 2 – भूखमरी का अंत (Zero Hunger)
- SDG 3 – अच्छा स्वास्थ्य
- SDG 4 – गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
- SDG 6 – स्वच्छ जल एवं स्वच्छता
UPSC Prelims Trend Analysis
पिछले वर्षों में UPSC ने निम्न अवधारणाओं पर विशेष ध्यान दिया है—
- बहुआयामी गरीबी बनाम आय आधारित गरीबी
- Capability Approach
- मानव विकास
- SDGs
- स्वास्थ्य एवं शिक्षा संकेतक
- सामाजिक विकास से जुड़े सूचकांक
अतः केवल परिभाषा याद करना पर्याप्त नहीं है; अवधारणाओं के बीच संबंध समझना अधिक आवश्यक है।
Frequently Confused Concepts
| अवधारणा | मुख्य आधार |
|---|---|
| निरपेक्ष गरीबी | न्यूनतम आवश्यकताएँ |
| सापेक्ष गरीबी | समाज से तुलना |
| अत्यधिक गरीबी | अत्यंत गंभीर अभाव |
| बहुआयामी गरीबी | शिक्षा + स्वास्थ्य + जीवन स्तर |
UPSC Elimination Technique
यदि प्रश्न में निम्न शब्द दिखाई दें—
- स्वास्थ्य (Health)
- शिक्षा (Education)
- जीवन स्तर (Living Standard)
- वंचना (Deprivation)
- मानव विकास (Human Development)
➡️ तो उत्तर प्रायः बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) से संबंधित होगा।
यदि प्रश्न में केवल निम्न का उल्लेख हो—
- आय (Income)
- उपभोग (Consumption)
- गरीबी रेखा (Poverty Line)
➡️ तो प्रश्न प्रायः आय-आधारित गरीबी (Income-based Poverty) पर केंद्रित होगा।
Revision Box
याद रखने योग्य तथ्य
- बहुआयामी गरीबी = शिक्षा + स्वास्थ्य + जीवन स्तर।
- आय गरीबी का केवल एक आयाम है।
- अमर्त्य सेन → Capability Approach।
- आधुनिक नीति निर्माण में बहुआयामी दृष्टिकोण अधिक उपयोगी।
- UPSC अवधारणात्मक तुलना पर प्रश्न पूछना पसंद करता है।
One-Page Revision Sheet
| अवधारणा | एक पंक्ति में |
|---|---|
| गरीबी | न्यूनतम आवश्यकताओं एवं अवसरों का अभाव |
| निरपेक्ष गरीबी | गरीबी रेखा से नीचे |
| सापेक्ष गरीबी | समाज की तुलना में कम आय |
| अत्यधिक गरीबी | जीवन-निर्वाह की मूलभूत आवश्यकताओं का भी अभाव |
| बहुआयामी गरीबी | शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में अभाव |
| अमर्त्य सेन | Capability Approach |
गरीबी की अवधारणा | UPSC Revision
भारत से उदाहरण
1. शहरी झुग्गी बस्तियाँ: कई परिवारों की आय होने के बावजूद—
- सुरक्षित आवास नहीं
- स्वच्छ जल का अभाव
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव
- स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुँच
यह स्थिति बहुआयामी गरीबी को दर्शाती है।
2. दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र: कई क्षेत्रों में आजीविका मुख्यतः कृषि या वन उत्पादों पर निर्भर है। सड़क, स्वास्थ्य केंद्र और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण विकास की गति धीमी रहती है। यह दर्शाता है कि गरीबी केवल आय का प्रश्न नहीं, बल्कि सेवाओं तक पहुँच (Access) का भी प्रश्न है।
वैश्विक उदाहरण
उप-सहारा अफ्रीका (Sub-Saharan Africa): विश्व के अनेक देशों में आज भी—
- कुपोषण
- स्वच्छ पेयजल का अभाव
- स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
- शिक्षा तक सीमित पहुँच
जैसी समस्याएँ बहुआयामी गरीबी को बढ़ाती हैं।
Case Study: दो परिवार, अलग वास्तविकता
| परिवार A | परिवार B |
|---|---|
| आय अपेक्षाकृत अधिक | आय अपेक्षाकृत कम |
| बच्चे स्कूल नहीं जाते | सभी बच्चे विद्यालय जाते हैं |
| शौचालय नहीं | शौचालय उपलब्ध |
| स्वच्छ जल नहीं | स्वच्छ जल उपलब्ध |
| स्वास्थ्य सुविधाएँ सीमित | प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध |
विश्लेषण: केवल आय देखकर परिवार A को समृद्ध नहीं कहा जा सकता। बहुआयामी दृष्टिकोण से परिवार B कई मामलों में बेहतर स्थिति में हो सकता है।
Previous UPSC Trend Analysis
गरीबी से जुड़े प्रश्नों में UPSC सामान्यतः निम्न क्षेत्रों पर ध्यान देता है—
- गरीबी की अवधारणा
- निरपेक्ष एवं सापेक्ष गरीबी का अंतर
- Capability Approach
- बहुआयामी गरीबी
- मानव विकास
- गरीबी एवं सामाजिक विकास का संबंध
- सरकारी योजनाओं का उद्देश्य
Frequently Confused Concepts
| अवधारणा | भ्रम | सही समझ |
|---|---|---|
| गरीबी | केवल आय की कमी | आय + अवसर + सेवाओं की कमी |
| निरपेक्ष गरीबी | असमानता | न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति न होना |
| सापेक्ष गरीबी | गरीबी रेखा | समाज के औसत स्तर से तुलना |
| अत्यधिक गरीबी | सामान्य गरीबी | अत्यंत गंभीर अभाव |
| बहुआयामी गरीबी | केवल आय | शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जीवन स्तर का संयुक्त आकलन |
UPSC Trap Areas
- “गरीबी” और “आय असमानता” को समान न मानें।
- बहुआयामी गरीबी को केवल आय से न जोड़ें।
- निरपेक्ष गरीबी और अत्यधिक गरीबी समानार्थी नहीं हैं।
- Capability Approach को केवल आय सिद्धांत न समझें।
- “गरीबी रेखा” और “बहुआयामी गरीबी” अलग अवधारणाएँ हैं।
UPSC Elimination Technique
यदि विकल्पों में निम्न तीनों का उल्लेख हो—
- स्वास्थ्य (Health)
- शिक्षा (Education)
- जीवन स्तर (Living Standard)
➡️ तो उत्तर प्रायः बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) की ओर संकेत करेगा।
यदि प्रश्न में निम्न शब्द दिखाई दें—
- न्यूनतम आवश्यकताएँ (Minimum Needs)
- गरीबी रेखा (Poverty Line)
- मूलभूत उपभोग (Basic Consumption)
➡️ तो उत्तर प्रायः निरपेक्ष गरीबी (Absolute Poverty) से संबंधित होने की संभावना अधिक होगी।
Quick Revision Box
एक नज़र में
| विषय | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| गरीबी | केवल आय का अभाव नहीं |
| निरपेक्ष गरीबी | न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं |
| सापेक्ष गरीबी | समाज से तुलना |
| अत्यधिक गरीबी | गंभीर अभाव |
| बहुआयामी गरीबी | स्वास्थ्य + शिक्षा + जीवन स्तर |
| अमर्त्य सेन | Capability Approach |
Last Minute Revision Notes (Prelims)
- गरीबी का आधुनिक दृष्टिकोण बहुआयामी है।
- Capability Approach → अमर्त्य सेन।
- आय गरीबी का केवल एक संकेतक है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य गरीबी के प्रमुख आयाम हैं।
- सामाजिक बहिष्करण भी गरीबी को बढ़ाता है।
- गरीबी और मानव विकास परस्पर जुड़े हुए हैं।
- SDG-1 का उद्देश्य गरीबी का अंत करना है।
- UPSC अवधारणात्मक तुलना वाले प्रश्न पूछता है।
Chapter Summary
गरीबी की अवधारणा समय के साथ केवल आय की कमी से विकसित होकर मानव विकास की व्यापक अवधारणा बन चुकी है। आज किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और जीवन स्तर जैसे अनेक आयामों के आधार पर किया जाता है। यही कारण है कि आधुनिक सार्वजनिक नीति और UPSC दोनों बहुआयामी दृष्टिकोण को अधिक महत्व देते हैं।
Key Takeaways (20 Points)
- गरीबी केवल आय का अभाव नहीं है।
- न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति न होना निरपेक्ष गरीबी है।
- सापेक्ष गरीबी समाज से तुलना पर आधारित है।
- अत्यधिक गरीबी सबसे गंभीर अवस्था है।
- बहुआयामी गरीबी कई प्रकार की वंचनाओं का संयुक्त रूप है।
- स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर इसके प्रमुख आयाम हैं।
- अमर्त्य सेन ने Capability Approach दिया।
- अवसरों की कमी भी गरीबी का कारण है।
- सामाजिक बहिष्करण गरीबी को बढ़ाता है।
- गरीबी मानव विकास को प्रभावित करती है।
- SDG-1 गरीबी उन्मूलन से संबंधित है।
- शिक्षा गरीबी कम करने का प्रमुख साधन है।
- स्वास्थ्य सेवाएँ जीवन स्तर सुधारती हैं।
- केवल आय से वास्तविक विकास नहीं मापा जा सकता।
- गरीबी और असमानता अलग अवधारणाएँ हैं।
- आधुनिक नीतियाँ बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाती हैं।
- UPSC अवधारणात्मक प्रश्न पूछता है।
- तुलना आधारित प्रश्नों में शब्दों पर विशेष ध्यान दें।
- Capability Approach अक्सर Statement आधारित प्रश्नों में आता है।
- गरीबी की सही समझ आगे के उप-विषयों (गरीबी मापन, MPI, HDI आदि) की नींव है।
गरीबी की अवधारणा को समझना UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। आधुनिक समय में गरीबी का अर्थ केवल आय की कमी नहीं, बल्कि मानव विकास के विभिन्न आयामों में वंचना भी है। यदि अभ्यर्थी निरपेक्ष, सापेक्ष, अत्यधिक और बहुआयामी गरीबी के बीच स्पष्ट अंतर समझ लेता है, तो वह न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि सामाजिक विकास, मानव विकास सूचकांक, बहुआयामी गरीबी सूचकांक तथा सरकारी योजनाओं से जुड़े प्रश्नों का भी प्रभावी ढंग से उत्तर दे सकता है।
📚 गरीबी (Poverty) UPSC Notes Series – सभी अध्याय पढ़ें
आपने इस लेख में गरीबी (Poverty) अध्याय के “गरीबी की अवधारणा (Concept of Poverty)” विषय का विस्तृत अध्ययन किया। UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में केवल गरीबी की परिभाषा जानना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गरीबी के मापन, विभिन्न समितियों, अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों, सरकारी योजनाओं, भूख एवं कुपोषण जैसे सभी उप-विषयों की समग्र समझ भी आवश्यक होती है।
इसी उद्देश्य से हमने UPSC प्रीलिम्स – आर्थिक एवं सामाजिक विकास के अंतर्गत गरीबी (Poverty) अध्याय को कई विस्तृत और SEO-अनुकूल नोट्स में विभाजित किया है। प्रत्येक लेख एक विशेष उप-विषय को गहराई से समझाता है, ताकि आप किसी भी अवधारणा को आसानी से समझ सकें और परीक्षा में Statement Based तथा Conceptual Questions को आत्मविश्वास के साथ हल कर सकें।
इस Chapter के अन्य महत्वपूर्ण नोट्स
👉 2. गरीबी का मापन (Measurement of Poverty)
- भारत में गरीबी का मापन
- लकड़ावाला समिति
- तेंदुलकर समिति
- रंगराजन समिति
- विश्व बैंक गरीबी रेखा
- बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI)
- मानव विकास सूचकांक (HDI)
👉 3. गरीबी मापन के प्रमुख संकेतक
- Head Count Ratio (HCR)
- Poverty Gap Index (PGI)
- Poverty Severity Index
- उपभोग व्यय आधारित गरीबी मापन
👉 4. भारत में गरीबी के प्रमुख कारण
- बेरोजगारी
- अशिक्षा
- निम्न आय
- मुद्रास्फीति
- जनसंख्या वृद्धि
- कृषि पर अत्यधिक निर्भरता
- क्षेत्रीय एवं सामाजिक असमानता
👉 5. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम एवं सरकारी योजनाएँ
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM)
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY)
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA)
- अंत्योदय अन्न योजना (AAY)
👉 6. भूख एवं कुपोषण (Hunger & Malnutrition)
- कुपोषण (Malnutrition)
- अल्पपोषण (Undernutrition)
- बौनापन (Stunting)
- क्षीणता (Wasting)
- कम वजन (Underweight)
- एनीमिया (Anaemia)
- वैश्विक भूख सूचकांक (Global Hunger Index)
नोट: ऊपर दिए गए प्रत्येक विषय पर विस्तृत UPSC Prelims Notes उपलब्ध हैं। संबंधित विषय के नाम या नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप उस अध्याय तक सीधे पहुँच सकते हैं।
UPSC Preparation Tip
यदि आप UPSC Prelims Economy Notes in Hindi, गरीबी (Poverty) Notes, भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) तथा Economic & Social Development की सम्पूर्ण तैयारी करना चाहते हैं, तो इस श्रृंखला के सभी नोट्स क्रमवार अवश्य पढ़ें। इससे विषय की अवधारणाएँ (Concepts), विभिन्न समितियाँ, सूचकांक, सरकारी योजनाएँ तथा परीक्षा में पूछे जाने वाले Statement Based Questions की तैयारी एक ही स्थान पर व्यवस्थित रूप से हो जाएगी।
अगला अध्याय पढ़ें: गरीबी का मापन (Measurement of Poverty in India & World) →
FAQ
FAQ 1. गरीबी क्या है?
गरीबी वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी मूलभूत आवश्यकताओं जैसे भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास को पर्याप्त रूप से पूरा नहीं कर पाता।
FAQ 2. गरीबी के कितने प्रकार होते हैं?
मुख्य प्रकार हैं—
- निरपेक्ष गरीबी
- सापेक्ष गरीबी
- अत्यधिक गरीबी
- बहुआयामी गरीबी
FAQ 3. भारत में गरीबी का मापन कैसे किया जाता है?
भारत में पारंपरिक रूप से गरीबी का मापन उपभोग व्यय के आधार पर किया गया है।
FAQ 4. लकड़ावाला समिति किससे संबंधित है?
लकड़ावाला समिति गरीबी मापन से संबंधित थी और उसने कैलोरी आधारित दृष्टिकोण अपनाया।
FAQ 5. तेंदुलकर समिति का महत्व क्या है?
तेंदुलकर समिति ने गरीबी मापन में स्वास्थ्य और शिक्षा खर्च को शामिल किया।
FAQ 6. रंगराजन समिति किस वर्ष बनी?
रंगराजन समिति का गठन 2012 में किया गया और रिपोर्ट 2014 में प्रस्तुत की गई।
FAQ 7. MPI क्या मापता है?
MPI स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के आधार पर बहुआयामी गरीबी को मापता है।
FAQ 8. HDI और MPI में अंतर क्या है?
HDI मानव विकास को मापता है जबकि MPI गरीबी और वंचना को मापता है।
FAQ 9. MGNREGA का उद्देश्य क्या है?
MGNREGA ग्रामीण परिवारों को रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है।
FAQ 10. NFSA 2013 क्या है?
NFSA खाद्य सुरक्षा को कानूनी अधिकार प्रदान करने वाला अधिनियम है।

