भारत में गरीबी का मापन (Poverty Measurement in India) UPSC Notes in Hindi
UPSC प्रारंभिक परीक्षा में भारत में गरीबी का मापन (Poverty Measurement in India) एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इस अध्याय से हर वर्ष गरीबी रेखा (Poverty Line), लकड़ावाला समिति, तेंदुलकर समिति, रंगराजन समिति, उपभोग व्यय (Consumption Expenditure), विश्व बैंक की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा, क्रय-शक्ति समता (PPP), बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) तथा मानव विकास सूचकांक (HDI) जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
इन नोट्स में आपको भारत एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गरीबी मापन की सभी प्रमुख अवधारणाएँ सरल हिंदी में, तुलनात्मक सारणी, Quick Revision, UPSC Trap Points और परीक्षा-उन्मुख तथ्यों के साथ मिलेंगी, जिससे आप Prelims के Conceptual Questions को अधिक आत्मविश्वास के साथ हल कर सकेंगे।
Table of Contents
गरीबी का अध्ययन तब तक अधूरा है जब तक यह स्पष्ट न हो कि किसे गरीब माना जाए और किस आधार पर। इसी उद्देश्य से विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने समय-समय पर गरीबी मापने की अलग-अलग पद्धतियाँ विकसित की हैं। UPSC प्रारंभिक परीक्षा में गरीबी मापन से जुड़े प्रश्न अक्सर समितियों, गरीबी रेखा, उपभोग व्यय, बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI), विश्व बैंक की गरीबी रेखा और HDI जैसे विषयों से पूछे जाते हैं।
गरीबी का मापन वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से यह निर्धारित किया जाता है कि किसी व्यक्ति, परिवार या समुदाय की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति न्यूनतम जीवन-स्तर से नीचे है या नहीं। दूसरे शब्दों में—
गरीबी मापन का उद्देश्य यह पहचानना है कि कौन व्यक्ति या परिवार गरीबी की स्थिति में जीवनयापन कर रहा है।
गरीबी का मापन क्यों आवश्यक है?
गरीबी मापन के बिना सरकार यह नहीं जान सकती कि—
- कितने लोग गरीब हैं।
- कौन-से राज्य या जिले अधिक प्रभावित हैं।
- किन वर्गों को सरकारी सहायता की आवश्यकता है।
- गरीबी उन्मूलन योजनाएँ कितनी प्रभावी हैं।
- समय के साथ गरीबी बढ़ रही है या घट रही है।
गरीबी मापन के प्रमुख उद्देश्य
- गरीब आबादी की पहचान करना।
- गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के लाभार्थियों का चयन।
- सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन।
- राज्यों एवं क्षेत्रों की तुलना।
- राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विकास का आकलन।
- नीति निर्माण के लिए विश्वसनीय आँकड़े उपलब्ध कराना।
भारत में गरीबी मापन का विकास
| अवधि | प्रमुख आधार |
|---|---|
| प्रारंभिक चरण | कैलोरी आवश्यकता |
| बाद का चरण | उपभोग व्यय |
| आधुनिक चरण | व्यापक उपभोग एवं जीवन स्तर |
| वर्तमान वैश्विक प्रवृत्ति | बहुआयामी गरीबी |
ध्यान दें: भारत में गरीबी मापन की पद्धति समय के साथ विकसित हुई है। पहले कैलोरी आधारित दृष्टिकोण प्रमुख था, बाद में उपभोग व्यय आधारित पद्धति को अपनाया गया। बहुआयामी गरीबी का उपयोग मुख्यतः विकास की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है।
गरीबी रेखा क्या है?
गरीबी रेखा (Poverty Line) वह न्यूनतम सीमा है जिसके नीचे रहने वाले व्यक्ति या परिवार को अपनी आवश्यक बुनियादी जरूरतें पूरी करने में कठिनाई होती है।
सरल शब्दों में—
गरीबी रेखा वह आर्थिक सीमा है जो गरीब और गैर-गरीब आबादी के बीच अंतर करने का आधार बनती है।
गरीबी रेखा की विशेषताएँ
- यह एक सांख्यिकीय (Statistical) सीमा है।
- इसका उपयोग नीति निर्माण में किया जाता है।
- समय-समय पर संशोधित की जाती है।
- महँगाई (Inflation) के अनुसार परिवर्तन संभव है।
- विभिन्न देशों में अलग-अलग हो सकती है।
गरीबी रेखा का महत्व
- सरकारी योजनाओं के लक्षित लाभार्थी तय करने में सहायता।
- गरीबी अनुपात (Head Count Ratio) निकालने में उपयोग।
- राज्यों की तुलना।
- समय के साथ गरीबी में परिवर्तन का आकलन।
- आर्थिक नीतियों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन।
क्या गरीबी रेखा ही गरीबी का पूर्ण माप है?
नहीं। गरीबी रेखा केवल एक आर्थिक सीमा बताती है। यह निम्न बातों का पूर्ण आकलन नहीं करती—
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- स्वच्छता
- आवास की गुणवत्ता
- सामाजिक सुरक्षा
- जीवन की गुणवत्ता
इसी कारण आधुनिक समय में बहुआयामी गरीबी की अवधारणा को अधिक महत्व दिया गया है।
कैलोरी आधारित दृष्टिकोण (Calorie-Based Approach)
भारत में प्रारंभिक वर्षों में गरीबी का निर्धारण मुख्यतः इस आधार पर किया जाता था कि कोई व्यक्ति न्यूनतम आवश्यक कैलोरी प्राप्त कर पा रहा है या नहीं। यदि व्यक्ति आवश्यक ऊर्जा (Calories) प्राप्त करने में असफल रहता था, तो उसे गरीब माना जाता था।
इस दृष्टिकोण का आधार
मानव शरीर को कार्य करने के लिए न्यूनतम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा भोजन से प्राप्त कैलोरी के रूप में मिलती है। इसलिए प्रारंभिक अर्थशास्त्रियों ने माना कि—
यदि व्यक्ति न्यूनतम कैलोरी भी प्राप्त नहीं कर पा रहा है, तो वह गरीबी की स्थिति में है।
कैलोरी आधारित दृष्टिकोण की विशेषताएँ
- भोजन को गरीबी का प्रमुख संकेतक माना गया।
- ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लिए अलग ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया।
- उपभोग व्यय का अनुमान कैलोरी आवश्यकता से जोड़ा गया।
- प्रारंभिक गरीबी रेखा निर्धारण में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस दृष्टिकोण की सीमाएँ
समय के साथ यह स्पष्ट हुआ कि—
- केवल भोजन पर्याप्त नहीं है।
- स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ा।
- शिक्षा पर खर्च बढ़ा।
- परिवहन एवं संचार की आवश्यकता बढ़ी।
- शहरी जीवन की लागत बदल गई।
इसलिए केवल कैलोरी के आधार पर गरीबी मापना पर्याप्त नहीं माना गया।
उदाहरण
दो व्यक्तियों की कल्पना करें—
- व्यक्ति A- पर्याप्त कैलोरी प्राप्त करता है। लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ नहीं हैं।
- व्यक्ति B- संतुलित भोजन कम है। लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध है।
सिर्फ कैलोरी के आधार पर इन दोनों की वास्तविक जीवन-स्थिति का सही आकलन नहीं किया जा सकता।
UPSC तथ्य
कैलोरी आधारित दृष्टिकोण गरीबी मापन का प्रारंभिक आधार था, लेकिन आधुनिक समय में इसे अकेले पर्याप्त नहीं माना जाता।
Quick Revision
| विषय | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| गरीबी मापन | गरीब आबादी की पहचान की प्रक्रिया |
| गरीबी रेखा | न्यूनतम आर्थिक सीमा |
| प्रारंभिक आधार | कैलोरी आवश्यकता |
| आधुनिक दृष्टिकोण | उपभोग व्यय एवं व्यापक सामाजिक संकेतक |
| UPSC फोकस | समितियाँ, गरीबी रेखा, MPI, HDI |
लकड़ावाला समिति (Lakdawala Committee)
भारत में गरीबी मापन की पद्धति को अधिक वैज्ञानिक एवं एकरूप बनाने के उद्देश्य से विशेषज्ञ समूह (Expert Group) का गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रो. डी. टी. लकड़ावाला (D. T. Lakdawala) ने की। इस समिति की सिफारिशों ने 1990 के दशक से लेकर तेंदुलकर समिति की सिफारिशें लागू होने तक भारत में आधिकारिक गरीबी अनुमान का आधार प्रदान किया।
UPSC तथ्य: परीक्षा में “लकड़ावाला समिति” और “तेंदुलकर समिति” के बीच अंतर अक्सर पूछा जाता है।
गठन
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अध्यक्ष | प्रो. डी. टी. लकड़ावाला |
| गठन | योजना आयोग (Planning Commission) के अंतर्गत |
| उद्देश्य | भारत में गरीबी रेखा निर्धारण की पद्धति को मानकीकृत करना |
गठन की आवश्यकता
समिति के गठन से पहले—
- विभिन्न राज्यों में अलग-अलग पद्धतियाँ अपनाई जा रही थीं।
- गरीबी के आँकड़ों में तुलनात्मक कठिनाई थी।
- एक समान राष्ट्रीय पद्धति की आवश्यकता महसूस हुई।
समिति के प्रमुख उद्देश्य
- राष्ट्रीय स्तर पर एक समान गरीबी मापन पद्धति विकसित करना।
- राज्यों के बीच तुलना संभव बनाना।
- उपभोग व्यय के आधार पर गरीबी का आकलन करना।
- गरीबी रेखा को मूल्य सूचकांकों के माध्यम से समय-समय पर अद्यतन करना।
लकड़ावाला समिति की प्रमुख सिफारिशें
1. उपभोग व्यय आधारित गरीबी मापन : समिति ने मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (Monthly Per Capita Consumption Expenditure – MPCE) को गरीबी मापन का प्रमुख आधार माना। अर्थात् किसी व्यक्ति द्वारा उपभोग पर किए गए व्यय के आधार पर यह निर्धारित किया गया कि वह गरीबी रेखा से ऊपर है या नीचे।
2. कैलोरी मानदंड को आधार: गरीबी रेखा के निर्धारण में न्यूनतम कैलोरी आवश्यकता को आधार बनाया गया।
ऐतिहासिक रूप से प्रयुक्त मानक—
- ग्रामीण क्षेत्र: लगभग 2400 कैलोरी/दिन
- शहरी क्षेत्र: लगभग 2100 कैलोरी/दिन
UPSC नोट: इन कैलोरी मानकों का उपयोग प्रारंभिक गरीबी रेखा निर्धारण के संदर्भ में किया जाता था। बाद की समितियों ने केवल कैलोरी-आधारित दृष्टिकोण को पर्याप्त नहीं माना।
3. राज्य-विशिष्ट गरीबी रेखा
समिति ने माना कि विभिन्न राज्यों में—
- मूल्य स्तर
- जीवन-यापन की लागत
- उपभोग पैटर्न
अलग-अलग होते हैं। इसलिए प्रत्येक राज्य के लिए अलग गरीबी रेखा निर्धारित की गई।
4. मूल्य सूचकांक का उपयोग
गरीबी रेखा को समय-समय पर अद्यतन करने के लिए मूल्य सूचकांकों का उपयोग किया गया।
मुख्य रूप से—
- ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कृषि श्रमिकों से संबंधित मूल्य सूचकांक।
- शहरी क्षेत्रों के लिए औद्योगिक श्रमिकों से संबंधित मूल्य सूचकांक।
लकड़ावाला समिति की विशेषताएँ
- राष्ट्रीय स्तर पर एक समान पद्धति।
- उपभोग व्यय पर आधारित।
- राज्यवार गरीबी रेखा।
- मूल्य सूचकांक द्वारा समय-समय पर संशोधन।
- लंबे समय तक आधिकारिक गरीबी अनुमान का आधार।
सीमाएँ (Limitations)
समय के साथ इस पद्धति की कई सीमाएँ सामने आईं—
1. केवल कैलोरी पर अधिक निर्भरता: यह मान लिया गया कि गरीबी का मुख्य संकेतक भोजन है, जबकि शिक्षा और स्वास्थ्य पर बढ़ते खर्च को पर्याप्त महत्व नहीं मिला।
2. बदलती उपभोग संरचना की उपेक्षा: समय के साथ परिवारों के खर्च का स्वरूप बदल गया—
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- परिवहन
- संचार
पर व्यय बढ़ा, लेकिन पद्धति इसे पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं कर सकी।
3. शहरी जीवन की वास्तविक लागत: तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण जीवन-यापन की लागत बढ़ी, जिसे यह पद्धति पूरी तरह नहीं दर्शा पाई।
4. जीवन की गुणवत्ता का अभाव: इस पद्धति में निम्न पहलुओं को शामिल नहीं किया गया—
- शिक्षा की गुणवत्ता
- स्वास्थ्य सुविधाएँ
- स्वच्छता
- आवास
- सामाजिक सुरक्षा
UPSC निम्न प्रकार के प्रश्न पूछ सकता है—
प्रश्न: लकड़ावाला समिति ने गरीबी मापन के लिए किसे प्रमुख आधार माना?
(A) केवल आय
(B) उपभोग व्यय ✔
(C) बहुआयामी गरीबी
(D) मानव विकास सूचकांक
Frequently Confused Concepts
| अवधारणा | सही समझ |
|---|---|
| लकड़ावाला समिति | उपभोग व्यय + कैलोरी आधारित दृष्टिकोण |
| तेंदुलकर समिति | व्यापक उपभोग व्यय, स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर अधिक ध्यान |
| MPI | बहुआयामी वंचना का आकलन |
| HDI | मानव विकास का समग्र सूचकांक |
UPSC Trap Areas
Trap 1 कथन: लकड़ावाला समिति ने बहुआयामी गरीबी मापन की सिफारिश की। गलत
Trap 2 कथन: लकड़ावाला समिति ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य को गरीबी रेखा निर्धारण का मुख्य आधार बनाया। गलत
Trap 3 कथन: लकड़ावाला समिति ने उपभोग व्यय को महत्व नहीं दिया। गलत
यदि विकल्पों में—
- कैलोरी
- उपभोग व्यय
- Planning Commission
जैसे संकेत हों, तो उत्तर अक्सर लकड़ावाला समिति से संबंधित होगा।
यदि प्रश्न में—
- स्वास्थ्य पर निजी व्यय
- शिक्षा पर व्यय
- बदलते उपभोग पैटर्न
जैसे संकेत हों, तो उत्तर तेंदुलकर समिति की ओर जाने की संभावना अधिक होती है।
Quick Revision Box
| तथ्य | याद रखें |
|---|---|
| अध्यक्ष | प्रो. डी. टी. लकड़ावाला |
| आधार | MPCE (उपभोग व्यय) |
| ऐतिहासिक संदर्भ | कैलोरी मानदंड |
| विशेषता | राज्यवार गरीबी रेखा |
| सीमा | शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जीवन गुणवत्ता का सीमित समावेश |
तेंदुलकर समिति (Tendulkar Committee)
भारत में बदलती आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों के कारण यह महसूस किया गया कि केवल कैलोरी आधारित गरीबी मापन अब पर्याप्त नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन तथा अन्य आवश्यक सेवाओं पर बढ़ते निजी व्यय को भी गरीबी के आकलन में शामिल करना आवश्यक था। इसी उद्देश्य से योजना आयोग (Planning Commission) ने डॉ. एस. डी. तेंदुलकर (Suresh D. Tendulkar) की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया।
UPSC तथ्य: तेंदुलकर समिति ने भारत में गरीबी मापन की पद्धति में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया और कैलोरी-केंद्रित दृष्टिकोण से व्यापक उपभोग व्यय आधारित दृष्टिकोण की ओर संक्रमण कराया।
गठन
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अध्यक्ष | डॉ. एस. डी. तेंदुलकर |
| गठन | योजना आयोग |
| रिपोर्ट | 2009 |
| उद्देश्य | गरीबी मापन की पद्धति को अधिक यथार्थवादी बनाना |
समिति के गठन की आवश्यकता
लकड़ावाला समिति की पद्धति में कुछ प्रमुख कमियाँ थीं—
- केवल कैलोरी पर अधिक निर्भरता
- शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर निजी खर्च का पर्याप्त समावेश नहीं
- बदलते उपभोग पैटर्न की उपेक्षा
- शहरी गरीबी के वास्तविक स्वरूप का सीमित आकलन
इन कमियों को दूर करने के लिए तेंदुलकर समिति का गठन किया गया।
तेंदुलकर समिति की प्रमुख सिफारिशें
1. कैलोरी आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़ना: समिति ने स्पष्ट किया कि गरीबी का निर्धारण केवल कैलोरी आवश्यकता के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। इसके स्थान पर वास्तविक उपभोग व्यय (Consumption Expenditure) को अधिक महत्व दिया गया।
UPSC Point: समिति ने कैलोरी की अवधारणा को पूरी तरह अस्वीकार नहीं किया, बल्कि उसे गरीबी मापन का एकमात्र आधार नहीं माना।
2. मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE): गरीबी का निर्धारण Monthly Per Capita Consumption Expenditure (MPCE) के आधार पर जारी रखा गया, लेकिन उपभोग की टोकरी (Consumption Basket) को अधिक यथार्थवादी बनाया गया। इसमें केवल भोजन ही नहीं, बल्कि अन्य आवश्यक खर्चों को भी महत्व दिया गया।
3. शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर व्यय का समावेश: यह समिति की सबसे महत्वपूर्ण सिफारिशों में से एक थी। गरीबी के आकलन में निम्न व्ययों को अधिक महत्व दिया गया—
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- परिवहन
- अन्य आवश्यक सेवाएँ
4. ग्रामीण एवं शहरी गरीबी रेखा में सुधार: समिति ने ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लिए गरीबी रेखा निर्धारण की पद्धति को अधिक तुलनीय और यथार्थवादी बनाने का प्रयास किया।
5. मूल्य सूचकांकों में सुधार: गरीबी रेखा को अद्यतन करने के लिए प्रयुक्त मूल्य सूचकांकों में भी सुधार की सिफारिश की गई ताकि विभिन्न क्षेत्रों की वास्तविक जीवन-यापन लागत बेहतर ढंग से परिलक्षित हो सके।
तेंदुलकर समिति की प्रमुख विशेषताएँ
- कैलोरी आधारित दृष्टिकोण की सीमाओं को स्वीकार किया।
- व्यापक उपभोग व्यय पर बल।
- शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यय को महत्व।
- गरीबी मापन को अधिक यथार्थवादी बनाया।
- आधुनिक उपभोग पैटर्न के अनुरूप सुधार।
तेंदुलकर समिति की सीमाएँ
हालाँकि इस समिति ने महत्वपूर्ण सुधार किए, फिर भी कुछ सीमाएँ बनी रहीं—
1. आय आधारित दृष्टिकोण का प्रभुत्व: गरीबी का आकलन अभी भी मुख्यतः उपभोग व्यय पर आधारित रहा।
2. बहुआयामी गरीबी का पूर्ण समावेश नहीं: शिक्षा एवं स्वास्थ्य को महत्व दिया गया, लेकिन गरीबी के सभी सामाजिक आयामों का समग्र आकलन नहीं किया गया।
3. जीवन की गुणवत्ता के सभी पहलुओं का अभाव जैसे—
- आवास की गुणवत्ता
- सामाजिक सुरक्षा
- डिजिटल पहुँच
- पर्यावरणीय सुविधाएँ
इनका प्रत्यक्ष समावेश नहीं था।
लकड़ावाला समिति बनाम तेंदुलकर समिति
| आधार | लकड़ावाला समिति | तेंदुलकर समिति |
|---|---|---|
| प्रमुख आधार | कैलोरी + उपभोग व्यय | व्यापक उपभोग व्यय |
| कैलोरी | मुख्य आधार | एकमात्र आधार नहीं |
| शिक्षा | सीमित महत्व | अधिक महत्व |
| स्वास्थ्य | सीमित महत्व | अधिक महत्व |
| उपभोग पैटर्न | पारंपरिक | आधुनिक |
| दृष्टिकोण | अपेक्षाकृत संकीर्ण | अधिक यथार्थवादी |
UPSC निम्न प्रकार के प्रश्न पूछ सकता है—
कथन 1: तेंदुलकर समिति ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर निजी व्यय को महत्व दिया।
कथन 2: तेंदुलकर समिति ने गरीबी मापन को केवल कैलोरी आवश्यकता पर आधारित रखा।
उत्तर:
- कथन 1 ✔ सही
- कथन 2 ✘ गलत
Frequently Confused Concepts
| अवधारणा | सही समझ |
|---|---|
| लकड़ावाला समिति | कैलोरी आधारित परंपरागत दृष्टिकोण |
| तेंदुलकर समिति | व्यापक उपभोग व्यय आधारित दृष्टिकोण |
| रंगराजन समिति | गरीबी रेखा की पुनर्समीक्षा (अगले भाग में) |
| MPI | बहुआयामी वंचना |
| HDI | मानव विकास |
UPSC Trap Areas
Trap 1 कथन: तेंदुलकर समिति ने केवल कैलोरी को गरीबी मापन का आधार बनाया। गलत
Trap 2 कथन: तेंदुलकर समिति ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यय को महत्व नहीं दिया। गलत
Trap 3 कथन: लकड़ावाला और तेंदुलकर समिति की पद्धति पूरी तरह समान थी। गलत
यदि प्रश्न में—
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- उपभोग व्यय का व्यापक दृष्टिकोण
का उल्लेख हो, तो उत्तर प्रायः तेंदुलकर समिति की ओर संकेत करेगा।
यदि प्रश्न में—
- कैलोरी आधारित गरीबी
- परंपरागत गरीबी रेखा
का उल्लेख हो, तो उत्तर अक्सर लकड़ावाला समिति होगा।
Quick Revision Box
| तथ्य | याद रखें |
|---|---|
| अध्यक्ष | डॉ. एस. डी. तेंदुलकर |
| रिपोर्ट | 2009 |
| प्रमुख सुधार | कैलोरी से आगे बढ़कर व्यापक उपभोग व्यय |
| विशेष बल | शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यय |
| UPSC फोकस | लकड़ावाला बनाम तेंदुलकर तुलना |
Memory Trick
“तेंदुलकर = तंदुरुस्त समाज”
तेंदुलकर → स्वास्थ्य + शिक्षा + व्यापक उपभोग
यह ट्रिक याद दिलाती है कि समिति ने केवल भोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन की अन्य आवश्यकताओं को भी महत्व दिया।
रंगराजन समिति (Rangarajan Committee)
तेंदुलकर समिति की सिफारिशों के आधार पर जारी गरीबी के आँकड़ों पर व्यापक सार्वजनिक और शैक्षणिक बहस हुई। यह महसूस किया गया कि गरीबी रेखा वास्तविक जीवन-यापन की लागत को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करती। इस पृष्ठभूमि में डॉ. सी. रंगराजन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया गया। इस समिति का उद्देश्य गरीबी रेखा और गरीबी मापन की पद्धति की पुनर्समीक्षा करना था।
UPSC तथ्य: रंगराजन समिति ने नई गरीबी रेखा (Poverty Line Basket) का सुझाव दिया, लेकिन भारत सरकार ने इसे आधिकारिक गरीबी मापन पद्धति के रूप में स्वीकार नहीं किया।
गठन
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अध्यक्ष | डॉ. सी. रंगराजन |
| गठन | योजना आयोग |
| रिपोर्ट | 2014 |
| उद्देश्य | गरीबी रेखा की पुनर्समीक्षा एवं अधिक यथार्थवादी उपभोग टोकरी का निर्धारण |
गठन की आवश्यकता
तेंदुलकर समिति के बाद कई प्रश्न उठे—
- क्या गरीबी रेखा बहुत कम निर्धारित की गई है?
- क्या भोजन के अलावा अन्य आवश्यक खर्चों को पर्याप्त महत्व मिला है?
- क्या वास्तविक जीवन-यापन की लागत को सही ढंग से शामिल किया गया है?
इन्हीं प्रश्नों के समाधान हेतु रंगराजन समिति गठित की गई।
रंगराजन समिति की प्रमुख सिफारिशें
1. नई उपभोग टोकरी (Consumption Basket): समिति ने सुझाव दिया कि गरीबी रेखा तय करते समय केवल भोजन ही नहीं, बल्कि निम्न आवश्यकताओं को भी उचित महत्व दिया जाए—
- भोजन
- वस्त्र
- आवास
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- परिवहन
- बिजली
- अन्य आवश्यक वस्तुएँ एवं सेवाएँ
2. पोषण आवश्यकताओं पर बल: समिति ने भोजन की गुणवत्ता और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखने की सिफारिश की।
3. व्यापक उपभोग व्यय: गरीबी मापन के लिए उपभोग व्यय का दायरा तेंदुलकर समिति की तुलना में अधिक व्यापक रखने का सुझाव दिया गया।
4. गरीबी रेखा में संशोधन: समिति द्वारा सुझाई गई गरीबी रेखा तेंदुलकर समिति की तुलना में अधिक थी। परिणामस्वरूप, इस पद्धति से गरीबों की अनुमानित संख्या भी अधिक आती।
UPSC ध्यान दें: परीक्षा में सटीक रुपये की राशि के बजाय अवधारणा (Concept) अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि विभिन्न वर्षों में कीमतें और आँकड़े बदलते रहते हैं।
रंगराजन समिति की विशेषताएँ
- अधिक यथार्थवादी उपभोग टोकरी।
- भोजन के साथ गैर-खाद्य आवश्यकताओं पर अधिक बल।
- जीवन-यापन की वास्तविक लागत को बेहतर ढंग से दर्शाने का प्रयास।
- गरीबी मापन को अधिक व्यापक बनाने का प्रयास।
सीमाएँ
यद्यपि समिति ने महत्वपूर्ण सुधार सुझाए, फिर भी—
- गरीबी मुख्यतः उपभोग व्यय पर आधारित रही।
- बहुआयामी गरीबी का पूर्ण समावेश नहीं था।
- सरकार ने इसे आधिकारिक गरीबी मापन पद्धति के रूप में स्वीकार नहीं किया।
तीनों समितियों की तुलना
| आधार | लकड़ावाला समिति | तेंदुलकर समिति | रंगराजन समिति |
|---|---|---|---|
| प्रमुख दृष्टिकोण | कैलोरी आधारित उपभोग व्यय | व्यापक उपभोग व्यय | अधिक व्यापक उपभोग टोकरी |
| भोजन पर बल | अधिक | संतुलित | संतुलित एवं पोषण पर अधिक ध्यान |
| शिक्षा एवं स्वास्थ्य | सीमित | शामिल | अधिक स्पष्ट महत्व |
| गैर-खाद्य व्यय | सीमित | बढ़ा हुआ | और अधिक व्यापक |
| गरीबी रेखा | पारंपरिक | संशोधित | अपेक्षाकृत उच्च |
| आधिकारिक उपयोग | हाँ (एक अवधि तक) | हाँ | अनुशंसित, पर आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं |
UPSC निम्न प्रकार के प्रश्न पूछ सकता है—
कथन 1: रंगराजन समिति ने गैर-खाद्य व्यय को अधिक महत्व दिया।
कथन 2: रंगराजन समिति की सिफारिशें भारत की वर्तमान आधिकारिक गरीबी मापन पद्धति हैं।
उत्तर—
- कथन 1 ✔ सही
- कथन 2 ✘ गलत
Frequently Confused Concepts
| अवधारणा | सही समझ |
|---|---|
| लकड़ावाला | कैलोरी आधारित परंपरागत दृष्टिकोण |
| तेंदुलकर | व्यापक उपभोग व्यय |
| रंगराजन | अधिक व्यापक उपभोग टोकरी |
| MPI | बहुआयामी वंचना |
| HDI | मानव विकास |
UPSC Trap Areas
Trap 1 कथन: रंगराजन समिति ने बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) विकसित किया। गलत
Trap 2 कथन: रंगराजन समिति ने गरीबी रेखा निर्धारण में गैर-खाद्य व्यय को महत्व दिया। सही
Trap 3 कथन: रंगराजन समिति की सिफारिशें वर्तमान आधिकारिक गरीबी मापन का आधार हैं। गलत
यदि प्रश्न में—
- नई Consumption Basket
- गैर-खाद्य व्यय
- अधिक यथार्थवादी गरीबी रेखा
जैसे संकेत हों, तो उत्तर प्रायः रंगराजन समिति होगा।
Quick Revision Box
| तथ्य | याद रखें |
|---|---|
| अध्यक्ष | डॉ. सी. रंगराजन |
| रिपोर्ट | 2014 |
| प्रमुख विचार | व्यापक उपभोग टोकरी |
| विशेष बल | भोजन + गैर-खाद्य आवश्यकताएँ |
| UPSC तथ्य | आधिकारिक पद्धति के रूप में स्वीकार नहीं |
Memory Trick
“रंगराजन = रंग-बिरंगी टोकरी” अर्थात— रंगराजन → अधिक व्यापक Consumption Basket
UPSC Master Comparison (एक नज़र में)
| समिति | याद रखने का एक शब्द |
|---|---|
| लकड़ावाला | कैलोरी |
| तेंदुलकर | स्वास्थ्य + शिक्षा |
| रंगराजन | व्यापक टोकरी |
संपादकीय सुझाव: UPSC Prelims के लिए इन तीनों समितियों का अध्ययन करते समय वर्ष या रुपये की सीमाएँ रटने की बजाय दृष्टिकोण (Approach), आधार (Basis) और आपसी अंतर (Comparison) पर अधिक ध्यान दें। यही क्षेत्र परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गरीबी का मापन (International Measurement of Poverty)
वैश्विक स्तर पर गरीबी का आकलन केवल किसी एक देश के मानकों से नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्रत्येक देश की—
- आय
- मूल्य स्तर
- जीवन-यापन की लागत
- मुद्रा का मूल्य
अलग-अलग होता है। इसी कारण विश्व स्तर पर गरीबी की तुलना करने के लिए विश्व बैंक (World Bank) तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने मानकीकृत (Standardized) पद्धतियाँ विकसित की हैं। UPSC प्रारंभिक परीक्षा में अंतरराष्ट्रीय गरीबी मापन से जुड़े प्रश्न विशेष रूप से विश्व बैंक की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा (International Poverty Line), क्रय-शक्ति समता (PPP) तथा बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) से पूछे जाते हैं।
विश्व बैंक (World Bank)
विश्व बैंक एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था है, जो विकासशील देशों में—
- गरीबी उन्मूलन
- आर्थिक विकास
- आधारभूत संरचना
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
जैसे क्षेत्रों में सहायता प्रदान करती है। गरीबी मापन के क्षेत्र में विश्व बैंक की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा (International Poverty Line) निर्धारित करना है।
अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा (International Poverty Line)
अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा वह न्यूनतम आय या उपभोग स्तर है, जिसके नीचे रहने वाले व्यक्ति को अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) में माना जाता है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों में गरीबी की तुलना के लिए एक समान मानक उपलब्ध कराना है।
उद्देश्य
- विभिन्न देशों की तुलना करना।
- वैश्विक गरीबी का आकलन।
- सतत विकास लक्ष्य (SDG-1) की प्रगति मापना।
- अंतरराष्ट्रीय नीति निर्माण में सहायता।
क्रय-शक्ति समता (Purchasing Power Parity – PPP)
PPP क्या है?
क्रय-शक्ति समता (PPP) एक ऐसी पद्धति है जिसके माध्यम से विभिन्न देशों की मुद्राओं की वास्तविक क्रय-शक्ति की तुलना की जाती है। सरल शब्दों में—
PPP यह बताता है कि अलग-अलग देशों में समान राशि से कितनी वस्तुएँ एवं सेवाएँ खरीदी जा सकती हैं।
PPP की आवश्यकता क्यों?
यदि केवल विनिमय दर (Exchange Rate) का उपयोग किया जाए, तो वास्तविक जीवन-यापन की लागत का सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
उदाहरण—
- 100 डॉलर से अमेरिका और भारत में खरीदी जाने वाली वस्तुओं की मात्रा समान नहीं होगी।
- इसलिए वास्तविक तुलना के लिए PPP का उपयोग किया जाता है।
उदाहरण
मान लीजिए— भारत में ₹100 में जो वस्तु खरीदी जा सकती है, वही वस्तु अमेरिका में $5 में मिलती है। सिर्फ विनिमय दर देखने से वास्तविक तुलना संभव नहीं होगी। PPP इस अंतर को समायोजित करता है।
PPP की विशेषताएँ
- विभिन्न देशों की तुलना के लिए उपयोगी।
- जीवन-यापन की वास्तविक लागत को बेहतर दर्शाता है।
- विश्व बैंक द्वारा व्यापक रूप से उपयोग।
- वैश्विक गरीबी आकलन का आधार।
अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा की विशेषताएँ
- PPP पर आधारित।
- समय-समय पर संशोधित।
- वैश्विक तुलना के लिए प्रयुक्त।
- मुख्यतः अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) के आकलन हेतु उपयोग।
UPSC तथ्य: विश्व बैंक समय-समय पर नए PPP आँकड़ों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा को अद्यतन करता है। इसलिए परीक्षा में किसी विशेष डॉलर राशि को रटने की अपेक्षा PPP आधारित अवधारणा समझना अधिक महत्वपूर्ण है।
भारत के संदर्भ में महत्व
भारत जैसे बड़े और विविधतापूर्ण देश के लिए—
- राष्ट्रीय गरीबी रेखा
- अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा
दोनों का महत्व है। राष्ट्रीय नीति निर्माण के लिए भारत अपनी पद्धतियों का उपयोग करता है, जबकि वैश्विक तुलना के लिए विश्व बैंक के मानकों का उपयोग किया जाता है।
राष्ट्रीय गरीबी रेखा बनाम अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा
| आधार | राष्ट्रीय गरीबी रेखा | अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा |
|---|---|---|
| निर्धारण | संबंधित देश | विश्व बैंक |
| उद्देश्य | राष्ट्रीय नीति निर्माण | वैश्विक तुलना |
| आधार | देश की परिस्थितियाँ | PPP आधारित मानक |
| उपयोग | घरेलू योजनाएँ | देशों के बीच तुलना |
विश्व बैंक की भूमिका
विश्व बैंक—
- वैश्विक गरीबी के आँकड़े प्रकाशित करता है।
- गरीबी उन्मूलन रणनीतियों का अध्ययन करता है।
- विकासशील देशों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
- SDGs की प्रगति के आकलन में सहयोग करता है।
UPSC निम्न प्रकार के प्रश्न पूछ सकता है—
कथन 1: अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा का निर्धारण विश्व बैंक करता है।
कथन 2: यह केवल विनिमय दर (Exchange Rate) पर आधारित होती है।
उत्तर—
- कथन 1 ✔ सही
- कथन 2 ✘ गलत
Frequently Confused Concepts
| अवधारणा | सही समझ |
|---|---|
| Exchange Rate | मुद्रा विनिमय दर |
| PPP | वास्तविक क्रय-शक्ति की तुलना |
| राष्ट्रीय गरीबी रेखा | देश द्वारा निर्धारित |
| अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा | विश्व बैंक द्वारा प्रयुक्त वैश्विक मानक |
UPSC Trap Areas
Trap 1 कथन: PPP और Exchange Rate समान हैं। गलत
Trap 2 कथन: विश्व बैंक की गरीबी रेखा राष्ट्रीय गरीबी रेखा का स्थान ले लेती है। गलत
Trap 3 कथन: अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा का उपयोग देशों के बीच तुलना के लिए किया जाता है। सही
यदि प्रश्न में—
- PPP
- World Bank
- Global Comparison
- Extreme Poverty
जैसे संकेत हों, तो उत्तर प्रायः अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा से संबंधित होगा।
Quick Revision Box
| तथ्य | याद रखें |
|---|---|
| संस्था | विश्व बैंक |
| आधार | PPP |
| उद्देश्य | वैश्विक तुलना |
| उपयोग | अत्यधिक गरीबी का आकलन |
| UPSC फोकस | PPP बनाम Exchange Rate |
Memory Trick
“PPP = Purchasing Power = Poor People Comparison”
यद्यपि यह पूर्ण रूप से तकनीकी व्याख्या नहीं है, लेकिन परीक्षा की दृष्टि से यह याद रखने में सहायक है कि PPP का उपयोग देशों के बीच वास्तविक क्रय-शक्ति की तुलना के लिए किया जाता है।
बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index – MPI)
बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index – MPI) एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय सूचकांक है, जो गरीबी को केवल आय के आधार पर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य (Health), शिक्षा (Education) और जीवन स्तर (Living Standards) के आधार पर मापता है। यह आधुनिक गरीबी मापन की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में से एक है और UPSC प्रारंभिक परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
UPSC तथ्य: MPI का उद्देश्य यह बताना है कि लोग किन-किन आयामों में वंचित (Deprived) हैं, न कि केवल उनकी आय कितनी है।
MPI का विकास
MPI को वर्ष 2010 में विकसित किया गया। इसे संयुक्त रूप से विकसित किया गया—
- संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)
- Oxford Poverty and Human Development Initiative (OPHI)
इसका उद्देश्य पुराने Human Poverty Index (HPI) का स्थान लेना था।
MPI की आवश्यकता
आय आधारित गरीबी मापन की कुछ सीमाएँ थीं—
- आय होने पर भी शिक्षा का अभाव हो सकता है।
- आय होने पर भी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध न हों।
- आय होने पर भी स्वच्छ पेयजल या शौचालय न हो।
- आय होने पर भी जीवन स्तर निम्न हो सकता है।
इसीलिए बहुआयामी गरीबी सूचकांक विकसित किया गया।
MPI के तीन प्रमुख आयाम
| आयाम | भार (Weight) |
|---|---|
| स्वास्थ्य (Health) | 1/3 |
| शिक्षा (Education) | 1/3 |
| जीवन स्तर (Living Standards) | 1/3 |
UPSC नोट: तीनों आयामों का भार समान (Equal Weight) रखा गया है।
MPI के 10 संकेतक (Indicators)
1. स्वास्थ्य (Health)
| संकेतक | विवरण |
|---|---|
| पोषण (Nutrition) | परिवार में पोषण की स्थिति |
| बाल मृत्यु (Child Mortality) | परिवार में बाल मृत्यु की स्थिति |
2. शिक्षा (Education)
| संकेतक | विवरण |
|---|---|
| स्कूली शिक्षा के वर्ष (Years of Schooling) | परिवार के सदस्यों की औपचारिक शिक्षा |
| विद्यालय में उपस्थिति (School Attendance) | स्कूल जाने योग्य बच्चों की उपस्थिति |
3. जीवन स्तर (Living Standards)
| संकेतक | विवरण |
|---|---|
| खाना पकाने का ईंधन | स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता |
| स्वच्छता (Sanitation) | शौचालय की उपलब्धता |
| पेयजल (Drinking Water) | सुरक्षित पेयजल |
| बिजली (Electricity) | विद्युत सुविधा |
| आवास (Housing) | आवास की गुणवत्ता |
| संपत्ति (Assets) | मूलभूत उपभोक्ता परिसंपत्तियाँ |
MPI की प्रमुख विशेषताएँ
- आय पर निर्भर नहीं।
- कई आयामों में वंचना को मापता है।
- नीति निर्माण में उपयोगी।
- SDG-1 की प्रगति का आकलन करने में सहायक।
- क्षेत्रीय असमानताओं की पहचान में उपयोगी।
MPI के लाभ
1. वास्तविक गरीबी को दर्शाता है: यह केवल धन की कमी नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता का आकलन करता है।
2. नीति निर्माण में सहायक: सरकार यह पहचान सकती है कि किस क्षेत्र में—
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- स्वच्छता
- आवास
की सबसे अधिक कमी है।
3. लक्षित योजनाओं में उपयोगी: MPI के आधार पर योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लक्षित किया जा सकता है।
4. अंतरराष्ट्रीय तुलना: विभिन्न देशों की तुलना अधिक यथार्थवादी ढंग से संभव होती है।
MPI की सीमाएँ
- सभी देशों के आँकड़े समान गुणवत्ता के नहीं होते।
- कुछ सामाजिक आयामों का प्रत्यक्ष समावेश नहीं होता।
- समय-समय पर डेटा उपलब्धता एक चुनौती हो सकती है।
भारत के संदर्भ में MPI
भारत में बहुआयामी गरीबी का उपयोग यह समझने के लिए महत्वपूर्ण है कि विभिन्न राज्यों और जिलों में—
- शिक्षा
- पोषण
- स्वास्थ्य
- स्वच्छता
- बिजली
- आवास
जैसी सुविधाओं की उपलब्धता कैसी है।
UPSC ध्यान दें: राष्ट्रीय स्तर पर भी नीति आयोग (NITI Aayog) राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National MPI) प्रकाशित करता है, जबकि वैश्विक MPI UNDP और OPHI द्वारा जारी किया जाता है।
MPI बनाम आय आधारित गरीबी
| आधार | आय आधारित गरीबी | MPI |
|---|---|---|
| आधार | आय/उपभोग | अनेक आयाम |
| स्वास्थ्य | शामिल नहीं | शामिल |
| शिक्षा | शामिल नहीं | शामिल |
| जीवन स्तर | सीमित | व्यापक |
| उपयोग | आर्थिक गरीबी | समग्र गरीबी |
UPSC Prelims Perspective
कथन 1: MPI केवल आय के आधार पर गरीबी मापता है।
कथन 2: MPI में स्वास्थ्य, शिक्षा एवं जीवन स्तर को शामिल किया जाता है।
उत्तर—
- कथन 1 ✘ गलत
- कथन 2 ✔ सही
Frequently Confused Concepts
| अवधारणा | सही समझ |
|---|---|
| Poverty Line | आय/उपभोग आधारित सीमा |
| MPI | बहुआयामी वंचना |
| HDI | मानव विकास का समग्र सूचकांक |
| HPI | पुराना सूचकांक, जिसे MPI ने प्रतिस्थापित किया |
UPSC Trap Areas
Trap 1 कथन: MPI का प्रकाशन केवल विश्व बैंक करता है। गलत
Trap 2 कथन: MPI में शिक्षा एवं स्वास्थ्य दोनों शामिल हैं। सही
Trap 3 कथन: MPI और Poverty Line समान अवधारणाएँ हैं। गलत
यदि प्रश्न में—
- Health
- Education
- Living Standards
- Deprivation
- OPHI
- UNDP
जैसे संकेत हों, तो उत्तर प्रायः MPI होगा।
Quick Revision Box
| तथ्य | याद रखें |
|---|---|
| विकसित | 2010 |
| संस्थाएँ | UNDP + OPHI |
| आयाम | स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन स्तर |
| संकेतक | 10 |
| उपयोग | बहुआयामी गरीबी का मापन |
Memory Trick
“HEL + 10”
- H = Health
- E = Education
- L = Living Standards
- 10 = कुल संकेतक
मानव विकास सूचकांक (Human Development Index – HDI)
मानव विकास सूचकांक (Human Development Index – HDI) एक समग्र विकास सूचकांक है, जो किसी देश में मानव विकास के स्तर का आकलन करता है। यह केवल आर्थिक विकास (Economic Growth) नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर को भी मापता है।
UPSC महत्वपूर्ण तथ्य: HDI गरीबी मापने का सूचकांक नहीं है, बल्कि मानव विकास (Human Development) का सूचकांक है। फिर भी, गरीबी और मानव विकास के बीच गहरे संबंध के कारण UPSC इन दोनों अवधारणाओं को साथ में पूछ सकता है।
HDI का विकास
HDI को 1990 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने प्रस्तुत किया।
इस अवधारणा के विकास में प्रमुख योगदान—
- महबूब-उल-हक (Mahbub ul Haq)
- अमर्त्य सेन (Amartya Sen)
का माना जाता है।
HDI का उद्देश्य
HDI का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना है कि किसी देश का विकास केवल GDP से नहीं आँका जा सकता।
यह जानना भी आवश्यक है कि—
- लोग कितने स्वस्थ हैं।
- कितने शिक्षित हैं।
- उनका जीवन स्तर कैसा है।
HDI के तीन प्रमुख आयाम
| आयाम | मापन का आधार |
|---|---|
| स्वास्थ्य | जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy at Birth) |
| शिक्षा | औसत स्कूली शिक्षा के वर्ष (Mean Years of Schooling) एवं अपेक्षित स्कूली शिक्षा के वर्ष (Expected Years of Schooling) |
| जीवन स्तर | प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI per Capita, PPP) |
UPSC नोट: HDI में आय (Income) का उपयोग GNI per Capita (PPP) के रूप में किया जाता है, न कि गरीबी रेखा के रूप में।
HDI की विशेषताएँ
- मानव विकास का समग्र सूचकांक।
- UNDP द्वारा प्रकाशित।
- देशों की तुलना के लिए उपयोगी।
- GDP से अधिक व्यापक दृष्टिकोण।
- नीति निर्माण में सहायक।
HDI क्यों महत्वपूर्ण है?
यदि किसी देश का GDP अधिक है, लेकिन—
- शिक्षा कमजोर है,
- स्वास्थ्य सेवाएँ खराब हैं,
- जीवन प्रत्याशा कम है,
तो HDI उस देश के विकास की वास्तविक स्थिति को बेहतर ढंग से प्रदर्शित करेगा।
HDI की सीमाएँ
- आय असमानता को प्रत्यक्ष रूप से नहीं दर्शाता।
- गरीबी का प्रत्यक्ष मापन नहीं करता।
- पर्यावरणीय गुणवत्ता, लैंगिक समानता और राजनीतिक स्वतंत्रता जैसे पहलुओं को शामिल नहीं करता।
- देशों के भीतर क्षेत्रीय असमानताओं को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
HDI बनाम MPI
यह UPSC का सबसे पसंदीदा तुलना-आधारित विषय है।
| आधार | HDI | MPI |
|---|---|---|
| पूरा नाम | Human Development Index | Multidimensional Poverty Index |
| उद्देश्य | मानव विकास मापना | बहुआयामी गरीबी मापना |
| प्रकाशित | UNDP | UNDP एवं OPHI |
| आयाम | स्वास्थ्य, शिक्षा, आय | स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन स्तर |
| आय का उपयोग | GNI प्रति व्यक्ति | प्रत्यक्ष आय नहीं, वंचना आधारित संकेतक |
| गरीबी मापन | नहीं | हाँ |
UPSC ट्रिक:
HDI = Development
MPI = Poverty
HDI और GDP में अंतर
| आधार | GDP | HDI |
|---|---|---|
| क्या मापता है? | आर्थिक उत्पादन | मानव विकास |
| शिक्षा | शामिल नहीं | शामिल |
| स्वास्थ्य | शामिल नहीं | शामिल |
| जीवन स्तर | सीमित | शामिल |
| उद्देश्य | अर्थव्यवस्था का आकार | लोगों के विकास का स्तर |
UPSC Prelims Perspective
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
- HDI का प्रकाशन UNDP द्वारा किया जाता है।
- HDI बहुआयामी गरीबी का प्रत्यक्ष मापन करता है।
सही उत्तर होगा—
- कथन 1 ✔ सही
- कथन 2 ✘ गलत
Frequently Confused Concepts
| अवधारणा | सही समझ |
|---|---|
| HDI | मानव विकास |
| MPI | बहुआयामी गरीबी |
| GNI | राष्ट्रीय आय का संकेतक |
| GDP | कुल आर्थिक उत्पादन |
UPSC Trap Areas
Trap 1 कथन: HDI गरीबी मापने का आधिकारिक सूचकांक है। गलत
Trap 2 कथन: HDI में स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों शामिल हैं। सही
Trap 3 कथन: MPI और HDI समान उद्देश्य के लिए बनाए गए हैं। गलत
यदि प्रश्न में—
- Life Expectancy
- Mean Years of Schooling
- GNI per Capita
- Human Development
जैसे शब्द हों, तो उत्तर प्रायः HDI होगा।
यदि प्रश्न में—
- Deprivation
- Nutrition
- Sanitation
- Living Standards
जैसे संकेत हों, तो उत्तर MPI होगा।
Memory Trick
HDI = HEI
- H = Health
- E = Education
- I = Income (GNI per Capita)
Quick Revision Box
| तथ्य | याद रखें |
|---|---|
| विकसित | 1990 |
| संस्था | UNDP |
| प्रमुख योगदान | महबूब-उल-हक एवं अमर्त्य सेन |
| आयाम | स्वास्थ्य, शिक्षा, आय |
| गरीबी मापन | प्रत्यक्ष रूप से नहीं |
UPSC Master Table
| सूचकांक | संस्था | क्या मापता है? |
|---|---|---|
| HDI | UNDP | मानव विकास |
| MPI | UNDP + OPHI | बहुआयामी गरीबी |
| International Poverty Line | विश्व बैंक | अत्यधिक गरीबी |
| National Poverty Line | संबंधित देश | राष्ट्रीय गरीबी |
Concept Map (एक नज़र में)
गरीबी का मापन
│
┌──────────────┴──────────────┐
│ │
भारत में मापन अंतरराष्ट्रीय मापन
│ │
│ ├── विश्व बैंक
│ ├── PPP
│ ├── MPI
│ └── HDI*
│
├── लकड़ावाला समिति
├── तेंदुलकर समिति
└── रंगराजन समिति
*HDI = मानव विकास सूचकांक (प्रत्यक्ष गरीबी सूचकांक नहीं)
Master Comparison Table
| विषय | संस्था/समिति | मुख्य उद्देश्य | UPSC Keyword |
|---|---|---|---|
| लकड़ावाला समिति | योजना आयोग | कैलोरी आधारित उपभोग व्यय | Traditional Approach |
| तेंदुलकर समिति | योजना आयोग | व्यापक उपभोग व्यय | Health + Education |
| रंगराजन समिति | योजना आयोग | व्यापक Consumption Basket | Revised Poverty Line |
| International Poverty Line | विश्व बैंक | वैश्विक तुलना | PPP |
| MPI | UNDP + OPHI | बहुआयामी गरीबी | Deprivation |
| HDI | UNDP | मानव विकास | Development |
भारतीय समितियों की तुलना
| आधार | लकड़ावाला | तेंदुलकर | रंगराजन |
|---|---|---|---|
| प्रमुख आधार | कैलोरी + MPCE | व्यापक MPCE | विस्तृत उपभोग टोकरी |
| भोजन | अधिक महत्व | संतुलित | संतुलित |
| शिक्षा | सीमित | शामिल | अधिक महत्व |
| स्वास्थ्य | सीमित | शामिल | अधिक महत्व |
| गैर-खाद्य व्यय | सीमित | अधिक | और अधिक |
| वर्तमान स्थिति | ऐतिहासिक | ऐतिहासिक | अनुशंसित, आधिकारिक नहीं |
International Comparison
| आधार | Poverty Line | MPI | HDI |
|---|---|---|---|
| क्या मापता है? | आय/उपभोग आधारित गरीबी | बहुआयामी गरीबी | मानव विकास |
| संस्था | विश्व बैंक | UNDP + OPHI | UNDP |
| आय | ✔ | ✘ (प्रत्यक्ष नहीं) | ✔ (GNI) |
| स्वास्थ्य | ✘ | ✔ | ✔ |
| शिक्षा | ✘ | ✔ | ✔ |
| जीवन स्तर | सीमित | ✔ | आंशिक (आय के माध्यम से) |
UPSC PYQ Trend Analysis
UPSC पिछले वर्षों में निम्न क्षेत्रों पर बार-बार प्रश्न पूछता रहा है—
भारतीय समितियाँ
- लकड़ावाला समिति
- तेंदुलकर समिति
- रंगराजन समिति
अंतरराष्ट्रीय अवधारणाएँ (International Concepts)
- क्रय शक्ति समता (PPP – Purchasing Power Parity)
- विश्व बैंक की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा (World Bank Poverty Line)
- बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI – Multidimensional Poverty Index)
- मानव विकास सूचकांक (HDI – Human Development Index)
Statement Based Questions
- कौन-सा कथन सही है?
- कौन-सा सूचकांक क्या मापता है?
- कौन-सी संस्था प्रकाशित करती है?
UPSC Trap Master List
Trap 1 HDI = Poverty Index गलत
Trap 2 MPI केवल आय मापता है। गलत
Trap 3 PPP = Exchange Rate गलत
Trap 4 तेंदुलकर समिति = कैलोरी आधारित समिति गलत
Trap 5 रंगराजन समिति वर्तमान आधिकारिक गरीबी मापन पद्धति है। गलत
Trap 6 विश्व बैंक भारत की राष्ट्रीय गरीबी रेखा निर्धारित करता है। गलत
यदि प्रश्न में निम्नलिखित शब्द हों—
- पोषण (Nutrition)
- स्वच्छता (Sanitation)
- बिजली (Electricity)
- आवास (Housing)
- वंचना (Deprivation)
➡️ उत्तर की दिशा: बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI)
यदि प्रश्न में निम्नलिखित शब्द हों—
- जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy)
- सकल राष्ट्रीय आय (GNI)
- औसत स्कूली शिक्षा वर्ष (Mean Years of Schooling)
➡️ उत्तर की दिशा: मानव विकास सूचकांक (HDI)
यदि प्रश्न में निम्नलिखित शब्द हों—
- क्रय शक्ति समता (PPP)
- विश्व बैंक (World Bank)
- अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty)
- अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा (International Poverty Line)
➡️ उत्तर की दिशा: विश्व बैंक की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा (International Poverty Line)
यदि प्रश्न में निम्नलिखित शब्द हों—
- उपभोग व्यय (Consumption Expenditure)
- स्वास्थ्य व्यय (Health Expenditure)
- शिक्षा व्यय (Education Expenditure)
➡️ उत्तर की दिशा: तेंदुलकर समिति (Tendulkar Committee)
यदि प्रश्न में निम्नलिखित शब्द हों—
- कैलोरी आधारित (Calorie Based)
- पारंपरिक गरीबी रेखा (Traditional Poverty Line)
➡️ उत्तर की दिशा: लकड़ावाला समिति (Lakdawala Committee)
यदि प्रश्न में निम्नलिखित शब्द हों—
- संशोधित उपभोग टोकरी (Revised Consumption Basket)
➡️ उत्तर की दिशा: रंगराजन समिति (Rangarajan Committee)
One Page Revision Sheet
| विषय | एक पंक्ति में |
|---|---|
| गरीबी रेखा | न्यूनतम आर्थिक सीमा |
| MPCE | मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय |
| लकड़ावाला | कैलोरी आधारित |
| तेंदुलकर | व्यापक उपभोग व्यय |
| रंगराजन | नई उपभोग टोकरी |
| PPP | क्रय-शक्ति समता |
| World Bank | अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा |
| MPI | बहुआयामी गरीबी |
| HDI | मानव विकास |
Last Minute Revision (30 सेकंड)
✔ लकड़ावाला = कैलोरी
✔ तेंदुलकर = शिक्षा + स्वास्थ्य
✔ रंगराजन = नई Consumption Basket
✔ World Bank = Poverty Line
✔ PPP = वास्तविक क्रय शक्ति
✔ MPI = Health + Education + Living Standards
✔ HDI = Health + Education + Income
✔ MPI ≠ HDI
✔ HDI ≠ Poverty Index
संभावित UPSC Prelims MCQs
प्रश्न 1 निम्नलिखित में से कौन-सा सूचकांक बहुआयामी गरीबी का मापन करता है?
(A) HDI
(B) GDI
(C) MPI
(D) GII
उत्तर: (C)
प्रश्न 2 PPP का उपयोग मुख्यतः किसलिए किया जाता है?
(A) मुद्रा विनिमय दर तय करने के लिए
(B) देशों की वास्तविक क्रय-शक्ति की तुलना के लिए
(C) GDP मापने के लिए
(D) मुद्रास्फीति मापने के लिए
उत्तर: (B)
प्रश्न 3 निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- HDI का प्रकाशन UNDP करता है।
- MPI का विकास UNDP और OPHI ने संयुक्त रूप से किया।
कूट:
(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1, न 2
उत्तर: (C)
Chapter Summary
गरीबी मापन समय के साथ कैलोरी आधारित पद्धति से विकसित होकर व्यापक उपभोग व्यय और अंततः बहुआयामी दृष्टिकोण तक पहुँचा है। भारत में लकड़ावाला, तेंदुलकर और रंगराजन समितियों ने गरीबी मापन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व बैंक, UNDP तथा OPHI विभिन्न मानकों के माध्यम से गरीबी और मानव विकास का आकलन करते हैं। UPSC के लिए इन सभी अवधारणाओं का अंतर स्पष्ट रूप से समझना अत्यंत आवश्यक है।
Key Takeaways
- गरीबी रेखा गरीबी मापन का पारंपरिक आधार है।
- MPCE का अर्थ है मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय।
- लकड़ावाला समिति का संबंध कैलोरी आधारित दृष्टिकोण से है।
- तेंदुलकर समिति ने व्यापक उपभोग व्यय पर बल दिया।
- रंगराजन समिति ने अधिक व्यापक उपभोग टोकरी का सुझाव दिया।
- विश्व बैंक अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा का उपयोग करता है।
- PPP देशों की वास्तविक क्रय-शक्ति की तुलना करता है।
- MPI बहुआयामी गरीबी का मापन करता है।
- MPI के तीन आयाम हैं—स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर।
- HDI मानव विकास का सूचकांक है, गरीबी का नहीं।
- HDI में स्वास्थ्य, शिक्षा और आय शामिल हैं।
- MPI और HDI अलग-अलग उद्देश्य पूरे करते हैं।
- UPSC अवधारणात्मक तुलना पर विशेष ध्यान देता है।
- समितियों के दृष्टिकोण में अंतर समझना अधिक महत्वपूर्ण है।
- Statement-Based Questions में संस्था और उद्देश्य पर ध्यान दें।
📚 गरीबी (Poverty) UPSC Notes – इस अध्याय के सभी भाग
यदि आप UPSC Prelims Economy की पूरी तैयारी करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए सभी भाग क्रमवार पढ़ें।
✅ 1. गरीबी की अवधारणा (पूरा पढ़ें)
- गरीबी का अर्थ
- निरपेक्ष गरीबी
- सापेक्ष गरीबी
- अत्यधिक गरीबी
- बहुआयामी गरीबी
👉 पढ़ें: गरीबी UPSC Notes in Hindi | Poverty Concepts & Schemes
📖 2. भारत में गरीबी का मापन (आप अभी यही पोस्ट पढ़ रहे हैं)
- गरीबी का मापन
- गरीबी रेखा
- कैलोरी आधारित दृष्टिकोण
- लकड़ावाला समिति
- तेंदुलकर समिति
- रंगराजन समिति
- World Bank Poverty Line
- PPP
- MPI
- HDI
➜ 3. गरीबी मापन के संकेतक
- गरीबी अनुपात (Head Count Ratio)
- Poverty Gap
- Poverty Severity
- उपभोग व्यय आधारित मापन
👉 अगला भाग पढ़ें → जल्द उपलब्ध होगा
➜ 4. गरीबी के कारण
- बेरोजगारी
- अशिक्षा
- निम्न आय
- मुद्रास्फीति
- जनसंख्या वृद्धि
- कृषि पर अत्यधिक निर्भरता
- क्षेत्रीय असमानता
- सामाजिक असमानता
👉 यह पोस्ट पढ़ें → जल्द उपलब्ध होगा
➜ 5. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम
- अंत्योदय अन्न योजना
👉 यह पोस्ट पढ़ें → जल्द उपलब्ध होगा
➜ 6. भूख एवं कुपोषण
- कुपोषण
- अल्पपोषण
- बौनापन (Stunting)
- क्षीणता (Wasting)
- कम वजन
- एनीमिया
- वैश्विक भूख सूचकांक
👉 यह पोस्ट पढ़ें → जल्द उपलब्ध होगा
FAQ
1. भारत में गरीबी का मापन किस आधार पर किया जाता है?
भारत में गरीबी का मापन समय के साथ कैलोरी आधारित दृष्टिकोण से उपभोग व्यय (Consumption Expenditure) तथा वर्तमान में बहुआयामी संकेतकों की ओर विकसित हुआ है।
2. लकड़ावाला समिति का मुख्य आधार क्या था?
लकड़ावाला समिति ने मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) तथा कैलोरी आवश्यकता को गरीबी मापन का प्रमुख आधार माना।
3. तेंदुलकर समिति की सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश क्या थी?
तेंदुलकर समिति ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर निजी व्यय सहित व्यापक उपभोग व्यय को गरीबी मापन में शामिल करने की सिफारिश की।
4. रंगराजन समिति क्यों बनाई गई थी?
रंगराजन समिति का उद्देश्य गरीबी रेखा एवं उपभोग टोकरी की पुनर्समीक्षा कर अधिक यथार्थवादी गरीबी मापन पद्धति विकसित करना था।
5. MPI क्या है?
MPI (Multidimensional Poverty Index) स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के आधार पर बहुआयामी गरीबी का आकलन करता है।
6. HDI और MPI में क्या अंतर है?
HDI मानव विकास का सूचकांक है, जबकि MPI बहुआयामी गरीबी का सूचकांक है।
7. PPP का उपयोग क्यों किया जाता है?
PPP (Purchasing Power Parity) विभिन्न देशों की वास्तविक क्रय-शक्ति की तुलना करने के लिए उपयोग किया जाता है।
8. UPSC में गरीबी मापन से कौन-कौन से विषय महत्वपूर्ण हैं?
UPSC में Poverty Line, Lakdawala Committee, Tendulkar Committee, Rangarajan Committee, World Bank Poverty Line, PPP, MPI और HDI सबसे महत्वपूर्ण विषय हैं।


